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- नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर में न्यूनतम तापमान जीरो डिग्री से ऊपर चला गया, जबकि पहलगाम हिल स्टेशन में शुक्रवार को यह जीरो डिग्री से नीचे रहा। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर शहर में न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में माइनस 4.5 और पहलगाम में माइनस 1.6 डिग्री रहा।वहीं, जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, कटरा में 9.5, बटोटे में 6.1, बनिहाल में 3.8 और भद्रवाह में 2.6 डिग्री दर्ज किया गया है। गुरुवार को श्रीनगर में अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में 4 और पहलगाम में 9 डिग्री सेल्सियस था। यह बताता है कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर कम हो रहा है, जो 40 दिन लंबे ‘चिल्लई कलां’ के दौरान एक आम बात है, जो 21 दिसंबर को शुरू हुआ और 30 जनवरी को खत्म होगा।इस भीषण ठंड के मौसम में, घाटी में ज्यादातर पानी के स्रोत आंशिक या पूरी तरह से जम जाते हैं, जिससे नदियों और झीलों में नाव चलाना मुश्किल हो जाता है। लोगों को ठंड से बचने के लिए ऊनी कपड़ों की कई परतें पहननी पड़ती हैं। इसी वजह से, ‘फेरहन’ नाम का ऊनी ओवर गारमेंट कश्मीर में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला सर्दियों का पहनावा है।ज्यादातर कश्मीरी लोग फेरहन के नीचे एक मिट्टी का बर्तन रखते हैं, जिसमें जलते हुए कोयले होते हैं, जिसे एक सुंदर ढंग से बनी हुई बेंत की टोकरी में रखा जाता है। इसे ‘कांगड़ी’ कहा जाता है और यह सदियों से कश्मीर की संस्कृति का हिस्सा बन गया है।नए साल पर बड़ी संख्या में लोग गुलमर्ग, श्रीनगर और पहलगाम पहुंचे हैं, जबकि होटल मालिक और टूर एंड ट्रेवल ऑपरेटर्स का कहना है कि बुकिंग अभी भी बढ़ रही है। 22 अप्रैल के आतंकवादी हमले की वजह से कश्मीर के टूरिज्म इंडस्ट्री को नुकसान हुआ है। हालांकि, अब स्थिति बेहतर है। साल के आखिर में टूरिस्टों के आने से पता चलता है कि 2026 उन लोगों के लिए एक बेहतर और खुशहाल साल होगा जो अपनी रोजी-रोटी के लिए इस इंडस्ट्री पर निर्भर हैं।
- नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने लाल किला विस्फोट मामले में दो आरोपियों की एनआईए हिरासत शुक्रवार को बढ़ा दी।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने जांच एजेंसी को आरोपी यासिर अहमद डार से दस और दिनों तक हिरासत में पूछताछ करने की अनुमति दी, जबकि दूसरे आरोपी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला से आठ और दिनों तक पूछताछ की जायेगी।मीडियाकर्मियों को कार्यवाही को कवर करने से रोक दिया गया था।राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच के अनुसार, उमर-उन-नबी 10 नवंबर को विस्फोटक से भरी कार चला रहा था और वह इस आतंकवादी हमले का कथित षड्यंत्रकारी था। इस घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी।एनआईए ने डॉ. मल्ला को नौ दिसंबर को दिल्ली में गिरफ्तार किया था और उसे साजिश का मुख्य आरोपी बताया।एनआईए की जांच के अनुसार, नसीर ने उमर-उन-नबी को सहायता प्रदान करके जानबूझकर उसे शरण दी थी। एजेंसी ने नौ दिसंबर को पहले ही बताया था कि उस पर आतंकवादी हमले से संबंधित सबूतों को नष्ट करने का भी आरोप है।एनआईए ने 18 दिसंबर को इस मामले में नौवें आरोपी डार को गिरफ्तार किया। वह जम्मू-कश्मीर का निवासी है और कथित तौर पर उमर-उन-नबी का करीबी सहयोगी है। एनआईए ने इस मामले में डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राथेर, डॉ. शाहीन सईद समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है।
- नई दिल्ली। एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभर रहे बिहार के वैभव सूर्यवंशी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। पिछले एक साल में वैभव सूर्यवंशी ने हर फॉर्मेट में देश-विदेश में अपनी बल्लेबाजी से दुनियाभर के क्रिकेट फैंस को हैरान किया है। उनकी असाधारण बल्लेबाजी क्षमता और प्रदर्शन को देखते हुए ही उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया।सम्मान समारोह की वजह से वैभव सूर्यवंशी दिल्ली में हैं। दिल्ली में होने के कारण वे रांची में विजय हजारे ट्रॉफी में मणिपुर के खिलाफ खेले जा रहे मैच में बिहार टीम का हिस्सा नहीं हैं। वैभव सूर्यवंशी ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के पहले मैच में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 84 गेंदों पर 190 रन की पारी खेली थी। इस पारी में 16 चौके और 15 छक्के शामिल थे।वैभव के लिए साल 2025 स्वर्णिम रहा है। इसकी शुरुआत आईपीएल 2025 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए गुजरात टाइटंस के खिलाफ शतक लगाने से हुई थी। वैभव ने 35 गेंद पर शतक लगाते हुए लीग में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। आईपीएल 2025 के 7 मैचों में उन्होंने 252 रन बनाए थे। इसके अलावा वैभव ने हाल ही में अंडर-19 एशिया कप में शतक लगाया था। वैभव यूथ वनडे में भी शतक लगा चुके हैं।26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर वीरता, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे क्षेत्रों में असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर नौ जनवरी 2022 को उनके पुत्रों साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
- नयी दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ‘जीवन सुगमता’ को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है इसलिए उसका सुधार अभियान आने वाले समय में और अधिक उत्साह और दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा अपनी विभिन्न सुधार पहलों पर किए गए कई पोस्ट के संदर्भ में यह टिप्पणी की।मोदी ने कहा, ‘‘हमारी सरकार जीवन सुगमता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और नीचे दिए गए लेख में हमने इस दिशा में किए गए कार्यों के उदाहरण दिए हैं। आने वाले समय में हमारी सुधार यात्रा और भी अधिक उत्साह के साथ जारी रहेगी।’’हैशटैग ‘‘रिफॉर्म इन एक्शन और हैशटैग गुड गवर्नेंस’’ के साथ केंद्र सरकार ने अपने कई पोस्ट में कहा कि किसी भी सुधार की असली कसौटी यह होती है कि वह लोगों का बोझ कितना कम करता है। वर्ष 2025 में शासन व्यवस्था में एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिला, जहां सुधार जटिलता के बजाय परिणामों पर केंद्रित रहे।‘माई जीओवी इंडिया’ पर किए गए पोस्ट में बताया गया है कि सरल कर कानूनों, तेजी से विवाद निपटान, आधुनिक श्रम संहिताओं और कुछ नियमों या कानूनों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से बाहर रखकर सिर्फ उनके अनुपालन पर जोर देने से नागरिकों और व्यवसायों, दोनों के लिए प्रक्रियाएं आसान हुई हैं। भरोसे, पूर्वानुमेयता और दीर्घकालिक विकास पर जोर दिया गया है, जिससे यह दिखता है कि अच्छी तरह तैयार की गई नीतियां किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी को सहज बना सकती हैं।पोस्ट में कहा गया है कि करोड़ों भारतीयों के लिए कर राहत अब वास्तविकता बन गई है। अब 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर लगता है। मध्यम वर्गीय परिवार अब अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा अपने पास रख पा रहे हैं, जिससे उन्हें खर्च, बचत और निवेश करने के साथ अधिक आत्मविश्वास मिला है।पोस्ट में कहा गया कि आयकर अधिनियम, 2025 ने अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाया है और प्रत्यक्ष कर प्रणाली में स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाई है, जिससे यह करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल और वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनी है।सरकार ने बताया कि छोटे व्यवसाय अब लाभ खोने के डर के बिना विस्तार कर सकते हैं। निवेश और टर्नओवर की बढ़ी हुई सीमाओं से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को ऋण और कर प्रोत्साहनों का लाभ बनाए रखते हुए आगे बढ़ने का अवसर मिला है। इससे व्यवसायों का विस्तार, अधिक रोजगार सृजन और स्थानीय उद्यमों को मजबूती मिल रही है।ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार ने कहा कि अब यह केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि परिसंपत्ति का निर्माण भी कर रहा है। सुनिश्चित रोजगार की अवधि बढ़ने और गांवों के बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने से ग्रामीण श्रमिक स्थायी परिसंपत्ति बना रहे हैं, जो समुदायों और आजीविका को सशक्त करती हैं।सरकार ने यह भी बताया कि श्रमिकों को अब दर्जनों कानूनों से नहीं जूझना पड़ता क्योंकि 29 श्रम कानूनों को चार सरल संहिताओं में समाहित किया गया है, जो वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा को कवर करती हैं।इन सुधारों से अधिकार अधिक स्पष्ट हुए हैं, अनुपालन आसान हुआ है और महिलाओं को मातृत्व तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े सुनिश्चित लाभ मिले हैं।सरकार ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को भी व्यवसायों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए सरल बनाया गया है। सरलीकृत कर स्लैब, आसान पंजीकरण, स्वचालित प्रक्रियाएं और तेज रिफंड के जरिए अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार व्यापार सुगमता को बेहतर बना रहे हैं।इसका प्रभाव दिवाली पर रिकॉर्ड बिक्री (6.05 लाख करोड़ रुपये) और पिछले एक दशक में सबसे मजबूत नवरात्रि खरीदारी के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।पोस्ट में यह भी कहा गया कि अब व्यवसाय अपने उत्पादों को तेजी से बाजार में ला सकते हैं।गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के युक्तिकरण से भारतीय निर्माताओं के अनुपालन खर्च कम हुए हैं, दक्षता बढ़ी है और वैश्विक बाजारों में उनकी स्थिति मजबूत हुई है। सरकार ने बताया कि छोटी कंपनियों की परिभाषा का विस्तार किए जाने से अनुपालन बोझ और लागत में कमी आई है, जिससे 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले उद्यम नवाचार और विस्तार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।
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नई दिल्ली। नया रेलवे पैसेंजर फीस स्ट्रक्चर शुक्रवार को लागू हो गया है। इसमें स्लीपर और फर्स्ट क्लास, साधारण क्लास में उपनगरीय क्षेत्रों से बाहर की यात्राओं के लिए किराए में एक पैसा प्रति किलोमीटर का इजाफा किया गया है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य स्थिरता के साथ अफोर्डेबिलिटी को संतुलित करना है।
रेलवे ने साधारण नॉन-एसी (गैर-उपनगरीय) सेवाओं के लिए सेकंड क्लास ऑर्डिनरी, स्लीपर क्लास ऑर्डिनरी और फर्स्ट क्लास ऑर्डिनरी में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से बढ़ाया है।सेकंड क्लास ऑर्डिनरी का किराया 215 किलोमीटर तक की यात्राओं के लिए अपरिवर्तित रहेगा, जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।216 किलोमीटर से 750 किलोमीटर की दूरी के लिए किराए में 5 रुपए की वृद्धि की गई है। 751 किलोमीटर से 1,250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपए की वृद्धि की गई है। 1,251 किलोमीटर से 1,750 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपए की वृद्धि की गई है, और 1,751 किमी से 2,250 किमी की दूरी के लिए 20 रुपए की वृद्धि की गई है।मंत्रालय ने कहा कि उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों पर, जिसमें उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूट शामिल हैं, कोई असर नहीं पड़ेगा। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी क्लास, जिसमें स्लीपर, फर्स्ट क्लास, एसी चेयर कार, एसी 3-टियर, एसी 2-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं, सभी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है। बयान में कहा गया है कि लंबी यात्राओं के लिए, जैसे कि 500 किलोमीटर की नॉन-एसी मेल या एक्सप्रेस यात्रा, पर लगभग 10 रुपए अधिक लगेंगे।तेजस राजधानी, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, हमसफर, अमृत भारत, तेजस, महामना, गतिमान, अंत्योदय, गरीब रथ, जन शताब्दी, युवा एक्सप्रेस, नमो भारत रैपिड रेल और सामान्य नॉन-सबअर्बन सेवाओं (जहां लागू हो, एस मेमू को छोड़कर) सहित प्रमुख ट्रेन सेवाओं के मौजूदा बेसिक किराए को अप्रूव्ड क्लास-वाइज बेसिक किराए में बढ़ोतरी के हिसाब से रिवाइज किया गया है।रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज और अन्य चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि जीएसटी की वैघता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, और किराए को मौजूदा नियमों के अनुसार राउंड ऑफ किया जाता रहेगा। संशोधित किराए सिर्फ 26 दिसंबर, 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होंगे और पहले से बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। मंत्रालय ने कहा कि नए रेट दिखाने के लिए स्टेशन किराए की लिस्ट को अपडेट किया जाएगा। - नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 बच्चों को कला, संस्कृति, खेल और इनोवेशन समेत अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी असाधारण उपलब्धियों और योगदान को पहचान देते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया। राष्ट्रपति मुर्मु ने पुरस्कार पाने वालों को अपना आशीर्वाद भी दिया।पुरस्कार पाने वालों में से एक छात्र ने बताया कि उन्हें यह पुरस्कार इनोवेशन कैटेगरी में दो इनोवेशन के लिए मिला है। मैंने दो एआई सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन बनाए हैं, जो लकवा से ग्रस्त मरीजों की उंगलियों और हाथों के मूवमेंट में मदद करते हैं। इनको भारत सरकार ने पेटेंट और कॉपीराइट भी किया है।पुरस्कार लेने वालों में एक छोटा बच्चा ऐसा भी है, जिसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भारतीय सेना के खानपान का ख्याल किया था। राष्ट्रपति से पुरस्कार लेने के बाद उसने कहा, “यह पुरस्कार पाकर मैं बहुत खुश हूं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे यह पुरस्कार मिलेगा और मैं राष्ट्रपति से मिलूंगा।”पुरस्कार विजेता ने बताया कि जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू हुआ था और सीमापार से पाकिस्तान के ड्रोन भी आ रहे थे, तब भारतीय फौज भी उनके खेतों के पास भी तैनात थी। उसने कहा, “तब मैंने उनकी सेवा करने के बारे में सोचा। मैं उनके लिए हर दिन मिठाई, चाय, छाछ और बर्फ लाता था।”इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “सभी बच्चों ने अपने परिवारों, समाज और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। इसलिए, मैं इन बच्चों के परिवार के सदस्यों को भी बधाई देती हूं। इतने अच्छे और होनहार बच्चों के लिए पुरस्कार समारोह आयोजित करने के लिए मैं महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और उनकी पूरी टीम की सराहना करती हूं।”इस दिन के महत्व के बारे में बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को सिख धर्म के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटों, साहिबजादों के साहस और बलिदान का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश में पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5 महत्वपूर्ण डिजिटल सुधारों की शुरुआत की। इन पहलों का लक्ष्य सरकारी कामकाज को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाना है।
इन पांचों डिजिटल पहलों का उद्घाटन केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित ‘सुशासन प्रथाएं 2025’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान किया। इन सुधारों में पूर्व सैनिक आरक्षण संकलन, एआई आधारित भर्ती टूल, ई-एचआरएमएस 2.0 मोबाइल ऐप, आईजीओटी एआई प्लेटफॉर्म और कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 शामिल हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुशासन केवल एक विचार नहीं, बल्कि रोजमर्रा के प्रशासन की जिम्मेदारी है, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला सुशासन दिवस पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती का दिन है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और जनहित आधारित शासन की मजबूत नींव रखी।मंत्री ने कहा कि सुशासन की अवधारणा पहले भी मौजूद थी, लेकिन वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे सही मायनों में लागू किया गया। यह ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के मंत्र पर आधारित है। उन्होंने बताया कि ये पांचों डिजिटल पहलें प्रशासन की मूल प्रक्रियाओं को मजबूत करने, विभिन्न हितधारकों को सशक्त बनाने और सरकारी कर्मचारियों को बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं।पूर्व सैनिक आरक्षण संकलन के तहत केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों को मिलने वाले आरक्षण से जुड़ी सभी गाइडलाइनों को एक ही स्थान पर सरल और अपडेटेड रूप में उपलब्ध कराया गया है, जिससे नियमों में स्पष्टता आएगी और लाभ समय पर मिल सकेगा।डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि एआई आधारित भर्ती नियम निर्माण टूल सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। यह टूल सवाल-जवाब के माध्यम से उपयुक्त भर्ती प्रक्रिया सुझाएगा और नियमों का ड्राफ्ट स्वतः तैयार करेगा, जिससे देरी और त्रुटियों में कमी आएगी।ई-एचआरएमएस 2.0 मोबाइल ऐप, जो एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, सरकारी कर्मचारियों को उनके सेवा रिकॉर्ड, प्रमोशन, ट्रांसफर, प्रशिक्षण और रिटायरमेंट से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर ही उपलब्ध कराएगा। इससे कागजी कामकाज कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म में एआई सारथी, एआई ट्यूटर और विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल जैसे नए एआई फीचर्स जोड़े गए हैं, जो कर्मचारियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सीखने और कौशल विकास में मदद करेंगे। कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 में एआर/वीआर, गेमिफिकेशन और इंटरैक्टिव सिमुलेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल लर्निंग सामग्री तैयार की जाएगी, जिससे सुधारों और सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी तेजी से देशभर में पहुंचेगी।मंत्री ने कहा कि ये सभी पहलें शासन सुधार के लिए एक सुसंगत और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जो तकनीक के माध्यम से संस्थानों को मजबूत करती हैं और नागरिकों व सरकारी कर्मचारियों दोनों को परिवर्तन के केंद्र में रखती हैं। -
नयी दिल्ली. सरकार ने पांच साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद चार श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो 2026 में पूर्ण रूप से लागू हो जाएंगी। ये नियम देश के सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। श्रम मंत्रालय ने 2026 में ईपीएफओ 3.0 संस्करण लाने की भी योजना बनाई है, जो कर्मचारियों की भविष्य निधि की तेजी से निकासी सुनिश्चित करेगा एवं कर्मचारियों की पेंशन योजना 1995 के तहत पेंशन निर्धारण तथा कर्मचारियों की जमाकर्ता-सम्बंधित बीमा योजना 1976 के तहत बीमा दावों को भी सुविधाजनक बनाएगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि 2025 वास्तव में भारत के श्रम एवं रोजगार परिवेश के लिए परिवर्तनकारी वर्ष रहा जिसे ऐसे सुधारों ने चिह्नित किया जो श्रमिकों को शासन के केंद्र में रखते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष की एक प्रमुख उपलब्धि 21 नवंबर 2025 से चार श्रम संहिताओं का लागू होना रही। इससे 29 श्रम कानूनों को आधुनिक, समेकित एवं सरल ढांचे में परिवर्तित किया गया। मंत्री ने कहा, ‘‘ 2026 में ध्यान प्रौद्योगिकी-संचालित सेवा वितरण तथा प्रभावी भौतिक क्रियान्वयन के माध्यम से सुधारों को और बढ़ाने पर रहेगा। इसके साथ ही श्रम संहिताओं के तहत नियमों का कार्यान्वयन भी समान रूप से महत्वपूर्ण होगा।'' मांडविया ने कहा, ‘‘ एक बार लागू होने पर ये नियम कार्यस्थल स्तर पर विधायी ढांचे को व्यावहारिक परिणामों में बदल देंगे जिससे कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं दोनों के लिए अधिक स्पष्टता, समानता एवं पूर्वानुमेयता सुनिश्चित होगी। इससे भारत के आधुनिक, औपचारिक तथा समावेशी श्रम बाजार की ओर बदलाव तेजी से होगा।'' उन्होंने बताया कि ये नियम भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में सबसे व्यापक सुधार का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनका उद्देश्य कर्मचारियों की भलाई सुनिश्चित करना, और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, जिसकी परियोजना लागत लगभग एक लाख करोड़ रुपये है, अगले दो वर्ष में 3.5 करोड़ नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने बताया कि निरंतर नीतिगत ध्यान के परिणामस्वरूप भारत में सामाजिक सुरक्षा एक दशक पहले 19 प्रतिशत लोगों को मिलती थी जो अब 64 प्रतिशत से अधिक लोगों को मिल रही है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसे अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ द्वारा भी मान्यता दी गई है। मांडविया ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के कार्य संचालन में महत्वपूर्ण सुधार, विशेषकर निकासी प्रक्रियाओं के सरलीकरण ने सदस्यों के जीवन को आसान बनाया है और करोड़ों सदस्यों के लिए उनकी बचत तक तेज एवं सुगम पहुंच सुनिश्चित की है। मंत्री ने साथ ही कहा कि श्रम के लिए भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (जिसमें ई-श्रम पोर्टल और राष्ट्रीय कैरियर सेवा प्लेटफॉर्म शामिल हैं) ने अभूतपूर्व स्तर हासिल कर लिया है जिससे सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार सेवाओं की पहुंच मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इन पहलों ने समावेशिता तथा श्रमिकों को बड़े पैमाने पर सेवाएं देने में प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी प्राप्त की है। ये सुधार मिलकर भविष्य के तैयार कार्यबल और विकसित भारत के लिए मजबूत आधार बनाते हैं।
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मुंबई. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए दंत स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी के दौरान उन्हें दो अक्ल दाढ़ निकलवानी पड़ी थी।
शुक्ला ने कहा कि हालांकि अंतरिक्ष यात्रियों को आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है लेकिन वे अंतरिक्ष यान पर दांतों से जुड़ी सर्जरी नहीं कर सकते। उन्होंने बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसआई) में यह बात कही और इस दौरान ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप उनके साथ थे। ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप को देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान' के लिए चुना गया है। नायर ने बताया कि भारतीय वायु सेना के परीक्षण पायलट अंतरिक्ष यात्राओं के लिए स्वाभाविक पसंद क्यों हैं। वायु सेना के अधिकारी एवं टेस्ट पायलट, ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने इस वर्ष की शुरुआत में इसरो व नासा द्वारा समर्थित और एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित वाणिज्यिक अंतरिक्ष यान एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की। उन्होंने कहा, “आपके दांतों का स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। चयन प्रक्रिया के दौरान, कई (अंतरिक्ष यात्री बनने की इच्छा रखने वाले) लोगों ने अपने दांत निकलवाए।” शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में जाने के प्रशिक्षण के दौरान अक्ल दाढ़ निकाली जाती है।अंतरिक्ष यात्री ने कहा, “मैंने अपनी दो अक्ल दाढ़ निकलवाई हैं।” उन्होंने बताया कि नायर के तीन दांत निकलवाए गए हैं जबकि प्रताप के चार दाढ़ निकाले गए हैं। शुक्ला ने बताया कि गगनयान मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के कुशल पायलटों को मिशन के लिए मंजूरी मिलने से पहले कई मनोवैज्ञानिक और शारीरिक मूल्यांकन से गुजरना पड़ा। ग्रुप कैप्टन नायर ने बताया कि 2019 के अंत तक उन्हें रूस भेजा गया, जहां रूसी चिकित्सकों ने भी उनका चिकित्सा मूल्यांकन किया। ग्रुप कैप्टन प्रताप ने अंतरिक्ष मिशन के लिए टेस्ट पायलटों के चयन के बारे में बताते हुए कहा कि जिन देशों के पास शक्तिशाली अंतरिक्ष कार्यक्रम हैं और जिन्होंने स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा है उन सभी ने इसी तरह का रास्ता अपनाया है। अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने वाले देशों में अमेरिका, सोवियत संघ, रूस और चीन शामिल हैं।उन्होंने कहा कि टेस्ट पायलट स्वयं ही एक विशेष समूह होते हैं, जो इस क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रताप ने बताया कि वायु सेना के हर साल 200 जवान टेस्ट पायलट बनने के लिए आवेदन करते हैं और उनमें से केवल पांच का चयन होता है। उन्होंने बताया कि गगनयान कार्यक्रम के लिए वायु सेना ने 75 टेस्ट पायलटों पर विचार किया, जिनमें से केवल चार का चयन हुआ। अंतरिक्ष यात्री ने बताया, “हमें वास्तव में अंतरिक्ष में भेजे जाने के लिए नहीं चुना गया बल्कि हमें जमीन पर रोजाना काम करने, डिजाइनरों के साथ मिलकर काम करने और उस सिस्टम को विकसित करने के लिए चुना गया है, जिसके लिए हमें औपचारिक प्रशिक्षण दिया गया है।” प्रताप ने कहा, ‘‘टेस्ट पायलटों का चयन करना और उन्हें सीधे अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करना बहुत आसान है क्योंकि हमारा 70-80 प्रतिशत प्रशिक्षण अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण कार्यक्रम के समान है।” -
नई दिल्ली। गुजरात के कच्छ में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई है, जो सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में था। झटके महसूस होने पर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। फिलहाल, किसी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भूकंप को लेकर जानकारी शेयर की। एनसीएस के अनुसार, यह 4.4 तीव्रता का भूकंप सुबह 4:30 बजे 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। भूकंप सतह के करीब होने की वजह से लोगों को कम तीव्रता के बावजूद झटके काफी महसूस हुए।बता दें कि गुजरात का कच्छ क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह भूकंपीय क्षेत्र-5 के अंतर्गत आता है। इस श्रेणी को भारत में सबसे खतरनाक और उच्च जोखिम वाला इलाका माना जाता है।इस हफ्ते में देश के अलग-अलग हिस्सों में कई जगह भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। गुरुवार को असम के उदलगुरी में भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, यह 3.0 तीव्रता का भूकंप था, जिसका केंद्र 19 किलोमीटर की गहराई में था।बुधवार को बंगाल की खाड़ी, राजस्थान और सिक्किम के हिस्सों में भूकंप दर्ज किया गया। बंगाल की खाड़ी में भूकंप की तीव्रता 4.2 थी, जबकि सिक्किम के गंगटोक में 3.3 और मंगन में 3.0 तीव्रता का भूकंप आया। राजस्थान के जालौर में 5 किलोमीटर की गहराई में 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ। इससे पहले, 23 दिसंबर को महाराष्ट्र के रायगढ़ में 2.6 तीव्रता का भूकंप आया।( -
नयी दिल्ली. केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि सुशासन एक अमूर्त आदर्श नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवाओं पर आधारित एक दैनिक प्रशासनिक जिम्मेदारी है। सिंह ने यहां सुशासन प्रथाओं पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद मुख्य शासन प्रक्रियाओं को मजबूत करने और तेजी से विकसित हो रहे प्रशासनिक परिदृश्य की चुनौतियों के लिए लोक सेवकों को तैयार करने के उद्देश्य से पांच प्रमुख पहलों की भी शुरुआत की। मंत्री ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और हितधारकों को 25 दिसंबर को प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले सुशासन दिवस के मौके पर संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन एक अमूर्त आदर्श नहीं बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के वितरण पर आधारित एक दैनिक प्रशासनिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस का विशेष महत्व है क्योंकि देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की अवधारणा को संस्थागत रूप दिया और लोक आधारित शासन की नींव रखी। सिंह ने कहा कि सुशासन का विचार पहले भी रखा गया था, लेकिन 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन'' के मंत्र के मार्गदर्शन में इसे अक्षरशः और पूरी भावना के साथ लागू करने की शुरुआत की गई। मंत्री ने कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) इस सुशासन दिवस पर पांच प्रमुख पहल शुरू कर रहा है, जिनका उद्देश्य मुख्य शासन प्रक्रियाओं को मजबूत करना, प्रमुख हितधारक समूहों का समर्थन करना और तेजी से विकसित हो रहे प्रशासनिक परिदृश्य की चुनौतियों के लिए लोक सेवकों को तैयार करना है। पहले डिजिटल सुधार में केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का एक संकलन शामिल है, जिसमें सभी मौजूदा निर्देशों को एक ही, अद्यतन और उपयोगकर्ता अनुकूल संदर्भ में समेकित किया गया है। दूसरी पहल में एआई-संचालित भर्ती साधन शामिल है, जिसे भर्ती नियम निर्माण, संशोधन एवं निगरानी प्रणाली (आरआरएफएएमएस) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है। तीसरी पहल में ई-एचआरएमएस 2.0 मोबाइल फोन एप्लिकेशन की शुरुआत की गई है जो सरकारी कर्मचारियों को प्रमुख मानव संसाधन सेवाएं सीधे उपलब्ध कराता है। मिशन कर्मयोगी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित, ई-एचआरएमएस 2.0 सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति, तबादले, प्रतिनियुक्ति, प्रशिक्षण और सेवानिवृत्ति जैसी मानव संसाधन प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है, साथ ही एसपीएआरआरडब्ल्यू पीएफएमएस और भविष्य जैसे मंचों से भी जुड़ा हुआ है। चौथी पहल कर्मयोगी मंच पर नयी कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पांचवीं पहल कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 की शुरुआत आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए की गई है। -
लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के निवर्तमान अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने रविवार को कहा कि पार्टी का सदस्य होने का मतलब राष्ट्र को सबसे पहले रखना है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के सभी सदस्य जनसेवा के संकल्प के साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।
भूपेंद्र सिंह चौधरी ने यहां भाजपा के नये प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पंकज चौधरी के नाम की घोषणा के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "संगठनात्मक राजनीति में, ऐसी स्थिति लगातार आती हैं, जहां हम खुद को अपनी भूमिकाएं बदलते हुए देखते हैं। इन बदलावों का समय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। भाजपा जैसी अनुशासित राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता के तौर पर, इस तरह की भावना हम सभी में रची-बसी है।" उन्होंने कहा, “जैसे ही हमें जानकारी मिलती है, हमारी आराम करने की क्षमता खत्म हो जाती है और अगली भूमिका के लिए पहले से योजना बनाकर, हम सभी कार्यकर्ता समर्पण और तैयारी की भावना के साथ आगे बढ़ते हैं।” भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में, सभी ने मिलकर कई चुनाव लड़े हैं और कई अभियानों में हिस्सा लिया है। उन्होंने कहा, “महिला शक्ति वंदन योजना से लेकर कई अन्य संगठनात्मक कार्यों तक, हम सभी ने उत्साह के साथ काम किया है। पिछले कुछ सालों में, चाहे वह सदस्यता अभियान हो या अन्य अभियान, हमने उन्हें पूरी लगन के साथ सफलतापूर्वक पूरा किया है।” भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन - 'सबका साथ, सबका विकास' को अपनाया है। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस अभियान के तहत इतिहास रचा है। पहली बार, भाजपा ने 2.5 करोड़ से ज़्यादा सदस्य बनाए हैं।" इस मौके पर उप्र भाजपा के पूर्व प्रमुख और भाजपा राज्य चुनाव अधिकारी महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि इस बार उत्तर प्रदेश में 2.60 करोड़ प्राथमिक सदस्य बनाए गए हैं और यह 2019 की तुलना में 74 लाख ज़्यादा है। उन्होंने यह भी कहा कि पंकज चौधरी उप्र भाजपा के 17वें अध्यक्ष हैं। -
नांदेड़. महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में बृहस्पतिवार सुबह दो अलग-अलग स्थानों पर एक किसान, उसकी पत्नी और उसके दो बेटों के शव मिले। पुलिस को संदेह है कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुबह करीब आठ बजे मुदखेड़ तहसील के ज्वाला मुरार गांव स्थित अपने घर में एक खाट पर रमेश सोनाजी लखे (51) और उनकी पत्नी राधाबाई लखे (45) के शव मिले। अधिकारी ने बताया कि उनके बेटों उमेश (25) और बजरंग (23) के शव बाद में पास की रेलवे लाइन पर मिले। उन्होंने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे चलती ट्रेन के सामने कूद गए थे। पुलिस निरीक्षक दत्तात्रेय मंथले ने पत्रकारों को बताया, ‘‘माता-पिता अपने घर के अंदर मृत पाए गए जबकि बेटों ने रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या कर ली। हमने फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की एक टीम को सबूत इकट्ठा करने के लिए कहा है। पूरी तकनीकी जांच और पोस्टमार्टम के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।'' पुलिस ने कहा कि उनकी मौत आत्महत्या प्रतीत होती है, लेकिन वास्तविक परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। अधिकारी ने बताया कि यह परिवार छोटे खेतिहर समुदाय से आता था। लेकिन अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि क्या यह कदम उन्होंने आर्थिक तंगी या घरेलू संकट के कारण उठाया। पड़ोसियों ने लखें परिवार को मेहनती बताया। नांदेड ग्रामीण पुलिस परिवार के परिजनों के बयान दर्ज कर रही है और परिवार द्वारा छोड़े गए किसी भी नोट या अंतिम संदेशों की जांच कर रही है।
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वाराणसी (उप्र). वाराणसी के प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में शीतकालीन छुट्टियों और आंग्ल नववर्ष पर श्रद्धांलुओं की भारी भीड़ आने की संभावना को देखते हुए बुधवार से प्रोटोकॉल दर्शन और स्पर्श दर्शन पर रोक लगा दी गयी है। एक पदाधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्यकार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि शीतकालीन छुट्टियों और आंग्ल नव वर्ष के कारण मंदिर में श्रद्धांलुओं की भारी भीड़ के चलते 24 दिसंबर से प्रोटोकॉल दर्शन और स्पर्श दर्शन पर रोक लगा दी गयी है। मंदिर में श्रद्धालुओं को लाइन लगाकर बाबा का झांकी दर्शन कराया जा रहा है। मिश्र ने कहा कि मंदिर में सुविधा और सुरक्षा के साथ सभी को दर्शन प्राप्त हो सकें, इसके लिए सभी श्रद्धालु मंदिर न्यास के इस निर्णय का सहयोग करें।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने बृहस्पतिवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्मारक ‘सदैव अटल' पर आयोजित प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया और उनकी 101वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सहयोगी जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, कई अन्य मंत्री, सांसद, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन भी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। मोदी ने कहा, ‘‘पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर आज दिल्ली में उनके स्मृति स्थल ‘सदैव अटल' जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का सौभाग्य मिला।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जनसेवा और राष्ट्रसेवा को समर्पित उनका जीवन देशवासियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।'' प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि वाजपेयी का व्यक्तित्व, कार्य और नेतृत्व राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए हमेशा मार्गदर्शक रहेंगे। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अपना पूरा जीवन सुशासन और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘एक प्रखर वक्ता के साथ-साथ ओजस्वी कवि के रूप में भी वह सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनका व्यक्तित्व, कृतित्व और नेतृत्व देश के चहुंमुखी विकास के लिए पथ-प्रदर्शक बना रहेगा।'' वाजपेयी का जन्म 1924 में ग्वालियर (मध्यप्रदेश) में हुआ और उनका निधन 16 अगस्त 2018 को नयी दिल्ली में हुआ। सरकार उनकी जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाती है। भाजपा ने इस अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित कर वाजपेयी की विरासत को याद किया। भाजपा के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और संगठन के नेता इन कार्यक्रमों में शामिल हुए। भारत के 13वें प्रधानमंत्री वाजपेयी ने 1996 से 2004 तक तीन कार्यकाल में देश की सेवा की।
भारत के आर्थिक विकास में योगदान के लिए उन्हें याद किया जाता है। उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में ‘ऑपरेशन विजय' (कारगिल युद्ध) लड़ा गया और भारत ने इसे जीता भी। उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया। वाजपेयी का चार दशक लंबा संसदीय करियर गौरवशाली रहा; वह नौ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुने गए। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर प्रधानमंत्री बनने वाले वाजपेयी को 1992 में पद्म विभूषण और 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वाजपेयी ने लोकतांत्रिक आदर्शों, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक समानता का समर्थन किया। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों का निर्माण, दूरसंचार का विस्तार और बुनियादी ढांचे में सुधार समेत सुशासन और आर्थिक विकास को प्राथमिकता दी। -
इंदौर. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर इंदौर नगर निगम ने बृहस्पतिवार को शहर की एक प्रमुख सड़क का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर करने का फैसला किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने संवाददाताओं को बताया कि महापौर परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से एबी रोड (आगरा-बॉम्बे रोड) का नाम बदलकर ‘अटल बिहारी मार्ग' करने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा,'‘वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के तौर पर देश भर में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया था जिससे ग्रामीण इलाकों की सड़कें मुख्य मार्गों से जुड़ी थीं। उनके इस ऐतिहासिक योगदान के सम्मान में हमने फैसला किया है कि शहर का एबी रोड अब अटल बिहारी मार्ग के नाम से जाना जाएगा।'' एबी रोड, इंदौर की एक मुख्य बसाहट का वह व्यस्त मार्ग है जो कई साल पहले आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा था। अब यह राष्ट्रीय राजमार्ग शहर के बाहरी हिस्से से गुजरता है। महापौर ने कहा,‘‘हम केंद्र सरकार से निवेदन करेंगे कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम भी वाजपेयी के नाम पर रखा जाए।'' मध्यप्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्मे वाजपेयी की जयंती ‘सुशासन दिवस' के रूप में मनाई जाती है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में हुए सड़क हादसे में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। पुलिस के अनुसार, बृहस्पतिवार तड़के चित्रदुर्ग जिले में तेज रफ्तार ट्रक से टक्कर के बाद एक बस में आग लग जाने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई, इसमें से अधिकतर लोग आग में जिंदा जल गए। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में दुर्घटना में लोगों की मौत से गहरा दुःख हुआ है। अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।'' पोस्ट में कहा गया है, ‘‘प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। हादसे में घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।
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चित्रदुर्ग (कर्नाटक). कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में बृहस्पतिवार तड़के तेज रफ्तार ट्रक के एक ‘लग्जरी स्लीपर' बस से टकराने के बाद बस में आग लग गई जिससे नौ लोगों की मौत हो गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी। पूर्व जोन के पुलिस महानिरीक्षक रविकांत गौड़ा ने बताया कि गोकर्ण जा रही बस में 32 यात्री सवार थे और ट्रक से टकराने के बाद बस आग की लपटों में घिर गई जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई, इनमें से अधिकतर लोग वाहन के अंदर ही जल गए। गौड़ा ने पत्रकारों को बताया कि यह दुर्घटना तब हुई जब एक ट्रक डिवाडर को पार कर सामने से आ रही बस से टकरा गया। इस दुर्घटना में बस चालक और उसका सहायक बच गए लेकिन ट्रक चालक और उसके सहायक की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि घायलों को तुमकुरु जिले के शिरा स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गौड़ा ने बताया कि कई यात्रियों ने बस से कूदकर जान बचाई। टी दासराहल्ली से दांदेली जा रही एक अन्य बस, इस बस के पीछे थी और दुर्घटना में यह बस बाल-बाल बच गई। इस बस में 45 स्कूली बच्चे सवार थे। पुलिस ने कहा, ‘‘स्कूल के बच्चों को ले जा रही बस के चालक ने बस को दूसरी तरफ मोड़ दिया जिससे किसी को चोट नहीं आई।'' पुलिस ने बताया कि कम से कम दो यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और देश के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। बिहार से पांच बार के विधायक नवीन को हाल में भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। नवीन ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “आज मैंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी से शिष्टाचार मुलाकात की।” उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति का सहज व्यक्तित्व, राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट निष्ठा हम सभी के लिए लगातार प्रेरणास्रोत बनी हुई है।” नवीन ने पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से भी मुलाकात की और कहा कि उनका जीवन निःस्वार्थ जनसेवा का ऐसा उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू जी से शिष्टाचार भेंट कर उनका आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। उनका जीवन संवेदनशील नेतृत्व और निःस्वार्थ जनसेवा का ऐसा उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
- लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित बसंत कुंज योजना में निर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने परिसर में स्थापित महापुरुषों की भव्य प्रतिमाओं का अवलोकन किया और उन्हें नमन किया। उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद वंदे मातरम का सामूहिक गायन हुआ। प्रधानमंत्री ने भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और भाजपा व जनसंघ गलियारे का अवलोकन किया। इस गलियारे में भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की वैचारिक और राजनीतिक यात्रा को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।इसके पश्चात प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी गैलरी का भ्रमण किया, जहां उनके जीवन, विचार और संघर्ष से जुड़े चित्रों एवं प्रतीक चिह्नों को प्रदर्शित किया गया है। लखनऊ में निर्मित भव्य राष्ट्र प्रेरणा स्थल भारतीय राष्ट्रवाद की त्रयी- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी- के विचारों और अमूल्य योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का एक अनुपम प्रयास है।गौरतलब है कि वसंत कुंज स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल को कमल की आकृति में विकसित किया गया है। परिसर में राष्ट्रवाद के शिखर पुरुषों डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इन प्रतिमाओं का निर्माण विश्वविख्यात मूर्तिकार राम सुतार और मंटू राम आर्ट क्रिएशंस द्वारा किया गया है। प्रतिमाओं को फेसेड लाइटिंग और प्रोजेक्शन मैपिंग से आकर्षक रूप दिया गया है।परिसर में राष्ट्र नायकों को समर्पित एक संग्रहालय का भी निर्माण किया गया है। संग्रहालय की इंटरप्रिटेशन वॉल पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी म्यूरल आर्ट के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की यात्रा को दर्शाया गया है। संग्रहालय के कोर्टयार्ड में राष्ट्रीय भावना की प्रतीक भारत माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। राष्ट्र नायकों को समर्पित गैलरियां उनके जीवन, विचारधारा और संघर्षों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।इसके अलावा राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में सिंथेटिक ट्रैक, मेडिटेशन सेंटर, विपश्यना केंद्र, योग केंद्र, हेलीपैड और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। साथ ही यहां 3,000 की क्षमता वाला एम्फीथिएटर और लगभग 2 लाख लोगों की क्षमता वाला विशाल रैली स्थल भी बनाया गया है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल न केवल ऐतिहासिक स्मृति का केंद्र बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रीयता और राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार भी करेगा।
- नयी दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बृहस्पतिवार को कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने विचारधारा और मूल्यों पर आधारित राजनीति के प्रति अपनी ‘अटूट प्रतिबद्धता' के माध्यम से विकास एवं सुशासन के एक नए युग की नींव रखी तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनके इस दृष्टिकोण को साकार कर रहे हैं। यहां भाजपा मुख्यालय में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की 101वीं जयंती पर उनके व्यक्तित्व और योगदान को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद नवीन ने लोगों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री मोदी के भारत को एक विकसित देश बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए ‘मिलकर काम करने' का आग्रह किया। नवीन ने कहा, ‘‘अटल जी को यह हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।''इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद अरुण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया, राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयूख और पार्टी के कई अन्य नेता मौजूद रहे। वाजपेयी के जीवन और नीतियों पर प्रकाश डालते हुए नवीन ने कहा, ‘‘विचारधारा और मूल्यों पर आधारित राजनीति के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से अटल जी ने देश में विकास और सुशासन के एक नए युग की नींव रखी।'' उन्होंने कहा कि वाजपेयी उस चेतना के प्रतीक थे, जिसने लोकतंत्र को ‘शोर मचाने की नहीं, बल्कि संवाद की संस्कृति' सिखाई। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित विकसित भारत का लक्ष्य ‘हम सभी के मिलकर काम करने' से ही प्राप्त किया जा सकता है, जो अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कस्तूरबा नगर में एक अन्य कार्यक्रम के दौरान नवीन ने वाजपेयी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि दिवंगत दिग्गज नेता के सिद्धांतों की बदौलत ही वर्तमान में भाजपा ऊंचाइयों तक पहुंची है। ‘अटल स्मृति सम्मेलन' में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नवीन ने कहा कि वाजपेयी में दिखाई देने वाले आत्मविश्वास के स्तर की बराबरी कुछ ही नेता कर सकते हैं। भाजपा की दिल्ली इकाई ने वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर राजधानी भर में बृहस्पतिवार को विधानसभा स्तर पर इसी तरह के ‘अटल स्मृति सम्मेलन' आयोजित किए। कस्तूरबा नगर में नवीन के साथ भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, नयी दिल्ली के सांसद बांसुरी स्वराज, स्थानीय विधायक नीरज बसोया और पार्टी के अन्य नेता शामिल हुए।
- नयी दिल्ली । रेल मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को आधिकारिक तौर पर 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए साधारण श्रेणी के टिकट की कीमत में एक पैसा प्रति किलोमीटर तथा मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की गैर वातानुकूलित और सभी ट्रेनों की वातानुकूलित श्रेणियों के टिकट की कीमत में दो पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की अधिसूचना जारी की। मंत्रालय ने 21 दिसंबर को घोषणा की थी कि 26 दिसंबर से यात्री किराए में वृद्धि की जायेगी।यह एक साल में दूसरी बार है जब मंत्रालय ने यात्री रेल किरायों में संशोधन किया है। इससे पहले जुलाई में किराया में वृद्धि की गयी थी। अपने फैसले को सही ठहराते हुए मंत्रालय ने कहा कि किरायों को युक्तिसंगत बनाने का उद्देश्य यात्रियों की वहनीयता और परिचालन की स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करना है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘संशोधित किराया संरचना के तहत, उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसमें उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों मार्ग शामिल हैं। साधारण गैर एसी (गैर-उपनगरीय) सेवाओं के लिए, द्वितीय श्रेणी सामान्य, शयनयान श्रेणी सामान्य और प्रथम श्रेणी सामान्य में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से तर्कसंगत बनाया गया है।'' उसने कहा है,‘‘द्वितीय श्रेणी सामान्य में 215 किलोमीटर तक की यात्राओं के लिए किराए में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जिससे कम दूरी और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 216 किलोमीटर से 750 किलोमीटर तक की दूरी के लिए किराए में पांच रुपये की वृद्धि होगी। इससे अधिक दूरी की यात्राओं के लिए, वृद्धि चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी - 751 किलोमीटर से 1250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपये, 1251 किलोमीटर से 1750 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 15 रुपये और 1751 किलोमीटर से 2250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 20 रुपये।'' आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि तेजस राजधानी, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, हमसफर, अमृत भारत, तेजस, महामना, गतिमान, अंत्योदय, गरीब रथ, जन शताब्दी, युवा एक्सप्रेस, नमो भारत रैपिड रेल और सामान्य गैर-उपनगरीय सेवाओं (एसी मेमू/डेमू को छोड़कर, जहां लागू हो) सहित प्रमुख ट्रेन सेवाओं के मौजूदा मूल किराए को अनुमोदित वर्ग-वार मूल किराए के अनुरूप संशोधित किया गया है। इसमें कहा गया है, "संशोधित किराया केवल 26 दिसंबर, 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होगा। इस तिथि से पहले बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा, भले ही यात्रा प्रभावी तिथि के बाद की जाए।" .
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नई दिल्ली।‘ शुक्रवार, 26 दिसंबर को देशभर में राष्ट्रीय स्तर पर वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान करेंगी।
केंद्र सरकार के अनुसार, ये पुरस्कार वीरता, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, सामाजिक सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा खेल जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को दिए जाते हैं। वीर बाल दिवस के इस राष्ट्रीय आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर बच्चों और युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करेंगे। कार्यक्रम के माध्यम से भारत के युवा वीरों के साहस, बलिदान और अनुकरणीय मूल्यों को स्मरण किया जाएगा।प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। वर्ष 2025 के लिए 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 बच्चों का चयन इस पुरस्कार हेतु किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। समारोह में वीरता, दृढ़ता और निस्वार्थ सेवा से जुड़ी प्रेरक कहानियां प्रस्तुत की जाएंगी, जिससे बच्चों और युवाओं को प्रेरणा मिल सके। इसके साथ ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप सशक्त और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की प्रतिबद्धता को भी दोहराया जाएगा।इस कार्यक्रम में देशभर से स्कूली बच्चे, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्तकर्ता और कई गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे। भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत और वीरता की भावना को दर्शाने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां समारोह का प्रमुख आकर्षण होंगी।गौरतलब है कि स्कूली छात्रों और युवाओं को मार्गदर्शन व प्रेरणा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत संचालित पीएम-युवा 3.0 योजना के परिणाम भी घोषित कर दिए गए हैं। यह योजना युवा लेखकों के मार्गदर्शन और लेखन को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल है।राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के अनुसार, इस संस्करण में 30 वर्ष से कम आयु के 43 युवा लेखकों के पुस्तक प्रस्तावों का चयन अखिल भारतीय प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया है। ये प्रस्ताव भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं और अंग्रेजी में प्राप्त हुए हैं। इनमें डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, असमिया, बांग्ला, बोडो, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, मैथिली, ओड़िया, पंजाबी, संताली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, संस्कृत और उर्दू शामिल हैं।राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के मुताबिक, चयनित 43 लेखकों में 19 महिलाएं और 24 पुरुष हैं। चयनित पुस्तक प्रस्तावों को छह माह के भीतर प्रतिष्ठित विद्वानों के मार्गदर्शन में पुस्तकों का रूप दिया जाएगा। प्रत्येक चयनित लेखक को 50,000 रुपए प्रतिमाह की छात्रवृत्ति के साथ प्रकाशित पुस्तक पर आजीवन 10% रॉयल्टी भी प्रदान की जाएगी। - नई दिल्ली। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और महान समाज सुधारक भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मातृभूमि की सेवा में आजीवन समर्पित रहे भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए समाज सुधार के साथ राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के शिक्षा जगत में उनका अतुलनीय योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और महान समाज सुधारक भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को उनकी जयंती पर नमन। शिक्षा को समाज सुधार का मूल मंत्र मानने वाले मालवीय ने बीएचयू की स्थापना के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा के लिए युवाओं को प्रेरित किया। प्रेस को राष्ट्रनिर्माण का सशक्त माध्यम बनाने में भी उनका अहम योगदान रहा। अस्पृश्यता उन्मूलन के प्रयासों और किसान हितैषी कार्यों के लिए आजीवन संकल्पित महामना का योगदान चिरस्मरणीय है।”भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लिखा, “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक, ‘भारत रत्न’ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। शिक्षा के अग्रदूत रहे मालवीय ने जन-जन के अंतर्मन में भारतीयता के विचार को और प्रखर करते हुए युवाओं में चरित्र निर्माण की आधारशिला रखी। स्वभाषा और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए उनका महनीय योगदान सदैव प्रेरणादायी रहेगा।”केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। शिक्षा, राष्ट्रनिर्माण और भारतीय मूल्यों के संरक्षण के लिए उनका जीवन समर्पित रहा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्होंने ज्ञान, संस्कार और आत्मनिर्भर भारत की जो मजबूत नींव रखी, वह आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देती रहेगी।”उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “भारतीय भाषाओं के प्रबल पक्षधर, शिक्षा एवं संस्कार के अग्रदूत, ‘भारत रत्न’ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। काशी हिंदू विश्वविद्यालय जैसे गौरवशाली संस्थान की स्थापना कर महामना ने उच्च आदर्शों और विचारों से समाज को परिचित कराया। वे सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माता थे और उनका जीवन भारतीय जनमानस के लिए निरंतर प्रेरणा स्रोत है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें नमन किया। पीएम मोदी ने कहा कि अटलजी ने अपना संपूर्ण जीवन सुशासन और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर दिया और उनका व्यक्तित्व, कृतित्व व नेतृत्व देश के चहुंमुखी विकास के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बना रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “देशवासियों के हृदय में बसे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सुशासन और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर दिया। वे प्रखर वक्ता होने के साथ-साथ ओजस्वी कवि के रूप में भी सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनका व्यक्तित्व, कृतित्व और नेतृत्व देश के चहुंमुखी विकास के लिए पथ-प्रदर्शक बना रहेगा।”नरेंद्र मोदीने अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़े अपने पुराने भाषणों का एक वीडियो भी साझा किया। इसमें उन्होंने कहा था, “अटलजी की वाणी सिर्फ भाजपा की आवाज नहीं थी, बल्कि एक समय ऐसा भी था जब अटलजी की वाणी भारत के सामान्य मानवीय आशाओं और आकांक्षाओं की वाणी बन चुकी थी। अटलजी बोल रहे हैं, मतलब देश बोल रहा है। वे अपनी भावनाओं को नहीं, बल्कि देश के जन-जन की भावनाओं को समेटकर उन्हें अभिव्यक्ति देते थे।”पीएम मोदी ने अपने संदेश में आगे कहा, “यह देश अटलजी के योगदान को कभी नहीं भूल सकता। उनके नेतृत्व में भारत ने परमाणु शक्ति के क्षेत्र में भी देश का सिर ऊंचा किया। पार्टी नेता, संसद सदस्य, मंत्री या प्रधानमंत्री- अटलजी ने प्रत्येक भूमिका में एक आदर्श स्थापित किया।”एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा, “अटलजी की जन्म-जयंती हम सभी के लिए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का विशेष अवसर है। उनका आचरण, शालीनता, वैचारिक दृढ़ता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प भारतीय राजनीति के लिए एक आदर्श मानक है। उन्होंने अपने जीवन से सिद्ध किया कि श्रेष्ठता पद से नहीं, आचरण से स्थापित होती है और वही समाज को दिशा देती है।”इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक सुभाषित- ‘यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥’- भी साझा किया, जो अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और व्यक्तित्व के एक महत्वपूर्ण पहलू को रेखांकित करता है।




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