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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में रविवार को बिहार के सीतामढ़ी जिले की एक अनूठी पहल की देशभर में सराहना की। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण जैसी गंभीर वैश्विक पर्यावरणीय चुनौती का जिक्र करते हुए बताया कि सीतामढ़ी ने इसका एक आसान और प्रभावी समाधान पेश किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पहल के तहत जिले में सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर मजबूत, टिकाऊ, आरामदायक और पर्यावरण अनुकूल बेंच तैयार की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि एक बेंच बनाने में करीब 40 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। ये बेंच आकर्षक होने के साथ-साथ लंबे समय तक उपयोग में रहने योग्य हैं और इन्हें सरकारी स्कूलों, पार्कों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जा रहा है।पीएम मोदी ने कहा कि यह पहल केवल लोगों को बैठने की सुविधा ही नहीं दे रही बल्कि छात्रों और आम नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही है। बच्चे सीख रहे हैं कि जिस प्लास्टिक को वे पहले बेकार समझकर फेंक देते थे, वही सही तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए समाज के लिए उपयोगी संसाधन बन सकता है। उन्होंने कहा कि इससे ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ का सिद्धांत अब केवल नारा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है।प्रधानमंत्री ने इस पहल में जिला प्रशासन की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने स्थानीय इकाई के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाया है। जिलेभर से प्लास्टिक कचरा एकत्र किया जाता है, फिर उसकी सफाई, छंटाई और प्रोसेसिंग के बाद उसे बेंच का रूप दिया जाता है। इस परियोजना के एक चरण में डुमरा, रीगा, बाजपट्टी और रुन्नीसैदपुर समेत चार प्रखंडों से करीब 8,000 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक एकत्र किया गया। इनमें से 4,000 किलोग्राम प्लास्टिक को रिसाइकिल कर 85 आकर्षक बेंच तैयार की गईं। इस मॉडल में राजस्व साझा करने की व्यवस्था भी शामिल है, जिससे प्रशासन और औद्योगिक साझेदार दोनों को लाभ मिलता है। साथ ही प्लास्टिक के संग्रह, छंटाई, परिवहन और प्रोसेसिंग के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। -
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के करीब आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के लिए देशवासियों को विचार और सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने यह भी अपील की कि देशवासी इस साल भी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भावना को बेमिसाल उत्साह और गर्व के साथ आगे बढ़ाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड को संबोधित किया। इस दौरान, उन्होंने कहा, “कुछ ही सप्ताह बाद हम अपनी स्वतंत्रता का महापर्व भी मनाएंगे। 15 अगस्त हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है। ये उन असंख्य वीरों को याद करने का दिन है, जिन्होंने ‘भारत माता’ की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। उनके त्याग और तपस्या की वजह से आज हमारे हाथ में तिरंगा है। इस तिरंगे में हमारे संविधान के आदर्श हैं।”
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने पूरे देश को एक अद्भुत भावना से जोड़ा है। हर घर-हर गली में तिरंगे का उत्सव दिखाई देता है। इस साल भी हमें ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना है। अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराना है।” इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आमंत्रित करते हुए कहा, “हर वर्ष 15 अगस्त से पहले आप मुझे बहुत से विचार और सुझाव भेजते हैं। इस वर्ष भी आप अपने विचार ‘माईगव’ पर जरूर साझा कीजिए। मुझे आपके सुझावों का इंतजार है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को याद किया। उन्होंने कहा, “27 जुलाई को, भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है। डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में कई प्रेरक रूप थे, लेकिन, उनके हृदय के सबसे करीब एक शिक्षक की भूमिका थी। वे बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे।” उन्होंने कहा, “संयोग से, इसी हफ्ते हम ‘गुरु पूर्णिमा’ का पावन पर्व मनाएंगे। हमारे माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं। स्कूल के शिक्षक हमें अक्षर ज्ञान देते हैं। गुरु पूर्णिमा ऐसे सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है। मैं देश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं।” -
नई दिल्ली। ‘कारगिल विजय दिवस’ पर भारतीय सेना के वीर जवानों के शौर्य और साहस को पूरा देश नमन कर रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर योद्धाओं को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। उनका अद्वितीय पराक्रम, अडिग संकल्प और अनन्य राष्ट्रभक्ति हमारी सेना की गौरवशाली परंपरा के अप्रतिम उदाहरण हैं। देश, सदैव उनका ऋणी रहेगा। हमारे उन पराक्रमी वीरों की शौर्यगाथा, आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा के पथ पर चलने के निरंतर प्रेरित करती रहेगी।”उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पोस्ट किया, “कारगिल विजय दिवस पर, देश भारतीय सशस्त्र बलों के उन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिनकी असाधारण वीरता, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान ने कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की और हमारे देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की।”उन्होंने आगे लिखा, “यह जीत भारत की सैन्य शक्ति, राष्ट्रीय एकता और अपनी मातृभूमि के चप्पे-चप्पे की रक्षा करने के अटूट संकल्प का प्रमाण है। देश हमारे इन बहादुर सैनिकों और उनके परिवारों का सदैव ऋणी रहेगा। जय हिंद।”वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “कारगिल विजय दिवस पर, हमारा देश उन वीर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है, जिन्होंने भारत की सुरक्षा के लिए अदम्य साहस और समर्पण का परिचय दिया। सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उनका अदम्य साहस हमेशा राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा। उनकी अटूट देशभक्ति और कर्तव्य-निष्ठा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लिखा, “26 जुलाई 1999 – भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस का स्वर्णिम अध्याय। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर अपने प्राणों की आहुति देकर भारत माता की आन, बान और शान की रक्षा करने वाले अमर वीरों को ‘कारगिल विजय दिवस’ पर कोटि-कोटि नमन। राष्ट्र की रक्षा के लिए कारगिल के वीरों का समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। जय हिंद।”विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोस्ट किया, “कारगिल विजय दिवस पर, देश की रक्षा करने वाले हमारे बहादुर सैनिकों के साहस और वीरता को नमन। उनकी सेवा और बलिदान हमेशा याद रखे जाएंगे।” -
नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस पर आज रविवार को गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने वीर सैनिकों को नमन किया है। इसके साथ ही कहा कि कारगिल विजय दिवस हमारी सेना के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अजेय शौर्य का विजयोत्सव है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, “कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी वीर सैनिकों को शत-शत नमन। वर्ष 1999 में कारगिल की दुर्गम चोटियों पर असाधारण पराक्रम का परिचय देने वाले सभी वीर सैनिकों के प्रति देशवासी सदैव कृतज्ञ एवं ऋणी रहेंगे। भारतीय सेना का अदम्य साहस, त्याग और अटूट संकल्प आने वाली पीढ़ियों को देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा देता रहेगा।”केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “‘कारगिल विजय दिवस’ भारतीय सेना के अदम्य शौर्य और अद्भुत पराक्रम का प्रतीक है। वर्ष 1999 में हिमालय की दुर्गम बर्फीली चोटियों पर विषम परिस्थितियों और शत्रु के ऊंचाई पर स्थित मोर्चों के बावजूद, हमारे वीर जवानों ने ‘ऑपरेशन विजय’ के माध्यम से दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। ‘कारगिल विजय दिवस’ पर उन सभी वीर सपूतों का स्मरण कर नमन करता हूं, जिन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान देकर देश की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखा।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “अतुलनीय शौर्य एवं साहसपूर्ण प्रदर्शन से भारत के स्वाभिमान की विजय पताका फहराने वाले वीर जवानों की गौरवगाथा के स्वर्णिम पृष्ठ कारगिल विजय दिवस के अवसर पर समस्त वीर जवानों को कोटि-कोटि नमन।”केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट किया, “आज कारगिल विजय दिवस पर, पूरा देश हमारे उन बहादुर नायकों को सलाम करता है जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए कारगिल युद्ध में अपनी जान गंवाई। कारगिल विजय दिवस 1999 में पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक जीत की याद दिलाता है।”केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “आप सभी को कारगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह गौरवपूर्ण दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य, अटूट संकल्प और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर हमारे वीर जवानों ने अपने अद्भुत पराक्रम से विजय का स्वर्णिम इतिहास रचते हुए तिरंगे की आन, बान और शान को अक्षुण्ण रखा। आज इस पावन अवसर पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं तथा राष्ट्र की सुरक्षा में सदैव तत्पर सभी वीर सैनिकों को प्रणाम करता हूं। हमारे जांबाज सपूतों का त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति अतुलनीय समर्पण युगों-युगों तक प्रत्येक भारतीय, विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।”केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक्स पर लिखा, “कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य शौर्य, अद्वितीय पराक्रम, अटूट साहस और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण की अमर गाथा है। कारगिल के रणबांकुरों ने अपने अद्वितीय पराक्रम, अडिग संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा करते हुए इतिहास में अमिट स्वर्णिम अध्याय अंकित किया। आज उन सभी अमर वीरों को कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से शत-शत नमन, जिनकी वीरता, त्याग और बलिदान की गूँज आज भी भारत के कण-कण में प्रतिध्वनित होती है। हमारे वीर जवानों का अमर बलिदान प्रत्येक भारतीय को सदैव राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।”( -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार संभालने के बाद शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा चल रही है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है। नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देने महत्वपूर्ण माना जा रहा है।प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का का कार्यभार संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में रही है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं।लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है। शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा मंजूर किया गया। साथ ही राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी।राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रल्हाद जोशी अब अपने वर्तमान मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैधर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि उनका यह फैसला छात्रों के हितों की रक्षा करने और देश के युवाओं को “भ्रम के जाल” में फंसने से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा क्षेत्र के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि वह छात्रों और देश के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगी।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को 'विकसित वाइब्रेंट विलेज' (वीवीवी) कार्यक्रम-2026 के प्रतिभागियों से डिजिटल माध्यम से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को 'माय भारत' के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए की गई है, जिसके तहत भारत के सीमावर्ती गांवों को देश के प्रथम गांव मानते हुए उन्हें विकसित भारत की यात्रा का सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है। 'माय भारत' युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है।
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 का आयोजन दो चरणों में चार जून से 30 जून 2026 तक किया गया। इस दौरान लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया। इस कार्यक्रम के लिए देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवाओं का चयन किया गया। इन प्रतिभागियों का चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से हुआ, जिसमें तीन लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों ने स्थानीय समुदायों के साथ रहकर स्वच्छता अभियान, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, 'मिनी मॉडल' पंचायत का अभ्यास, स्थानीय कारीगरों से संवाद तथा रणनीतिक महत्व वाले संस्थानों का भ्रमण जैसी विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि महिलाएं सक्षम हैं, उन पर हर जिम्मेदारी नहीं डाल दी जानी चाहिए। भागवत ने साथ ही कहा कि परिवार को एक टीम की तरह कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार में जिम्मेदारियों का बंटवारा होना चाहिए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि महिलाओं की आकांक्षाएं कहीं खो न जाएं। शुक्रवार को यहां विश्वमांगल्य सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 'युगानुकूल मातृत्व' विषय पर व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि घर की जिम्मेदारियों में पुरुषों की भागीदारी भी बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जहां महिलाओं को समान सम्मान और सहयोग मिले। उन्होंने कहा, ''जैसा कि मैंने पहले भी कहा, सभी 18 जिम्मेदारियां केवल महिला पर नहीं डाली जानी चाहिए। आज के समय में काम का बंटवारा होना चाहिए। यदि पूरा परिवार एक टीम की तरह काम करे, तो यह पूरी तरह संभव है।'' भागवत ने कहा कि शांति और संतोष तभी मिलता है, जब व्यक्ति वह कर सके जो वह वास्तव में करना चाहता है। परिवार को आपसी सहमति से अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और सामंजस्य बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ''परिवार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इन सभी जिम्मेदारियों के बीच महिला की अपनी आकांक्षाएं और इच्छाएं दम न तोड़ दें। परिवार को स्वयं से पूछना चाहिए कि वह उसे ऐसे कौन-से अवसर दे सकता है, जिनसे वह अपने सपनों को पूरा कर सके।'' उन्होंने कहा कि इस विषय पर पुरुषों और महिलाओं दोनों में जागरुकता आवश्यक है और बदलाव की शुरुआत परिवार से ही होनी चाहिए। आरएसएस सरसंघचालक ने कहा, '' आपसे बेहतर कौन जानता है कि कड़वी दवा भी प्रेम से कैसे दी जाती है। शुरुआत वहीं से कीजिए। धीरे-धीरे वातावरण बदलने लगता है।'' पुरुषों की भूमिका पर भागवत ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए पुरुषों में भी जागरुकता लाना उतना ही जरूरी है। उन्होंने उपस्थित पुरुषों से अपील करते हुए कहा, ''मैं यहां मौजूद सभी पुरुषों से भी आग्रह करता हूं कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करें। शुरुआत स्वयं से करें। अपने घर में सही माहौल बनाएं। इसके बिना बदलाव संभव नहीं होगा।'' भागवत ने कहा कि पहले के समय में परिवार आपसी सलाह-मशविरा से चलते थे। महिलाएं परिवार की वित्तीय व्यवस्था और महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रमुख भूमिका निभाती थीं। उन्होंने कहा कि साझेदारी की उसी भावना को फिर से जीवित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ''हमें वही वातावरण दोबारा बनाना होगा। आज 'मैं' और 'मेरा' की भावना यानी व्यक्तिवाद अत्यधिक बढ़ गया है। हमें अपने अहंकार को नियंत्रित करना फिर से सीखना होगा और यह केवल संवाद के माध्यम से ही संभव है।'' महिलाओं की सुरक्षा पर भागवत ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। उन्होंने कहा, '' समाज को स्वयं महिलाओं के लिए खतरा नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अपनी सुरक्षा करने में सक्षम हैं, लेकिन वे समाज से सुरक्षित वातावरण की अपेक्षा करती हैं। राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर भागवत ने कहा, ''महिलाएं हमारे समाज का आधा हिस्सा हैं। जब तक समाज का यह आधा हिस्सा अपनी पूरी क्षमता से योगदान नहीं देगा, तब तक विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। -
नयी दिल्ली. लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने वाला एक विधेयक सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है, जिसमें प्रश्नपत्र लीक से संबंधित अपराधों के लिए कारावास की अवधि को 10 साल तक और जुर्माने को 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। विधेयक को पेश किए जाने से पहले सदस्यों को वितरित की गयी इसकी प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। विधेयक के अनुसार, सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया जाएगा, जो मुकदमों की सुनवाई तेजी से करेंगी और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी। -
जम्मू. जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हर वर्ष आयोजित होने वाली मचैल माता यात्रा को खराब मौसम के कारण तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि अब यह यात्रा 28 जुलाई से शुरू होगी लेकिन यह भी मौसम की अनुकूल स्थिति पर निर्भर करेगा। किश्तवाड़ की खूबसूरत पद्दर घाटी में समुद्र तल से 9,705 फुट की ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर की 304.7 किलोमीटर लंबी यात्रा जम्मू से शुरू होती है। श्रद्धालु लगभग पूरी दूरी सड़क मार्ग से तय करते हैं और मंदिर तक पहुंचने के लिए अंतिम 1.7 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन ने तय किया है कि श्रद्धालुओं को सुबह पांच बजे से शाम पांच बजे के बीच ही यात्रा करने की अनुमति होगी। इसके अलावा प्रतिदिन अधिकतम 8,000 श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि ये निर्णय किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए। उन्होंने कहा कि यात्रा के लिए पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन और अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखने के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) प्रणाली लागू की गई है।
मचैल माता मंदिर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले चिसोटी गांव में 14 अगस्त 2025 को बादल फटने की भीषण घटना हुई थी। इस हादसे में 63 लोगों की मौत हो गयी थी जिनमें अधिकतर श्रद्धालु थे। इस दौरान कई लोग घायल हुए थे और करीब 30 लोग लापता हो गए थे। उपायुक्त ने बताया कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार 25 जुलाई को मंदिर के पवित्र कपाट खोले जाएंगे। इस अवसर पर मचैल में पुजारी और स्थानीय लोग पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। इसके बाद मौसम की स्थिति का आकलन करने के बाद यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 28 जुलाई से श्रद्धालुओं के लिए यात्रा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यात्रा शुरू करने से पहले अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से पूरा करने की अपील की। उपायुक्त ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किश्तवाड़ के सरकूट स्थित गौरी शंकर मंदिर आधार शिविर में दो आरएफआईडी यात्रा पंजीकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा गुलाबगढ़ में भी करीब छह पंजीकरण केंद्र बनाए गए हैं। किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नरेश सिंह ने बताया कि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना तथा विशेष पुलिस चौकियां तैनात की गई हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसका सख्ती से पालन करें, निर्धारित यात्रा समय का अनुपालन करें तथा प्रशासन के साथ पूरा सहयोग करें। -
जम्मू. वार्षिक अमरनाथ यात्रा खराब मौसम के कारण छह दिन तक स्थगित रहने के बाद शनिवार को जम्मू से फिर शुरू हो गई और 6,000 से अधिक तीर्थयात्रियों का नया जत्था भगवती नगर आधार शिविर से कश्मीर घाटी स्थित बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जम्मू कश्मीर में लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण यात्रा 19 जुलाई को एहतियातन स्थगित कर दी गई थी। मौसम का 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर तक जाने वाले दोनों मार्गों पर विशेष रूप से असर पड़ा था। इन मार्गों में अनंतनाग जिले का पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले का अपेक्षाकृत छोटा 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि 1,470 महिलाओं, 25 बच्चों और 54 साधुओं समेत कुल 6,269 तीर्थयात्रियों का 18वां जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच 223 वाहनों के काफिले में शनिवार तड़के दो बजकर 40 मिनट पर बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि पहलगाम मार्ग के लिए कोई काफिला रवाना नहीं किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मौसम में सुधार और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल होने के बाद यात्रा फिर शुरू की गई। उधमपुर-रामबन मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ों से पत्थर गिरने के कारण राजमार्ग तीन दिन तक बंद रहा था। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घाटी में वार्षिक यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले दो जुलाई को भगवती नगर आधार शिविर से तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यात्रा का समापन रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को होगा।
अब तक करीब चार लाख तीर्थयात्री मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। इनमें से लगभग 1.20 लाख तीर्थयात्रियों ने जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से अपनी यात्रा शुरू की। जम्मू आधार शिविर का विकल्प चुनने वाले तीर्थयात्रियों को व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच काफिलों में कश्मीर ले जाया जाता है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने उनके योगदान की सराहना की। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन और छात्र कल्याण के प्रति आजीवन समर्पण उनकी यात्रा का ''प्रमाण'' है। जितेंद्र सिंह, पीयूष गोयल, वीरेंद्र कुमार, गिरिराज सिंह और जी. किशन रेड्डी समेत कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी धर्मेंद्र प्रधान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका (प्रधान का) कार्यकाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक रहा। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को सफलतापूर्वक लागू करने सहित कई योजनाओं में 'अहम भूमिका' निभाई। नितिन नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "बड़े हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका (प्रधान का) पद छोड़ने का फैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च मानकों को दर्शाता है। पार्टी इस फैसले में धर्मेंद्र प्रधान जी के साथ मजबूती से खड़ी है।" केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक रहा और यह कार्य 'दृढ़ विश्वास, ऊर्जा व स्पष्ट उद्देश्य' के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधान ने शिक्षा क्षेत्र की जटिल चुनौतियों का सामना करते हुए हमेशा विद्यार्थियों को केंद्र में रखा। जितेंद्र सिंह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "धर्मेंद्र प्रधान के भारत के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ यह उनके विद्यार्थियों और सार्वजनिक जीवन से गहरे तथा लंबे जुड़ाव को स्वीकार करने का अवसर है। बहुत कम नेता ऐसे रहे हैं, जिनका युवा भारत की आकांक्षाओं और चिंताओं से इतना गहरा रिश्ता रहा हो।" उन्होंने कहा, "अब जब वह आगे बढ़ रहे हैं, तो वह भारत में शिक्षा के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण और लगातार आगे बढ़ने वाली चर्चा की विरासत छोड़कर जा रहे हैं।" संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि सच्चे नेतृत्व का आकलन दशकों के काम से होता है और धर्मेंद्र प्रधान का सफर सार्वजनिक जीवन तथा छात्र कल्याण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा, "केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके (प्रधान के) साथ काम करते हुए मैंने भारत की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और करोड़ों युवा विद्यार्थियों को हर फैसले के केंद्र में रखने के प्रति उनकी सच्ची प्रतिबद्धता देखी है। इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए अपार धैर्य की जरूरत होती है और उन्होंने साहस तथा स्पष्ट सोच के साथ इस जिम्मेदारी को निभाया।" रीजीजू ने एक पुराने कार्यक्रम की अपनी और धर्मेंद्र प्रधान की साथ वाली तस्वीर भी साझा की।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि छात्र आंदोलनों से अपने शुरुआती जुड़ाव से लेकर सार्वजनिक जीवन और शासन में निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक, धर्मेंद्र प्रधान ने हमेशा प्रतिबद्धता, अनुशासन और लोगों, खासकर भारत के युवाओं की आकांक्षाओं, से "गहरा जुड़ाव" दिखाया है। उन्होंने कहा, "शिक्षा सुधार कोई अल्पकालिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए निरंतर प्रयास, व्यापक विचार-विमर्श और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति में अटूट विश्वास की जरूरत होती है। प्रधान जी ने पूरी निष्ठा और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इन गुणों को मंत्रालय में उतारा।" भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि किसी भी मजबूत राष्ट्र की पहचान उसकी शिक्षा व्यवस्था से होती है और धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में इस विचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। प्रधान ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में देशभर में हुए छात्रों के प्रदर्शन तथा नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग के बीच, शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तावड़े ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन छात्र आंदोलनों से शुरू हुआ था और देश के शिक्षा मंत्री का दायित्व संभालना उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने कहा, ''अपने कार्यकाल के दौरान प्रधान ने शिक्षा के महत्व को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में बनाए रखने का लगातार प्रयास किया।'' तावड़े ने कहा, ''मैं आपके सार्वजनिक जीवन की भावी जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं देता हूं और आशा करता हूं कि 'राष्ट्र प्रथम' की आपकी भावना 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में हमेशा बनी रहेगी।'' भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं और 'जेनरेशन-जेड' (जेन-जेड) के प्रति संवेदनशीलता का अभूतपूर्व उदाहरण बताया। 'जेन-जेड' से अभिप्राय 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी से है। तिवारी ने कहा कि (प्रधान का) यह इस्तीफा कठिन समय में छात्रों के साथ खड़े रहने की सत्तारूढ़ दल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। -
गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को असम सरकार को राज्य में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। राज्य में अधिकतर हिस्सों में बारिश कम होने के बाद बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के राहत शिविरों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं, भोजन, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है और प्रशासन दिन के दौरान लगभग सभी प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में सफल रहा। उन्होंने 'एक्स' पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन करके राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। शर्मा ने कहा, "उन्होंने (मोदी ने) तबाही की स्थिति, जारी राहत कार्यों और जमीन पर आ रही चुनौतियों के बारे में जानकारी मांगी।" मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक पहुंचने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए असम के लोगों को आश्वासन दिया कि इस आपदा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण कार्यों में हरसंभव सहायता देगी। शर्मा ने कहा कि कठिन समय में मिले प्रधानमंत्री के समर्थन और आश्वासन के लिए असम के लोग उनके आभारी हैं। राज्य में अब तक बाढ़ से 62 लोगों की मौत हो चुकी है और नौ जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सोनोवाल ने दिन के समय शिवसागर जिले के कुछ राहत शिविरों का दौरा किया, विस्थापित परिवारों से बातचीत की और अधिकारियों को सतर्क रहने तथा यह सुनिश्चित करने को कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को जरूरी सुविधाएं मिलने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने राहत शिविरों में मौजूद लोगों से कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। सोनोवाल ने कहा, "भारत सरकार इस कठिन समय में असम के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। हम हर जीवन की सुरक्षा और जरूरतमंद परिवारों तक राहत, स्वास्थ्य सेवा, भोजन और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं लोगों की सहनशीलता की परीक्षा लेती हैं, लेकिन साथ ही एकता और करुणा की भावना को भी सामने लाती हैं। मंत्री ने कहा, "सरकारों, स्वयंसेवी संगठनों व नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हम इस कठिन दौर से बाहर निकलेंगे और प्रत्येक प्रभावित परिवार को सम्मान के साथ अपना जीवन फिर से पटरी पर लाने में मदद करेंगे।" इससे पहले सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ से असम ओलंपिक संघ के बाढ़ राहत अभियान को रवाना किया, जो चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के प्रभावित परिवारों के लिए है। मुख्यमंत्री ने शाम को मंत्रिमंडल की एक बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ऊपरी असम के जिलों में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र की एक टीम राज्य पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा, "आज (शनिवार को) बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। हम शिवसागर और चराइदेव जिलों के हर गांव और इलाके तक पहुंचने में सफल रहे हैं।" शर्मा ने बताया कि जहां प्रशासन पहले नहीं पहुंच सका था, वहां राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जा रहा है और सेना की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और स्वास्थ्य शिविरों में तेजी आई है और उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति और बेहतर होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल बाढ़ में अब तक 62 लोगों की मौत हुई है।
शर्मा ने कहा कि तीन कैबिनेट मंत्री—बिमल बोरा, केशब महंत और सुशांत बरगोहेन—चराइदेव और शिवसागर जिलों में रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि प्रशासन अब भी कम से कम 80,000 बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में सफल नहीं हो पाया है। शर्मा ने कहा, "हम लोगों से नए कपड़े दान करने की भी अपील करते हैं, पुराने कपड़े नहीं। इसके अलावा, शैक्षणिक सामग्री भी दी जा सकती है, क्योंकि बाढ़ के पानी ने पढ़ाई से जुड़ी सभी सामग्री नष्ट कर दी है।" उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अगस्त तक अपना नुकसान आकलन पूरा करने का लक्ष्य रख रही है, ताकि जल्द से जल्द पुनर्वास कार्य शुरू किया जा सके। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, पिछले 24 घंटे में बाढ़ के कारण 14 और लोगों की मौत हुई। दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नगांव और शिवसागर जिलों में 7,05,100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बृहस्पतिवार की तुलना में स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, जब 11 जिलों में 7.21 लाख से अधिक लोग प्रभावित थे। एएसडीएमए ने बताया कि करीब 856 गांव अब भी जलमग्न हैं और राज्य में 56,606.78 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के पानी से विभिन्न जिलों में तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
प्राधिकरण के अनुसार, सात जिलों में प्रशासन 363 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है, जहां वर्तमान में 1,15,205 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य-रसायन योजना) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के तहत रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को आधुनिक बुनियादी ढांचे, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से नई मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भव्य-रसायन योजना को मिली मंजूरी भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, साझा सुविधाओं और मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ रासायनिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इससे लॉजिस्टिक और उत्पादन लागत घटेगी, निवेश आकर्षित होगा, निर्यात बढ़ेगा, आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।सरकार ने योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपए पार्कों की आंतरिक अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू रहेगी। योजना के तहत संबंधित राज्य सरकार को प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का योगदान करना होगा। इसके बाद केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के विकास के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के माध्यम से किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस योजना से कच्चे माल की उपलब्धता, विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और सहायक उद्योगों सहित रसायन क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूती मिलेगी। साझा बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा परिवहन और प्रबंधन लागत में कमी आएगी, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।योजना के माध्यम से भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में घरेलू और विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। भव्य-रसायन योजना के तहत विकसित होने वाले पार्कों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधाएं तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना जैसी केंद्रीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और रसायन उद्योग का सतत विकास संभव हो सकेगा।सरकार का कहना है कि रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का विस्तार कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों को भी गति देगा। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलेगा। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।योजना के तहत विकसित किए जाने वाले प्रत्येक रासायनिक पार्क में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा। इन पार्कों में रसायन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप साझा अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योगों को एकीकृत और आधुनिक औद्योगिक वातावरण मिल सके। -
नई दिल्ली। भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को 17 जुलाई, 2026 को दिल्ली क्षेत्र के जींद–सोनीपत रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। शुरुआत के बाद से यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है, जिससे 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की बचत हुई है। यह ट्रेन शून्य टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन के साथ केवल जलवाष्प छोड़ती है और भारतीय रेल के स्वच्छ एवं सतत परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से फ्यूल सेल के भीतर ही बिजली उत्पन्न करती है। इसी विद्युत ऊर्जा से ट्रेन संचालित होती है। इस पूरी प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। न धुआँ निकलता है और न ही टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे यह वर्तमान रेल प्रणोदन तकनीकों में सबसे स्वच्छ विकल्प बनकर उभरी है। भारतीय रेल के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना पूरी तरह स्वदेशी पहल है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट शक्ति प्रदान करती हैं। इसके अलावा ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियां और हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं, जो इसकी ऊर्जा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। इस परियोजना के तहत जींद में भारतीय रेल की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण सुविधा स्थापित की गई है। यहां 500 Bar तक के दाब पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण किया जा सकता है, जबकि 350 Bar के दाब पर ईंधन भरने की व्यवस्था उपलब्ध है। इस सुविधा की कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है। ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव, अधिक तापमान, आग और धुएँ का स्वतः पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं। इसके साथ स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अनुपालन तथा सभी आवश्यक परीक्षण और सत्यापन भी सुनिश्चित किए गए हैं। जींद–सोनीपत रेलखंड पर सफल परिचालन के बाद जल्द ही इसका परीक्षण दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा।
भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की स्थापना की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। यह परियोजना सतत और शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा भविष्य में इसके व्यापक विस्तार और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की मजबूत आधारशिला रखती है। -
नई दिल्ली।छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को नहीं बख्शेंगे : सीएम योगीपेपर लीक की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार संसद में सख्त कानून लाएगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत दोषियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान भी होंगे। फतेहपुर के मदारीपुर कला मैदान में 489 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 125 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जेल भेजा जाएगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े मामलों में भी आवश्यक कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति युवाओं को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का काम कर रही है और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी तथा आधुनिक बनाया जा रहा है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में माफिया और अपराधियों के लिए अब कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए केवल दो ही जगह हैं— जेल या जहन्नुम। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य सरकार ने अपराधियों और भू-माफिया के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया है तथा सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले युवाओं की नौकरियों पर डकैती डाली जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच निकली अधिकांश भर्तियां विवादों में रहीं और योग्य अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिला। इसके विपरीत उनकी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी आकांक्षी जिलों में शामिल रहा फतेहपुर आज विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले विकास के लिए मिलने वाले संसाधनों का दुरुपयोग होता था, जबकि वर्तमान सरकार ने मेडिकल कॉलेज, सड़क, पुल, अस्पताल, बिजली, कंपोजिट विद्यालय, नर्सिंग कॉलेज और अन्य बुनियादी परियोजनाओं के जरिए विकास को गांव-गांव तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों से फतेहपुर पिछड़ेपन की पहचान से बाहर निकल रहा है और विकसित भारत के संकल्प में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने विकास की इस गति को बनाए रखने के लिए जनता से भाजपा का समर्थन करने की अपील भी की। -
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी लंबे संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने हर स्तर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई और देश के युवाओं के हितों को सर्वोपरि रखा। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि वह पिछले चार दशक से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका मानना है कि सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का हमेशा सम्मान करते रहे हैं।
प्रधान ने कहा कि 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा की तिथि घोषित की। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से परीक्षा सीबीटी मोड में कराने का निर्णय भी लिया गया। सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराना रही, जिसमें केंद्र, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला।धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी ली और कभी इससे मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि के कई छात्रों ने सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद दुखी किया। उन्होंने कहा कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतें मौजूदा स्थिति का फायदा न उठा सकें और छात्रों का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजने का निर्णय लिया।धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों तथा अपने साथ काम करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और वह भविष्य में भी ओडिशा की जनता, देश के युवाओं और भारत माता की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे। -
नई दिल्ली। असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को बताया कि राज्य में अब तक 10.6 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों तक राहत और पुनर्वास सहायता पहुंचाने के लिए 24 घंटे काम कर रही है तथा भोजन, पीने का पानी, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि राज्य के कई जिलों में बाढ़ का असर जारी है और इस आपदा में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए 24 घंटे काम कर रही है। जल्द ही इस मुद्दे पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करूंगा और आगे की जानकारी साझा करूंगा।”मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए ताजा बाढ़ बुलेटिन के अनुसार, 29 अप्रैल से 23 जुलाई के बीच राज्य के 25 जिलों में 10,63,216 लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से 77 राजस्व सर्किल और 2,023 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रभावित लोगों के लिए 162 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 41,264 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा, सहायता वितरण के लिए 1,072 राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं।सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से अब तक 47 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें चराइदेव में 10, शिवसागर में 21, जोरहाट में 8, धेमाजी में 3, कार्बी आंगलोंग में 2, गोलाघाट में 2 और सोनितपुर में 1 व्यक्ति की जान गई है। वहीं, 8 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 6 शिवसागर, 1 धेमाजी और 1 चराइदेव से हैं। बाढ़ के कारण 401 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 1,856 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 28,912 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि वह जल्द ही एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में बाढ़ की मौजूदा स्थिति के साथ राहत और बचाव कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। -
नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने औरंगाबाद तथा नागपुर में दो विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित किए हैं। ये अदालतें सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों के अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, बोर्ड एवं अन्य निर्दिष्ट परीक्षाओं में कदाचार निवारण अधिनियम, 1982 के संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करेंगी।
यह निर्णय बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के 23 जुलाई, 2026 के पत्र के बाद लिया। मंत्रालय ने परीक्षा संबंधी कदाचार के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए समर्पित फास्ट ट्रैक अदालतें नामित करने का अनुरोध किया था।हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (निरीक्षण-1) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, औरंगाबाद न्यायिक जिले के लिए एस.वी. पवार, 10वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ खंड) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया है। वहीं, नागपुर न्यायिक जिले के लिए गुलशन आर. कोल्टे, 7वें संयुक्त सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ स्तर) एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत को इस उद्देश्य के लिए नामित किया गया है। हाईकोर्ट ने औरंगाबाद तथा नागपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को संबंधित विशेष अदालतों को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी लंबित मामलों को तत्काल इन अदालतों में स्थानांतरित करने और अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजने के लिए कहा गया है।विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना है। इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने के साथ ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। -
जयपुर. राजस्थान में एक लाख रुपये या इससे अधिक राशि की ऑनलाइन ठगी की शिकायत मिलने पर अब स्वतः 'ई-जीरो प्राथमिकी' दर्ज होगी। अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था बृहस्पतिवार से लागू हो गई। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि ऑनलाइन वित्तीय अपराधों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान पुलिस ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने निर्णय लिया है कि अब एक लाख रुपये या उससे अधिक की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत पर ई-जीरो प्राथमिकी स्वतः दर्ज होगी। इसके अनुसार यह नई व्यवस्था आज बृहस्पतिवार से पूरे राज्य में प्रभावी कर दी गई। डीजीपी शर्मा ने इस संबंध में राज्य के समस्त पुलिस अधीक्षकों व पुलिस आयुक्तों को संशोधित व्यवस्था के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए परिपत्र जारी कर हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों एवं साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि पीड़ितों को तत्काल कानूनी संरक्षण मिल सके और ठगी की राशि को शीघ्र 'फ्रीज' कर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) वी.के.सिंह ने बताया कि इससे पहले राजस्थान में पांच लाख रुपये या उससे अधिक की ऑनलाइन वित्तीय ठगी के मामलों में 'ई-प्राथमिकी' की व्यवस्था लागू थी। अब इसकी सीमा घटाकर एक लाख रुपये कर दी गई है, जिससे अधिक संख्या में पीड़ितों को तत्काल कानूनी सहायता मिल सकेगी। नई व्यवस्था के तहत 'आई4सी' के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930) और सीसीटीएनएस प्रणाली को एकीकृत किया गया है। अब एक लाख रुपये या उससे अधिक की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज होते ही संबंधित राज्य स्तरीय साइबर पुलिस थाने में स्वतः 'ई-जीरो प्राथमिकी' दर्ज हो जाएगी। 'ई-जीरो प्राथमिकी' मिलते ही पुलिस बिना शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर की प्रतीक्षा किए बैंक खातों से लेन-देने पर रोक लगाने और सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाने जैसी आवश्यक कानूनी कार्रवाई तुरंत शुरू करेगी, ताकि साइबर अपराधियों पर शीघ्र शिकंजा कसा जा सके। उन्होंने इस तरह की साइबर ठगी के शिकार लोगों से तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने की अपील की है।
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नयी दिल्ली. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बृहस्पतिवार को ओडिशा अपतटीय क्षेत्र स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की 'कुशा' मिसाइल का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक किया। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह परीक्षण एक ''इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य'' के खिलाफ किया गया, जो तेज़ रफ़्तार और अधिक ऊंचाई वाले हवाई ख़तरे जैसा था। इसने कहा कि मिसाइल प्रणाली ने लक्ष्य को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। बयान में कहा गया कि कुशा मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, प्रक्षेपास्त्र, मानवरहित विमान (यूएवी) और दुश्मन के बड़े विमानों समेत कई तरह के हवाई खतरों को काफी दूर तक और ऊंचाई पर नष्ट करने में सक्षम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह देश की हवाई रक्षा क्षमता में एक ''बड़ी छलांग'' है।
मंत्रालय ने कहा कि डीआरडीओ ने 23 जुलाई को ओडिशा अपतटीय क्षेत्र स्थित एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की 'कुशा' मिसाइल का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक किया। रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि 'कुशा' की सफल परीक्षण-उड़ान भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली विकसित करने की उस क्षमता को दर्शाता है, जो दुनिया के बहुत कम देशों के पास है। मंत्रालय ने बताया कि रक्षा सचिव एवं डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने प्रक्षेपण के दौरान सभी गतिविधियों पर नजर रखी और सफल परीक्षण में शामिल टीम के सदस्यों को बधाई दी। -
देहरादून. उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने देहरादून के ईस्ट होप टाउन क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम से बनाई जा रही भारी मात्रा में नकली दवाएं, पैकिंग सामग्री और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद कीं हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर मंगलवार को ईस्ट होप टाउन क्षेत्र में एक मकान में उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी की गई। जांच में बकंपनियों के नाम से तैयार की गई नकली दवाएं बरामद हुईं। इनमें गैबापिन-100, जोरिल एम-2 और सेफोलैक-200 समेत कई दवाएं शामिल हैं । अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में इस रैकेट के तार अन्य राज्यों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं जिसकी जांच की जा रही है । व रिष्ठ औषधि निरीक्षक मनेंद्र सिंह राणा और औषधि निरीक्षक विनोद जगूड़ी मामले की जांच कर रहे हैं तथा संदिग्धों से पूछताछ जारी है। आयुक्त पांडेय ने कहा कि नकली दवाओं का कारोबार जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG) के लिए भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत हो रही है, ऐसे में मैं भारतीय दल को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे खिलाड़ी जोश, दृढ़ संकल्प और बेहतरीन प्रदर्शन की भावना के साथ इन खेलों में हिस्सा लेंगे। हमारे खिलाड़ियों का हुनर और लगन हमेशा अनगिनत भारतीयों को प्रेरित करते हैं।”
इस बार भारत की ओर से कई दिग्गज एथलीट्स कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। हालांकि इस संस्करण में बैडमिंटन, हॉकी, रेसलिंग जैसे कई बड़े इवेंट शामिल नहीं हैं। ऐसे में भारतीय प्रशंसकों की नजरें मुख्य रूप से नीरज चोपड़ा (भाला फेंक) और मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग) पर टिकी हुई हैं।गुरुवार को ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की औपचारिक शुरुआत की। इसमें भारत की ध्वजवाहक मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन रहीं।टूर्नामेंट के पहले दिन भारत को अच्छी शुरुआत मिली। बॉल्स प्रतियोगिता में पिंकी सिंह और रूपा रानी टिर्की की जोड़ी ने माल्टा को हराया। पुरुष वर्ग में पुतुल सोनोवाल ने मौजूदा विश्व चैंपियन को उलटफेर करते हुए हराया। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया भी ग्लासगो पहुंचे हैं।उन्होंने पहले दिन के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए लिखा, “कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की रोमांचक शुरुआत। आज हमारे एथलीटों ने बॉल्स महिला पेयर्स इवेंट में आखिरी थ्रो पर शानदार जीत हासिल की।”भारत ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 61 पदक जीते थे, जिसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल थे। इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। देशभर में भारतीय एथलीटों के लिए शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है। -
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार ने कहा कि पूरी सुधार प्रक्रिया पर सर्वोच्च स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि सरकार के लिए बच्चों का हित सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर गंभीरता से काम किया जा रहा है और जल्द ही सरकार इस संबंध में विस्तृत जानकारी अदालत के सामने रखेगी।तुषार मेहता ने कहा कि सरकार प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक उसके सुरक्षित पहुंचने और छात्रों तक पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि राधाकृष्णन समिति की सभी सिफारिशों को लागू किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार अपने हलफनामे में कंप्यूटर आधारित परीक्षा, डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी भी देगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि परीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी रूप से और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।तुषार मेहता ने अदालत से कहा, “कुछ दिनों बाद मैं पूरी स्थिति और सभी सुधारों का विस्तृत विवरण कोर्ट के सामने रखूंगा।” सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार अपने हलफनामे में यह स्पष्ट करे कि क्या भविष्य में नीट परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित बनाया जा सकता है।इसके अलावा कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि परीक्षा से जुड़े डेटा की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था होगी, साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी और उसकी निगरानी किस प्रकार की जाएगी। अदालत ने इन सभी पहलुओं पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की है। -
नई दिल्ली। जम्मू-श्रीनगर में सभी प्रमुख यात्राएं आज शुक्रवार को छठे दिन भी स्थगित रहीं। लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर रुक-रुक कर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं की वजह से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (एनएच-44) बंद रहा। अधिकारियों ने बताया कि रास्ता साफ करने का काम चल रहा है, लेकिन हाईवे को अभी तक ट्रैफिक के लिए सुरक्षित घोषित नहीं किया गया है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे और भूस्खलन और पत्थर गिरने की संभावना को देखते हुए यात्रा करने से बचें। अधिकारियों ने लोगों से यह भी अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल और ट्रैफिक कंट्रोल यूनिट के माध्यम से सड़क की स्थिति की आधिकारिक जानकारी लें।जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने गुरुवार को श्रीनगर और कटरा के बीच एक स्पेशल ट्रेन चलाई और 600 पर्यटक घाटी से बाहर गए। अधिकारियों ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर उचित सिंघल के निर्देश पर जम्मू डिवीजन की ओर से यह स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी।यह ट्रेन गुरुवार शाम 5.10 बजे श्रीनगर रेलवे स्टेशन से रवाना हुई, रास्ते में बनिहाल में रुकी और रात 8.15 बजे श्री माता वैष्णो देवी कटरा पहुंची। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यह स्पेशल सर्विस यात्रियों, खासकर कटरा और जम्मू तवी से आगे की ट्रेन कनेक्टिविटी वाले यात्रियों की सुरक्षित और समय पर यात्रा सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी।सिंघल ने कहा, “यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सड़क यातायात की धीमी गति को देखते हुए डिवीजन ने स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया ताकि यात्री बिना किसी परेशानी के अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।”रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले एनटीईएस ऐप, आईआरसीटीसी वेबसाइट या 139 रेलवे हेल्पलाइन के माध्यम से ट्रेन की ताजा स्थिति की जांच कर लें। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के दौरान निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जम्मू डिवीजन जरूरत पड़ने पर स्पेशल ट्रेनें चलाता रहा है।इस बीच, खराब मौसम, भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण शुक्रवार को छठे दिन भी जम्मू-कश्मीर में सभी प्रमुख धार्मिक यात्राएं स्थगित रहीं। इनमें श्री अमरनाथ जी यात्रा, माता वैष्णो देवी यात्रा और शिव खोरी यात्रा शामिल हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की चेतावनी के बाद यात्रा रोक दी गईं। अधिकारियों ने मौसम ठीक होने और रास्तों के ठीक होने तक यात्राएं रोक दी गई हैं। फंसे हुए श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बेस कैंपों में मुफ्त भोजन (लंगर) और रहने की व्यवस्था की गई है। (














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