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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर रॉब जेटेन को मंगलवार को बधाई देते हुए कहा कि वह दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और गति देने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के आकांक्षी हैं। नीदरलैंड के सबसे युवा प्रधानमंत्री जेटेन ने सोमवार को पदभार ग्रहण किया।
मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, "नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर रॉब जेटेन को बधाई। भारत और नीदरलैंड विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक संबंध साझा करते हैं। मैं दोनों देशों तथा लोगों के बीच बढ़ते संबंधों को और गति देने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का आकांक्षी हूं।" अड़तीस वर्षीय जेटेन तीन दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उनकी मध्यमार्गी पार्टी डी66, मध्य-दक्षिणपंथी 'क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स' और मध्य-दक्षिणपंथी 'पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी' शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. सिविल सेवा परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि तीन दिन बढ़ाकर 27 फरवरी कर दी गई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यूपीएससी ने यह फैसला आवेदन जमा करने के लिए पेश पोर्टल पर उम्मीदवारों द्वारा कुछ समय के लिए अनुभव की गई तकनीकी गड़बड़ियों की खबरों के बीच आया है, जिन्हें बाद में ठीक कर लिया गया था। आयोग ने एक सार्वजनिक सूचना में कहा, ''सिविल सेवा परीक्षा-2026 और भारतीय वन सेवा परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि अब तीन दिन बढ़ा दी गई है, यानी 27 फरवरी 2026 शाम छह बजे तक आवेदन जमा किये जा सकेंगे।'' यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि मंगलवार को एक संक्षिप्त तकनीकी समस्या के कारण कुछ उम्मीदवारों को आवेदन करने में कठिनाई हुई थी, जिसका अब समाधान कर लिया गया है। यूपीएससी द्वारा सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन प्रतिवर्ष तीन चरणों प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार में किया जाता है। इस परीक्षा के जरिये भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) आदि के अधिकारियों का चयन किया जाता है। इस साल सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को आयोजित की जाएगी।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को नये प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर 'सेवा तीर्थ' में अपनी पहली बैठक में यह संकल्प लिया कि इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय 'नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित होगा और यह स्थान शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि हर भारतवासी के सशक्तीकरण का केंद्र होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह संकल्प भी लिया गया कि 'सेवा तीर्थ' से संचालित शासन का हर प्रयास देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने की भावना से जुड़ा रहेगा। 'सेवा संकल्प प्रस्ताव' के अनुसार, नये भवन में लिया गया प्रत्येक निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के प्रति सेवा-भाव से प्रेरित होगा और राष्ट्र-निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा होगा। प्रस्ताव के अनुसार, ''केंद्रीय मंत्रिमंडल यह संकल्प दोहराता है कि इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय 'नागरिक देवो भव' की भावना से प्रेरित होगा। यह स्थान शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतवासी के सशक्तीकरण का केंद्र होगा।'' इसमें कहा गया है, ''हम यह दोहराते हैं कि अपनी दृष्टि के मुताबिक उस तरह के शासन को और मजबूती देंगे, जो पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक की संवेदनाओं के प्रति सजग हो।'' केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी और इस दौरान प्रस्ताव को पढ़ते हुए कहा कि 'सेवा तीर्थ' की कार्य-संस्कृति में यही भावना निहित होगी, जहां हर नीति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर निर्णय देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होगा। प्रस्ताव के अनुसार, यह बैठक एवं यह भवन नये भारत के नवनिर्माण की एक स्पष्ट अभिव्यक्ति है।
इसमें कहा गया है, ''इस शुरुआत के साथ, हम उस भविष्य का स्वागत कर रहे हैं, जिसके निर्माण में सदियों का श्रम लगा है। आजादी के बाद, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में इतने दशकों तक सरकारों ने विरासत को संभाला और भविष्य के सपने देखे।'' इसमें कहा गया है, ''हमने एक ऐसे भारत का सपना देखा, जिसकी सोच स्वदेशी हो, स्वरूप आधुनिक हो, और सामर्थ्य अनंत हो। आज यह सेवा तीर्थ उसी संकल्पना का वह मूर्त रूप है, जो लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत के गौरव को बढ़ाएगा।'' वैष्णव ने कहा कि मंत्रिमंडल ने इस अवसर पर इस स्थान के इतिहास को भी स्मरण किया, जो ब्रिटिश शासन काल के अस्थायी बैरकों के स्थान पर बना है। उन्होंने कहा कि गुलामी के कालखंड से पहले भारत की पहचान एक ऐसे राष्ट्र के रूप में होती थी, जो एक ओर अपनी भौतिक भव्यता के लिए जाना जाता था और दूसरी ओर अपने मानवीय मूल्यों के लिए। मंत्री ने कहा कि 'सेवातीर्थ' की संकल्पना इन दोनों आदर्शों से मिलकर बनी है।
वैष्णव ने कहा, ''हमारे लिए संवैधानिक मूल्य उस नैतिक प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है, जो शासन को नागरिक की गरिमा, समानता और न्याय से जोड़ती है। 'सेवा तीर्थ' की कार्य-संस्कृति में यही भावना निहित होगी, जहां हर नीति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर निर्णय देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होगा।'' उन्होंने कहा कि 'सेवा तीर्थ' शासन की उस अवसंरचना की आवश्यकता का उत्तर है, जो जड़ता की जगह गतिशीलता, उदासीनता की जगह निष्ठा और संदेह की जगह समाधान को बढ़ावा देता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में लिये गए निर्णयों ने शासन के उद्देश्य को नयी स्पष्टता दी है तथा करोड़ों नागरिकों के जीवन में आये बदलाव ने शासन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत किया है। इसमें कहा गया है कि बीते एक दशक में 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालकर देश ने असंभव समझे जाने वाले काम को संभव करके दिखाया है तथा ऐसे अनेक कीर्तिमानों के पीछे सरकार की दूरगामी सोच, व्यापक दृष्टि और अथक परिश्रम रहा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि मंत्रिमंडल यह दृढ़ संकल्प लेता है कि 'सेवा तीर्थ' की नयी ऊर्जा और 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' की तीव्र गति से, ''हम निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में भारत का स्थान सुनिश्चित करने का संकल्प पूरा करेंगे।'' प्रस्ताव के अनुसार, ''आज, केंद्रीय मंत्रिमंडल स्वयं को 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति पुनः समर्पित करता है। यह एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय यात्रा है, जिसमें आज लिये गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का स्वरूप तय करेंगे। 'सेवा तीर्थ' में हो रही यह पहली बैठक हमें यह स्मरण कराती है कि विकास का लक्ष्य जितना बड़ा है, उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी उतनी ही अधिक होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि यह परिसर केवल एक आधुनिक कार्यस्थल नहीं है, बल्कि शासन की नयी कार्य-संस्कृति का भी प्रतीक है। -
चेन्नई. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक मार्च को तमिलनाडु यात्रा के दौरान मदुरै के तिरुप्परनकुंद्रम स्थित सुब्रह्मण्य स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री मदुरै के मंडेला नगर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की एक रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली चेन्नई के पास मदुरंथकम में पिछले महीने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करने के बाद उनकी दूसरी रैली होगी। मदुरै में वह तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर जाएंगे, जहां पत्थर के स्तंभ पर कार्तिगाई दीपम जलाने को लेकर विवाद सामने आया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता के अनुसार प्रधानमंत्री मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार से इजराइल का दो दिवसीय दौरा करेंगे, जिसका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच बिगड़ते संबंध सहित पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच, द्विपक्षीय रक्षा और व्यापार सहयोग को प्रगाढ़ करना है। मोदी के कार्यक्रमों में इजराइल की संसद को संबोधित करना, इजराइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्यापक वार्ता और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से मुलाकात भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ''यह दौरा दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ और लंबे समय से जारी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाएगा तथा साझा चुनौतियों की समीक्षा करने के साथ-साथ दोनों लोकतंत्रों के बीच एक मजबूत साझेदारी के लिए अपने साझा दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में प्रयासों को पुनर्गठित करने का अवसर प्रदान करेगा।'' यह जानकारी मिली है कि बृहस्पतिवार को दोनों प्रधानमंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान समग्र रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना चर्चा का प्रमुख विषय होगा। नेतन्याहू बुधवार रात मोदी के लिए निजी रात्रिभोज का आयोजन करेंगे।
यह नौ वर्षों में मोदी की इजराइल की दूसरी यात्रा होगी। जुलाई 2017 में मोदी की इजराइल की पहली यात्रा के दौरान भारत-इजराइल संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच गए थे। नेतन्याहू ने जनवरी 2018 में भारत की यात्रा की थी। भारत और इजराइल विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, कृषि, जल और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों के क्षेत्र में मजबूत सहयोग के साथ एक सुदृढ़ रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''दोनों नेता भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा करेंगे और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, व्यापार एवं अर्थव्यवस्था तथा दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान सहित सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों पर चर्चा करेंगे।'' अपनी वार्ता में, दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा गाजा सहित पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है। पिछले साल जून में इजराइल-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद, नेतन्याहू और मोदी ने दो बार फोन पर बात की।
नौ अक्टूबर को मोदी ने नेतन्याहू को फोन किया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के तहत हुई प्रगति पर उन्हें बधाई दी। पिछले कुछ वर्षों में भारत-इजराइल संबंधों में रक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और नवाचार सहित कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आया है। रक्षा सहयोग दोनों पक्षों की साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जिसमें इजराइल भारत को कई सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियां मुहैया करा रहा है। पिछले साल नवंबर में, भारत के रक्षा सचिव की इजराइल यात्रा के दौरान, रक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे। भारत स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ''सुदर्शन चक्र'' विकसित करने पर विचार कर रहा है। इस बीच, नयी दिल्ली इजराइल की 'आयरन डोम' नामक वायु रक्षा प्रणाली के कुछ तत्वों को शामिल करने की संभावना तलाश रही है, जो मिसाइलों और तोप के गोलों को रोककर नष्ट कर सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंध भी लगातार प्रगति कर रहे हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने रबी विपणन सत्र 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत चना, सरसों और मसूर की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों से 31 मार्च से पहले प्रमुख कृषि योजनाओं के तहत उपलब्ध केंद्रीय धनराशि का पूर्ण और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया। चौहान ने 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) और कृषि उन्नति योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा, "वित्त वर्ष अब खत्म होने के करीब है। ऐसे में यह जरूरी है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को उपलब्ध कराई गई धनराशि का समय पर, सही तरीके से और किसानों के सर्वोत्तम हित में उपयोग हो।" रबी 2026 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत महाराष्ट्र में 7.61 लाख टन, मध्य प्रदेश में 5.8 लाख टन, राजस्थान में 5.53 लाख टन और गुजरात में 4.13 लाख टन चने की खरीद को मंजूरी दी गई है। सरसों की खरीद के लिए राजस्थान को 13.78 लाख टन, मध्य प्रदेश को 6.01 लाख टन और गुजरात को 1.33 लाख टन की स्वीकृति दी गई है। मूल्य समर्थन योजना को उस समय लागू किया जाता है जब अधिसूचित दालों, तिलहनों और खोपरा की बाजार कीमतें प्रमुख कटाई सत्र के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चली जाती हैं। इस बैठक में चौहान ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत अरहर, उड़द और मसूर की खरीद 2030-31 तक पूर्व-पंजीकृत किसानों से केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से किए जाने की भी घोषणा की। बैठक में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, हरियाणा, केरल, असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और त्रिपुरा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि मणिपुरी फिल्म "बूंग" को प्रतिष्ठित बाफ्टा पुरस्कार मिलना, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्य के लिए अपार खुशी का क्षण है। फरहान अख्तार के एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित एक अलग अंदाज वाली मणिपुरी पृष्ठभूमि की हास्य-ड्रामा फिल्म 'बूंग' ने रविवार को लंदन में सर्वश्रेष्ठ बाल और पारिवारिक फिल्म की श्रेणी में प्रतिष्ठित बाफ्टा पुरस्कार जीता। प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, "इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई। यह वास्तव में अपार खुशी का क्षण है, खासकर मणिपुर के लिए। यह हमारे देश की रचनात्मक प्रतिभा को भी उजागर करता है।" गुगुन किपगेन और बाला हिजाम अभिनीत इस फिल्म ने 'लिलो एंड स्टिच', 'आर्को' और 'जूट्रोपोलिस 2' जैसी फिल्मों को पीछे छोड़कर यह प्रतिष्ठित खिताब हासिल किया।
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुई और राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया।
राष्ट्रपति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट एक पोस्ट में लिखा गया है कि अशोक मंडप के पास ग्रैंड ओपन सीढ़ी पर स्थित चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की प्रतिमा ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा का स्थान ले लिया है। यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को मिटाने और भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत, शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने तथा भारत माता की सेवा में असाधारण योगदान देने वालों को सम्मानित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है।राष्ट्रपति मुर्मु ने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम औपनिवेशिक काल की विरासत से आगे बढ़ने और देश के इतिहास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रख्यात भारतीय नेताओं को मान्यता देने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजगोपालाचारी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और विद्वान थे, जिन्होंने 1948 से 1950 तक भारत के अंतिम गवर्नर जनरल के रूप में कार्य किया।इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और राजाजी के परिवार के सदस्य शामिल थे।वहीं, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में भाग लिया, जहां भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया, जो औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की हमारी यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”इस आयोजन ने राष्ट्रीय प्रतीकों को सम्मानित करने और गणतंत्र की प्रमुख संस्थाओं के भीतर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को सुदृढ़ करने पर सरकार के निरंतर जोर को रेखांकित किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं को पत्र लिखा है। उन्होंने ‘एबार भाजपा सरकार’ का नारा देते हुए ममता बनर्जी को घेरा है। पीएम मोदी ने लिखा कि सोनार बंगाल का सपना देखने वाला हर व्यक्ति दुखी है। पश्चिम बंगाल में माताएं-बहनें आज सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं।
पीएम मोदी ने पत्र में लिखा, “जय मां काली…अब बस कुछ ही महीने में पश्चिम बंगाल का भाग्य सुनिश्चित हो जाएगा। आने वाली पीढ़ी का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह आपके सोचे-समझे फैसले पर निर्भर करता है। मेरे सोनार बंगाल के सपने देखने वाला हर एक जवान, बूढ़ा और महिला आज बहुत पीड़ा में हैं। उनकी पीड़ा से आज मेरा हृदय भी व्यथित है। इसलिए, मैंने मन की गहराइयों से एक संकल्प लिया है, पश्चिम बंगाल को ‘विकसित’ और समृद्ध बनाने का संकल्प। पिछले 11 वर्षों में देशवासियों के आशीर्वाद को ताकत बनाकर मेरी सरकार ने जनकल्याण और समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। किसानों के कल्याण से लेकर युवाओं के सपनों को साकार करने तक, और मातृशक्ति के सशक्तीकरण से लेकर समाज के हर वर्ग तक, हमारी नीतियों और निरंतर प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आज साफ दिखाई दे रहे हैं।”प्रधानमंत्री मोदी ने आगे लिखा है, “राज्य सरकार के असहयोग और विरोध के बावजूद, आज पश्चिम बंगाल के करीब 5 करोड़ लोग ‘जन-धन योजना’ के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत राज्य में 85 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया है। जब राज्य की सत्ताधारी पार्टी गरीबों का निवाला छीन रही है, तब हमने छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को 2.82 लाख करोड़ रुपये का लोन देकर मदद का हाथ बढ़ाया है। ‘अटल पेंशन योजना’ के तहत 56 लाख वरिष्ठ नागरिकों को बुढ़ापे में आत्मनिर्भर बनाने का सौभाग्य मुझे मिला है। ‘उज्ज्वला योजना’ के माध्यम से 1 करोड़ से अधिक परिवारों को रसोई गैस देकर माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति दिलाकर मैं धन्य हूं। जो किसान पूरे देश का पेट भरते हैं, आज पश्चिम बंगाल में वही अन्नदाता अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसी कठिन परिस्थिति में ‘किसान सम्मान निधि’ के जरिए 52 लाख से अधिक किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाकर, मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं।पीएम मोदी ने आगे लिखा, “स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करता था और औद्योगिक विकास में अग्रणी था। लेकिन आज इस गौरवशाली राज्य की जर्जर हालत देखकर मेरा मन व्यथित हो उठता है। पिछले छह दशकों के कुशासन और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण पश्चिम बंगाल को जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसे बयान नहीं किया जा सकता। एक तरफ, रोजगार के अभाव में युवा दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में मेरी माताएं और बहनें आज सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं।”प्रधानमंत्री ने लिखा कि स्वामी विवेकानंद और ऋषि अरविंद ने जिस बंगाल का सपना देखा था, वह आज वोट-बैंक की संकीर्ण राजनीति, हिंसा और अराजकता में जकड़ा हुआ है और यह हम सबके लिए अत्यंत पीड़ादायक है। पश्चिम बंगाल की धरती के सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ‘आजादी के ललकार’ ने कभी पूरे देश को प्रेरित किया था, पर आज उनकी ही पवित्र भूमि अवैध घुसपैठ और महिलाओं के खिलाफ हिंसा से कलंकित है। कविगुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का सोनार बंगाल पर नकली वोटर हावी हो रहे हैं। अराजकता के अंधेरे में डूबते पश्चिम बंगाल को देखकर आज पूरा देश चिंतित है।उन्होंने लिखा, “लेकिन कब तक हम चुपचाप यह सब सहते रहेंगे? अब परिवर्तन अनिवार्य है। देश के कई राज्यों में आज जीवन स्तर बेहतर हुआ है, गरीबों के चेहरे पर मुस्कान आई है। ‘आयुष्मान भारत’ से स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है, युवाओं को रोजगार मिला है और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। पश्चिम बंगाल भी इस विकास और प्रगति का पूरा हकदार है।” -
नई दिल्ली। सिक्किम के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शनिवार और रविवार को भारी बर्फबारी हुई। अचानक हुई बर्फबारी के कारण पूर्वी सिक्किम के ऊंचाई वाले इलाकों में घूमने गए पर्यटक फंस गए। फंसे हुए पर्यटकों का भारतीय सेना द्वारा सफलतापूर्वक बचाया गया।
भारतीय सेना के पीआरओ ने रविवार को बताया कि, 22 फरवरी को हुई अचानक भारी बर्फबारी तथा शून्य से नीचे पहुंचे तापमान के कारण संवेदनशील सड़क मार्गों पर कई पर्यटक वाहनों की आवाजाही रुक गई। इसके चलते पर्यटक कठोर मौसम की चपेट में आ गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना ने ऑपरेशन हिमराहत शुरू किया और जवान तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।इस अभियान के दौरान कुल 46 पर्यटकों को सुरक्षित निकालकर नजदीकी सेना शिविर में पहुंचाया गया। शिविर में सभी पर्यटकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा उन्हें गर्म आश्रय, भोजन, चिकित्सा और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे अत्यधिक ठंड और ऊंचाई से संबंधित समस्याओं से बचाव हो सके।इसके अतिरिक्त, सेना ने 150 से अधिक पर्यटक वाहनों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में भी सहायता की। इस समन्वित प्रयास से यातायात व्यवस्था बहाल करने, अफरा-तफरी रोकने और उच्च हिमालयी क्षेत्र में संभावित जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली।बताया गया कि यह अभियान दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ऑपरेशन हिमराहत के तहत की गई समय पर कार्रवाई से प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित हुई, आवागमन बहाल हुआ और खराब मौसम के बीच स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सका। - गुंटूर (आंध्र प्रदेश). केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को बताया कि भारतीय डाक के पास लगभग 38 करोड़ बचत खाते हैं, जिनमें 22 लाख करोड़ रुपये की धनराशि जमा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारतीय डाक में सुकन्या समृद्धि योजना के 3.8 करोड़ खाते हैं, जिनमें 2.27 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। सुकन्या समृद्धि योजना एक सरकारी बचत योजना है, जो लड़कियों के माता-पिता के लिए बनाई गई है। इसके जरिए वे अपनी बेटी की पढ़ाई और भविष्य के लिए पैसे बचा सकते हैं। ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन में सिंधिया ने बताया कि भारतीय डाक का मेल नेटवर्क तेजी से आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए डाक को आसानी से और जल्दी छांटने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, साथ ही रेडियो आवृत्ति पहचान (आरएफआईडी), बारकोड और क्यूआर कोड जैसी प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि डाक सेवाओं की गति और गुणवत्ता बेहतर हो सके। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''डाकघर बचत बैंक खातों की संख्या लगभग 38 करोड़ है। 140 करोड़ की आबादी वाले देश में, यह महत्वपूर्ण है। देश भर में ग्रामीण डाक सेवकों द्वारा 22 लाख करोड़ रुपये का प्रबंधन किया जा रहा है।
- पथनमथिट्टा (केरल). प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में जिस दस माह की अंगदाता आलिन शेरिन का जिक्र किया, उसके दादा ने परिवार का उल्लेख करने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। केरल की सबसे कम उम्र की अंगदाता आलिन के दादा रेजी सैमुअल ने यहां मल्लापल्ली में पत्रकारों से कहा कि शोकाकुल परिवार को इस बात से कुछ राहत मिली है कि भारत सरकार ने रेडियो संबोधन में उनका जिक्र किया, जिससे दूसरों को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा, '' एक तरफ हम बच्ची की मौत से दुखी हैं, वहीं दूसरी तरफ हमें खुशी है कि देश ने इसे स्वीकार किया है।'' सैमुअल ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर परिवार की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''हमने यह प्रचार या प्रसिद्धि के लिए नहीं किया। हमें केवल उन लोगों के प्रति सहानुभूति है जो इस तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं और तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे हैं।'' दरअसल, अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' में मोदी ने केरल की 10 महीने की बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम की मौत के बारे में बात की, जिसके माता-पिता ने उसके अंग दान करने का फैसला किया था। आलिन शेरिन अपनी मां और नाना-नानी के साथ पांच फरवरी को यात्रा कर रही थी कि तभी कोट्टायम के पास पल्लम में एमसी रोड पर एक सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। चिकित्सकों ने 12 फरवरी को उसे 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया। इसके बाद उसके परिवार ने अंगदान का फैसला किया था।
- भुवनेश्वर. ओडिशा के झारसुगुडा जिले में रविवार तड़के राष्ट्रीय राजमार्ग 49 पर एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर में कम से कम पांच पुलिसकर्मियों की मौत हो गई तथा चार लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह दुर्घटना झारसुगुडा सदर पुलिस थाना क्षेत्र में ओडिशा आदर्श विद्यालय के पास हुई, जब आठ पुलिसकर्मी झारसुगुडा में एक विवाह समारोह से लौट रहे थे और ट्रक विपरीत दिशा से आ रहा था। झारसुगुडा की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुसिक्ता मिश्रा ने बताया, ''हादसे में झारसुगुडा जिले के पांच पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का बरगढ़ के एक निजी अस्पताल में इलाज हो रहा है। एक अन्य घायल पुलिसकर्मी की हालत स्थिर बताई जा रही है।'' उन्होंने बताया कि दुर्घटना में ट्रक चालक भी घायल हो गया और उसका इलाज हो रहा है।मिश्रा ने कहा, ''घटना के सिलसिले में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।''उन्होंने बताया कि टक्कर के बाद ट्रक एक तरफ पलट गया और पुलिस का वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।घटना में मारे गए पुलिसकर्मियों की पहचान सशस्त्र पुलिस रिजर्व (एपीआर) के काशीराम भोई, देबदत्त शाह और लिंगराज धरुआ, ड्रिल उप-निरीक्षक निरंजन कुजुर और होम गार्ड भक्तबंधु मिर्धा के रूप में हुई है। इसके अलावा, दुर्घटना में सार्जेंट राजीव भारसागर सहित एपीआर कर्मी दुबराज मिरिगा और आकाश नायक घायल हो गए। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घटना में मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया और घायल पुलिसकर्मियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। माझी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''झारसुगुडा में एक सड़क हादसे में पांच पुलिसकर्मियों की असामयिक मृत्यु के बारे में जानकर मैं अत्यंत व्यथित और दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने के साथ-साथ मैं ईश्वर से इस हादसे में घायल हुए अन्य लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।'' मुख्यमंत्री ने पांचों दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) से दी जाएगी। स्थानीय विधायक टंकाधर त्रिपाठी ने झारसुगुडा अस्पताल का दौरा किया। घटना में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के शव इसी अस्पताल में रखे गए हैं।
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गुवाहाटी. कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा रविवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए। इसके कुछ ही घंटों बाद, भाजपा ने बोरा को प्रदेश कार्यकारी समिति में शामिल किया। भाजपा की असम इकाई के मुख्यालय 'वाजपेयी भवन' में आयोजित एक समारोह के दौरान बोरा भाजपा के सदस्य बन गए। उनके साथ ही पूर्व कांग्रेस नेता संजू बोरा, राजेश कुमार जोशी, कंगन दास, गगन चंद्र बोरा और विपक्षी दल के कई अन्य कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हो गए। बोरा ने 16 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसे पार्टी आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया था और वरिष्ठ नेता उनके आवास पर पहुंचे थे। राहुल गांधी ने भी उनसे बात की थी। बोरा ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए समय मांगा था लेकिन अगले दिन मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा उनके आवास पर गए और घोषणा की कि वह 22 फरवरी को भाजपा में शामिल हो जाएंगे। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मार्च-अप्रैल में चुनाव होना है।
बोरा ने भाजपा में शामिल होने के बाद कहा, ''मैंने कांग्रेस से यह सोचकर इस्तीफा नहीं दिया था कि मैं भाजपा में शामिल हो जाऊंगा। मैंने यह सोचकर इस्तीफा दिया था कि कांग्रेस में हुई गलतियों के बारे में आत्मनिरीक्षण किया जाएगा और मुझे यह उम्मीद थी कि उन्हें सुधारने का वादा किया जाएगा।''' उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी ''भावनाओं को ठेस पहुंचाई'' है।
बोरा ने आरोप लगाया, ''कांग्रेस ने असमिया समुदाय की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है। मैंने विचारधारा, अंतरात्मा और देशभक्ति के साथ 32 वर्षों तक कांग्रेस की सेवा की; लेकिन अब मुझे दुख हुआ है।'' भाजपा में बोरा का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि बोरा के भीतर ''कुछ कड़वाहट'' हो सकती है क्योंकि उन्होंने 32 से अधिक वर्षों तक कांग्रेस की सेवा करने और बहुत योगदान देने के बाद पार्टी छोड़ दी। उन्होंने कहा, ''आज से भाजपा में उनका नया जीवन शुरू होता है। अब वह पार्टी के गौरवान्वित सदस्य हैं। भाजपा परिवार उनका ख्याल रखेगा और उन्हें प्यार एवं सम्मान देगा।'' सैकिया ने भी बोरा और सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल होने वाले अन्य कांग्रेस नेताओं का स्वागत किया।
उन्होंने कहा, ''आज से भाजपा कार्यकर्ताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के कार्यों से प्रेरित होकर नए कार्यकर्ता आगे आए हैं।'' सैकिया ने कहा कि बोरा का राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक दक्षता भाजपा को मजबूत करेगी।
इस बीच, भाजपा ने घोषणा की कि सैकिया के निर्देशों के अनुसार बोरा को तत्काल प्रभाव से प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिए लोगों को ओटीपी, आधार नंबर या बैंक खातों के विवरण साझा न करने के सुझाव दिए। मोदी ने रेडियो पर अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि ओटीपी, आधार नंबर या बैंक खाते संबंधी जानकारी किसी को भी न दें। उन्होंने कहा कि जैसे हर मौसम के साथ खान-पान, पहनावा भी बदल जाता है, वैसे ही नियम से हर कुछ दिन के बाद अपना पासवर्ड भी बदल देना चाहिए। मोदी ने कहा कि उन्होंने पूर्व में 'डिजिटल अरेस्ट' के बारे में विस्तार से बात की थी, जिससे डिजिटल धोखाधड़ी और ऑनलाइन घोटालों के बारे में जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि हालांकि, ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। उन्होंने कहा कि 'डिजिटल अरेस्ट' और वित्तीय धोखाधड़ी के माध्यम से कई लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और अक्सर वरिष्ठ नागरिकों से उनकी जीवन भर की कमाई ठग ली जाती है। प्रधानमंत्री ने सभी से सतर्क रहने का आग्रह किया और सलाह दी कि केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) या पुनः केवाईसी प्रक्रियाएं केवल बैंक शाखाओं, आधिकारिक ऐप या अधिकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ''ओटीपी, आधार नंबर या बैंक खाते संबंधी जानकारी किसी को भी न दें और सबसे अहम बात, अपने पासवर्ड को समय-समय पर जरूर बदलते रहें। जैसे हर मौसम के साथ खान-पान बदल जाता है, पहनावा भी बदल जाता है, वैसे ही नियम बना लीजिए कि हर कुछ दिन के बाद आपको अपना पासवर्ड भी बदल लेना है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि कारोबारियों से भी धोखाधड़ी की खबरें देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा, ''कोई फोन करता है और कहता है– मैं एक बड़ा अधिकारी हूं। आपको कुछ विवरण साझा करने होंगे। इसके बाद भोले-भाले लोग ऐसा ही कर बैठते हैं। इसीलिए, आपका सतर्क रहना, जागरूक रहना बेहद जरूरी है।'' केवाईसी प्रक्रिया का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब लोगों को बैंकों से केवाईसी अपडेट का अनुरोध करने वाले संदेश प्राप्त होते हैं, तो वे हैरान हो सकते हैं कि यह क्यों आवश्यक है, क्योंकि वे पहले ही प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ''मेरा आपसे आग्रह है, झुंझलाइए नहीं, ये आपके पैसे की सुरक्षा के लिए ही है। हम सभी जानते हैं कि आजकल पेंशन, सब्सिडी, बीमा, यूपीआई सब कुछ बैंक खाते से जुड़ा है। इसी वजह से बैंक समय-समय पर पुन: केवाईसी करते हैं, ताकि आपका बैंक खाता सुरक्षित रहे।'' मोदी ने कहा, ''आपको एक बात याद रखनी है। जो अपराधी हैं, वे फर्जी कॉल करते हैं, एसएमएस और लिंक भेजते हैं। इसीलिए हमें सतर्क रहना है और ऐसे धोखेबाजों के झांसे में नहीं आना है।'' मोदी ने उल्लेख किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल में इन मुद्दों पर केंद्रित एक वित्तीय साक्षरता सप्ताह आयोजित किया और यह अभियान पूरे साल जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से आरबीआई की सलाह मानने और अपना केवाईसी अपडेट रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ''याद रखिए– सही केवाईसी, समय पर पुन: केवाईसी करे खाता सुरक्षित। सशक्त नागरिक बनें, क्योंकि सशक्त नागरिकों से ही बनता है मजबूत और आत्मनिर्भर भारत।''
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को त्योहारों के दौरान 'स्वदेशी' उत्पादों के उपयोग की पुरजोर वकालत की और लोगों से हमेशा 'वोकल फॉर लोकल' रहने का आग्रह किया। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि इस्लाम का पवित्र माह रमजान मनाया जा रहा है और उन्होंने सभी को इसके लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों में होली का पर्व भी आ रहा है और इसका मतलब है कि रंग, गुलाल तथा हंसी-खुशी से भरा समय दस्तक देने वाला है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''आप सभी अपने परिवार और अपनों के साथ खुशी से सारे त्योहार मनाएं। और हां, कुछ मंत्र हमेशा याद रखें जैसे 'वोकल फॉर लोकल। प्रधानमंत्री ने कहा कि होली उत्सव या अन्य उत्सवों में भी कई विदेशी उत्पाद बाजार में आ गए हैं।
उन्होंने कहा, ''इन्हें त्योहारों से दूर रखिए, होली से भी दूर रखिए और 'स्वदेशी' अपनाइए। जब आप स्वदेशी खरीदते हैं तो देश को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में भी मदद करते हैं।'' -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में केरल के एक गांव को एक ही खेत में धान की 570 किस्में उपजाने में मिली सफलता और ओडिशा के एक किसान द्वारा भूमि के बेहतर उपयोग एवं पानी की बचत के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने के बारे में बताया। मोदी ने कहा कि देश के किसानों की मेहनत का असर आंकड़ों में भी दिख रहा है और भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है। उन्होंने कहा कि 15 करोड़ टन से अधिक चावल का उत्पादन कोई छोटी उपलब्धि नहीं है क्योंकि देश अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही वैश्विक खाद्य भंडार में भी योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं हैं बल्कि वे धरती के सच्चे साधक हैं और लोगों को उनसे सीखना चाहिए कि मिट्टी से सोना कैसे बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कई किसान परंपरा और प्रौद्योगिकी को साथ लेकर चल रहे हैं और कुछ किसान न केवल उत्पादन पर बल्कि गुणवत्ता और नये बाजारों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा में हिरोद पटेल नाम के एक युवा किसान की कहानी बहुत प्रेरक है। करीब आठ साल पहले तक वह अपने पिता शिव शंकर पटेल के साथ पारंपरिक ढंग से धान की खेती करते थे लेकिन फिर उन्होंने खेती को नये नजरिए से देखना शुरू किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ''उन्होंने अपने खेत के तालाब के ऊपर मजबूत जालीदार ढांचा बनाया। उस पर बेल वाली सब्जियां उगाई, तालाब के चारों ओर केले, अमरूद और नारियल के पौधे लगाए तथा तालाब में मछली पालन भी शुरू किया।'' उन्होंने कहा कि यानी एक ही जगह पर पारंपरिक खेती भी हो रही है, सब्जियां-फल भी उगाए जा रहे हैं और मछलीपालन भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे जमीन का बेहतर उपयोग हुआ, पानी की बचत हुई और अतिरिक्त आमदनी भी मिली। मोदी ने कहा, ''आज दूर-दूर से किसान उनका यह मॉडल देखने आते हैं।''
प्रधानमंत्री में कहा कि केरल के त्रिशूर में एक गांव ऐसा भी है जहां एक ही खेत में धान की 570 किस्में लगायी जाती हैं। उन्होंने कहा, ''इसमें स्थानीय किस्में भी हैं, हर्बल किस्में भी हैं और दूसरे राज्यों से लायी गयी प्रजातियां भी हैं। यह केवल खेती नहीं है बल्कि बीजों की विरासत को बचाने का महा अभियान है।'' मोदी ने कहा कि कृषि उत्पाद अब हवाई मार्ग से विदेशों तक अधिक आसानी से पहुंच रहे हैं, जैसे कर्नाटक के नंजनगुड केले, मैसूरु के पान के पत्ते और इंडी नींबू मालदीव को निर्यात किए गए। उन्होंने कहा, ''ये उत्पाद अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं और इन्हें जीआई टैग भी मिला है। आज का किसान गुणवत्ता भी चाहता है, उत्पादन भी बढ़ा रहा है और अपनी पहचान भी बना रहा है।'' -
लखनऊ. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को मेरठ में लगभग 12,930 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कहा कि भाजपा की कार्य-संस्कृति यह सुनिश्चित करती है कि परियोजनाओं की नींव रखे जाने के बाद वे समय पर पूरी हो जाएं। मोदी ने मेरठ में शताब्दी नगर नमो भारत स्टेशन पर मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के बाद यहां आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज का यह कार्यक्रम भाजपा की ''डबल इंजन'' सरकार की कार्य-संस्कृति को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, ''हमारी कार्य-संस्कृति है कि जिस कार्य का शिलान्यास किया जाए, उसे पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया जाए।'' प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत बाबा औघड़नाथ को स्मरण करते हुए की। उन्होंने कहा, ''इस पावन धरती पर, मेरठ की क्रांति धरा पर, आज 'विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत' के लिए नयी क्रांति को ऊर्जा मिल रही है।'' मोदी ने कहा, ''आज पहली बार एक ही मंच से नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो सेवा का एक ही दिन शुभारंभ हो रहा है। विकसित भारत की कनेक्टिविटी कैसी होगी, यह उसकी शानदार झांकी है।'' उन्होंने कहा, ''शहर के लिए मेट्रो और क्लीन सिटी के विजन को गति देने के लिए नमो भारत जैसी आधुनिक ट्रेन, मुझे संतोष है कि यह काम उत्तर प्रदेश में हुआ है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''अब परियोजनाएं पहले की तरह लटकती-झटकती नहीं हैं, नमो भारत या मेट्रो सेवा का शिलान्यास का अवसर आप सबने मुझे दिया था, और मुझे ही इनके लोकार्पण का सौभाग्य मिला है।'' अपनी मेट्रो यात्रा का संस्मरण सुनाते हुए मोदी ने कहा, ''साथियो, कुछ देर पहले मेट्रो में सफर किया, छात्रों और अन्य यात्रियों से बातचीत हुई, सबका यही कहना था कि इतने शानदार काम की कल्पना भी नहीं की थी।'' उन्होंने कहा कि सब पुराने दिनों को याद कर रहे थे और बहन-बेटियों ने बताया कि कुछ साल पहले तक शाम होते ही पूरे मार्ग पर सन्नाटा छा जाता था और यहां डर एवं भय का माहौल होता था। मोदी ने व्यवस्था में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा, ''एक तरफ कानून-व्यवस्था भी सुधरी है और दूसरी तरफ लोगों को सुविधापूर्ण एवं सुरक्षित यात्रा का माहौल मिला है। नमो भारत रैपिड रेल भारत के सामर्थ्य का प्रतीक बनी है।'' उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार और यात्रा के सुरक्षित होने से अब इस क्षेत्र का कायापलट हो गया है। मोदी ने अधिकतर कार्यों में बेटियों की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कांग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि विपक्षी पार्टी के शासन के दौरान देश भर में केवल पांच शहरों में मेट्रो चालू थी, जबकि भाजपा सरकार में मेट्रो सेवाओं का विस्तार 25 से अधिक शहरों तक हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था जब कांग्रेस सरकार चाहकर भी विकसित देशों के साथ समझौते को अंतिम रूप नहीं दे पाती थी। मोदी ने मेरठ, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के लोगों को देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल सेवा और मेरठ मेट्रो के लिए बधाई देते हुए मेरठ से अपने रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''मेरठ की इस धरती से मेरा एक विशेष नाता रहा है। 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव हुए तो मेरठ से ही मेरी चुनावी सभाओं की शुरुआत हुई।'' मोदी ने कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा, "साथियों मैंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को लेकर कहा था कि अपनी जहरीली राजनीति छोड़िए और चलिये विकास के मुद्दे पर मुकाबला करके देखते हैं। इन दलों ने तो अपनी जहरीली राजनीति नहीं बदली लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अगर किसी एक बात को सर्वोपरि रखा तो वह है देश का विकास।" प्रधानमंत्री ने दावा किया कि केंद्र में जब कांग्रेस की सरकार थी और समाजवादी पार्टी उसका सहयोग कर रही थी तब मूलभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं घोटाले में ही गुम हो जाया करती थी और मेट्रो रेल तथा उससे जुड़ी अधिकतर प्रौद्योगिकी को विदेश से आयात करना पड़ता था। उन्होंने यह भी कहा कि मगर भाजपा ने घोटाले को खत्म किया और देश को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ाया। मोदी ने कहा कि नमो भारत ट्रेन और मेट्रो रेल की विस्तारित सेवा से मेरठ के हजारों लोगों को फायदा होगा जो पढ़ाई या नौकरी के लिए रोजाना दिल्ली आते जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब उनके लिए दिल्ली में किराए के घर में रहने की मजबूरी भी खत्म हो गई है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि हाल के वर्षों में भाजपा की सरकार ने जो वैश्विक समझौते किये हैं, उनसे लघु और कुटीर उद्योगों से जुड़े लोगों को भी बहुत फायदा होने वाला है। मोदी ने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी जिक्र किया और कहा कि उनकी सरकार का सौभाग्य है कि उसने सिंह को 'भारत रत्न' से सम्मानित किया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार चौधरी चरण सिंह के दृष्टिकोण पर चलते हुए किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 10 साल पहले पश्चिम उत्तर प्रदेश सांप्रदायिक दंगों, अपराधियों के गिरोहों, खराब सड़कों और पिछड़े पान की वजह से चर्चा में रहता था मगर अब उत्तर प्रदेश को विकास के लिए जाना जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा, "आज उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश इस देश का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है।"
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हैदराबाद. शीर्ष माओवादी तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देवजी तेलंगाना के जगतियाल जिले का निवासी है और उसका आत्मसमर्पण प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए एक झटका माना जा सकता है। माना जाता है कि देवजी (62) ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माओवादी (भाकपा-माओवादी)के दिवंगत महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजु का स्थान लिया था, जिसकी मई 2025 में मृत्यु हो गई थी। अधिकारी ने बताया कि एक शीर्ष माओवादी मल्ला राजी रेड्डी और भाकपा(माओवादी)के कई कार्यकर्ताओं ने भी आत्मसमर्पण कर दिया है। अधिकारी ने बताया कि इन माओवादियों का आत्मसमर्पण केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए निर्धारित मार्च 2026 की समय सीमा से कुछ दिन पहले हुआ है। उन्होंने ' कहा, "कुछ दिनों में आत्मसमर्पण करने वालों को आधिकारिक तौर पर जनता के सामने लाया जाएगा ...वे तेलंगाना पुलिस के साथ हैं।'' खबरों के अनुसार, देवजी पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का गठन किया था और भाकपा (माओवादी) के प्रमुख केंद्रीय समिति सदस्य और माओवादी पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य बना था। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी शिवधर रेड्डी ने 15 फरवरी को राज्य के लगभग 15 बचे हुए चरमपंथियों सहित सभी भूमिगत भाकपा (माओवादी) पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से हथियार डालने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जो लोग मुख्यधारा में शामिल होने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें राज्य सरकार की ''आत्मसमर्पण और पुनर्वास योजना'' के तहत तत्काल सहायता और लाभ प्रदान किए जाएंगे। रेड्डी ने पहले कहा था कि पिछले दो वर्षों में तेलंगाना पुलिस के निरंतर प्रयासों से विभिन्न स्तरों के 588 माओवादी सामान्य जीवन में लौट आए हैं।
- ग्रेटर नोएडा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि विकसित भारत की नींव आत्म-निर्भरता के आधार पर रखी जाएगी, जिसके लिए भारत में निर्मित सेमीकंडक्टर चिप का होना बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने एचसीएल ग्रुप और फॉक्सकॉन के संयुक्त उद्यम 'इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड' के सेमीकंडक्टर संयंत्र का ऑनलाइन माध्यम से शिलान्यास करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान छोटी चिप की कमजोर आपूर्ति शृंखला ने कई अर्थव्यवस्थाओं के विकास को रोक दिया था और विभिन्न कारखानों में काम ठप हो गया था। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "विकसित भारत का निर्माण तभी होगा जब भारत आत्मनिर्भर बनेगा। इसके लिए भारत में बनी चिप बहुत जरूरी हैं। इस दशक में भारत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो भी कर रहा है, वह 21वीं सदी में हमारी क्षमता की नींव बनेगा।" उन्होंने कहा कि भारत में चिप का निर्माण होने से हमारे आधुनिक उपकरणों के उत्पादन के लिए देश को अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कोविड-19 महामारी के दौरान चिप की आपूर्ति बाधित हुई, तो कारखाने ठप पड़ गए और वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं लड़खड़ा गईं। भारत ने उस संकट से सबक लिया और उसे एक अवसर में बदल दिया। हमने चिप विनिर्माण के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया और इसके लिए हम देश में एक संपूर्ण 'सेमीकंडक्टर परिवेश' तैयार कर रहे हैं।" एचसीएल ग्रुप और फॉक्सकॉन का संयुक्त उद्यम 'इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड' ग्रेटर नोएडा के जेवर में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अंतर्गत एक 'आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट' (ओसैट) संयंत्र स्थापित करेगा। एचसीएल और फॉक्सकॉन की यह संयंत्र प्रौद्यागिकी के लिए एक 'शक्ति के केंद्र' के रूप में उत्तर प्रदेश की पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश से सांसद के रूप में अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश का सांसद होने के नाते, यह मेरे लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। यह सेमीकंडक्टर संयंत्र उत्तर प्रदेश और पूरे भारत के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।" प्रधानमंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि भले ही भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी यात्रा थोड़ी देरी से शुरू की है, लेकिन अब यह अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने तेल और प्रौद्योगिकी के बीच के ऐतिहासिक बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, "20वीं सदी में जिन देशों के पास तेल था, उनके पास समृद्धि और शक्ति थी। लेकिन 21वीं सदी में यह शक्ति एक छोटी सी 'चिप' में समाहित है। अब शक्ति का केंद्र वे कौशल और सामग्रियां हैं, जो इस चिप से जुड़ी हुई हैं।" इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड 60:40 हिस्सेदारी वाला एचसीएल ग्रुप और फॉक्सकॉन का संयुक्त उपक्रम है। इस उन्नत ओसैट संयंत्र का परिचालन वर्ष 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी ने अगले कुछ वर्षों में इस परियोजना पर 3,700 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है। इस निवेश से 3,500 से अधिक प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इसके साथ ही स्थानीय आपूर्ति शृंखला के विकास और सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में पारिस्थितिकी भागीदारों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। इस संयंत्र में प्रति माह 20,000 वेफर यानी सिलिकॉन प्लेट के प्रसंस्करण की क्षमता होगी। इस इकाई का भारत की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने और आत्मनिर्भर, सुदृढ़ सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने का इरादा है। इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के एक 'शक्ति-केंद्र' के रूप में स्थापित किया है। भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात करने वाले दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल हो गया है। इस संयंत्र से हर महीने 3.6 करोड़ चिप का उत्पादन होगा। आप जो डिजिटल स्क्रीन देखते हैं, उनका 'दिमाग' (चिप) अब जेवर में तैयार किया जाएगा।" उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए एक 'आभूषण' के रूप में उभर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश का विकास, चिप विनिर्माण को लेकर प्रधानमंत्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा। फॉक्सकॉन कंपनी के 'सेमीकंडक्टर बिजनेस ग्रुप' के अध्यक्ष बॉब चेन ने कहा, "आज हम 'इंडिया चिप' का भूमि पूजन कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य भारत में एक विश्वसनीय सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग संयंत्र स्थापित करने का है। हम साथ मिलकर आगे बढ़ने और वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य में भारत के विकास में योगदान देने के लिए तत्पर हैं।" इस मौके पर एचसीएल ग्रुप की चेयरपर्सन रोशनी नाडर ने कहा कि यह संयुक्त उद्यम इकाई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों की जरूरतों को पूरा करेगी।
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अयोध्या (उप्र)। अयोध्या में राम मंदिर की सुरक्षा दीवार का काम पूरा करने के लिए जन्मभूमि परिसर से सटी जमीन के मालिकों से अधिग्रहण पर बातचीत चल रही है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि ये सुरक्षा दीवार लगभग 12 मीटर ऊंची और 14 फीट चौड़ी है और इस दीवार के निर्माण पर लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत आयेगी। सूत्रों ने बताया कि यह सुरक्षा दीवार लगभग 70 एकड़ क्षेत्र को कवर करेगी और इसका कुल घेरा लगभग चार किलोमीटर होगा। उन्होंने बताया कि टेढ़ी बाज़ार से दुराही कुआं रोड पर गोकुल भवन बैरियर के सामने परिसर के अंदर काम शुरू हो गया है। सूत्रों ने बताया कि पाइलिंग के लिए खुदाई पूरी हो गई है और मंदिर के पश्चिमी हिस्से में निर्माण का काम तेज़ी से हो रहा है, जबकि सीधी घेरा पक्का करने के लिए जमीन अधिग्रहण के बारे में संबंधित जमीन मालिकों से बातचीत चल रही है। मंदिर के सूत्रों ने बताया कि निर्माण का काम रक्षा मंत्रालय के उपक्रम 'इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड' की विशेषज्ञ निगरानी में किया जा रहा है, क्योंकि यह सुरक्षा दीवार कोई सामान्य घेरा नहीं है, बल्कि सेंसर और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होगी। सूत्रों ने बताया कि परियोजना को लागू करने का काम उत्तराखंड की दो एजेंसियों को अलग-अलग जगहों पर सौंपा गया है। सूत्रों ने कहा, ''मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए लगभग तीन दर्जन 'वाच टावर' भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें से लगभग एक दर्जन पूरे हो चुके हैं।
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नयी दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापक शुल्क आदेशों को उच्चतम न्यायालय की तरफ से रद्द कर दिए जाने के बाद अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर नया वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा की है जिसके तहत भारत को अब पहले के 25 प्रतिशत के बजाय केवल 10 प्रतिशत के जवाबी सीमा शुल्क का ही सामना करना होगा। ट्रंप की इस घोषणा के मुताबिक, यह अस्थायी आयात शुल्क 10 प्रतिशत का होगा और 24 फरवरी से 150 दिनों की अवधि के लिए लागू रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' ने 20 फरवरी को इस संबंध में एक आधिकारिक घोषणा जारी की।
आयात शुल्क वह कर है जो कोई देश अन्य देशों से आयात की गई वस्तुओं पर लगाता है। आयातक को यह शुल्क सरकार को चुकाना होता है। आम तौर पर कंपनियां यह शुल्क अंतिम उपयोगकर्ता या उपभोक्ता पर डाल देती हैं। इस वजह से आयातित वस्तुएं उस देश में महंगी हो जाती हैं। जहां तक जवाबी शुल्क का सवाल है तो इस कर को अमेरिका ने पहली बार लगाया था। अप्रैल, 2025 में अमेरिका ने भारत सहित लगभग 60 देशों पर यह शुल्क लगाया था, ताकि अमेरिकी निर्यातकों को समान अवसर मिल सके। उदाहरण के लिए, यदि कोई देश अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश की वस्तुओं पर उतना ही शुल्क लगाएगा। यह मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त लगाया जाता है। भारत के संदर्भ में अमेरिका ने अप्रैल, 2025 में 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। जुलाई में यह 25 प्रतिशत कर दिया गया और अगस्त में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया गया। इस तरह भारतीय उत्पादों पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया। फरवरी की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद अमेरिका ने कहा कि भारत पर यह शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा और अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि फिलहाल भारत की वस्तुओं पर अमेरिका में 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क लागू है।
हालांकि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप के वैश्विक शुल्क आदेशों को रद्द करने के बाद और ट्रंप द्वारा नया आदेश जारी करने के बाद 24 फरवरी, 2026 से भारतीय उत्पादों पर केवल 10 प्रतिशत जवाबी शुल्क ही लगेगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी वस्तु पर अमेरिका में सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) के तौर पर पहले से पांच प्रतिशत शुल्क लागू है, तो अब इसके ऊपर 10 प्रतिशत जोड़कर कुल 15 प्रतिशत शुल्क लगेगा। पहले यह पांच प्रतिशत एमएफएन और 25 प्रतिशत आपसी समान शुल्क मिलकर कुल 30 प्रतिशत हो जाता था। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा कि कुछ वस्तुओं पर यह अस्थायी आयात शुल्क लागू नहीं होगा। इसमें महत्वपूर्ण खनिज, मुद्रा और सोने में उपयोग होने वाली धातुएं, ऊर्जा एवं ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक शामिल हैं, जिन्हें अमेरिका में उगाया या उत्पादित नहीं किया जा सकता या पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, गोमांस, टमाटर, संतरे, दवाएं एवं औषधीय सामग्री, कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, यात्री वाहन, हल्के, मध्यम एवं भारी वाहन, बसें और इन वाहनों के कलपुर्जे और कुछ अंतरिक्ष उत्पाद भी इस शुल्क से मुक्त रहेंगे। भारत पर उद्योग क्षेत्रों के हिसाब से लागू शुल्क की बात करें तो इस्पात, एल्युमिनियम और तांबे पर 50 प्रतिशत और वाहनों के कुछ पुर्जों पर 50 प्रतिशत शुल्क जारी रहेगा। अमेरिका का कहना है कि वह भारत के साथ व्यापार घाटा झेल रहा है। उसका आरोप है कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यात भारतीय बाजार में सीमित हो जाता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और अमेरिका अगले महीने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बदले हुए हालात में भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लाभों का नए सिरे से मूल्यांकन करना चाहिए। आर्थिक शोध संस्था जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि "व्यापार समझौते कोई दान नहीं हैं। इसमें दोनों पक्षों को लाभ होना चाहिए। अब भारत के लाभों का पुनर्मूल्यांकन होना जरूरी है।" राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बावजूद भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने अमेरिका में आयातित सभी वस्तुओं पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क लागू करने की भी घोषणा की। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हैं। 2021 से 2025 के दौरान अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें भारत के पक्ष में 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा। सेवाओं के क्षेत्र में भारत ने 28.7 अरब डॉलर का निर्यात किया और 25.5 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे 3.2 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ हुआ। -
गुवाहाटी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च की समयसीमा तक देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। पूर्वोत्तर में पहली बार आयोजित 87वीं सीआरपीएफ दिवस परेड को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां पत्थरबाजी की घटनाओं की संख्या घटकर शून्य हो गई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मणिपुर में जातीय हिंसा से निपटने और केवल तीन वर्षों में माओवादियों की कमर तोड़ने के लिए भी सीआरपीएफ को तैनात किया गया। उन्होंने कहा, ''मैं सीआरपीएफ पर भरोसा कर सकता हूं और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम 31 मार्च, 2026 तक देश से नक्सल समस्या का सफाया कर देंगे।'' गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुटा पहाड़ियों में 21 दिनों के 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' के लिए सीआरपीएफ की प्रशंसा की, जिसमें अप्रैल-मई 2025 में 31 नक्सली मारे गए थे। उन्होंने कहा कि 46 डिग्री सेल्सियस के तापमान में काम करते हुए, जब पसीने में प्रतिदिन 15 लीटर पानी बह जाता था, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने झुलसा देने वाली गर्मियों का सामना करते हुए पहाड़ को नक्सलियों के चंगुल से मुक्त कराया और उनके गढ़ को ध्वस्त कर दिया। शाह ने कहा कि 10-11 साल पहले देश में ''जख्मों को कुरेदने वाले'' तीन बड़े 'हॉटस्पॉट' थे-जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर में नक्सलवाद और उग्रवाद-जो अब शांति और प्रगति के केंद्र बन गए हैं। उन्होंने कहा, "ये तीनों क्षेत्र, जो कभी बमबारी, गोलीबारी, नाकाबंदी और विनाश के लिए जाने जाते थे, आज देश के विकास का हिस्सा हैं। विकास का इंजन बनकर, वे पूरे देश के विकास को गति देने में योगदान दे रहे हैं।" गृह मंत्री ने कहा कि सीआरपीएफ के योगदान के बिना ऐसी शांति संभव नहीं होती।
उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में सीआरपीएफ के 700 जवान मारे गए, 780 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और 540 जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए। उन्होंने कहा, ''इन बलिदानों के बिना, आज इन तीनों संवेदनशील क्षेत्रों को विकास के पथ पर ले जाना असंभव होता। अगर मैं असम की बात करूं, तो 79 जवानों ने असम में शांति स्थापित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया।'' शाह ने कहा कि सीआरपीएफ के 86 साल के इतिहास में पहली बार इसकी स्थापना दिवस परेड पूर्वोत्तर में, ''हमारे असम'' में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा, ''यह हम सभी के लिए, पूरे पूर्वोत्तर के लिए गर्व की बात है।'' गृह मंत्री ने कहा ''86 वर्षों में सीआरपीएफ ने न केवल उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, बल्कि देश की सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बनकर ठोस परिणाम भी दिए हैं। इस दौरान 2,270 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। मैं उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।'' उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में एक भी गोली चलाने की जरूरत नहीं पड़ी, और इसमें सीआरपीएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गृह मंत्री ने इस अवसर पर सीआरपीएफ के 15 जवानों को वीरता पदक प्रदान किए, जबकि छह जवानों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली बटालियन को ट्राफी प्रदान की गईं। इससे पहले, सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) जी पी सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी। देश भर की विभिन्न इकाइयों से चुनी गई सीआरपीएफ की आठ टुकड़ियों ने शनिवार को यहां सरुसजाई स्टेडियम में औपचारिक परेड का आयोजन किया। परेड का नेतृत्व 225वीं बटालियन के कमांडेंट दीपक ढोंडियाल ने किया। परेड में भाग लेने वाले दस्ते में उत्तरी सेक्टर की महिला कर्मी, साथ ही उत्तर पश्चिमी सेक्टर, झारखंड, ओडिशा, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), कोबरा यूनिट और पश्चिमी और उत्तर पूर्वी सेक्टरों की टुकड़ियां शामिल थीं। सीआरपीएफ की पहली बटालियन का गठन 1939 में ब्रिटिश शासन के तहत क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस (सीआरपी) के रूप में किया गया था। स्वतंत्रता के बाद, 1949 में, प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कर दिया गया। -
नयी दिल्ली. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' के घोषणापत्र पर कुल 86 देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं। घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, डेनमार्क और जर्मनी भी शामिल हैं। यह कृत्रिम मेधा (एआई) के प्रभावों पर आयोजित शिखर सम्मेलन को वैश्विक समर्थन को दर्शाता है। वैष्णव ने कहा कि दुनिया भर के देशों ने 'सभी के कल्याण और सभी की खुशी' के सिद्धांतों को मान्यता दी है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मानव-केंद्रित एआई की दृष्टि को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है। एआई संसाधनों, सेवाओं और प्रौद्योगिकी को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने का लक्ष्य सभी देशों ने स्वीकार किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक वृद्धि के साथ सामाजिक भलाई को संतुलित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। वैष्णव ने कहा, "सिर्फ आर्थिक वृद्धि ही नहीं, सामाजिक सामंजस्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। सुरक्षा और भरोसा इस योजना के केंद्र में हैं और इन्हें मुख्य बिंदुओं में शामिल किया गया है।" उन्होंने कहा कि घोषणापत्र के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में नवाचार और मानव संसाधन के विकास पर भी जोर दिया गया है। वैष्णव ने कहा, "इन सभी क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सभी देशों ने सहमति जताई है। इस सम्मेलन में भाग लेने वाले अधिकांश देशों ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, डेनमार्क, मिस्र, इंडोनेशिया और जर्मनी शामिल हैं।" एआई इंपैक्ट समिट में केवल एआई से संबंधित बुनियादी ढांचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक का निवेश सुनिश्चित किया गया। वैष्णव ने शुक्रवार को कहा था कि इस सम्मेलन में पांच लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जो भारत की एआई पहल में घरेलू और वैश्विक मजबूत रुचि एवं सहभागिता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "प्रदर्शनी में पांच लाख से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया, बहुत कुछ सीखा और दुनिया भर के कई विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। कई स्टार्टअप को अपने काम को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। कुल मिलाकर, चर्चाओं की गुणवत्ता अद्भुत थी।" वैष्णव ने यह भी कहा कि मंत्री स्तरीय संवाद, नेताओं की बैठक, मुख्य उद्घाटन समारोह या सम्मेलन की पूरी प्रक्रिया में भागीदारी और संवाद की गुणवत्ता अत्यधिक प्रभावशाली रही।
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नयी दिल्ली,। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सिमाला प्रसाद ने अपनी नई किताब "शी गोज मिसिंग" में हर साल हजारों नाबालिग लड़कियों के गुम होने की जांच की है, साथ ही कानून प्रवर्तन और समाज के "ध्यान नहीं देने, सवाल नहीं करने या कार्रवाई नहीं करने" पर भी बात की है। पुस्तक के प्रकाशक ओम बुक्स इंटरनेशनल ने एक बयान में कहा कि अभी जबलपुर में रेलवे की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात प्रसाद की नई किताब उन सामाजिक-मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक और व्यवस्थागत वजहों की जांच करती हैं जो छोटी लड़कियों को उनके घरों से निकालकर गुमनामी में धकेल देती हैं। उन्होंने कहा, "परंपरागत अपराध कथाओं के उलट, 'शी गोज मिसिंग' लापता लड़कियों को आंकड़ों या कभी-कभी होने वाली घटनाओं तक सीमित नहीं करती... यह घर से भाग जाने, बगावत करने या 'बुरे फैसलों' जैसी जानी-पहचानी वजहों को चुनौती देती है, और यह दिखाती है कि कैसे भावनात्मक अनदेखी, लैंगिक आधार पर स्थितियों का आकलन, डर, जबरदस्ती और संस्थागत उदासीनता मिलकर छोटी जिंदगियों को खत्म कर देती हैं।"
सच्ची घटनाओं पर आधारित इस किताब का मकसद यह दिखाना है कि कैसे गुमशुदा होना शायद ही कभी अचानक होता है, बल्कि "बार-बार चुप्पी साधने, चेतावनियों को नजरअंदाज करने और सामान्य बन गए अन्याय का नतीजा होता है।" प्रसाद किताब में लिखती हैं, "मुझे उम्मीद है कि यह किताब कार्रवाई करने के लिए आह्वान करेगी, और हमें सिर्फ आंकड़ों से आगे बढ़कर इन युवाओं की जिंदगी और भविष्य को देखने के लिए कहेगी। लड़कियों के लापता होने के कारणों को बताकर और उनके पुनर्वास के रास्ते खोजकर, मेरा मकसद पाठकों को इन मुद्दों को संवेदनशीलता और करुणा के साथ देखने के लिए जानकारी और समझ प्रदान करना है।" पुलिस सेवा में अपने पेशेवर अनुभव के आधार पर, प्रसाद एक आलोचनात्मक पक्ष भी पेश करती हैं, जिसमें यह बताया गया है कि कैसे कानून प्रवर्तन और प्रशासनिक तंत्र "अक्सर सही से प्रतिक्रिया नहीं देते"। प्रसाद एक गांव में एक महिला की हत्या की तुलना में एक लापता लड़की के मामले से निपटने के तरीके का उदाहरण देती हैं, जहां वह अपने करियर की शुरुआत में तैनात थीं। हत्या की घटना पर तो पुलिस बल और स्थानीय प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का पूरा ध्यान गया, लेकिन 15 साल की लड़की के गायब होने के मामले को सुबह की 'ब्रीफिंग' में एक वाक्य में समेट दिया गया। वह किताब में लिखती हैं, "मैं हैरान थी: मामला जघन्य था, फिर भी इसे इस तरह नहीं देखा गया। हम इसकी गंभीरता नहीं समझ सके। और 'हम' से मेरा मतलब है प्रत्येक पक्ष से है जिसमें मैं भी शामिल हूं तथा पुलिस और पूरा समाज भी है।"











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