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नई दिल्ली। राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC) और भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने भारतीय चिकित्सा प्रणाली में नवाचार, बौद्धिक संपदा (आईपी) प्रबंधन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अनुसंधान के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।यह समझौता NRDC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर (सेवानिवृत्त) अमित रस्तोगी और NCISM की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर के बीच हुआ। इस अवसर पर आयुर्वेद बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अल्लमप्रभु गुड्डा, यूनानी, सिद्ध एवं सोवा-रिग्पा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. असीम अली खान, आयुर्वेद बोर्ड के सदस्य डॉ. अतुल बाबू वार्ष्णेय तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।समझौते के तहत NCISM से संबद्ध संस्थानों और भारतीय चिकित्सा पद्धति के पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा विकसित नवाचारों और बौद्धिक संपदा की पहचान, संरक्षण, विकास और व्यावसायीकरण के लिए एक व्यापक सहयोग तंत्र तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में अनुसंधान को उद्योग और बाजार से जोड़कर नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना है।इस साझेदारी के तहत NRDC पेटेंट और ट्रेडमार्क पंजीकरण, बौद्धिक संपदा संरक्षण, प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, लाइसेंसिंग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्योगों से साझेदारी और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण में अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। साथ ही नवाचारकर्ताओं को मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन सहायता, उद्योग-प्रायोजित अनुसंधान तथा प्रभावी आईपी प्रबंधन और व्यावसायीकरण रणनीति तैयार करने में सहयोग देगा।वहीं NCISM अपने अधीन संस्थानों, रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (RIED) सेल और देशभर के पंजीकृत चिकित्सकों के साथ NRDC के समन्वय को बढ़ावा देगा। संस्थान-विशिष्ट तकनीकी, व्यावसायिक और वित्तीय सहयोग संबंधित संस्थानों तथा नवाचारकर्ताओं के साथ सीधे किया जाएगा।यह सहयोग बौद्धिक संपदा की पहचान और संरक्षण, पेटेंट एवं ट्रेडमार्क आवेदन, नवाचार परामर्श, उद्यमिता विकास, संस्थागत आईपी नीति निर्माण, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, नवाचार जागरूकता अभियान, आइडियाथॉन, हैकाथॉन, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी, उद्योग संवाद और सफल अनुसंधान कार्यों के प्रसार जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करेगा।इसके अलावा शैक्षणिक और नैदानिक अनुसंधान को प्रमाणित उत्पादों, तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के साथ भारतीय चिकित्सा प्रणाली में नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा सके।इस अवसर पर कमोडोर (सेवानिवृत्त) अमित रस्तोगी ने कहा कि यह साझेदारी भारतीय चिकित्सा प्रणाली में कार्यरत शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए मजबूत सहयोग तंत्र तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि NRDC की बौद्धिक संपदा प्रबंधन और प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण संबंधी विशेषज्ञता अनुसंधान को उपयोगी तकनीकों में बदलने में मदद करेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देगी। वहीं डॉ. मनीषा कोठेकर ने कहा कि यह समझौता NCISM से संबद्ध संस्थानों में अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देगा। वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार प्रबंधन और व्यावसायीकरण सहायता के समन्वय से शोधकर्ताओं, शिक्षकों और चिकित्सकों को भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान पर आधारित प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
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नई दिल्ली। पीएम-स्वनिधि योजना का दायरा अब चरणबद्ध तरीके से शहरी क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर जनगणना वाले कस्बों और शहरी-बाहरी इलाकों तक विस्तारित किया जा रहा है। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, योजना ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक ऋण प्रणाली से जोड़ने के साथ उनकी आय, डिजिटल लेनदेन और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। यह जानकारी आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), हैदराबाद द्वारा 2023 और 2025 में किए गए अध्ययन के अनुसार, 2023 के सर्वेक्षण में देश के 100 शहरी स्थानीय निकायों के 5,000 से अधिक लाभार्थियों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि 95% लाभार्थियों के लिए पीएम-स्वनिधि का ऋण उनका पहला बैंक ऋण था, जिसका उपयोग उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाने में किया। 2025 में 99 शहरी स्थानीय निकायों के 5,000 से अधिक लाभार्थियों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि 2023 से 2025 के बीच योजना के लाभार्थियों के औसत वार्षिक व्यापार लाभ में लगभग 20% की वृद्धि हुई।अध्ययन में पाया गया कि सभी ऋण चक्रों में लगभग 30% लाभार्थियों ने बताया कि पीएम-स्वनिधि ऋण के अलावा उनके पास अन्य औपचारिक ऋण भी हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह दर्शाता है कि योजना रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का क्रेडिट इतिहास बनाने और उन्हें बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच लाभार्थियों में डिजिटल भुगतान अपनाने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। शहरी स्थानीय निकाय नियमित रूप से डिजिटल साक्षरता शिविर आयोजित कर रहे हैं और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों को कैशबैक प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।अध्ययन के अनुसार, योजना का प्रभाव केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहा। ऋण उपलब्ध होने से परिवारों की आय और खर्च में स्थिरता आई है, जिससे बेहतर भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और बच्चों की शिक्षा पर सकारात्मक असर पड़ा है।सरकार ने दूसरी ऋण किश्त चुका चुके लाभार्थियों के लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू की है। 23 जनवरी, 2026 को शुरू की गई इस पहल के तहत 12 जुलाई, 2026 तक कटनी में 14, पन्ना में 2 और खजुराहो में 1 क्रेडिट कार्ड जारी किया गया।योजना के तहत मौसमी विक्रेता, घूम-घूमकर सामान बेचने वाले, महिला विक्रेता और पर्यटन आधारित विक्रेता सहित सभी पात्र रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को लाभ दिया जाता है। लाभार्थियों की पहचान स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका का संरक्षण और स्ट्रीट वेंडिंग का विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आधार पर की जाती है।मंत्रालय ने योजना के विस्तार के लिए रेडियो, टेलीविजन और समाचार पत्रों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए हैं। स्थानीय भाषाओं में सूचना सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों तथा बैंकों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। पुनर्गठित पीएम-स्वनिधि योजना को मंजूरी मिलने के बाद 17 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2025 तक लोक कल्याण मेलों का आयोजन किया गया। इसके अलावा 3 नवंबर से 2 दिसंबर, 2025 तक लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाया गया। 1 जून से 30 जून, 2026 तक देशभर में स्वनिधि महोत्सव और लोक कल्याण मेलों के माध्यम से नए लाभार्थियों को जोड़ने, ऋण स्वीकृति में तेजी लाने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए।मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए पीएम-स्वनिधि के तहत ‘स्ट्रीट फूड हब’ विकसित करने के दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इसका उद्देश्य सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आकर्षक विक्रय स्थल विकसित करना है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां पर्यटकों और आम लोगों की आवाजाही अधिक रहती है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोनम वांगचुक से अपील की कि वे 26 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और अपनी सेहत संभालें।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, “मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं कि वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में डॉक्टरों की सलाह मानें और जल्द से जल्द अपना पुराना वजन वापस पाएं। मैं ईश्वर से उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूं।”यह अपील वांगचुक के एक निजी अस्पताल में अनशन तोड़ने के कुछ घंटों बाद आई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, जितेंद्र सिंह, लेह-लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेता, डॉक्टर और परिवार के सदस्य मौजूद थे।पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारीप्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान पेपर लीक मामलों पर भी सरकार की सख्ती का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पेपर लीक के मामलों में कड़ी सजा और सख्त प्रावधानों वाला एक व्यापक बिल तैयार कर रही है। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चर्चा होगी और इसे अगले हफ्ते संसद में पेश किए जाने की संभावना है।इससे पहले गुरुवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि “देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए, केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की शृंखला में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।” -
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मुद्दे पर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को केंद्र सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करेगा। केंद्र सरकार द्वारा तटस्थ स्थान पर बातचीत के लिए सहमति दिए जाने के बाद यह बैठक आयोजित की जा रही है।
सीजेपी पिछले कई दिनों से कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पार्टी ने बताया कि सरकार ने सरकारी कार्यालयों के बजाय तटस्थ स्थान पर वार्ता की उसकी मांग स्वीकार कर ली है। बैठक कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित होगी।इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए सीजेपी सदस्य सौरभ दास ने कहा, “चर्चा के लिए बुलाया गया है। हमें बहुत खुशी है कि सरकार ने हमारी इस मांग को मान लिया है कि बातचीत किसी तटस्थ स्थान पर हो। इसके लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया को चुना गया है।”पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है और उनका कहना है कि नीट पेपर लीक विवाद से निपटने के तरीके के लिए शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं। मंत्री के इस्तीफे के साथ-साथ सीजेपी ने भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की भी मांग की है।प्रस्तावित वार्ता ऐसे समय हो रही है जब एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों में अधिक सख्त प्रावधानों और कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला व्यापक कानून लाने की तैयारी कर रही है।वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा, “पेपर लीक के खिलाफ और अधिक सख्त कार्रवाई कैबिनेट में आने वाली है!”प्रस्तावित विधेयक पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद इसे अगले सप्ताह संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है।छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से उत्पन्न होने वाली परेशानी को भली-भांति समझती है। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा सख्त कानूनी ढांचे की घोषणा के बावजूद सीजेपी का कहना है कि केवल कानून में बदलाव पर्याप्त नहीं हैं। पार्टी ने दोहराया कि परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ सरकार का “सबसे सख्त कदम” केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना होगा। पार्टी शुक्रवार को सरकार के प्रतिनिधियों के साथ होने वाली बैठक में इस मांग को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पेपर लीक मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर दिया। यह अदालत केवल इस कानून और इससे जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के निर्देश पर अनु ग्रोवर बलिगा को राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में नवगठित फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्पेशल जज (पीसी एक्ट) (सीबीआई)-25 के रूप में तत्काल प्रभाव से नियुक्त किया गया है।हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यह न्यायिक अधिकारी राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-स्पेशल जज (पीसी एक्ट) (सीबीआई) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेंगे। साथ ही, अधिनियम के तहत लंबित सभी मामलों और उनसे जुड़े मामलों को इस नई फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश भी दिया गया है।इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि युवाओं का भविष्य और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों को शीघ्र और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश भी दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।क्या है कानून का प्रावधानसार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच वर्ष की कैद और 10 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अलावा यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, आईबीपीएस तथा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होता है। -
नई दिल्ली। देशभर में जारी मॉनसून और भारी बारिश की स्थिति पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय लगातार नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मंत्रालय प्रभावित राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रहा है। गृह मंत्रालय का कहना है कि समय रहते चेतावनी जारी करने, राहत एवं बचाव कार्यों के समन्वय और नुकसान के आकलन के लिए सभी संबंधित एजेंसियां सक्रिय हैं। गृह मंत्रालय का एकीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसीटी) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केन्द्र (INCOIS) सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से संचालित हो रहा है। यह राज्य और जिला आपात संचालन केन्द्रों को समय पर अलर्ट भेजने के साथ ही चौबीसों घंटे राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहा है।
जुलाई 2026 के दौरान नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति बनी है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) राज्य आपदा मोचन बल, राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा है। संवेदनशील क्षेत्रों में पहले से टीमें तैनात की गई हैं। पिछले एक सप्ताह में एनडीआरएफ ने 52 लोगों को सुरक्षित बचाया, जबकि 2,206 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करते हुए रक्षा मंत्रालय ने भी अपने संसाधनों का त्वरित उपयोग कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान, लोगों और राहत सामग्री के परिवहन तथा राहत वितरण में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। गृह मंत्रालय ने बताया कि 10 मई, 2026 को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में लू और मॉनसून पूर्व संभावित बाढ़ की तैयारियों की समीक्षा की गई थी। इसके बाद 3 जून, 2026 को जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। चार धाम यात्रा मार्ग की तैयारियों की भी नियमित निगरानी की जाती रही।गृह मंत्री के निर्देश पर अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमों ने 7 से 10 जुलाई, 2026 के बीच अरुणाचल प्रदेश और असम के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया, ताकि राष्ट्रीय आपदा सहायता कोष से आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। एक अन्य अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम 25 जुलाई, 2026 से असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का विस्तृत आकलन करेगी।गृह मंत्रालय के अनुसार, हाल की भारी बारिश से कुछ राज्यों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, लेकिन देशभर में वर्षा की कमी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जहां लगभग 30% वर्षा की कमी का अनुमान था, वह अब घटकर लगभग 15% रह गई है। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता आधारित मोबिलिटी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए महाराष्ट्र में ‘भारत टैक्सी’ सेवा का शुभारंभ किया गया। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सेवा की शुरुआत की। इस अवसर पर सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि, अधिकारी और भारत टैक्सी से जुड़े सारथी भी मौजूद रहे।
भारत टैक्सी टैक्सी चालकों को केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि सहकारी संस्था का सदस्य, मालिक और शेयरधारक बनाकर संचालित की जाएगी। इसका उद्देश्य बिचौलिया-केंद्रित व्यवस्था की जगह सारथी-केंद्रित परिवहन प्रणाली विकसित करना है, जिससे चालकों को संस्था के लाभ में भी हिस्सेदारी मिले।केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि महाराष्ट्र में भारत टैक्सी की शुरुआत सहकारिता आंदोलन के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि इस पहल से राज्य के युवाओं, महिलाओं और स्थानीय भूमिपुत्रों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने अधिक से अधिक युवाओं से “सहकार के सारथी” और “समृद्ध महाराष्ट्र के भागीदार” बनने का आह्वान किया।मुरलीधर मोहोल ने कहा कि 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी आंदोलन को नई दिशा और गति मिली है। पिछले पांच वर्षों में सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए 152 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति, दो लाख नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने जैसे कदम शामिल हैं। अब तक करीब 40 हजार नई सहकारी समितियां गठित की जा चुकी हैं।उन्होंने बताया कि लगभग 3,000 करोड़ रुपए की लागत से PACS का कंप्यूटरीकरण किया जा रहा है और उन्हें 25 से अधिक आर्थिक गतिविधियां संचालित करने के योग्य बनाया जा रहा है। देशभर में करीब 39 हजार सहकारी समितियां प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और लगभग 54 हजार PACS कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा सहकारी संस्थाएं पेट्रोल पंप, जन औषधि केंद्र, भंडारण और अन्य ग्रामीण सेवाओं से भी जुड़ रही हैं। मुरलीधर मोहोल ने कहा कि महाराष्ट्र में एनसीडीसी के माध्यम से सहकारी चीनी मिलों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की सहायता दी गई है। राज्य में इथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस, सहकारी आवास और टिश्यू कल्चर जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, सहकारिता के माध्यम से टिश्यू कल्चर के लिए भूमि उपलब्ध कराने वाला देश का पहला राज्य बना है।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं ने यात्रा को आसान बनाया, लेकिन सर्ज प्राइसिंग, छिपे शुल्क और एग्रीगेटर कमीशन जैसी समस्याएं भी सामने आईं। भारत टैक्सी इन चुनौतियों का सहकारिता आधारित समाधान है। इसमें सर्ज प्राइसिंग और छिपे शुल्क नहीं होंगे तथा निर्धारित सेवा शुल्क के आधार पर संचालन किया जाएगा। इससे यात्रियों को पारदर्शी किराए पर सुरक्षित और विश्वसनीय सेवा मिलेगी, जबकि सारथियों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिलेगा।मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वर्गीय दि. बा. पाटील सहकारी वाहतूक संघ के साथ हुए समझौते के तहत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास रहने वाले लगभग तीन से चार हजार स्थानीय भूमिपुत्रों को ऋण सुविधा के माध्यम से टैक्सी उपलब्ध कराने और उन्हें भारत टैक्सी प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।कार्यक्रम के दौरान भारत टैक्सी से जुड़े सारथियों को शेयर प्रमाणपत्र और सेवा किट भी वितरित की गईं। सरकार के अनुसार, आने वाले समय में महाराष्ट्र की सहकारी संस्थाओं, परिवहन संगठनों और स्थानीय निकायों के सहयोग से इस सेवा का चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा। -
नयी दिल्ली. राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस, आईटीओ और खान मार्केट समेत दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन अगले आदेश तक सुरक्षा कारणों से बृहस्पतिवार सुबह बंद कर दिए गए। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने यह जानकारी दी। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के जारी प्रदर्शन में भीड़ बढ़ने के बीच यह कदम उठाया गया है। हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के लिए लाइन बदलने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। डीएमआरसी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं।
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नयी दिल्ली. सौंदर्यपूर्ण नक्काशी वाले खिलौनों और आभूषण रखने के बक्सों से लेकर आकर्षक डिजाइन वाले पानदानों तक, कभी दिल्ली के संस्कृति केंद्र की शोभा बढ़ाने वाली करीब 2,500 दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह अब यहां स्थित हुमायूं का मकबरा के संग्रहालय की एक समर्पित दीर्घा का हिस्सा बन गया है। इस नयी दीर्घा का उद्घाटन बुधवार शाम हुमायूं के मकबरा परिसर स्थित संग्रहालय में आयोजित एक समारोह में किया गया। यह परिसर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। दक्षिण दिल्ली के महरौली-गुरुग्राम रोड स्थित आनंदग्राम में स्थापित संस्कृति केंद्र की स्थापना 97 वर्षीय ओ. पी. जैन ने दशकों में एकत्र किए गए अपने निजी संग्रह के आधार पर की थी। इस केंद्र में दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर विभिन्न प्रकार के वस्त्रों तक, विविध विषयों पर आधारित संग्रहालय स्थापित किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि 2023 में इसके न्यास मंडल ने कुछ चुनिंदा वस्तुओं और स्थापनाओं को छोड़कर इस अमूल्य संग्रह को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के माध्यम से राष्ट्र को ''उपहार'' स्वरूप सौंप दिया। करीब 2,500 दुर्लभ वस्तुओं के इस संग्रह को अब संस्कृति केंद्र से स्थानांतरित कर हुमायूं का मकबरा के संग्रहालय की नयी दीर्घा में प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रह में 19वीं सदी का बाघ का मुखौटा और अविभाजित भारत की उत्कृष्ट डिजाइन वाली साड़ियां शामिल हैं। इस विशेष दीर्घा को 'संस्कृति संग्रहालय : दैनिक जीवन की कला और भारतीय वस्त्र' के रूप में विकसित किया गया है। इसे 'आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर' (एकेटीसी) ने आईजीएनसीए के सहयोग से स्थापित किया है। उद्घाटन समारोह में ओ. पी. जैन भी उपस्थित रहे। हालांकि अधिक आयु के कारण उनका संबोधन एकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रतिश नंदा ने पढ़कर सुनाया। संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर 19वीं सदी का बाघ का मुखौटा और वक्ष-कवच स्थापित किया गया है। भीतर प्रदर्शित संग्रह को विभिन्न विषयों में विभाजित किया गया है, जिनमें खिलौने, लोटे, दीपक, महिलाओं के श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं (जैसे बैग, आभूषण रखने के बक्से आदि), पानदान और विभिन्न प्रकार के वस्त्र शामिल हैं। वस्त्रों के संग्रह में 19वीं और 20वीं सदी की साड़ियां, ढाका (तत्कालीन अविभाजित भारत) की जामदानी साड़ी तथा पंजाब की फुलकारी और गुजरात क्षेत्र के पाटन पटोला जैसी दुर्लभ बुनाई शैलियों के उत्कृष्ट नमूने शामिल हैं। अपने लिखित संबोधन में जैन ने कहा, ''लगभग 50 वर्ष पहले जब संस्कृति फाउंडेशन की स्थापना हुई थी, तब इसके पीछे यह विश्वास था कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल प्रशंसा करने की वस्तु नहीं है, बल्कि उसकी देखभाल, अध्ययन और उसे साझा किया जाना चाहिए।'' एकेटीसी ने बताया कि 'संस्कृति' दीर्घा एक अगस्त से आम जनता के लिए सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक खुली रहेगी। प्रवेश टिकट 50 रुपये का होगा और प्रति घंटे केवल 50 आगंतुकों को प्रवेश दिया जाएगा।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश के युवाओं का कल्याण और हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक को लेकर युवाओं के लगातार जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने के लिए सरकार ने त्वरित अदालतें स्थापित करने का फैसला किया है। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। हमारे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर संबंधित प्राधिकारियों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ''विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की श्रृंखला में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
- नई दिल्ली। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम), भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) और अन्य तकनीकी संस्थानों को शामिल करते हुए एक चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से मान्य और परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया गया है। इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इसका उपयोग विश्व-स्तर पर एक सदी से अधिक समय से हो रहा है, और ब्राजील जैसे देश दशकों से उच्च इथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं। भारत में, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम वर्ष 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ, वर्ष 2006 में ई5 को पेश किया गया, और यद्यपि वर्ष 2013-14 में मिश्रण लगभग 1.53 प्रतिशत रहा, आवश्यक उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और नियामक ढांचे के निर्माण के बाद इसे धीरे-धीरे और सुनियोजित तरीके से बढ़ाया गया है।उच्च इथेनॉल मिश्रणों को लागू करने का कार्य ऑटोमोबाइल निर्माताओं, एसआईएएम, एआरएआई, घटक निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ही किया गया था।ईंधन दक्षता, इंजन प्रदर्शन, रखरखाव लागत और समग्र ड्राइविंग अनुभव के संबंध में ई20 पेट्रोल के उपयोग को लेकर वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संघों या उपभोक्ता संगठनों से सरकार को कोई व्यापक या पुष्ट शिकायत प्राप्त नहीं हुई है । हालांकि, सरकार ने मीडिया और सोशल मीडिया में उठाई गई कुछ समस्याओं पर ध्यान दिया है, जिनकी वैज्ञानिक रूप से जांच की गई है।एआऱएआई, एसआईएएम, आईओसीएल, आईआईपी और ऑटोमोबाइल निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक प्रयोगशाला अध्ययनों और क्षेत्र परीक्षणों में इंजन की मजबूती, चलाने की क्षमता, स्टार्ट करने की क्षमता, जंग प्रतिरोध, सामग्री अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे मापदंडों को शामिल किया गया है और यह पुष्टि की गई है कि ई20 निर्धारित मानकों के अंतर्गत उपयोग के लिए सुरक्षित है।इन अध्ययनों से यह भी सिद्ध हुआ कि ई20 ईंधन के कारण पारंपरिक वाहनों के प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव या असामान्य टूट-फूट नहीं होती है। व्यापक प्रयोगशाला अध्ययनों, क्षेत्र सत्यापन और वास्तविक परिचालन अनुभव से ई20 ईंधन के कारण वाहन के प्रदर्शन पर किसी व्यापक प्रतिकूल प्रभाव की पुष्टि नहीं हुई है।सरकार का आकलन न केवल प्रयोगशाला अनुसंधान पर आधारित है, बल्कि राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के बाद व्यापक अनुभव पर भी आधारित है। देश में प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ वाहन खुदरा दुकानों पर आते हैं (जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोल वाहन होते हैं)।ई15+ मिश्रित पेट्रोल का व्यापक उपयोग साढ़े तीन साल से अधिक समय से हो रहा है और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई साल से अधिक समय से हो रहा है। 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर चल रही हैं और इथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन की व्यापक खराबी या वाहन के टूटने का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। निर्माता सेवा डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि ई20 ईंधन के कारण असामान्य जंग, घिसाव या वाहन के जीवनकाल में कमी नहीं होती है। निर्माता ई20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों के लिए वारंटी दायित्वों का पालन करना जारी रखते हैं, जिससे इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता में और अधिक विश्वास बढ़ता है।एक प्रमुख ओईएम ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे जिन्हें मूल रूप से ई20-संगत प्रमाणित नहीं किया गया था। कंपनी ने ई20 से संबंधित जंग, असामान्य घिसाव या पुर्जों के जीवनकाल में कमी की कोई रिपोर्ट नहीं दी। एक प्रमुख दोपहिया वाहन कंपनी ने भी इसी तरह का अनुभव बताया है। एक ओईएम ने हाल ही में कहा कि 1.4 करोड़ ई20-चालित वाहनों के लंबे समय तक किए गए सर्वेक्षण के आंकड़ों से इथेनॉल-प्रेरित जंग का कोई सबूत नहीं मिला। एआरएआई ने पुनः पुष्टि की कि वाहन उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले सख्त अंतरराष्ट्रीय मानक सत्यापन से गुजरते हैं।सरकारी एजेंसियों और वाहन निर्माताओं द्वारा माइलेज के संदर्भ में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ईंधन दक्षता कई कारकों से प्रभावित होती है, जिनमें ड्राइविंग की स्थितियाँ, ड्राइविंग के तरीके और वाहन का रखरखाव शामिल हैं। कुछ ई10 डिज़ाइन वाले वाहनों में ईंधन दक्षता में कमी आमतौर पर लगभग 3-5 प्रतिशत तक ही सीमित होती है, जबकि ई20 उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉकिंग गुण, स्वच्छ दहन और सुचारू इंजन प्रदर्शन प्रदान करता है।ई20 के वैज्ञानिक मूल्यांकन और चरणबद्ध कार्यान्वयन के हर चरण में ऑटोमोबाइल निर्माता, घटक आपूर्तिकर्ता, एसआईएएम, एआरएआई, परीक्षण एजेंसियां और तेल विपणन कंपनियां शामिल थीं। ईंधन प्रणालियों, इंजन की मजबूती, संचालन क्षमता, उचित सामग्री अनुकूलता और उत्सर्जन प्रदर्शन के सफल सत्यापन के बाद ही ई20 को लागू किया गया। इन अध्ययनों से यह भी सिद्ध हुआ कि ई20 के कारण पुराने वाहनों के प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव या असामान्य टूट-फूट नहीं होती है।एसआईएएम और एआरएआई के अनुसार, ई20 त्वरण और सवारी की गुणवत्ता में सुधार करता है, साथ ही कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। इथेनॉल का उच्च ऑक्टेन मान आधुनिक उच्च-संपीड़न इंजनों के लिए उपयुक्त है और इसकी उच्च वाष्पीकरण ऊष्मा दहन दक्षता को बढ़ाती है।ई20 की ओर बदलाव से राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त हुए हैं। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन हुआ है, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ हस्तांतरित हुआ है।तेल और गैस कंपनियां खरीद, मिश्रण, भंडारण, परिवहन और खुदरा वितरण से संबंधित सख्त मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन करती हैं। ईंधन की गुणवत्ता की जांच डिस्टिलरी, डिपो और खुदरा आउटलेट पर की जाती है। प्राप्त शिकायतों के आधार पर, तेल और गैस कंपनियों ने मिलावट का पता लगाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपभोक्ताओं तक केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप ईंधन ही पहुंचे, खुदरा आउटलेट्स पर 30 हजार से अधिक गुणवत्ता जांच (पिछले 10-20 दिनों में) की हैं। राज्य सरकारों से भी ईंधन में मिलावट के किसी भी मामले के प्रति सख्त रवैया अपनाने का अनुरोध किया गया है।सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने ई20 ईंधन से संबंधित शिकायतों और सुझावों सहित ग्राहकों की शिकायतों और सुझावों को प्राप्त करने, उनकी जांच करने और उनका समाधान करने के लिए मजबूत उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किए हैं। ग्राहक अपनी शिकायतें कई ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं, जैसे कि सभी खुदरा दुकानों पर उपलब्ध शिकायत/सुझाव रजिस्टर, टोल-फ्री ग्राहक सेवा नंबर, कंपनी की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन, ग्राहक संबंध प्रबंधन (सीआरएम) सिस्टम, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ईमेल और केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम)। शिकायतों के तत्काल निवारण के लिए डीलरों और संबंधित फील्ड अधिकारियों के संपर्क विवरण खुदरा दुकानों पर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाते हैं। इन सभी माध्यमों से प्राप्त शिकायतों की ओएमसी की स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार विधिवत जांच की जाती है और निर्धारित समय सीमा के अंदर उनका समाधान किया जाता है।ई20 ईंधन की तकनीकी अनुकूलता और प्रदर्शन संबंधी किसी भी समस्या के बिना सभी पेट्रोल वाहनों के साथ इसके उपयोग के बारे में उपभोक्ताओं को शिक्षित करने के लिए जन जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं, साथ ही इथेनॉल मिश्रण के पर्यावरणीय और ऊर्जा सुरक्षा लाभों के बारे में भी बताया जाता है। शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से प्राप्त उपभोक्ता प्रतिक्रिया की ओएमसी द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जाती है, और जहां भी आवश्यक हो, उचित सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं ताकि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित किया जा सके।यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे के निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की 440 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य व्यस्त रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना, यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना तथा परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की भारतीय रेलवे की व्यापक योजना का हिस्सा है। परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर हर वर्ष अतिरिक्त लगभग 3.52 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी, जिससे उद्योगों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को गति मिलेगी।रेलवे के अनुसार, यह सेक्शन हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (एचयूएन-2) का हिस्सा है। वर्तमान में निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से गोकुलपुर तक का हिस्सा सिंगल लाइन है, जबकि डबलिंग का कार्य पहले से जारी है। तीसरी रेल लाइन बनने के बाद इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कॉरिडोर की क्षमता और परिचालन लचीलापन दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।इस रेल मार्ग से यात्री ट्रेनों के अलावा मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, पेलेट आयरन, लोहा-इस्पात, गेहूं, पत्थर, स्लीपर, स्लैग, नमक, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक, खाद्य तेल, केमिकल सॉल्ट, चारकोल, सीमेंट, बैलेस्ट और राख जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। वर्तमान में इस मार्ग पर करीब 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई हो रही है।रेलवे के मुताबिक, मौजूदा सेक्शन की लाइन क्षमता का उपयोग 115.71% तक पहुंच चुका है, जो इस मार्ग पर अत्यधिक भीड़भाड़ को दर्शाता है। तीसरी लाइन बनने से अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी, जिससे बढ़ती यात्री और माल यातायात की मांग को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।परियोजना पूरी होने के बाद आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई तेज होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी और रेलवे नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर निर्भर उद्योगों और कारोबारों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।भारतीय रेलवे ने कहा कि यह मंजूरी हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर क्षमता विस्तार की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य माल और यात्री ट्रेनों की तेज, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करते हुए आधुनिक, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क के माध्यम से देश के आर्थिक विकास को गति देना है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने और केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। पीएम मोदी ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं कि संबंधित विभाग जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि पेपर लीक के कारण युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध पीएम मोदी का यह महत्वपूर्ण कदम मील का पत्थर साबित होगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “भारत के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामलों में तेजी से सुनवाई के लिए ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ बनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फैसला युवाओं को सशक्त बनाने के प्रति उनके मजबूत संकल्प और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह निर्णायक कदम उन लोगों के खिलाफ तेज और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा जो हमारे युवाओं की उम्मीदों और भविष्य को खतरे में डालते हैं।केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “युवाओं का हित और उनका उज्ज्वल भविष्य मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भी है और संकल्प भी। प्रधानमंत्री की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन से पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और कठोर कार्रवाई का निर्णय इसी का प्रतिबिंब है। पेपर लीक के कारण युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह महत्वपूर्ण कदम मील का पत्थर साबित होगा।”केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य और उनके हितों की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। पेपर लीक जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन व दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई का संकल्प हमारी सरकार की संवेदनशीलता और युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।”उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष और उसके नेता राहुल गांधी संसद में इस महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक चर्चा करने से बचते हुए सड़कों पर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जो उनके गैर-जिम्मेदाराना और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत आचरण को दर्शाता है।कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के हित और उनके उज्ज्वल भविष्य की रक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का निर्णय दोषियों को शीघ्र और कठोर दंड सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मामलों के मंत्री भूपेंद्र यादव ने पोस्ट किया, “युवा शक्ति का विश्वास और उनके सपनों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसे अपराधों पर सख्त प्रहार करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के माध्यम से मामलों के त्वरित निस्तारण तथा दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह पहल उन तत्वों के लिए स्पष्ट संदेश है जो युवाओं की मेहनत और उनके भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की दिशा में यह कदम देश के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “फास्ट-ट्रैक कोर्ट अब यह सुनिश्चित करेंगे कि पेपर लीक में शामिल लोगों को सजा मिले। भारत के युवा ही देश की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हमारे युवाओं को एक उज्ज्वल भविष्य मिले और उन्हें अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के अवसर मिलें। हम अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाना जारी रखेंगे और अपने युवाओं व अभिभावकों को भरोसा दिलाते हैं कि हम मजबूती से उनके साथ खड़े हैं। देश के युवाओं के भविष्य के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पोस्ट किया, “विपक्ष में बैठने से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर देश को गुमराह करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। विपक्ष के नेता को क्या यह सत्य नहीं पता है कि कांग्रेस ने ही पेपर लीक की समस्या को पनपाया और इसकी जड़ों को गहरा किया।”उन्होंने कहा, “राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के दौरान लगातार सामने आए पेपर लीक के प्रकरण इस विफलता की खुली गवाही हैं। कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारें युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करती रहीं, जबकि मोदी जी की सरकार ने शोर-शराबे के बजाय कार्रवाई का रास्ता चुना है। कड़े कानून बनाए, व्यवस्था को मजबूत किया और अब फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से दोषियों को शीघ्र और कठोर सजा सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया है।”गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने पोस्ट में लिखा, “सवाल पूछने के लिए संसद से बड़ा कोई मंच नहीं है। सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने बहस से भागकर उपद्रव की राजनीति को चुना। ‘भारत के भविष्य’ के साथ राजनीति करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि युवाओं को कोरे नारे नहीं, निष्पक्ष परीक्षाएं और न्याय चाहिए।” -
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ चल रहे सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई। कनॉट प्लेस इलाके में पत्थरबाजी की घटना में दो असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। घायल पुलिस अधिकारियों में एसीपी पंजाबी बाग जय प्रकाश और एसीपी कनॉट प्लेस विवेक भगत शामिल हैं।
घटना की डिटेल– एसीपी जय प्रकाश को माथे पर चोट लगी।– एसीपी विवेक भगत के शरीर के ऊपरी-निचले अंगों, कंधे और सिर के पिछले हिस्से में चोट के निशान पाए गए।– इंस्पेक्टर नंद किशोर सहित अन्य कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए।दिल्ली पुलिस के अनुसार, जब प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोका गया तो पत्थरबाजी शुरू हो गई।सीजेपी का आरोपसीजेपी के प्रतिनिधि अभिजीत दिपके ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बाधित करने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं और बाहर से लोगों को भेजा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि एक महीने तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन अब जानबूझकर उकसावा किया जा रहा है।अब तक की कार्रवाईदिल्ली पुलिस ने सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में अब तक 10 एफआईआर दर्ज की हैं। सोमवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था, जिसमें 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल होने का दावा किया गया है। वर्तमान में जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा बल तैनात है। सीजेपी प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। - नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि सभी सुधारों के केंद्र में नागरिकों का कल्याण होना चाहिए और लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई ऐसी योजनाओं को वास्तविक गति मिलनी चाहिए। मोदी ने कहा कि ये योजनाएं सार्थक बदलाव लाने वाली साबित होनी चाहिए। 'विकसित भारत' के लक्ष्यों की दिशा में ग्रामीण विकास, कृषि, सामाजिक कल्याण और संबंधित क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए सचिवों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मोदी ने जोर दिया कि सुधारों का उद्देश्य केवल सरकार के कामकाज में सुधार करना नहीं है, बल्कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा को गति देना भी है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ''प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सभी सुधारों के केंद्र में नागरिकों का कल्याण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए सुधारों को वास्तविक गति मिलनी चाहिए और ये सार्थक बदलाव लाने वाले होने चाहिए।''मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि शासन व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और उन्होंने गतिशील एवं निरंतर बदलते परिवेश की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए शासन प्रक्रियाओं को अनुकूल बनाने और मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सरकार के सभी अंगों के समन्वित प्रयास की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत' का सपना 'जन आंदोलन' में बदलना चाहिए और भारत के युवाओं को इस संकल्प का आधार बनना चाहिए। मोदी ने युवाओं के बीच मादक पदार्थों की गंभीर समस्या से निपटने के महत्व पर जोर दिया।प्रधानमंत्री ने खेलों के विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक खेल केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने का लक्ष्य रखना चाहिए। मोदी ने खेल क्षेत्र में प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और स्टार्टअप के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया। सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न पहलों और चुनौतियों से जुड़े अपने अनुभव और विचार साझा किए। बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने भविष्य की कार्ययोजना को लेकर अपने सुझाव और अपना दृष्टिकोण साझा किया। बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों के साथ-साथ पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए विपक्ष से अपील की कि वह आरोप-प्रत्यारोप में पड़ने के बजाय संसद में इस मुद्दे पर 'विस्तृत' चर्चा होने दें ताकि समस्या का 'स्थायी समाधान' निकाला जा सके। नड्डा ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार एक ''जिम्मेदार और संवेदनशील सरकार'' है और वह इस मुद्दे को लेकर बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रश्न पत्र लीक के मुद्दे पर संसद में 'विस्तृत' चर्चा के लिए तैयार है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर विरोध कर रहे छात्र जब चाहे उनसे बातचीत करने के लिए तैयार है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट आश्वासन देती है, तो वह अपनी अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर देंगे। उनकी मांगों में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की कार्रवाई न करने की मांग भी है। इस बारे में नड्डा ने कहा, '' हम उनके खुले पत्र का जवाब देंगे।'' भाजपा नेता यह टिप्पणी गांधी की उस संवाददाता सम्मेलन के बाद आई, जिसमें उन्होंने सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें जवाबदेह ठहराना, और छात्रों के साथ जो हुआ उसके लिए प्रधानमंत्री द्वारा उनसे माफी मांगने की तीन ऐसी मांगे हैं जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता। नड्डा ने गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने देश में प्रश्नपत्र लीक के लगभग 150 मामलों का जिक्र तो किया, लेकिन उन प्रश्नपत्र लीक के मामलों का जिक्र नहीं किया जो उनकी पार्टी और सहयोगियों की सरकार वाले राज्यों में हुए थे। उन्होंने कहा,''यह जांच का विषय है और सरकार इस मामले के हर पहलू पर अपना जवाब जनता के सामने रखेगी।''नड्डा ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल और पंजाब में विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के लीक होने की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए गांधी से सवाल किया, '' आप इतने चुनिंदा क्यों हैं? आपने कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) की सरकारों वाले राज्यों में हुए प्रश्नपत्र लीक के बारे में बात क्यों नहीं की?'' उन्होंने कहा, ''इससे स्पष्ट होता है कि आपकी मंशा छात्रों का हित नहीं है। आपकी दिलचस्पी राजनीतिक फायदा उठाने और छात्रों की मांगों पर राजनीति करने में है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।'' नड्डा ने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे देश में प्रश्नपत्र लीक की समस्या का 'स्थायी समाधान' तलाशने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा,''हमारा मानना है कि हमें आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर इस मामले पर चर्चा करनी चाहिए। ऐसी चर्चा के लिए सबसे अच्छा मंच संसद है और हम इसके लिए तैयार हैं।'' केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ''हमें इस बात को सुनिश्चित करने के लिए विस्तार से चर्चा करनी चाहिए कि हमारे छात्रों के साथ कोई अन्याय न हो। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा इस बात को लेकर बहुत चिंतित है, क्योंकि बच्चे देश का भविष्य हैं।'' उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।नड्डा ने कहा, ''यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर विस्तार से चर्चा की ज़रूरत है। विपक्ष को अपने लक्ष्य या रुख़ को बार-बार नहीं बदलना चाहिए। हमें आरोप-प्रत्यारोप में नहीं पड़ना चाहिए। हमें इस समस्या को हल करने के बारे में सोचना चाहिए और एक ठोस नीति बनानी चाहिए।'' केंद्रीय मंत्री ने सरकार और कॉक्रोच जनता पार्टी (कॉजपा)के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में प्रगति के बारे में पूछे जाने पर कहा, ''हमारी बातचीत बहुत सौहार्द्रपूर्ण माहौल में हुई। हमने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी। जब हमने कहा तो उन्होंने (अपनी मांगें) लिखित रूप में दीं। हमने भी उन्हें जवाब दिया है।'' उन्होंने कहा, ''और मैंने उनसे कह दिया है कि जब भी वे चाहें, हम (आगे की) बातचीत के लिए तैयार हैं।''नड्डा ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ कल रात मेदांता अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने कहा, ''हमने वांगचुक से यह भी अपील की कि वह अपना अनशन समाप्त करें और युवाओं को सही दिशा दिखाएं। सरकार सभी मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार है और हमेशा उन पर ध्यान देगी। उन्होंने कहा, 'ठीक है, मैं जवाब दूंगा'।'' वांगचुक द्वारा सरकार को लिखे पत्र पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''हम जवाब देंगे''।नड्डा से जब पूछा गया कि क्या शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार में कोई चर्चा हो रही है, तो उन्होंने कहा, ''नहीं, ऐसा नहीं होता है। हम चर्चा के लिए तैयार हैं। यह संसद में होगा। वे अपनी बात रखेंगे और सरकार जवाब देगी।''
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गुवाहाटी. असम में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ की चपेट में आने से बुधवार को 21 और लोगों की मौत हो गई तथा लगभग 5.65 लाख लोग इससे प्रभावित हुए। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की मंगलवार मध्यरात्रि को जारी दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के विश्वनाथ, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप, कामरूप महानगर, कार्बी आंगलोंग, नागांव, शिवसागर और तिनसुकिया जिलों में बाढ़ से 5,64,600 से अधिक लोग प्रभावित हुए। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान शिवसागर जिले में चार महिलाओं और दो बच्चों समेत 13 लोगों की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। इसके अलावा चराइदेव में दो बच्चों समेत पांच, गोलाघाट में दो और जोरहाट में एक महिला की जान चली गई। इन मौतों के साथ ही इस वर्ष राज्य में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने असम के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है और अगले चार दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अनुमान जताया है। आईएमडी के अनुसार, 'येलो अलर्ट' का अर्थ सतर्क रहने और स्थिति से संबंधित अद्यतन जानकारी पर नजर बनाए रखना है। शिवसागर बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां करीब 3.6 लाख लोग प्रभावित हैं। इसके बाद जोरहाट में लगभग 88,000 और चराइदेव में 72,500 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य में बाढ़ की स्थिति सोमवार रात की तुलना में और खराब हुई है। सोमवार रात तक 15 जिलों में लगभग 3.63 लाख लोग प्रभावित थे। रिपोर्ट के अनुसार, सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, पुलिस और अन्य नागरिक एजेंसियों ने चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर के विभिन्न इलाकों से 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। बैठक के दौरान पवार की बेटी और लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले भी मौजूद थीं।
पवार और सुले संसद के जारी मानसून सत्र में भाग लेने के लिए दिल्ली में हैं। -
ठाणे. महाराष्ट्र के ठाणे जिले में साड़ी नहीं लाने को लेकर हुए घरेलू विवाद के बाद प्रेशर कुकर के ढक्कन से अपने पति की कथित तौर पर पिटाई करने और गला दबाकर उसकी हत्या करने के आरोप में 30 वर्षीय एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि बिहार के रोहतास जिले की रहने वाली आरोपी सुनीता देवी हरेराम सिंह को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला ने शुरुआत में मौत को दुर्घटना बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी।
अधिकारी ने बताया कि पीड़ित हरेराम किशुनजी सिंह (35) 19 जुलाई को बदलापुर पूर्व स्थित अपने घर पर थे, तभी साड़ी नहीं लाने को लेकर दंपति के बीच विवाद हो गया। उन्होंने बताया कि गुस्से में आकर आरोपी महिला ने प्रेशर कुकर के ढक्कन से पति पर हमला किया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी पत्नी के बयान के आधार पर शुरुआत में दुर्घटनावश मृत्यु रिपोर्ट दर्ज की गई थी, लेकिन सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट ने मामले को पूरी तरह से जांच का विषय बना दिया। बदलापुर पूर्व थाने के वरिष्ठ निरीक्षक नितिन पाटिल ने कहा, ''मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि गला दबाने के कारण दम घुटने से हुई थी। इसके बाद मृतक के परिजनों और मकान मालिक से पूछताछ में पत्नी पर संदेह हुआ।'' उन्होंने बताया कि स्थानीय अदालत ने मंगलवार को आरोपी सुनीतादेवी को 29 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। -
नयी दिल्ली. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को संसद में कहा कि सरकार नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सदन में चर्चा के लिए ''सौ प्रतिशत'' तैयार है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बहाने बनाकर चर्चा से बचना चाहती है। राज्यसभा में कार्यवाही दो बार स्थगित होने के बाद जब दोपहर दो बजे फिर शुरू हुई तो उपसभापति हरिवंश ने सरकार की ओर से वक्तव्य देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू का नाम पुकारा। रीजीजू ने कहा कि विपक्ष ने सदन में एक मांग रखी है तथा वह सरकार की तरफ से उस पर अपनी बात रखना चाहते हैं। रीजीजू ने जैसे ही अपनी बात शुरू की, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा और शोरगुल शुरू कर दिया। इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह जब विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं तो विपक्षी सांसदों द्वारा हंगामा करने का स्पष्ट मतलब है कि वह चर्चा नहीं चाहते। केंद्रीय मंत्री ने कहा, '' मैं आपके (आसन के) माध्यम से सरकार का पक्ष रखना चाहता हूं कि मानसून सत्र की शुरुआत से ही सरकार ने कहा है कि जो भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं उन पर और नीट प्रश्न पत्र लीक के विषय पर हम चर्चा के लिए तैयार हैं। हम अब भी तैयार हैं।'' उन्होंने सदन को जानकारी दी कि सरकार ने कांग्रेस और अन्य पार्टी के नेताओं को भी इस बारे में बताया था। रीजीजू ने दावा किया कि विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहता है और इसीलिए वह बहाने बनाकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है, जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, ''हमारी सरकार युवाओं के भविष्य के लिए, छात्रों के भविष्य के लिए नीट परीक्षा से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए पूर्ण रूप से तैयार है। सरकार ने एक एक करके जो भी कदम उठाये हैं, उन्हें देश के सामने रखना हमारा दायित्व है।'' रीजीजू ने कहा कि उन्होंने कई दलों के सदस्यों से बात की है और वे सभी चर्चा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले तो चर्चा की मांग करती है और फिर नारेबाजी करके सदन को बाधित करती है, जो ठीक नहीं है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की मांग है और सरकार भी राजी है। उन्होंने कहा कि सभापति जिस नियम के तहत एवं जितने समय के लिए चर्चा कराने का निर्देश देते हैं उसके तहत सरकार चर्चा के लिए सौ प्रतिशत तैयार है। तीन बार के स्थगन के बाद जब बैठक फिर शुरू हुई तो रीजीजू ने कहा कि कांग्रेस चर्चा नहीं चाहती है इसीलिए वह नयी-नयी शर्तें लगा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक अलग मुद्दा लाकर और एक शर्त लगाकर चर्चा से बचना चाहती है।
रीजीजू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह चुके हैं कि वह नीट मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं किंतु कांग्रेस पार्टी अब अलग से एक मुद्दा लेकर आयी है, जो ठीक नहीं है। इसके उपरांत खरगे ने आसन की अनुमति से अपनी बात रखते हुए कहा कि उपसभापति हरिवंश ने अपनी एक पुरानी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए सदन को बताया कि कार्य स्थगन संबंधी नियम 267 के तहत दुर्लभतम मामलों में चर्चा की जाती है। खरगे ने कहा कि ऐसे में जबकि प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग मर रहे हैं तो फिर दुर्लभतम क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि इसलिए इस विषय पर नियम 267 के तहत सदन में चर्चा करायी जानी चाहिए। खरगे से पहले द्रमुक नेता तिरुचि शिवा ने भी यही मांग की थी।
इससे पहले, रीजीजू ने लोकसभा में कहा कि वह नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सदन में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। लोकसभा की कार्यवाही सुबह स्थगित होने के बाद दोबारा 12 बजे शुरू हुई तो अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार की ओर से वक्तव्य देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू का नाम पुकारा। इसी बीच कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और इस मुद्दे पर विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग भी की। रीजीजू ने कहा, ''सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमने पहले दिन से यह बात कही है। लेकिन चर्चा नियम के तहत होती है। चर्चा कब होनी है, कितनी लंबी होनी है और किस नियम के तहत होनी है, इसका निर्णय अध्यक्ष (बिरला) सभी दलों के नेताओं से बात कर लेंगे।'' उन्होंने कहा, ''इस देश के युवाओं के भविष्य के लिए हम सब मिलकर सार्थक चर्चा करें, सरकार यही चाहती है।'' -
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड 2026 में भारतीय छात्रों ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 12 स्वर्ण और 7 रजत पदक अपने नाम किए। परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित छात्रों की इस उपलब्धि ने वैश्विक स्तर पर विज्ञान और गणित के क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड में सभी पांच स्वर्ण पदक जीतकर संयुक्त रूप से विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड में भी भारतीय टीम ने सभी चार स्वर्ण पदक जीतकर संयुक्त रूप से विश्व चैंपियन का दर्जा प्राप्त किया। अंतरराष्ट्रीय जीव विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने एक स्वर्ण और तीन रजत पदक जीते। वहीं, अंतरराष्ट्रीय गणितीय ओलंपियाड में भारत के खाते में दो स्वर्ण और चार रजत पदक आए। चारों ओलंपियाड को मिलाकर भारत ने कुल 12 स्वर्ण और 7 रजत पदक हासिल किए।
परमाणु ऊर्जा विभाग पिछले लगभग चार दशकों से राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के माध्यम से देश के प्रतिभाशाली छात्रों की पहचान, मार्गदर्शन और उन्नत प्रशिक्षण का कार्य कर रहा है। इस कार्यक्रम का संचालन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) के अंतर्गत होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (एचबीसीएसई) राष्ट्रीय नोडल केंद्र के रूप में करता है।परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने छात्रों की उपलब्धि को राष्ट्रीय गौरव बताते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों की मेहनत, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के समर्पण तथा वर्षों में विकसित मजबूत संस्थागत व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक सोच और उत्कृष्टता का उत्सव है।एचबीसीएसई के निदेशक प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने कहा कि विभाग के निरंतर सहयोग और वैज्ञानिक प्रतिभाओं को विकसित करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता ने इस सफलता को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन देशभर में विज्ञान और गणित के प्रति उत्कृष्टता की संस्कृति को मजबूत करता है।डीएई ने टीआईएफआर और एचबीसीएसई के माध्यम से वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और विषय विशेषज्ञों का एक सशक्त राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया है। इसी सहयोगात्मक व्यवस्था के कारण कई पीढ़ियों के ओलंपियाड विजेता आज देश और विदेश में उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक नेतृत्व में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।परमाणु ऊर्जा विभाग ने सभी पदक विजेताओं, टीम लीडरों, मेंटरों, वैज्ञानिक पर्यवेक्षकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई देते हुए कहा कि वैज्ञानिक शिक्षा और प्रतिभा संवर्धन में निरंतर निवेश भारत को वैश्विक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग ने भविष्य में भी युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्षों में अश्लील कंटेंट दिखाने और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) एक्ट सहित अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच (पब्लिक एक्सेस) बंद कर दी है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में दी।लोकसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कार्रवाई उन इंटरमीडियरी और ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ की गई, जिन्होंने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 की धारा 67 और 67ए, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 294 तथा इंडीसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वुमेन (प्रोहिबिशन) एक्ट, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन किया।अश्विनी वैष्णव ने कहा, “सरकार ने पिछले दो वर्षों में अश्लील कंटेंट प्रदर्शित करने और आईटी एक्ट की धारा 67 व 67ए, बीएनएस की धारा 294 तथा इंडीसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वुमेन (प्रोहिबिशन) एक्ट, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन करने पर 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी है।”उन्होंने बताया कि सरकार शिकायत मिलने पर कार्रवाई करती है और आईटी एक्ट की धारा 79(3)(बी) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इंटरमीडियरी को गैरकानूनी कंटेंट हटाने या उस तक पहुंच रोकने के निर्देश देती है।
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि सरकार की डिजिटल पॉलिसी का उद्देश्य सभी यूजर्स, विशेषकर बच्चों के लिए खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 मिलकर ऐसा कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं, जो डिजिटल वेलबीइंग, यूजर सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन भागीदारी को बढ़ावा देता है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आईटी रूल्स के तहत इंटरमीडियरी के लिए ड्यू डिलिजेंस का पालन करना अनिवार्य है। साथ ही उन्हें अपने यूजर्स को यह स्पष्ट रूप से बताना होता है कि वे ऐसा कोई कंटेंट होस्ट, डिस्प्ले, अपलोड, मॉडिफाई, पब्लिश, ट्रांसमिट, अपडेट या शेयर न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो या देश में लागू किसी भी कानून का उल्लंघन करता हो। - नई दिल्ली। अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए भारत ने मंगलवार को राहत सामग्री भेजी। इसमें खाने-पीने का सामान और परिवारों के रहने के लिए टेंट शामिल हैं। यह सामग्री अफगानिस्तान की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को सौंपी गई। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “नूरिस्तान में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने राहत सामग्री, जिसमें खाद्य सामग्री और परिवारों के लिए टेंट शामिल हैं, अफगानिस्तान की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी है, ताकि प्रभावित लोगों की मदद की जा सके। इस मुश्किल समय में भारत अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है।”स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत के परून शहर में आई बाढ़ से कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अफगानिस्तान की समाचार एजेंसी खामा प्रेस ने तालिबान प्रशासन के बयान का हवाला देते हुए बताया कि परून और आसपास के इलाकों में आई बाढ़ के बाद अब भी 100 से ज्यादा लोग लापता हैं। तालिबान की ओर से चलाए जा रहे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपने बयान में कहा कि तेज बाढ़ ने परून और नूरिस्तान के कई अन्य इलाकों को प्रभावित किया है। इससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।प्राधिकरण के सूचना और प्रकाशन विभाग के प्रमुख और प्रवक्ता हाफिज मोहम्मद यूसुफ हमद ने बताया कि हालात का जायजा लेने, लापता लोगों की तलाश करने और नुकसान का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ टीमों को तुरंत प्रभावित इलाकों में भेजा गया है। बाढ़ की वजह से कई घर, खेती की जमीन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं या पूरी तरह बह गईं, जिससे लोगों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। हमद ने कहा कि बचाव और राहत अभियान जारी है, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।100 से ज्यादा लोगों के अब भी लापता होने के कारण अधिकारियों को आशंका है कि जैसे-जैसे बचाव दल खोज अभियान आगे बढ़ाएंगे, मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। टीमें उन लोगों की तलाश कर रही हैं जो बाढ़ के तेज बहाव में बह गए हो सकते हैं। यह बाढ़ नूरिस्तान के कई हिस्सों में हुई भारी बारिश के बाद आई। पहाड़ी इलाका होने और सड़कों की सीमित सुविधा के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं। अफगानिस्तान उन देशों में शामिल है जो मौसम से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं के लिए बेहद संवेदनशील हैं। यहां अक्सर भूस्खलन, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं होती रहती हैं।
- नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार (अमेरिकी समयानुसार) रात लगातार 11वीं बार ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमले किए।CENTCOM के X पोस्ट के अनुसार, हमलों में ईरान के सैन्य संचालन केंद्रों, समुद्री क्षमताओं, विमान हैंगर, ड्रोन भंडारण केंद्रों और सैन्य लॉजिस्टिक्स ढांचे को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है।अमेरिकी सेना का दावा है कि पिछले तीन महीनों में ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजरने वाले 30 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए, जिससे नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ।CENTCOM ने यह भी कहा कि तनाव के बावजूद हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है। मई की शुरुआत से अब तक अमेरिकी बलों ने लगभग 900 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया है, जिनके जरिए करीब 45 करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन हुआ।वहीं, ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है।ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, संचार ढांचे और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके अलावा जॉर्डन में भी अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए। ईरानी सेना के अनुसार, कैंप अरिफजान, अहमद अल-जाबेर एयर बेस और शेख ईसा एयर बेस सहित कई अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। ईरान ने इन कार्रवाइयों को हालिया अमेरिकी हमलों का जवाब बताया है।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एंडी बर्नहम को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभालने पर बधाई देते हुए मंगलवार को कहा कि भारत और ब्रिटेन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हैं। लेबर पार्टी के नवनिर्वाचित नेता एंडी बर्नहम ने सोमवार को ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का पद संभालने पर एंडी बर्नहम को हार्दिक बधाई।'' उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हैं तथा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा तथा लोगों के बीच संबंधों सहित अनेक क्षेत्रों में व्यापक सहयोग है। मोदी ने उम्मीद जताई कि इस महीने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता लागू होने के साथ ही भारत-ब्रिटेन की द्विपक्षीय साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा, ''मैं भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा हमारे साझा 'विजन 2035' को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।''



























