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- नयी दिल्ली. घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या जून में लगभग 12 प्रतिशत घटकर 1.35 करोड़ रही, जबकि मई में एयरलाइन कंपनियों ने 1.53 करोड़ यात्रियों को सेवाएं दी थीं। सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। बीते वर्ष इसी महीने में 1.36 करोड़ यात्रियों की संख्या की तुलना में पिछले महीने यह गिरावट मामूली रही। आम तौर पर, जून, जुलाई और अगस्त का समय एयरलाइंस के लिए यात्रियों की संख्या के लिहाज से नरम होता है।नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के आंकड़ों के अनुसार, जून में इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 66.3 प्रतिशत हो गयी जो मई में 64.9 प्रतिशत थी। इसी दौरान एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी घटकर 23.9 प्रतिशत रह गयी जो इससे पिछले महीने 25.6 प्रतिशत थी। अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गयी जो मई में 5.8 प्रतिशत थी।स्पाइसजेट की बाजार हिस्सेदारी घटकर पिछले महीने 1.9 प्रतिशत रही जो मई में 2.5 प्रतिशत थी।डीजीसीए ने जून के लिए यातायात आंकड़ों पर अपनी रिपोर्ट में कहा, ''घरेलू एयरलाइन कंपनियों से जनवरी-जून, 2026 के दौरान यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 864.04 लाख थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 851.74 लाख थी। इस तरह सालाना आधार पर 1.44 प्रतिशत की वृद्धि और मासिक आधार पर 1.03 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।'' पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ने की वजह से एयरलाइन कंपनियों ने अपने नेटवर्क में भी कुछ समय के लिए कटौती की थी। इंडिगो का जून में समय पर उड़ान संचालन 89.4 प्रतिशत रहा। इसके बाद एयर इंडिया ग्रुप (85.9 प्रतिशत), अकासा एयर (82.7 प्रतिशत), अलायंस एयर (74.7 प्रतिशत) और स्पाइसजेट (33.5 प्रतिशत) का स्थान रहा। समय पर उड़ान संचालन (ओटीपी) की गणना 10 प्रमुख हवाई अड्डों... बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, कोचीन, गुवाहाटी और लखनऊ... के लिए की जाती है। पिछले महीने,अनुसूचित घरेलू एयरलाइंस के लिए कुल उड़ान रद्द होने की दर 0.63 प्रतिशत रही। जून में उड़ानें रद्द होने से प्रभावित 43,968 यात्रियों के मुआवजे और सुविधाओं के लिए घरेलू एयरलाइंस ने 61.98 लाख रुपये खर्च किए। आंकड़ों के अनुसार, उड़ान में देरी से प्रभावित 1,10,273 यात्रियों की सुविधाओं पर एयरलाइंस ने कुल 2.85 करोड़ रुपये खर्च किए। विमानन कंपनियों ने जून में 1,847 यात्रियों को बोर्डिंग से मना कर दिया। एयरलाइंस ने इस मामले में मुआवजे और सुविधाओं के लिए 64.84 लाख रुपये खर्च किए।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह व्यापार समझौते को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी 2026 को व्यापार समझौते की घोषणा की थी और इसके लिए 7 फरवरी को संयुक्त बयान जारी किया गया था। सात फरवरी को अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय निर्यात पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क हटा दिया गया था। यह शुल्क अमेरिका ने भारत द्वारा रूस से तेल आयात करने का हवाला देते हुए लगाया था।इसके बाद, 20 फरवरी को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के एक फैसले में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ (शुल्क) को अमान्य कर दिया गया, जिसके बाद पारस्परिक शुल्क लागू नहीं रहे। हालांकि, अमेरिका सरकार ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 122 के तहत 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों के कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने के लिए शासकीय आदेश जारी किए हैं। प्रसाद ने कहा, ''(भारत) सरकार सभी घटनाक्रमों का अध्ययन कर रही और अमेरिका सरकार के साथ बातचीत कर रही है।''
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भुवनेश्वर. ओडिशा पुलिस ने पुरी रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से होटल बुकिंग के नाम पर ठगी करने वाली कम से कम आठ फर्जी होटल वेबसाइट को बंद करा दिया है। एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। साइबर सुरक्षा अभियान चला रही अपराध शाखा ने श्रद्धालुओं से सतर्क रहने और होटल की बुकिंग केवल विश्वसनीय एवं अधिकृत माध्यमों से ही करने की अपील की है। अपराध शाखा ने बयान में कहा, ''20 जुलाई को आठ फर्जी होटल वेबसाइट को बंद करा दिया गया। हम सभी श्रद्धालुओं से अपील करते हैं कि वे सतर्क रहें, साइबर सुरक्षा संबंधी सलाह का पालन करें, होटल बुकिंग केवल वास्तविक स्रोतों से ही करें और सुरक्षित तथा साइबर जागरूक रथ यात्रा-2026 सुनिश्चित करने में पुलिस का सहयोग करें।'' बयान के अनुसार, अभियान के तहत एक विशेष टीम तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, होटल मालिकों, स्थानीय लोगों और अन्य संबंधित पक्षों को त्योहार के दौरान उभर रहे साइबर खतरों के प्रति जागरूक कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीम पुरी के प्रमुख होटल का दौरा कर उनके प्रबंधन को रथ यात्रा के दौरान पर्यटकों और श्रद्धालुओं को निशाना बनाने वाले फर्जी होटल बुकिंग धोखाधड़ी के बारे में जागरूक कर रही है। साथ ही होटल की वेबसाइट का भी आकलन किया जा रहा है और उनमें मौजूद संभावित कमजोरियों को दूर करने के लिए परामर्श जारी किया जा रहा है। पुरी में 16 जुलाई से शुरू हुई रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। यह उत्सव 27 जुलाई को 'नीलाद्रि बीजे' अनुष्ठान के साथ संपन्न होगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से वापस जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे।
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अमरावती. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार सूखा प्रभावित रायलसीमा क्षेत्र में जल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने, जल भंडारण क्षमता बढ़ाने, सिंचाई अवसंरचना के आधुनिकीकरण और सिंचित क्षेत्र के विस्तार के लिए 20,884 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने पर 1,472 करोड़ लीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होने, 4.37 लाख एकड़ क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था स्थिर होने तथा लगभग 9.80 लाख एकड़ अतिरिक्त भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार नायडू ने कहा, ''सरकार रायलसीमा में 20,884 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक सिंचाई परियोजनाएं लागू कर रही है। इनका उद्देश्य लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करना, मौजूदा अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना, जलाशयों को सुदृढ़ बनाना, जल उपयोग दक्षता बढ़ाना और क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।'' विज्ञप्ति में कहा गया कि सरकार वैधानिक रूप से स्वीकृत सिंचाई परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के साथ-साथ मौजूदा सिंचाई तंत्र को मजबूत करने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दे रही है। हंद्री-नीवा सुजला श्रवंती (एचएनएसएस) परियोजना इस कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा है। इस परियोजना पर पिछले एक वर्ष में लगभग 3,880 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि नहरों को मजबूत करने के लिए 3,145 करोड़ रुपये अतिरिक्त निर्धारित किए गए हैं। सरकार ने बताया कि गैलेरु-नगरी सुजला श्रावंती (बीएनएसएस) परियोजना के तहत भी कार्य तेजी से जारी है। इस परियोजना का उद्देश्य कड़पा, अन्नामैया और चित्तूर जिलों में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। विज्ञप्ति में कहा गया कि सरकार भूजल पुनर्भरण के लिए पारंपरिक जल स्रोतों के पुन:विकास पर भी काम कर रही है। इसके तहत 1,011 सिंचाई तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया गया है, जिनमें से 530 तालाबों का कार्य पूरा किया जा चुका है।
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नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने मंगलवार को दावा किया कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके भविष्य में भीम आर्मी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, क्योंकि हर जन आंदोलन से राजनीतिक नेता निकलते हैं। झारखंड के गोड्डा से सांसद ने कहा कि हालांकि, यह आंदोलन अब भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना नेता मानता है और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उनकी ओर देखता है। दुबे ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ''हर आंदोलन ने राजनीतिक नेता दिए हैं। जेपी आंदोलन से लालू प्रसाद यादव जैसे नेता निकले। अरविंद केजरीवाल भी अन्ना हजारे के आंदोलन से ही सामने आए थे।'' उन्होंने कहा, ''अभिजीत दीपके भी भविष्य में चुनाव लड़ सकते हैं। नेपाल में भी, 'जेन जेड' आंदोलन से जुड़े लोग आखिरकार किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो गए। इसी तरह, अभिजीत दीपके भी किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होंगे। मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि वह भीम आर्मी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।" नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को हजारों लोग 'कॉकरोच जनता पार्टी' के 'चलो संसद' मार्च में शामिल हुए। दीपके के नेतृत्व में, कॉजपा ने 20 जून को जंतर-मंतर पर देश की परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। अठाईस जून को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद इस प्रदर्शन को और गति मिली। दुबे ने दावा किया कि दीपके के आसपास नारे लगाने वाले लोग भीम आर्मी के समर्थक थे।
उन्होंने आरोप लगाया, "अभिजीत दीपके के आसपास नारे लगाने वाले लोग भीम आर्मी के समर्थक हैं और वे लोग हैं, जिन्होंने सीएए का विरोध किया था, जिसमें ओखला में लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन से जुड़े लोग भी शामिल हैं। उनका एजेंडा साफ है।" दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को राजग संसदीय दल की बैठक के दौरान युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा, ''यह आंदोलन अब भी प्रधानमंत्री मोदी को अपना नेता मानता है। अगर युवाओं का किसी पर भरोसा है, तो वह प्रधानमंत्री मोदी हैं।'' भाजपा सांसद ने कहा, ''इस आंदोलन से जुड़े युवाओं ने बार-बार एक ही बात कही है - प्रधानमंत्री तक यह बात पहुंचाई जाए कि इन मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी ने भी आज अपने भाषण में इस बारे में बात की।''
जब दुबे से आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा मोदी को "देश का सबसे बड़ा देश-विरोधी" कहे जाने के बारे में पूछा गया, तो दुबे ने कहा कि इसपर कोई प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ''अगर सड़क पर चलता हुआ कोई व्यक्ति कोई टिप्पणी करता है, तो क्या प्रधानमंत्री उसका जवाब देंगे? क्या प्रधानमंत्री को ऐसे हर बयान पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए?'' भाजपा सांसद ने केजरीवाल पर पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या को हल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''अरविंद केजरीवाल क्या अच्छा काम कर रहे हैं? आप पंजाब की हालत जानते हैं। उन्होंने पंजाब के लिए क्या किया है? अगर पंजाब मादक पदार्थों का केंद्र बन गया है, अगर युवा मर रहे हैं और पूरा राज्य परेशान है, तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?'' उन्होंने कहा, "लोकपाल आंदोलन अन्ना हजारे की वजह से हुआ था, लेकिन जब केजरीवाल मुख्यमंत्री थे, तो क्या वह कभी अन्ना हजारे से मिलने गए? क्या लोकपाल लागू हुआ? क्या दिल्ली में लोकपाल नियुक्त किया गया? आप किस तरह के लोगों की बात कर रहे हैं?'' लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के इस बयान पर कि प्रधानमंत्री को कॉजपा के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस बर्बरता के लिए उनसे माफी मांगनी चाहिए, दुबे ने कहा कि इसके बजाय कांग्रेस को अपने शासनकाल की कई घटनाओं के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''इंदिरा गांधी और उनके परिवार को 1975 में लगाए गए आपातकाल के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए। जिस तरह से अन्ना हजारे आंदोलन को दबाया गया और युवा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, उसके लिए माफ़ी मांगी जानी चाहिए।'' -
बचाव अभियान जारी
गंगटोक। सिक्किम के नामची जिले में एक दिन पहले निर्माणाधीन सुरंग ढहने से 10 मजदूरों की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। नामची के जिलाधिकारी ने कहा कि पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि झोलुंगे के समरडुंग में एनएचपीसी (नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन) तीस्ता चरण-छह जल विद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग भूस्खलन के कारण ढह गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि सोमवार को एडीआईटी-तीन सुरंग के अचानक ढह गई और घटना के वक्त परियोजना अधिकारी और श्रमिकों समेत कुल 25 लोग एडीआईटी-तीन सुरंग के अंदर फंसे हुए थे। तमांग ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे बात की और बचाव अभियान के बारे में जानकारी ली।
नामची पुलिस ने एक बयान में कहा, ''मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे तक 10 शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में से छह की पहचान हो गई है, जबकि तीन अज्ञात शवों को जिला अस्पताल सिंगतम और सर थुटोब नामग्याल मेमोरियल (एसटीएनएम) अस्पताल ले जाया गया।'' बयान में कहा गया है कि जिन सात मृतकों की पहचान हुई है उनमें से चार पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी से थे, एक-एक व्यक्ति असम, पंजाब और उत्तराखंड के देहरादून से था तथा एक व्यक्ति नामची का रहने वाला था। तमांग ने एक बयान में कहा, ''हादसे में अपनी जान गंवाने वाले कर्मियों के परिवारों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। दुख की इस घड़ी में पूरे राज्य की संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ है और हम इस मुश्किल घड़ी में मजबूती से उनके साथ खड़े हैं।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जारी बचाव अभियान की करीबी निगरानी कर रहे हैं।
तमांग ने बताया कि नामची जिला प्रशासन, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए), सिक्किम पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं और पाकयोंग व सिलीगुड़ी से आए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम के साथ अन्य एजेंसियां सुरंग के अंदर फंसे शेष श्रमिकों के शव निकालने के लिए लगातार काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नामची जिले के समरडुंग, झोलुंगे में एनएचपीसी तीस्ता चरण-छह जल विद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग में हुई दुखद घटना के बाद माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझसे (फोन पर) बात की और मौजूदा हालात तथा जारी बचाव कार्यों के बारे में जानकारी ली।'' उन्होंने यह भी कहा, ''प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति उनकी चिंता और संवेदना भरे शब्दों के साथ-साथ भारत सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन इस कठिन घड़ी में सिक्किम के लोगों के लिए एक बड़ा संबल बना है।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को हर संभव मदद करने, बचाव कार्यों में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा के उच्चतम मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार दोपहर भूस्खलन के कारण सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया और गैस रिसाव की आशंका के बीच लगभग 27 मजदूर अंदर फंस गए थे। उन्होंने बताया कि सुरंग के अंदर गैस होने के कारण बचाव अभियान जटिल हो गया है और फंसे श्रमिकों तक पहुंचने की कोशिश के दौरान कई बचावकर्मियों को चक्कर आए और कुछ बेहोश भी हो गए। अधिकारियों के अनुसार, माना जा रहा है कि गैस का रिसाव भूमिगत परतों या भूस्खलन प्रभावित चट्टानी संरचनाओं से प्राकृतिक रूप से हो रहा है। - नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत पनामा के साथ 'करीबी संबंध' बनाने का इच्छुक है, क्योंकि यह देश भारत जैसे साझेदार के लिए रणनीतिक स्थिति के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता और संभावनाएं भी प्रदान करता है। हैदराबाद हाउस में पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज़-आचा वास्केज के साथ हुई बैठक में अपनी शुरुआती बातचीत के दौरान जयशंकर ने यह भी कहा कि ''हमारी दोनों सरकारें और हमारे दोनों नेता हमारी साझेदारी को और प्रगाढ़ और व्यापक बनाने के लिए बहुत उत्सुक हैं।'' वास्केज 19 से 23 जुलाई तक भारत की यात्रा पर हैं। इस दौरान वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।जयशंकर ने कहा, ''मेरा मानना है कि आपकी यह यात्रा हमारे दोनों देशों के संबंधों को प्रगाढ़ करने की दिशा में बढ़ी गति को और आगे बढ़ाएगी। मुझे आज होने वाली बातचीत का बेसब्री से इंतज़ार है और मुझे पूरा भरोसा है कि इससे हमारी साझेदारी का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी।'' विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पनामा के विदेश मंत्री की यात्रा ''सभी क्षेत्रों में हमारे संबंधों को और मजबूत करेगी''। विदेश मंत्री के मुताबिक पनामा, भारत के लिए वैश्विक व्यापार मार्ग पर एक 'नैसर्गिक सेतु' और व्यापक लातिन अमेरिकी क्षेत्र के लिए एक प्रवेश द्वार का काम करता है।
- पुणे. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक पुरस्कार के लिए चुना गया है। तिलक स्मारक ट्रस्ट ने सोमवार को यह घोषणा की। ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रोहित तिलक ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक अगस्त को पुणे में आयोजित समारोह में डोभाल को यह पुरस्कार प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के भी समारोह में शामिल होने की संभावना है। पुरस्कार समारोह पुणे के गुलटेकड़ी क्षेत्र स्थित महाराष्ट्रीय मंडल मैदान में आयोजित किया जाएगा।डोभाल (81) ने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशन में राजनयिक दायित्व भी निभाए हैं। वह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। डोभाल भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रह चुके हैं। इसके अलावा, डोकलाम गतिरोध को समाप्त कराने में कूटनीतिक प्रयासों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। लोकमान्य तिलक पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में की गई थी। यह पुरस्कार सबसे पहले समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार हर साल एक अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने राष्ट्र की प्रगति और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। विगत वर्षों में यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा वरिष्ठ नेता शरद पवार सहित अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों को प्रदान किया जा चुका है।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को संसद के मानसून सत्र को उत्पादक एवं सार्थक बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि सदन में चर्चा तर्क और तथ्यों के आधार पर होगी तो हंगामे या ऊंची आवाज में बोलने की कोई जरूरत नहीं होगी। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद भवन परिसर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि मौसमी मानसून का सकारात्मक प्रभाव दिखना शुरू हो गया है और संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''जब दोनों उत्पादक होते हैं तो वे देश और सभी जीवों के कल्याण में योगदान देते हैं। इसी उम्मीद के साथ हम प्रार्थना करते हैं कि मानसून सक्रिय रहे और संसद का मानसून सत्र भी उतना ही उत्पादक हो।'' मॉनसून सत्र में विपक्ष नीट प्रश्नपत्र लीक, अयोध्या में राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी और ई-20 पेट्रोल जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है, ऐसे में सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना है। मोदी ने कहा कि सत्र शुरू होने के साथ ही देश ने गति पकड़ ली है और संसद की भावना इस गति में नई ऊर्जा भर सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है। उन्होंने सदन में सार्थक चर्चा और देश को आगे ले जाने के लिए सामूहिक संकल्प लेने पर जोर दिया।प्रधानमंत्री ने कहा, ''हमारी संसद में हर दल के कई अनुभवी सांसद हैं, जिनका ज्ञान और अनुभव संसद तथा देश के लिए जरूरी है। इसलिए संसद चलनी चाहिए, सार्थक चर्चा होनी चाहिए और देश को आगे ले जाने के लिए सामूहिक संकल्प लिए जाने चाहिए। यह समय की मांग और युवाओं की आकांक्षा है।'' उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना से भरी आवाजों को संसद में उचित मंच मिले, ताकि युवाओं की आवाज उठाई जा सके और देश को दिशा दी जा सके। मोदी ने कहा, ''मेरा मानना है कि जहां तथ्य होते हैं, वहां हंगामे की जरूरत नहीं होती। यदि आपके तर्क और तथ्य मजबूत हैं तो आवाज ऊंची करने की जरूरत नहीं है। मजबूत तर्क और तथ्य शांत लेकिन प्रभावी तरीके से आवाज को अपनी बात रखने में सक्षम बनाते हैं। हर आवाज को सुने जाने का अवसर मिलना चाहिए। यही संसद की भूमिका है। मैं सभी सांसदों से आग्रह करता हूं कि वे सदन की कार्यवाही में पूरे मनोयोग से भाग लें।'' प्रधानमंत्री ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट बनाने वाले युवा नवप्रवर्तकों की सराहना करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष भी किया और कहा कि वह ''56 साल के युवा'' की बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल मानसून सत्र से ठीक पहले एक भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा था और दो दिन पहले एक भारतीय युवा स्टार्टअप ने असाधारण उपलब्धि हासिल की है।मोदी ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक बड़ा संदेश है कि भारत के युवाओं की क्षमता और आकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह असीमित हैं और इससे बड़ी प्रेरणा देश के लिए कुछ नहीं हो सकती। प्रधानमंत्री का इशारा स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा शनिवार को देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' के सफल प्रक्षेपण की ओर था। कंपनी ने कई प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया, जिसके साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद निजी ऑर्बिटल प्रक्षेपण क्षमता रखने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया। मोदी ने कहा कि दुनिया में ऐसे कुछ ही देश हैं जहां निजी कंपनियों ने इस तरह की क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा नवप्रवर्तकों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की आकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और यह वास्तव में उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा, ''मुझे बताया गया है कि स्काईरूट स्टार्टअप में काम करने वाली टीम की औसत आयु केवल 28 वर्ष है। इन्हीं युवा दिमागों ने यह संभव बनाया है। मैं 56 साल के युवा व्यक्ति की बात नहीं कर रहा हूं। मैं एक ऐसे स्टार्टअप की बात कर रहा हूं जिसकी टीम की औसत आयु केवल 28 साल है और जिसने अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का झंडा गाड़ दिया है।'' लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस साल 19 जून को 56 वर्ष के हुए हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां देश में आत्मविश्वास पैदा करती हैं और दुनिया में भारत की एक सम्मानित एवं भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थिति को और मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि यह उस ''सुधार एक्सप्रेस'' का परिणाम है जिस पर देश सवार हुआ है और जिसने युवाओं को ऐसे साहसिक कदम उठाने तथा सफलता हासिल करने में सक्षम बनाया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि ऊर्जा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए यह एक बड़ा संकट है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और रसायन जैसे क्षेत्रों में बाधाएं आईं, लेकिन इसके बावजूद भारत 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। उन्होंने कहा, ''यह भारत की ताकत और उत्साह एवं ऊर्जा के साथ नई ऊंचाइयां हासिल करने के संकल्प को दर्शाता है।''प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल में राजस्थान में एक बड़ी तेल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई और कुछ सप्ताह पहले देश के तीसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन हुआ। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले हरित हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू की गई, और यह सुविधा दुनिया के बहुत कम देशों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा अपने नागरिकों को समर्पित यह हाइड्रोजन ट्रेन सबसे शक्तिशाली इंजन और सबसे लंबी दूरी तक बिना रुके चलने की क्षमता वाली ट्रेन है। मोदी ने कहा, ''यह भारत के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और श्रमिकों के समर्पण का परिणाम है, जो राष्ट्र के लिए एक मिशन के साथ काम कर रहे हैं।''.
- वर्धा. महाराष्ट्र के वर्धा जिले में मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेसवे पर सोमवार तड़के एक ट्रक और कार की टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह दुर्घटना तड़के करीब तीन बजे विरुल गांव के पास हुई, जिसके बाद दोनों वाहनों में आग लग गई। हादसे के कारण इस व्यस्त एक्सप्रेसवे पर यातायात बाधित हो गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एथेनॉल ले जा रहा एक कंटेनर ट्रक एक्सप्रेसवे पर 'इंटरचेंज आईसी-80' के पास पलट गया। हालांकि दूसरी लेन चालू थी तभी सड़क पर रुकी एक कार को ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी, जिससे दोनों वाहनों में आग लग गई। उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में कार में सवार चार यात्रियों और ट्रक चालक सहित उसमें सवार दो लोगों की मौत हो गई। बचाव और यातायात बहाली कार्यों के वास्ते राजमार्ग सुरक्षा के लिए गश्त दल, वर्धा पुलिस, दमकल विभाग और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम की टीम तुरंत मौके पर पहुंचीं। अधिकारी ने बताया कि चूंकि पलटे कंटेनर में अत्यधिक ज्वलनशील एथेनॉल था, इसलिए इसे सुरक्षित रूप से हटाने से पहले खाली करना आवश्यक था। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर यह अभियान अत्यंत सावधानी के साथ चलाया जा रहा है।\मुंबई-नागपुर मार्ग पर यातायात को विपरीत लेन से निकाला गया, जिससे प्रभावित हिस्से में भारी जाम लग गया। पुलिस ने नागपुर से मुंबई की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को अगले कुछ घंटों के लिए वर्धा तक समृद्धि एक्सप्रेसवे का उपयोग करने से बचने की सलाह दी और नागपुर-अमरावती राजमार्ग का उपयोग करने के लिए कहा है। राजमार्ग पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, समृद्धि एक्सप्रेसवे पर 2025 में 185 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2024 के 137 के आंकड़े से 35 प्रतिशत अधिक है। विदर्भ के सबसे बड़े शहर नागपुर को मुंबई से जोड़ने वाले इस 701 किलोमीटर लंबे छह लेन के राजमार्ग को दिसंबर 2022 से कई चरणों में यातायात के लिए खोला गया था। अधिकारियों ने पहले कहा था कि निगरानी में सुधार और सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए वर्तमान में एक अत्याधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है।
- इंदौर (मध्यप्रदेश). घास के ढेर में सुई खोजने वाली कहावत तो आपने सुनी होगी, लेकिन देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में नगर निगम के कर्मचारियों ने कचरे के कई टन वजनी ढेर में दबे चांदी के एक कलश को खोजकर इसे हकीकत में बदल दिया है। अधिकारियों ने बताया कि राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक परिवार की बुजुर्ग महिला ने 18 जुलाई को अपने घर के कचरे के साथ अनजाने में वह थैली भी नगर निगम के अपशिष्ट संग्रहण वाहन में डाल दी जिसमें चांदी का करीब दो किलोग्राम वजनी कलश रखा था। उन्होंने बताया कि थैली बंद थी और कचरे की दूसरी थैलियों के बीच रखी थी, इसलिए नगर निगम के किसी भी कर्मचारी को महिला की गलती का अंदाजा नहीं हुआ। अधिकारियों के मुताबिक महिला के घर में जब कलश नहीं मिला, तो उसके परिवार के होश उड़ गए क्योंकि यह पुश्तैनी धरोहर के रूप में सहेजकर रखा गया था और इसे पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता था। घबराए परिवार ने नगर निगम अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन तब तक कलश लंबी यात्रा तय कर चुका था।अधिकारियों ने बताया कि चांदी के कलश को दूसरे कचरे के साथ पहले एक अपशिष्ट स्थानांतरण स्टेशन ले जाया गया और वहां से इसे शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड के केंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण केंद्र पहुंचा दिया गया। मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक (सीएसआई) विजय यादव ने सोमवार को बताया, "शुरुआत में हमें लगा कि इस कलश को ढूंढना लगभग नामुमकिन है क्योंकि प्रसंस्करण केंद्र में हर रोज पूरे शहर का सैकड़ों टन कचरा पहुंचता है। यह सचमुच घास में सुई खोजने जैसा काम था।" यादव ने बताया कि प्रसंस्करण केंद्र में कचरे की छंटाई करने वाले कर्मचारियों को चांदी के कलश के बारे में सूचना दी गई। इस केंद्र में प्लास्टिक, धातु, तार, थर्माकोल, जूते-चप्पल और अन्य वस्तुएं अलग-अलग की जाती हैं और बाद में उनका प्रसंस्करण किया जाता है। उन्होंने बताया, ''प्रसंस्करण केंद्र के कर्मचारियों ने कलश को धातु के कबाड़ के कई टन वजनी ढेर में रख दिया था क्योंकि किसी भी व्यक्ति को अंदाजा नहीं था कि यह चांदी का है।'' सीएसआई ने बताया कि महिला के परिवार ने नगर निगम अधिकारियों को कलश की तस्वीर उपलब्ध कराई जिसके बाद कर्मचारियों ने इसकी खोजबीन शुरू की। उन्होंने बताया, ''हमें दो दिन की खोजबीन के बाद ऐसा कलश मिला जिसकी बनावट इस तस्वीर से मेल खा रही थी। कलश पर संबंधित परिवार का नाम भी उकेरा हुआ था। परिवार को जब कलश मिलने की सूचना दी गई, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।'' यादव ने हालांकि कहा कि अगर नगर निगम को कलश गुम होने की सूचना देर से मिलती, तो इस बर्तन का बचना मुश्किल था।उन्होंने बताया कि प्रसंस्करण केंद्र में छंटाई के बाद धातु के कबाड़ को मशीनों से दबा दिया जाता है जिसके बाद किसी एक बर्तन की पहचान करना असंभव हो जाता। चांदी के कलश को कचरा जमा करने वाली गाड़ी में गलती से डालने वाली बुजुर्ग महिला फिलहाल अपने परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर शहर से बाहर हैं और उनका कलश अमानत के तौर पर क्षेत्रीय पार्षद प्रशांत बड़वे के पास रखा है। महिला ने अपना नाम जाहिर न किए जाने की शर्त पर कहा, "हमारे पुश्तैनी कलश का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसे खोजने के लिए नगर निगम कर्मचारियों की जितनी तारीफ की जाए, कम है।" पार्षद बड़वे ने बताया कि चांदी के कलश का वजन करीब दो किलोग्राम है और वर्तमान दरों के मुताबिक इसकी कीमत चार से पांच लाख रुपये के बीच आंकी जा रही है। चांदी का कलश खोज निकालने वाले नगर निगम कर्मचारियों की ईमानदारी और मेहनत की सराहना करते हुए क्षेत्रीय नागरिकों ने उनका सम्मान किया।
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नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को 271वें सत्र के उद्घाटन पर सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण चर्चा की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बहस और निर्णय के लिए उपलब्ध समय का सदुपयोग करना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही सदन की गरिमा, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की भी अपील की।
सभापति ने अपने उद्घाटन संबोधन में सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्यसभा में सार्थक विचार-विमर्श की गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि 271वां सत्र भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा। सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि इस सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर बहस और निर्णय के लिए उपलब्ध समय का प्रभावी उपयोग करें और कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग दें।सभापति ने बताया कि इस सत्र से सचिवालय ने सदस्यों की सीटों पर उपलब्ध मल्टीमीडिया उपकरणों के जरिए नौ भाषाओं में लाइव एआई-आधारित समवर्ती अनुवाद की सुविधा शुरू की है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा का दायरा चरणबद्ध तरीके से सभी 22 अनुसूचित भाषाओं तक बढ़ाया जाएगा। साथ ही उन्होंने सदस्यों से इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने का अनुरोध किया।उन्होंने कहा कि इस सत्र की कार्यसूची में कई महत्वपूर्ण विधायी और विचार-विमर्श संबंधी विषय शामिल हैं। ऐसे में सभी सदस्यों को कार्यसूची के समयबद्ध निपटान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हर व्यवधान से राष्ट्र और जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा में देरी होती है।सभापति ने कहा कि मतभेद संसदीय लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें सदन की गरिमा और मर्यादा के अनुरूप व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही में व्यवधान की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और सभी सदस्यों को इस प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा बनाए रखने में योगदान देना चाहिए।अपने संबोधन के अंत में सीपी राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों को सफल, रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण सत्र की शुभकामनाएं दीं। -
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र 2026 के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए उम्मीद जताई कि पूरा सत्र सार्थक और उत्पादक रहेगा। उन्होंने कहा कि जैसे सक्रिय मानसून देश के लिए लाभकारी होता है, वैसे ही उत्पादक मानसून सत्र भी राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से संसद के सुचारू संचालन और रचनात्मक चर्चा में सहयोग की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाहे मानसून हो या मानसून सत्र, जब दोनों सक्रिय होते हैं तो उनका लाभ पूरे देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि सभी की प्रार्थना होनी चाहिए कि मानसून भी सक्रिय रहे और संसद का मानसून सत्र भी उत्पादक साबित हो, ताकि देशहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक निर्णय लिए जा सकें। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले एक महीने में भारत ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अंतरिक्ष क्षेत्र में कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्होंने प्रत्येक भारतीय को गौरवान्वित किया है। उन्होंने भारतीय युवाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार के बल पर देश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिक की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंच और निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप स्काईरूट की हालिया उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का परचम लहराया है। उन्होंने कहा कि कम उम्र के नवप्रवर्तकों ने यह साबित किया है कि भारत के युवाओं की क्षमता और आकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह असीमित हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार के सुधारों और नीतिगत बदलावों का ही परिणाम है कि देश के युवा बड़े जोखिम उठाकर नई सफलताएं हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुकूल वातावरण मिलने से नवाचार और उद्यमिता को नई गति मिली है, जिसका लाभ देश को मिल रहा है।
पीएम मोदी ने राजस्थान में नई तेल रिफाइनरी, देश के तीसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र और दुनिया की सबसे लंबी एवं सबसे शक्तिशाली हरित हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों और श्रमिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और रसायनों की आपूर्ति पर दबाव के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जो देश की क्षमता और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से संसद के सुचारू संचालन में सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की अपेक्षा है कि संसद में सार्थक चर्चा हो और राष्ट्रहित के मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि जहां ठोस तथ्य और तर्क होते हैं, वहां व्यवधानों की कोई जगह नहीं होती और शांतिपूर्ण वातावरण में भी प्रभावी तरीके से अपनी बात रखी जा सकती है। -
नई दिल्ली । ब्रिटिश नौसैनिक एजेंसी ‘यूके यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स’ (यूकेएमटीओ) ने होर्मुज से गुजर रहे जहाज पर हमले की जानकारी दी है। एजेंसी के मुताबिक, जहाज पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया था। आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एजेंसी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक जहाज में आग लग गई। हालांकि, जहाज पर सवार सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। ब्रिटिश नौसैनिक एजेंसी ने बताया, “चालक दल ने सुरक्षित रूप से जहाज छोड़ दिया और उन्हें एक टग बोट (खींचने वाले जहाज) ने सुरक्षित बचा लिया। यह हमला ओमान के कुमजार से 8 समुद्री मील (लगभग 15 किलोमीटर) उत्तर-पश्चिम में हुआ।” संस्था ने अपने बयान में कहा, “आग अभी तक बुझाई नहीं जा सकी है और जहाज फिलहाल समुद्र में बह रहा है।” यूकेएमटीओ ने सभी जहाजों को सतर्कता के साथ यात्रा करने की सलाह दी है और कहा है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी जांच अधिकारियों को दी जाए।
होर्मुज में हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आरोप लगाया कि ईरान होर्मुज का इस्तेमाल जंग में दबाव बनाने के लिए कर रहा है। उन्होंने दुनिया के अन्य देशों से इस रूट की सुरक्षा में अधिक योगदान देने की अपील की। फिलीपींस रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रूबियो ने कहा, “अमेरिका होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। हालांकि, यह जिम्मेदारी केवल अमेरिका की नहीं होनी चाहिए।”इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि जॉर्डन में उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सफल हमला किया। इसकी जानकारी कथित तौर पर उसे कुछ स्थानीय सूत्रों ने दी है। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, आईआरजीसी ने कहा कि जॉर्डन के अल-अजराक एयरबेस पर अमेरिकी सेना के 20 हैंगर नष्ट कर दिए गए और इस हमले में अच्छी खासी तादाद में अमेरिकी सैनिक मारे गए। आईआरजीसी के अनुसार, उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों ने अकाबा एयरपोर्ट पर खड़े अमेरिकी सी-17 ट्रांसपोर्ट विमान और पी-8 निगरानी विमान को भी निशाना बनाया, जिससे उन्हें भारी नुकसान पहुंचा। -
नई दिल्ली। भारत ने डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपनी पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को मंजूरी दे दी है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने टाकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया की इस वैक्सीन को बाजार में उतारने की अनुमति दी है।यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए स्वीकृत की गई है। इसकी खास बात यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की जरूरत नहीं होगी कि व्यक्ति पहले कभी डेंगू से संक्रमित हुआ है या नहीं। यानी पहले डेंगू हो चुका हो या नहीं, दोनों ही स्थिति में पात्र लोग यह वैक्सीन लगवा सकते हैं।
कंपनी के अनुसार, QDENGA को वर्ष 2022 से अब तक 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और दुनिया भर में इसकी 3.2 करोड़ (32 मिलियन) से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं।टाकेडा के इंटरकॉन्टिनेंटल मार्केट्स प्रमुख महेंद्र नायक ने कहा कि भारत में इस वैक्सीन को मिली मंजूरी देश में डेंगू की रोकथाम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का बोझ सबसे अधिक है और यहां वायरस के सभी चार प्रकार (Serotypes) पाए जाते हैं।कंपनी ने बताया कि वैक्सीन को मंजूरी 19 वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों के आधार पर दी गई है। इन परीक्षणों के फेज-1, फेज-2 और फेज-3 में 28,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा भारत में हुए फेज-3 DEN-302 क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों को भी मंजूरी प्रक्रिया में शामिल किया गया।टाकेडा के मुताबिक, सात वर्षों के फॉलो-अप अध्ययन में पाया गया कि यह वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रकारों से होने वाले संक्रमण और डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम से लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है।यह वैक्सीन 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकों में दी जाएगी। दोनों डोज तीन महीने के अंतराल पर लगाई जाएंगी।टाकेडा के दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत क्लस्टर के मेडिकल अफेयर्स प्रमुख गोह चू बेंग ने कहा कि यह वैक्सीन डेंगू के सभी चार प्रकारों से सुरक्षा देने के लिए विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण, निगरानी, जनजागरूकता और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय भी डेंगू की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। -
नयी दिल्ली. असम का होलोंगापार अभयारण्य राज्य में तितलियों के सबसे समृद्ध बसेरों में भी शामिल है, जहां कई दुर्लभ तितलियां पाई जाती हैं। यह जानकारी एक नयी किताब में दी गई है। प्रकृतिविद और वन्यजीव फोटोग्राफर सारंगापाणि नियोग ने अपनी किताब "बटरफ्लाइज ऑफ गिब्बन वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी" में असम के जोरहाट जिले में स्थित इस अभयारण्य में देखी गईं तितलियों की 281 प्रजातियों का दस्तावेज तैयार किया है। इनमें से कई तितलियां बहुत दुर्लभ हैं और आसानी से दिखाई नहीं देतीं। इसलिए तितलियों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ इन्हें 'ड्रीम बटरफ्लाई' मानते हैं। नियोग के अनुसार, असम फॉरेस्ट बॉब (स्कोबुरा पैरावूलेटी), रेड-वेन्ड लांसर (पाइरोन्यूरा निआसाना) और येलो-वेन्ड लांसर (पाइरोन्यूरा लैटोइया) जैसी दुर्लभ प्रजातियां होलोंगापार गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य में पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस अभयारण्य में कई दूसरी दुर्लभ तितलियां भी रहती हैं, जो जंगलों पर निर्भर होती हैं। नियोग के अनुसार, यहां का प्राकृतिक वातावरण तितलियों के रहने के लिए बहुत अनुकूल है।
उन्होंने कहा, "यहां विकसित वन क्षेत्र है। ऊपरी हिस्से में ऊंचे होलोंग के पेड़ हैं, जबकि नीचे घनी झाड़ियां और जड़ी-बूटियां हैं। इस तरह की वनस्पति तितलियों की अलग-अलग प्रजातियों के लिए उपयुक्त छोटे-छोटे ठिकाने तैयार करती है।" उन्होंने कहा, 'यहां पेड़, झाड़ियां, बेलें, घास और कई तरह के पौधे पाए जाते हैं। ये पौधे तितलियों की इल्ली के लिए भोजन और बड़ी तितलियों के लिए फूलों का रस उपलब्ध कराते हैं। जंगल की छायादार पगडंडियां, धूपदार स्थान, छोटी जलधाराएं और गीली मिट्टी वाली जगहें कई तरह की तितलियों को आकर्षित करती हैं। इसी कारण यह अभयारण्य तितलियां देखने के लिए बहुत अच्छी जगह है।'" उन्होंने बताया कि हालांकि यह अभयारण्य केवल 20.98 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, लेकिन यहां वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन समेत स्तनधारियों की सात प्रजातियां, एशियाई हाथी, तेंदुआ, लेपर्ड कैट, फिशिंग कैट, सिवेट, जंगली सूअर, बार्किंग डियर, पैंगोलिन, कई प्रकार के सरीसृप, पक्षी, गिलहरियां और असंख्य बिना रीढ़ वाले जीव पाए जाते हैं। नियोग ने कहा कि तितलियां देखने के लिए बहुत आसानी से इस अभ्यारण्य पहुंचा जा सकता है।
उन्होंने कहा, "पर्यटक, शोधकर्ता, फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी तितलियों को उनके प्राकृतिक स्थान पर आसानी से देख सकते हैं और उनकी तस्वीरें ले सकते हैं, बिना उन्हें ज्यादा परेशान किए।" नियोग की 321 पृष्ठवासी यह पुस्तक फोटो म्यूजिंग्स कलर लैब द्वारा प्रकाशित की गई है। -
नयी दिल्ली. संगीतकार ए.आर. रहमान ने अपने भांजे जी.वी. प्रकाश कुमार को फिल्म 'अमरन' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर बधाई दी और इसे ''गर्व का क्षण'' बताया। शनिवार को घोषित 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (बैकग्राउंड स्कोर) के पुरस्कार के लिए कुमार को चुना गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा इन पुरस्कारों की घोषणा की गई, जिसमें भारतीय सिनेमा की 2024 की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। रहमान ने रविवार को 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा कर कुमार को पुरस्कार के लिए चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "जी. वी. प्रकाश, आपको तीसरे राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुने जाने पर बधाई। रहमान ने कहा, "हमारे परिवार के लिए गर्व का क्षण। हमारे परिवार को मिलने वाला यह 10वां राष्ट्रीय पुरस्कार है। संगीत के प्रति आपका जुनून, ईमानदारी और समर्पण लगातार प्रेरित करता है। आपको आगे भी ऐसी कई और उपलब्धियां हासिल हों, यही शुभकामनाएं हैं।'' कुमार इससे पहले वर्ष 2022 में फिल्म 'सूररई पोटरु' के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (बैकग्राउंड स्कोर) का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। इसके अलावा उन्हें वर्ष 2025 में फिल्म 'वाथी' के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन (गीत) का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।
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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस महीने 22 जुलाई को एक बैठक करेगा। इस महीने ट्रस्ट की यह दूसरी बैठक होगी। ट्रस्ट के महासचिव कृष्ण मोहन के अनुसार, राम मंदिर परिसर में अपराह्न तीन बजे एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद अपराह्न चार बजे ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास मणिराम छावनी में नियमित बैठक होगी। इसके पहले छह जुलाई को ट्रस्ट की बैठक हुई थी। कृष्ण मोहन ने सात जुलाई को ट्रस्टियों को भेजे गए पत्र में बैठक का एजेंडा साझा किया था। इसके अनुसार, 22 जुलाई की बैठक में छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक और उसी दिन अपराह्न तीन बजे आयोजित विशेष बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की जाएगी। बैठक में ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप विभिन्न समितियों के पुनर्गठन पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, यदि तब तक उपलब्ध हो जाती है तो चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। छह जुलाई को हुई बैठक चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की पहली बैठक थी। उस बैठक में ट्रस्ट ने ट्रस्ट डीड में संशोधन की सिफारिश करने के लिए एक विशेष समिति गठित की थी। साथ ही श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली भेंट के रखरखाव, मूल्यांकन और निस्तारण के संबंध में दिशा-निर्देश भी तय किए गए थे। यह बैठक पहले मणिराम छावनी में आयोजित होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे राम मंदिर परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर प्रस्तावित चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार ने मंदिर में प्राप्त चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के आदेश दिए हैं। इस विवाद के बाद प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है और जांच की प्रगति ट्रस्ट की बैठक का प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है।
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श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) . भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहले कक्षीय रॉकेट 'विक्रम-1' ने शनिवार को कई तकनीकी पेलोड और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पोस्टकार्ड सहित विभिन्न पोस्टकार्ड को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचा दिया। प्रधानमंत्री ने इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष यात्रा का ''एक निर्णायक क्षण'' बताया। 'मिशन आगमन' नाम से संचालित इस मिशन के साथ भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने पहली बार उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने वाले वैश्विक बाजार में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया। इस मिशन का संचालन हैदराबाद आधारित निजी कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने किया। कंपनी ने इस मिशन को ''बड़ी सफलता'' करार दिया।
अपने पहले अभियान में चार चरणों वाला और सात मंजिला इमारत जितना ऊंचा 'विक्रम-1' रॉकेट शनिवार को बादलों से घिरे मौसम के बीच दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर इसरो के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले प्रक्षेपण परिसर से सफलतापूर्वक रवाना हुआ। प्रक्षेपण के दौरान रॉकेट से नारंगी रंग का धुआं निकला और इस अंतरिक्ष केंद्र से एक नए युग की शुरुआत हुई। इससे पहले दिशा-निर्देशन प्रणाली से जुड़ी संभावित समस्या के कारण प्रक्षेपण को ''अस्थायी रूप से रोक'' दिया गया था, जिसके कारण प्रक्षेपण निर्धारित समय पूर्वाह्न 11:30 बजे के बजाय 12 बजकर पांच मिनट पर किया गया। उड़ान भरने के बाद ग्राहा स्पेस, कॉसमोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के 'स्कोप' के तकनीकी परीक्षण के लिए तैयार छोटे उपग्रहों और उपकरणों को क्रमवार 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया गया। रॉकेट ने एक सूक्ष्म कलाकृति, 18 कैरेट सोने से बना एक सूक्ष्म रॉकेट, तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हाथों से लिखा ''वंदे मातरम्'' संदेश वाला पोस्टकार्ड भी सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचाया। इसके साथ ही इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के पोस्टकार्ड भी भेजे गए। कंपनी ने बताया कि इस सूक्ष्म कलाकृति पेलोड में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई, वैज्ञानिक सर सी. वी. रमन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाएं शामिल हैं। इन्हें ''भारत की वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्रा को दिशा देने वाली तीन दूरदर्शी हस्तियों के प्रति सम्मान'' के रूप में तैयार किया गया। कंपनी ने कहा, ''स्काईरूट ने गर्व के साथ अपने रॉकेटों और इंजनों का नाम इन्हीं महान विभूतियों के नाम पर रखा है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश के आत्मनिर्भरता अभियान को नयी मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री ने शनिवार को इस उपलब्धि के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं संस्थापक पवन कुमार चांदना तथा सह-संस्थापक नागा भरत डाका से टेलीफोन पर बात कर उन्हें और उनकी कंपनी को बधाई दी। प्रक्षेपण के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मिशन नियंत्रण केंद्र (एमसीसी) में मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने उन्हें ''हार्दिक शुभकामनाएं'' देते हुए कहा कि उनका आज का 'मिशन आगमन' इसी तरह आगे बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि यह मिशन साबित करता है कि ''हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं।'' इस पर चांदना ने प्रधानमंत्री को बताया कि रॉकेट का पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और निर्माण किया गया है। चांदना ने प्रधानमंत्री के उस पोस्टकार्ड का उल्लेख किया, जिस पर 'वंदे मातरम्' लिखा था और जिसे प्रक्षेपण यान 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली पृथ्वी की निचली कक्षा तक लेकर गया। उन्होंने कहा, ''आपका पोस्टकार्ड सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंच गया है। 'वंदे मातरम्' अब अंतरिक्ष की कक्षा में है।'' इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश इस समय 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्र गीत ने अनगिनत लोगों को देश के लिए जीने और बलिदान देने की प्रेरणा दी है। बाद में, प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक निर्णायक क्षण है।'' उन्होंने कहा, ''निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी नयी संभावनाओं के द्वार खोल रही है और नवाचार को गति दे रही है। यह उपलब्धि अनगिनत युवाओं को बड़े सपने देखने और निर्भीक होकर नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगी।'' चांदना ने कहा, ''हमें इस बात पर बेहद गर्व है कि सरकार ने हमें सक्षम बनाया और इस क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला। आज हम भारत की पहली निजी कंपनी हैं जिसने रॉकेट को कक्षा में पहुंचाया है और वैश्विक स्तर पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पूरी तरह भारत में, पूरी तरह भारतीय टीम द्वारा और शत-प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है।'' डाका ने कहा कि निजी क्षेत्र की प्रक्षेपण क्षमता के मामले में भारत अब अमेरिका और चीन के बाद तीसरा देश बन गया है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने देश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोलने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को दिया। उन्होंने कहा, ''2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की गई थी। आज, मात्र छह वर्षों के भीतर एक स्टार्टअप कंपनी ने अपने पहले ही प्रयास में उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया। यह वास्तव में अत्यंत गर्व और संतोष का क्षण है।'' नारायणन ने स्काईरूट एयरोस्पेस की युवा टीम की सराहना की। उन्होंने कहा, ''जब प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की थी, तब हमारे पास केवल एक स्टार्टअप कंपनी थी। आज 400 से अधिक स्टार्टअप विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। हालांकि, प्रक्षेपण यान का विकास अत्यंत जटिल कार्य है और मुझे बेहद खुशी है कि हम पहले ही प्रयास में सफल हुए हैं।'' स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि इस परीक्षण उड़ान के दौरान प्राप्त इंजीनियरिंग आंकड़ों का विश्लेषण कर रॉकेट की दिशा-निर्देशन प्रणालियों की कार्यक्षमता का सत्यापन किया जाएगा। इसने कहा कि साथ ही इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य के वाणिज्यिक उपग्रह मिशनों के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इस मिशन के साथ स्काईरूट एयरोस्पेस ने 'विक्रम-1' प्रक्षेपण यान की पहली उड़ान के जरिए अपनी कक्षीय प्रक्षेपण क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। इसके साथ ही कंपनी ने वर्ष 2022 में 'विक्रम-एस' मिशन के तहत हासिल की गई उप-कक्षीय उड़ान की उपलब्धि से आगे बढ़ते हुए एक नया मुकाम हासिल किया। इस सफल उड़ान ने वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में रॉकेट की पूर्ण कार्बन कंपोजिट संरचना और थ्री-डी प्रिंटेड इंजनों के प्रदर्शन को प्रमाणित किया। कंपनी का दावा है कि ये दोनों तकनीक अपने प्रकार की ''पहली'' प्रौद्योगिकी हैं। स्काईरूट एयरोस्पेस के दोनों संस्थापक चांदना और डाका इसरो के पूर्व वैज्ञानिक हैं। प्रक्षेपण के दौरान दोनों इसरो प्रमुख वी. नारायणन के साथ इसरो के मिशन नियंत्रण केंद्र (एमसीसी) में मौजूद थे। इसरो के पूर्व अध्यक्षों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला तथा आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने भी एमसीसी से इस प्रक्षेपण को देखा। यह ऐतिहासिक उपलब्धि तेजी से बढ़ रहे वैश्विक लघु उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करने तथा इसरो के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की उपस्थिति का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 'विक्रम-1' के साथ भेजे गए पेलोड में कॉसमोसर्व स्पेस का 'एम्ब्रेस' मिशन शामिल है। यह कक्षा में रोबोटिक भुजाओं (यांत्रिक हाथों) के प्रदर्शन से जुड़ा मिशन है, जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को हटाने की क्षमता का परीक्षण करना है। इसके अलावा ग्राहा स्पेस का 'सोलारस' भी भेजा गया। यह एक कॉम्पैक्ट उपग्रह मिशन है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा में नई तकनीकी क्षमताओं के प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार, स्काईरूट एयरोस्पेस का 'स्कोप' उपग्रह एक आंतरिक प्रायोगिक पेलोड है, जिसे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग होने वाली प्रौद्योगिकियों के परीक्षण के लिए विकसित किया गया है। इसके अलावा कॉस्मोस डायमंड्स द्वारा तैयार 'कॉस्मिक ब्लूम', जो प्रयोगशाला में तैयार हीरे पर आधारित एक कलात्मक कृति है, तथा जर्मनी की कंपनी डीक्यूब्ड के परीक्षण पेलोड 'यूडी3पीपी' और 'एमडी3आरएन' भी शनिवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंच गए। -
नई दिल्ली। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने बताया कि आधार ऐप ने 4 करोड़ डाउनलोड का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। यह सुविधाजनक और डिजिटल आधारित पहचान सेवाओं में निवासियों के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करता है।आधार ऐप के लॉन्च होने के बाद से, इसने 11.65 लाख पते अपडेट करने की सुविधा प्रदान की है, जिससे निवासियों को आधार केंद्र जाए बिना ही अपने आधार विवरण को अपडेट रखने में आसानी होती है। इस ऐप की मदद से लगभग 49 लाख मोबाइल नंबर अपडेट किए जा सके हैं, जिससे निवासियों को अपने आधार से जुड़ी सटीक संपर्क जानकारी बनाए रखने में मदद मिली है।
दरअसल, आधार ऐप का बढ़ता उपयोग इस बात को दर्शाता है कि यह घर बैठे ही पते को अपडेट करने, मोबाइल नंबर अपडेट करने, ईमेल अपडेट करने, बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक करने और ई-आधार डाउनलोड करने सहित आधार से संबंधित सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंचने के लिए एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म बन गया है।वहीं, 1 जुलाई को ईमेल अपडेट सुविधा शुरू होने के बाद से, आधार ऐप के माध्यम से लगभग 12.5 लाख ईमेल पते जोड़े या अपडेट किए गए हैं, जिससे निवासियों और यूआईडीएआई के बीच संचार और मजबूत हुआ है, जहां भी यह लागू होता है। यह सुविधा, जिसकी कीमत पहले 75 रुपये थी, आधार ऐप पर 31 दिसंबर 2026 तक निःशुल्क कर दी गई है।इस ऐप की गोपनीयता और सुरक्षा सुविधाओं को भी व्यापक रूप से अपनाया गया है। निवासियों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक सुविधा का उपयोग 19.1 मिलियन (1.91 करोड़) से अधिक बार किया है। यह सुविधा आधार नंबर धारकों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण प्रदान करती है, जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत अपने बायोमेट्रिक्स को लॉक या अनलॉक कर सकते हैं, और कुछ ही टैप के माध्यम से सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ सकते हैं। आधार ऐप को आधार नंबर धारकों को अपनी पहचान दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने का एक सुविधाजनक और गोपनीयता को प्राथमिकता देने वाला तरीका प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह विकसित भारत के लिए डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप जीवन की सुगमता को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लिखित एक लेख साझा किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे पारंपरिक भारतीय शिल्प कौशल नवाचार और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है।पीएम मोदी ने कहा कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल स्थानीय शिल्पों को बाजार तक पहुंच हासिल करने, स्थायी आजीविका सृजित करने, विरासत को संरक्षित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में मदद कर रही है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ एक्स पर पोस्ट किया, “केंद्रीय मंत्री श्रीमती @nsitharaman ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पारंपरिक भारतीय शिल्प कौशल नवाचार और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल स्थानीय शिल्पों को बाजार तक पहुंच हासिल करने, स्थायी आजीविका सृजित करने, विरासत को संरक्षित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में मदद कर रही है।”वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ इस बात का उदाहरण है कि फ्रांस जैसे देशों के साथ सहयोग भारतीय कारीगरों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में कैसे मदद कर सकता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भारत में फ्रांस के राजदूत ने ‘वस्त्रकला’ का जिक्र किया था। यह भारत-फ्रांस की साझेदारी का एक अनूठा उदाहरण है, जिसने फ्रांस की हाउट कूचर यानी उच्चस्तरीय फैशन कला को भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई परंपरा के साथ जोड़ा है।भारत लौटने के बाद वित्त मंत्री चेन्नई के निकट तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला गई थीं।वित्त मंत्री ने कहा कि कारीगरों की टीम के साथ दोपहर का भोजन करते समय उन्हें पता चला कि वस्त्रकला ने जानबूझकर अपनी पहली चेन्नई स्थित कार्यशाला को गुडापक्कम स्थानांतरित किया, ताकि पीढ़ियों से इन पारंपरिक कौशलों को संजोए हुए गांवों के लोगों तक उच्च मूल्य वाले रोजगार पहुंचाए जा सकें। यह मानो समय का पहिया उल्टा घूम गया हो। आमतौर पर युवा रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन यहां एक कंपनी ने शहर छोड़कर गांव में बसने का फैसला किया। सीतारमण ने बताया कि वस्त्रकला कांचीपुरम-श्रीपेरंबुदूर-तिरुवल्लूर के सूखा-प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने कहा, “पुराने समय में जब बारिश नहीं होती थी, तो खेती का काम रुक जाता था। जब हल चलना बंद हो जाता था, तब किसान सुई-धागा उठाकर सूती और रेशमी कपड़ों पर सुंदर कढ़ाई किया करते थे। अपनी रचनात्मकता के बल पर ग्रामीण सूखे की कठिनाइयों का सामना कर लेते थे। यह कला असाधारण धैर्य, बारीकी और अनुशासन की मांग करती है, और ये गुण शुष्क क्षेत्रों के किसानों में भरपूर होते हैं।” -
नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (आरएएएफ) बेस डार्विन में एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026 शुरू कर रही है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 20 जुलाई 2026 से 7 अगस्त 2026 तक चलने वाला यह अभ्यास पिच ब्लैक, आरएएएफ का प्रमुख द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास है।इस अभ्यास का नाम ‘पिच ब्लैक’ उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल निर्जन क्षेत्रों में रात्रि उड़ान विशेष अभियान के कारण रखा गया है।अभ्यास के 45 वर्षों के लंबे इतिहास में, इस संस्करण में बड़ी संख्या में प्रतिभागी बल शामिल हैं, जो जटिल बड़े बल प्रयोग और बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभियानों के लिए सैन्य कर्मियों को एक साथ ला रहे हैं।
भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, नियंत्रक और अन्य विशेषज्ञ सहित उच्च कुशल वायु योद्धा शामिल हैं। यह टुकड़ी राफेल मल्टीरोल लड़ाकू विमान का संचालन करेगी, जिसे सी-17 ग्लोबमास्टर-III और आईएल-78 वायु-से-वायु ईंधन भरने वाले विमानों का समर्थन प्राप्त होगा। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को अंतरसंचालनीयता बढ़ाने, बल एकीकरण को मजबूत करने और वैश्विक परिदृश्यों में सहयोगात्मक संचालन की दिशा में परिचालन सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा।गौरतलब हो, अभ्यास पिच ब्लैक 26 लंबी दूरी पर अभियान संबंधी हवाई अभियानों को परखने, बहुराष्ट्रीय अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पेशेवर साझेदारियों को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। यह अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं को एक वास्तविक और चुनौतीपूर्ण बहुराष्ट्रीय वातावरण में संचालन करने में सक्षम बनाएगा, जिससे परिचालन समन्वय और आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय वायु सेना ने इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में इस अभ्यास में भाग लिया है, जो रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समेत कई प्रमुख नेताओं ने महान क्रांतिकारी मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें नमन किया है। पीएम मोदी ने कहा कि मंगल पांडे का साहसिक जीवन आज भी हर भारतीय को गर्व से भर देता है।प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महान क्रांतिकारी मंगल पांडे को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। मातृभूमि के स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका साहसिक जीवन आज भी हर भारतीय को गर्व से भर देता है। राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत उनकी शौर्यगाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।”
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी, अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक वीर मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।”उन्होंने लिखा, “29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में उनका साहस और देशप्रेम भारतीय इतिहास का वह निर्णायक क्षण बना, जिसने विदेशी शासन की नींव को चुनौती दी और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। उनका बलिदान आने वाले दशकों तक अनगिनत क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहा। वीर मंगल पांडे जी का जीवन आज भी करोड़ों भारतवासियों को देशभक्ति की प्रेरणा देता है।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “1857 के स्वाधीनता संग्राम के नायक व अद्वितीय साहस और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और कोटि-कोटि नमन।”उन्होंने पोस्ट किया, “मंगल पांडे ने विदेशी शासन के विरुद्ध जिस निर्भीकता से क्रांति का शंखनाद किया, उसने पूरे भारत में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित किया और असंख्य देशवासियों को मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष के लिए प्रेरित किया। उनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण सदैव हमें राष्ट्रसेवा और राष्ट्रनिर्माण के पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।”केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पोस्ट किया, “क्रांतिवीर मंगल पांडे ने 1857 की क्रांति का बिगुल फूंककर स्वसंस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष की जनचेतना जागृत की। अंग्रेजी दमन और अन्याय से मां भारती को मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपने प्राणों तक की आहुति दे दी। उनके बलिदान से प्रज्वलित हुई क्रांति की चिंगारी आगे चलकर स्वतंत्रता की महाज्वाला में परिवर्तित हुई। ऐसे अद्वितीय बलिदानी और अमर क्रांतिवीर मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।” वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने लिखा, “ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ 1857 में क्रांति का बिगुल फूंकने वाले महान स्वाधीनता सेनानी मंगल पांडे की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन करता हूं। मां भारती के महान सपूत मंगल पांडे जी के अदम्य साहस और अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी तथा पूरे देश में स्वाधीनता की लौ प्रज्वलित की। उनका अदम्य साहस और मातृभूमि के लिए दिया गया बलिदान सदैव हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।” - भोपाल। मध्यप्रदेश के पांढुर्णा जिले में शनिवार को मोटरसाइकिल सवार 30 वर्षीय एक व्यक्ति पैंट की जेब में रखा मोबाइल फोन फटने से झुलस गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद्र परिहार ने बताया कि यह घटना शनिवार पूर्वाह्न करीब साढ़े 10 बजे पांढुर्णा-परसोडी मार्ग पर हुई। उन्होंने बताया कि एक निजी कंपनी में कार्यरत संदीप परतेती मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे कि इसी दौरान उनकी पैंट की जेब में रखा मोबाइल फोन फट गया, जिससे उनकी पैंट में आग लग गई। अधिकारी ने बताया कि विस्फोट के कारण मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर फिसल गई और परतेती करीब 12 फुट तक सड़क पर घिसटते चले गए। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. निलेश धाडसे ने बताया कि परतेती की जांघ और कमर के ऊपरी हिस्सा झुलस गया, इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई हैं। उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय जांच में उनके एक पैर की हड्डी के टूटने की पुष्टि हुई है। धाडसे ने बताया कि जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद परतेती को नागपुर के एक अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया और उनके पैर का ऑपरेशन रविवार को किया जाएगा। परतेती के साथ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे उनके सहकर्मी विजय ने बताया कि उन्होंने तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन तब तक परतेती की जांघ बुरी तरह झुलस चुकी थी। उन्होंने बताया कि परतेती ने संबंधित मोबाइल फोन करीब दो वर्ष पहले नागपुर से खरीदा था। पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन में विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।
- नयी दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि देश में ही रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आए जबरदस्त उछाल के दम पर, भारत तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक सुरक्षा साझेदार के तौर पर उभर रहा है और हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सिंह ने कहा कि नयी दिल्ली ने आतंकवाद पर अपना नजरिया पूरी दुनिया के सामने साफ तौर पर रखा है और साथ ही कहा कि ''आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने का नजरिया हमारे लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई की एक नीति है।'' उन्होंने कहा, ''हम आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ उसकी दहलीज पर ही नहीं, बल्कि उसके घर में घुसकर भी कार्रवाई करेंगे। पूरी दुनिया ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान यह देखा था।'' रक्षा मंत्री ने स्वदेशी रक्षा निर्माण में भारत की सफलता का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि भारत में बने रक्षा उत्पादों का निर्यात लगभग 100 देशों को किया जा रहा है और देश के रक्षा उत्पादन का कुल मूल्य सालाना लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा, ''आज भारत न केवल अपने लिए रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार भी बन रहा है। हिंद महासागर से लेकर हिंद-प्रशांत तक, भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि देश 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, ''अगर कोई देश हथियारों, गोला-बारूद, नौवहन प्रणाली, मिसाइलों, रडार और ड्रोन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता भी सीमित हो जाती है। हम इसे पूरी तरह से बदलने के पक्के इरादे के साथ काम कर रहे हैं।'' सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता भारत के उद्योगों में भरोसे का सबूत है।रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत करने की दिशा में मोदी सरकार ने जो ''सबसे बड़ा कदम'' उठाया है, वह रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, ''रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने का हमारा नजरिया भारत की क्षमताओं पर भरोसा करने वाला है। लेकिन पिछली सरकारों का नजरिया भारत की क्षमता और काबिलियत को लेकर कुछ हद तक शक वाला था। शायद उन्हें भारत की क्षमताओं पर उतना भरोसा नहीं था, जितना हमारी सरकार को है।'' सिंह ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर अपने आप में तकनीकी युद्ध का एक शानदार उदाहरण था। इस ऑपरेशन में आकाशतीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणाली के साथ-साथ कई अत्याधुनिक उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया।" सिंह ने कहा कि इससे साबित होता है कि भारत की सेनाएं न सिर्फ बदलाव को समझती हैं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ उसे अपना भी रही हैं। उन्होंने कहा, "यह सब इसलिए मुमकिन हो पा रहा है, क्योंकि पिछले 12 वर्षों में एक नयी नींव रखी गई है।" उन्होंने कहा कि साल 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, लेकिन 2025-26 में यह 38,000 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर को पार कर गया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की लगातार कोशिशों से मिले "सकारात्मक नतीजों" का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि सालाना रक्षा उत्पादन 2014 के आस-पास के 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा, "हमारा रक्षा उत्पादन लक्ष्य इस साल 2 लाख करोड़ रुपये और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करना है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि 2029 तक रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाए। प्रगति की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए, मुझे भरोसा है कि हम इन लक्ष्यों को हासिल करने में सफल होंगे।"























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