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- नयी दिल्ली. भारत में मलेरिया के मामलों और मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आयी है तथा 2024 तक आधिकारिक रूप से वह मलेरिया से ग्रस्त देशों के उच्च जोखिम उच्च प्रभाव (एचबीएचआई) समूह से बाहर निकल जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की बुधवार को जारी विश्व मलेरिया रिपोर्ट में यह जानकार दी गयी। भारत में मलेरिया के मामले 2017 में 64 लाख से 69 प्रतिशत घटकर 2023 में 20 लाख हो गए। इसी प्रकार, इसी अवधि में मलेरिया से होने वाली अनुमानित मौत 11,100 से घटकर 3,500 (68 प्रतिशत की कमी) रह गयी। डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में 2023 में आठ देश सबसे ज्यादा मलेरिया से प्रभावित रहे, जिनमें 40 लाख मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में इस क्षेत्र में दर्ज किए गए मलेरिया के अनुमानित मामलों में से आधे भारत में थे, इसके बाद इंडोनेशिया में दर्ज किए गए जहां लगभग एक तिहाई मामले थे। क्षेत्र में मलेरिया से होने वाली मौतों में अनुमानतः 82.9 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2000 में 35,000 से घटकर 2023 में 6,000 हो गयी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि इस क्षेत्र में मलेरिया से होने वाली मौतों में भारत और इंडोनेशिया दोनों का योगदान लगभग 88 प्रतिशत है।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार को रेलवे में युवाओं को अधिक से अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध बताते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि रेलवे में 58,642 रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।रेल मंत्री ने लोकसभा में ‘रेल (संशोधन) विधेयक, 2024’ पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उनके जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
वैष्णव ने कहा, ‘‘मैं स्पष्ट रूप से बताना चाहूंगा कि संप्रग सरकार के समय 4,11,000 लोगों को रेलवे में नौकरी मिली थी, जबकि मोदी सरकार में 5,02,000 युवाओं की भर्ती रेलवे में की गई है।’’रेलमंत्री ने कहा कि रेलवे में 58,642 रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में रेलवे नौजवानों को अधिक से अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। अश्विनी वैष्णव ने देश में रेलवे भर्ती परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बिना किसी प्रश्नपत्र लीक की शिकायत के सुगमता से ये परीक्षाएं हो रही हैं और दशकों पुरानी मांग के अनुरूप वार्षिक कलैंडर के हिसाब से भर्ती होती है -
नयी दिल्ली,। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा प्रमुख स्थलों जैसे कि नये ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट', इंडिया गेट, भारत मंडपम और नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए सात किलोमीटर लंबा भूमिगत मेट्रो गलियारा बनाने की संभावना है। यह जानकारी सूत्रों ने मंगलवार को दी। सूत्रों ने बताया कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को प्रस्तावित गलियारे को अंतिम रूप देने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि यह इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ मेट्रो गलियारे का विस्तार होगा, जिसे इस साल की शुरुआत में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। योजना के अनुसार, प्रस्तावित लाइन कर्त्तव्य पथ से होकर नार्थ और साउथ ब्लॉक में समाप्त होगी, जहां सेंट्रल विस्टा योजना के हिस्से के रूप में एक संग्रहालय प्रस्तावित है। सूत्रों ने कहा कि इससे मध्य दिल्ली में भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी क्योंकि कर्त्तव्य पथ के पुनर्विकास के बाद से आगंतुकों की संख्या में वृद्धि हुई है।
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नयी दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को भू-राजनीतिक तनाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता सहित कई महत्वपूर्ण चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए जल्द ही पहली मंत्रिस्तरीय ‘रणनीतिक विदेश नीति वार्ता' आयोजित करने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और 27 देशों के समूह की उनकी समकक्ष काजा कालास के बीच फोन पर बातचीत के दौरान रणनीतिक वार्ता शुरू करने का निर्णय लिया गया। यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की राजनयिक कालास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि जल्द ही पहली मंत्रिस्तरीय रणनीतिक विदेश नीति वार्ता आयोजित करने पर सहमति बनी है।
पहली मंत्रिस्तरीय रणनीतिक विदेश नीति आयोजित करने का यह फैसला नई दिल्ली में भारत और ईयू के बीच शिखर-स्तरीय वार्ता आयोजित करने से कुछ महीने पहले लिया गया है। आगामी शिखर-स्तरीय वार्ता में सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करने को लेकर बेहतर परिणाम की उम्मीद है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि उम्मीद है कि दोनों पक्षों के विदेश मंत्रियों के स्तर पर होने वाली बातचीत संयुक्त रणनीति विकसित करने और चीन सहित विभिन्न भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में गहन सहयोग स्थापित करने के वास्ते एक मंच प्रदान करेगी। कालास ने कहा, ‘‘ भारत के (विदेश मंत्री) जयशंकर से बात करना बहुत अच्छा रहा। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां आपस में जुड़ी हुई हैं। हम सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल और ‘ग्रीन ट्रांजिशन' पर प्रगति करने के लिए मिलकर काम करेंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम जल्द ही पहली मंत्रिस्तरीय रणनीतिक विदेश नीति वार्ता आयोजित करने पर सहमत हुए हैं।'' जयशंकर ने अपनी ओर से कहा, ‘‘यूरोप, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रम पर चर्चा की। जल्द ही बैठक की उम्मीद है।'' जयशंकर और कालास के बीच हुई बातचीत पर भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि दोनों पक्ष आपसी हितों के सुरक्षा मुद्दों एवं विदेश नीति की एक विस्तृत शृंखला पर भारत-ईयू सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले साल फरवरी में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की शुरुआत के बाद रणनीतिक वार्ता शुरू करने के निर्णय को एक प्रमुख कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद, दोनों पक्षों ने टीटीसी के तहत तीन कार्य समूह स्थापित किए।पहला कार्य समूह रणनीतिक प्रौद्योगिकियों, डिजिटल शासन और डिजिटल संपर्क से संबंधित है। दूसरा कार्य समूह हरित और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों से और तीसरा कार्य समूह व्यापार, निवेश और लचीली मूल्य शृंखलाओं से जुड़ा है। यह परिषद कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमी कंडक्टर और साइबर सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान कर रही है। भारत के साथ टीटीसी यूरोपीय संघ की दूसरी ऐसी प्रौद्योगिकी साझेदारी थी। इससे पहले पहली साझेदारी जून 2021 में अमेरिका के साथ हुई थी। भारत और यूरोपीय संघ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुली, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए गहन सहयोग बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। -
कोटा। राजस्थान के झालावाड़ जिले में पशुओं के चारे से भरे एक ट्रक के मोटरसाइकिल पर पलट जाने से उस पर सवार 60 वर्षीय एक व्यक्ति,उसकी बेटी और नाती की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। झालावाड़ के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) हर्षराज सिंह ने बताया कि मोहनलाल और उनकी बेटी मंजूबाई (26) और मंजूबाई का बेटा रुद्राक्ष (7) झालावाड़ की ओर आ रहे थे, तभी एक मोड़ पर ट्रक का संतुलन बिगड़ गया और वह मोटरसाइकिल पर पलट गया। डीएसपी ने बताया कि तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। मोहनलाल, उनकी बेटी और नाती एक शोक सभा में भाग लेने के बाद घर लौट रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। उन्होंने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने ट्रक चालक को हिरासत में लेकर उसका वाहन जब्त कर लिया है।
- नयी दिल्ली,। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को यहां कहा कि भारत को 2036 तक अगर एक मजबूत खेल शक्ति के रूप में उभरना है तो उसे जमीनी स्तर पर विकास के सिद्धांतों को अपनाते हुए प्रतिभा पोषण के लिए श्रेणीबद्ध शासन प्रणाली तैयार करनी होगी। खेल मंत्री ने इसके साथ ही युवाओं को पेशेवर खिलाड़ी बनाने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर भी जोर दिया। मांडविया वर्तमान में 2036 ओलंपिक खेलों तक भारत को एक खेल महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए मंच तैयार करने के लिए एक त्रि-आयामी रणनीति को आकार दे रहे हैं। भारत ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) को ‘आशय पत्र' प्रस्तुत किया है।मांडविया ने बातचीत में कहा, ‘‘खेलों को आगे ले जाने के लिए खेल विकास, खेल प्रशासन और खेल पारिस्थितिकी तंत्र जरूरी है। अगर हम इन तीन चीजों को एक साथ लगाएंगे, तभी देश में खेल समृद्ध हो सकते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘खेल विकास के तहत हमें प्रतिभा को पहचानना होगा। हमारे देश में इसकी कोई कमी नहीं है। हम ‘खेलो इंडिया स्कूल खेलों' से शुरुआत करेंगे जहां प्रतिभाओं को पहचाना जायेगा। फिर इस प्रतिभा को निखारने की जरूरत होगी।'' उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘ मान लीजिए किसी जिले में हमें 100 बच्चे मिलते हैं तो वे अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए जिला स्तर के खेल स्कूलों, निजी या सरकारी, छात्रावासों या खेल के मैदानों में जाएंगे। ऐसा सभी जिलों में होगा।'' मंत्री ने कहा कि प्रतिभा को निखारने के लिए अच्छे प्रशिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा, जिसके बाद खिलाड़ी ‘खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेलों' में भाग लेंगे, जहां सर्वश्रेष्ठ की पहचान की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘ ये खिलाड़ी इसके बाद ‘खेलो इंडिया युवा खेलों (केआईवाईजी)' का हिस्सा बनेंगे। हम खिलाड़ियों के विकास के लिए संबंधित महासंघ को भरोसे में रखेंगे। लेकिन हम पूरी तरह से महासंघों पर निर्भर नहीं रहेंगे। हमें प्रतिभा को पहचानना होगा और उसे 2036 के लिए तैयार करना होगा।'' मांडविया ने कहा कि देश में खेल बुनियादी ढांचे की कोई कमी नहीं है और मंत्रालय उनका सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए ‘विश्लेषण' कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास खेल के बुनियादी ढांचे की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, राष्ट्रीय महासंघों, निजी क्षेत्र, केंद्र सरकार के पास यह है। इन सभी खेल बुनियादी ढांचे का विश्लेषण कर इसका बेहतर उपयोग करने पर ध्यान दिया जायेगा। हमने इस पर काम शुरू कर दिया है और जल्द ही इसका लेखा-जोखा हमारे पास होगा। हम खेल के बुनियादी ढांचे में कमियों की भी पहचान करेंगे।'' मांडविया ने कहा, ‘‘स्कूलों और कॉलेजों को खेलों के बारे में अधिक चर्चा करनी चाहिए, और इसके लिए भारत में अधिक अंतरराष्ट्रीय आयोजन होने चाहिए। इसमें 2036 में ओलंपिक को भारत में लाने का प्रयास भी शामिल है । हम इन सभी मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं और चीजें बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं।''
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नयी दिल्ली। भारत में गूगल सर्च में 2024 के दौरान खेल और राजनीतिक खोज सबसे ऊपर रहीं। एक गूगल ब्लॉग में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। इस दौरान आईपीएल, विश्व कप और चुनाव परिणाम प्रमुख रूप से ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल रहे।
ब्लॉग के अनुसार, सर्च रुझानों में विभिन्न भाषाओं में खेल और मनोरंजन के विषय शामिल थे। इसके अलावा देशी संगीत, मीम्स और मजाकिया शब्द भी खोजे गए। इंडियन प्रीमियर लीग, टी20 विश्व कप, ओलंपिक, प्रो कबड्डी लीग और इंडियन सुपर लीग ट्रेंडिंग सर्च सूची में शीर्ष पर थे। व्यक्तियों की बात करें तो शीर्ष दस ट्रेंडिंग सर्च में पांच खेल से थे। इनमें विनेश फोगट, हार्दिक पांड्या, शशांक सिंह, अभिषेक शर्मा और लक्ष्य सेन सबसे लोकप्रिय व्यक्ति बनकर उभरे। इसके अलावा, शीर्ष 10 रैंकिंग में चुनाव परिणाम 2024, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) शामिल थे। ब्लॉग के अनुसार, लोगों ने मौसम और स्वास्थ्य के बारे में भी सवाल और चिंताएं व्यक्त कीं। इस दौरान ‘अत्यधिक गर्मी' और ‘मेरे आसपास एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक)' जैसे विषय ट्रेंडिंग सर्च में शामिल थे। मनोरंजन क्षेत्र में स्त्री-2, कल्कि 2898, 12वीं फेल, लापता लेडीज और हनु-मान सबसे ज्यादा खोजी जाने वाली फिल्में थीं। हीरामंडी, मिर्जापुर, बिग बॉस 17 और पंचायत जैसे वेब शो भी खोज सूची में अव्वल रहे। - नयी दिल्ली। सरकार द्वारा वित्तपोषित विश्वविद्यालयों और आईआईटी समेत देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के करीब 1.8 करोड़ छात्र एक जनवरी से दुनिया भर की शीर्ष पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्रों तक पहुंच बना सकेंगे। छात्रों को यह लाभ केंद्र सरकार की ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता' (वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन) पहल के तहत मिलेगा। केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ए. के. सूद ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि 'एक राष्ट्र, एक सदस्यता' योजना के पहले चरण के तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, गणित, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान और मानविकी पर 13,400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाएं शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। सूद ने बताया कि इस पहल के तहत 451 राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालय, 4,864 कॉलेज और 172 राष्ट्रीय महत्व के संस्थान उन 6,380 उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में शामिल होंगे, जिन्हें एल्सेवियर, स्प्रिंगर नेचर और विले सहित 30 प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित शीर्ष पत्रिकाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सचिव अभय कराडीकर ने कहा, ‘‘इससे पहले, आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) या केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संस्थान विशिष्ट विषयों से संबंधित पत्रिकाओं के एक छोटे समूह की सदस्यता (सब्सक्रिप्शन) लेते थे, लेकिन ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता' (ओएनओएस) के तहत, सभी संस्थानों को 13,400 शोध पत्रिकाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।'' उन्होंने कहा कि ओएनओएस (वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन) पहल एक जनवरी को शुरू की जाएगी और इसके तहत छात्रों को अगले तीन वर्षों तक शीर्ष पत्रिकाओं तक पहुंच उपलब्ध रहेगी। ओएनओएस के दूसरे चरण के तहत सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से इस पहल को निजी शैक्षणिक संस्थानों तक विस्तारित करने की योजना बना रही है। तीसरे चरण में सार्वजनिक पुस्तकालयों में निर्दिष्ट पहुंच बिंदुओं के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान की जाएगी। इस पहल को तीन वर्ष की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपये की लागत से केन्द्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में पेश किया गया है।
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नयी दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने कहा है कि 2025 से विश्वविद्यालयीन सामान्य प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) केवल कंप्यूटर आधारित परीक्षा के तौर पर आयोजित की जाएगी और विद्यार्थियों को किसी भी विषय के लिए शामिल होने की अनुमति होगी, भले ही उन्होंने 12वीं में उस विषय की पढ़ाई नहीं की हो। कुमार ने ‘ एक साक्षात्कार में कहा कि आयोग द्वारा गठित की गयी विशेषज्ञों की एक समिति ने इस परीक्षा की समीक्षा की तथा कई बदलावों का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा, ‘‘समिति ने परीक्षा के विभिन्न पहलुओं की जांच की, जैसे इसका स्वरूप, प्रश्न पत्रों की संख्या, परीक्षा की अवधि, पाठ्यक्रम और संचालन। इसके द्वारा सुझाए गए बदलावों को आयोग ने हाल ही में हुई बैठक में मंजूरी दे दी।''
यूजीसी अध्यक्ष ने कहा, ‘‘यह परीक्षा 2025 से केवल कंप्यूटर आधारित प्रारूप में आयोजित की जाएगी। हमने पिछले साल ‘हाइब्रिड' प्रारूप (कंप्यूटर आधारित एवं उत्तर पुस्तिका वाली व्यवस्था) में परीक्षा आयोजित की लेकिन अब हम केवल कंप्यूटर आधारित प्रारूप का रुख करेंगे क्योंकि यह परीक्षा के अन्य प्रारूपों की तुलना में कहीं अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित है।'' उन्होंने कहा, ‘‘अभ्यर्थियों को सीयूईटी-यूजी में उन विषयों को चुनने की भी अनुमति दी जाएगी, जिनकी पढ़ाई उन्होंने 12वीं कक्षा में नहीं की है, ताकि विद्यार्थियों को उच्चतर शिक्षा में कोई भी विषय चुनने का अवसर मिल सके।'' कुमार ने कहा, ‘‘हमने विषयों की संख्या भी 63 से घटाकर 37 कर दी है तथा हटा दिये गये विषयों के लिए प्रवेश सामान्य योग्यता परीक्षा (गैट) में मिले अंक के आधार पर दिये जाएंगे।'' तैंतीस भाषाओं के लिए अलग परीक्षाओं के बजाय, केवल 13 भाषाओं के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी जिनमें --असमिया, बांग्ला, अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, उड़िया, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल हैं। क्षेत्र-विशिष्ट विषयों की संख्या 29 से घटाकर 23 कर दी गई है। हटाए गए पेपर हैं -- उद्यमिता, शिक्षण योग्यता, फैशन अध्ययन, पर्यटन, कानूनी अध्ययन और इंजीनियरिंग ग्राफिक्स। परीक्षा के 2025 के संस्करण में किये गये बदलावों के बारे में कुमार ने कहा कि विद्यार्थी अब छह के बजाय अधिकतम पांच विषयों में ‘सीयूईटी-यूजी' दे पायेंगे। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा, ‘‘इसी तरह, परीक्षा की अवधि, जो विषयों के हिसाब से 45 मिनट से 60 मिनट तक होती थी, अब 60 मिनट के रूप में मानकीकृत कर दी गई है। परीक्षा में वैकल्पिक प्रश्नों की अवधारणा भी समाप्त कर दी गयी है और अब सभी प्रश्न अनिवार्य होंगे।'' ‘सीयूईटी-पीजी' की अवधि 105 मिनट से घटा कर 90 मिनट कर दी गई है।कुमार ने कहा, ‘‘मंजूर किये गए बदलावों को हितधारकों की प्रतिक्रिया के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध किया जाएगा और प्रतिक्रिया पर गौर करने के बाद एक अधिसूचना जारी की जाएगी।'' - मुंबई। देश में प्रतिभा की बढ़ती मांग के बीच स्नातकों की रोजगार काबिलियत में लगातार इजाफा हो रहा है और हाल के परीक्षण में यह 54.81 प्रतिशत पर पहुंच गई है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। स्नातकों में इस साल रोजगार काबिलियत की गणना पिछले वर्ष के वैश्विक रोजगार परीक्षण (जीईटी) से की जाती है। व्हीबॉक्स ईटीएस इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, पिछले परीक्षण में भारतीय स्नातकों में रोजगार काबिलियत की क्षमता 51.25 प्रतिशत थी। इंडिया स्किल्स रिपोर्ट के मुख्य संयोजक और व्हीबॉक्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) निर्मल सिंह ने कहा, ‘‘वैश्विक प्रतिभा गतिशीलता के क्षेत्र में यह दशक भारत का है। इस दशक में कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किये जाने की जरूरत है जो अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के लिए एक बड़ा अंतर लाएगा... दीर्घकालिक और आंतरिक रूप से प्रमाणित कौशल कार्यक्रम कामकाज के अवसर के लिहाज से महत्वपूर्ण है।'' उन्होंने कहा, ‘‘देश की कुशल और प्रमाणित प्रतिभा भारत को एक अनूठा लाभ प्रदान करती है।''यह रिपोर्ट 6.5 लाख से अधिक उम्मीदवारों के आंकड़ों पर आधारित है। इन्होंने पूरे भारत में वैश्विक रोजगार काबिलियत परीक्षण (जी.ई.टी.) में भाग लिया था। रिपोर्ट के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक भारतीय स्नातक अब रोजगार के काबिल हैं। यह एक दशक पहले 33 प्रतिशत था। इसमें कहा गया है कि एक दशक में 17 प्रतिशत की यह वृद्धि तेजी से विकसित हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को बताती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कृत्रिम मेधा (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और स्वचालन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर भारत के ध्यान केंद्रित करने, पारंपरिक नौकरी भूमिकाओं को नया आकार देने और नए अवसर पैदा करने से यह बदलाव और बढ़ गया है।
- नयी दिल्ली। जल शक्ति मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि गंगा और उसकी सहायक नदियों में 1,400 से अधिक घड़ियाल और 1,899 कछुए फिर से डाले गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप जल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल की अध्यक्षता में गंगा संरक्षण पर अधिकार प्राप्त कार्यबल (ईटीएफ) की 13वीं बैठक के दौरान इस घटनाक्रम पर प्रकाश डाला गया। यह बैठक ‘नमामि गंगे मिशन' के तहत की गई थी। बैठक में परियोजनाओं की समीक्षा की गई तथा गंगा नदी बेसिन के पुनरुद्धार की पहल पर चर्चा की गई। कछुए और घड़ियाल गंगा के पारिस्थितिकीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। कछुए गंगा को प्राकृतिक तरीके से साफ करते हैं, वे सड़ रहे जैव पदार्थ और शैवाल खाते हैं जिससे प्रदूषण को रोकने में मदद मिलती है और नदी में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण सुनिश्चित होता है। घड़ियाल शिकार करके मछलियों की संख्या में संतुलन बनाए रखते हैं। उनके कारण मछलियों की संख्या आवश्यकता से अधिक नहीं बढ़ती और पारिस्थितिकी तंत्र में व्यवधान को रोका जा सकता है।मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पाटिल ने भारत की सभ्यता, आस्था और आजीविका में गंगा की महत्ता पर जोर दिया तथा इसके संरक्षण को राष्ट्रीय कर्तव्य बताया। उन्होंने परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के महत्व पर जोर दिया और हितधारकों से नवीन प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आग्रह किया ताकि इनके क्रियान्वयन में देरी को रोका जा सके और परियोजनाओं की दक्षता बढ़ सके। मिशन का लक्ष्य गंगा की पारिस्थितिकी को मजबूत करने के लिए 1,34,104 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण करना है। अब तक 33,024 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण किया जा चुका है तथा 59,850 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को कवर किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य ‘हरित बफर क्षेत्र' बनाना, स्थानीय प्रजातियों को पुनर्स्थापित करना तथा क्षेत्र की वायु एवं जल गुणवत्ता में सुधार करना है। बयान में कहा गया है कि 1,428 घड़ियाल और 1,899 कछुए गंगा और उसकी सहायक नदियों में फिर से डाले गए हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। घड़ियाल और कछुओं को नदी में फिर से डालना व्यापक जैव विविधता संरक्षण प्रयासों का हिस्सा है।
- नयी दिल्ली । दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) वहनीयता के लिहाज से भारत के विश्वविद्यालयों में अग्रणी स्थान पर है और दुनिया भर में इसका स्थान 255 से बढ़कर 171वें स्थान पर पहुंच गया है। मंगलवार को घोषित क्यूएस रैंकिंग में यह जानकारी दी गई। क्यूएस की वहनीयता रैंकिंग (2025) में भारत के कुल 78 विश्वविद्यालयों को जगह मिली है। इसमें 10 संस्थानों में से नौ की रैंकिग में सुधार हुआ है और 21 नए संस्थान इस सूची में शामिल हुए हैं। पर्यावरणीय प्रभाव के लिए आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में शामिल हुए हैं। बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान को पर्यावरण शिक्षा के लिए दुनिया के शीर्ष 50 संस्थानों की सूची में जगह मिली है। लंदन में रह रहे क्यूएस के उपाध्यक्ष बेन सॉटर ने कहा, ‘‘क्यूएस सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग (2025) में शामिल 78 भारतीय विश्वविद्यालयों में से 34 ने पिछले वर्ष की तुलना में सुधार किया है तथा आठ का स्थान इस बार भी बरकरार रहा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘यह भारतीय उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे यह पता चलता है कि भारतीय विश्वविद्यालय वहनीयता के लिए अपनी पहलों पर काम कर रहे हैं।'' सॉटर ने कहा, ‘‘सामाजिक प्रभाव की श्रेणी में शामिल होने के लिए भारत के विश्वविद्यालय स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा और समानता के क्षेत्र में सुधार कर सकते हैं क्योंकि इस श्रेणी में कोई भी संस्थान शीर्ष 350 में शामिल नहीं है। भारत के विश्वविद्यालयों ने ज्ञान का आदान-प्रदान, रोजगार एवं परिणाम के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है।'' क्यूएस की 2025 की रैंकिंग में 107 देशों तथा क्षेत्रों के 1,740 से अधिक विश्वविद्यालय शामिल हैं जबकि पिछले साल 95 स्थानों के केवल 1397 संस्थानों को जगह मिली थी। इससे पता चलता है कि इस साल की क्यूएस रैंक में बढ़ोतरी हुई है। क्यूएस रैंकिंग में इस साल टोरंटो विश्वविद्यालय को शीर्ष स्थान मिला है जबकि ईटीएच ज्यूरिख दूसरे स्थान पर है तथा स्वीडन का लुंड विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बर्कले (यूसीबी) तीसरे स्थान पर हैं।
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नयी दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को कहा कि उसने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,000 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में फरार व्यवसायी मेहुल चोकसी की जब्त की गई 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति की बहाली शुरू कर दी है। वित्तीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि उसने मुंबई स्थित एक विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के आदेश के बाद इस मामले में जब्त संपत्तियों को उनके असली मालिकों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू की है। ईडी ने कहा, ‘‘अदालती आदेश के अनुपालन में संपत्तियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और 125 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां गीतांजलि जेम्स लिमिटेड (चोकसी की एक कंपनी) के परिसमापक को सौंप दी गई है।'' प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि सौंपी गई संपत्तियों में पूर्वी मुंबई के सांताक्रूज में स्थित खेनी टावर में छह फ्लैट और सांताक्रूज इलेक्ट्रॉनिक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन में स्थित दो कारखाने/गोदाम शामिल हैं।
ईडी ने हीरा व्यवसायी चोकसी के खिलाफ इस पीएमएलए मामले में 2,565.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क या जब्त की थीं। अदालत ने इन सभी संपत्तियों के ‘मौद्रीकरण' की अनुमति दी है। एजेंसी ने कहा कि उसने बहाली प्रक्रिया शुरू करने के लिए ‘सक्रिय कदम' उठाए और प्रभावित बैंकों के साथ मिलकर एक आम रुख अपनाने पर सहमति जताई और अदालत का रुख किया। अदालत ने 10 सितंबर को आदेश दिया था कि प्रवर्तन निदेशालय गीतांजलि समूह की कंपनियों के परिसमापकों को कुर्क या जब्त की गई संपत्तियों के मूल्यांकन और नीलामी में बैंकों के साथ काम करेगा। नीलामी से मिलने वाली राशि को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और आईसीआईसीआई बैंक (प्रभावित ऋणदाता) में सावधि जमा के रूप में रखने को भी कहा गया। चोकसी बैंक धोखाधड़ी का मामला 2018 में उजागर होने के बाद से ही भारत छोड़कर एंटीगुआ में रह रहा है। चोकसी, उसके भतीजे एवं भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके परिवार के सदस्यों एवं कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों पर पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा में कथित ऋण धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। जांच एजेंसियों ने यह आरोप लगाया था कि चोकसी, उसकी फर्म गीतांजलि जेम्स और अन्य ने कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर धोखाधड़ी से गारंटी पत्र (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) जारी करवाए और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना विदेशी ऋण पत्र हासिल किए। एजेंसी ने अबतक चोकसी के खिलाफ तीन आरोपपत्र दायर किए हैं। वहीं भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित हो चुका नीरव मोदी लंदन की जेल में बंद है। उसे ईडी और सीबीआई के कानूनी अनुरोध के आधार पर हिरासत में लिया गया था। वह भारत में प्रत्यर्पण का विरोध कर रहा है।- - हाथरस (उत्तर प्रदेश) । हाथरस और सिकंदराराऊ के मध्य मंगलवार को एक ट्रक और वैन के बीच हुई टक्कर में सात लोगों की मौत हो गई तथा 14 अन्य जख्मी हो गये। पुलिस ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर दुख व्यक्त किया है।सिकंदराराऊ के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) श्यामवीर सिंह ने बताया कि यह दुर्घटना हाथरस जंक्शन थाने के तहत आने वाले जैतपुर गांव में हुई, जिसमें सात लोगों की मौत हो गयी। उनकी शिनाख्त की कोशिश की जा रही है। हाथरस के जिलाधिकारी राहुल पांडेय ने ' बताया, ''दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई है। इसमें तीन पुरुष, तीन महिलाएं और एक बच्चा शामिल है।'' उन्होंने बताया कि सात घायलों का हाथरस के जिला अस्पताल में इलाज किया रहा है, जबकि सात अन्य घायलों को इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। जिलाधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि वैन एटा की ओर जा रहा था और उसकी टक्कर कूरियर कंटेनर ट्रक से हो गयी। उन्होंने कहा कि वैन में एक परिवार के लोग सवार थे और किसी काम से जा रहे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री कार्यालय के आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक संदेश में कहा गया, '' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद हाथरस में मथुरा-कासगंज राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे में जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।'' इसी संदेश में कहा गया है, ''मुख्यमंत्री ने संबंधित जिला प्रशासन के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उनका समुचित उपचार कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है।
- नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया की जमानत शर्तों में ढील दी, जिनके तहत उन्हें दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित भ्रष्टाचार और धनशोधन मामलों में सप्ताह में दो बार जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना था।न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने यह कहते हुए जमानत शर्तों में ढील दी कि उनकी कोई जरूरत नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता नियमित रूप से सुनवाई में हिस्सा लेंगे। उच्चतम न्यायालय ने 22 नवंबर को सिसोदिया की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) एवं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर उनके जवाब मांगे थे।नौ अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और धनशोधन के मामलों में सिसोदिया को जमानत दी थी और कहा था कि बिना सुनवाई के 17 महीनों तक सलाखों के पीछे रखने से वह त्वरित सुनवाई के अपने अधिकार से वंचित हो गये। शीर्ष अदालत ने कुछ जमानत शर्तें लगाई थीं, जिनमें यह भी शामिल था कि आप नेता को हर सोमवार और बृहस्पतिवार को पूर्वाह्न 10 से 11 बजे के बीच जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा। सिसोदिया के वकील ने 22 नवंबर को सुनवाई के दौरान कहा था कि आप नेता सिसोदिया 60 बार जांच अधिकारी के सामने पेश हो चुके हैं।दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया को दिल्ली के कथित आबकारी नीति घोटाले से संबद्ध भ्रष्टाचार एवं धनशोधन मामलों में सीबीआई और ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन्हें अब रद्द कर दी गई दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 को बनाने और उसे लागू करने में कथित अनियमितताओं के लिए 26 फरवरी, 2023 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इसके अगले महीने, नौ मार्च 2023 को ईडी ने उन्हें सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया। सिसोदिया ने 28 फरवरी, 2023 को दिल्ली मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है।
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लातूर . महाराष्ट्र के बीड जिले में एक दोस्त के राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) में चयन हो जाने पर जश्न मनाकर लौट रहे चार युवकों की मंगलवार तड़के एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि अंबाजोगाई के पास वाघला में एक कार और एक ट्रक के बीच टक्कर हो जाने से चार युवकों की मौत हो गई। एक अधिकारी ने बताया कि करेपुर गांव निवासी अजीम पशमिया शेख (30) का हाल में एसआरपीएफ में चयन हुआ था, इसलिए वह और उसके पांच दोस्त जश्न मनाने के लिए सोमवार रात मंजरसुंभा गए थे। उन्होंने बताया कि मंजरसुंभा से वापस आते समय छत्रपति संभाजीनगर-लातूर रोड पर उनकी कार एक ट्रक से टकरा गई। अधिकारी ने बताया कि इस हादसे में बालाजी शंकर माने (27), दीपक दिलीप सावरे (30) और फारुख बाबू मिया शेख (30) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ऋतिक हनुमंत गायकवाड़ (24) ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि अजीम पशमिया शेख एवं मुबारक सत्तार शेख (28) गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका अंबाजोगाई के स्वामी रामानंद तीर्थ अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस ने इस घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।
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मुंबई। भाजपा विधायक राहुल नार्वेकर सोमवार को 15वीं महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए। नार्वेकर ने रविवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्हें निर्विरोध चुना गया क्योंकि विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (एमवीए) ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया।
विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद नई सरकार ने सदन में बहुमत साबित किया। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। शिवसेना विधायक उदय सामंत और अन्य द्वारा पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने घोषणा की कि सदन ने विश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।भाजपा-शिवसेना-राकांपा महायुति गठबंधन के पास 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 230 सीटों का बहुमत है। पांच दिसंबर को फडणवीस ने तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। महाराष्ट्र की 15वीं विधानसभा का कार्यकाल आधिकारिक तौर पर सात दिसंबर को शुरू हुआ।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन को संबोधित करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि 1960 में राज्य के गठन के बाद से नार्वेकर इस पद पर दोबारा चुने जाने वाले निचले सदन के दूसरे सदस्य हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बालासाहेब भारदे 1960 में महाराष्ट्र के गठन के बाद से दोबारा चुने जाने वाले एकमात्र विधानसभा अध्यक्ष थे। भारदे के बाद नार्वेकर यह सम्मान पाने वाले विधानसभा के दूसरे सदस्य हैं।कुंदनमल फिरोदिया सदन के पहले अध्यक्ष थे जिन्हें दोबारा नियुक्त किया गया था, लेकिन यह बॉम्बे राज्य के समय की बात है और महाराष्ट्र के गठन से पहले सयाजी एल. सिलम को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में चुना गया था और राज्य के अस्तित्व में आने के बाद उन्हें फिर से चुना गया।स्पीकर का कक्ष सदन में सभी दलों के अधिकारों का कक्ष है। सदन में मतभेद होने पर भी स्पीकर के पास सीधे जा सकते हैं। अध्यक्ष दोनों पक्षों की बात सुनते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रभावी विपक्षी दल स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है। भविष्य में नवनिर्वाचित अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर के मार्गदर्शन में सदन में व्यापक जनहित के फैसले लिये जायेंगे। उन्होंने अपने पिछले ढाई साल में ईमानदारी से काम किया है।उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि एडवोकेट राहुल नार्वेकर के पास एक हुनर है। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में एडवोकेट नार्वेकर का कार्य सराहनीय है। पिछले ढाई साल में उन्होंने जो अच्छा काम किया है, वह इसका अच्छा उदाहरण है। ढाई साल में उन्होंने गहन अध्ययन किया और प्रदेश हित के लिए कई अच्छे फैसले दिए। देश और प्रदेश का शासन भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा दिये गये संविधान से चलता है।प्रदेश में विकास और प्रगति का एक नया युग शुरू हुआ है। अध्यक्ष के कानून के ज्ञान का उपयोग निश्चित रूप से आम आदमी की समस्याओं को हल करने में किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष के अभिनंदन प्रस्ताव पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र विधानमंडल का सदन देश को दिशा देने वाला सदन है। सभी को इस सदन का सम्मान करना चाहिए। चूंकि सदन को एक संवेदनशील अध्यक्ष मिला है, इसलिए उनके कार्यकाल के दौरान जनहित और प्रभावी निर्णय होंगे।शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान नार्वेकर के चुनाव और नए विधायकों को शामिल करने का बहिष्कार किया। क्योंकि उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान एक असंवैधानिक सरकार चलाने में मदद की थी। आदित्य ने कहा कि उन विधायकों के बारे में हर कोई जानता है जो सूरत और फिर गुवाहाटी (2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद) भाग गए थे। सभी ने देखा है कि विधानसभा अध्यक्ष (नार्वेकर) के रूप में चुने गए इस व्यक्ति ने पिछले ढाई वर्षों में कैसे एक असंवैधानिक सरकार चलाने में मदद की। हमें उम्मीद है कि नार्वेकर अगले पांच साल में विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर अन्याय नहीं करेंगे।करीब ढाई साल तक 14वीं विधानसभा के अध्यक्ष रहे भाजपा नेता नार्वेकर 20 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव में मुंबई की कोलाबा विधानसभा सीट से फिर से चुने गए हैं। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान नार्वेकर ने फैसला सुनाया था कि बाल ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी में विभाजन के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी असली शिवसेना है। उन्होंने यह भी फैसला दिया था कि अजित पवार के नेतृत्व वाला गुट असली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) है, जिसकी स्थापना शरद पवार ने की थी। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 दिसंबर 2024 को हरियाणा के पानीपत में ‘बीमा सखी योजना’ लॉन्च की। यह योजना खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है ताकि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सके। इस योजना के तहत महिलाओं को भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के साथ बीमा एजेंट के रूप में काम करने का मौका मिलेगा। यह योजना तीन सालों तक महिलाओं को मासिक स्टाइपेंड और कमीशन-आधारित इन्सेंटिव देगी जिससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए यह जरूरी है कि उन्हें आगे बढ़ने के भरपूर अवसर दिए जाएं और उनकी राह में आने वाली सभी बाधाएंँ दूर की जाएंँ। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है, तो वे देश के लिए अवसरों के नए द्वार खोलती हैं। प्रधानमंत्री आज हरियाणा के पानीपत में बीमा सखी योजना का शुभारंभ करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। भारतीय जीवन बीमा निगम की यह पहल 18 से 70 वर्ष की आयु की, 10वीं पास महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बनाई गई है। श्री मोदी ने कहा कि आज भारत बीमा सखी योजना के माध्यम से महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक और मजबूत कदम उठा रहा है, जो सभी के लिए बीमा के उद्देश्य को प्राप्त करने में मदद करेगी।उन्होंने कहा कि सभी के लिए बीमा सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं ने गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि बैंक-सखियां, अब ग्रामीणों को बैंकों से जोड़ रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में महिला सशक्तीकरण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लाल किले से तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया था और अब तक देश भर में एक करोड़ 15 लाख से अधिक बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं हर साल एक लाख रुपये से अधिक की कमाई करने लगी हैं।श्री मोदी ने कहा कि सरकार की नमो ड्रोन दीदी योजना ने भी लखपति दीदी अभियान को मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए भारत की स्वयं सहायता समूह पहल एक ऐसा आंदोलन है जिसे इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का बड़ा माध्यम बनाया है।श्री मोदी ने कहा कि आज देशभर में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और इन समूहों के माध्यम से महिलाएं कमाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले उन्होंने पानीपत से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी, जिसका न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश में सकारात्मक प्रभाव पड़ा।श्री मोदी ने कहा कि जिस तरह से हरियाणा ने ‘एक है तो सुरक्षित है’ के मंत्र को अपनाया है, जो पूरे देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में डबल इंजन की सरकार लोगों के कल्याण के लिए दोगुनी गति से काम कर रही है।
समारोह के दौरान श्री मोदी ने भावी बीमा सखियों को नियुक्ति प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने करनाल में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर की आधारशिला भी रखी। चार सौ 95 एकड़ में फैले मुख्य परिसर और छह क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र सात सौ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्थापित किए जाएंगे।
कौन होगा ‘बीमा सखी योजना’ के लिए पात्र?बीमा सखी योजना के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया काफी सरल है। महिलाओं की उम्र 18 से 70 साल के बीच होनी चाहिए और उन्होंने कम से कम 10वीं कक्षा पास की हो। हालांकि, LIC एजेंटों या कर्मचारियों के रिश्तेदार, जैसे पति-पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन या ससुराल वाले इस योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकते। इसके अलावा, LIC के पूर्व कर्मचारी या पूर्व एजेंट जो दोबारा नियुक्ति चाहते हैं, वे भी इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।योजना के तहत महिलाओं को तीन साल तक मासिक स्टाइपेंड दिया जाएगा। पहले साल ₹7,000 प्रति माह का स्टाइपेंड मिलेगा। दूसरे साल ₹6,000 प्रति माह का स्टाइपेंड मिलेगा, लेकिन इसके लिए शर्त है कि पहले साल पूरी की गई पॉलिसियों में से कम से कम 65% पॉलिसियां दूसरे साल के हर महीने के अंत तक एक्टिव बनी रहें।तीसरे साल ₹5,000 प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि दूसरे साल पूरी की गई पॉलिसियों में से कम से कम 65% पॉलिसियां तीसरे साल के हर महीने के अंत तक एक्टिव रहें। यानी हर साल का स्टाइपेंड पाने के लिए महिलाओं को अपनी पॉलिसियों को एक्टिव बनाए रखना अनिवार्य होगा।अगर आपने शर्तों के हिसाब से काम किया तो आप पहले काम 84 हजार रुपये, दूसरे साल 72 हजार रुपये और तीसरे साल 60 हजार रुपये कमा सकती हैं। इस तरह से तीन साल में आपके पास कुल 2.16 लाख रुपये कमाने का मौका है।कौन से दस्तावेज लगेंगे?आवेदन प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण, पता प्रमाण और 10वीं की मार्कशीट शामिल हैं। इच्छुक महिलाएं LIC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। इसके लिए वेबसाइट पर ‘Click Here For Bima Sakhi’ लिंक दिया गया है, जिस पर क्लिक कर फॉर्म भरा जा सकता है।बीमा सखी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ा बदलाव लाने का वादा करती है। यह योजना उन्हें न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि उन्हें एक स्थिर और सम्मानजनक करियर का रास्ता भी दिखाएगी। सरकार ने यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी का यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं के जीवन में एक नई दिशा देने की कोशिश है, जिससे वे आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर मजबूत बन सकें। - -महिला नेतृत्व वाली पंचायतें चमकीं: राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार विजेताओं में 42% का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैंछत्तीसगढ के हरदीभाटा गांव को सामाजिक रुपसे न्यायसंगत एवं सामाजिक रुप से संरक्षित पंचायत पुरस्कार घोषितनई दिल्ली ।पंचायती राज मंत्रालय ने मूल्यांकन वर्ष 2022-2023 के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की घोषणा की है। ये पुरस्कार उत्कृष्टता के एक मानक के रूप में जमीनी स्तर पर समावेशी और सतत विकास को आगे बढ़ाने में देश भर में पंचायती राज संस्थानों के अनुकरणीय प्रयासों को स्वीकार करते हैं। राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2024 के लिए सम्मान समारोह 11 दिसंबर, 2024 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में होगा, जहाँ माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु पुरस्कार विजेताओं/प्राप्तकर्ताओं को पुरस्कार प्रदान करेंगी।इस वर्ष, विभिन्न श्रेणियों के तहत 45 पुरस्कार विजेताओं का चयन किया गया है, जो जमीनी स्तर पर शासन और सामुदायिक विकास में उपलब्धियों के व्यापक फलक को दर्शाता है । श्रेणियों में दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार, नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार, ग्राम ऊर्जा स्वराज विशेष पंचायत पुरस्कार, कार्बन न्यूट्रल विशेष पंचायत पुरस्कार और पंचायत क्षमता निर्माण सर्वोत्तम संस्थान पुरस्कार शामिल हैं। ये पुरस्कार गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, बाल कल्याण, जल पर्याप्तता, स्वच्छता, बुनियादी ढांचे के विकास, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और जलवायु स्थिरता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उपलब्धियों को मान्यता देते हैं।इस श्रेणी में छत्तीसगढ के धमतरी जिला के नागरी ब्लाक के हरदीभाटा गांव को दिन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास के अंतर्गत सामाजिक रुपसे न्यायसंगत एवं सामाजिक रुप से संरक्षित पंचायत के तौर पर पुरस्कार घोषित हुआ है।इस वर्ष प्रतियोगिता में 1.94 लाख ग्राम पंचायतों ने भाग लिया। पुरस्कार प्राप्त करने वाली 42 पंचायतों में से 42% पंचायतें महिला नेतृत्व वाली हैं। सावधानीपूर्वक चयन प्रक्रिया में ब्लॉक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक 5 विभिन्न समितियों द्वारा सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) के स्थानीयकरण के साथ जुड़े विभिन्न विषयगत क्षेत्रों में पंचायतों के प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन शामिल था। यह प्रक्रिया पारदर्शिता को बढ़ावा देने और पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई)/ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) के बीच प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रालय की अटूट प्रतिबद्धता को उजागर करती है।यह घोषणा पंचायती राज संस्थाओं की सराहनीय उपलब्धियों का जश्न मनाने का मंच तैयार करती है। यह घोषणा सुदृढ़ और जीवंत ग्रामीण समुदायों को आकार देने में पंचायतों की भूमिका पर भी जोर देती है। यह प्रतिष्ठा न केवल इन संस्थाओं द्वारा किए गए असाधारण कार्यों की मान्यता के रूप में कार्य करती है, बल्कि इसका उद्देश्य अन्य पंचायतों को अपने क्षेत्रों में इन सर्वोत्तम प्रथाओं को दोहराने के लिए प्रेरित करना भी है।
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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यालय ने आज एक जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया, जिसमें राजनीतिक दलों को यौन उत्पीड़न विरोधी कानूनों के तहत शामिल करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों पर कार्य-स्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार यौन उत्पीड़न की शिकायतों से निपटने के लिए सक्षम प्राधिकारी होगा। जनहित याचिका में बताया गया है कि राजनीतिक दलों में मानकीकृत आंतरिक शिकायत समितियों की कमी से यौन उत्पीड़न के मामलों की अनदेखी हो सकती है और इसको बढ़ावा मिल सकता है।
- -राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शुरूआत से मानवाधिकार उल्लंघन के 23.14 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए और मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत के रूप में आयोग की तरफ से 256.57 करोड़ रुपये की सिफारिश की गई=मानवाधिकार दिवस समारोह के बाद 'मानसिक स्वास्थ्य: कक्षा से कार्यस्थल तक तनाव से निपटना' विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगानई दिल्ली। मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मानवाधिकारों की सर्वव्यापी घोषणा (यूडीएचआर) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में मानवाधिकार को अपनाया था और इसकी सर्वव्यापी घोषणा की थी। यूडीएचआर मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वैश्विक निर्देश चिन्ह (बेंचमार्क) के रूप में कार्य करता है। भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) मानवाधिकार दिवस को दुनिया भर के विभिन्न हितधारकों के लिए अपने कार्यों और जिम्मेदारियों पर विचार करने के अवसर के रूप में देखता है और यह सुनिश्चित करता है कि वे हितधारक मानवाधिकारों के उल्लंघन में योगदान न दें।यूडीएचआर इस सिद्धांत को दर्शाता है कि सभी मनुष्य स्वतंत्र और समान पैदा होते हैं, उन्हें जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा, कानून के समक्ष समानता और विचार, विवेक, धर्म, राय तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। यह सिद्धांत भारत के संविधान और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (पीएचआरए), 1993 में भी परिलक्षित होता है, जिसने 12 अक्टूबर, 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत की स्थापना के लिए कानूनी ढांचा प्रदान किया।10 दिसंबर, 2024 को मानवाधिकार दिवस के अवसर पर, एनएचआरसी नई दिल्ली में विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। इस अवसर पर एनएचआरसी की कार्यवाहक अध्यक्ष श्रीमती विजया भारती सयानी, एनएचआरसी के महासचिव श्री भरत लाल, वरिष्ठ अधिकारी, वैधानिक आयोगों के सदस्य, राज्यों के मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी), राजनयिक, नागरिक समाज और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।इस कार्यक्रम के बाद ' मानसिक स्वास्थ्य: कक्षा से कार्यस्थल तक तनाव से निपटना ' विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के तीन सत्रों में 'बच्चों और किशोरों में तनाव', 'उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियां' और 'कार्यस्थलों पर तनाव और थकान' शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षा से लेकर रोजगार तक जीवन के विभिन्न चरणों में तनाव के मनोवैज्ञानिक प्रभावों का पता लगाना और विभिन्न क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए सिफारिशें प्रस्तावित करना है।इस वर्ष के मानवाधिकार दिवस की थीम "हमारे अधिकार, हमारा भविष्य, अभी" इस बात पर जोर देती है कि मानवाधिकार सिर्फ़ आकांक्षापूर्ण नहीं हैं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए व्यक्तियों और समुदायों को सशक्त बनाने का एक व्यावहारिक साधन भी हैं। मानवाधिकारों की परिवर्तनकारी क्षमता को अपनाने से एक ज़्यादा शांतिपूर्ण, न्यायसंगत और टिकाऊ दुनिया बनाने में मदद मिल सकती है। अब समय आ गया है कि मानवीय गरिमा पर आधारित भविष्य के लिए विश्व स्तर पर कार्रवाई को फिर से शुरू किया जाए।आयोग ने नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया है। इसने सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों में मानवाधिकार-केंद्रित दृष्टिकोण को मुख्यधारा में लाने और विभिन्न पहलों के माध्यम से सार्वजनिक प्राधिकरणों और नागरिक समाज के बीच जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकार चर्चाओं को बढ़ावा देता है और नागरिक समाज, गैर सरकारी संगठनों, मानवाधिकार रक्षकों, विशेषज्ञों, वैधानिक आयोग के सदस्यों, राज्य मानवाधिकार आयोगों और सरकारी अधिकारियों के साथ संवाद बनाए रखता है।एनएचआरसी ने 12 अक्टूबर, 1993 को अपनी स्थापना के बाद से 30 नवंबर, 2024 तक कई मौके पर जांच, खुली सुनवाई और शिविर बैठकें आयोजित की हैं। तीन दशकों से अधिक की अवधि के दौरान आयोग ने कुल 23,14,794 मामले दर्ज किए और 23,07,587 मामलों का निपटारा किया, जिनमें 2,880 मामले स्वतः संज्ञान पर आधारित थे। आयोग ने अब तक मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को मौद्रिक राहत के रूप में लगभग 256.57 लाख रुपये की सिफारिश की है।पिछले एक साल के दौरान, 1 दिसंबर, 2023 से 30 नवंबर, 2024 तक, एनएचआरसी ने 65,973 मामले दर्ज किए और 66,378 मामलों का निपटारा किया, जिनमें पिछले वर्षों से आगे बढ़ाए गए मामले भी शामिल हैं। आयोग ने 109 मामलों में स्वतः संज्ञान लिया और पिछले वर्ष की इस अवधि के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को 17,24,40,000/- रुपये की आर्थिक राहत की सिफारिश की। आयोग ने आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में एक शिविर भी लगाया।एनएचआरसी का प्रभाव कई विधेयकों, कानूनों, सम्मेलनों, शोध परियोजनाओं, 31 परामर्शों और 100 से अधिक प्रकाशनों (इनमें मासिक समाचार पत्र और मीडिया रिपोर्ट शामिल हैं) की समीक्षा से और भी स्पष्ट होता है। ये सभी मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने में आयोग के प्रयासों की गवाही देते हैं। एनएचआरसी ने कई मुद्दों पर परामर्श जारी किए हैं जिनमें बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), विधवाओं के अधिकार, भोजन का अधिकार, स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, अनौपचारिक श्रमिकों के अधिकार और पर्यावरण प्रदूषण सहित कई मुद्दे शामिल हैं।एनएचआरसी ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति का आकलन करने के लिए 14 विशेष प्रतिवेदक नियुक्त किए हैं। ये प्रतिवेदक आश्रयगृहों, जेलों और इसी तरह के संस्थानों का दौरा करते हैं और भविष्य की कार्रवाई के लिए सिफारिशों के साथ रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके अतिरिक्त, 21 विशेष निगरानीकर्ता विशिष्ट मानवाधिकार मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और एनएचआरसी को अपने निष्कर्ष सौंपते हैं।एनएचआरसी ने मानवाधिकारों के विभिन्न विषयों पर 12 कोर समूह स्थापित किए हैं और सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए नियमित रूप से विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ चर्चा करता है। यह मानवाधिकारों के विभिन्न मुद्दों पर हितधारकों के साथ खुली चर्चाओं का भी आयोजन करता है। पिछले एक साल में इसने मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर कई कोर ग्रुप मीटिंग, खुली चर्चाएं और राष्ट्रीय परामर्श आयोजित किए हैं।मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए एनएचआरसी केंद्र तथा राज्य सरकारों, अर्ध-सरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों और मानवाधिकार रक्षकों के साथ हमेशा सहयोग करता है। इस वर्ष, आयोग ने आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों सहित अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू किया। इसका उद्देश्य अधिकारियों में मानवाधिकारों की गहरी समझ विकसित करना है ताकि वे अपने संबंधित संगठनों के भीतर इस समझ या ज्ञान को साझा कर सकें।आयोग ने लगभग 55 सहयोगात्मक कार्यशालाएं, 06 मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं और कई इंटर्नशिप भी आयोजित कीं, जिससे देश भर के छात्र लाभान्वित हुए। 44 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र और संकाय सदस्य मानवाधिकारों और उनके संरक्षण तंत्रों के बारे में जानकारी के लिए आयोग में आए। इसके अतिरिक्त, आयोग ने मानवाधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस संगठनों के लिए वाद-विवाद की मेजबानी की।एनएचआरसी ने कई मामलों में हस्तक्षेप किया है, जिनमें कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न की समस्या का समाधान करने के लिए खेल निकायों को नोटिस जारी करना, बेघर लोगों के लिए मुफ्त आवास की सिफारिश करना, सांप्रदायिक दंगों के पीड़ितों को मुआवजा देना और प्राकृतिक आपदाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास में सहायता करना शामिल है। आयोग ने कर्ज में डूबे किसानों द्वारा आत्महत्या के मामलों में भी हस्तक्षेप किया है और हैनसेन रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करने वाले 97 कानूनों में संशोधन की सिफारिश भी की है। आयोग ने एचआरसीनेट पोर्टल के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे राज्यों के प्राधिकरण जुड़े हुए हैं और लोगों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने तथा वास्तविक समय में शिकायत पर समाधान की स्थिति को ट्रैक करने की सुविधा मिलती है। यह पोर्टल पांच लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर और राष्ट्रीय सरकारी सेवा पोर्टल से जुड़ा हुआ है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 अक्टूबर, 2024 को आयुष्मान वय वंदना कार्ड योजना शुरू करने के 2 महीने से भी कम समय में इस विस्तारित योजना के लिए 25 लाख पात्र व्यक्तियों ने पंजीकरण कराया है जो अपने आप में एक विशिष्ट उपलब्धि है। आयुष्मान वय वंदना कार्ड के शुभारंभ के बाद से पात्र व्यक्तियों ने 40 करोड़ रुपये से अधिक के उपचार का लाभ उठाया है, जिससे 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 22000 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिला है। वरिष्ठ नागरिकों ने कोरोनरी एंजियोप्लास्टी, हिप फ्रैक्चर/रिप्लेसमेंट, पित्ताशय निकालना, मोतियाबिंद सर्जरी, प्रोस्टेट रिसेक्शन, स्ट्रोक, हेमोडायलिसिस, एंटरिक फीवर और अन्य ज्वर संबंधी बीमारियों के लिए उपचार कराया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 29 अक्टूबर, 2024 को 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को शामिल करने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के विस्तार की घोषणा की। इस विस्तार के तहत, 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को “आयुष्मान वय वंदना कार्ड” मिल रहा है, जो उन्हें स्वास्थ्य सेवा लाभ प्राप्त करने में मदद करेगा। आयुष्मान वय वंदना कार्ड 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बावजूद 5 लाख रुपये का निःशुल्क स्वास्थ्य कवर प्रदान करता है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पहले से ही कवर किए गए परिवारों से संबंधित 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को अपने लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का अतिरिक्त टॉप-अप कवर मिलता है। वरिष्ठ नागरिक जो पहले से ही केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस), भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) और आयुष्मान केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, उन्हें अपनी मौजूदा योजना के बीच चयन करना होगा या आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का विकल्प चुन सकते हैं। इसके अतिरिक्त, निजी स्वास्थ्य बीमा कवरेज वाले व्यक्ति या कर्मचारी राज्य बीमा योजना के सदस्य आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से लाभ उठाने के पात्र हैं। यह कार्ड लगभग 2000 चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए उपचार प्रदान करता है और पहले दिन से ही सभी पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करता है। 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक जो आयुष्मान वय वंदना कार्ड के लिए पात्र हैं, वे कई चैनलों के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। वे पंजीकरण के लिए निकटतम सूचीबद्ध अस्पताल जा सकते हैं। स्व-पंजीकरण के लिए पात्र नागरिक आयुष्मान ऐप (गूगल प्ले स्टोर से) डाउनलोड कर सकते हैं या www.beneficiary.nha.gov.in पर जा सकते हैं। नागरिक आयुष्मान वय वंदना कार्ड के बारे में अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 14555 पर कॉल कर सकते हैं या 1800110770 पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं।
- नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राज्यसभा उपचुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने आंध्र प्रदेश से रायगा कृष्णैया, हरियाणा से रेखा शर्मा और ओडिशा से सुजीत कुमार को चुनावी मैदान में उतारा है। यह फैसला चुनाव आयोग द्वारा 20 दिसंबर को छह रिक्त राज्यसभा सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा के बाद आया है। इन चुनावों के नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे। राज्यसभा उपचुनावों में आंध्र प्रदेश की तीन सीटों और हरियाणा, ओडिशा, और पश्चिम बंगाल की एक-एक सीट पर मतदान होगा। ये चुनाव न केवल भाजपा के लिए बल्कि विपक्ष के लिए भी बेहद अहम हैं। क्योंकि यह हालिया चुनावी परिणामों के संदर्भ में उनके राजनीतिक अस्तित्व की परीक्षा का मंच बन गए हैं।भाजपा ने इन राज्यों में अपने तीनों उम्मीदवारों का चयन बेहद रणनीतिक रूप से किया है। पार्टी द्वारा आंध्र प्रदेश से रायगा कृष्णैया को उतारना राज्य में भाजपा के प्रभाव को बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इसी तरह हरियाणा से रेखा शर्मा को उतारकर विधानसभा और अन्य चुनावी सफलताओं के बाद भाजपा की इस क्षेत्र में पकड़ और मजबूत करने की कोशिश की गई है। ऐसे ही पार्टी की ओडिशा से सुजीत कुमार के जरिए क्षेत्रीय समीकरणों को साधने और नवीन पटनायक के गढ़ में भाजपा की स्थिति मजबूत करने की मंशा है। भाजपा की जीत का असर हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा की चुनावी जीत ने विपक्ष को हाशिये पर डाल दिया है। 20 दिसंबर को होने वाले ये चुनाव भाजपा के प्रभाव और विपक्ष की पुनर्गठित रणनीति की परीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनेंगे।
- मुंबई. मुंबई पुलिस ने अभिनेता एवं हास्य कलाकार सुनील पाल की शिकायत पर अपहरण और जबरन वसूली का मामला दर्ज किया और फिर इसे उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप दिया। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। सांताक्रूज पुलिस थाने के अधिकारी ने बताया कि यह मामला उत्तर प्रदेश में मेरठ के लाल कुर्ती पुलिस थाने को हस्तांतरित दिया गया है। दरअसल, पाल ने दावा किया है कि उनका अपहरण करने वालों ने उन्हें वहीं छोड़ा था। अधिकारी ने कहा, ‘‘पाल का बयान बृहस्पतिवार को दर्ज किया गया। उन्होंने दावा किया है कि जब वह एक कार्यक्रम के लिए उत्तराखंड गए थे, तब उनका अपहरण कर लिया गया था। जब वह रास्ते में नाश्ता करने के लिए रुके, तो स्वयं को उनका एक प्रशंसक बताकर एक व्यक्ति आया और उसने उन्हें कार में धकेल दिया। पाल ने कहा कि उन्होंने 20 लाख रुपये मांगे लेकिन उन्हें तब छोड़ा गया, जब उन्होंने अपने दोस्तों से आठ लाख रुपये एकत्र कर उन्हें दिए।'' उन्होंने कहा, ‘‘पाल ने दावा किया कि उन्हें मेरठ में एक सड़क के किनारे छोड़ दिया गया, जहां से वह दिल्ली हवाई अड्डे पहुंचे और उन्होंने मुंबई के लिए उड़ान भरी। उनकी पत्नी ने भी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। आगे की जांच जारी है।''
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जोधपुर.केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारत अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए जल्द ही एक बृहद् ड्रोन रोधी इकाई बनाएगा क्योंकि आने वाले दिनों में इस तरह का ‘‘खतरा'' गंभीर होने वाला है। भारत-पाकिस्तान सीमा से लगभग 300 किलोमीटर दूर प्रशिक्षण शिविर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 60वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि ‘‘लेजर से लैस ड्रोन रोधी गन-माउंटेड'' के शुरुआती नतीजे प्रभावशाली रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन को निष्क्रिय करने और उनका पता लगाने की क्षमता तीन प्रतिशत से 55 प्रतिशत तक बढ़ी है। शाह ने कहा, ‘‘आने वाले दिनों में ड्रोन का खतरा और भी गंभीर होने वाला है... हम इससे निपटने के लिए पूरे भारत के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए रक्षा तथा अनुसंधान संगठनों और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम आने वाले समय में देश के लिए एक बृहद् ड्रोन रोधी इकाई बनाने जा रहे हैं।''
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान से सटी भारत की सीमा पर इस वर्ष 260 से अधिक ड्रोन गिराए गए या बरामद किए गए हैं, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 110 ड्रोन का था। हथियार तथा मादक पदार्थ तस्करी के लिए इस्तेमाल किए गए ड्रोन सबसे अधिक पंजाब और कुछ राजस्थान तथा जम्मू में मार गिए या बरामद गए। गृह मंत्री ने परेड की समीक्षा की, सलामी ली और वीरता पुरस्कार विजेताओं को पदक और कुछ अन्य अलंकरण प्रदान किए। बीएसएफ की स्थापना एक दिसंबर 1965 को की गई थी जिसमें फिलहाल 2.65 लाख जवान हैं। मुख्य रूप से इसका काम देश के आंतरिक सुरक्षा क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कर्तव्यों के निर्वहन के साथ-साथ पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ 6,300 किलोमीटर से अधिक की भारतीय सीमा की सुरक्षा करना है। शाह ने कहा कि पाकिस्तान (2,289 किलोमीटर) और बांग्लादेश (4,096 किलोमीटर) से सटी भारतीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए शुरू की गई एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) पर काम प्रगति पर है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें असम के धुबरी (भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा) में नदी सीमा पर स्थापित सीआईबीएमएस के प्रभावशाली परिणाम देखने को मिल रहे हैं लेकिन कुछ सुधार की जरूरत है।'' गृह मंत्री ने यह भी कहा कि उत्तरी सीमाओं पर बसी आबादी के विकास और उसे मुख्यधारा में लाने के लिए मोदी सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' को देश के सभी सीमावर्ती गांवों के लिए लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 48,000 करोड़ रुपये की निधि आवंटित करने के साथ सीमा सुरक्षा को बढ़ाना और इन दूरदराज के इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए काम करना मोदी सरकार की ‘‘सबसे बड़ी उपलब्धि'' है। अमित शाह ने कहा इस पहल के तहत लगभग 3,000 गांवों में ‘‘प्रायोगिक आधार'' पर काम किया जा रहा है। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने भारत की सीमाओं को मजबूत करने के लिए ‘‘बड़ा'' बजट मंजूर किया है जिसके तहत बाड़ लगाने, सीमावर्ती बुनियादी ढांचा, सड़कें और अन्य रसद से जुड़े काम किए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बिना सुरक्षा बलों के भारत के लिए 2047 तक नंबर-एक देश बनना संभव नहीं है... वे जवान जो समर्पण के साथ हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं।'' शाह ने बताया कि मोदी सरकार ने 1,812 किलोमीटर सड़कों के अलावा लगभग 573 नयी सीमा चौकियां बनाई हैं।बीएसएफ के महानिदेशक (डीजी) दलजीत सिंह चौधरी ने कहा कि 13,226 नए प्रशिक्षित जवानों को विभिन्न बटालियनों में तैनात किया गया है और इससे बल की ‘‘संचालन ताकत'' बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि नए भर्ती किए गए 4,000 अतिरिक्त जवान प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि लगभग 12,000 जवान अगले माह सीमा पर तैनात होने से पहले सुरक्षा और युद्ध कौशल सीखने के लिए बल में शामिल होंगे। चौधरी ने हथियार और मादक पदार्थ तस्करी के लिए पाकिस्तान सीमा से भेजे जा रहे ड्रोन की ‘‘बढ़ती संख्या'' के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि इस साल पश्चिमी सीमा पर 250 से अधिक ड्रोन को रोका गया।उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस खतरे से निपटने के लिए डीआरडीओ द्वारा निर्मित ड्रोन रोधी प्रणाली स्थापित की है।''



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