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एससी, एसटी और ओबीसी को सर्वाधिक लाभ हुआ
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार किए हैं जिनका सबसे ज्यादा फायदा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को हुआ है। पार्टी सांसद तेजस्वी सूर्या ने वर्ष 2024-25 के लिए शिक्षा मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए यह आरोप भी लगाया कि अनुसूचित जातियों (एसी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) की सबसे बड़ी विरोधी कांग्रेस है जिसने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, ‘‘बहुआयामी सुधारो के कारण शिक्षा में व्यापक सुधार हुआ है...आजादी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को छोड़कर हर सरकार में शिक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज किया गया था, लेकिन मोदी सरकार में इसे प्रमुखता दी गई।'' सूर्या के अनुसार, पहले की सरकारों के समय ऐसे पाठ्यक्रम थे जिनके कारण मानव संसाधन की गुणवत्ता कम रही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में शिक्षा के बजट में 78 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।
भाजपा सांसद ने कहा कि शिक्षा के बुनियादी ढांचे में बढ़ोतरी हुई है तथा 390 नए विश्वविद्यालयों का निर्माण किया गया है। उनके मुताबिक, उच्च शिक्षा में दाखिला बढ़ने का सबसे ज्यादा फायदा दलित, आदिवासी, ओबीसी तथा महिलाओं को हुआ है। उनका कहना था कि अगर मंडल आयोग की सिफारिशें लागू नहीं होती और मोदी सरकार का प्रयास नहीं होता तो उच्च शिक्षा में दलित, ओबीसी और महिलाओं के दाखिले में इतनी बढ़ोतरी नहीं होती। सूर्या ने दावा किया कि कांग्रेस से जुड़े एक नेता, जो देश के प्रधानमंत्री भी रहे, उन्होंने 1990 के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशों का विरोध किया था। भाजपा सांसद ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने मातृभाषा में पढ़ाई कराने की व्यवस्था की है, जो पहले की सरकारों में नहीं हुआ था।
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मुंबई. ओलंपिक कांस्य पदक विजेता स्वप्निल कुसाले के माता पिता ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्हें यकीन था कि उनका बेटा तिरंगे और देश के लिये पदक जीतेगा । स्वप्निल के पिता ने कोल्हापूर में पत्रकारों से कहा ,‘‘ हमने उसे उसके खेल पर फोकस करने दिया और कल फोन भी नहीं किय । उन्होंने कहा ,‘‘ पिछले दस बारह साल से वह घर से बाहर ही है और अपनी निशानेबाजी पर फोकस कर रहा है । उसके पदक जीतने के बाद से हमें लगातार फोन आ रहे हैं ।'' स्वप्निल की मां ने कहा ,‘‘ वह सांगली में पब्लिक स्कूल में था जब निशानेबाजी में उसकी रूचि जगी । बाद में वह ट्रेनिंग के लिये नासिक चला गया ।
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नयी दिल्ली. लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर ने बृहस्पतिवार को चिकित्सा सेवा (सेना) के महानिदेशक का पदभार संभाला। वह इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक बयान के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने पुणे स्थित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय से एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक रिकॉर्ड के साथ स्नातक किया और दिसंबर 1985 में सेना चिकित्सा कोर में नियुक्त हुईं। नायर ने बृहस्पतिवार को चिकित्सा सेवा (सेना) के महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया।
बयान में कहा गया, ''लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर एयर मार्शल के पद से पदोन्नत होकर चिकित्सा सेवा (सेना) के महानिदेशक का पदभार संभालने वाली पहली महिला हैं।'' बयान में कहा गया कि उन्होंने पारिवारिक चिकित्सा में स्नातकोत्तर की डिग्री और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन में डिप्लोमा प्राप्त किया है। इसी के साथ उन्होंने नयी दिल्ली में स्थित एम्स अस्पताल में चिकित्सा सूचना विज्ञान में दो साल का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया है। इसमें बताया गया कि उन्हें इजराइली रक्षा बलों के साथ रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु युद्ध में तथा स्पीज में स्विस सशस्त्र बलों के साथ सैन्य चिकित्सा नैतिकता में प्रशिक्षण दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल नायर भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की पश्चिमी वायु कमान और प्रशिक्षण कमान की पहली महिला प्रधान चिकित्सा अधिकारी भी हैं। बयान में बताया गया कि लेफ्टिनेंट जनरल नायर को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में चिकित्सा शिक्षा का मसौदा तैयार करने के लिए डॉ. कस्तूरीरंगन समिति के विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नामित किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल नायर को उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति द्वारा एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी वायु कमान और चीफ ऑफ एयर स्टाफ कमेंडेशन के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। -
नयी दिल्ली. लोकसभा सचिवालय ने संसद की लॉबी से पानी के रिसाव के विपक्षी सदस्यों के दावे पर बृहस्पतिवार को कहा कि यह मामूली रिसाव था जो अत्यधिक बारिश के कारण भवन के गुंबद के शीशे से हुआ था। सचिवालय ने कहा कि संसद परिसर में कहीं भी जल जमाव नहीं हुआ था और बारिश के तत्काल बाद पानी की निकासी हो गई थी। सचिवालय ने एक बयान में कहा, ‘‘भवन की लॉबी के ऊपर गुंबद के शीशे को फिक्स करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ‘एडहेसिव' थोड़ा हट गया, जिससे लॉबी में पानी का मामूली रिसाव हुआ था।'' समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने वीडियो साझा करते हुए इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा है।
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वायनाड .केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 173 हो गई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बचावकर्मी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी तलाश एवं बचाव अभियान जारी रखे हैं। वे मलबे में दबे हुए पीड़ितों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चारों ओर मलबा होने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बचावकर्मी मलबे को हटाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में मृतक संख्या बढ़ने की आशंका है।
जिला प्रशासन ने बृहस्पतिवार को बताया कि भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 173 लोगों की मौत हो गई है जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। जिला प्रशासन ने बताया कि भूस्खलन में मरने वालों में 23 बच्चे और 70 महिलाएं शामिल हैं।
उसने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों से निकाले गए 221 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनमें से 91 का अब भी इलाज जारी है। बुधवार शाम तक के आधिकारिक अनुमान के अनुसार, भूस्खलन प्रभावित वायनाड में अब भी 191 लोग लापता हैं, जबकि सूत्रों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। राज्य के राजस्व मंत्री के. राजन ने बताया कि अधिकारियों को अब भी लापता लोगों की सटीक संख्या का पता नहीं चल सका है। राजन बचाव प्रयासों का समन्वय करने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र में मौजूद हैं।
उन्होंने संवाददाताओं को बताया, “पहले हमने लापता लोगों की पहचान के लिए मतदाता सूची का इस्तेमाल किया था, लेकिन चूंकि इसमें बच्चों का विवरण नहीं है, इसलिए अब हम राशन कार्ड और अन्य जानकारियों के माध्यम से पता लगाएंगे। हम राशन कार्ड के विवरण की जांच करके और आशा कार्यकर्ताओं तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से लापता लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।” वायनाड जिले के आपदाग्रस्त मुंडक्कई में जारी तलाश अभियान के बीच बचावकर्मियों का कहना है कि भूस्खलन में उखड़े विशाल पेड़ों को हटाने के लिए भारी मशीनरी की जरूरत है। इन पेड़ों के नीचे कई घर दब गए हैं। एक बचावकर्मी ने कहा, “हम एक इमारत की छत पर खड़े हैं और नीचे से बदबू आ रही है, जिससे यह पता चलता है कि वहां शव दबे हुए हैं। इमारत पूरी तरह से कीचड़ और उखड़े हुए पेड़ों से ढकी हुई है।” उन्होंने कहा कि अभियान के लिए खुदाई करने वाली मशीनें उपलब्ध हैं लेकिन वे इस काम के लिए अपर्याप्त हैं। बचावकर्मी ने कहा, “विशाल पेड़ों को हटाने और ढह गई इमारतों में तलाश अभियान चलाने के लिए भारी मशीनरी की जरूरत है। तभी हम तलाश अभियान में प्रगति कर सकते हैं।” मंत्री ने बताया, “मलप्पुरम जिले के पोथुकल में चलियार नदी से शव बरामद किए गए हैं, जिससे पता चलता है कि घटना का प्रभाव व्यापक है।” मुंडक्कई के सूत्रों ने बताया कि चाय बागान के जो क्वार्टर बह गए हैं, वहां प्रवासी श्रमिक रह रहे थे। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमें यह नहीं पता कि वे किसी सुरक्षित स्थान पर चले गए थे या भूस्खलन की चपेट में आ गए।” निवासियों ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि चाय बागान प्रबंधक भी लापता है। राजन के अनुसार, वर्तमान में सेना, नौसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, अग्निशमन और अन्य बलों सहित 1,600 से अधिक बचावकर्मी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में तलाश एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। राजन ने कहा, “इतनी ही संख्या में स्थानीय लोग और अन्य बचावकर्मी भी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में मौजूद हैं और वे भी मदद कर रहे हैं। लापता लोगों को तलाश करने के लिए कुल 3,000 से अधिक लोग हर संभव कोशिशें कर रहे हैं।” वायनाड में चिकित्सक, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मी लगातार 24 घंटे कार्य कर रहे हैं। उन पर विनाशकारी घटना में गंभीर रूप से घायल लोगों के इलाज और शवों के पोस्टमार्टम का भारी बोझ है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा, “सुबह सात बजे तक कुल 256 पोस्टमॉर्टम किए गए हैं जिनमें शवों के हिस्से भी शामिल हैं। इस प्रकार ये पूरे 256 शव नहीं हैं बल्कि कुछ शवों के अंग भी इसमें शामिल हैं। हमने 154 शव जिला प्रशासन को सौंप दिए हैं।” उन्होंने बताया कि मलप्पुरम जिले के पोथुकल क्षेत्र से नदी में बहकर आए शवों के पोस्टमॉर्टम किए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के समक्ष उत्पन्न दुखद परिस्थितियों के बारे में बोलते हुए मंत्री ने बताया कि बुधवार रात को 100 से अधिक शवों का परीक्षण किया गया है। बचाव दल द्वारा शवों का पता लगाने के लिए कुत्तों का उपयोग किया जा रहा है। भूस्खलन प्रभावित वायनाड में इस विनाशकारी स्थिति के बीच इडुक्की में दिल को झकझोर कर देने वाला दृश्य सामाने आया, जहां एक महिला जरूरतमंद शिशुओं को अपना स्तनपान करा रही है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि रूसी सशस्त्र बलों में काम करने वाले आठ भारतीयों की मौत हो गई है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि उपलब्ध जानकारी से संकेत मिलता है कि 12 भारतीय नागरिक पहले ही रूसी सशस्त्र बलों को छोड़ चुके हैं, जबकि अन्य 63 व्यक्ति जल्दी काम छोड़ना चाह रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘आठ लोगों के मारे जाने की खबर है और मृतकों की नागरिकता भारतीय के रूप में सत्यापित की गई है।'' उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ भारतीय नागरिकों की जल्दी नौकरी छोड़ने में सुगमता के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जिन्हें कथित तौर पर अस्पष्ट परिस्थितियों में रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे भारतीय नागरिकों की सही संख्या ज्ञात नहीं है।'' सिंह ने कहा, ‘‘वर्तमान में उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि 12 भारतीय नागरिक पहले ही रूसी सशस्त्र बलों को छोड़ चुके हैं, जबकि अन्य 63 व्यक्ति जल्दी काम छोड़ना चाह रहे हैं।'' मंत्री ने कहा कि सरकार ने चार भारतीय नागरिकों के शव भारत लाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।
उन्होंने कहा, ‘‘रूस की सरकार ने सूचित किया है कि मृतक व्यक्तियों के परिवारों को उनके द्वारा हस्ताक्षरित अनुबंधों के अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।'' मंत्री ने कहा कि रूसी सशस्त्र बलों में कार्यरत भारतीय नागरिकों को शीघ्र दायित्वमुक्त करने, साथ ही उनकी सुरक्षा और कल्याण का मुद्दा सरकार ने विभिन्न स्तरों पर रूस के संबंधित अधिकारियों के साथ दृढ़ता से उठाया है। उन्होंने कहा, ‘‘जुलाई में रूस की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूसी सशस्त्र बलों से सभी भारतीय नागरिकों को शीघ्र दायित्वमुक्त किए जाने की तत्काल आवश्यकता को दृढ़ता से दोहराया।'' जून में, विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूसी सेना में सेवारत भारतीय नागरिकों का मुद्दा ‘‘अत्यंत चिंताजनक'' है और इस पर मास्को को कार्रवाई करना चाहिए। भारत ने 11 जून को कहा कि रूसी सेना द्वारा भर्ती किए गए दो भारतीय नागरिक इन दिनों चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष में मारे गए थे। दो भारतीयों की मौत के बाद, विदेश मंत्रालय ने रूसी सेना द्वारा भारतीय नागरिकों की आगे की भर्ती पर रोक की मांग की। - -गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, भारत ब्रांड के तहत चावल, आटे की बिक्री जारी रहेगी: श्री जोशीनई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज यहां घोषणा करते हुए कहा कि अनाज की कमी वाले राज्य 1 अगस्त, 2024 से ई-नीलामी में भाग लिए बिना खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू) (ओएमएसएस [डी]) के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से सीधे खरीद कर सकते हैं। नए खरीद सत्र के शुरू होने से पहले स्टॉक के विशाल अधिशेष को कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।ओएमएसएस (डी) के तहत, भारत सरकार का खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग सीधे राज्यों को 2,800 रुपये प्रति क्विंटल (परिवहन लागत को छोड़कर) की दर से अनाज बेचेगा। श्री जोशी ने कहा कि यदि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रति व्यक्ति निर्धारित 5 किलोग्राम मुफ्त अनाज से अधिक खरीदना चाहते हैं, तो वे इसे पहले के 2,900 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 2,800 रुपये प्रति क्विंटल की समान कीमत पर खरीद सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘भारत’ ब्रांड के तहत आटा और चावल की बिक्री जो 30 जून, 2024 तक चलने वाली थी, जारी रहेगी।प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 1 जनवरी, 2024 से पांच साल की अवधि के लिए पीएमजीकेएवाई के तहत लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों (यानि अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) परिवारों और प्राथमिकता वाले परिवारों (पीएचएच) लाभार्थियों) को निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान करने को जारी रखने का फैसला किया है, जिसका अनुमानित वित्तीय परिव्यय 11.80 लाख करोड़ रुपये है, जिसे पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। श्री जोशी ने कहा, "यह अब तक का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है।" 2023-2024 में वितरित खाद्यान्न की मात्रा 497 एलएमटी है और जून 2024 तक केंद्र सरकार ने 125 एलएमटी खाद्यान्न वितरित किया है।देश में एनीमिया और पोषण की कमी को दूर करने के लिए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएमजीकेएवाई योजना के तहत सरकार ने तीनों चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और सरकार की हर योजना में पारंपरिक रूप से तैयार (कस्टम-मिल्ड) चावल को पौष्टिक अवयवों से युक्त (फोर्टिफाइड) चावल से बदल दिया गया है और मार्च, 2024 तक पौष्टिक अवयवों से युक्त चावल के वितरण का 100% कवरेज हासिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा, "गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन पीएम मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।“उच्च खाद्य मुद्रास्फीति पर, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टमाटर और अन्य सब्जियां मौसमी हैं। उन्होंने कहा, "टमाटर की कीमत स्थिर हो रही है और पीएसएफ के उपयोग के बिना सब्सिडी वाले टमाटर 60 रुपये किलो उपलब्ध कराए गए हैं।“ दालों के बारे में, श्री जोशी ने कहा कि बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है और दालों की 100% सरकारी खरीद की जायेगी।श्री जोशी ने यह भी बताया कि अब तक इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 1589 करोड़ लीटर प्रति वर्ष हो गई है, जो देश की घरेलू इथेनॉल आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये के भुगतान के साथ, चालू चीनी सीजन के लिए 94.8% से अधिक गन्ना बकाया का भुगतान किया जा चुका है, जिससे गन्ना बकाया न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के हित में 2021-22 के चीनी सीजन का लगभग 99.9% गन्ना बकाया का भुगतान कर दिया गया है। पिछले चीनी सीजन 2022-23 के लिए देय गन्ना बकाया 1,14,494 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 1,14,235 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और केवल 259 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान किया जाना शेष है। श्री जोशी ने कहा कि इस प्रकार, किसानों को लगभग 99.8% गन्ना बकाया का भुगतान किया जा चुका है।एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड के बारे में श्री जोशी ने कहा कि अब तक देशभर में 145 करोड़ रुपये के अंतर-संचालन (पोर्टेबिलिटी) लेनदेन किए गए हैं। एनएफएसए लाभार्थियों को अंतर-राज्यीय या राज्य के अन्दर कुल 293 एलएमटी खाद्यान्न वितरित किया गया है।
- नयी दिल्ली. देश की प्रमुख कूरियर सेवा कंपनी डीटीडीसी एक्सप्रेस लि. ने ड्रोन से कूरियर पहुंचाने की सेवा शुरू की है। कंपनी ने इसके लिए ड्रोन सेवा प्रदाता कंपनी स्काई एयर मोबिलिटी के साथ साझेदारी की है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि उसने अपने 35वें स्थापना वर्ष के मौके पर ड्रोन से पहली डिलिवरी गुरुग्राम में बिलासपुर से सेक्टर 92 में की। इसके तहत 7.5 किमीमीटर की दूरी को केवल तीन से चार मिनट में तय किया गया। आमतौर पर सड़क मार्ग से कूरियर पहुंचाने में 15 मिनट तक लगते हैं। कंपनी ने कहा कि उसका लक्ष्य सालाना लगभग 15.5 करोड़ पार्सल प्रबंधन को और अधिक प्रभावी व कुशल बनाना है। डीटीडीसी एक्सप्रेस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिषेक चक्रवर्ती ने कहा, “हम डीटीडीसी के सफर के 35वें वर्ष की शुरुआत कर रहे हैं। स्काई एयर के साथ रणनीतिक साझेदारी के साथ यह एक नए सफर की शुरुआत है।” स्काई एयर के संस्थापक और सीईओ अंकित कुमार ने कहा कि यह एक बड़ी और व्यापक शुरुआत है, जिसमें भविष्य में अच्छे नतीजे प्राप्त होंगे।
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नई दिल्ली। देश में बढ़ते रेल हादसों को लेकर गुरुवार को लोकसभा में खूब हंगामा हुआ.। विपक्षी सांसदों के सवालों का जवाब देने के लिए जब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खड़े हुए तो विपक्ष के नेता हंगामा करने लगे.। बार-बार रील मंत्री कहे जाने पर अश्विनी वैष्णव भड़क उठे.। जब अश्विनी वैष्णव सदन में बोलने के लिए खड़े हुए तो विपक्षी सांसद "अश्विनी वैष्णव हाय हाय" के नारे लगाने लगे.। इसके बाद उन्होंने अपना आपा खो दिया और संसद में विपक्षी सांसदों को कड़ी फटकार लगाई.।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "लोग यहां चिल्ला रहे हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए कि सत्ता में रहने के 58 वर्षों में वे 1 किमी दूर भी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) क्यों नहीं लगा पाए.। आज, वे सवाल उठाने का साहस करते हैं। . जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थी, तो वह दुर्घटनाओं की संख्या बताती थी. 0.24 प्रतिशत से घटकर 0.19 प्रतिशत होने पर ये लोग सदन में ताली बजाते थे और आज जब यह 0.19 प्रतिशत से घटकर 0.03 प्रतिशत हो गई है, तो वे इस तरह का आरोप लगाते हैं। क्या यह देश इसी तरह चलेगा?" उन्होंने आगे कहा, "रेलवे के सुधार के लिए सबको साथ आना होगा. सपा और कांग्रेस ने एक रणनीति के तहत अयोध्या के पुराने रेलवे स्टेशन की दीवार की तस्वीर साझा करके नए रेलवे स्टेशन के डैमेज होने की बात कही थी, जो झूठ निकला. सोशल मीडिया की अपनी ट्रोल सेना की मदद से कांग्रेस झूठी बातें फैलाती है। . क्या वे उन 2 करोड़ लोगों के दिलों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जो हर दिन रेलवे से यात्रा करते हैं.। हम वे लोग नहीं हैं जो रील बनाते हैं,। हम कड़ी मेहनत करते हैं, आप जैसे लोग केवल और केवल पब्लिसिटी के लिए, दिखावे के लिए रील बनाते हैं.। -
नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ऋतु के दूसरे भाग और अगस्त 2024 के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है.। आईएमडी के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (अगस्त से सितंबर) 2024 के दूसरे भाग के दौरान पूरे देश में बारिश सामान्य से अधिक (LPA का 106% से अधिक) होने की संभावना है.। अगस्त 2024 के लिए पूरे देश में मासिक वर्षा सामान्य सीमा (LPA का 94 से 106%) के भीतर रहने के आसार हैं. । केवल पूवोत्तर, पूवी, मध्य व प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों जैसे- लद्दाख, सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ इलाकों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है.।
अगस्त महीने के लिए मौसम पूर्वानुमान
- मुंबई. करीब 42 प्रतिशत महिलाओं को कार्यस्थल पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यरत 90 प्रतिशत महिलाएं अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए ‘अतिरिक्त मेहनत' करने को तैयार हैं। एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष सामने आया है। वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म एऑन ने ‘2024 वॉयस ऑफ वुमेन स्टडी इंडिया' शीर्षक से जारी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि कॉरपोरेट नौकरी कर रही 42 प्रतिशत महिलाओं ने कार्यस्थल पर पक्षपात या संभावित पक्षपात का सामना करने की बात कही है। वहीं 37 प्रतिशत महिला कर्मचारियों को असंवेदनशील व्यवहार का अनुभव भी करना पड़ा है। हालांकि, 90 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने कहा कि वे प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त समय देने, चुनौतीपूर्ण कामों के लिए खुद आगे आने और खुद को बेहतर बनाने के लिए तैयार हैं। सर्वेक्षण में शामिल करीब छह प्रतिशत महिलाओं ने कम-से-कम एक बार यौन उत्पीड़न का सामना करने की पीड़ा भी जताई है। हालांकि, इनमें से आधे से भी कम महिला कर्मचारियों ने आधिकारिक तौर पर अपने नियोक्ता को इस घटना की सूचना दी। एऑन का अध्ययन भारत में 560 से अधिक कंपनियों की लगभग 24,000 पेशेवर महिलाओं से मिले जवाबों पर आधारित है। अध्ययन के मुताबिक, तीन-चौथाई कामकाजी महिलाओं ने कहा कि मातृत्व अवकाश के बाद उन्हें एक-दो साल के लिए करियर में झटका झेलना पड़ा। वहीं करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को मातृत्व अवकाश पर जाने से वेतन पर नकारात्मक असर देखने को मिला और उनकी भूमिका को भी बदल दिया गया। वरिष्ठ प्रबंधन और नेतृत्व की भूमिकाओं में मौजूद 34 प्रतिशत महिलाओं ने भी भेदभाव के संकेत दिए जबकि शुरुआती स्तर की नौकरियों में 17 प्रतिशत महिलाओं को पक्षपात झेलना पड़ा। इसका असर यह हुआ कि पक्षपात की शिकार लगभग 21 प्रतिशत महिलाओं ने एक वर्ष से भी कम समय में संगठन छोड़ने का संकेत दिया। एऑन के लिए भारत में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (प्रतिभा समाधान) नितिन सेठी ने कहा, ‘‘कार्यस्थल पर पक्षपात व्यवसायों के कुशल और प्रतिबद्ध महिलाओं को कार्यबल में शामिल करने और बनाए रखने के प्रयासों में बाधा बन रहा है... समावेशी कार्य संस्कृति का निर्माण नेतृत्व की प्राथमिकता में होना चाहिए।''
- पणजी. गोवा के सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूल छात्रों को परंपरागत विषयों के साथ कोडिंग और रोबोटिक्स की भी शिक्षा दे रहे हैं। इससे नए दौर के लिए विद्यार्थियों के तैयार होने के साथ नए अवसरों की दुनिया भी खुल रही है। गोवा के इन स्कूलों में लगभग 65,000 छात्र सरकार के महत्वाकांक्षी कौशल विकास कार्यक्रम के तहत कम उम्र में ही कोडिंग और रोबोटिक्स के गुर सीख रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने हाल ही में विधानसभा को जानकारी दी थी कि राज्य सरकार स्कूली छात्रों को नए कौशल से लैस करने के लिए ‘स्कूलों में कोडिंग और रोबोटिक्स शिक्षा' (केयर्स) योजना लागू कर रही है ताकि वे उद्योग के लिए तैयार हों। सावंत ने कहा था कि इस योजना को सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूलों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है और अब विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के दौरान गोवा के सभी स्कूलों के कंप्यूटर शिक्षकों को ‘मास्टर ट्रेनर' बनने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। इस योजना के तहत स्कूलों को कोडिंग एवं रोबोटिक्स उपकरण मुफ्त में दिए जा रहे हैं। गोवा सरकार की केयर्स परियोजना के निदेशक डॉ. विजय बोर्गेस ने कहा कि यह योजना पिछले चार वर्षों से सभी मिडिल स्कूलों में 65,000 छात्रों को लक्षित करके लागू की जा रही है। इसके लिए इंजीनियरिंग पेशेवरों को फेलो नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य नवोन्मेषक, प्रौद्योगिकी के लिए तैयार और ‘आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण में मददगार विद्यार्थियों को तैयार करना है। पणजी से 110 किलोमीटर दूर कैनकोना तालुका के गावडोंग्रिम गांव में सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक दामोदर गांवकर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी कोडिंग एवं रोबोटिक्स में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं और बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल के छात्र भी इन विषयों को सीखने में बहुत उत्साहित हैं। छात्र समृद्ध देवीदास ने कहा, ‘‘मुझे कोडिंग और रोबोटिक्स सीखने में बहुत मजा आता है। मुझे कई नई चीजें पता चलती हैं। इससे मेरी रचनात्मक सोच भी बढ़ती है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि पिछले पांच साल में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने के दौरान कुल 377 लोगों की मौत हो गई, लेकिन हाथ से मैला ढोने की प्रथा की कोई रिपोर्ट नहीं है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि 2019 से 2023 तक सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिमपूर्ण सफाई करते हुए कुल 377 लोगों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि लेकिन देश में हाथ से मैला ढोने की प्रथा की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने का अनुरोध किया गया है।
- वायनाड. केरल में वायनाड के भूस्खलन प्रभावित चूरलमाला के निवासी जयन 29 जुलाई की रात अपने घर में गहरी नींद में सो रहे थे। उनके आवास में बाहर हो रही मूसलाधार बारिश की तेज आवाजें आ रही थीं। जयन मंगलवार रात डेढ़ बजे तेज आवाज सुनकर जगे। जब वह अपने घर के बाहर निकले तो उन्होंने देखा कि उनके घर के बाहर बाढ़ का पानी बह रहा है और लोग अपनी छतों पर भागते हुए मदद के लिए चिल्ला रहे हैं। जयन ने मंगलवार की सुबह के समय की भयावह घटनाओं को याद करते हुए कहा, ‘‘वहां बिजली या रोशनी नहीं थी। हमने बाढ़ के पानी के दूसरी तरफ लोगों को मदद के लिए चिल्लाते देखा, लेकिन कोई भी उनके पास नहीं पहुंच सका क्योंकि कीचड़ और पानी का तेज बहाव किसी को भी उनके पास जाने से रोक रहा था।'' जयन और उनके परिवार के सदस्य अस्थायी तौर पर मजदूरी का काम करते हैं। आमतौर पर वे रात का खाना खाने के बाद रात 9.30 बजे के आसपास सो जाते थे। सोमवार की रात को भी, इलाके के अन्य लोगों की तरह, यह परिवार भी रात 9.30 बजे के आसपास सोने चला गया, इस बात से अनजान कि उनके साथ इतनी बुरी घटना घटने वाली है। चूरलमाला में लोगों को लगा कि रात डेढ़ बजे हुआ भूस्खलन ही एकमात्र घटना होगा, और कई लोग यह उम्मीद करते हुए बिस्तर पर चले गए कि मदद के लिए चिल्लाने वाले अन्य लोग सुरक्षित होंगे। जयन ने कहा, ‘‘लेकिन, तड़के करीब 3.30 बजे तेज आवाज हुई और सबकुछ एक झटके में खत्म हो गया। बड़े-बड़े पत्थरों और कीचड़ ने उन सभी घरों को बहा दिया, जहां लोग पहले मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हमें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, क्योंकि हमारे सामने कीचड़, पानी और मलबा बह रहा था।'' इलाके के ज्यादातर घर कुछ ही समय में गायब हो गए और आसपास जीवन का कोई निशान नहीं बचा। कीचड़-पत्थरों से भरे पानी ने मकानों को तहस-नहस कर दिया, जिनमें लोग रहते थे। एक ऐसा इलाका जो कभी जीवन से भरा हुआ था, अचानक नदी में बदल गया और चारों तरफ कीचड़ एवं मलबा बिखरा हुआ था। जो लोग सुरक्षित बच गए, वे रोते हुए अपने प्रियजनों का नाम पुकार रहे थे। जयन की पत्नी के रिश्तेदार लापता हैं। यह परिवार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र में रहता था। रुंधे गले से जयन ने कहा, ‘‘मेरी पत्नी के परिवार के 11 सदस्य लापता हैं। हमने मलप्पुरम जिले के नीलांबुर में चलियार नदी से बरामद एक बच्चे के शव की पहचान अपने एक रिश्तेदार के रूप में की है। हमें अब तक केवल तीन शव मिले हैं और बाकी अभी भी लापता हैं।'' जयन उस स्थान पर प्रतीक्षा कर रहे हैं, तथा घटनास्थल से बचाए गए प्रत्येक व्यक्ति को गौर से देखते हैं तथा यह सुनिश्चित करते हैं कि वह व्यक्ति उनकी पत्नी के परिवार का तो नहीं है। चिंतित और थके हुए नजर आ रहे जयन ने कहा, ‘‘मैं यहां इंतजार कर रहा हूं, उम्मीद है कि हमें अपने लापता परिवार के सदस्यों के बारे में कुछ जानकारी मिलेगी।'' उनका इंतजार कुछ और दिनों तक चल सकता है क्योंकि बचावकर्मी क्षेत्र में कीचड़ और मलबे के बीच मृतकों की तलाश कर रहे हैं तथा किसी को जीवित निकाले जाने की उम्मीद कर रहे हैं। जयन की तरह कई लोग इस क्षेत्र में भटक रहे हैं, बचाव दल के पास भाग रहे हैं, जो शवों को बाहर निकाल रहे हैं तथा अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन की उम्मीद कर रहे हैं, जो अचानक आई बाढ़ में बह गए।
- नयी दिल्ली. पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी इलाके में 15 वर्षीय एक किशोरी की आटा गूंथने वाली मशीन में हाथ और सिर फंसने से मौत हो गई। इस मशीन का इस्तेमाल मोमोज और स्प्रिंग रोल बनाने में किया जाता था। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक घटना मंगलवार शाम बेगमपुर इलाके में हुई, जहां एक कमरे के अंदर मशीन चल रही थी। उसने बताया कि पीड़िता काम कर रही थी, तभी उसका हाथ मशीन में फंस गया और उसका सिर आटा गूंथने वाले टब में चला गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘मंगलवार शाम 7.18 बजे बेगमपुर थाने में एक पीसीआर कॉल आई, जिसमें बताया गया कि बेगमपुर इलाके के हनुमान चौक के पास आटा गूंथने वाली मशीन में एक लड़की फंसी हुई है।'' उन्होंने बताया, ‘‘हमारी टीम मौके पर पहुंची और पाया कि मशीन बड़ी नहीं थी, लेकिन प्रारंभिक जांच से पता चला है कि लड़की का हाथ टब के अंदर फंस गया था, जिसके कारण मशीन ने उसे अंदर खींच लिया।'' अधिकारी ने बताया कि जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो लड़की गंभीर रूप से घायल थी और उसका सिर मशीन में फंसा हुआ था। पुलिस ने बताया कि उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक मामले में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। उसने बताया कि वह पीड़िता के परिवार से बात कर उसकी वास्तविक उम्र का पता लगा रही है ताकि यह जानकारी मिल सके कि कहीं वह बाल मजदूर के तौर पर तो काम नहीं कर रही थी।
- बांदा (उप्र) . बांदा जिले की एक अदालत ने अपनी पत्नी की हत्या करने के जुर्म में एक व्यक्ति को बुधवार को मौत की सजा सुनाई। दोषी अपनी पत्नी का सिर काटकर थाने ले गया था। लोक अभियोजक विजय बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद जिला एवं सत्र अदालत के न्यायाधीश डॉ बब्बू सारंग ने करीब चार साल पहले फरसे से हमलाकर अपनी पत्नी विमला की हत्या करने के मामले में दोषी पाए जाने पर पति किन्नर यादव (39) को मौत की सजा सुनाई और उस पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। उन्होंने बताया कि घटना की प्राथमिकी मृत महिला के पिता रामशरण यादव ने दर्ज करवाई थी।प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि बबेरू कस्बे के नेता नगर मोहल्ले में रहने वाले किन्नर यादव को शक था कि उसकी पत्नी का पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति से अवैध संबंध है और उसने नौ अक्टूबर 2020 को पड़ोसी को घर बुलाया और फिर फरसे से हमलाकर उसका एक कान काट दिया। इसमें कहा गया था कि जब उसे बचाने के लिए विमला आई तो यादव ने उस पर भी हमला कर दिया और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। उन्होंने बताया कि यादव उसका कटा हुआ सिर बबेरू थाने ले गया था। परिहार ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह अदालत में पेश किए गए।
- खरगोन . मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के एक गांव में बुधवार शाम को नहाते समय दो बहनों की डूबने से मौत हो गई। एक अधिकारी ने बताया कि घटना बालकवाड़ा थाने के अंतर्गत आने वाले बदिया गांव के पास स्थित एक तालाब में हुई। उप निरीक्षक एचसी पिपलिया ने बताया कि तीन बच्चियां कुंडिया तालाब में नहा रही थी, तभी वे डूबने लगी।उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने उनमें से एक को बचा लिया, जबकि 11 वर्षीय राधा और कृष्णा की डूबने से मौत हो गई। ये दोनों चचेरी बहने थी। गांव के गोविंदा परदेशी ने बताया कि वे अपने मवेशी चराने आई थी।
- सागर . मध्यप्रदेश के सागर में 32 वर्षीय एक महिला और उसकी दो नाबालिग बेटियां अपने घर पर मृत पाई गई हैं। पुलिस को उनकी हत्या कर दिये जाने का संदेह है। एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार रात सिविल लाइन थानाक्षेत्र के नेपाल पैलेस इलाके में यह महिला और उसकी बेटियां घर में खून से लथपथ मृत पायी गयीं। पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान वंदना और उनकी बेटियों-- अवंतिका (आठ) और अंविका (तीन) के रूप में हुई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संजीव उइके ने बताया, ‘‘वंदना अपने पति विशेष पटेल और अपनी दो बेटियों के साथ नेपाल पैलेस इलाके में रहती थी। मंगलवार रात वंदना और उनकी एक बेटी के शव रसोई में पड़े मिले, जबकि छोटी बेटी का शव बेडरूम में मिला।'' उन्होंने कहा, प्रथम दृष्टया यह हत्या का मामला है और इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए करीब 10 टीम गठित की गई हैं। सूत्रों ने बताया कि वंदना का पति जिला अस्पताल में काम करता है।
- मेरठ/लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मेरठ में गुरुवार को शासन के आदेश पर डीएम और एसएसपी ने कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक जिलाधिकारी दीपक मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विपिन ताड़ा ने हेलीकॉप्टर से कांवड़ियों पर फूलों की बारिश की। इस दौरान बाबा औघड़नाथ मंदिर पल्लवपुरम, बागपत फ्लाईओवर, सिवाया टोल, दौराला और सकौती सहित राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या—58 पर कांवड़ियों पर फूल बरसाए गए। इस दौरान कावड़ मार्ग का हवाई सर्वेक्षण भी किया गया है।बयान के अनुसार उत्साहित कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा में नारे भी लगाए।मेरठ से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक जिलाधिकारी मीणा ने कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर कांवड़ियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। साथ ही सुरक्षा के चाक—चौबंद बंदोबस्त किए गए हैं। मेरठ में एक दिन पहले भी बुलडोजर से पुष्प वर्षा की गई थी। इसके बाद अब हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा की तैयारी बैठक में अधिकारियों को आवश्यकतानुसार कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने के आदेश दिये थे।
- नयी दिल्ली । भारत में जुलाई के महीने में सामान्य के मुकाबले नौ प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि देश के मध्य क्षेत्र में 33 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को यह जानकारी दी। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि मध्य भारत के हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, जिससे कृषि को लाभ हो रहा है। मध्य भारत कृषि के लिए मानसून की वर्षा पर बहुत अधिक निर्भर है। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल में गांगेय के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में कम बारिश हुई है।
- शिमला। हिमाचल प्रदेश में बादल फटने की दो घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गयी तथा करीब 40 लोग लापता हो गए हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि बारिश के कारण कई मकान बह गए और सड़कें तथा दो जल विद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गयी हैं। शिमला के पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने ‘ बताया कि शिमला में रामपुर उपमंडल के समाघ खुद (नाला) में बादल फटने से दो लोगों की मौत हो गयी तथा 28 अन्य लापता हो गए हैं। दो लोगों को घटनास्थल से बचाया गया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि बादल फटने की घटना देर रात करीब एक बजे हुई।उन्होंने बताया कि सड़कों के बह जाने के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया है।राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि राज्य में भारी बारिश और बादल फटने के कारण व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बाधित हुआ है। वाहनों के गुजरने के लिए बनाए चार पुल और पैदल पुल बह गए हैं, बचाव अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सेब की फसल भी बर्बाद हो गयी है।घटनास्थल पर मौजूदा उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, पुलिस और होम गार्ड ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है और लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।मंडी जिले के पधर में थालटूखोद इलाके में बादल फटने की एक अन्य घटना में बुधवार रात को एक व्यक्ति की मौत हो गयी तथा नौ अन्य लापता हो गए।कुछ मकान ढह गए हैं और सड़क संपर्क बाधित हो गया है। मंडी जिला प्रशासन ने भारतीय वायु सेना और एनडीआरएफ से मदद मांगी है।ब्यास नदी के उफान पर होने के कारण चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। कुल्लू के भागीपुल में भी मकानों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें आ रही हैं और पार्वती नदी तथा मलाना खुद में बाढ़ के कारण कुल्लू के भुंटार इलाके में भी अलर्ट जारी किया गया है।मनाली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण टूट या है और ब्यास नदी का पानी मंडी के पंडोह में कुछ घरों में घुस गया है।कुछ लोगों के लापता होने तथा इलाके में मकानों तथा दुकानों के ढह जाने की भी सूचना है।अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है और प्राधिकारियों का पूरा ध्यान बचाव एवं राहत अभियानों पर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बादल फटने के बाद सचिवालय में एक आपात बैठक बुलायी है।
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नयी दिल्ली. देश में ‘तरंग शक्ति' नामक सबसे बड़ा बहुपक्षीय हवाई अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जाएगा, जो भारत के सैन्य दमखम प्रदर्शित करेगा तथा उसमें भाग ले रही वायु सेनाओं को आपस में मिलकर काम करने व अभियान चलाने का मंच उपलब्ध करेगा। वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘तरंग शक्ति' का पहल चरण 6-14 अगस्त तक तमिलनाडु के सुलूर में आयोजित किया जाएगा, जबकि दूसरा चरण 29 अगस्त से 14 सितंबर तक राजस्थान के जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 51 देशों को इसमें हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया था और उनमें से करीब 30 उसमें हिस्सा लेंगे। अधिकारी ने बताया कि वायुसेना के एलसीए तेजस, मिराज 2000, राफेल लड़ाकू विमान ‘तरंग शक्ति' अभ्यास में हिस्सा लेंगे। वायुसेना के उपप्रमुख (वायस चीफ ऑफ एयर स्टाफ) एयर मार्शल ए पी सिंह ने वायुसेना के एक अधिकारी द्वारा कंप्यूटर के जरिये प्रस्तुति दिये जाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि यह अभ्यास भारत के सैन्य दमखम को प्रदर्शित करेगा और रक्षा क्षेत्र में उसे ‘आत्मनिर्भरता' की ओर ले जाएगा। अधिकारी ने बताया कि फ्रांस के राफेल, जर्मनी के टाइफून, ऑस्ट्रेलिया के एफ-18 विमान आदि अभ्यास ‘तरंग शक्ति' में हिस्सा लेंगे।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में बारिश से जुड़ी घटनाओं समेत विभिन्न आपदाओं में 15 लोगों की मौत हो गई। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। राहत आयुक्त ने बुधवार को यहां बताया कि मंगलवार शाम छह बजे से बुधवार को इसी अवधि तक 15 लोगों की मौत हो गयी, जिसमें चंदौली में चार, बांदा और गौतमबुद्ध नगर में तीन-तीन, प्रयागराज में दो, प्रतापगढ़, गोंडा और इटावा में एक-एक व्यक्ति हुई। राहत आयुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश से जुड़ी घटनाओं जैसे बिजली गिरने, डूबने और सांप काटने की वजह से यह मौतें हुईं। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, बदायूं के कछला पुल पर गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
रिपोर्ट में बताया गया कि फिलहाल राज्य में केवल सात जिले (कुल 75 में से) अयोध्या, बलिया, लखीमपुर खीरी, फर्रुखाबाद, सीतापुर, बहराइच और हरदोई बाढ़ प्रभावित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य जारी है। -
नयी दिल्ली. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने बुधवार को कहा कि उसने परिवीक्षाधीन आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है और भविष्य में किसी भी परीक्षा में उनके शामिल होने पर रोक लगा दी है। आयोग ने एक बयान में कहा, ‘‘यूपीएससी ने उपलब्ध रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच-पड़ताल की है और उन्हें सीएसई-2022 नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया है।'' इसमें कहा गया है कि सीएसई-2022 (सिविल सेवा परीक्षा-2022) के लिए उनकी अनंतिम उम्मीदवारी ‘‘रद्द'' कर दी गई है और भविष्य में किसी भी परीक्षा में उनके शामिल होने या चयन पर ‘‘स्थायी रूप से रोक'' लगा दी गई है। आयोग ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में खेडकर का यह “एकमात्र मामला” है, जिसमें वह यह पता नहीं लगा सका कि खेडकर ने एक अभ्यर्थी के लिए सीएसई परीक्षा में बैठने के लिए निर्धारित प्रयासों से ज्यादा बार परीक्षा दी, क्योंकि “उसने न सिर्फ अपना नाम बदला, बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी बदल दिए।” इसमें कहा गया है कि यूपीएससी एसओपी को और मजबूत करने की प्रक्रिया में है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह के मामले की पुनरावृत्ति न हो। आयोग ने कहा कि पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर को अपनी पहचान ‘फर्जी' बताकर परीक्षा के लिए स्वीकृत सीमा से अधिक अवसर ‘धोखाधड़ी' से प्राप्त करने को लेकर 18 जुलाई को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किया गया था। बयान में कहा गया है कि उसे 25 जुलाई तक एससीएन पर अपना जवाब देना था, लेकिन उसने अपना जवाब देने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने के वास्ते चार अगस्त तक का समय मांगा। आयोग ने कहा कि यूपीएससी ने उसे 30 जुलाई को अपराह्न साढ़े तीन बजे तक अपना जवाब देने के लिए ‘अंतिम मौका'' दिया था, लेकिन वह ‘‘निर्धारित समय के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने में विफल रहीं।'' आयोग ने कहा कि खेडकर के मामले की पृष्ठभूमि में, उसने पिछले 15 वर्षों (2009-2023) के दौरान सिविल सेवा परीक्षाओं में शामिल हुए 15,000 से अधिक अंतिम उम्मीदवारों को लेकर इस बात की ‘गहन जांच' की कि उन्होंने कितनी बार प्रयास किया था। इस विस्तृत कवायद के बाद, खेडकर के मामले को छोड़कर, किसी भी अन्य अभ्यर्थी ने सीएसई नियमों के तहत निर्धारित प्रयासों की संख्या को पार नहीं किया। बयान के मुताबिक, खेडकर के मामले में यूपीएससी की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) यह पता नहीं लगा सकी कि उसने परीक्षा में बैठने के प्रयासों की निर्धारित संख्या को पार कर लिया है। इसका मुख्य कारण यह था कि उसने न सिर्फ अपना नाम बदला बल्कि अपने माता-पिता के नाम भी नाम बदल दिए। झूठे प्रमाण पत्र (विशेष रूप से ओबीसी और पीडब्ल्यूबीडी श्रेणियों के लिए) प्रस्तुत करने के संबंध में शिकायतों के मुद्दे को उठाते हुए यूपीएससी ने कहा कि आयोग सिर्फ प्रमाण पत्रों की “प्रारंभिक” जांच करता है जैसे कि क्या प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया है, प्रमाण पत्र किस वर्ष से संबंधित है, प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि क्या है, क्या प्रमाण पत्र पर कोई ‘ओवरराइटिंग' है और प्रमाण पत्र का प्रारूप आदि। बयान के मुताबिक, “आम तौर पर, अगर प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया होता है, तो उसे वास्तविक मान लिया जाता है। यूपीएससी के पास न तो अधिकार है और न ही हर साल उम्मीदवारों द्वारा जमा किए जाने वाले हजारों प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच करने का साधन है।” यूपीएससी ने कहा कि यह माना जाता है कि प्रमाण पत्रों की वास्तविकता की जांच और सत्यापन उन अधिकारियों द्वारा किया जाता है, जिनके पास यह काम करने का अधिकार है। यूपीएससी ने खेडकर के खिलाफ इस आरोप में पुलिस में मामला दर्ज कराया है कि उसने अपनी फर्जी पहचान बताकर सिविल सेवा परीक्षा में निर्धारित प्रयासों से अधिक बार परीक्षा देकर धोखाधड़ी की है।
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वायनाड . केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 167 हो गई है और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। बचाव दल ने तलाशी अभियान के दूसरे दिन मलबे में फंसे लोगों को खोजने के प्रयास तेज कर दिए हैं। वायनाड जिला प्रशासन ने इस आपदा में 167 लोगों की मौत होने की पुष्टि की। जिला प्रशासन ने कहा कि 167 मृतकों में 22 बच्चे भी शामिल हैं। इसने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 219 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनमें से 78 का इलाज अभी भी जारी है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन कहा, ‘‘वायनाड में बचाव अभियान जारी है। हमने अपनी धरती पर पहले कभी ऐसे भयानक दृश्य नहीं देखे हैं।'' इससे पहले, विजयन ने तिरुवंनतपुरम में संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि वायनाड जिले के भूस्खलन प्रभावित इलाकों से 144 शव बरामद किए गए हैं जिनमें 79 पुरुष और 64 महिलाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री विजयन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। विजयन ने कहा कि जिले के मुंडक्कई और चूरलमाला इलाकों में दृश्य भयानक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ये दोनों इलाके पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।'' उन्होंने कहा कि आपदा क्षेत्र से अधिक से अधिक लोगों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘दो दिन के बचाव अभियान में 1,592 लोगों को बचाया गया। समन्वित और व्यापक प्रयासों के तहत इतने कम समय में अधिक से अधिक लोगों को बचाया जा सका है।'' विजयन ने बताया कि पहले चरण में आपदा के निकटवर्ती क्षेत्रों के 68 परिवारों के 206 लोगों को तीन शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इनमें 75 पुरुष, 88 महिलाएं और 43 बच्चे शामिल हैं।
भूस्खलन के बाद जारी बचाव अभियान के परिणामस्वरूप फंसे हुए 1,386 लोगों और अपने घरों में फंसे लोगों को बचाया गया। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बच्चों और गर्भवती महिलाओं समेत 8,017 लोगों को जिले में 82 शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मेप्पडी में आठ शिविर हैं, जहां फिलहाल 421 परिवारों के 1,486 लोग रह रहे हैं।'' इस बीच थलसेना, नौसेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचाव दल मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। रक्षा विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, क्षेत्र में तैनात सेना की टुकड़ियों ने मंगलवार रात तक प्रभावित क्षेत्रों से लगभग एक हजार लोगों को बचाया। इसके अलावा, वायुसेना तलाशी और बचाव कार्यों में समन्वय के लिए प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर रही है। सेना के जवान, एनडीआरएफ, राज्य आपात सेवा के जवान और स्थानीय लोगों समेत बचावकर्मी, कई इलाकों में बारिश जारी रहने के बावजूद इस कठिन अभियान को अंजाम देने के लिए सभी बाधाओं से जूझ रहे हैं। भूस्खलन की घटनाएं मंगलवार को तड़के हुईं, जिससे अपने घरों में सो रहे लोगों को जान बचाने का मौका तक नहीं मिल सका। बुधवार सुबह भूस्खलन से तबाह मुंडक्कई गांव में बचाव अभियान फिर से शुरू होने पर जमींदोज हुए मकानों के अंदर बैठे और लेटी हुई अवस्था में शवों के भयावह दृश्य देखने को मिले। कुछ स्थानों पर बचावकर्मियों ने लोगों को सुरक्षित ढंग से निकालने के लिए रस्सियों का उपयोग करके पुल बनाए। जोखिम भरे इलाकों में लोगों को लकड़ी के प्लेटफार्म पर बैठाकर उफान पर आई नदी के पार पहुंचाया गया। केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बचाव प्रयासों के लिए राज्य को हरसंभव सहायता देने का वादा किया है। कुरियन ने वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित लोगों से मुलाकात की।
बुधवार को यहां एक प्रेस विज्ञप्ति में कुरियन के हवाले से कहा गया, ‘‘केंद्र सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। प्रधानमंत्री स्थिति पर नजर रख रहे हैं और उन्होंने मुझे प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए भेजा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्रालय के दोनों नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर रख रहे हैं और राज्य को हरसंभव सहायता मुहैया करा रहे हैं।'' मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि सेना वायनाड के चूरलमाला में बचाव कार्यों के लिए एक बेली पुल का निर्माण करेगी। केरल सरकार ने वायनाड में आपदाग्रस्त इलाकों से बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता मुहैया कराने के लिए चूरलमाला में नियंत्रण कक्ष में ऑक्सीजन से लैस एम्बुलेंस के साथ एक चिकित्सा केंद्र बनाने का फैसला किया है। वायनाड में मंगलवार तड़के मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में मूसलाधार बारिश के बाद बड़े पैमाने पर भूस्खलन की घटनाएं हुई थीं।







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