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- -जब भी कोई संदेह हो तो भारतीय संविधान का अध्ययन करना चाहिए : उपराष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति ने युवाओं को अपने विचार व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया की शक्ति का लाभ उठाने की सलाह दी-भारत एक निष्क्रिय महाशक्ति नहीं है, बल्कि एक ऐसा देश है जो लगातार आगे बढ़ रहा है: उपराष्ट्रपतिनई दिल्ली। उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ ने आज मौजूदा सरकार के तीसरे कार्यकाल के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया, जो पिछले छह दशकों में अभूतपूर्व है। उन्होंने इस तरह की उपलब्धि की दुर्लभता पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने आगे कहा, "1962 के बाद यह पहली बार है कि किसी प्रधानमंत्री को तीसरा कार्यकाल मिला है।"श्री धनखड़ ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति आवास में राज्य सभा इंटर्नशिप कार्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं से अनुरोध किया कि वे अपने विचार व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया की शक्ति का उपयोग करें और लोकतंत्र में हानिकारक प्रवृत्तियों को लेकर सावधान रहें। उपराष्ट्रपति ने सकारात्मक विकास के लिए संसद में रचनात्मक बहस, संवाद और चर्चा की भूमिका पर जोर दिया। इसके अलावा श्री धनखड़ ने प्रशिक्षुओं से अनुरोध किया कि अगर वे इन सिद्धांतों से कोई विचलन देखते हैं, तो वे जनता की राय जुटाएं।उन्होंने आगे आह्वान किया कि भारत एक निष्क्रिय महाशक्ति नहीं है, बल्कि एक गतिशील देश है जो हर दिन और हर क्षण आगे बढ़ रहा है। उपराष्ट्रपति ने स्पष्टता के लिए भारतीय संविधान का अध्ययन करने के महत्व पर जोर दिया। श्री धनखड़ ने प्रशिक्षुओं को सलाह दी कि जब भी कोई संदेह हो तो वे भारतीय संविधान को पढ़ें।उपराष्ट्रपति ने इंटर्नशिप कार्यक्रम को एक ऐसा "संसदीय स्टार्टअप" बताया, जो देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ने के लिए एक नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करेगा। श्री धनखड़ ने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे नागरिक इसमें अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा ले सकते हैं और संसद सदस्य बने बिना भी याचिकाओं के माध्यम से सार्वजनिक मुद्दों को उठा सकते हैं।इस अवसर पर डॉ. सुदेश धनखड़, राज्य सभा के उपसभापति श्री हरिवंश, राज्य सभा के महासचिव श्री पीसी मोदी, उपराष्ट्रपति के सचिव श्री सुनील कुमार गुप्ता, राज्य सभा के सचिव श्री राजित पुनहानी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन में होने वाला चेंज ऑफ गार्ड समारोह आज और इस महीने की 15 तथा 22 तारीख को आयोजित नहीं होगा। राष्ट्रपति सचिवालय ने बताया कि यह निर्णय राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होने वाले प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह तथा दोनों सदनों में राष्ट्रपति के संबोधन की तैयारियों के कारण लिया गया है।
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नई दिल्ली। ईनाडु ग्रुप के संस्थापक और मीडिया की जानी-मानी हस्ती रामोजी राव का आज सुबह हैदराबाद में निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। श्री राव को तबियत बिगड़ने के कारण इस महीने की पांच तारीख को नानक रामगुड्डा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आज सुबह उनका देहांत हो गया। श्री राव पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे।
उनके पार्थिव शरीर को रामोजी फिल्म सिटी में उनके आवास पर रखा गया है, जहां उन्हें परिजनों और प्रशंसक श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। रामोजी राव ईनाडु ग्रुप, मार्गदर्शी चिटफंड, रामोजी फिल्म सिटी और प्रिया फूड्स सहित अनेक कारोबारों का प्रबंधन करते थे। एक समय में तेलुगु भाषी क्षेत्रों में उनके नेतृत्व में ईनाडू प्रमुख मीडिया समूह था और राजनीति में वह काफी प्रभावशाली थे। - नई दिल्ली। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए नई दिल्ली रवाना हो गई हैं। वे कल शाम राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित भोज में भी शामिल होंगी। श्री मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए टेलीफोन पर निमंत्रण दिया था। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सर्वप्रथम श्री मोदी को बधाई दी थी, जो दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल को दर्शाता है।
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नई दिल्ली। रामोजी फिल्म सिटी के संस्थापक रामोजी राव का आज सुबह (8 जून) निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे और कई दिनों से बिमार चल रहे थे। हैदराबाद के स्टार अस्पताल में इलाज के दौरान रामोजी राव ने सुबह 3:45 बजे अंतिम सांस ली। रामोजी राव को 5 जून को हैदराबाद के स्टार हॉस्पिटल भर्ती कराया गया था। उनकों ह्रदय संबंधी समस्याएं थी, सांस लेने में भी दिक्कत होती थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोमोजी राव का पर्थिव शरीर को Ramoji Film City स्थित उनके आवास पर ले जाया जाएगा, जहां उनका परिवार, मित्र और करीबी लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मौजूद रहेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोकप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामोजी राव के निधन पर शोक जताया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “रामोजी राव के निधन से बहुत दुखी हूं। वह एक दूरदर्शी व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय मीडिया में क्रांति लाई। उनके योगदान ने पत्रकारिता और फिल्मी दुनिया पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके अथक प्रयासों की वजह से उन्होंने मीडिया और इंटरटेनमेंट वर्ल्ड में इनोवेशन और एक्सीलेंस को लेकर नए मानक तय किए। -
नयी दिल्ली. जानेमाने हिन्दी रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल की कविताओं के अंग्रेजी अनुवाद का बृहस्पतिवार को विमोचन किया गया। किताब के प्रकाशक वेस्टलैंड बुक्स ने इसकी घोषणा की। इन कविताओं का अनुवाद प्रसिद्ध कवि-संपादक अरविंद कृष्ण मेहरोत्रा ने किया है। इस कविता संग्रह को "ट्रेजरर ऑफ पिग्गी बैंक्स" नाम दिया गया है। इस किताब में उनकी पुरानी कविताओं (लगभग जयहिंद, 1971) से लेकर हालिया रचनाओं को शामिल किया गया है।
अपनी विशिष्ट शैली और भावनात्मक रचनाओं के लिए मशहूर शुक्ल को 2023 में अंतरराष्ट्रीय साहित्य में उनकी उपलब्धि के लिए पेन/नाबोकोव पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें 1999 में "दीवार में एक खिड़की रहती थी" कृति के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी अन्य चर्चित कृतियों में "नौकर की कमीज" (1979) और कविता संग्रह "सब कुछ होना बचा रहेगा" (1992) शामिल हैं। इस किताब की कीमत 340 रुपये है और यह बुकस्टोर के साथ ऑनलाइन भी उपलब्ध है। -
नई दिल्ली। नवनिर्वाचित सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत को चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल -सीआईएसएफ की एक अधिकारी ने कथित तौर पर थप्पड़ मारा। कथित तौर पर यह घटना इसलिए हुई क्योंकि उन पर “किसानों का अपमान करने” का आरोप लगाया गया था। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के मंडी से लोकसभा चुनाव जीतने वाली कंगना रनौत दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली थीं, जब यह घटना हुई।
सीआईएसएफ में कांस्टेबल कुलविंदर कौर की पहचान नई सांसद (सांसद) रनौत को थप्पड़ मारने वाले व्यक्ति के रूप में की गई है। कथित तौर पर कुलविंदर कौर ने रनौत को थप्पड़ मारने के बाद उनसे कहा कि यह “किसानों का अपमान करने” के लिए था। खबर के मुताबिक, घटना की आगे की जांच के लिए सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है। जांच के हिसाब से ही आगे तय किया जाएगा कि इस मामले में क्या फैसला होता है। कंगना मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गई हैं। -
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के महत्वपूर्ण घटक दल जनता दल (युनाइटेड) ने केंद्र में सरकार गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से की जा रही कवायदों के बीच सेना में भर्ती की ‘अग्निपथ’ योजना की समीक्षा किए जाने की मांग उठाई है।
जद (यू) के वरिष्ठ नेता के सी त्यागी ने यहां संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘अग्निपथ योजना को लेकर मतदाताओं के एक हिस्से में नाराजगी रही है। हमारी पार्टी चाहती है कि विस्तार से उन कमियों और खामियों को दूर किया जाए जिसको लेकर जनता ने सवाल उठाए हैं।’’केंद्र सरकार ने साल 2022 में 14 जून को सेना में जवानों की भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की थी। कांग्रेस और कई विपक्षी दलों ने इस योजना का विरोध किया था। कुछ राज्यों में इसके विरोध में प्रदर्शन भी हुए थे।कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन ने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में अग्निपथ योजना को बड़ा मुद्दा बनाया था और कहा कि यदि वह सत्ता में आते हैं तो इसे रद्द कर देंगे। विपक्षी दलों के भारी विरोध के बावजूद भाजपा और उसके नेता इस योजना का बचाव करते रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा चुनाव के दौरान एक साक्षात्कार में कहा था कि युवाओं के लिए ‘अग्निपथ’ से अधिक आकर्षक कोई योजना हो ही नहीं सकती, क्योंकि यह चार साल के बाद सेवानिवृत्त होने वाले ‘अग्निवीरों’ के लिए सशस्त्र बलों में पूर्णकालिक सरकारी नौकरी की गारंटी देती है।शाह ने कहा था कि उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तरस आता है, जिन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन के सत्ता में आने पर इस अल्पकालिक भर्ती योजना को खत्म करने का वादा किया है।शाह ने दावा किया कि चार साल के कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त होने वालों के लिए नौकरी के अवसर उनकी संख्या से साढ़े सात गुना अधिक होंगे, क्योंकि उनके लिए विभिन्न राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में आरक्षण की व्यवस्था की गई है।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश के राजनीतिक सलाहकार और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता त्यागी ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ नहीं है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्ता में आने पर UCC लागू करने का वादा किया है।त्यागी ने कहा, ‘‘UCC पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री (नीतीश कुमार) विधि आयोग के अध्यक्ष को चिट्ठी लिख चुके हैं। हम इसके विरुद्ध नहीं हैं। लेकिन जितने भी हितधारक हैं, चाहे मुख्यमंत्री हों, विभिन्न राजनीतिक दल हों या समुदाय हों, सबसे बात करके ही इसका हल निकाला जाना चाहिए। जाति आधारित जनगणना के सवाल पर जद(यू) नेता ने कहा कि देश में किसी भी पार्टी ने इसके विरोध में नहीं कहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में बिहार ने रास्ता दिखाया है। प्रधानमंत्री ने भी सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में इसका विरोध नहीं किया। जाति आधारित जनगणना समय की मांग है। हम इसे आगे बढ़ाएंगे।’’एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जद (यू) ने राजग को बिना शर्त समर्थन दिया है लेकिन बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की मांग ‘हमारे दिल’ में है। जद (यू) के वरिष्ठ नेता का ये बयान बुधवार को राजग की बैठक के एक दिन बाद आया है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस बैठक में सर्वसम्मति से राजग का नेता चुना गया था। राजग ने लोकसभा चुनाव में 293 सीटें जीती हैं जो 543 सदस्यीय सदन में बहुमत के 272 के आंकड़े से अधिक हैं। इससे मोदी के लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने का मार्ग प्रशस्त हुआ।संख्या के लिहाज से चंद्रबाबू नायडू नीत तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के बाद जद (यू) राजग का तीसरा सबसे बड़ा घटक है। तेदेपा ने इस चुनाव में 16 जबकि जबकि जद (यू) ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की है। -
नई दिल्ली। इंडिया गठबंधन के नेताओं के बीच आज नई दिल्ली में बैठकों का दौर जारी रहा। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी और पार्टी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की।
आम आदमी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के साथ बैठक की। कल नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन नेताओं के कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर पहली बैठक आयोजित हुई थी। -
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार को पानी की कमी से जूझ रही दिल्ली के लिए 137 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की अवकाश पीठ से कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है और वह अपने पास उपलब्ध अतिरिक्त पानी छोड़ने को तैयार है। शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार को हिमाचल प्रदेश द्वारा छोड़े गए अतिरिक्त पानी के प्रवाह को सुचारू बनाने का निर्देश दिया ताकि यह राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंच सके। अदालत ने दिल्ली सरकार को पानी बर्बाद न करने की सलाह दी। आदेश में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश को 137 क्यूसेक अतिरिक्त पानी हरियाणा को पूर्व सूचना देकर कल छोड़ देना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक्सिको की पहली महिला राष्ट्रपति चुनी गईं क्लाउडिया शीनबाम को बधाई दी है। श्री मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह मेक्सिको के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होने के साथ-साथ राष्ट्रपति आंद्रेस मैनुअल के महान नेतृत्व का भी सम्मान है। श्री मोदी ने दोनों देशों के बीच निरंतर सहयोग और साझा प्रगति की आशा भी व्यक्त की।
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नयी दिल्ली. भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा के सभी 543 निर्वाचन क्षेत्र के लिए अंतिम परिणाम जारी कर दिये, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 240 और कांग्रेस को 99 सीट पर विजयी घोषित किया गया है। अंतिम परिणाम महाराष्ट्र के बीड निर्वाचन क्षेत्र का घोषित किया गया। इस सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार बजरंग मनोहर सोनवणे ने भाजपा की पंकजा मुंडे को 6,553 मतों से हराया। लोकसभा में 543 सदस्य हैं, लेकिन सूरत से भाजपा उम्मीदवार मुकेश दलाल के निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद 542 सीट के लिए मतगणना हुई। बुधवार को जारी किए गए अंतिम परिणाम के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रहे हैं। हालांकि, तीन हिन्दी भाषी राज्यों में भाजपा को बड़ी संख्या सीटों का नुकसान हुआ है।
भाजपा के उम्मीदवारों ने इस बार भी मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी 240 सीट जीत पाई जो कि बहुमत के लिए 272 सीट के आंकड़े से कम है। ऐसे में भाजपा को सरकार बनाने के लिए राजग में सहयोगी दलों के समर्थन की जरूरत है। वर्ष 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने 303 और वर्ष 2014 के चुनावों में 282 सीट जीती थीं। राजग में प्रमुख सहयोगी एन चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने आंध्र प्रदेश में 16 और नीतीश कुमार की जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) ने बिहार में 12 सीट पर जीत हासिल की है। ऐसे में उपरोक्त दोनों और अन्य सहयोगियों के समर्थन से राजग ने बहुमत का आंकड़ा तो पार कर लिया है। विपक्षी दलों के समूह ‘इंडिया' में शामिल कांग्रेस ने वर्ष 2019 की 52 सीट की तुलना में 99 पर जीत दर्ज की है। राजस्थान और हरियाणा में कांग्रेस के पहले से बेहतर प्रदर्शन के कारण इन राज्यों में भाजपा को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश में 37 सीट जीतकर ‘इंडिया' को मजबूत स्थिति में ला दिया है, जबकि विपक्षी गठबंधन के एक अन्य प्रमुख घटक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल में 29 सीट जीती हैं, जो वर्ष 2019 की 22 सीट की तुलना में अधिक हैं। वहीं, पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य में 18 सीट जीतने वाली भाजपा इस बार 12 पर ही जीत हासिल कर पाई। नतीजों में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को उतनी भारी जीत नहीं मिली जिसकी उसे उम्मीद थी और जैसा कि विभिन्न ‘एग्जिट पोल' में अनुमान व्यक्त किया गया था। सात चरणों में 19 अप्रैल से 1 जून तक हुए चुनाव में 64 करोड़ से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। -
नयी दिल्ली. इस लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने कई नए तो कई पुराने सेलिब्रिटी चेहरों को अपने जनप्रतिनिधि के रूप में पसंद किया है, जिनमें पहली बार सांसद बनने वाले कंगना रनौत और अरुण गोविल से लेकर हेमा मालिनी और मनोज तिवारी तक हैं। देश की 543 लोकसभा सीट के लिए सात चरणों में 19 अप्रैल से एक जून तक हुए चुनाव में फिल्मी दुनिया के कई नामचीन लोग मैदान में थे। हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लंबे समय से समर्थक रनौत ने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र से पहला चुनाव जीता है। उन्होंने छह बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह को हराया है। कई बार अपने बयानों से विवाद में रहीं कंगना ने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद अपना जीवन जन सेवा को समर्पित कर देंगी। सांसद के रूप में वह किस तरह काम करती हैं, इसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। इसी तरह धारावाहिक ‘रामायण' में राम का किरदार निभाकर मशहूर हुए अरुण गोविल को भाजपा ने पहली बार चुनाव में उतारा था। मेरठ लोकसभा सीट से उन्होंने समाजवादी पार्टी की सुनीता वर्मा को 10,585 मतों के अंतर से हराया है। हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी लगातार तीसरी बार मथुरा संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस के मुकेश धनगर को हराया है। भोजपुरी अभिनेता और गायक मनोज तिवारी ने उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से कांग्रेस के कन्हैया कुमार को पराजित किया है। वह भी इस सीट से लगातार तीसरी बार भाजपा सांसद के रूप लोकसभा पहुंचे हैं। दिल्ली में भाजपा ने उन्हें छोड़कर बाकी छह सीट पर उम्मीदवार बदल दिए थे। भोजपुरी सिनेमा जगत के एक और मशहूर कलाकार रवि किशन ने भी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से समाजवादी पार्टी की काजल निषाद को हराकर दूसरी बार लोकसभा में जाने का मौका प्राप्त किया है। केरल में अभिनय से राजनीति में आए भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट पर पहली बार जीत हासिल की है। उन्होंने भाकपा के वी.एस. सुनीलकुमार को हराया है। पश्चिम बंगाल की आसनसोल संसदीय सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के एस.एस. अहलूवालिया को शिकस्त दी है। वह इससे पहले भाजपा और कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया और आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में जीत हासिल की। पूर्व अदाकारा और भाजपा सांसद स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश के अमेठी से कांग्रेस प्रत्याशी किशोरी लाल शर्मा से इस चुनाव में हार गई हैं। सांसद और अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ भी इस बार समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव के सामने जीतने में विफल रहे। अभिनेता और जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश की पिथापुरम विधानसभा सीट पर वाईएसआर कांग्रेस की वी.गंगा को पराजित किया है। बांग्ला फिल्मों में अभिनय करते हुए राजनीति में आईं तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जून मलिया ने मेदिनीपुर निर्वाचन क्षेत्र में कड़े मुकाबले में भाजपा की अग्निमित्रा पॉल को हरा दिया। मलिया मेदिनीपुर से पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्य चुनी गई थीं। बांग्ला फिल्म और टेलीविजन की अभिनेत्री सायनी घोष ने पश्चिम बंगाल की जादवपुर सीट से भाजपा के अनिर्बान गांगुली को हरा दिया है। सायनी को इस बार अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती की जगह टिकट दिया गया था जो 2019 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीती थीं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम में, तृणमूल कांग्रेस की तीन बार की सांसद और अभिनेत्री शताब्दी रॉय ने भाजपा के देबतनु भट्टाचार्य के खिलाफ शानदार जीत हासिल की। राज्य के हुगली और घाटल निर्वाचन क्षेत्रों में लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के सेलिब्रिटी चेहरों के बीच थी। लेकिन दोनों में तृणमूल ने बाजी मारी। हुगली से अभिनेत्री रचना बनर्जी ने भाजपा की उम्मीदवार और अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी के खिलाफ जीत हासिल की। सांसद के रूप में यह रचना बनर्जी का पहला कार्यकाल होगा। तृणमूल कांग्रेस के देव अधिकारी ने साथी अभिनेता और भाजपा के हिरन चटर्जी को हराकर अपने निर्वाचन क्षेत्र घाटल पर कब्जा किया। यह उनका तीसरा कार्यकाल होगा। दशकों से फिल्मी हस्तियों और भारतीय राजनीति का गहरा नाता रहा है। सिनेमा जगत के नरगिस, सुनील दत्त, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन और मुनमुन सेन जैसे चेहरे भी एक समय राजनीति में उतर चुके हैं। ‘रामायण' में सीता का किरदार निभा चुकीं दीपिका चिखलिया, रावण का किरदार अदा करने वाले अरविंद त्रिवेदी और ‘महाभारत' में कृष्ण के रूप में लोकप्रिय हुए नीतीश भारद्वाज भी निचले सदन के सदस्य रह चुके हैं। दक्षिण भारत में भी एन.टी. रामा राव, एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे दिग्गज राजनेता अभिनय की दुनिया से ही सियासत में आए थे। इनके अलावा कमल हासन, विजय, प्रकाश राज, भगवंत मान, परेश रावल, उर्मिला मातोंडकर, गोविंदा और किरण खेर जैसे अभिनय से जुड़े लोग भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
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मुंबई. महाराष्ट्र में भाजपा की हार की जिम्मेदारी लेते हुए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व से उन्हें सरकार के कर्तव्यों से मुक्त करने का अनुरोध करेंगे। फडणवीस ने मुंबई में भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, मैं महाराष्ट्र में भाजपा की हार की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। हम कुछ जगहों पर पिछड़ गए और महाराष्ट्र में खराब प्रदर्शन मेरी गलती है।'' फडणवीस ने कहा, ‘‘अगले विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करने और गलतियों को सुधारने के लिए मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुझे सरकार के कर्तव्यों से मुक्त करने का अनुरोध करता हूं। मैं अपने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करूंगा और उन्हें अपनी अपेक्षाओं के बारे में बताऊंगा।'' उनका यह बयान राज्य में लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के एक दिन बाद आया है।
फडणवीस ने कहा कि वह अपने वरिष्ठ साथियों के साथ चर्चा करेंगे और उनके मार्गदर्शन के अनुसार काम करेंगे। उन्होंने यह माना कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राकांपा नेता तथा उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ समन्वय की कुछ समस्याएं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम जल्द ही इसपर चर्चा करेंगे। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बुधवार को बुद्ध जयंती पार्क में पौधारोपण कर पौधारोपण अभियान की शुरुआत की। अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान का नाम ‘एक पेड़ मां के नाम' रखा गया है और इसके तहत देशभर में लाखों पेड़ लगाए जाएंगे। कार्यक्रम में मोदी के साथ केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना भी शामिल हुए।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल की सलाह पर बुधवार को 17वीं लोकसभा को भंग कर दिया। राष्ट्रपति भवन ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति भवन के अनुसार बुधवार को हुई बैठक में मंत्रिमंडल ने राष्ट्रपति को वर्तमान लोकसभा को तत्काल प्रभाव से भंग करने की सलाह दी थी। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘राष्ट्रपति ने पांच जून, 2024 को मंत्रिमंडल की सलाह को स्वीकार कर लिया है और संविधान के अनुच्छेद 85 के खंड (2) के उप-खंड (बी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 17वीं लोकसभा को भंग करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।'' मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 16 जून को समाप्त होना था।
इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति मुर्मू को सौंप दिया जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया और उनसे नयी सरकार के कार्यभार संभालने तक पद पर बने रहने को कहा। मंगलवार को हुई मतगणना में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बहुमत हासिल कर लिया। राजग को 543 सदस्यीय लोकसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े (272) से अधिक सीटें मिलीं। हालांकि 2014 के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। भाजपा को सरकार बनाने के लिए अब अपने गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रहना होगा। -
मंडी. हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार अभिनेत्री कंगना रनौत ने मंगलवार को कहा कि यह जीत सबकी है और इसका श्रेय मंडी के लोगों तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति उनके विश्वास को जाता है। कंगना ने मंडी लोकसभा सीट पर कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को 74,755 मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल कर ली है। भाजपा के लिए पहली बार चुनाव लड़ रहीं रनौत को एक नेता के रूप में अपने पहले लोकसभा चुनाव में 5,37,022 वोट मिले। चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद कंगना (37) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्हें आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते देखा जा सकता है। कंगना ने कहा, ‘‘इस प्यार और विश्वास के लिए मंडी की सभी जनता का हृदय से आभार... ये जीत आप सबकी है, ये प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर आपके विश्वास की जीत है, ये सनातन की जीत है, मंडी के सम्मान की जीत है।'' कंगना ने विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर, विधायकों, भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता को उन्हें चुनने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। कंगना ने कहा कि लोगों ने पारिवारिक विरासत के खिलाफ और आम जनता के पक्ष में वोट दिया है। उन्होंने कहा कि वह मंडी के लोगों के लिए सच्चे दिल से काम करेंगी।
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पटना. बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार बुधवार को दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक में हिस्सा लेंगे। सूत्रों ने यहां यह जानकारी दी। जदयू ने राज्य की 40 लोकसभा सीट में से 12 पर जीत हासिल की है। कुमार बुधवार सुबह दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
कुमार ने सप्ताहांत में दिल्ली का दौरा किया था और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। भाजपा के बहुमत से दूर रहने के कारण कुमार 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' द्वारा कुमार को अपने पाले में किए जाने की कोशिश की जा रही है। -
अमरावती . आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस अब्दुल नजीर ने मंगलवार को मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और उनसे नयी सरकार के गठन तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया। राज्यपाल के विशेष मुख्य सचिव अनिल कुमार सिंघल ने बताया कि नजीर ने मंगलवार को रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। सिंघल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।'' उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए रेड्डी से नयी सरकार के गठन तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया है। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआर कांग्रेस) की हार के बाद रेड्डी ने राज्यपाल नजीर को अपना इस्तीफा सौंपा। आंध्र प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष तम्मिनेनी सीताराम भी अम्डालावालसा विधानसभा क्षेत्र में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) नेता एवं अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी के. रवि कुमार से चुनाव हार गए। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, तेदेपा ने 124 सीट पर जीत हासिल की और वह 10 सीट पर आगे है। जनसेना ने 20, भाजपा ने छह और वाईएसआर कांग्रेस ने आठ सीट पर जीत हासिल की है।
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अमरावती (आंध्र प्रदेश). तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की शानदार जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दी। आंध्र प्रदेश में तेदेपा ने इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनसेना के साथ मिलकर राजग गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा था। तीनों दलों ने मिलकर निवर्तमान मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को मात देकर जीत दर्ज की है। नायडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर प्रधानमंत्री मोदी को प्रेषित संदेश में कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश की जनता की ओर से मैं आपको लोकसभा और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में राजग की जीत पर बधाई देता हूं। आंध्र प्रदेश की जनता ने हमें शानदार जनादेश का आशीर्वाद दिया है।'' नायडू ने यह संदेश मोदी द्वारा पोस्ट किए गए एक संदेश के जवाब में लिखा। उन्होंने राजग को 'असाधारण जनादेश' देने के लिए आंध्र प्रदेश के लोगों को धन्यवाद दिया। इसके अलावा नायडू ने कहा कि यह जनादेश राजग और राज्य के लिए उसके दृष्टिकोण पर जताए गए विश्वास को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने लोगों के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश का पुनर्निर्माण करेंगे और दोबारा इसका गौरव स्थापित करेंगे।'' निर्वाचन आयोग के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, तेदेपा ने 122 विधानसभा सीट जीत ली है जबकि 12 सीट पर वह आगे चल रही है। वहीं सहयोगी दल जनसेना ने 20 सीट पर जीत दर्ज की है और एक पर बढ़त बनाए हुए है। राज्य में गठबंधन के तीसरे घटक भाजपा ने छह सीट पर जीत दर्ज की है और दो पर आगे चल रही है। इस तरह राजग आंध्र प्रदेश विधानसभा में अब तक 148 सीट पर जीत दर्ज कर चुका है। लोकसभा चुनाव में भी इस गठबंधन का प्रदर्शन शानदार रहा है। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, तेदेपा आठ लोकसभा सीट जीत चुकी है और आठ पर बढ़त बनाए हुए है। भाजपा ने दो सीट जीती हैं और एक पर आगे चल रही है।वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने तीन सीट पर जीत दर्ज की है और एक पर आगे है।जनसेना दो सीटों पर आगे चल रही है। आंध्र प्रदेश में 13 मई को एक ही चरण में 175 सदस्यीय विधानसभा और लोकसभा की 25 सीटों के लिए मतदान हुआ था। -
अमरावती. तीन साल पहले, गुस्से में तमतमाए चंद्रबाबू नायडू राज्य विधानसभा से बाहर निकल आए थे और कसम खाई थी कि वह तभी लौटेंगे जब मुख्यमंत्री बन जाएंगे। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) को प्रचंड बहुमत दिलाकर नायडू मंगलवार को अपनी इस शपथ को पूरा करते दिखे। 2021 में परिवार के सदस्य के खिलाफ टिप्पणी के विरोध में नायडू ने विधानसभा से बहिर्गमन किया था।
मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार तेदेपा 175 सदस्यीय विधानसभा में 122 सीट पर जीत हासिल कर चुकी है और 12 पर आगे है। वहीं, उसकी सहयोगी भाजपा छह सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है जबकि एक पर आगे है और जनसेना पार्टी 20 सीट जीत चुकी है व एक सीट पर आगे चल रही है। निवर्तमान विधानसभा में तेदेपा के 23 सदस्य हैं। पिछले साल सितंबर में नायडू को स्किल डेवलेपमेंट घोटाले में राज्य की सीआईडी ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्होंने खुद को फिर से राजनीतिक रूप से साबित किया है। 9 सितंबर को तड़के गिरफ्तार किये गए नायडू ने लगभग दो महीने राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में बिताए। लोकसभा चुनाव में भी नायडू ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वह 'किंगमेकर' के तौर पर उभरे हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ राजग में भाजपा के बाद तेदेपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और 543 सदस्यीय लोकसभा में भाजपा साधारण बहुमत से दूर दिखाई दे रही है। इसका अर्थ यह है कि सरकार के गठन के लिए भाजपा तेदेपा और जनता दल (यूनाइटेड) पर निर्भर है। निर्वाचन आयोग के रात दस बजे तक के आंकड़ों के अनुसार तेदेपा ने आंध्र प्रदेश की कुल 25 में से आठ सीट पर जीत दर्ज की है और आठ पर वह आगे चल रही है। वहीं उसकी सहयोगी भाजपा ने दो सीट जीत ली है और एक पर वह आगे है। जबकि जनसेना पार्टी दो सीट पर बढ़त बनाए हुए है। आंध्र प्रदेश में अलग अलग समय पर 13 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान कई कीर्तिमान रच चुके नायडू को आईटी क्षेत्र में अपने राज्य को अग्रणी स्थान पर ले जाने का श्रेय दिया जाता है तथा वह राज्य ही नहीं केंद्र की राजनीति के भी कुशल रणनीतिकार रहे हैं। नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे को लेकर मार्च, 2018 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ लिया था, लेकिन वर्ष 2019 के विधानसभा व लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने उन्हें सियासी नेपथ्य में धकेल दिया। ठीक छह साल बाद मार्च, 2024 में नायडू ने राजग में वापसी की और आंध्र प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनसेना के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा। गठबंधन के तहत प्रदेश की कुल 175 विधानसभा सीट में से तेदेपा 144, जनसेना 21 और भाजपा 10 सीट पर चुनाव लड़ी। राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन में होने के बावजूद मुस्लिम आरक्षण जैसे मुद्दे पर नायडू ने अपना अलग रुख रखा और मुस्लिम आरक्षण की पैरवी की। उन्होंने खुलकर कहा, ''हम शुरू से ही मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं और यह जारी रहेगा।'' हालांकि अपने घोषणापत्र में तेदेपा ने इस मुद्दे से दूरी बना ली।
राजग में लौटने के बाद भले ही नायडू प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हर मौके पर सराहना करते दिखे हों, लेकिन पूर्व में उनके साथ रिश्ते सहज नहीं रहे हैं। नायडू ने 2002 में गुजरात दंगे के बाद मोदी का विरोध किया था। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर नायडू के नाम पर कई कीर्तिमान भी हैं। वह आंध्र प्रदेश के सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने कई कार्यकाल में 13 साल 247 दिन तक मुख्यमंत्री का पद संभाला है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के वह ऐसे एकमात्र नेता हैं जिन्होंने अविभाजित और विभाजन (आंध्र से अलग कर तेलंगाना का गठन) के बाद राज्य की बागडोर संभाली। मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान नायडू की छवि एक आर्थिक सुधारक और सूचना प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाले नेता की रही है। उन्होंने हैदराबाद को साइबर सिटी के तौर पर विकसित किया। उन्होंने राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया, जिसमें नई राजधानी अमरावती का निर्माण भी शामिल है। राज्य ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में भी नायडू का खासा दबदबा रहा है। वर्ष 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने संयुक्त मोर्चा का नेतृत्व किया। 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को समर्थन देने से पहले वह संयुक्त मोर्चा के संयोजक थे। नायडू राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के संयोजक भी रहे। एन. चंद्रबाबू नायडू का जन्म 20 अप्रैल 1950 को आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव नारावरिपल्ले में हुआ था। उनके पिता एन खर्जुरा नायडू एक किसान थे और उनकी मां अम्मानम्मा एक गृहिणी थीं। नायडू ने शेषपुरम के स्कूल से प्राथमिक शिक्षा और चंद्रगिरि के सरकारी स्कूल से 10वीं की। इसके बाद तिरुपति से 1972 में श्री वेंकटेश्वर आर्ट्स कॉलेज से स्नातक और वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में परास्नातक किया। उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी भी की है। नायडू का सियासी सफर 1970 के दशक में शुरू हुआ और परास्नातक की पढ़ाई के दौरान वह श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय में छात्र संघ के नेता निर्वाचित हुए। इसके बाद वह युवा कांग्रेस में शामिल हो गए और फिर आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) में चले गए। उन्होंने फिल्म अभिनेता और पार्टी संस्थापक एनटी रामा राव की पुत्री भुवनेश्वरी से विवाह किया। नायडू पहली बार 1978 में आंध्र प्रदेश विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए और मंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 1995 में, वह अपने ससुर एन टी रामा राव के राजनीतिक तख्तापलट के बाद पहली बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। नायडू 1999 में फिर से मुख्यमंत्री चुने गए और 2004 तक पद पर रहे। आंध्र प्रदेश का विभाजन कर तेलंगाना का गठन किये जाने के बाद 2014 में वह तीसरी बार राज्य (आंध्र प्रदेश) के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से करारी हार के बाद तेदेपा सत्ता से बाहर हो गई थी। -
अमरावती. आंध्र प्रदेश में विपक्षी दलों की एकजुटता के साथ सत्ता विरोधी लहर ने सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस को परास्त कर दिया और राज्य में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) विजयी रहा। आंध्र प्रदेश के मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से यह शानदार संदेश दिया कि वे चुनावों में मौजूदा वाईएसआर कांग्रेस सरकार को खारिज करके क्षणिक कल्याण पहल की जगह सतत विकास को प्राथमिकता देते हैं। वाईएसआरसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जनता और पार्टी कैडर के बीच जुड़ाव नहीं था क्योंकि सरकार के कल्याण उपाय प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किए जाते हैं। इस नेता ने कहा कि शराबबंदी और वार्षिक नौकरी कैलेंडर जारी करने जैसे वादों के पूरा न होने से भी संभवत: युवाओं का पार्टी से मोहभंग हुआ। जगन के कल्याण दावों को तेदेपा ने अपनी "सुपर सिक्स" घोषणाओं के साथ प्रभावी ढंग से खारिज किया जिसमें 19 से 59 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक पेंशन, युवाओं के लिए 20 लाख नौकरियां या 3,000 रुपये मासिक बेरोजगारी सहायता और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शामिल है। मौजूदा सरकार को बाहर का रास्ता दिखाने का मतदाताओं का निर्णय अल्पकालिक लाभों पर दीर्घकालिक विकास और प्रगति की प्राथमिकता को रेखांकित करता है, जो राज्य में सकारात्मक परिवर्तन को स्थायी करने के लिए सामूहिक आकांक्षा का संकेत देता है। एक-दो को छोड़कर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सभी निवर्तमान मंत्री सत्ता विरोधी लहर में बह गए। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पार्टी 2019 के विधानसभा चुनाव में 151 सीट जीतकर सत्ता में आई थी, लेकिन इस बार यह केवल 10 सीट पर आगे दिखी। इसने 2019 के लोकसभा चुनाव में 22 सीट जीती थीं, लेकिन इस बार यह केवल चार सीट तक सिमटती दिख रही है। -
भुवनेश्वर. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ओडिशा की 147-सदस्यीय विधानसभा में 74 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने इसकी जानकारी दी। आयोग के अनुसार, विधानसभा चुनाव में मतों की गिनती जारी है और भारतीय जनता पार्टी ने 74 सीट जीत ली हैं जबकि चार निर्वाचन क्षेत्रों में उनके उम्मीदवार बढ़त बनाये हुए हैं। ओडिशा में वर्ष 2000 से सत्तारूढ़ बीजद को विधानसभा में इस बार 50 सीट मिली हैं और एक सीट पर उसका उम्मदवार आगे है। कांग्रेस को इस चुनाव में 14 सीट से संतोष करना पड़ा है। ओडिशा में 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजद ने 113 सीट पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा और कांग्रेस के खाते में क्रमश: 23 एवं नौ सीट गयी थीं।
- नयी दिल्ली। क्रिकेट स्टार कीर्ति आजाद और यूसुफ पठान ने दिग्गजों को हराया जबकि महान फुटबॉलर प्रसून बनर्जी भी जीत दर्ज करने में सफल रहे लेकिन अन्य खिलाड़ियों को हार का सामना करना पड़ा जिससे लोकसभा चुनावों में भारत के खिलाड़ियों के लिए दिन मिला-जुला रहा। भाला फेंक में दो बार के पैरालंपिक चैंपियन देवेंद्र झझारिया और दिग्गज हॉकी खिलाड़ी तथा हॉकी इंडिया के मौजूदा अध्यक्ष दिलीप टिर्की को क्रमश: राजस्थान के चुरू और ओडिशा के सुंदरगढ़ में शिकस्त झेलनी पड़ी। तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए आजाद और पठान देनों ने दिग्गज राजनेताओं को हराकर जीत दर्ज की। तृणमूल के टिकट पर चुनाव लड़ रहे एक अन्य दिग्गज खिलाड़ी पूर्व फुटबॉल कप्तान बनर्जी पश्चिम बंगाल की हावड़ा सीट पर 1.69 लाख मतों से जीत दर्ज करते हुए लगातार तीसरी बार लोकसभा सदस्य बने। कपिल देव की अगुआई में 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे आजाद ने राजनीति में जोरदार वापसी करते हुए पश्चिम बंगाल की बर्धमान-दुर्गापुर सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता दिलीप घोष को हराया। आजाद ने मेदिनीपुर के निवर्तमान सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष घोष को 1,37,981 मतों से हराया। गुजरात के पठान ने पांच बार के कांग्रेस सांसद और लोकसभा के निवर्तमान विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट पर 85 हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज की। यूसुफ जहां पहली बार राजनीति में भाग्य आजमा रहे हैं तो वहीं आजाद को राजनीति का अच्छा खासा अनुभव है और वह पहले भी सांसद रह चुके हैं। पहली बाद दावेदारी पेश कर रहे झझारिया को चुरू लोकसभा सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के राहुल कस्वान के खिलाफ 72,737 वोट से हार का सामना करना पड़ा। टिर्की भी बीजू जनता दल की ओर से सुंदरगढ़ सीट पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम के खिलाफ हार गए।
- जयपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा चुनाव में राजस्थान की 25 में से 14 लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है जबकि विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' 11 सीट पर कब्जा जमाने में सफल रहा। कांग्रेस के खाते में आठ सीट आई हैं।कांग्रेस ने राज्य में दस साल में पहली बार खाता खोला है। इसे पिछले साल विधानसभा चुनाव में हार के बाद उसकी बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के घटक दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) व राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) एक-एक सीट जीतने में सफल रही। वहीं बांसवाड़ा सीट पर भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का उम्मीदवार जीता। कांग्रेस ने इस सीट पर बीएपी का समर्थन किया था। राजस्थान की 25 सीट पर दो चरणों में हुए मतदान का परिणाम मंगलवार को घोषित हुआ। चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों में पांच मौजूदा विधायक (तीन कांग्रेस, एक बीएपी और एक आरएलपी) हैं। भाजपा के उम्मीदवार व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी बाड़मेर सीट से हार गए। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के आम चुनाव में राज्य की सभी 25 संसदीय सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं 2019 में राजग ने सभी सीटें (24 भाजपा और एक आरएलपी) जीतीं थीं। इस बार भाजपा ने सभी 25 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा। वहीं कांग्रेस ने सीकर में माकपा और नागौर में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के साथ गठबंधन किया और बांसवाड़ा सीट पर उसने भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का समर्थन किया। राजस्थान की बागीदौरा विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारत आदिवासी पार्टी ने बाजी मारी। पार्टी उम्मीदवार जयकृष्ण पटेल ने 51,308 मतों से जीत दर्ज की। चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि विपक्षी दलों ने चुनाव के दौरान अप्रासंगिक मुद्दे उठाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की और यह राजग ही था, जिसे सभी का समर्थन, स्नेह और आशीर्वाद मिला। राज्य में भाजपा को एक चुनावी झटका केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी की हार से भी लगा। बाड़मेर सीट पर कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल जीते। चौधरी तीसरे स्थान पर रहे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कोटा सीट से चुनाव जीत गये। केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल लगातार चौथी बार बीकानेर से, गजेन्द्र सिंह शेखावत तीसरी बार जोधपुर से और भूपेन्द्र यादव पहली बार अलवर से चुनाव जीते हैं। राज्यसभा सदस्य यादव को अलवर से उतारा गया था। भाजपा ने भरतपुर सीट कांग्रेस के हाथों गंवा दी। गौरतलब है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृहनगर है। भाजपा के विजयी उम्मीदवारों में जयपुर ग्रामीण से राव राजेंद्र सिंह, जयपुर से मंजू शर्मा, अजमेर से भागीरथ चौधरी, पाली से पीपी चौधरी, जालोर से लुंबाराम, उदयपुर से मन्नालाल रावत, चित्तौड़गढ़ से चंद्रप्रकाश जोशी, राजसमंद से महिमा कुमारी मेवाड़, भीलवाड़ा से दामोदर अग्रवाल तथा झालावाड़ बारां से दुष्यंत सिंह हैं। वहीं कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों में गंगानगर से कुलदीप इंदौरा, चुरू से राहुल कस्वां, झुंझुनू से बृजेंद्र ओला, भरतपुर से संजना जाटव, करौली-धौलपुर से भजनलाल जाटव, दौसा से मुरारी लाल मीणा, टोंक सवाई माधोपुर से हरीश मीणा, बाड़मेर से उम्मेदाराम बेनीवाल हैं। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' के उम्मीदवार अमराराम (माकपा) ने सीकर सीट जीती है। वहीं हनुमान बेनीवाल (आरएलपी) नागौर सीट पर विजयी रहे। बांसवाड़ा सीट पर कांग्रेस समर्थित भारत आदिवासी पार्टी के उम्मीदवार राजकुमार रोत जीत गए हैं।



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