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- नयी दिल्ली| दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में मार्च के अंत तक छह ‘शुष्क दिवस' (ड्राई डे) घोषित किए हैं। इन दिनों पर दिल्ली की 550 से अधिक शराब की दुकानें बंद रहेंगी। दिल्ली सरकार के सोमवार को जारी एक बयान के मुताबिक, गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) को बार और रेस्तरां में भी शराब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। होटल, क्लब और रेस्तरां को तीन राष्ट्रीय अवकाशों- गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती पर शराब परोसने की अनुमति नहीं है। दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार आगामी ‘शुष्क दिवस' गणतंत्र दिवस, गुरु रविदास जयंती (पांच फरवरी), स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती (15 फरवरी), महा शिवरात्रि (18 फरवरी), होली (आठ मार्च) और राम नवमी (30 मार्च) हैं। बयान में कहा गया है कि दिल्ली सरकार हर तीन महीने में ‘शुष्क दिवस' की सूची जारी करती है।पिछले साल एक सितंबर को आबकारी नीति 2021-22 की जगह लेने वाली मौजूदा पुरानी आबकारी व्यवस्था के तहत साल में 21 ‘शुष्क दिवस' हैं। आबकारी नीति 2021-22 के तहत ‘शुष्क दिवस' की संख्या घटाकर केवल तीन कर दी गई थी, जिससे धार्मिक त्योहारों पर शराब की दुकानों के खुलने को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से तीखे हमले किए गए। अक्टूबर 2022 में दिल्ली सरकार ने दशहरा, दिवाली, ईद मिलाद-उन-नबी और वाल्मीकि जयंती को ‘शुष्क दिवस' घोषित किया था। जुलाई 2022 में उपराज्यपाल वी के सक्सेना द्वारा नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की सिफारिश के बाद दिल्ली सरकार ने अपनी आबकारी नीति 2021-22 को वापस ले ली थी। आबकारी नीति 2021-22 17 नवंबर 2021 से 31 अगस्त 2022 तक लागू थी।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को अपने आधिकारिक आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोमवार को एक बयान में यह जानकारी दी। भारत सरकार नवाचार, समाज सेवा, शैक्षिक, खेल, कला एवं संस्कृति और वीरता की छह श्रेणियों में बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान करती है। इसके तहत प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक पदक, एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार और एक प्रमाण-पत्र दिया जाता है। इस वर्ष बाल शक्ति पुरस्कार की विभिन्न श्रेणियों के तहत देश भर से 11 बच्चों को पीएमआरबीपी-2023 के लिए चुना गया है। पुरस्कार पाने वालों में 11 राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के 6 लड़के और 5 लड़कियां शामिल हैं।
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पोर्ट ब्लेयर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को आरोप लगाया कि पहले की सरकारों में ‘‘विकृत वैचारिक राजनीति'' के कारण ‘‘आत्मविश्वास की कमी और हीनभावना'' रही जिसकी वजह से देश के सामर्थ्य को कमतर आंका गया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने ‘‘दुर्गम और अप्रासंगिक'' मानकर हिमालयी, पूर्वोत्तर और द्वीपीय क्षेत्रों की दशकों तक उपेक्षा की तथा उनके विकास को नजरअंदाज किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह के 21 सबसे बड़े द्वीपों का नामकरण परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर करने के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि आजादी के बाद देश के स्वाधीनता आंदोलन के इतने बड़े नायक को भुला देने का प्रयास किया गया। नेताजी की याद में दिल्ली के इंडिया गेट पर उनकी प्रतिमा स्थापित करने, आजाद हिंद सरकार के गठन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लाल किले पर तिरंगा फहराने, उनके जीवन से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने सहित कई अन्य कदमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस को आजादी के बाद भुला देने का प्रयास हुआ, आज देश उन्हें पल-पल याद कर रहा है।'' इस कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप पर बनाए जाने वाले नेताजी राष्ट्रीय स्मारक के प्रतिरूप का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, तीनों रक्षा सेवाओं के प्रमुख, अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल देवेंद्र कुमार जोशी सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे देश की पहले की सरकारों में, खासकर विकृत, वैचारिक राजनीति के कारण दशकों से जो आत्मविश्वास की कमी और हीनभावना रही, उसके कारण देश के सामर्थ्य को हमेशा कमतर आंका गया।'' उन्होंने कहा, ‘‘चाहे हमारे हिमालयी राज्य हों, विशेषकर पूर्वोत्तर के राज्य हों या फिर अंडमान निकोबार जैसे समुद्री द्वीप क्षेत्र.... इन्हें लेकर यह सोच रहती थी कि ये तो दूरदराज के दुर्गम और अप्रासंगिक इलाके हैं। और इसी सोच के कारण ऐसे क्षेत्रों की दशकों तक उपेक्षा हुई। उनके विकास को नजरअंदाज किया गया। अण्डमान निकोबार द्वीप समूह इसका भी साक्षी रहा है।'' प्रधानमंत्री ने सिंगापुर, मालदीव और सेशेल्स का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने संसाधनों के सही इस्तेमाल से ये देश और द्वीपीय क्षेत्र पर्यटन के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं और आज पूरी दुनिया से लोग इन देशों में पर्यटन के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा ही सामर्थ्य भारत के द्वीपों के पास भी है जो दुनिया को बहुत कुछ दे सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन कभी पहले ध्यान ही नहीं दिया गया। हालात तो यह थे कि हमारे यहां कितने द्वीप हैं, कितनी टापू हैं, इसका हिसाब किताब तक नहीं रखा गया।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले लोग अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह के प्राकृतिक सौंदर्य को देखने यहां आते थे लेकिन आज लोग यहां इतिहास को जानने और जीने के लिए भी पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यहां के द्वीप हमारी समृद्ध आदिवासी परंपरा की धरती भी रहे हैं। अपनी विरासत पर गर्व की भावना, इस परंपरा के लिए भी आकर्षण पैदा कर रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े स्मारक और अन्य प्रेरणा स्थल देशवासियों में यहां आने के लिए उत्सुकता पैदा करते हैं। आने वाले समय में यहां पर्यटन के और असीम अवसर पैदा होंगे।'' इस द्वीप समूह में इंटरनेट सेवाओं के विस्तार कार्यों का उल्लेख करते प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत में अण्डमान निकोबार द्वीप समूह ने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी थी, उसी तरह भविष्य में यह क्षेत्र देश के विकास को नई गति देगा। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जो सक्षम होगा, सामर्थ्यवान होगा और आधुनिक विकास की बुलंदियों को छूएगा।'' अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह के सबसे बड़े द्वीप का नामकरण प्रथम परमवीर चक्र विजेता के नाम पर किया गया। इसी प्रकार आकार की दृष्टि से अन्य द्वीपों का नामकरण किया गया। इन द्वीपों का नाम जिन परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया है उनमें मेजर सोमनाथ शर्मा, सूबेदार और मानद कप्तान (तत्कालीन लांस नायक) करम सिंह, एम.एम., सेकंड लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे, नायक जदुनाथ सिंह, कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह, कैप्टन जी.एस. सलारिया, लेफ्टिनेंट कर्नल (तत्कालीन मेजर) धन सिंह थापा, सूबेदार जोगिंदर सिंह, मेजर शैतान सिंह, सीक्यूएमएच. अब्दुल हमीद, लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर, लांस नायक अल्बर्ट एक्का, मेजर होशियार सिंह, सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल, फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों, मेजर रामास्वामी परमेश्वरन, नायब सूबेदार बाना सिंह, कप्तान विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (तत्कालीन राइफलमैन) संजय कुमार और सूबेदार मेजर सेवानिवृत्त (मानद कप्तान) ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव शामिल हैं। मोदी ने कहा, ‘‘इन 21 द्वीपों को अब परमवीर चक्र विजेताओं के नाम से जाना जाएगा। आज के इस दिन को आजादी के अमृत काल के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में आने वाली पीढ़ियां याद करेंगी। हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए ये द्वीप एक चिरंतर प्रेरणा का स्थल बनेंगे।'' उन्होंने कहा कि ये काम देशहित में बहुत पहले हो जाने थे, क्योंकि जिन देशों ने अपने नायक-नायिकाओं को समय रहते जनमानस से जोड़ा वो विकास और राष्ट्र निर्माण की दौड़ में बहुत आगे गए। उन्होंने कहा, ‘‘आज आजादी के अमृत काल में भारत यही काम कर रहा है, जी-जान से कर रहा है।
इस अवसर पर शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे विश्व में किसी भी देश ने अपने देश के लिए लड़ने वाले जवानों के नाम पर अपने द्वीपों का नाम रख कर उनको सम्मानित करने का काम नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज भारत के प्रधानमंत्री की यह पहल जिसके तहत अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के 21 बड़े द्वीपों को हमारे परमवीर चक्र विजेताओं के नाम के साथ जोड़ कर, उनकी स्मृति को जब तक यह पृथ्वी रहेगी तब तक चिरंजीव करने का प्रयास सेना का उत्साह बढ़ाएगा।'' शाह ने अण्डमान स्थित सेल्युलर जेल को आजादी की लड़ाई का एक बहुत बड़ा तीर्थ स्थान बताया और कहा कि देश के इसी हिस्से को सबसे पहले स्वतंत्रता प्राप्त होने का सम्मान मिला। उन्होंने कहा, ‘‘आज 21 द्वीपों को नाम नहीं दिया गया है बल्कि 21 वीरों के पराक्रम को नमन करते हुए 21 दीप जलाने का काम प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है।'' अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह के ऐतिहासिक महत्व और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृति में वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने रॉस द्वीप का नामकरण नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप के तौर पर किया था। इसी प्रकार नील द्वीप का नाम बदलकर शहीद द्वीप और हेवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप किया गया था। -
मुंबई. महाराष्ट्र में कई सुधारवादियों की भूमि रहे कोल्हापुर में एक युवक ने अपनी 45 वर्षीय विधवा मां की जीवनसाथी की आवश्यकता और सामाजिक लांछन से लड़ने के लिए उसकी दूसरी शादी कराई। युवराज शेले (23) ने पांच साल पहले एक सड़क दुर्घटना में अपने पिता को खो दिया था।
शेले ने बताया, “जब मैं महज 18 साल का था, तब अपने पिता को खोना मेरे लिए बड़ा सदमा था। लेकिन मेरे पिता की मौत का सबसे ज्यादा असर मेरी मां पर पड़ा, जिन्हें अकेलेपन से जूझना पड़ा और सामाजिक रूप से खुद को अलग-थलग महसूस करना पड़ा।” शेले ने महसूस किया कि उनके पिता की मौत के बाद उनकी मां को सामाजिक कार्यक्रमों में आमंत्रित किये जाने की संख्या में काफी अंतर आ गया और इसने उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित किया। शेले जब अपने परिवार का गुजारा करने लगा, तब उसे अपनी मां के लिए एक जीवनसाथी की जरूरत का एहसास हुआ क्योंकि वह पड़ोसियों के साथ कम बातचीत करती थी और घर पर अकेली ही रहती थी। शेले ने बताया, “मेरी मां ने मेरे पिता से लगभग 25 साल पहले शादी की थी। अगर कोई आदमी अपनी पत्नी को खो देता है, तो समाज सोचता है कि उसके लिए पुनर्विवाह करना स्वाभाविक है। मुझे आश्चर्य हुआ कि एक महिला पर यही चीज क्यों नहीं लागू होती और मैंने उन्हें पुनर्विवाह के लिए मनाने का फैसला किया।” शेले ने बताया कि पारंपरिक मूल्यों वाले कोल्हापुर जैसे शहर में अपने करीबी रिश्तेदारों और पड़ोसियों को मनाना आसान नहीं था। हालांकि, शेले ने कुछ दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद से अपनी मां के लिए वर ढूंढ़ने का कठिन काम शुरू किया। शेले ने बताया, “सौभाग्य से मारुति घनवत के बारे में हमें कुछ संपर्कों के माध्यम से पता चला। हमने शादी के प्रस्ताव पर चर्चा की और उनके साथ शुरुआती बातचीत के बाद रिश्ता तय हो गया। वह अभी भी मेरे लिए एक विशेष दिन है, क्योंकि मैं अपनी मां के लिए ए नया जीवनसाथी ढूंढ पाया।” घनवत ने बताया, “मैं कुछ सालों से एकाकी जीवन जी रहा था। रत्ना से मिलने और उससे बात करने के बाद मुझे लगा कि मैं इस परिवार के साथ रह सकता हूं और वे सच्चे लोग हैं। रत्ना के लिए पुनर्विवाह एक कठिन निर्णय था, क्योंकि वह अपने पूर्व पति को भूलने के लिए तैयार नहीं थी।” रत्ना ने बताया, “मैंने शुरू में इस पूरी कवायद का विरोध किया था। मैं अपने पति को भूलने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। लेकिन इस मुद्दे पर बात करने के बाद मुझे यकीन हो गया। मैंने खुद से यह भी पूछा कि क्या मैं वास्तव में अपने शेष जीवन के लिए अकेले रहना चाहता हूं,।” रत्ना ने दो हफ्ते पहले शादी की है। -
अहमदाबाद. भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद (आईआईएमए) के नए निदेशक आईआईएम-लखनऊ के प्रोफेसर भरत भास्कर होंगे। संस्थान ने सोमवार को एक मार्च से पांच साल के लिए भास्कर को नियुक्त करने की घोषणा की। वर्तमान निदेशक एरोल डिसूजा का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होगा। अंतरिम तौर पर संचालन मंडल ने प्रोफेसर अरिंदम बनर्जी को एक फरवरी से 28 फरवरी, 2023 तक निदेशक-प्रभारी नियुक्त किया है। नए निदेशक की घोषणा सोमवार को एक बैठक के बाद आईआईएमए संचालन मंडल (बोर्ड ऑफ गवर्नर्स) के अध्यक्ष पंकज पटेल ने की। इस पद के लिए 13 उम्मीदवारों के नामों को छांटा गया था और उनमें से भास्कर का चयन किया गया। पटेल ने कहा, ‘‘अहमदाबाद का भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएमए) एक प्रमुख वैश्विक प्रबंधन संस्थान के रूप में अपनी समृद्ध विरासत के लिए प्रसिद्ध है, जिसे शुरुआत से ही इसके सभी निदेशकों के नेतृत्व और ज्ञान द्वारा आकार दिया गया है, जिसमें प्रोफेसर एरोल डिसूजा भी शामिल हैं। मैं उनके कार्यकाल के दौरान संस्थान और इसके लोगों के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उनका धन्यवाद करना चाहूंगा।'' उन्होंने कहा कि भास्कर को प्रौद्योगिकी के प्रोफेसर के रूप में भारत और दुनियाभर में काम करने का व्यापक अनुभव है। आईआईएमए ने पांच सदस्यीय समिति बनाकर सितंबर में नए निदेशक की तलाश शुरू की थी।
प्रोफेसर भास्कर भारत और विश्व स्तर पर उद्योग, अनुसंधान, शिक्षण और परामर्श में लगभग तीन दशकों के अनुभव के साथ एक अनुभवी सूचना प्रौद्योगिकी अगुवा हैं। उन्होंने मार्च, 2017 से मार्च, 2022 तक आईआईएम रायपुर के निदेशक के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है। -
भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार द्वारा जनता के दर्शन के लिए यहां हवाई अड्डे पर बीजू पटनायक के डकोटा विमान को रखने के प्रयासों के साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेबी ऑस्टिन कार को कटक के ओडिया बाजार में उनके जन्मस्थान ‘जानकीनाथ भवन' में लाने की मांग की जा रही है। महान स्वतंत्रता सेनानी ने 1930 से 1941 तक इस कार का इस्तेमाल किया था और कथित तौर पर कोलकाता से बर्मा तक की यात्रा की थी लेकिन कार का कोई अता पता नहीं है। कटक स्थित नेताजी फाउंडेशन ने सोमवार को दावा किया कि ऐसी मीडिया रिपोर्टें हैं कि वाहन 2014 में धनबाद के बरारी कोक प्लांट में स्थित था। नेताजी फाउंडेशन ने कटक के कलेक्टर भबानी शंकर चयनी को एक ज्ञापन भी भेजा है। फाउंडेशन के संयोजक जिनेश दास और बिकी चक्रवर्ती ने कहा, “ओडिशा सरकार कोलकाता से बीजू बाबू का डकोटा लेकर आई है। वह नेताजी की कार भी वापस ला सकती है तथा इसे उनके जन्मस्थान पर प्रदर्शित कर सकती है। यह हमारे देश के महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि होगी।” राष्ट्रवादी नेता के जन्मदिन 23 जनवरी को देश पराक्रम दिवस के रूप में मनाता है। इस वर्ष आज महान नेता की 126वीं जयंती मनाई गई।
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कोलकाता. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि उनके दक्षिणपंथी संगठन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का समान लक्ष्य भारत को एक महान राष्ट्र बनाना है। आरएसएस और स्वतंत्रता सेनानी की विचारधारा समान नहीं होने को लेकर जारी बहस के बीच भागवत ने यह बयान दिया। भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में नेताजी के योगदान की सराहना करते हुए भागवत ने सभी से बोस के गुणों व शिक्षाओं को आत्मसात करने और देश को ‘‘विश्व गुरु'' बनाने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम नेताजी को केवल इसलिए याद नहीं करते क्योंकि हम स्वतंत्रता संघर्ष में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए उनके आभारी हैं, बल्कि इसलिए भी कि उनके गुणों को आत्मसात करें कि उनका भारत को महान बनाने का सपना अभी पूरा नहीं हुआ है। हमें इसे हासिल करने के लिए काम करना होगा।'' भागवत ने कहा कि स्थिति और रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक ही है।
उन्होंने कहा, सुभाष बाबू (नेताजी) ने कांग्रेस से जुड़े रहने के दौरान ‘सत्याग्रह' तथा ‘आंदोलन' के मार्ग का अनुसरण किया, लेकिन जब उन्हें एहसास हुआ कि यह काफी नहीं है और स्वतंत्रता के लिए लड़ने की जरूरत है तो उन्होंने इस दिशा में कदम उठाया। रास्ते अलग-अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक हैं।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘‘अनुसरण करने के लिए सुभाष बाबू के आदर्श हमारे सामने मौजूद हैं। उनके जो लक्ष्य थे, वही हमारे भी लक्ष्य हैं...।'' उन्होंने कहा कि नेताजी ने कहा था कि भारत को दुनिया के लिए काम करना चाहिए और ‘‘हमें यही लक्ष्य हासिल करने के लिए काम करना है।'' भागवत ने दावा किया कि देश ने बोस और उनके बलिदानों के साथ न्याय नहीं किया। उन्होंने कहा कि नेताजी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने द्वारा चुने गये मार्ग को लेकर आलोचना का सामना किया, लेकिन यह उन्हें उनके पथ से नहीं डिगा सका। उन्होंने कहा कि नेताजी की तरह आरएसएस भी राष्ट्र निर्माण के विचार को बढ़ावा देता है। -
नयी दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने कहा है कि इकाइयों को आधार सत्यापन से पहले संबंधित लोगों को पूरी बातें समझाकर उनसे कागज पर या इलेक्ट्रॉनिक रूप से सहमति लेनी होगी। प्राधिकरण ने ऑनलाइन सत्यापन कार्य से जुड़ी इकाइयों के लिये जारी नये दिशानिर्देश में यह कहा है।
साथ ही उनसे यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि जो आंकड़े लोगों से लिये जाएं, वे उससे अच्छी तरह अवगत हों और साथ ही आधार सत्यापन के उद्देश्य को भी समझें। यूआईडीएआई ने कहा है कि सत्यापन करने वाली इकाइयों के लिये जरूरी है कि वे लोगों को पूरी बात बताकर उनसे आधार सत्यापन को लेकर सहमति लें।
प्राधिकरण के अनुसार जो सहमति ली जाए, उसके दस्तावेज और सत्यापन से जुड़ी चीजें नियमन के तहत निर्धारित सीमा तक ही रखी जाए। यूआईडीएआई ने विज्ञप्ति में कहा, ‘‘और उक्त समयावधि की समाप्ति के बाद जो चीजें हटाने की जरूरत है, उन्हें अधिनियम के अनुसार किया जाए।''
विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘यूआईडीएआई ने यह भी कहा कि सत्यापन करने वाली इकाइयों को लोगों के प्रति विनम्र होना चाहिए और उन्हें संबंधित लोगों को आधार संख्या की सुरक्षा और गोपनीयता के बारे में आश्वस्त करना चाहिए।'' यूआईडीएआई ने इकाइयों से यह भी कहा कि वे आधार संख्या का भंडारण तभी करें जब वे उसके लिये अधिकृत हैं। और अगर उन्हें यह करना है, तो वे निर्धारित नियमों के अनुसार करें। -
नयी दिल्ली। श्री जगन्नाथ यात्रा पर्यटक ट्रेन बुधवार से अपनी आठ दिवसीय यात्रा शुरू करेगी, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों से होकर गुजरेगी। रेलवे ने सोमवार को यह जानकारी दी। ओडिशा के पुरी मंदिर पर केंद्रित पर्यटक ट्रेन रेलवे की महत्वाकांक्षी भारत गौरव पहल के तहत चलाई जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि एसी ट्रेन बुधवार को दिल्ली सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होगी, इस ट्रेन में कुल 10 एसी थ्री-टियर कोच होंगे, जिसमें कुल 600 यात्री बैठ सकते हैं। पर्यटकों को गाजियाबाद, अलीगढ़, टूंडला, इटावा, कानपुर और लखनऊ स्टेशनों पर ट्रेन में चढ़ने का विकल्प होगा। यात्रा का पहला पड़ाव वाराणसी में होगा, जहां पर्यटक काशी विश्वनाथ मंदिर, इसे जोड़ने वाले गलियारे में जाएंगे और गंगा के तट पर होने वाली ‘आरती' देखेंगे।
ट्रेन फिर झारखंड के जसीडीह रेलवे स्टेशन पहुंचेगी जहां से पर्यटक बैद्यनाथ धाम मंदिर के दर्शन के लिए आगे बढ़ेंगे। इसके बाद यह पुरी की यात्रा करेगी जहां होटलों में दो रात ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। ओडिशा में पर्यटक जगन्नाथ मंदिर जाएंगे और फिर उन्हें बसों से कोणार्क में सूर्य मंदिर और भुवनेश्वर में कलिंग काल के दौरान बनाए गए मंदिरों में ले जाया जाएगा। बिहार का गया आखिरी गंतव्य होगा जहां विष्णुपद मंदिर के दर्शन किए जाएंगे। ट्रेन अपने सफर के आठवें दिन एक फरवरी को दिल्ली लौटेगी। -
प्रयागराज। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने सोमवार को यहां कहा कि मठ मंदिर शक्ति, भक्ति और संस्कार का केंद्र रहे हैं तथा इन्हीं केंद्रों को पुनः स्थापित करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
माघ मेला में विश्व हिंदू परिषद के शिविर में सोमवार को अखिल भारतीय धर्माचार्य संपर्क प्रमुख की दो दिवसीय बैठक को संबोधित करते हुए राय ने कहा कि आस्था के इन्हीं केंद्रों को हिंदू समाज के एकत्रीकरण का केंद्र बनाकर समाज के समक्ष खड़ी चुनौतियों से निपटा जा सकता है।
बैठक को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय धर्माचार्य संपर्क प्रमुख जिवेशवर मिश्र ने कहा, “वैदिक सनातन जीवन मूल्यों की रक्षा, मठ मंदिरों के अधिग्रहण को रोकना, समान नागरिक संहिता एवं धर्मांतरण को रोकने के लिए संतों से संपर्क कर हम हिंदू समाज में जागरण का व्यापक अभियान चलाएंगे।” बैठक में अखिल भारतीय संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी और संगठन के केंद्रीय मंत्रियों समेत 100 से अधिक धर्माचार्य से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए। -
नयी दिल्ली। रेलवे दक्षिण भारत में तीन और वंदे भारत ट्रेन शुरू कर सकता है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। नयी सेवाओं के लिए जिन मार्गों पर विचार किया जा रहा है, वे तेलंगाना में काचीगुडा से कर्नाटक में बेंगलुरु और तेलंगाना में सिकंदराबाद से आंध्र प्रदेश में तिरुपति और महाराष्ट्र में पुणे तक हैं।
कर्नाटक और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में होने की संभावना है, जबकि आंध्र प्रदेश में 2024 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने मिशन दक्षिण के तहत 2024 में होने वाले अगले संसदीय चुनाव में दक्षिणी राज्यों में अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। रेलवे ने इस साल नवंबर में चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूर मार्ग पर दक्षिण भारत की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु के क्रांतिवीर संगोली रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस के पांचवें रेक को हरी झंडी दिखाई।
अधिकारियों ने कहा कि हाल में शुरू सिकंदराबाद-विजाग वंदे भारत एक्सप्रेस 100 प्रतिशत यात्री क्षमता के साथ चल रही है। सूत्रों ने कहा कि दक्षिण मध्य रेलवे के रेलवे खंडों को इन गंतव्यों के लिए वंदे भारत ट्रेन के रखरखाव के लिए सिकंदराबाद, हैदराबाद और विजयवाड़ा खंड में कम से कम एक कोचिंग डिपो के बुनियादी ढांचे को अद्यतन करने के लिए कहा गया है।
भारतीय रेलवे की इस साल के अंत तक 75 वंदे भारत ट्रेन चलाने और अगले तीन वर्षों में 400 ट्रेन चलाने की योजना है। अब तक नागपुर-बिलासपुर, दिल्ली-वाराणसी, गांधीनगर-मुंबई और चेन्नई-मैसूर सहित विभिन्न मार्गों पर वंदे भारत ट्रेन शुरू की गई हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस को प्रमुख ‘मेक-इन-इंडिया' पहल के तहत चेन्नई के पेरंबूर में इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है।फाइल फोटो
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नयी दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने सोमवार को भारत और विदेशों में चुनावों में ‘गहरे फर्जी विमर्श' की प्रवृत्ति पर चिंता जताई और कहा कि इसके जरिए ‘विघटनकारी तत्व' जनता की धारणा को बदलने और लोगों को गुमराह करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया मंचों को अपने एल्गोरिद्म पावर (कलन विधि की शक्ति) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का इस्तेमाल कर ‘सक्रियता' से फर्जी विमर्शों का पता लगाना चाहिए, खासकर भारत जैसे देश के अधिकार क्षेत्र में जहां चुनावी चक्र निश्चित और सुस्पष्ट है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यहां चुनाव आयोग द्वारा ‘प्रौद्योगिकी का उपयोग और चुनाव निष्ठा' विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यह टिप्पणी की।
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, कुमार ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मंचों के सर्च रिजल्ट्स में समान अवसर नहीं बनाए जा रहे हैं ताकि कम से कम आधिकारिक तौर पर सत्यापित संस्करणों को नकली सामग्री के समान प्रमुखता के साथ दिखाया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘सीईसी ने प्रवर्तन एजेंसियों की तरह गहराई से फर्जी विमर्शों का पता लगाने की जिम्मेदारी सोशल मीडिया मंचों पर डालने का काम किया है।''
उन्होंने कहा, ‘‘यह कल्पना करना मुश्किल है कि अगर प्रवर्तन एजेंसियां कहती हैं कि वे तब तक कार्रवाई नहीं करेंगे जब तक कि उन्हें अपराध की सूचना नहीं दी जाती है और खुफिया रोकथाम उनकी जिम्मेदारी नहीं है। अपने संबोधन के दौरान कुमार ने कुछ प्रमुख सवाल भी उठाए, मसलन स्पष्ट और प्रणाली का पता लगाने योग्य नकली सामग्री की पहचान करना और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपलोड और प्रसारित होने से रोकना किसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन प्रौद्योगिकी को बदनाम करने की ‘प्रवृत्ति' का भी जिक्र किया। सोशल मीडिया पर प्रसारित अपने हवाले से प्रसारित की जा रही ।
यह दो दिवसीय सम्मेलन निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित किए जाने वाले तीन सम्मेलनों की श्रृंखला में दूसरा है। अंगोला, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, चिली, क्रोएशिया, डोमिनिका, फिजी, जॉर्जिया, इंडोनेशिया, किरिबाती, मॉरीशस, नेपाल, पैराग्वे, पेरू, फिलीपींस और सूरीनाम सहित 17 देशों से लगभग 43 प्रतिभागियों तथा आईएफईएस, अंतरराष्ट्रीय आईडीईए जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन इस सम्मेलन में शामिल हैं। -
शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सड़क यातायात उल्लंघन के लिए काटे गए चालान ने एक निवारक के रूप में काम किया है, जिसकी वजह से पिछले पांच वर्षों में शिमला जिले में सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौते में 30 प्रतिशत से भी अधिक की कमी देखी गई है। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में शिमला में 354 सड़क हादसों में कुल 167 लोग मारे गए, जबकि 2018 में कुल 526 दुर्घटनाओं में 245 लोगों की जान गई थी। पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच काटे गए चालानों की संख्या में 30.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। शिमला की पुलिस अधीक्षक मोनिका भुटुंगरू ने कहा कि चालान काटने के अलावा दुर्घटनाओं के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से प्रभावी निगरानी, बेहतर यातायात प्रबंधन और सख्त कानूनी कदम उठाए जाने के कारण सड़क हादसों की संख्या में कमी आई है।
उन्होंने आगे कहा, “सड़क हादसों में कमी लाने के लिए हमने नशे की हालत में गाड़ी चलाने वालों, तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों, गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने वालों और आदतन यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से चालान काटने पर ध्यान केंद्रित किया। हमने बर्फबारी से प्रभावित इलाकों में सड़क हादसे अधिक होने के कारणों पर भी गौर फरमाया और निवारक उपाय किए।”
अधिकारी के मुताबिक, मोटर वाहन अधिनियम के तहत वर्ष 2022 में सबसे अधिक 1,83,612 चालान काटे गए, जिनमें नशे में गाड़ी चलाने के लिए काटे गए 3,448, गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने के लिए काटे गए 5159 और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के लिए काटे गए 586 चालान शामिल हैं। -
नयी दिल्ली। भारत में लोकप्रिय पयर्टन स्थलों से इतर स्थानों को लेकर पर्यटकों की दिलचस्पी बढ़ी है। पिछले साल तेलंगाना का माधापुर, तमिलनाडु के रामेश्वरम और वैल्लूर, मेघालय का चेरापूंजी और महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवाड़ शीर्ष पसंदीदा पर्यटक स्थल बनकर उभरे हैं।
ऑनलाइन रिहाइश मुहैया कराने वाली कंपनी एयरबीएनबी के सोमवार को जारी आंकड़ों से यह रुझान सामने आया है। इससे पता चलता है कि वर्ष 2022 में अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भी मजबूत पुनरुद्धार हुआ है और यह चलन 2023 में भी जारी रहने की संभावना है। एयरबीएनबी के मुताबिक, भारतीयों ने दुनियाभर के सबसे लोकप्रिय शहरों को खोजा। इसके अलावा एकल यात्रा 2022 की जुलाई-सितंबर तिमाही में सबसे लोकप्रिय रूझान के रूप में सामने आई।
एयरबीएनबी ने कहा कि कम-चर्चित जगहों की यात्राएं करने के रूझान से स्थानीय समुदायों को लाभ मिला और पर्यटन पुनरुद्धार में भी मदद मिली। इसमें कहा गया कि घरेलू स्तर पर भारतीयों ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मेघालय और तेलंगाना जैसे राज्यों में घूमने का मन बनाया। वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में भारतीय पर्यटकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा जानकारी दुबई, लंदन, पेरिस, टोरंटो और न्यूयॉर्क जैसे शहरों के बारे में जुटाई।
आतिथ्य के मामले में एयरबीएनबी पर लोगों ने सबसे ज्यादा अंक दिल्ली, गोवा, केरल, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश को दिए। वहीं, 2022 में घरेलू स्थानों पर सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले स्थलों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता थे। एयरबीएनबी के महाप्रबंधक (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, हांगकांग और ताइवान) अमनप्रीत बजाज ने कहा, ‘‘ऐसा अनुमान है कि यात्री इस वर्ष बहुप्रतीक्षित अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर जाएंगे और भारत में उन स्थलों की यात्रा करेंगे जो मशहूर पर्यटन स्थलों में नहीं गिने जाते।
यात्रा की बढ़ती इच्छा एक सकारात्मक संकेत है।'' आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2022 में सर्वाधिक संख्या में बुकिंग मुंबई, नयी दिल्ली, गुवाहाटी, गोवा और हैदराबाद के लिए हुई।फाइल फोटो
- नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह सही लड़की मिलने पर शादी करेंगे और चूंकि, उनके माता-पिता की ‘शादीशुदा जिंदगी बेहद खुशहाल थी’, इसलिए अपनी जीवनसंगिनी को लेकर उनकी अपेक्षाएं काफी ज्यादा हैं। यू-ट्यूब पर फूड एवं ट्रेवल मंच ‘कर्ली टेल्स’ के साथ हल्की-फुल्की बातचीत में राहुल (52) ने राजनीति से इतर कई विषयों पर चर्चा की, जिनमें उनके बचपन की यादों से लेकर पसंदीदा व्यंजन और व्यायाम से लगाव तक शामिल है।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्हें शादी करने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अपने पिता राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे माता-पिता की शादीशुदा जिंदगी बेहद खुशहाल थी और वे एक-दूसरे से बेइंतेहां प्यार करते थे, इसलिए मेरी अपेक्षाएं बहुत ज्यादा हैं।”राहुल ने कहा, “सही लड़की मिलने पर मैं शादी कर लूंगा। मेरा मतलब है कि जब वो मिलेगी, तो अच्छा रहेगा।”यह पूछे जाने पर कि क्या अपनी जीवनसंगिनी में वांछित खूबियों को लेकर उन्होंने कोई सूची बना रखी है, राहुल ने कहा, “नहीं। मुझे केवल एक प्रेम करने वाली लड़की चाहिए, जो समझदार भी हो।”‘भारत जोड़ो यात्रा’ के राजस्थान चरण में राहुल के कंटेनर के बाहर ‘डिनर’ के दौरान हुई इस बातचीत का वीडियो कांग्रेस ने रविवार को ट्विटर पर साझा किया।वीडियो में राहुल यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वह खाने में ज्यादा मीन-मेख नहीं निकालते और जो कुछ भी उपलब्ध रहता है, खा लेते हैं, लेकिन उन्हें ‘मटर और कटहल’ पसंद नहीं है।सितंबर 2022 में तमिलनाडु के कन्याकुमारी से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने वाले राहुल फिलहाल जम्मू-कश्मीर में हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि घर पर वह अपने खानपान को लेकर ‘बहुत सख्त’ हैं, लेकिन “यात्रा के दौरान उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं।”कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि तेलंगाना का भोजन उनके हिसाब से ‘थोड़ा तीखा और चटपटा है।’ उन्होंने कहा, “वहां के खाने में मिर्च थोड़ी ज्यादा रहती थी। मैं इतनी ज्यादा मिर्च नहीं खाता।”यह पूछे जाने पर कि उनके घर पर कैसा खाना बनता है, राहुल ने बताया कि दिन में “देसी खाना” बनता है और रात में कोई कॉन्टिनेंटल (यूरोपीय देशों का)व्यंजन। उन्होंने कहा कि वह संयमित आहार लेते हैं और मीठा खाने से परहेज करते हैं।राहुल ने बताया कि वह ‘मांसाहार के शौकीन हैं’ और उन्हें चिकन, मटन और समुद्री आहार, सब पसंद है।पसंदीदा व्यंजन के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें चिकन टिक्का, सीख कबाब और ऑमलेट खाना अच्छा लगता है। उन्होंने यह भी बताया कि वह सुबह एक कप कॉफी पीना पसंद करते हैं।राष्ट्रीय राजधानी में खाने के अपने पसंदीदा जगहों का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि पहले वह पुरानी दिल्ली जाया करते थे, लेकिन अब उन्हें मोती महल, सागर, स्वागत और सरवण भवन का खाना पसंद है। मोती महल में मुगलई व्यंजन परोसा जाता है, जबकि सागर, स्वागत और सरवण भवन अपने दक्षिण भारतीय व्यंजनों के लिए जाने जाते हैं। राहुल ने कहा कि वह एक कश्मीरी पंडित परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में बस गया था।अपने दादा फिरोज खान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मेरे दादा एक पारसी थे। इसलिए मैं पूरी तरह से मिश्रित (नस्ल का) हूं।”राहुल ने कहा कि उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनकी पढ़ाई-लिखाई घर पर ही हुई। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उनके पिता राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे।उन्होंने उस समय को करते हुए कहा, “यह वाकई में सदमे जैसे था। सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि हम स्कूल नहीं जा सकते। मैं एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई कर रहा था, लेकिन दादी की हत्या से पहले उन्होंने हमें वहां से निकाल लिया था। जब दादी की हत्या हो गई, तब उन्होंने हमें वापस नहीं जाने दिया।”राहुल ने कहा कि स्कूल में कुछ शिक्षक उनसे बहुत अच्छी तरह से पेश आते थे, लेकिन कुछ उनके परिवार की गरीब-हितैषी राजनीति के कारण उनके साथ रूखा व्यवहार करते थे।राहुल से उनकी उच्च शिक्षा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मैं एक साल सेंट स्टीफन में था और मैंने वहां इतिहास की पढ़ाई की। इसके बाद मैं हार्वर्ड विश्वविद्यालय चला गया, जहां मैंने अंतरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की।”कांग्रेस नेता ने बताया कि मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हो गईं। राहुल ने कहा कि उन्हें फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज भेज दिया गया, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंध और अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि उनके पास ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय से ‘डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स’ में ‘मास्टर्स डिग्री’ भी है।अपनी पहली नौकरी के बारे में राहुल ने बताया कि उन्होंने लंदन की रणनीतिक सलाहकार फर्म ‘मॉनिटर कंपनी’ में सेवा दी और तब वह 24-25 साल के रहे होंगे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें पहली तनख्वाह के रूप में ढाई से तीन हजार पाउंड का चेक मिला था।राहुल ने कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री बनेंगे, तो तीन चीजें करेंगे, पहली-शिक्षा प्रणाली में बदलाव, दूसरी-लघु एवं मध्यम उद्यमों की सहायता और तीसरी-मुश्किल दौर से गुजर रहे लोगों, जैसे कि किसानों और बेरोजगार नौजवानों की मदद।कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का मकसद भारत में फैल रही नफरत, गुस्सा और हिंसा का मुकाबला करना है।उन्होंने कहा, “तपस्या हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, ताकि हम खुद को और दूसरों को समझ सकें… इस यात्रा का एक मकसद यह भी है।”अपनी पदयात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा, “मैं अकेला नहीं हूं। मेरे साथ कई अन्य लोग भी यह तपस्या कर रहे हैं। यहां बहुत सारे तपस्वी हैं, अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं और साथ चल रहे हैं।”फिटनेस के लिए सुर्खियां बटोर रहे राहुल ने स्कूबा डाइविंग, फ्री डाइविंग, साइक्लिंग, बैकपैकिंग (अकेले घूमने की आदत) और मार्शल आर्ट एकिदो में अपनी दिलचस्पी के बारे में भी बात की।उन्होंने कहा, “मैं कॉलेज में मुक्केबाजी करता था। मैंने हमेशा कोई न कोई व्यायाम किया है। मार्शल आर्ट बहुत सुविधाजनक हैं; वे हिंसक होना नहीं सिखाते, बल्कि इसके बिल्कुल विपरीत हैं। लेकिन मार्शल आर्ट की गलत व्याख्या की जाती है कि लोगों को नुकसान पहुंचाओ, उन पर हमला करो। लेकिन अगर आप इसके उद्देश्य को अच्छी तरह से समझेंगे तो ये आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होंगे।”राहुल ने बताया कि वह यात्रा के दौरान रोजाना मार्शल आर्ट की एक ‘क्लास’ लेते हैं।सोते समय सिरहाने रखी चीजों के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा कि उनके बेड की दराज में रुद्राक्ष, शिव सहित अन्य देवी-देवताओं के चित्र और उनका बटुआ होता है।
- जम्मू। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी की तरह सफेद रंग की आधी बाजू की टी-शर्ट पहने शामिल हो रहे उनके हमशक्ल फैसल चौधरी लोगों का बरबस ध्यान खींच रहे हैं। यात्रा में शामिल हुए फैसल ने कहा कि जो लोग कांग्रेस नेता से मिल नहीं पाए और उनके साथ तस्वीरें नहीं ले पाए, उन्होंने उनके साथ तस्वीरें लीं। भारत जोड़ो यात्रा’ में गांधी के बाद लोगों ने फैसल की सबसे अधिक तस्वीरें लीं हैं। यात्रा अब अपने अंतिम चरण में है।फैसल की वीडियो क्लिप और तस्वीरें सोशल मीडिया पर हैं। उन्हें विभिन्न वीडियो में गांधी के अन्य समर्थकों के साथ चलते देखा जा सकता है। फैसल बागपत (उत्तर प्रदेश-दिल्ली सीमा) से पांच जनवरी को यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा, लोग मेरे पाए आए और उन्होंने मेरे साथ तस्वीरें लीं और वीडियो भी बनाए। मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से प्यार होने के कारण लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचाते हैं।फैसल ने कहा, लोग राहुल जी से प्यार करते हैं, इसलिए जब वे राहुल जी के साथ तस्वीरें नहीं ले पाते, तो वे मेरे साथ तस्वीरें लेते हैं और वीडियो बनाते हैं। मुझे उनका हमशक्ल होना पसंद है। उन्होंने कहा, मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मैं राहुल जी का हमशक्ल हूं। पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते मेरा चेहरा मेरी पार्टी के शीर्ष नेता से मिलता है, लेकिन मैं हमेशा उनका कार्यकर्ता बना रहूंगा।उत्तर प्रदेश के रहने वाले फैसल की भी राहुल गांधी की तरह दाढ़ी है। यात्रा के शामिल अन्य लोग जैकेट और स्वेटर पहनते हैं, लेकिन फैसल राहुल की तरह सफेद टी-शर्ट में नजर आते हैं। उन्होंने कहा, यदि राहुल जी टी-शर्ट पहन सकते हैं, तो कोई और इसे क्यों नहीं पहन सकता। मैं यह पहन रहा हूं। मुझे कोई समस्या नहीं है।यात्रा को जम्मू-कश्मीर में लोगों का समर्थन नहीं मिलने के भारतीय जनता पार्टी के दावे पर फैसल ने कहा, जम्मू-कश्मीर के लोगों ने राहुल जी को खुले दिल से प्यार दिया है और उनकी यात्रा का समर्थन किया है। हजारों लोग बाहर निकलकर आयोजन स्थलों पर आ रहे हैं। हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह यात्रा शत-प्रतिशत सफल रहेगी। नया सवेरा होगा।
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रतलाम। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी एवं दो मासूम बच्चों की कथित तौर पर कुल्हाड़ी के वार से हत्या हत्या कर तीनों के शवों को अपने घर में ही फर्श के नीचे गाड़ दिया। यह जानकारी रतलाम जिले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने रविवार को दी। एसपी तिवारी ने बताया कि यह घटना करीब दो महीने पहले कनेरी रोड पर स्थित विंध्यवासिनी कॉलोनी में हुई और पुलिस ने रविवार शाम को घर के फर्श की खुदाई कर तीन शवों को वहां से बरामद कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में हत्या करने वाले आरोपी सोनू तलवाड़े उम्र करीब 30 से 35 वर्ष के अलावा उसके एक साथी आरोपी बंटी कैथवास को भी रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसने साक्ष्य छुपाने में उसकी मदद की थी। उन्होंने कहा कि लाश दफनाने के बाद आरोपी उसी घर में करीब दो महीनों से रह रहा था।
रतलाम जिले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने बताया कि पुलिस को इस जघन्य घटना का पता तब चला, जब परिवार के गायब होने और हत्या की सूचना मिली। इसकी जांच में पुलिस को सनसनीखेज तथ्य मिले, तो पुलिस ने मकान के फर्श की खुदाई की योजना बनाई। उन्होंने कहा, रविवार शाम शहर के सभी थाना प्रभारी, भारी संख्या में पुलिस बल और फोरेसिंक विशेषज्ञ आदि के साथ विंध्यवासिनी कॉलोनी पंहुचे। इस दल ने आरोपी सोनू तलवाड़े के मकान के फर्श की खुदाई शुरू की। वहां जमीन से तीन लाशें निकली, जो आरोपी सोनू की पत्नी निशा 27, उसकी चार साल की बेटी खुशी और सात साल के बेटे अमन की थी। तिवारी ने बताया कि आरोपी सोनू ने अपने साथी आरोपी बंटी कैथवास की मदद से तीनों की लाश को घर में ही छुपा दिया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने कहा कि तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कालेज भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस इनका डीएनए जांच भी कराएगी। -
गोपेश्वर. जमीन धंसने से प्रभावित जोशीमठ में रविवार तक 275 परिवारों के 925 सदस्यों को अस्थाई रूप से विस्थापित किया जा चुका है जबकि 552 प्रभावितों को 371.27 लाख रुपये की धनराशि अंतरिम सहायता के रूप में वितरित की जा चुकी है। चमोली जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण चमोली से मिली जानकारी के अनुसार, जोशीमठ नगर के नौ वार्डों के 863 भवनों में दरारें मिली हैं जिनमें से 181 मकानों को असुरक्षित चिन्हित किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन द्वारा अब तक 275 परिवारों के 925 सदस्यों को विभिन्न सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से विस्थापित किया गया है। राहत कार्यो के तहत जिला प्रशासन द्वारा अबतक 552 प्रभावितों को 371.27 लाख रुपये की धनराशि दी जा चुकी है। जोशीमठ में बारिश और बर्फवारी के बाद शीतलहर के हालात को देखते हुए 10 स्थानों पर नियमित रूप से बड़े अलाव जलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, राहत शिविरों में रह रहे प्रभावितों के लिए हीटर, ब्लोअर, पानी की बोतलों और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था की गयी है।
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हैदराबाद. हैदराबाद की एक मुख्य सड़क पर रविवार को तीन अज्ञात लोगों ने सरेआम 30 वर्षीय व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर काफी प्रसारित हुए हैं। इन वीडियो में एक व्यक्ति सड़क पर पड़ा हुआ दिख रहा है और दो व्यक्ति उस पर धारदार हथियारों से हमला करते, जबकि एक अन्य व्यक्ति उसके पैरों को पकड़े हुए दिख रहा है। वीडियो में इस वारदात के दौरान सड़क पर वाहन गुजरते नजर आ रहे हैं। एक अन्य वीडियो में हमलावर शख्स पर हमला करने के बाद भागते नजर आ रहे हैं।
व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो जाती है, जिसकी जेब से मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान की गई।
कुलसुमपुरा थाने के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि हत्या के मकसद का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है और घटनास्थल से भागे आरोपी को पकड़ने के लिए कई टीम का गठन किया गया है। -
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने रविवार को मध्य प्रदेश और असम के लिए राजनीतिक मामलों की समिति गठित की और दोनों राज्यों की पार्टी इकाइयों में पदाधिकारियों की नियुक्ति की। कांग्रेस ने पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में 16 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वहां की पार्टी महिला इकाई की नयी अध्यक्षा के तौर पर लक्ष्मी बर्मन को नियुक्त किया। मध्यप्रदेश के लिए गठित 21 सदस्यीय समिति में मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के अलावा गोविंद सिंह, कांति लाल भूरिया, सुरेश पचौरी, अरुण यादव, अर्जुन सिंह, विवेक तन्खा, नकुल नाथ, जीतू पटवारी, महेंद्र जोशी और शोभा ओझा को जगह दी गई है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई में उपाध्यक्ष, महासचिवों और जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी। कांग्रेस ने मध्यप्रदेश इकाई में अभय दुबे, अजय चोर्डिया, अर्चना जायसवाल, शोभा ओझा और नूरी खान सहित 50 नए उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। इनके अलावा 105 महासचिवों की भी नियुक्ति की गई है। पार्टी ने असम इकाई में भी 16 नए उपाध्यक्षों, 32 महासचिवों, 51 सचिवों और 15 संयुक्त सचिवों की नियुक्ति की है। कांग्रेस ने असम के लिए गठित राजनीतिक मामलों की समिति में अन्य के साथ राज्य के प्रभारी जितेंद्र सिंह, भूपेन कुमार बोरा, देबब्रत सैकिया, गौरव गोगोई, प्रद्युत बोरदोलोई और नंदिता दास को भी जगह दी है।
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चंडीगढ़. पंजाब पुलिस पतंगबाजी प्रतियोगिताओं के दौरान खासकर बच्चों के गंभीर रूप से घायल होने की कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के मद्देनजर राज्य में प्रतिबंधित ‘चीनी मांझे' की बिक्री पर नकेल कस रही है। लुधियाना जिले में समराला के निकट कुछ दिन पहले चीनी मांझा चार साल के एक बच्चे की गर्दन में लिपट गया था, जिसके बाद उसके चेहरे पर 100 से अधिक टांके आए। बच्चा एक कार में यात्रा कर रहा था और उसने उड़ती पतंग देखने के लिए कार की खिड़की से अपना सिर बाहर निकाला था। इसी दौरान मांझा उसकी गर्दन में लिपट गया। उसे लुधियाना के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ‘चीनी डोर' या ‘चीनी मांझे' का विरोध करने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में शामिल अमृतसर के निवासी किरपाल सिंह पाली ने दावा किया कि राज्य में नोएडा से इसकी आपूर्ति होती है और इसे फिर लुधियाना एवं जलंधर से वितरित किया जाता है। अमृतसर में, चार दिन पहले 28 वर्षीय एक युवक के गले में चीनी मांझा उलझ जाने से उसकी गर्दन पर गहरी चोट आई थी और उसे 20 टांके लगवाने पड़े थे। मोगा में 15 जनवरी को 10 साल का एक लड़का उस समय गंभीर रूप से झुलस गया था, जब उसकी पतंग की चीनी डोर हाई-वोल्टेज विद्युत तारों के संपर्क में आ गई थी। अबोहर में तीन दिन पहले चीनी डोर से एक व्यक्ति की नाक पर गहरी चोट आई थी। रूपनगर में पिछले साल नवंबर में साइकिल पर सवार 13 वर्षीय एक लड़के के गले में चीनी डोर फंस जाने से उसकी मौत हो गई थी। पतंगों का कारोबार करने वाले एक दुकानदार ने कहा, ‘‘चीनी डोर नायलॉन या सिंथेटिक धागे से बनती है और इसे धारदार बनाने के लिए पाउडर ग्लास एवं धातु कणों का इस्तेमाल किया जाता है।'' पाली ने बताया कि यह सूती डोर की तुलना में धारदार और सस्ती होती है, इसलिए कुछ पतंग प्रेमी इसमें शामिल जोखिमों को नजरअंदाज करते हुए इसे खरीदना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एक सामान्य सूती मांझे की चरखी की कीमत 400 रुपये (1,000 मीटर) होती है, जबकि इतनी ही कीमत पर 4,000 मीटर ‘चीनी मांझे' की चरखी खरीदी जा सकती है।'' सूती डोर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली से लाई जाती है।
पाली ने कहा कि राज्य सरकार को ‘चीनी डोर' के कारण गंभीर चोट लगने के मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘तभी इसकी बिक्री और खरीद पर लगाम लग सकती है।'' राज्य में चीनी डोर की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध है लेकिन इसका उल्लंघन बेरोकटोक जारी है। पंजाब पुलिस ने अब ‘चीनी डोर' की खरीद-फरोख्त के खिलाफ अभियान शुरू किया है।
पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय) सुखचैन सिंह गिल ने बताया कि राज्य में कई स्थानों से चीनी डोर की 10,000 से अधिक गट्ठी जब्त की गई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस ने चीनी डोर बेचने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की है और चीनी डोर की 10,269 गट्ठी बरामद करने के बाद 176 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 188 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।'' गिल ने कहा कि चीनी डोर के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। -
वाराणसी. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को कहा कि सार्वजनिक तेल कंपनियों के पिछले घाटे को देखते हुए पेट्रोल की कीमतों में जल्द कटौती होने की उम्मीद नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल विपणन कंपनियों- आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने पिछले 15 महीनों से पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में लागत के अनुरूप बदलाव नहीं किया है। लागत के अनुरूप कीमतें नहीं बढ़ने से इन कंपनियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरने से कंपनियों पर दबाव कुछ कम हुआ है लेकिन उन्होंने पिछले नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई कटौती नहीं की है। पुरी ने यहां एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा, "मुझे उम्मीद है कि नुकसान की भरपाई हो जाने पर कीमतें कम हो जानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल के दाम में आए उछाल के बावजूद तेल कंपनियों ने जिम्मेदार आचरण किया और खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की। उन्होंने कहा, "हमने उन्हें कीमतें स्थिर रखने को नहीं कहा था। उन्होंने खुद ही यह फैसला किया था।" हालांकि ऊंचे दाम पर कच्चा तेल खरीदने से उनकी लागत बढ़ गई। जून 2022 के अंत में उन्हें एक लीटर पेट्रोल पर 17.4 रुपये और डीजल पर 27.2 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने छह अप्रैल, 2022 को अंतिम बार पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें संशोधित की थीं। पुरी ने कहा कि कीमतें स्थिर रखने से चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में इन कंपनियों को कुल 21,201.18 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। उन्होंने कहा कि इस नुकसान की भरपाई होनी बाकी है।
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बक्सर . बिहार के बक्सर स्थित एक हिंदू मंदिर से चोरी गई भगवान की अष्टधातु से बनी चार प्रतिमाओं को 12 घंटे के भीतर बरामद कर लिया। पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और चोरी में संलिप्त चार अन्य की तलाश की जा रही है। सहायक पुलिस अधीक्षक राज ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘सभी चार प्रतिमाएं आरोपी दिल कुमार के पास से मिली हैं जिसे रविवार को भोजपुर से गिरफ्तार किया गया था। चार अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया है। चोरी गई प्रतिमाओं की कीमत करोड़ों रुपये हैं।'' इससे पहले दिन में प्रतिमा चोरी की जानकारी मिलने के बाद बड़ता धाकाइच गांव के स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 84 को बाधित कर दिया था और सड़क पर टायर जलाकर अपना विरोध व्यक्त किया था। कुछ लोगों की मांग है कि मंदिर के बाहर स्थायी रूप से सुरक्षा की व्यवस्था की जाए क्योंकि छह साल पहले भी मंदिर से प्रतिमाएं चोरी हो गई थीं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों के नाम पर अंडमान निकोबार द्वीप समूह के 21 बड़े द्वीपों का नामकरण किया। इस सिलसिले में पोर्ट ब्लेयर में आयोजित समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पराक्रम दिवस के अवसर पर देश के नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने नेताजी को समर्पित राष्ट्रीय समारक का भी अनावरण किया। गृहमंत्री अमित शाह ने भी इस समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों के नाम पर द्वीपों के नामकरण से इन शूरवीरों को हमेशा याद किया जाता रहेगा। रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के पुनर्निमित कर्तव्य पथ पर इस बार की परेड में जहां दर्शकों को उत्तर प्रदेश के अयोध्या के दीपोत्सव की झांकी देखने को मिलेगी, वहीं हरियाणा की झांकी में भगवान कृष्ण के ‘विराट स्वरूप' को प्रतिम्बित किया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस परेड में इस बार झारखंड के प्रसिद्ध देवघर मंदिर और जम्मू-कश्मीर की ‘अमरनाथ गुफा' की झलक देखने को मिल सकेगी। जम्मू- कश्मीर ने पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन में पुनरुत्थान को प्रदर्शित करते हुए अमरनाथ के गुफा मंदिर को 'नया जम्मू-कश्मीर' विषय के साथ अपनी झांकी में चित्रित किया है। राष्ट्रीय राजधानी के पुनर्निमित कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड के दौरान असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गुजरात, पश्चिम बंगाल और कई अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की रंगारंग झांकियां दर्शकों का मन मोहेंगी। विभिन्न राज्यों द्वारा इस वर्ष अपनाई गई थीम काफी हद तक सांस्कृतिक विरासत और अन्य विषयों के अलावा 'नारी शक्ति' है। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने रविवार को बताया कि भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक और सामाजिक प्रगति को दर्शाने वाली कुल 23 झांकियां 26 जनवरी को औपचारिक परेड का हिस्सा होंगी। इन झांकियों में से 17 विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तथा छह झांकियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की होंगी। राज्य के सूचना और जनसंपर्क विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की झांकी में भगवान राम और देवी सीता को वनवास से लौटने पर अयोध्या के लोगों द्वारा स्वागत करते हुए दिखाया गया है। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने पहले कहा था कि अयोध्या दीपोत्सव उत्तर प्रदेश का मुख्य विषय है। उत्तर प्रदेश सरकार के एक अधिकारी ने कहा, “झांकी के साइड पैनल अयोध्या में सरयू नदी के तट पर राम की पैड़ी को दर्शाते हैं और एक बड़ा 'दीपोत्सव द्वार' बनाया गया है। इसमें महाऋषि वशिष्ठ की मूर्ति भी है।” हरियाणा ने गणतंत्र दिवस की झांकी के लिए भगवद् गीता को अपनी प्रेरणा के रूप में चुना है, जिसमें चार अश्वों द्वारा खींचे जाने वाले रथ का एक विशाल मॉडल इसका मुख्य आकर्षण है। अधिकारी के अनुसार, ‘‘झांकी में भगवान कृष्ण को कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में अर्जुन के सारथी के रूप में सेवा करते हुए और उन्हें उपदेश देते हुए दिखाया गया है। झांकी के सामने के हिस्से में भगवान कृष्ण को उनके 'विराट स्वरूप' रूप में दिखाया गया है।'' रक्षा मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, “ट्रेलर के साइड पैनल महाभारत युद्ध के दृश्य दिखाते हैं।” मंत्रालय ने बताया है कि यदि इन दो झांकी में कालातीत महाकाव्यों से तैयार किए गए विषय की झलक मिलती है, तो पश्चिम बंगाल की झांकी में देवी दुर्गा की पवित्र छवि झलकती है। पश्चिम बंगाल की झांकी में कोलकाता की दुर्गा पूजा को दर्शाया गया है और यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में इसके शामिल होने का जश्न मनाया गया है। असम की झांकी में पौराणिक अहोम सेनापति लचित बोरफुकन और प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर सहित इसके सांस्कृतिक स्थलों को गर्व से दिखाया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां संवाददाताओं को बताया कि गृह मंत्रालय दो झांकी प्रदर्शित करेगा, जिनमें स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की एक-एक झांकी शामिल होगी। अधिकारी के अनुसार, कृषि मंत्रालय, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय की एक-एक झांकी कर्तव्य पथ पर दर्शकों को आकर्षित करेगी। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की झांकी भी कर्तव्य पथ पर नजर आएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या रेल मंत्रालय की तरफ से भी कोई झांकी निकाली जाएगी, उन्होंने कहा, “नहीं, इस साल की परेड में रेल मंत्रालय की कोई झांकी नहीं होगी।” पिछले साल राजपथ का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' किए जाने के बाद इस ऐतिहासिक पथ में आयोजित यह पहला गणतंत्र दिवस समारोह होगा। फुल ड्रेस रिहर्सल परेड सोमवार को होगी। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने पहले कहा था कि 74वां गणतंत्र दिवस समारोह पुनर्निमित सेंट्रल विस्टा एवेन्यू में होगा और सरकार ने जनता के लिए 32,000 टिकट ऑनलाइन बिक्री के लिए रखे हैं।



























