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- नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से जारी है और अब तक 3 लाख 83 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन कर लिए हैं। इस तीर्थयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। इस बीच आज मंगलवार को जम्मू से 1,490 श्रद्धालुओं का एक और जत्था कश्मीर के लिए रवाना हुआ। इनमें से 327 तीर्थयात्रियों को लेकर 16 वाहनों का पहला काफिला सुबह 3:25 बजे बालटाल आधार शिविर के लिए निकला, जबकि 1,163 यात्रियों के साथ 45 वाहनों का दूसरा काफिला सुबह 3:57 बजे पहलगाम आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। यात्रा में अब केवल 12 दिन शेष रह गए हैं।आज ‘नाग पंचमी’ के मौके पर श्रीनगर के अमरेश्वर मंदिर में भगवान शिव की पवित्र छड़ी ‘छड़ी मुबारक’ का विशेष पूजन किया गया। यह छड़ी अमरनाथ यात्रा की दिशा तय करती है और 4 अगस्त को श्रीनगर के अमरेश्वर मंदिर से गुफा मंदिर के लिए अंतिम यात्रा शुरू करेगी। यह यात्रा पंपोर, बिजबेहरा, मट्टन और पहलगाम होते हुए 9 अगस्त को पवित्र गुफा मंदिर पहुंचेगी, जहां इसके साथ ही अमरनाथ यात्रा का समापन होगा।अमरनाथ यात्रा के लिए इस बार केंद्र सरकार ने सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत किया है। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और स्थानीय पुलिस के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 180 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। इसके अलावा, 8,000 से ज्यादा विशेष कमांडो को भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं।अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई थी और 9 अगस्त को समाप्त होगी। यह यात्रा समुद्र तल से 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर तक पहुंचती है। श्रद्धालु दो रास्तों से गुफा तक पहुंच सकते हैं। पहला – पारंपरिक पहलगाम मार्ग जो चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए गुफा तक पहुंचता है और लगभग 46 किलोमीटर लंबा है। इस रास्ते से यात्रा करने में करीब 4 दिन लगते हैं। दूसरा मार्ग बालटाल है, जो छोटा और कठिन है हालांकि यह केवल 14 किलोमीटर लंबा है। इस रास्ते से यात्री एक दिन में ही दर्शन कर वापस लौट सकते हैं। वहीं सुरक्षा कारणों से इस वर्ष किसी भी तीर्थयात्री के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
- नई दिल्ली। लोकसभा के बाद आज मंगलवार को राज्यसभा में भी ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत होगी। इस चर्चा में प्रधानमंत्री मोदी,राजनाथ सिंह और एस जयशंकर की शामिल होने की उम्मीद है। राज्यसभा में यह बहस लोकसभा में सोमवार को हुई तीखी बहस के बाद हो रही है, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने शुरुआती भाषण में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “भारत किसी भी उकसावे का जवाब देने में संकोच नहीं करेगा। आतंक को समर्थन देने वालों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि भारत आक्रामकता का जवाब निर्णायक रूप से देगा।” उनके इस बयान का सत्तापक्ष के सांसदों ने मेज थपथपा कर समर्थन किया।गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ 7 मई को शुरू किया गया था, जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का जवाब था। भारतीय सेना, वायुसेना और खुफिया एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से शुरू किए गए इस ऑपरेशन का मकसद सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट करना था।राजनाथ सिंह ने लोकसभा में बताया कि इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए और पाकिस्तान व पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों से नष्ट किया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी लोकसभा में अपने संबोधन में इस ऑपरेशन के लिए भारत को मिले अंतरराष्ट्रीय समर्थन और सहानुभूति पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत की कूटनीतिक कोशिशों ने दुनिया को इस कार्रवाई की जरूरत और औचित्य को समझाने में मदद की।बाद में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म एक्स पोस्ट कर राजनाथ सिंह और जयशंकर के भाषण की सराहना की और उन्हें “प्रभावशाली” बताया। उन्होंने भारतीय सेना की बहादुरी और पेशेवर रवैये की तारीफ करते हुए कहा,” दोनों के भाषण में नए भारत की ताकत और दृढ़ता झलकती है।” राज्य सभा में होने वाली इस चर्चा से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के कार्यान्वयन और इसके प्रभावों पर और प्रकाश पड़ने की उम्मीद है।
- नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और नासा का संयुक्त मिशन ‘निसार’ उपग्रह 30 जुलाई को श्रीहरिकोटा से अपने निर्धारित समय शाम 5 बजकर 40 मिनट पर लॉन्च होगा। 1.5 बिलियन डॉलर का यह मिशन पृथ्वी की सतह की निगरानी में मददगार होगा। निसार उपग्रह हर 12 दिन में पृथ्वी की भूमि और बर्फीली सतहों को स्कैन करेगा और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में मदद करेगा। इस मिशन को भारत के जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा।इसरो ने बताया- ‘निसार उपग्रह अब लॉन्चिंग के लिए तैयार’भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) उपग्रह को 30 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा।पीएम मोदी के भारत को ‘विश्व बंधु’ बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप इस मिशन को लेकर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है ‘‘यह मिशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को ‘विश्व बंधु’ बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।’’उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘निसार केवल एक उपग्रह नहीं है, यह दुनिया के साथ भारत का वैज्ञानिक सहयोग है।’’इसरो और नासा का संयुक्त मिशनइसरो ने सोमवार को एक्स पोस्ट में बताया कि निसार उपग्रह अब लॉन्चिंग के लिए तैयार है। इसे प्रक्षेपण यान जीएसएलवी- एफ16 सिस्टम में स्थापित कर दिया गया है। इसकी जांच हो चुकी है। जीएसएलवी -एफ16 के माध्यम से निसार उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया जाएगा जिसका लाइव प्रसारण 30 जुलाई शाम 5 बजकर 10 मिनट शुरू होगा। जीएसएलवी -एफ 16 का प्रक्षेपण पांच बजकर 40 मिनट पर होगा। निसार इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का संयुक्त मिशन है।क्या करेगा निसार ?निसार की मदद से धरती के हर क्षेत्र पर नजर रखना संभव हो सकेगा। यह सैटेलाइट 740 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित होगा। यह एक अत्याधुनिक रडार सैटेलाइट है, जो बादलों और बारिश के बावजूद 24 घंटे पृथ्वी की तस्वीरें ले सकता है। इसका उद्देश्य बाढ़, ग्लेशियर, कोस्टल इरोजन (तटीय क्षेत्रों में होने वाला कटाव) जैसी प्राकृतिक घटनाओं पर नजर रखना और उसकी पूर्व जानकारी देना है। इससे दुश्मन देशों की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखी जा सकेगी। निसार की लागत करीब 1.3 बिलियन डॉलर (करीब 11,240 करोड़ रुपये) है। यह न केवल भारत और अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद होगा।निसार उपग्रह दुनिया में अपनी तरह का पहला उपग्रहउल्लेखनीय है कि निसार उपग्रह दुनिया में अपनी तरह का पहला उपग्रह है जो प्रत्येक 12 दिनों पर समूची पृथ्वी की भूमि और बर्फीली सतहों को स्कैन करेगा। यह एक सेंटीमीटर स्तर तक की सटीक फोटो खींचने व प्रसारित करने में सक्षम है। इसमें नासा की तरफ से तैयार एल-बैंड और इसरो की ओर से विकसित एस-बैंड रडार लगाया गया है, जिन्हें विश्व में सबसे उन्नत माना जा रहा है। यह तकनीक प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन और बाढ़ की रियल-टाइम निगरानी में मदद करेगा। इसलिए भी इसे भारत के लिए खास तौर पर उपयोगी माना जा रहा है। यह मिशन न केवल प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी और प्रबंधन में सहायक होगा बल्कि कृषि, जलवायु परिवर्तन और मिट्टी की नमी का सटीक अनुमान लगाने के लिए भी डाटा भेजेगा।
- नई दिल्ली। पिछले छह वित्त वर्षों (वित्त वर्ष 20 से वित्त वर्ष 25) में 65,000 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन हुए हैं, जिनकी वैल्यू 12,000 लाख करोड़ रुपए से अधिक रही है। यह जानकारी सोमवार को सरकार की ओर से संसद को दी गई। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार देश में टियर-2 और टियर-3 सहित डिजिटल भुगतान को अपनाने की दर बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), फिनटेक कंपनियों, बैंकों और राज्य सरकारों सहित विभिन्न पक्षकारों के साथ मिलकर काम कर रही है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आरबीआई ने टियर-3 से टियर-6 शहरों, पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहित करने के लिए 2021 में एक पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (पीआईडीएफ) की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि 31 मई, 2025 तक, पीआईडीएफ के माध्यम से लगभग 4.77 करोड़ डिजिटल टचपॉइंट स्थापित किए जा चुके हैं। आरबीआई ने देश भर में भुगतानों के डिजिटलीकरण की सीमा को मापने के लिए डिजिटल पेमेंट इंडेक्स (आरबीआई-डीपीआई) विकसित किया है।इसके परिणामस्वरूप, अधिक लोग औपचारिक ऋण माध्यमों तक पहुंच पा रहे हैं, जो न केवल आर्थिक भागीदारी को सशक्त बनाता है, बल्कि अधिक संस्थाओं को औपचारिक वित्तीय इकोसिस्टम में भी लाता है।केंद्रीय मंत्री ने बताया, यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने छोटे विक्रेताओं और ग्रामीण उपयोगकर्ताओं सहित नागरिकों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने में सक्षम बनाया है, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और औपचारिक आर्थिक भागीदारी बढ़ी है।ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2024 के लिए आरबीआई-डीपीआई सूचकांक 465.33 रहा, जो देश भर में डिजिटल भुगतान अपनाने, इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रदर्शन में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छोटे व्यवसायों और एमएसएमई के ग्राहक आधार को बढ़ाने और दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने में सहायता प्रदान करने के लिए, सरकार, आरबीआई और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा समय-समय पर विभिन्न पहल की गई हैं।डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन ने विशेष रूप से वंचित और वंचित समुदायों के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में क्रांति ला दी है।
- नई दिल्ली। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने सोमवार को पेइचिंग में आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन निष्पक्ष रुख अपनाते हुए कंबोडिया और थाईलैंड के साथ घनिष्ठ संपर्क बनाए रखेगा, सक्रिय रूप से मध्यस्थता करते हुए शांतिपूर्ण वार्ता को बढ़ावा देगा, ताकि युद्ध विराम और युद्ध की समाप्ति को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभाई जा सके।प्रवक्ता ने संबंधित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कंबोडिया और थाईलैंड ऐसे पड़ोसी हैं, जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता और वे चीन के मैत्रीपूर्ण पड़ोसी भी हैं। अच्छे पड़ोसी होने के नाते और आपसी विश्वास बनाए रखना तथा मतभेदों का उचित प्रबंधन करना कंबोडिया और थाईलैंड दोनों के मूलभूत और दीर्घकालिक हित में है और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के अनुकूल है।क्वो च्याखुन ने आगे कहा कि चीन कंबोडिया और थाईलैंड के बीच संघर्ष में हुई मौतों पर दुःखी है और अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है। आशा है कि दोनों पक्ष दोनों देशों की जनता के साझा हितों को ध्यान में रखते हुए शांति और अच्छे पड़ोसी के भाव को कायम रखेंगे, शांत और संयमित रहेंगे, यथाशीघ्र लड़ाई बंद करेंगे, बातचीत और परामर्श के माध्यम से मतभेदों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाएंगे और सीमा क्षेत्र में यथाशीघ्र शांति व स्थिरता बहाल करेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि कंबोडिया और थाईलैंड दोनों आसियान के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। हाल के दिनों में, आसियान ने कंबोडिया और थाईलैंड के बीच युद्धविराम को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया है। चीन इसकी सराहना करता है और तनाव कम करने तथा स्थिति को शांत करने के लिए सभी प्रयासों का स्वागत करता है।
- मुंबई/ देश में इस साल मार्च तक डिजिटल भुगतान में सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऑनलाइन लेनदेन को मापने वाले आरबीआई के सूचकांक से यह जानकारी मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक जनवरी, 2021 से डिजिटल भुगतान सूचकांक (आरबीआई-डीपीआई) प्रकाशित कर रहा है। इसमें देश भर में भुगतान के डिजिटलीकरण की सीमा को दर्शाने के लिए मार्च, 2018 को आधार वर्ष माना गया है।आरबीआई ने सोमवार को बयान में कहा कि मार्च, 2025 के लिए सूचकांक 493.22 है, जबकि सितंबर, 2024 में यह 465.33 और मार्च, 2024 में 445.5 था। छमाही आंकड़ों के अनुसार, ‘‘आरबीआई-डिजिटल भुगतान सूचकांक बढ़ने का कारण देशभर में भुगतान बुनियादी ढांचा... आपूर्ति-पक्ष कारक और भुगतान प्रदर्शन जैसे मापदंडों में उल्लेखनीय वृद्धि है।'' आरबीआई-डिजिटल भुगतान मंच में पांच व्यापक मानदंड शामिल हैं जो विभिन्न समय अवधि में देश में डिजिटल भुगतान की गहनता और पहुंच को मापने को सक्षम बनाते हैं। ये मानदंड हैं...भुगतान सक्षमकर्ता (भारांश 25 प्रतिशत), भुगतान बुनियादी ढांचा... मांग से जुड़े कारक (10 प्रतिशत), भुगतान बुनियादी ढांचा... आपूर्ति-पक्ष कारक (15 प्रतिशत), भुगतान प्रदर्शन (45 प्रतिशत) और उपभोक्ता-केंद्रित (पांच प्रतिशत)।
- नयी दिल्ली/ दूरसंचार राज्यमंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने सोमवार को कहा कि उद्योगपति एलन मस्क की अगुवाई वाली उपग्रह संचार सेवा प्रदाता कंपनी स्टारलिंक भारत में केवल 20 लाख कनेक्शन दे सकती हैं, ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल समेत अन्य दूरसंचार कंपनियों के लिए जोखिम वाली कोई बात नहीं है। उन्होंने यहां बीएसएनएल की समीक्षा बैठक के मौके पर कहा, ‘‘स्टारलिंक के भारत में केवल 20 लाख ग्राहक हो सकते हैं और वह 200 एमबीपीएस तक की गति प्रदान कर सकती है। इससे दूरसंचार सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।'' ऐसी संभावना है कि सैटकॉम सेवाओं का लक्ष्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाके होंगे जहां बीएसएनएल की अच्छी उपस्थिति है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि स्टारलिंक कनेक्शन की सीमा इसकी मौजूदा क्षमता के कारण है।मंत्री ने कहा कि सैटकॉम सेवाओं की शुरुआती लागत बहुत ज्यादा होगी और मासिक लागत लगभग 3,000 रुपये हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बीएसएनएल 4जी सेवा शुरू करने का काम पूरा हो चुकी है और अभी शुल्क दर बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। मंत्री ने कहा, ‘‘हम पहले बाजार चाहते हैं। शुल्क दर बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।''मंत्री ने कहा कि 4जी सेवाओं की शुरुआत और तकनीक के स्थिर होने के कारण, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बीएसएनएल के राजस्व में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘पहले कुछ तकनीकी समस्याएं थीं, लेकिन उनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा का समाधान हो चुका है। बिजलीघरों से जुड़ी कुछ समस्याएं थीं। लगभग 600-700 करोड़ रुपये की लागत से 30,000 बिजलीघरों में बदलाव किये गये हैं।'' पेम्मासानी ने कहा कि बिजली आपूर्ति में सुधार के परिणामस्वरूप बीएसएनएल नेटवर्क बेहतर हुआ है।उन्होंने कहा, ‘‘ग्राहक आधार बढ़ाने के लिए प्रत्येक सर्किल को अलग-अलग लक्ष्य दिए जा रहे हैं।'' बीएसएनएल में चीन के उपकरणों की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर, मंत्री ने कहा कि सरकार स्वदेशी तकनीकों का उपयोग जारी रखने की योजना बना रही है और वह धीरे-धीरे 2जी और 3जी उपकरणों को हटा देगी और उनके रखरखाव की आवश्यकता को समाप्त कर देगी। बीएसएनएल ने जेडटीई सहित चीनी कंपनियों के कुछ उपकरणों का उपयोग करके 2जी और 3जी प्रौद्योगिकी स्थापित की है।
- नयी दिल्ली/ उपग्रह संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन के नियम दो महीने के भीतर लागू हो सकते हैं। एक सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। स्पेक्ट्रम आवंटन नियम लागू होने के बाद एलन मस्क के नेतृत्व वाली स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो एसईएस को रेडियोवेव के लिए आवेदन करने और अपनी सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी। अधिकारी ने कहा, ‘‘स्पेक्ट्रम आवंटन के नियम दो महीने में तय होने की संभावना है। उसके बाद, यह सैटकॉम कंपनियों पर होगा कि वे कब अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती हैं।''भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सिफारिश की है कि सरकार को बिना नीलामी के और एक प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिये स्पेक्ट्रम आवंटित करना चाहिए। इस कदम का शुरुआत में दूरसंचार परिचालकों रिलायंस जियो और भारती एयरटेल ने भारी विरोध किया था। नियामक ने सुझाव दिया है कि सैटकॉम सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए दिए जा सकते हैं और बाजार की स्थितियों को देखते हुए इसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है।
- ईटानगर/ ईटानगर राजधानी पुलिस ने 30.5 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चोरी की हुई 57 महंगी कारें बरामद करते हुए एक बड़े अंतरराज्यीय वाहन चोरी और तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यहां एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि वाहन चोरी के मामलों में पूरे देश के किसी भी थाने में एक बार में की गई ये आज तक की सबसे बड़ी बरामदगी है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े पांच लोगों को भी गिरफ्तार किया है।राजधानी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) जुम्मार बसर ने यहां पत्रकारों को बताया कि कई राज्यों में वाहन तस्करी गिरोह के बारे में खूफिया जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की। मामले की जांच के लिए पुलिस ने एक विशेष जांच दल भी गठित किया। बसर ने बताया, ‘‘यह अभियान दो जुलाई को शुरू हुआ और ईटानगर राजधानी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से चोरी की 57 गाड़ियां बरामद की गईं। सभी वाहन दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में दर्ज चोरी के मामलों से जुड़े पाए गए।''गिरोह की कार्यप्रणाली के बारे में एसपी ने बताया कि इसके सदस्य मुख्य रूप से दिल्ली- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के राज्यों में महंगी कारों को निशाना बनाते थे। वाहनों को चुराने के बाद, अपराधियों ने दलालों के साथ साझेदारी की और इन दलालों ने इंजन और चेसिस नंबरों के साथ छेड़छाड़ की, जाली पंजीकरण कागजात बनाए और वाहनों को अरुणाचल प्रदेश तक पहुंचाने में मदद की। राज्य में पहुंचने के बाद, कारों को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर अनजान खरीदारों को बेच दिया गया। एसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संबंध होने की संभावना सामने आई है। बसर ने लोगों से किसी भी पुराने वाहन को खरीदने से पहले वाहन पोर्टल या संबंधित आरटीओ के माध्यम से वाहन के स्वामित्व के इतिहास को सत्यापित करने का आग्रह किया।
- नयी दिल्ली/ सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि पिछले पांच साल में 12 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 30 लोग मारे गए। इनमें से सात हादसे उत्तराखंड में हुए। नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर संचालन की अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया है। मंत्री ने बताया कि पिछले पांच साल में पंजीकृत हेलीकॉप्टरों से जुड़ी 12 दुर्घटनाएं हुईं जिनमें सात उत्तराखंड में, चार महाराष्ट्र में और एक छत्तीसगढ़ में हुई। उन्होंने बताया कि डीजीसीए ने चारधाम यात्रा सहित देश में हेलीकॉप्टर संचालन के लिए सुरक्षा मानदंडों को दोहराया है, जिनमें पार्किंग व्यवस्था में सुधार, ‘स्लॉट' आवंटन को विनियमित करना, पायलट प्रशिक्षण को बढ़ाना और मानक संचालन प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि प्रवेश स्तर की न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने के लिए न्यूनतम तीन साल की वकालत का मानदंड तय करने वाला उसका 20 मई का फैसला उक्त आदेश के बाद जारी की गई भर्ती अधिसूचनाओं पर लागू होगा। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का उक्त आदेश से पहले जारी की गई भर्ती अधिसूचनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई के नेतृत्व वाली पीठ ने 20 मई को नये विधि स्नातकों के प्रवेश स्तर की न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने पर रोक लगा दी थी और न्यूनतम तीन वर्ष की वकालत का मानदंड तय कर दिया था। इस पीठ में न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया भी शामिल थे।
पीठ ने सोमवार को नवीद बुख्तिया और पांच अन्य की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता पेशे से वकील हैं और उन्होंने जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग की 14 मई की भर्ती अधिसूचना को चुनौती दी थी, क्योंकि इसमें तीन साल की वकालत के नियम को अनिवार्य नहीं किया गया था। प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया, ‘‘आप कह रहे हैं कि यह केवल फैसले के उद्देश्य को विफल करने के लिए किया गया। क्या उच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत को पता था कि प्रधान न्यायाधीश 20 मई को फैसला सुनाने वाले हैं।'' प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह फैसला भावी न्यायिक भर्तियों पर लागू होगा और पहले से शुरू हो चुकी किसी भी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमने फैसले में स्पष्ट किया है कि यह शुरू हो चुकी किसी भी प्रक्रिया पर लागू नहीं होगा और केवल अगले भर्ती वर्ष के लिए ही लागू होगा।'' इसके बाद याचिका को वापस लिया मानकर खारिज कर दिया गया। -
हिसार. हरियाणा के हिसार जिले में एक तेज रफ्तार ट्रक ने एक कार को टक्कर मार दी, जिससे चार दोस्तों की मौत हो गई। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि चारों रविवार रात बरवाला से अग्रोहा जा रहे थे, तभी अग्रोहा थानाक्षेत्र में नंगथला गांव के पास खाद से भरे ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी। पुलिस के मुताबिक इस हादसे में चारों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई और कार क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने कार का दरवाजा काटकर शवों को बाहर निकाला। पुलिस के अनुसार इन चारों की पहचान राम मेहर पूनिया, प्रवीण भादू, रविंदर, सभी निवासी गांव किरोड़ी (हिसार निवासी) और राजू बूरा (हिसार के राजली गांव निवासी) के रूप में हुई है तथा उनके शव पोस्टमार्टम के लिए अग्रोहा चिकित्सा महाविद्यालय ले जाये गये हैं। पुलिस के अनुसार चारों 25से 30 साल तक के थे।
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नयी दिल्ली/ केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सोमवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासनकाल में देश में आतंकवाद ‘पनपा'। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता विपक्षी पार्टियों को दिखाई नहीं पड़ती, जबकि उसे पूरे विश्व ने देखा। संसद के निचले सदन में, ‘ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा में भाग लेते हुए जनता दल (यूनाइटेड) नेता ने कांग्रेस के गौरव गोगोई के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने एक भी शब्द इस देश की सेना की वीरता और पराक्रम पर नहीं कहा। सेना की आप प्रशंसा नहीं कर रहे। बल्कि आप बता रहे हैं कि कितना जहाज गिरा, कितनी मिसाइल गिरीं। क्या आपकी नजर में इस देश के सैनिकों का कोई महत्व नहीं है?'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संप्रग के शासनकाल (2004 से 2014 तक) में देश में आतंकवाद ‘पनपा' और उसे जगह मिली। उस अवधि के दौरान देश में जो आतंकी घटनाएं हुईं, उनमें 615 लोग मारे गए। सिंह ने संप्रग शासनकाल के दौरान देश में हुए आतंकी हमलों का उल्लेख किया और कहा कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकियों का कब्जा था और आतंकी कैसे घुसे थे, उन्हें बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस हमले में 175 लोग मारे गए थे और 300 लोग घायल हुए थे। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवाद से लड़ने का ‘‘आपमें न तो साहस था और न ही दम। आप केवल खानापूर्ति करते थे और घड़ियाली आंसू बहाते थे।'' जद (यू) नेता ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से दागी गईं सारी मिसाइल हवा में फुलझड़ी की तरह ध्वस्त हो गईं, लेकिन आपको नहीं दिखता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के 11 एयर बेस को भारतीय वायुसेना ने ध्वस्त कर दिया और पाकिस्तान के घुटने टेकने के बाद संघर्ष विराम हुआ था। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर को सराहा और समर्थन किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से विश्व को यह संदेश गया कि भारत एक सशक्त देश है और अपनी रक्षा करने में समर्थ है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) जी बोलते नहीं हैं, बल्कि वह ‘एक्ट' (कार्रवाई) करते हैं और ‘एक्ट' कर अपनी ताकत दिखाते हैं, चाहे ‘सर्जिकल स्ट्राइक' हो, (बालाकोट) एयर सट्राइक हो या ऑपरेशन सिंदूर हो।'' सिंह ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर संघर्ष विराम करने संबंधी विपक्षी दलों के दावे को खारिज करते हुए कहा कि बार-बार ऐसा बोलने से यह सच नहीं हो जाएगा, बल्कि सच्चाई यह है कि भारत किसी के दबाव में नहीं आता और अपना निर्णय स्वयं लेने में समर्थ है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि मुख्य विपक्षी पार्टी का आदर्श गोएबल्स (जर्मनी के तानाशाह रहे हिटलर के प्रचार और सार्वजनिक सूचना मंत्री) है। उन्होंने उल्लेख किया कि गोएबल्स ने कहा था किसी झूठ को बार-बार बोलने से वह सच मान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह एक प्रसिद्ध कहावत है लेकिन यह विचार सही नहीं है। सिंह ने कहा, ‘‘यह एक दुष्प्रचार रणनीति है। झूठ कितनी बार भी दोहराई जाए, सच नहीं हो जाएगा। उन्होंने विपक्षी दलों से आतंकवाद के खिलाफ सरकार के साथ एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर आतंकवाद के खिलाफ कंधे से कंधा मिला कर चलने की जरूरत है। तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के लव श्री कृष्ण देवरायलू ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से संदेश स्पष्ट है कि भारत इंतजार करेगा लेकिन रूकेगा नहीं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेशों में भेजे गए सर्वदलीय मंडल का सदस्य होने के नाते ‘‘वहां हमने एकजुटता दिखाई'' और दुनिया ने देखा कि हम किसलिए खड़े हैं और पाकिस्तान किसलिए खड़ा है।'' उन्होंने कहा कि दुनिया ने यह भी देखा कि भारत ने विश्व को अहिंसा जबकि पाकिस्तान ने आतंकवाद दिया है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं और नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करके छात्रों के समग्र और बहुआयामी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। मोदी ने एनईपी के पांच साल पूरे होने पर एक संदेश में कहा कि शिक्षा मंत्रालय मंगलवार को अखिल भारतीय शिक्षा समागम (एबीएसएस) का आयोजन कर रहा है और कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में नयी पहल शुरू की जाएंगी। उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षा वह माध्यम है, जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर और राष्ट्र को सशक्त बनाती है। हमारा उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है, जिसमें विद्यार्थी अपनी रुचि, क्षमता और सपनों के अनुरूप आगे बढ़ सकें। आज देश गौरवशाली भारतीय संस्कृति से जुड़ी शिक्षा को तकनीक और वैश्विक मानकों से सुसज्जित कर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।'' मोदी ने कहा, ‘‘पिछले पांच वर्षों के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं। चाहे वह मातृभाषा में शिक्षा हो, स्कूली शिक्षा को मजबूत करना हो या कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर देना हो, राष्ट्रीय शिक्षा नीति अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करके छात्रों के समग्र और बहुआयामी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत काल में भारत एक भव्य और विकसित देश के निर्माण की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘इस दौरान हमारे युवाओं के आत्मविश्वास, जिज्ञासा और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शिक्षा समागम हमारे साझा संकल्प और सहयोग की भावना का प्रतीक है।'' उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि यह आयोजन न केवल शैक्षणिक संस्थानों को अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं, रणनीतियों और उपलब्धियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयासों को भी और सशक्त करेगा।'' शिक्षा मंत्रालय मंगलवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की पांचवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एबीएसएस का आयोजन कर रहा है, जहां शिक्षाविद, नीति निर्माता, शिक्षक, उद्योग जगत के दिग्गज और सरकार इस महत्वाकांक्षी नीति के क्रियान्वयन में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे।
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास नीतिगत दरों (रेपो दर) और कटौती की गुंजाइश है। इसका कारण खुदरा मुद्रास्फीति के चार प्रतिशत के औसत लक्ष्य से काफी नीचे होना है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी से चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है और मई में छह साल के निचले स्तर 2.82 प्रतिशत पर आ गई। वित्त मंत्रालय की मासिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है, मुख्य (हेडलाइन) मुद्रास्फीति नरम बनी हुई है और कुल मिलाकर मुद्रास्फीति आरबीआई के चार प्रतिशत के औसत लक्ष्य से काफी नीचे है। इससे नीतिगत दर में और कमी की गुंजाइश है।'' केंद्र सरकार ने फरवरी से अब तक प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कुल मिलाकर एक प्रतिशत की कमी की है।
नीतिगत दर निर्धारित करने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक चार से छह अगस्त को होगी। आरबीआई ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए सकल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति दर 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि पहली तिमाही में वास्तविक मुद्रास्फीति आरबीआई के लक्ष्य से कम रही। सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ऐसा जान पड़ता है कि पूरे वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति दर केंद्रीय बैंक के 3.7 प्रतिशत के अनुमान से कम रहेगी।'' रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओपेक (तेल निर्यातक देशों के संगठन) और उसके सहयोगियों द्वारा अनुमान से कहीं ज्यादा उत्पादन वृद्धि के बाद, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें कम रहने की उम्मीद है। ओपेक और उसके सहयोगियों ने अगस्त में उत्पादन में 5,48,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि की, जो पिछले महीनों में घोषित उत्पादन वृद्धि के अतिरिक्त है। राजकोषीय मोर्चे पर, केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों ने राजकोषीय मजबूती के लक्ष्यों पर कायम रहते हुए पूंजीगत व्यय में गति बनाए रखी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कर कटौती के बावजूद राजस्व स्रोत मजबूत बने हुए हैं और दहाई अंक में वृद्धि जारी है। -
नई दिल्ली। संसद में आज सोमवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और आतंकवाद पर जोरदार प्रहार किया। लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने भारतीय सेना को “शेर” की उपमा दी और पाकिस्तान की तुलना “मेंढकों” से करते हुए कहा कि भारतीय सेना कभी छोटे और निर्बल दुश्मनों से अपनी ताकत नहीं तौलती। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का सैन्य बल शौर्य और धैर्य, दोनों में विश्वास करता है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगा।
राजनाथ सिंह ने कहा, “इतिहास गवाह है कि भारत ने कभी किसी की एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया। शेर अगर मेंढकों को मारे तो अच्छा संदेश नहीं जाता। हमारी सेना शेर है। पाकिस्तान जैसा देश, जो अपने अस्तित्व के लिए दूसरों पर निर्भर है, उससे मुकाबला करना अपना स्तर गिराने जैसा है।” उन्होंने आगे कहा कि हमारी नीति आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक और प्रभावी कार्रवाई की है। हमारा पाकिस्तान विरोध किसी धार्मिक कारण से नहीं, बल्कि उनकी आतंकवाद पोषक नीतियों की वजह से है।रक्षा मंत्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की नीतियां शौर्य और धैर्य का समन्वय हैं। “जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल की 100 गलतियों को माफ किया, लेकिन फिर सुदर्शन चक्र उठाया, वैसे ही भारत पहले दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, लेकिन धोखा मिलने पर प्रतिक्रिया देना जानता है।”उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक था। “अगर कोई हमारे नागरिकों को मारेगा, तो भारत चुप नहीं बैठेगा। भारत की मिसाइलें सीमाओं को पार करेंगी और हमारे वीर सैनिक दुश्मन की कमर तोड़ देंगे। हम आतंकवाद के हर रूप को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” राजनाथ सिंह ने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश और रक्षा नीति अब ‘धैर्य और प्रतिकार’ के सिद्धांतों पर आधारित है। - नयी दिल्ली. अमेरिका और ब्रिटेन में राजनीतिक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित भाषा मॉडल से ऑनलाइन चर्चाओं की गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) को बड़े पैमाने पर टेक्स्ट डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है, लिहाजा यह प्राकृतिक भाषा में मानवीय अनुरोधों का जवाब देने में सक्षम है। ‘साइंस एडवांसेज' पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, एआई प्रणाली की ओर से विनम्र, साक्ष्य-आधारित प्रतिवाद उच्च गुणवत्ता वाली ऑनलाइन बातचीत की संभावना को लगभग दोगुना कर देता है और “व्यक्ति के वैकल्पिक दृष्टिकोणों का सम्मान करने की गुंजाइश को काफी हद तक बढ़ा देता है।” हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया कि वैकल्पिक दृष्टिकोणों के प्रति खुलापन किसी की राजनीतिक विचारधारा में बदलाव नहीं लाता। डेनमार्क स्थित कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान और डेटा विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर ग्रेगरी ईडी ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि बड़े भाषा मॉडल “हल्के-फुल्के सुझाव” दे सकते हैं, जैसे कि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता को उनके पोस्ट के आपत्तिजनक लहजे के प्रति सचेत करना। ईडी ने कहा, “इसे ठोस रूप से बढ़ावा देने के लिए यह कल्पना करना आसान है कि पृष्ठभूमि में काम करने वाले बड़े भाषा मॉडल कैसे ऑनलाइन चर्चाओं में पटरी से उतरने पर हमें सचेत करते हैं, या इन एआई प्रणालियों का इस्तेमाल कैसे स्कूल पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में युवाओं को विवादास्पद विषयों पर चर्चा करते समय सर्वोत्तम व्यवहार करने की कला सिखाने के लिए किया जा सकता है।” मुंबई स्थित स्वतंत्र गैर-लाभकारी शैक्षणिक शोध संस्थान मॉन्क प्रयोगशाला के मनोविज्ञान विभाग की शोधकर्ता हंसिका कपूर ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, “(यह अध्ययन) इस तरीके से एलएलएम का इस्तेमाल करने के लिए एक अवधारणा प्रमाण प्रदान करता है, जिसमें स्पष्ट संकेत दिए गए हैं, जो दो या अधिक समूहों की तुलना करने वाले प्रयोग में परस्पर अनन्य प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकते हैं।” अध्ययन में लगभग 3,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें अमेरिका में रिपब्लिकन या डेमोक्रेटिक पार्टी, जबकि ब्रिटेन में कंजर्वेटिव या लेबर पार्टी के समर्थक शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से एक ऐसा लेख लिखने को कहा, जिसमें वे अपने लिए महत्वपूर्ण किसी राजनीतिक मुद्दे पर अपना रुख बयां करते हुए उसे जायज ठहराते हों, ठीक वैसे ही, जैसे वे किसी सोशल मीडिया पोस्ट में करते हैं। लेख पर प्रतिक्रिया चैटजीपीटी से दी गई, जो “काल्पनिक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता के रूप में काम कर रहा था।” यह पोस्ट की भाषा और तर्क के हिसाब से “तत्काल” अपनी जवाबी दलीलें दे रहा था। प्रतिभागी चैटजीपीटी की प्रतिक्रिया पर ठीक उसी तरह से जवाब दे रहे थे, जैसे वे किसी सोशल मीडिया ‘कमेंट' पर व्यक्त करते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा, “साक्ष्य-आधारित प्रतिवाद (भावना-आधारित प्रतिक्रिया के सापेक्ष) उच्च-गुणवत्ता वाली प्रतिक्रिया प्राप्त करने की संभावना को छह प्रतिशत अंकों तक बढ़ा देता है, समझौता करने की इच्छा में पांच प्रतिशत अंकों तक वृद्धि करता है और सम्मानजनक लहजा अपनाने की गुंजाइश में नौ प्रतिशत अंकों तक इजाफा करता है।
- नयी दिल्ली. सरकार भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते पर उद्योग और राज्यों को जागरूक करने के लिए अगले 20 दिन में देशभर में हितधारक बैठकों, कार्यशालाओं, जागरूकता अभियानों और रायशुमारी सत्रों सहित कुल 1,000 संपर्क कार्यक्रम आयोजित करेगी। सूत्रों ने यह जानकारी दी। इस कवायद का मकसद 24 जुलाई को हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना और इसके लाभ को अधिकतम करना है। सूत्रों ने कहा कि क्षेत्रवार संपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। संबंधित मंत्रालय भी समझौते पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे। केंद्रीय दल इस व्यापार समझौते के फायदों के बारे में जानकारी देने के लिए विभिन्न राज्यों का दौरा भी करेंगे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सोमवार को यहां व्यापार समझौते पर चमड़ा और वस्त्र क्षेत्र के साथ बैठक करेंगे। इस समझौते के लागू होने पर, 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात ब्रिटेन में शुल्क मुक्त हो जाएंगे। इसके साथ ही कार, सौंदर्य प्रसाधन और व्हिस्की जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क भी कम हो जाएगा। गोयल ने 26 जुलाई को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें पहले ही विशिष्ट उद्योग क्षेत्रों से बात करने का निर्देश दिया है, जो इस समझौते के लागू होने के बाद अब अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। उन्होंने कहा, ''संसद सत्र चलने तक मैं हर क्षेत्र के साथ क्षेत्रीय बैठकें करूंगा और उसके बाद सभी राज्यों का दौरा करूंगा।'' भागलपुर सिल्क (बिहार), पश्मीना शॉल (जम्मू और कश्मीर), कोल्हापुरी चप्पल (महाराष्ट्र) और तंजावुर गुड़िया (तमिलनाडु) अब ब्रिटेन भर के मॉल और दुकानों में प्रमुखता से दिखाई देगी। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के तहत ऐसे पारंपरिक उत्पादों पर शुल्क में छूट दी जाएगी। इसके अलावा बालूचरी साड़ियों (पश्चिम बंगाल), बंधिनी वस्त्र कला (गुजरात), कांचीपुरम साड़ियों और तिरुपुर के होजरी उद्योग को भी इस समझौते से फायदा होगा। गोयल ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु का भी दौरा करेंगे और मछुआरा समुदाय को इस समझौते से होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे। गोयल ने कहा, ''मैं हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, मुंबई और गुरुग्राम के तकनीकी केंद्रों का दौरा करूंगा और जानकारी दूंगा कि कैसे दोहरा अंशदान संधि (डीसीसी) से उन्हें अपने सेवा निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलेगी।'' उन्होंने आगे कहा, ''हम इस समझौते से सर्वोत्तम लाभ उठाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों को जागरूक करेंगे।'' उन्होंने कहा, ''हम ब्रिटेन में प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे... और अगले कुछ महीनों में, जब तक संसदीय मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है, जमीनी स्तर पर काम शुरू कर देंगे, ताकि हम एफटीए के लागू होते ही इसका लाभ उठा सकें।
- चेन्नई. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया, लेकिन पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किये गये चीनी हथियार नाकाम रहे। उन्होंने दावा किया कि मई में आतंकवाद निरोधक अभियान के बाद भारत की रक्षा क्षमता में जबरदस्त वृद्धि हुई, जबकि चीन की रक्षा क्षमता में गिरावट आई। त्रिवेदी ने शनिवार को वीआईटी चेन्नई परिसर में तमिलनाडु उच्च शिक्षा शिक्षक संघ के तत्वावधान में आयोजित ‘‘विकसित भारत का रोड मैप - एक बहुविषयक दृष्टिकोण'' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करने के बाद कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने एक अन्य देश, चीन को भी प्रभावित किया, क्योंकि वास्तविक युद्ध में चीनी हथियारों का इस्तेमाल विफल साबित हुआ है।'' उन्होंने कहा, ‘‘एविक सिस्टम्स चेंगदू' द्वारा विनिर्माण किये जाने वाले जेएफ-17 विमान और पीएल-15 विमान, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान द्वारा किया गया था, के रक्षा भंडार में नौ प्रतिशत की महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और गार्डन रीच शिपबिल्डर समेत भारत के रक्षा भंडार में तेजी से वृद्धि हुई, क्योंकि ऑपरेशन में इस्तेमाल किए गए हथियार स्वदेशी रूप से निर्मित थे।'' उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के यूरोप से हटने के बाद भारत रक्षा विनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। त्रिवेदी ने कहा, ‘‘इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि यह विकसित भारत 25 साल का कार्यक्रम है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं, यह भारत के अगले 1,000 वर्षों की नींव रखेगा।'' उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे औपनिवेशिक विरासत और स्वतंत्रता के बाद लोगों के मन में बसाई गई मानसिकता से बाहर आएं तथा भाषाई कार्ड खेलना बंद करें। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए त्रिवेदी ने कहा, ‘‘जो लोग भाषा को मुद्दा बनाना चाहते हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि क्या उन्होंने कभी अपनी क्षेत्रीय भाषा में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा प्रदान करने के बारे में सोचा था?'' उन्होंने कहा कि मोदी ने 15 क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा सुनिश्चित की है। वीआईटी के संस्थापक-कुलपति जी विश्वनाथन ने उच्च शिक्षा के लिए बजट में धन के आवंटन में वृद्धि की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि शिक्षा का विकास आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है।
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वडोदरा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाकर भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से मई में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता में विभिन्न एजेंसियों द्वारा संसाधनों (लॉजिस्टिक) का प्रबंधन एक निर्णायक कारक था। राजनाथ वडोदरा में रेल मंत्रालय के तहत आने वाले गति शक्ति विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों और अध्यापकों को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया जिस तेजी से बदल रही है, वह प्रभावी एवं चौंकाने वाली भी है। रक्षा क्षेत्र भी बदल रहा है और युद्ध के तरीकों में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आज के दौर में युद्ध सिर्फ बंदूकों और गोलियों से नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके (चीजों का प्रंधन करने) से जीते जाते हैं।'' राजनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि संसाधनों का प्रबंधन युद्ध के मैदान में देश का भाग्य तय करता है।
उन्होंने कहा कि जीत और हार जरूरी संसाधनों से तय होती है और ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पूरी दुनिया ने इसे देखा। राजनाथ ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में संसाधनों का प्रबंधन एक निर्णायक कारक था। विभिन्न एजेंसियों ने हमारे सशस्त्र बलों को जुटाने से लेकर सही समय पर सही जगह पर आवश्यक सामग्री पहुंचाने तक, जिस तरह से जरूरी संसाधनों का प्रबंधन किया, वह ‘ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता में एक निर्णायक कारक साबित हुआ।'' उन्होंने कहा कि ‘लॉजिस्टिक' को केवल सामान पहुंचाने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘संसाधन ही युद्धक्षेत्र को युद्धक्षेत्र बनाते हैं। संसाधनों के बिना, यह एक असमंजस का क्षेत्र बन जाएगा। युद्ध के दौरान अगर हथियार और गोला-बारूद सही समय पर सही जगह न पहुंचें, तो इसका कोई मतलब नहीं है। हमारा संसाधन प्रबंधन जितना मजबूत होगा, हमारी सीमाएं भी उतनी ही सुरक्षित होंगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘आज हम ऐसे दौर में हैं, जहां ताकत सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि समय पर संसाधन प्रबंधन से मापी जाती है। चाहे युद्ध हो, आपदा हो या वैश्विक महामारी, यह सिद्ध हो चुका है कि जो राष्ट्र अपनी आपूर्ति शृंखला को मजबूत रखता है, वह सबसे स्थिर, सुरक्षित और सक्षम होता है।'' राजनाथ ने कहा कि सेना के लिए संसाधन प्रबंधन का मतलब है कि हथियार, ईंधन, राशन और दवाइयां बिना किसी देरी के दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचें, जबकि नौसेना के मामले में इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि जहाजों को समय पर कलपुर्जे और अन्य उपकरण उपलब्ध हों। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘और हमारी वायु सेना के लिए इसका मतलब यह सुनिश्चित करना है कि जमीनी सहायता और निर्बाध ईंधन आपूर्ति की मदद से जेट विमान बिना किसी बाधा के उड़ान भरना जारी रखें। जरा सोचिए, अगर हमारे पास उन्नत मिसाइल प्रणालियां हैं, लेकिन उन्हें प्रक्षेपित करने के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समय पर नहीं पहुंचते, तो उस तकनीकी का कोई फायदा नहीं है।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘पीएम गति शक्ति' पहल, ‘लॉजिस्टिक' एकीकरण के विचार का ही विस्तार है। - कोटा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात' की 124वीं कड़ी में राजस्थान के कोटा के दो छात्रों सहित चार छात्रों की अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड में देश के लिए पुरस्कार जीतने पर प्रशंसा की। यह हाई स्कूल के छात्रों के लिए एक वैश्विक प्रतियोगिता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले, हमारे छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड में पदक जीते। देवेश पंकज, देबदत्त प्रियदर्शी, संदीप कुची और उज्ज्वल केसरी ने देश को गौरवान्वित किया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में भी अपनी स्थिति मजबूत की है, जहां तीन स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक प्राप्त हुए हैं।'' अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड का अंतिम दौर संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया गया, जहां कोटा के प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई कर रहे देबदत्त प्रियदर्शी (कक्षा 10) और देवेश पंकज भैया (कक्षा 12) ने क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक जीता। देवेश ने कहा, ‘‘मुझे बहुत खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने ‘मन की बात' में अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड का जिक्र किया। मुझे और भी ज्यादा खुशी इस बात की है कि उन्होंने चार छात्रों में मेरा नाम भी शामिल किया।'' देवेश ने अब तक चार ओलंपियाड में भाग लिया है और प्रत्येक में पदक जीते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के शब्द बड़ी संख्या में छात्रों को प्रोत्साहित और प्रेरित करेंगे, क्योंकि शिक्षा के क्षेत्र में ये ओलंपियाड ओलंपिक खेलों के समान हैं।'' महाराष्ट्र के जलगांव के मूल निवासी देवेश पिछले सात वर्षों से कोटा में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हजारों ओलंपियाड उम्मीदवारों को प्रेरित करने के लिए प्रधानमंत्री को एक बार फिर धन्यवाद देना चाहता हूं।'' देबदत्त ने कहा कि विज्ञान ओलंपियाड को ओलंपिक खेलों के समान दर्जा दिया जाना चाहिए, क्योंकि दुनिया भर के छात्र इसमें भाग लेते हैं।
- नयी दिल्ली. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने यहां एक बयान में कहा कि एनआईएसएआर महज एक उपग्रह नहीं है, बल्कि यह विश्व के साथ भारत का वैज्ञानिक सहयोग है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बुधवार को दुनिया के सबसे महंगे पृथ्वी अवलोकन उपग्रह एनआईएसएआर को प्रक्षेपित करेगा, जिसे उसने प्राकृतिक संसाधनों और खतरों के बेहतर प्रबंधन के लिए ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन' (नासा) के साथ मिलकर विकसित किया है। नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (एनआईएसएआर) उपग्रह के अवलोकन दुनिया भर के नीति निर्माताओं को उपलब्ध होंगे, जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। कुल 1.50 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से विकसित इस उपग्रह को बुधवार शाम 5:40 बजे इसरो के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी मार्क-दो रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया जाएगा। सिंह ने कहा कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को ‘विश्व बंधु' बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है-एक ऐसा वैश्विक साझेदार, जो मानवता की सामूहिक भलाई में योगदान दे। उन्होंने कहा कि इसरो और नासा के बीच सहयोग वाले पहले संयुक्त पृथ्वी अवलोकन मिशन के रूप में यह प्रक्षेपण भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के साथ-साथ इसरो के समग्र अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक निर्णायक क्षण है। सिंह ने कहा, ‘‘एनआईएसएआर न केवल भारत और अमेरिका की सेवा करेगा, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए डेटा मुहैया कराएगा, विशेष रूप से आपदा प्रबंधन, कृषि और जलवायु निगरानी जैसे क्षेत्रों में।'' उन्होंने कहा कि मिशन की एक प्रमुख विशेषता यह है कि एनआईएसएआर में दर्ज होने वाला डेटा अवलोकन के एक से दो दिनों के भीतर स्वतंत्र रूप से सुलभ हो जाएगा, और आपात स्थिति में लगभग वास्तविक समय में उपलब्ध हो सकेगा। नासा ने मिशन के लिए एल-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर), जीपीएस रिसीवर और एक तैनात करने योग्य 12-मीटर का ‘अनफर्लेबल एंटीना' प्रदान किया है। एसएसआर एक उच्च-गति दूरसंचार उपप्रणाली है।वहीं, इसरो ने अपनी ओर से एस-बैंड एसएआर पेलोड, दोनों पेलोड को समायोजित करने के लिए अंतरिक्ष यान बस, जीएसएलवी-एफ16 प्रक्षेपण यान और सभी संबंधित प्रक्षेपण सेवाएं प्रदान की हैं। एनआईएसएआर का वजन 2,392 किलोग्राम है और इसे सूर्य-स्थिर कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जिससे हर 12 दिनों में पृथ्वी की संपूर्ण भूमि और बर्फीली सतहों की तस्वीरें ली जा सकेंगी।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी की सराहना करते हुए रविवार को कहा कि इससे भारत के बच्चों में अंतरिक्ष के प्रति एक नयी जिज्ञासा जागी है। मोदी ने साथ ही कहा कि देश में केवल अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े 200 से अधिक स्टार्टअप शुरू हुए हैं।प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात' में कहा कि 2047 में विकसित भारत का रास्ता आत्मनिर्भरता से होकर गुजरता है और ‘वोकल फॉर लोकल' ‘आत्मनिर्भर भारत' का सबसे मजबूत आधार है। मोदी ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में, चाहे वह खेल हो, विज्ञान हो या संस्कृति, बहुत कुछ ऐसा हुआ है, जिस पर हर भारतीय को गर्व है। उन्होंने कहा, ‘‘हाल में अंतरिक्ष से शुभांशु शुक्ला की वापसी को लेकर देश में खूब चर्चा हुई। जैसे ही शुभांशु पृथ्वी पर सुरक्षित उतरे, लोग खुशी से उछल पड़े, हर दिल में खुशी की लहर दौड़ गई। पूरा देश गर्व से भर गया।'' मोदी ने कहा, ‘‘मुझे याद है, जब अगस्त 2023 में चंद्रयान-3 की सफलतापूर्वक लैंडिंग हुई, तो देश में एक नया माहौल बना। बच्चों में भी विज्ञान को लेकर, अंतरिक्ष को लेकर एक नयी जिज्ञासा पैदा हुई। छोटे-छोटे बच्चे अब कहते हैं, हम भी अंतरिक्ष में जाएंगे; हम भी चांद पर उतरेंगे - हम भी अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनेंगे।'' ‘इंस्पायर-मानक' अभियान के बारे में बात करते हुए मोदी ने कहा कि यह बच्चों में नवाचार को बढ़ावा देने का अभियान है। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें हर स्कूल से पांच बच्चों का चयन किया जाता है। हर बच्चा एक नया विचार लेकर आता है। अब तक लाखों बच्चे इससे जुड़ चुके हैं और चंद्रयान-3 के बाद इनकी संख्या दोगुनी हो गई है।'' मोदी ने कहा कि पूरे भारत में बच्चों में अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा की एक नयी लहर उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि देश में अंतरिक्ष के क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप भी तेजी से उभर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पांच साल पहले 50 से भी कम स्टार्टअप थे। आज अकेले अंतरिक्ष क्षेत्र में 200 से अधिक स्टार्टअप हैं।'' मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के भारत में विज्ञान नयी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले, हमारे छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड में पदक जीते। देवेश पंकज, संदीप कुची, देबदत्त प्रियदर्शी और उज्ज्वल केसरी, इन चारों ने भारत का नाम रोशन किया। गणित की दुनिया में भी भारत ने अपनी छवि मजबूत की है। ऑस्ट्रेलिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड में हमारे छात्रों ने तीन स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीता।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले महीने मुंबई में खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी ओलंपियाड आयोजित होने जा रहा है। यह अब तक का सबसे बड़ा ओलंपियाड होगा। मोदी ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है कि वीरता और दूरदर्शिता के प्रतीक 12 मराठा किलों को यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन) विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में ग्यारह किले, तमिलनाडु में एक। हर किले से इतिहास का एक अध्याय जुड़ा है। हर पत्थर एक ऐतिहासिक घटना का साक्षी है...सल्हेर किला, जहां मुगलों को हराया गया था, शिवनेरी, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। एक ऐसा किला, जो दुश्मन के लिए अभेद्य है। खानदेरी किला समुद्र के बीच में बना एक अद्भुत किला है।'' मोदी ने कहा, ‘‘दुश्मन उन्हें रोकना चाहता था, लेकिन शिवाजी महाराज ने असंभव को संभव कर दिखाया। प्रतापगढ़ किला, जहां अफजल खान को हराया गया था, उस गाथा की गूंज आज भी किले की दीवारों में समाई है। विजयदुर्ग, जिसमें गुप्त सुरंगें थीं, छत्रपति शिवाजी महाराज की दूरदर्शिता का प्रमाण है। मैंने कुछ साल पहले रायगढ़ का दौरा किया था... छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने नमन किया था। ये अनुभव जीवनभर मेरे साथ रहेगा।'' उन्होंने याद दिलाया कि 11 अगस्त, 1908 को बिहार के मुजफ्फरपुर शहर की एक जेल में 18 साल का एक युवक अंग्रेजों के खिलाफ अपनी देशभक्ति जाहिर करने की कीमत चुका रहा था। मोदी ने कहा, ‘‘जेल के अंदर, अंग्रेज अधिकारी,एक युवा को फांसी देने की तैयारी कर रहे थे। उस युवा के चेहरे पर भय नहीं था, बल्कि गर्व से भरा हुआ था। ऐसा गर्व, जो देश के लिए मर-मिटने वालों को होता है। वह वीर, वह साहसी युवा थे, खुदीराम बोस। सिर्फ 18 साल की उम्र में उन्होंने ऐसा साहस दिखाया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।'' उन्होंने कहा कि अगस्त महीना क्रांति का महीना है।मोदी ने कहा कि एक अगस्त को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि होती है। उन्होंने कहा कि इसी महीने, आठ अगस्त को गांधी जी के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो आंदोलन' की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा, ‘‘फिर आता है 15 अगस्त, हमारा स्वतंत्रता दिवस, हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं, उनसे प्रेरणा पाते हैं, लेकिन साथियों, हमारी आजादी के साथ देश के बंटवारे की टीस भी जुड़ी हुई है, इसलिए हम 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाते हैं।'' मोदी ने यह भी कहा कि 7 अगस्त, 1905 को एक और क्रांति शुरू हुई, वह स्वदेशी आंदोलन था, जिसने स्थानीय उत्पादों को नयी ऊर्जा दी। उन्होंने कहा, ‘‘इसी स्मृति में, देश हर साल सात अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' मनाता है। इस वर्ष, 7 अगस्त को 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' के 10 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जैसे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हमारी खादी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नयी ताकत दी, वैसे ही आज, जब देश एक विकसित भारत बनने की ओर अग्रसर है, तो कपड़ा क्षेत्र देश की ताकत बन रहा है।'' मोदी ने कहा, ‘‘वस्त्र क्षेत्र भारत का सिर्फ एक क्षेत्र नहीं है। यह हमारी सांस्कृतिक विविधता का उदाहरण है। आज, वस्त्र और परिधान बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है और इस विकास की सबसे खूबसूरत बात यह है कि गांवों की महिलाएं, शहरों के डिजाइनर, बुजुर्ग बुनकर और हमारे युवा जिन्होंने स्टार्ट-अप शुरू किया है, सभी मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि आज भारत में 3,000 से अधिक कपड़ा स्टार्ट-अप सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि कई स्टार्ट-अप ने भारत की हथकरघा पहचान को वैश्विक ऊंचाई प्रदान की है। उन्होंने कहा, ‘‘2047 में विकसित भारत का रास्ता आत्मनिर्भरता से होकर गुजरता है और ‘आत्मनिर्भर भारत' का सबसे बड़ा आधार है - ‘वोकल फॉर लोकल'। केवल वही चीजें खरीदें और बेचें जो भारत में बनी हों, जिनमें किसी भारतीय ने पसीना बहाया हो। यह हमारा संकल्प होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि कभी-कभी कुछ लोगों को कोई काम असंभव लगता है, लेकिन जब देश एक विचार पर एकजुट हो जाता है, तो असंभव भी संभव हो जाता है। मोदी ने कहा, ‘‘'स्वच्छ भारत मिशन' इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जल्द ही इस मिशन को 11 साल पूरे हो जाएंगे। लेकिन इसकी ताकत और जरूरत अब भी वही है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि इन 11 वर्षों में ‘स्वच्छ भारत मिशन' एक जन आंदोलन बन गया है और लोग इसे अपना कर्तव्य मानते हैं और यही वास्तविक जनभागीदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘हर साल होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण ने इस भावना को और बढ़ाया है। इस साल देश के 4500 से ज्यादा शहर और कस्बे इसमें शामिल हुए। पंद्रह करोड़ से ज्यादा लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। यह कोई साधारण संख्या नहीं है। यह स्वच्छ भारत की आवाज है।
- नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग (ईसी) ने रविवार को कहा कि बिहार में प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची का मसौदा अंतिम मतदाता सूची नहीं है। आयोग ने कहा कि पात्र मतदाताओं को शामिल करने और अपात्रों को बाहर करने के लिए एक महीने का समय उपलब्ध होगा। मसौदा सूची एक अगस्त को तथा अंतिम सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी।आयोग ने कहा कि बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के एक महीने तक चले पहले चरण के समापन के बाद 7.24 करोड़ या 91.69 प्रतिशत मतदाताओं से गणना फार्म प्राप्त हो गए हैं। आयोग ने बताया कि 36 लाख लोग या तो अपने पिछले पते से स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं या फिर उनका कोई पता ही नहीं है। इसने कहा कि बिहार के सात लाख मतदाताओं का कई जगहों पर नाम दर्ज है। गणना प्रपत्र वितरित करने और वापस प्राप्त करने से संबंधित एसआईआर का पहला चरण शुक्रवार (25 जुलाई) को समाप्त हो गया। निर्वाचन आयोग ने कहा कि बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को ये मतदाता नहीं मिले और न ही उन्हें गणना फॉर्म वापस मिले, क्योंकि या तो वे अन्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता बन गए हैं, या फिर वहां मौजूद नहीं थे, या उन्होंने 25 जुलाई तक फॉर्म जमा नहीं किए थे। इसने बताया कि दूसरा कारण यह था कि वे किसी न किसी कारण से स्वयं को मतदाता के रूप में पंजीकृत कराने के इच्छुक नहीं थे। आयोग ने कहा कि इन मतदाताओं की वास्तविक स्थिति एक अगस्त तक इन फॉर्म की जांच के बाद पता चलेगी।इसने कहा, हालांकि, वास्तविक मतदाताओं को एक अगस्त से एक सितंबर तक दावे और आपत्ति की अवधि के दौरान मतदाता सूची में वापस जोड़ा जा सकता है। मतदाता सूची में कई स्थानों पर नामांकित मतदाताओं का नाम केवल एक ही स्थान पर दर्ज किया जाएगा।” इसके साथ ही चुनाव प्राधिकरण ने कहा कि वह यह “समझ नहीं पा रहा है” कि जब मतदाताओं के नामों को गलत तरीके से शामिल करने और बाहर करने के लिए एक अगस्त से एक सितंबर तक एक महीने का समय उपलब्ध है, तो “वे अब इतना हंगामा क्यों कर रहे हैं?” आयोग ने कहा कि राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं से प्रक्रिया की वास्तविक प्रगति की जानकारी लेने के लिए स्वतंत्र हैं। आयोग ने चुटकी लेते हुए कहा, “अपने 1.6 लाख बूथ-स्तरीय एजेंटों से एक अगस्त से एक सितंबर तक दावे और आपत्तियां क्यों नहीं मांगते हैं?” राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तरीय एजेंट मतदाता सूची तैयार करने या उसे अद्यतन करने में निर्वाचन आयोग के बूथ स्तरीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते हैं। निर्वाचन आयोग के बयान में कहा गया, “कुछ लोग यह धारणा क्यों बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि मसौदा सूची ही अंतिम सूची है, जबकि विशेष गहन पुनरीक्षण आदेश के अनुसार यह अंतिम सूची नहीं है।” बिहार में विभिन्न विपक्षी दलों ने दावा किया है कि दस्तावेजों के अभाव में मतदाता सूची संशोधन के दौरान करोड़ों पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। बिहार में इस वर्ष के अंत में चुनाव होने हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा होगा क्योंकि राज्य मशीनरी प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन का विरोध करने वाले लोगों को निशाना बनाएगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि एसआईआर का पहला उद्देश्य सभी मतदाताओं और राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। उसने कहा, “24 जून 2025 तक 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने गणना फार्म जमा कर दिए हैं, जो भारी भागीदारी को दर्शाता है।
- लखनऊ. लखनऊ के माल क्षेत्र में शनिवार को पति द्वारा की गई पिटाई से घायल एक महिला की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने यहां बताया कि माल क्षेत्र में शनिवार को सीमा रावत नामक महिला को उसके पति आरोपी रवि रावत ने आपसी कहा-सुनी के बाद मारापीटा था। इस घटना में गम्भीर रूप से घायल सीमा को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया था मगर नाजुक हालत के कारण उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि आरोपी पति रवि रावत के खिलाफ मामला दर्ज करके उसकी तलाश की जा रही है। मृतका के परिजन चण्डीगढ़ में रहते हैं, उन्हें सूचना दे दी गयी है।



























