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नयी दिल्ली. देश भर में इस वर्ष जनवरी से जून के बीच राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुई दुर्घटनाओं में 26,770 लोगों की जान चली गई। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में यह भी बताया कि वर्ष 2024 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 52,609 घातक दुर्घटनाएं हुईं। गडकरी ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने अत्यधिक यातायात वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे जैसे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ट्रांस-हरियाणा, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ‘एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (एटीएमएस) स्थापित किया है। गडकरी ने बताया ‘‘एटीएमएस में इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरणों की व्यवस्था है, जो सड़क दुर्घटनाओं की त्वरित पहचान करने और राजमार्गों की प्रभावी निगरानी में मदद करते हैं। इससे आपात सहायता प्रतिक्रिया समय में सुधार होता है।'' एक अन्य प्रश्न के उत्तर में गडकरी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 1,12,561 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का सड़क सुरक्षा ऑडिट किया गया है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जोखिमपूर्ण स्थानों की पहचान और सुधार करना है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में एक जनवरी, 2025 तक कुल 1.09 लाख पद रिक्त थे, जबकि 72,689 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी साझा की। उन्होंने सीएपीएफ में स्वीकृत पदों, कुल क्षमता और रिक्तियों से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए। राय के अनुसार, इन बलों में स्वीकृत पदों की संख्या 2021 में 10,04,980 से बढ़कर एक जनवरी, 2025 तक 10,67,110 हो गई है। इसी अवधि में 1,09,868 पद रिक्त हैं। मंत्री से यह पूछा गया था कि क्या सीएपीएफ में भारी संख्या में पद रिक्त हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया ‘‘नहीं।'' उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएपीएफ और असम राइफल्स में रिक्तियां सेवानिवृत्ति, इस्तीफे, पदोन्नति, मृत्यु, नयी बटालियनों का गठन तथा नए पदों के सृजन आदि के कारण उत्पन्न होती हैं और रिक्तियों को भरना एक निरंतर प्रक्रिया है। राय ने बताया कि यूपीएससी, एसएससी आदि के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय सक्रिय प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) के पदों पर शीघ्र भर्ती के लिए कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
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शिमला. हिमाचल प्रदेश की एक राज्यस्तरीय महिला मुक्केबाज ने 600 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पूरी कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने गौमुख से अपने गांव तक गंगाजल ले जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंडी जिले के डेरडू गांव की 21 वर्षीय कृतिका ने सावन माह में लगातार दूसरे वर्ष यह कठिन यात्रा की।
पिछले साल उन्होंने हरिद्वार से हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर तक की यात्रा की थी। इस वर्ष उन्होंने उत्तराखंड में स्थित गौमुख से पैदल चलकर अपनी शक्ति और भक्ति का परीक्षण करने का संकल्प लिया। उन्होंने कांवड़ में भरकर लाए गए गंगाजल से अपने गांव के ओंकारेश्वर मंदिर में जलाभिषेक कर अपनी यात्रा का समापन किया। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि पूरा गांव इस क्षण को देखने के लिए एकत्र हुआ।
कृतिका ने कहा कि उनके पिता राजेंद्र कुमार और परिवार के अन्य पुरुष सदस्य वर्षों से कांवड़ यात्रा पर जाते रहे हैं जिनसे उन्हें प्रेरणा मिली। इस वर्ष की यात्रा में उनके पिता, चाचा और अन्य ग्रामीण भी साथ थे।
कृतिका सुंदरनगर के एमएलएसएम कॉलेज में शारीरिक शिक्षा की छात्रा हैं और राज्यस्तरीय मुक्केबाज भी हैं। -
लद्दाख/लद्दाख के सिंधु केन्द्रीय विश्वविद्यालय (एससीयू) के प्रथम दीक्षांत समारोह के दौरान तीन स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के 14 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। केंद्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान में मंगलवार को सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम बैच के 14 छात्रों को संस्थान के प्रथम दीक्षांत समारोह के दौरान लद्दाख के मुख्य सचिव पवन कोटवाल और विश्वविद्यालय के अन्य कार्यकारी सदस्यों की उपस्थिति में डिग्री दी गई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक और एससीयू की कार्यकारी परिषद और शैक्षणिक परिषद के अध्यक्ष वी कामकोटि ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत की गई थी और इसकी आधारशिला 20 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रखी गई थी। कामकोटि ने कहा, “एससीयू को एक ऐसे केंद्र के रूप में तैयार किया जा रहा है जहां परंपरागत तरीकों से हटकर और अलग-अलग विषयों को मिलाकर पढ़ाई कराई जाएगी। यह भारत के 17 सतत विकास लक्ष्यों के अनुसार काम करेगा। यह विश्वविद्यालय 2028 तक पूरी तरह से चालू हो जाएगा। तब तक, करीब 60 छात्रों की पढ़ाई के लिए लद्दाख में एक नया अस्थायी कैंपस शुरू किया गया है। इसमें लाइब्रेरी, एक मल्टीफंक्शनल लैब, क्लासरूम और छात्रावास जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।" आईआईटी मद्रास सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय का मार्गदर्शक संस्थान है। विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलत्सी गांव में बन रहा है। साल 2024 में अपने पहले शैक्षणिक सत्र में, विश्वविद्यालय ने तीन स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किए जिनमें ऊर्जा प्रौद्योगिकी और नीति में एमटेक, वायुमंडलीय और जलवायु विज्ञान में एमटेक और सार्वजनिक नीति में एमए शामिल है। विश्वविद्यालय ने हाल में बौद्ध अध्ययन और दर्शनशास्त्र में एम.ए. पाठ्यक्रम शुरू किया है।
लेह से स्नातक तेनज़िन ज़ेंगकिंग ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय के बारे में पता चला और वह स्थिरता और ऊर्जा पर इसकी तवज्जो से आकर्षित हुए। उन्होंने कहा, "यह पाठ्यक्रम उद्देश्यपूर्ण लगा, खासकर लद्दाख जैसे स्थान पर जहां स्थिरता रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है।" - वाराणसी/ संभल । सावन शिवरात्रि पर शिव मंदिरों में भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। वाराणसी में, काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विश्व भूषण मिश्रा ने कहा, “आज सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई ।” पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए विशेष निगरानी रखी गई।।इस बीच, संभल में करीब 46 साल बाद खोले गए प्राचीन कार्तिकेय महादेव मंदिर में भी भारी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। इस मंदिर में जलाभिषेक करने वाले उपजिलाधिकारी (एसडीएम) विकास चंद्र ने कहा, “इस मंदिर को 46 साल बाद खोला गया है और हम संभल की खोई हुई पहचान फिर से वापस लाने पर काम कर रहे हैं।” मंदिर में पूजा करने आए श्रद्धालु दीपक कुमार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “हमें इस प्राचीन मंदिर में पूजा और जलाभिषेक करने का सौभाग्य मिला है। यह भोले बाबा की ही कृपा है।” संभल के भजोई स्थित सादात वाड़ी शिव मंदिर में जिलाधिकारी राजेन्दर पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की। इस बीच, चंदौसी में क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी के पर्यवेक्षण में मुरादाबाद मार्ग पर एक समर्पित सेवा शिविर लगाया गया जहां कांवड़ यात्रा से लौट रहे कांवड़ियों को फल और भोजन प्रसाद उपलब्ध कराया गया। यहां कुछ कांवड़ियों को क्षेत्राधिकारी चौधरी के साथ तस्वीरें लेते हुए भी देखा गया। चौधरी पिछले वर्ष संभल में हुई हिंसा के दौरान कार्रवाई और रमजान के दौरान अपने विवादित बयानों के बाद से सुर्खियों में रहे हैं।
- नई दिल्ली। भारत सरकार 24 जुलाई 2025 से चीनी नागरिकों को पर्यटक वीज़ा देना फिर से शुरू करेगी। इस फैसले के साथ दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी है।पांच साल बाद उठा प्रतिबंधभारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीज़ा को निलंबित कर दिया था। इसके बाद अप्रैल 2022 में अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) ने नोटिस जारी कर कहा था कि चीनी नागरिकों के सभी पर्यटक वीज़ा अमान्य माने जाएंगे। यह कदम चीन द्वारा लगभग 22,000 भारतीय छात्रों को दोबारा प्रवेश की अनुमति न देने के विरोध में उठाया गया था।अब कैसे मिलेगा वीज़ा?भारतीय दूतावास ने वीबो (Weibo) के जरिए जानकारी दी कि 24 जुलाई से चीनी नागरिक भारत का पर्यटक वीज़ा प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, अपॉइंटमेंट लेकर बीजिंग, शंघाई और ग्वांगझू स्थित वीज़ा केंद्रों में अपने दस्तावेज़ जमा करने होंगे।चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इस जानकारी को अपने वीबो हैंडल से साझा किया और बाद में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी इसका उल्लेख किया।द्विपक्षीय संबंधों में नरमीइस साल की शुरुआत में भारत और चीन ने सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने और कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी बहाल करने का फैसला किया था। दोनों कार्यक्रम 2020 के बाद बंद कर दिए गए थे।हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पांच साल बाद चीन की यात्रा की, जिसे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। वहीं मार्च में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति का ज़िक्र किया था।उन्होंने कहा था कि ड्रैगन (चीन) और एलिफेंट (भारत) को एक-दूसरे की सफलता में भागीदार बनना चाहिए। यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच रूस के कज़ान में हुई बैठक के बाद आई थी, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर माना गया।2024 में भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में चार साल से चले आ रहे सैन्य गतिरोध को समाप्त करने में सफल रहे थे। यह फैसला भी दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद के रिक्त होने के बाद, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनुच्छेद 324 के तहत आयोग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का आयोजन करे।
चुनाव आयोग ने बताया कि यह चुनाव The Presidential and Vice-Presidential Elections Act, 1952 और The Presidential and Vice-Presidential Elections Rules, 1974 के तहत संपन्न किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पूर्व तैयारी पूरी होने के बाद शीघ्र ही की जाएगी। जिसमें –-निर्वाचक मंडल (Electoral College) की सूची तैयार करनाइसमें लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं।मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति।अब तक हुए उपराष्ट्रपति चुनावों की पृष्ठभूमि सामग्री तैयार करना और उसका प्रसार, शामिल है।भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 22 जुलाई 2025 को अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा सौंपा। धनखड़ ने अपने पत्र में कहा कि वे स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए यह निर्णय ले रहे हैं। धनखड़ (उम्र 74 वर्ष) ने अगस्त 2022 में भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया था। वे पहले राजस्थान के राज्यपाल भी रह चुके हैं और एक अनुभवी अधिवक्ता तथा राजनेता के रूप में जाने जाते हैं।संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया जा सकता है, जिसे राष्ट्रपति को संबोधित करना होता है। गृह मंत्रालय (MHA) ने 22 जुलाई को राजपत्र अधिसूचना S.O. 3354(E) जारी कर उनके इस्तीफे को अधिसूचित किया है।भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति भी होता है और यह पद राष्ट्रपति के बाद दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। यदि किसी कारणवश राष्ट्रपति अनुपस्थित हों या उनका पद रिक्त हो, तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।अब पूरे देश की नजरें निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित की जाने वाली चुनाव तिथि और नामांकन प्रक्रिया पर टिकी हैं। यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि नया उपराष्ट्रपति न केवल राज्यसभा का संचालन करेगा, बल्कि संसद में संतुलन बनाए रखने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा। -
नई दिल्ली। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में निर्मित दूसरा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रचेत’ बुधवार को लॉन्च कर दिया गया। पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत (जीएसएल यार्ड 1267) पिछले साल 29 अगस्त को लॉन्च किया गया था, जिसकी अब जल्द ही आपूर्ति होने वाली है। आज लॉन्च किया गया पोत (जीएसएल यार्ड 1268) जीएसएल में निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोत श्रेणियों में से अंतिम पोत है। दूसरे पोत की लांचिंग भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि की मौजूदगी में उनकी पत्नी प्रिया परमेश के हाथों हुई।
यह पोत तेल रिसाव होने पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में तटरक्षक बल की मदद करेगाइन प्रदूषण नियंत्रण पोतों का डिजाइन और निर्माण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है। अपने संबोधन में महानिदेशक शिवमणि ने समुद्री क्षेत्र में भारतीय तटरक्षक बल के लिए प्रदूषण प्रतिक्रिया पोतों के महत्व और जीएसएल एवं आईसीजी के बीच तालमेल पर प्रकाश डाला। उन्होंने तटरक्षक बल की प्रमुख जहाज निर्माण आवश्यकताओं को स्वदेशी रूप से पूरा करने के लिए जीएसएल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समुद्र प्रचेत का शुभारंभ हमारे देश की जहाज निर्माण क्षमता का एक अनुकरणीय प्रमाण है।भारतीय तटरक्षक बल आत्मनिर्भरता के पथ पर निरंतर बढ़ रहा आगेउन्होंने सभी बाधाओं को पार करते हुए इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने पर जीएसएल के कर्मचारियों को बधाई देते हुए आह्वान किया कि रक्षा उत्पादन में ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में आगे बढ़ना सही दिशा में होना चाहिए। दूसरे प्रदूषण नियंत्रण पोत की लांचिंग के साथ जीएसएल और भारतीय तटरक्षक बल आत्मनिर्भरता के पथ पर निरंतर आगे बढ़कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ को साकार कर रहा है। समारोह में जीएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार उपाध्याय, रक्षा मंत्रालय, तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी और जीएसएल के कर्मचारी उपस्थित थे।भारतीय तटरक्षक बल की जरूरतों को करेगा पूराआईसीजी के कमांडेंट अमित उनियाल ने बताया कि इन पोतों को भारतीय तटरक्षक बल की जरूरतों को पूरा करने के लिए गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने डिजाइन और निर्मित किया है। पोत की लंबाई 114.5 मीटर, चौड़ाई 16.5 मीटर है और इसका विस्थापन 4170 टन होगा। इन पोतों में अत्याधुनिक प्रतिक्रिया उपकरण लगे हैं, इसलिए यह पोत हमारे ईईजेड में किसी भी तेल रिसाव की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में तटरक्षक बल की मदद करेगा। इस परियोजना ने गोवा में समुद्री उत्पादन गतिविधियों में लगे स्थानीय उद्योग और एमएसएमई के लिए पर्याप्त रोजगार सृजन किया है। - सिद्धार्थनगर (उप्र). सिद्धार्थनगर जिले के भवानीगंज थानाक्षेत्र में परसा मुर्तजा गांव में चार बच्चों की मां को उसके पति ने उसके प्रेमी को सौंप दिया। पत्नी खुशी-खुशी अपने प्रेमी के साथ उसके घर चली गई। एक न्यूज़ एजेंसी के अनुसार रामचरण नामक व्यक्ति का लगभग 20 वर्ष पहले जानकी देवी से विवाह हुआ था। शादी के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था। दोनों की चार संतानें हुईं लेकिन घर का खर्च बढ़ा तो रामचरन मुंबई जाकर टाइल्स लगाने का काम करने लगा। इसी बीच, जानकी देवी की पड़ोस गांव के 25 वर्षीय परशुराम से दोस्ती हो गई और बाद में दोनों ने ‘कोर्ट मैरेज' (अदालती शादी) कर ली। सूत्रों के मुताबिक जानकी और परशुराम लगभग छह महीने साथ रहे, फिर अचानक महिला अपने पुराने पति के घर वापस पहुंची और माफी मांग कर साथ रहने की जिद करने लगी। इस पर महिला के पति ने उसे अपना लिया, लेकिन कुछ महीने बाद जानकी अचानक फिर अपने प्रेमी परशुराम के साथ चली गई। तब रामचरन ने थाने में शिकायत की जहां दोनों पक्ष को बुलाया गया। सूत्रों के अनुसार थाने में हुई बातचीत के दौरान परशुराम ने तय किया कि चारों बच्चे अपने पिता के साथ रहेंगे और महिला उसके साथ रहेगी। इसके बाद रामचरण अपनी पत्नी जानकी को उसके प्रेमी परशुराम के हवाले कर दिया और महिला खुशी-खुशी उसके साथ चली गई। यह घटना सिद्धार्थनगर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को बताया कि मीडिया की कुछ खबरों में 2024 में स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा रखे गए धन में बढ़ोतरी का दावा किया गया है, लेकिन स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के आंकड़ों को भारतीयों द्वारा स्विट्जरलैंड में जमा राशि के विश्लेषण के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में राज्यसभा को बताया कि एसएनबी के आंकड़ों में ग्राहक जमाओं, अन्य देनदारियों और बैंकों को देय राशि सहित कई श्रेणियों की जानकारी शामिल होती है, जिनमें स्विस बैंकों की विदेशी शाखाओं से जुड़ी राशि भी शामिल होती है। उनके अनुसार, स्विस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि एसएनबी की वार्षिक बैंकिंग सांख्यिकी का भारतीयों द्वारा स्विट्जरलैंड में रखी गई जमाओं के आकलन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। मंत्री ने यह भी बताया कि स्विट्जरलैंड सरकार 2018 से भारतीयों से जुड़ी वित्तीय जानकारी प्रत्येक वर्ष साझा कर रही है। यह प्रक्रिया ‘ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन' (एईओआई) फ्रेमवर्क के तहत की जाती है। उन्होंने कहा कि इस ढांचे के अंतर्गत भारत को पहली बार सितंबर 2019 में वित्तीय जानकारी प्राप्त हुई थी और तब से यह आदान-प्रदान नियमित रूप से जारी है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को बताया कि भारतीय रेलवे में 'कैंसर ट्रेन' नाम से किसी ट्रेन का परिचालन नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उनके अनुसार, रेल मंत्रालय ने सूचित किया है कि ‘कैंसर ट्रेन' नाम की कोई ट्रेन भारतीय रेलवे के तहत नहीं चलाई जा रही है। मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार देशभर में कैंसर उपचार सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ‘तृतीयक कैंसर देखभाल सुविधाओं को मजबूत करने' संबंधी योजना चला रही है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य कैंसर संस्थान (एससीआई) और तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र (टीसीसीसी) की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। जाधव ने बताया कि प्रति राज्य कैंसर संस्थान के लिए अधिकतम 120 करोड़ रुपये और प्रति तृतीयक कैंसर देखभाल केंद्र के लिए 45 करोड़ रुपये की सहायता दी जाती है। उन्होंने बताया कि अब तक इस योजना के तहत कुल 39 संस्थानों (19 एससीआई और 20 टीसीसीसी) को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से पंजाब के अमृतसर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में एससीआई और फजिल्का के सिविल अस्पताल में टीसीसीसी शामिल हैं। मंत्री ने बताया कि सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर में रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी सेवाएं उपलब्ध हैं, जबकि फजिल्का के सिविल अस्पताल में कीमोथेरेपी सेवाएं दी जा रही हैं। उनके अनुसार, परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर ने पंजाब के संगरूर में सिविल अस्पताल परिसर में होमी भाभा कैंसर अस्पताल (एचबीसीएच) और न्यू चंडीगढ़ में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (एचबीसीएच एंड आरसी) की स्थापना की है, जो कार्यरत हैं। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष योजना (एमएमपीसीआरकेएस) के अंतर्गत भी कैंसर उपचार सेवाएं फजिल्का, पटियाला, फरीदकोट और बठिंडा में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- नयी दिल्ली. मेलबर्न का भारतीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफएम) अगले महीने अपनी विशेष ‘प्राइड सेलिब्रेटरी नाइट' में भारत की पहली एलजीबीटीक्यू (समलैंगिक) फिल्म ‘बदनाम बस्ती' प्रदर्शित करेगा। यह फिल्म 1971 में रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन प्रेम कपूर ने किया था। नितिन सेठी, अमर कक्कड़ और नंदिता ठाकुर अभिनीत यह फिल्म सरनाम नाम के एक डाकू की कहानी है जो बांसुरी को हमले से बचाता है। बाद में वह मंदिर के कर्मचारी शिवराज को काम पर रखता है, जिससे तीनों के बीच एक गहरा रिश्ता बनता है। ऐसा माना जा रहा था कि कई फिल्म महोत्सव में कुछ समय के लिए दिखाए जाने के बाद फिल्म का प्रिंट कहीं खो गया, लेकिन बर्लिन में आर्सेनल इंस्टीट्यूट फॉर फिल्म एंड वीडियो आर्ट के अभिलेखागार में दो अमेरिकी ‘क्यूरेटर' - सिमरन भल्ला और माइकल मेट्जगर को 2019 में गलती से इसका 35 मिलीमीटर का प्रिंट मिल गया। दिसंबर 2024 में ‘द गार्डियन' के एक लेख के अनुसार, वे उसी उपनाम वाले एक अन्य निर्देशक की फिल्म तलाश रहे थे, तभी ‘बदनाम बस्ती' का प्रिंट उनके हाथ लग गया। यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, समलैंगिक-कामुक पहलुओं के हिसाब से फिल्म अपने समय के हिसाब से लिए काफी आगे थी। फिल्म को अब इस महोत्सव में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके बाद निर्माता ओनिर की एक समलैंगिक प्रेम कहानी ‘वी आर फहीम एंड करुण' का ऑस्ट्रेलिया में प्रीमियर होगा। इस साल, आईएफएफएम में लगभग 75 फिल्में दिखाई जाएंगी।आईएफएफएम की निदेशक मीतू भौमिक लांगे ने कहा, ‘‘आईएफएफएम में, हमारा मानना है कि सिनेमा में लोगों को जोड़ने और संवाद स्थापित करने की शक्ति है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम जिस दुनिया में रहते हैं, उसकी सभी खूबसूरत विविधताओं को प्रतिबिंबित करें। यह ‘प्राइड नाइट' न केवल ‘क्वीर' पहचान का जश्न मनाने के बारे में है, बल्कि उस स्थान को पुनः प्राप्त करने के बारे में भी है जिससे भारतीय सिनेमा में ‘एलजीबीटीक्यू प्लस' समुदाय की कथाओं को लंबे समय से वंचित रखा गया है। ‘बदनाम बस्ती' और ‘वी आर फहीम एंड करुण' जैसी फिल्मों के माध्यम से हम समावेशी कहानी कहते हैं।'' महोत्सव का 16वां संस्करण 14 से 24 अगस्त तक आयोजित होने वाला है। ‘एलजीबीटीक्यू प्लस प्राइड नाइट' 22 अगस्त को निर्धारित है।
- लखनऊ. उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई को होने वाली समीक्षा अधिकारी (आरओ) और सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षाओं पर पुलिस के विशेष कार्यबल (एसटीएफ) और खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर रहेगी। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक एसटीएफ और पुलिस को समीक्षा अधिकारी एवं सहायक समीक्षा अधिकारी की भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। ये परीक्षाएं 27 जुलाई को राज्य के सभी 75 जिलों में एक ही पाली में पूर्वाह्न साढ़े नौ बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक आयोजित की जाएंगी। परीक्षा में 10.76 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। राज्य भर में 2,382 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी व्यवस्थाओं की निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लेने के लिए हर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि एसटीएफ को परीक्षा से पहले चिन्हित किए गए संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर विशेष रूप से नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। बयान के अनुसार राज्य सरकार ने परीक्षाओं की शुचिता को भंग करने वाले व्यक्तियों पर नज़र रखने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा संबंधी अपराधों में पूर्व में शामिल और वर्तमान में जमानत पर बाहर रहने वालों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। एसटीएफ सोशल मीडिया मंचों-- व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे निजी मैसेजिंग ऐप पर कड़ी नजर रखेगी।परीक्षा अवधि के दौरान समर्पित टीम कोचिंग संस्थानों पर भी नजर रखेंगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसियों को त्वरित कार्रवाई के लिए दी जाएगी। हर परीक्षा केंद्र पर पुलिस बल तैनात किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी प्रतिबंधित वस्तु अंदर न ले जाई जाए। गोपनीय परीक्षा पत्रों को कोषागार से बाहर निकालने से लेकर परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाएं भेजने तक पूरी प्रक्रिया के दौरान सशस्त्र गार्ड और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। परीक्षा के दिन चयन आयोग और एसटीएफ के बीच समन्वय के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा हर जिले में एक पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक सीधे व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।
- भुवनेश्वर. ओडिशा सरकार ने मंगलवार को एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और जिलाधिकारी स्तर के 49 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। सामान्य प्रशासन और लोक शिकायत विभाग की ओर से जारी एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक, राज्य के 30 में से 16 जिलों को नये जिलाधिकारी मिलेंगे, जिनमें जाजपुर, कंधमाल, कोरापुट, गंजाम, मल्कानगिरी, पुरी, खुर्दा और नबरंगपुर समेत अन्य शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1995 बैच के अधिकारी और अपर मुख्य सचिव हेमंत शर्मा को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अपर मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वह आईपीआईसीओएल के अध्यक्ष भी बने रहेंगे। अधिसूचना के अनुसार, संजय कुमार सिंह का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार समाप्त कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि संजीव कुमार मिश्रा को वित्त विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है और वह आईडीसीओ के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि 2006 बैच की आईएएस अधिकारी रूपा रोशन साहू, जो बरहामपुर के दक्षिणी संभाग में राजस्व संभागीय आयुक्त (आरडीसी) के रूप में कार्यरत हैं, को राज्यपाल का आयुक्त-सह-सचिव नियुक्त किया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपाल के प्रमुख सचिव एनबीएस राजपूत को लोक उद्यम विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, उन्हें ओएसआरटीसी के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इसमें कहा गया है कि खेल एवं युवा सेवा विभाग के प्रमुख सचिव तथा ओपीटीसीएल के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे 1999 बैच के आईएएस अधिकारी भास्कर ज्योति शर्मा को आबकारी विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। वह ओपीटीसीएल के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे। अधिसूचना के मुताबिक, ज्योति शर्मा के कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आबकारी विभाग के आयुक्त-सह-सचिव के रूप में गुहा पूनम तपस कुमार की अतिरिक्त नियुक्ति समाप्त हो जाएगी।
- नयी दिल्ली. दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दूर-दराज से इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों के तीमारदारों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराने के वास्ते ‘आओ साथ चलें' संस्था ने मंगलवार को ‘प्रसादम वैन' शुरू की। संस्था की ओर से जारी एक बयान में बताया गया है कि यहां पंचकुइयां रोड स्थित वाल्मीकि मंदिर में महामंडलेश्वर संत कृष्ण शाह विद्यार्थी महाराज ने पूजन-अर्चन कर वैन को सेवा के लिए रवाना किया। संस्था के संयोजक एवं भाजपा की दिल्ली इकाई के महासचिव विष्णु मित्तल ने बताया कि यह वैन उन परिवारों के लिए है, जो दूर-दराज से इलाज के लिए दिल्ली आते हैं और भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि ‘प्रसादम वैन' मरीजों के तीमारदारों को निशुल्क भोजन वितरित करेगी।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्य 79 लाख और लाभार्थियों को शामिल कर सकते हैं। खाद्यान्न का कानूनी अधिकार प्रदान करने वाले राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) को 2013 में संसद ने मंजूरी दी थी। इसके तहत ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत और शहरी आबादी के 50 प्रतिशत तक को कवर करने का प्रावधान है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि यह देश की कुल आबादी के लगभग दो-तिहाई हिस्से को कवर करता है, जो 2011 की जनगणना के आधार पर 81.35 करोड़ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, 81.35 करोड़ के लक्षित कवरेज के मुकाबले, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने 80.56 करोड़ लोगों की पहचान की है। एनएफएसए के तहत 0.79 करोड़ और लाभार्थियों की पहचान की गुंजाइश है। उन्होंने बताया कि कानून की धारा नौ में प्रावधान है कि राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कवर किए जाने वाले कुल व्यक्तियों की संख्या की गणना प्रकाशित जनगणना के अनुसार जनसंख्या अनुमानों के आधार पर की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसलिए, कवरेज में कोई भी संशोधन अगली जनगणना के प्रासंगिक आंकड़ों के प्रकाशित होने के बाद ही संभव हो सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि लाभार्थियों की पहचान और उनके राशन कार्ड जारी करने की ज़िम्मेदारी राज्यों की है।
- नयी दिल्ली। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को 10वीं कक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने वाले 1,200 मेधावी विद्यार्थियों को मुफ्त आई7 लैपटॉप देने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित 175 स्कूलों में आईसीटी लैब स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने यह जानकारी दी। सूद ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ये ऐतिहासिक निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिए गए। मुख्यमंत्री डिजिटल शिक्षा योजना के तहत, दिल्ली सरकार के स्कूलों के उन छात्रों को आई7 लैपटॉप दिए जाएंगे, जिन्होंने दसवीं कक्षा की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं। मंत्री ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप उनकी भविष्य की डिजिटल शिक्षा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना पर 8 करोड़ रुपये का व्यय होगा।सूद ने पिछली आप सरकार के "शिक्षा में क्रांति" के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 1,074 सरकारी स्कूलों में से किसी में भी कार्यात्मक कंप्यूटर लैब नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में चालू सत्र में 175 स्कूलों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) प्रयोगशालाएं स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। सूद ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के मापदंडों के अनुसार स्थापित प्रत्येक आईसीटी लैब में 40 कंप्यूटर होंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हाल ही में दिल्ली सरकार ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के तहत 100 सरकारी स्कूलों में 100 आईसीटी लैब स्थापित करने के लिए एक निजी संगठन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। सूद ने यह भी दावा किया कि आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार ने स्कूलों में एक भी कंप्यूटर लैब स्थापित नहीं किए और सर्व शिक्षा अभियान के तहत बनी लैब को भी नहीं चला सकी। दिल्ली में आप सरकार के दौरान 2015 से 2019 तक 907 सरकारी स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत केंद्र द्वारा उपलब्ध कराए गए धन से कंप्यूटर लैब स्थापित किए गए। हालांकि, सूद ने दावा किया कि ये सभी प्रयोगशालाएं अभी काम नहीं कर रही हैं।आम आदमी पार्टी (आप) ने सूद के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि उन्हें पिछली सरकार के बारे में "बार-बार शिकायत करने" की आदत हो गई है। पार्टी ने एक बयान में कहा, "यदि इस बयान में कोई दम है तो उन्हें (सूद को) एक और जांच का आदेश देना चाहिए तथा इस मामले को जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को भेजना चाहिए।
- शिमला/ हिमाचल प्रदेश में बहुपति प्रथा (एक महिला के कई पति होना) कोई नई बात नहीं है। इस परंपरा से जुड़े कई जानकारों का कहना है कि राज्य के कुछ हिस्सों में यह प्रथा इसलिए चली आ रही है ताकि परिवार एकजुट रहे और ज़मीन का बंटवारा न हो। यह पुरानी परंपरा एक बार चर्चा में तब आई जब सिरमौर जिले के ट्रांसगिरी क्षेत्र के शिलाई गांव में हाटी जनजाति के दो भाइयों ने हाल ही में एक ही महिला से शादी की। राजस्व, बागवानी और जनजातीय मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा, ‘‘यह कोई नई परंपरा नहीं है। बहुपति प्रथा प्राचीन जनजातीय परंपरा और संस्कृति का हिस्सा रही है, जिसका उद्देश्य जमीन को बंटने से बचाना है। यह प्रथा किन्नौर और सिरमौर जिले के कुछ हिस्सों में आज भी प्रचलित है।'' नेगी किन्नौर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं।सुनीता चौहान नामक महिला ने प्रदीप और कपिल नेगी से शादी की और कहा कि उन्हें इस परंपरा पर गर्व है और उन्होंने यह निर्णय संयुक्त रूप से लिया है। शिलाई विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग मंत्री हर्षवर्धन ने कहा, ‘‘यह परंपरा पुरानी है और शिलाई में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां ऐसी शादी नहीं हुई होगी।'' हिमाचल प्रदेश के राजस्व कानून इस परंपरा को मान्यता देते हैं, जिसे ‘‘जोड़ीदारा'' कहा जाता है। इस परंपरा को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 494 और 495 के तहत भी मान्यता प्राप्त है। हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वाई.एस. परमार ने इस परंपरा पर शोध किया था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से ‘‘हिमालय में बहुपति प्रथा: सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि'' विषय पर पीएच.डी की थी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में डॉ. वाई एस परमार पीठ के पूर्व अध्यक्ष ओ पी शर्मा ने बताया, ‘‘वाई.एस. परमार के शोध के अनुसार, बहुपति प्रथा हिमालय के सभी पांच खंडों कश्मीर से लेकर नेपाल तक प्रचलित थी। इस प्रथा के पीछे मनोवैज्ञानिक, जैविक और आर्थिक कारण थे।'' शर्मा ने कहा कि योद्धा समुदाय के कुछ वर्ग विशेषकर खासू और टोड यह मानते हैं कि महाभारत के पांडव उनके पूर्वज हैं और वे स्वेच्छा से इस परंपरा को आज भी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि परमार ने बिगड़े लिंगानुपात के आंकड़ों का हवाला दिया था, जिसमें दिखाया गया था कि लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में कम थी। शर्मा ने कहा, ‘‘छोटी जमीनों को एकसाथ बनाए रखना और शादियों में कम खर्च होना इस परंपरा के पीछे के आर्थिक कारण थे।'' विधि के छात्र कृष्ण प्रताप सिंह ने कहा, ‘‘अगर सह-जीवन साथी संबंध को स्वीकार किया जा सकता है तो फिर सदियों पुरानी परंपराओं से दिक्कत क्यों? मेरे गांव कोटी (सिरमौर ज़िला) में 15-20 ऐसे परिवार हैं, जहां एक महिला की शादी एक से ज़्यादा पुरुषों से हुई है और हम चाहते हैं कि यह परंपरा आगे भी बनी रहे।'' बलमा देवी ने कहा, ‘‘ऐसे विवाह में परिवार के रिश्ते मजबूत रहते हैं और ज़मीन भी बंटने से बची रहती है।'' संत राम ने कहा, ‘‘बहुपति प्रथा एक पुरानी परंपरा है जिसमें भाईचारा बना रहता है और खर्चे भी ठीक से संभाले जा सकते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम चार भाइयों की शादी दो महिलाओं से हुई है।''हाटी समुदाय हिमाचल प्रदेश-उत्तराखंड सीमा पर रहने वाला एक सघन समुदाय है, जिसे तीन साल पहले अनुसूचित जनजाति घोषित किया गया था। इस जनजाति में बहुपति प्रथा सदियों से प्रचलित थी, लेकिन अब महिलाओं में बढ़ती साक्षरता और समुदाय की आर्थिक स्थिति में सुधार के चलते इसके मामले पहले की तरह सामने नहीं आते, क्योंकि यह एक बेहद साधारण रस्म हुआ करती थी। हाटी समुदाय की प्रमुख संस्था केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने कहा कि यह परंपरा हजारों साल पहले इसलिए शुरू की गई थी ताकि परिवार की खेती की जमीन का आगे विभाजन न हो सके। उन्होंने बताया कि इस परंपरा का एक और उद्देश्य संयुक्त परिवार में भाईचारा और आपसी समझ को बढ़ावा देना था, जहां कभी-कभी अलग-अलग माताओं से जन्मे दो या अधिक भाइयों की शादी भी एक ही दुल्हन से कराई जाती थी। इस प्रथा का तीसरा कारण सुरक्षा की भावना है।शास्त्री ने कहा, ‘‘यदि आपका परिवार बड़ा है और उसमें अधिक पुरुष हैं तो आप आदिवासी समाज में अधिक सुरक्षित हैं।'' उन्होंने कहा कि यह परंपरा दूर-दराज़ के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बिखरी हुई कृषि ज़मीन की देखभाल और खेती के लिए मददगार होती है, क्योंकि ऐसी ज़मीन को संभालने के लिए लंबे समय तक पूरे परिवार की आवश्यकता होती है।
- बाराबंकी/अयोध्या/बस्ती/संभल (उप्र). उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, अयोध्या और बस्ती जिलों में मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर से कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की। बाराबंकी जिले के रामनगर स्थित महाभारत कालीन शिव मंदिर ‘महादेवा' में मंगलवार को श्रद्धा का खास रूप देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी तथा पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने महादेवा में पूजन-अर्चन एवं जलाभिषेक के लिए आए शिव भक्तों और कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की। मंदिर के मुख्य पुजारी वीरेंद्र कुमार अवस्थी ने इस पहल की सराहना की है।महाभारत काल से जुड़े इस तीर्थ स्थल पर लाखों श्रद्धालु नंगे पांव कांवड़ यात्रा करके पहुंचते हैं और शिव जी का जलाभिषेक कर मनोवांछित फल की कामना करते हैं। लोटे में जल, बेलपत्र और पुष्प समेत पूजन सामग्री लेकर पहुंचने वाले ये श्रद्धालु ‘बम-बम भोले' और ‘हर हर महादेव' का जयकारा लगाते हुए पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा के दौरान प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने हेलीकॉप्टर से यहां आने वाले शिव भक्तों/कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की।उन्होंने हनुमानगढ़ी मंदिर, नागेश्वरनाथ मंदिर, दर्शन मार्ग, सरयू घाट, लता मंगेशकर चौक और राम मंदिर के ऊपर हेलीकॉप्टर से कांवड़ियों पर गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं। अधिकारियों ने बताया कि हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा को लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य उन श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का सम्मान करना है जो बड़ी संख्या में नंगे पैर चलकर मंदिर में जलाभिषेक और अन्य अनुष्ठान करने आते हैं। बस्ती में, मंडलायुक्त अखिलेश सिंह और पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) संजीव त्यागी ने पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर द्वारा भदेश्वर नाथ मंदिर और कांवड़ यात्रा मार्गों का हवाई निरीक्षण किया। उन्होंने कांवड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था, मार्ग परिवर्तन, अवरोधकों आदि का जायजा लिया। हवाई निरीक्षण के दौरान भदेश्वर नाथ मंदिर, अमहट, फुटहिया और अन्य स्थानों पर कांवड़ यात्रा के मार्गों पर कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की गई।संभल जिले में, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा की। शहर बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। संभल थाना क्षेत्र के अंतर्गत चौधरी सराय पुलिस चौकी पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण कुमार, सीओ आलोक भाटी ने मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ मिलकर कांवड़ियों पर गुलाब के फूल बरसाए। श्रद्धापूर्वक कांवड़ लेकर आ रहे शिवभक्तों को फल भी वितरित किए गए। एसपी कृष्ण कुमार ने कहा कि जिस तरह से मुस्लिम समुदाय ने शिविर लगाकर कांवड़ लेकर आ रहे शिवभक्तों पर पुष्प वर्षा की और फल वितरित किए, वह भाईचारे की मिसाल पेश करता है। श्रद्धाभाव के साथ कांवड़ लेकर आ रहे शिवभक्तों को फलों का वितरण किया गया। थाना असमोली क्षेत्र के जोया मार्ग स्थित मनौटा पुल पर सीओ कुलदीप कुमार, एसडीएम विकास चंद्र एवं निरीक्षक राजीव कुमार मलिक ने भी कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की।
- नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को लोगों से भारतीयता को आत्मसात करने और दुनिया को उन सभी समस्याओं का समाधान दिखाने का आह्वान किया, जिनका वह सामना कर रही है। भागवत ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भौतिकवाद के कारण विश्व अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है और अब वह इनके उत्तर के लिए भारत की ओर देख रहा है, क्योंकि पिछले 2,000 वर्षों में लोगों के जीवन में खुशी और संतोष लाने के लिए पश्चिमी विचारों पर आधारित सभी प्रयास विफल हो गए हैं।उन्होंने कहा कि दुनिया में विज्ञान और आर्थिक क्षेत्र में हुई सभी प्रगतियों ने विलासिता की चीजें ला दीं और लोगों का जीवन आसान बना दिया, लेकिन दुखों का अंत नहीं कर सकीं। इग्नू और अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में भागवत ने कहा, "शोषण बढ़ा, गरीबी बढ़ी। गरीब और अमीर के बीच की खाई दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।" उन्होंने कहा, "प्रथम विश्व युद्ध के बाद शांति की वकालत करते हुए कई किताबें लिखी गईं, भविष्य में फिर से युद्ध न हो, इसके लिए राष्ट्र संघ का गठन किया गया, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन हुआ। लेकिन आज हम सोच रहे हैं कि क्या तीसरा विश्व युद्ध होगा।" भागवत ने कहा कि भारतीयता ही आज दुनिया के सामने मौजूद सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान है।आरएसएस प्रमुख ने कहा, "भारत का होने का क्या अर्थ है? भारतीयता नागरिकता नहीं है। बेशक, नागरिकता आवश्यक है। लेकिन, भारत का हिस्सा बनने के लिए भारत का स्वभाव होना जरूरी है। भारत का स्वभाव पूरे जीवन के बारे में सोचता है। हिंदू दर्शन में चार पुरुषार्थ हैं...मोक्ष जीवन का अंतिम लक्ष्य है।" उन्होंने कहा कि इसी धर्म के अनुशासन के कारण भारत कभी सबसे समृद्ध राष्ट्र था और दुनिया इसे जानती है। भागवत ने कहा, "इसलिए दुनिया भारत की ओर देखती है और उम्मीद करती है कि यह उन्हें एक नया रास्ता दिखाएगा। हमें दुनिया को रास्ता दिखाना होगा। इसके लिए हमें अपना 'राष्ट्र' तैयार करना होगा, जिसकी शुरुआत खुद से और अपने परिवार से होगी।" उपस्थित लोगों से परिवर्तन के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए भागवत ने कहा, "हम जो इतिहास जानते हैं, वह पश्चिम द्वारा पढ़ाया जाता है। मैं सुन रहा हूं कि हमारे देश के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं।" आरएसएस प्रमुख ने कहा, "उनके (पश्चिमी देशों के) लिए, भारत का कोई अस्तित्व नहीं है। यह विश्व मानचित्र पर तो दिखाई देता है, लेकिन उनके विचारों में नहीं। अगर आप किताबों में देखेंगे, तो आपको चीन और जापान ही मिलेंगे, भारत नहीं।"
- पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गया 47 सदस्यों का दूसरा जत्था मंगलवार को भारत लौट आया। यात्रा की नोडल एजेंसी कुमांउ मंडल विकास निगम के एक अधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था तिब्बत में अपनी यात्रा पूरी कर सुबह सवा 10 बजे लिपुलेख पहुंचा। उन्होंने बताया कि धुंध भरे मौसम के बीच लिपुलेख में श्रद्धालुओं का स्वागत भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने किया । अधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं को बूंदी में रात्रि विश्राम करना था लेकिन पंचायत चुनाव के कारण उन्हें गुंजी शिविर में ठहराया जाएगा । तिब्बत गए दूसरे जत्थे में कुल 48 श्रद्धालु थे हांलांकि, उसमें शामिल पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी यात्रा के दौरान घोड़े से गिरकर घायल होने के कारण दो दिन पहले ही भारत लौट आयी थीं। इस साल लिपुलेख के जरिए पांच जत्थों में करीब 250 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे हैं ।
- नयी दिल्ली. भारतीय शहर बाढ़, बढ़ते तापमान और अन्य जलवायु संबंधी जोखिमों के प्रति लगातार संवेदनशील होते जा रहे हैं और 2050 तक मजबूत और कम कार्बन उत्सर्जन वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 2,400 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी। मंगलवार को जारी विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय शहरों में आर्थिक वृद्धि के केंद्र बनने की काफी संभावनाएं हैं और 2030 तक 70 प्रतिशत नई नौकरियां शहरों से आएंगी। ‘भारत में मजबूत और समृद्ध शहरों की ओर' शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के प्रभावों से निपटने और भविष्य में अरबों डॉलर के नुकसान को रोकने के लिए शहरों को समय पर कदम उठाने की आवश्यकता है।'' आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ साझेदारी में तैयार की गईइस रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘‘वर्षा से संबंधित बाढ़ से होने वाला वार्षिक आर्थिक नुकसान वर्तमान में चार अरब डॉलर आंका गया है। अगर कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाये गये, तो 2030 तक यह बढ़कर पांच अरब डॉलर और 2070 तक 14 से 30 अरब डॉलर के बीच हो सकता है।'' रिपोर्ट के अनुसार, शहरों का ज्यादातर विस्तार ‘बाढ़ प्रभावित और अत्यधिक गर्मी से प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों' में हो रहा है। रिपोर्ट में दिल्ली, चेन्नई, सूरत और लखनऊ को, खासकर संवेदनशील क्षेत्रों में बस्तियों के विस्तार के कारण अधिक तापमान के प्रभावों और बाढ़ के जोखिमों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील शहरों में चिह्नित किया गया है। इसमें कहा गया है, ‘‘दिल्ली में, बढ़ते तापमान और शहरी बाढ़ से जुड़े जोखिम हैं। गर्मी का दबाव भी बढ़ने की आशंका है। 1983 और 2016 के बीच, भारत के 10 सबसे बड़े शहरों में खतरनाक स्तर के तापमान के संपर्क में 71 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह सालाना 4.3 अरब से बढ़कर 10.1 अरब व्यक्ति-घंटे हो गया।'' रिपोर्ट में गर्मी से लोगों की मृत्यु पर चिंता जताई गई है।इसमें कहा गया है, ‘‘अगर उत्सर्जन मौजूदा स्तर पर जारी रहा, तो 2050 तक गर्मी से संबंधित मौतों की सालाना संख्या 1,44,000 से बढ़कर 3,28,000 से ज्यादा हो सकती है। अधिक तापमान से दबाव की स्थिति के कारण भारत के प्रमुख शहरों में लगभग 20 प्रतिशत कार्य घंटे बर्बाद हो सकते हैं।'' रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल तापमान में कमी लाने के उपायों से ही भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 0.4 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है और 2050 तक सालाना 1,30,000 लोगों की जान बचाई जा सकती है।
- भोपाल. अभिनेता अनुपम खेर ने मंगलवार को अपनी फिल्म ‘‘तन्वी द ग्रेट'' की विशेष प्रदर्शन के दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर फिल्म की अभिनेत्री शुभांगी दत्त और बाल कलाकार विराज अग्रवाल भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री यादव ने खेर को एक महान उद्देश्य वाली फिल्म बनाने के लिए बधाई दी, जबकि अभिनेता-निर्देशक ने उन्हें अपनी पुस्तक ‘‘डिफरेंट बट नो लेस'' भेंट की।
- गुवाहाटी. श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र सोसाइटी ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन पुस्तकालय को संरक्षण और प्रदर्शन के लिए पांच प्राचीन 'संचीपत' पांडुलिपियों का संग्रह सौंपा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक समारोह के दौरान कलाक्षेत्र के सचिव सुदर्शन ठाकुर ने पांडुलिपियां राष्ट्रपति भवन की सचिव दीप्ति उमाशंकर को सौंपीं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि गुवाहाटी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र सोसाइटी ने 'संचीपत' पांडुलिपियों को एकत्र करने के लिए असम के विभिन्न 'सत्रों' (वैष्णव मठों) के साथ समन्वय किया। प्रस्तुत पांडुलिपियों में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव द्वारा रचित 'कीर्तन घोष' शामिल है। भागवत पुराण के 10वें स्कंध पर आधारित श्रीमंत शंकरदेव का काव्यात्मक अनुवाद 'आदि दशम' भी दान में दिया गया है। ठाकुर ने कहा, "उम्मीद है कि इस महत्वपूर्ण कदम से असमिया भाषा की समृद्ध विरासत को नयी गति मिलेगी।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वह यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ चर्चा करेंगे। वह राजा चार्ल्स तृतीय से भी मुलाकात करेंगे। यात्रा के दौरान, भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों के व्यापारिक नेताओं के साथ बातचीत की भी योजना है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मंगलवार को विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी।विदेश सचिव ने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद से यह प्रधानमंत्री की यूनाइटेड किंगडम की चौथी यात्रा होगी। इससे पहले वह 2015 और 2018 में भी ब्रिटेन की यात्रा कर चुके हैं, और 2021 में ग्लासगो में आयोजित COP26 शिखर सम्मेलन में भी वहां गए थे। पिछले वर्ष ही, प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री स्टारमर दो बार मिल चुके हैं, पहली बार पिछले साल रियो डी जेनेरियो में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान, और हाल ही में, पिछले महीने जून में, कनाडा के कनानसकीस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान। वह कई बार फ़ोन पर भी संपर्क में रहे हैं। यह यात्रा, यद्यपि छोटी है, दोनों नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयाम की समीक्षा करने तथा इसे और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करेगी, साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक प्रासंगिकता वाले मुद्दों पर भी चर्चा होगी।विक्रम मिस्री ने बताया कि भारत-ब्रिटेन साझेदारी को 2021 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया गया था और तब से नियमित रूप से उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान हुए हैं। दोनों पक्ष इस साझेदारी को और भी उच्च स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। शिखर-स्तरीय बैठकों के अलावा, विदेश मंत्री और उनके समकक्ष, ब्रिटिश विदेश सचिव के स्तर पर नियमित बैठकें होती हैं, और मंत्रिस्तरीय स्तर पर कई अन्य संस्थागत तंत्र भी हैं, जो रणनीतिक मुद्दों, वित्तीय, आर्थिक, ऊर्जा संबंधी मुद्दों के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित मुद्दों से निपटते हैं। समकालीन समय में, व्यापार, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार और ज्ञान अर्थव्यवस्था के क्षेत्र हमारे द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं।उन्होंने आगे कहा कि उदाहरण के लिए, प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल, जिसकी एक वर्षगांठ होने वाली है पर पिछले साल हस्ताक्षर किए गए थे और यह इस बात का एक प्रमुख संकेतक है कि हम महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अपने संबंधों को किस दिशा में ले जा रहे हैं। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय ने हाल ही में, पिछले सप्ताह ही, गुरुग्राम में अपना परिसर खोला है, और यह नई शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने वाला पहला विदेशी विश्वविद्यालय है। अन्य देशों के विश्वविद्यालयों के अलावा, कई अन्य ब्रिटिश विश्वविद्यालय भी इसी नीति के तहत भारत में परिसर खोलने पर विचार कर रहे हैं।






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