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- नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नकली खादी प्राकृतिक पेंट के अवैध निर्माण और इसकी बिक्री में शामिल गाजियाबाद के एक व्यापारी को ऐसी सभी गतिविधियों को तुरंत रोकने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि, उमेश पाल के एकल स्वामित्व वाली प्रतिवादी जेबीएमआर एंटरप्राइजेज "खादी" ब्रांड नाम का अवैध रूप से इस्तेमाल करके तथा "खादी प्राकृतिक पेंट" के नाम एवं पैकेजिंग की नकल करके उपभोक्ताओं को गुमराह कर रही है और यह "जालसाजी" में लिप्त है। इसने खादी की "ख्याति तथा प्रतिष्ठा" को ठेस पहुंचाई है।खादी प्राकृतिक पेंट गाय के गोबर से बनाया गया एक अनूठा व अभिनव पेंट है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा विकसित फंगसरोधी तथा जीवाणुरोधी पेंट को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री नितिन गडकरी के द्वारा 12 जनवरी 2021 को लॉन्च किया गया था। लॉन्च होने के बाद से ही यह पेंट काफी लोकप्रिय हो गया और देश के सभी हिस्सों से भारी मात्रा में इसके ऑर्डर मिल रहे हैं।अदालत ने प्रतिवादी - जेबीएमआर एंटरप्राइजेज - को अपनी वेबसाइट www.khadiprakritikpaint.com का संचालन रद्द करने, व्यवसायिक नाम "खादी प्राकृतिक पेंट" के लिए संचालित अपना फेसबुक अकाउंट बंद करने और इसकी ईमेल आईडी [email protected] को निलंबित करने का भी निर्देश दिया है।केवीआईसी के अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि, प्रतिवादी जेबीएमआर एंटरप्राइजेज द्वारा इंडिया मार्ट और ट्रेड इंडिया जैसी थर्ड पार्टी वेबसाइटों पर भी नकली "खादी प्राकृतिक पेंट" बेचा जा रहा था। इसके अलावा, यह अपनी वेबसाइट पर एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार के आधिकारिक लोगो का इस्तेमाल उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाने के लिए कर रहा था कि, जेबीएमआर एंटरप्राइजेज सरकार से संबद्ध थी।केवीआईसी के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि, केवीआईसी ने "खादी प्राकृतिक पेंट" के निर्माण या विपणन के लिए किसी भी एजेंसी को आउटसोर्स नहीं किया है। केवीआईसी ने पिछले कुछ वर्षों में ऐसे उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। केवीआईसी ने अब तक 1000 से अधिक निजी फर्मों को अपने ब्रांड नाम का दुरुपयोग करने और खादी के नाम से उत्पाद बेचने के लिए कानूनी नोटिस जारी किए हैं।
- नई दिल्ली। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश द्वारा पहचाने गए, स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों के डेटा को संकलित करने और PRABANDH पोर्टल पर विशेष प्रशिक्षण केंद्रों के साथ इसकी मैपिंग के लिए एक ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार को जानकारी दी है कि स्कूल न जाने वाले चिन्हित बच्चों और उनके लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्रों की जानकारी ब्लॉक स्तर पर प्रखंड संसाधन समन्वयकों के तहत अपलोड की जाएगी। उन्होंने कहा कि समय पर योजना का आकलन करने के लिए समग्र शिक्षा पोर्टल पर तिमाही प्रगति रिपोर्ट और पुस्तिका भी साझा की गई है।
- नई दिल्ली। देश में विभिन्न स्थानों पर पदस्थापित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 2100 कांस्टेबल को हेड कांस्टेबल के तौर पर पदोन्नति दी गयी है। अद्र्धसैन्य बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में बताया। इन कर्मियों की पदोन्नति का आदेश कुछ समय पहले जारी किया गया था और यहां लोधी रोड स्थित सीजीओ कॉम्पलेक्स में बल के मुख्यालय समेत विभिन्न इकाइयों में इसके लिए समारोह का आयोजन हुआ।केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के प्रवक्ता ने बताया, कोविड-19 महामारी और सामाजिक दूरी के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली-एनसीआर तथा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात कुछ ही कांस्टेबल को समारोह के लिए मुख्यालय बुलाया गया। सीआईएसएफ के कार्यवाहक महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे। सक्सेना ने कर्मियों को बधाई दी और कहा कि नियमित पदोन्नति बल की क्षमताओं को बढ़ाने और कर्मियों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।सीआईएसएफ की स्थापना 1969 में हुई थी और यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करता है। सीआईएसएफ ताजमहल और लाल किला जैसे ऐतिहासिक स्थलों, इन्फोसिस जैसी निजी कंपनियों, दिल्ली मेट्रो, हवाई अड्डे, परमाणु प्रतिष्ठान जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को सुरक्षा मुहैया कराता है।
- नई दिल्ली। कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली के अलग अलग इलाकों में विभिन्न पेट्रोल पंपों के निकट सांकेतिक प्रदर्शन किया।पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल घोड़ा-गाड़ी पर सवार होकर फिरोज शाह कोटला स्टेडियम के निकट पेट्रोल पंप पहुंचे। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली तत्कालीन संप्रग सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय कर 9.20 रुपये था, लेकिन नरेद्र मोदी सरकार में इसके बढ़ाकर 32 रुपये कर दिया गया है।उन्होंने यह भी कहा, सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी बंद करना चाहिए। हम मांग करते हैं कि पेट्रोल एवं डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लिया जाए। कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने राजेंद्र नगर और जनपथ में पेट्रोप पंपों के निकट विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। कांग्रेस का दावा है कि पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के खिलाफ पूरे देश में सांकेतिक प्रदर्शन किया गया और इस दौरान कोरोना वायरस से संबंधित प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया गया।
- नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को पीजी मेडिकल की प्रवेश परीक्षा एक महीने बाद कराने का निर्देश दिया।न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की अवकाशकालीन पीठ ने परास्नातक मेडिकल में दाखिला चाहने वाले डॉक्टरों की याचिका पर यह निर्देश दिया और मामले का निस्तारण कर दिया। याचिका में आईएनआई सीईटी 2021 परीक्षा के लिए 16 जून की तारीख तय करने वाली अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। पीठ ने कहा कि परीक्षा के कारण उम्मीदवारों को हो रही दिक्कत और कोविड ड्यूटी के कारण कई डॉक्टरों के परीक्षा केंद्रों से दूर स्थानों पर काम करने की वजह से परीक्षा को टालने की जरूरत है।एम्स द्वारा आयोजित कराए जाने वाली राष्ट्रीय स्तर की इस परीक्षा में 815 सीटों के लिए करीब 80 हजार अभ्यर्थी हैं। ये 815 सीटें एम्स और जिपमर पुडुचेरी, एनआईएमएचएएनएस बेंगलुरु और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के आठ संस्थानों में हैं। आईएनआई सीईटी 2021 परीक्षा पहले आठ मई को होनी थी लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे 16 जून को कराने का फैसला लिया गया।
- रामगढ़। रांची विश्वविद्यालय से स्नातक 25 वर्षीय रंजन कुमार महतो झारखंड में लॉकडाउन लागू होने के चलते अपने खेत के तरबूज जब नहीं बेच पाये तो उन्होंने रामगढ़ छावनी के सिख रेजिमेंटल सेंटर के सैनिकों को पांच टन तरबूज की पेशकश की लेकिन सेना ने तरबूज बाजार कीमत पर खरीद लिये। रामगढ़ स्थित सिख रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर एम श्रीकुमार सहित एसआरसी के अधिकारी किसान रंजन कुमार महतो से इतने प्रभावित हुए कि बोकारो जिले के पास स्थित उनके खेत पर पहुंचे और तरबूज की उनकी उपज खरीद ली।कमांडेंट ब्रिगेडियर एम श्रीकुमार ने बताया कि उन्हें युवा किसान रंजन कुमार महतो की तरबूज की खेती के बारे में उन्हें जानकारी मिली और पता चला कि कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार पर रोक के लिए राज्य में लागू लॉकडाउन के कारण वह तरबूज की पैदावार को उचित दाम पर नहीं बेच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला कि महतो ने इस कारण से लगभग सवा सौ टन की तरबूज की पैदावार में से पांच टन तरबूज मुफ्त में सेना को देने का प्रस्ताव किया है। कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी होने पर गुरुवार को सपरिवार एवं अपने अन्य अधिकारियों के साथ महतो के खेत पर पहुंचे और वहां से सेना के ट्रकों में तरबूज रेजिमेंटल सेंटर ले आये। उन्होंने बताया कि महतो ने सेना को तरबूज मुफ्त देने का प्रस्ताव दिया था लेकिन ''हमने उन्हें बाजार भाव पर मूल्य चुकाया और उनका भरसक उत्साहवर्धन भी किया।''युवा किसान महतो ने बताया कि उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से कुछ वर्षों पूर्व स्नातक करने के बाद व्यावसायिक खेती करने का फैसला किया था और 25 एकड़ भूमि लीज पर ली थी। महतो ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष उसमें से पांच एकड़ भूमि पर लगभग 15 लाख रुपये की लागत से तरबूज की खेती की लेकिन लॉकडाउन के चलते तरबूज के खरीदार ही नहीं मिल रहे थे। महतो ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में कई अन्य प्रकार की सब्जियां भी उगायी हैं लेकिन राज्य में लागू लॉकडाउन के चलते उन्हें इस वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा, ''रामगढ़ से सेना के सिख रेजिमेंटल सेंटर के अधिकारी उनके बुलावे पर आज उनके खेतों पर पहुंचे और पांच टन तरबूज खरीद कर ले गये।
- मुंबई। मुंबई के पश्चिमी उपनगर दहीसर में स्थित एक चॉल में गुरुवार को तीन मकान गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि घटना दहीसर पूर्व के शिवाजी नगर इलाके के लोखंडी चॉल में शाम करीब 6.36 बजे हुई।बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने पर दमकल विभाग और अन्य एजेंसियों के कर्मी मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि एक व्यक्ति को मौके से बचाया गया और उसे कांदिवली के शताब्दी अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया, "हालांकि, अस्पताल के डॉक्टरों ने 26 वर्षीय प्रद्युम्न सरोज को भर्ती से पहले मृत घोषित कर दिया।
- नयी दिल्ली। उच्च शिक्षा में सकल पंजीकरण अनुपात (जीईआर) पिछले पांच साल में 11 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है वहीं इसी अवधि में पढ़ाई के लिए महिलाओं का पंजीकरण 18 फीसद से अधिक बढ़ा है। उच्च शिक्षा के अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई), 2019-20 में यह बात सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार देश में 2015-16 से 2019-20 की अवधि में विश्वविद्यालयों की संख्या 30.5 प्रतिशत बढ़ी है, वहीं इसी अवधि में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले कॉलेजों की संख्या करीब 8.4 प्रतिशत बढ़ी है। सर्वेक्षण में कुल 1,019 विश्वविद्यालय, 39,955 कॉलेज और 9,599 अन्य संस्थानों ने भाग लिया। इसमें देश में उच्च शिक्षा की मौजूदा स्थिति पर प्रमुख संकेतकों का उल्लेख किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट किया, ‘‘2019-20 में सकल पंजीकरण अनुपात या उच्च शिक्षा में पंजीकरण कराने वाले पात्र आयु समूह के विद्यार्थियों का प्रतिशत 27.1 है, जिसमें 2018-19 (26.3 प्रतिशत) तथा 2014-15 (24.3 प्रतिशत) से वृद्धि दर्ज की गयी है।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमने देश में शिक्षण संस्थानों की अत्यधिक वृद्धि देखी है। 2015-16 में देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 799 थी जो 2019-20 में 30.5 प्रतिशत बढ़कर 1,043 हुई। 2015-16 में देश में कॉलेजों की संख्या 39,071 थी जो 2019-20 में 8.4 प्रतिशत बढ़कर 42,343 हुई।'' देश में सर्वाधिक छात्र पंजीकरण उत्तर प्रदेश में दर्ज किया गया जहां 49.1 प्रतिशत छात्रा और 50.9 फीसदी छात्राएं हैं।
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) शिखर सम्मेलन के संपर्क (आउटरीच) सत्रों को 12 और 13 जून को संबोधित करेंगे। वह ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के आमंत्रण पर डिजिटल माध्यम से इस सम्मेलन में शिरकत करेंगे। ब्रिटेन इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है और उसने भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका को जी-7 सम्मेलन में आमंत्रित किया है। जी-7 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, अमेरिका और ब्रिटेन के साथ ही यूरोपीय संघ है। यह दूसरा मौका होगा जब प्रधानमंत्री जी-7 की बैठक में शामिल होंगे। वर्ष 2019 में फ्रांस की अध्यक्षता में हुए जी-7 के शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित किया गया था। इस सम्मेलन के ‘‘जलवायु, जैव विविधता और महासागर और डिजिटल बदलाव'' से जुड़े सत्रों में प्रधानमंत्री ने हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि सम्मेलन का विषय ‘‘बेहतर पुननिर्माण'' है और ब्रिटेन ने अपनी अध्यक्षता के तहत चार प्राथमिक क्षेत्र तय किए हैं। बयान के मुताबिक इनमें भविष्य की महामारियों के खिलाफ लचीलेपन को मजबूती प्रदान करने के साथ ही कोरोना वायरस महामारी से वैश्विक 'रिकवरी' का नेतृत्व करना, जलवायु परिवर्तन का समाधान, निष्पक्ष और मुक्त व्यापार का समर्थन करते हुए भावी समृद्धि को बढ़ावा देना और साझा मूल्यों व खुले समाजों का समर्थन करना शामिल है। इस सम्मेलन में स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन को केंद्र में रखकर कोरोना महामारी से वैश्विक रिकवरी के आगे के रास्तों पर सभी नेता अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। ज्ञात हो कि विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कहा था कि मोदी देश में कोरोना वायरस महामारी की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर जी-7 के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्रिटेन नहीं जाएंगे। पिछले महीने विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए लंदन का दौरा किया था। हालांकि भारतीय प्रतिनिधमंडल के दो सदस्यों के कोविड-19 से संक्रमित पाये जाने के बाद वह स्वयं इस सम्मेलन में उपस्थित नहीं हो सके थे। उन्होंने डिजिटल माध्यम से सम्मेलन में हिस्सा लिया था।
- नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर कार्यरत कर्मियों में टीकाकरण के निम्न स्तर, खासतौर पर दूसरी खुराक के मामले को ‘ गंभीर चिंता' करार देते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बृहस्पतिवार को सलाह दी कि वे प्राथमिकता वाले समूह को दूसरी खुराक देने पर ध्यान केंद्रित करें एवं इसके लिए प्रभावी योजना बनाएं। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक टीकाकरण में प्रगति के लिए केंद्र स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की अध्यक्षता में राज्यों के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई और इस दौरान रेखांकित किया कि गया कि 82 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों (एचसीडब्ल्यू) को ही टीके की पहली खुराक दी गई है जबकि दूसरी खुराक के मामले में यह संख्या महज 56 प्रतिशत है। बयान के मुताबिक पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, तमिलनाडु और असम सहित 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस समूह के टीकाकरण का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। बयान में कहा गया कि अग्रिम मोर्चे पर कार्यरत कर्मियों में 85 प्रतिशत को टीके की पहली खुराक दी गई लेकिन दूसरी खुराक केवल 47 प्रतिशत कर्मियों को ही दी गई है। इसके मुताबिक बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, तेलंगाना, कर्नाटक और पंजाब सहित कुल 19 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं जहां पर अग्रिम मोर्चे के कर्मियों को दूसरी खुराक देने का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव दोहराया कि महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवा की रक्षा व इस समूह के बीच सार्वभौमिक टीकाकरण जरूरी है एवं लाभार्थियों की पूर्ण सुरक्षा के लिए समय पर टीकाकरण अहम है। राज्यों से कहा गया कि वे स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर कार्यरत कर्मियों पर ध्यान केंद्रित करें और दूसरी खुराक सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी योजना बनाए। बयान के मुताबिक राज्यों को इस समूह के टीकाकरण के लिए विशेष समय और सत्र निर्धारित करने का सुझाव दिया गया। भूषण ने रेखांकित किया कि कोविड-19 टीकाकरण अभियान में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी अपर्याप्त है।
- कोलकाता । प्रख्यात फिल्म निर्देशक बुद्धदेब दासगुप्ता का काफी दिनों तक गुर्दे की बीमारी से जूझने के बाद बृहस्पतिवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से यहां स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी और उनकी पहली शादी से दो बेटियां हैं। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दासगुप्ता की पत्नी सोहिनी ने शहर में कलिकापुर इलाके में स्थित उनके आवास में सुबह छह बजे देखा कि दासगुप्ता के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें नींद में ही दिल का दौरा पड़ा था। दासगुप्ता कहानियों को दिलचस्प तरीके से पेश करने के लिए प्रसिद्ध थे, वह अक्सर जटिल मानवीय चरित्रों की पड़ताल में शामिल होते थे और मार्मिक प्रश्नों को सामने लाते थे। उनकी राजनीतिक विचारधारा उनके सिनेमा में अच्छी तरह से परिलक्षित होती थी । उनकी कई कविताएं भी प्रकाशित हुईं है। जाने-माने निर्देशक के देहांत पर देशभर से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानमंत्री ने भी उनके निधन पर दुख जताया। मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘बुद्धदेव दासगुप्ता के निधन से दुखी हूं। उनके विविधतापूर्ण कार्यों ने समाज के सभी वर्गों के दिलों को छुआ । वह एक प्रसिद्ध विचारक और कवि भी थे। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के सदस्यों और उनके चाहने वालों के साथ हैं।'' निर्देशक के परिवार एवं मित्रों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, “प्रख्यात फिल्मकार बुद्धदेव दासगुप्ता के निधन से दुखी हूं। अपने काम के जरिए उन्होंने सिनेमा की भाषा को अनूठा बना दिया। उनका निधन फिल्म समुदाय के लिए बड़ा नुकसान है।” उनके निधन पर दुख जाहिर करते हुए फिल्मकार गौतम घोष ने कहा, “बुद्ध दा खराब सेहत के बावजूद फिल्म बना रहे थे, लेख लिख रहे थे और सक्रिय थे। उन्होंने स्वस्थ न होते हुए भी 'टोपे' और ‘उरोजहाज' का निर्देशन किया। उनका जाना हम सबके लिए बहुत बड़ा नुकसान है।” अभिनेत्री-निर्देशक अर्पणा सेन ने कहा कि दासगुप्ता की फिल्में ‘‘यथार्थवाद में डूबी'' रहती थीं।सेन ने कहा, “मुझे दुख है कि मैं बुद्धदेब दा को श्मशान घाट जाकर अंतिम विदाई नहीं दे पाउंगी जैसा मैंने मृणाल दा को दी थी। यह दुखी करने वाला है कि हम इस कोविड वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के कारण उनके जैसे क्षमतावान निर्देशक को उचित सम्मान नहीं दे सकते हैं।” 1944 में पुरुलिया में जन्मे, दासगुप्ता ने अपने करियर की शुरुआत एक कॉलेज में व्याख्याता के तौर पर की थी। बाद में कलकत्ता फिल्म सोसाइटी में सदस्य के तौर पर नामांकन के बाद वह 1970 के दशक में फिल्म निर्माण में उतर गए। उन्होंने अपनी पहली फीचर फिल्म 1978 में बनाई थी और एक कवि-संगीतकार-निर्देशक के तौर पर अपनी छाप छोड़ी थी। उनके निर्देशन में बनीं कुछ प्रसिद्ध फिल्मों में ‘नीम अन्नपूर्णा', ‘गृहजुद्ध', ‘बाघ बहादुर', , ‘लाल दर्जा', ‘उत्तरा', ‘स्वपनेर दिन', ‘कालपुरुष' आदि शामिल है। उन्होंने ‘अंधी गली' और ‘अनवर का अजब किस्सा' जैसी हिंदी फिल्मों का भी निर्देशन किया।अभिनेता एवं रंगमंच की हस्ती कौशिक सेन ने कहा कि दासगुप्ता सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक और मृणाल सेन जैसे फिल्मकारों के स्तर के थे “जिन्होंने बांग्ला सिनेमा को वैश्विक मंचों तक पहुंचाया।” उन्होंने कहा, “उनपर अकसर आरोप लगता था कि वह ऐसा सिनेमा बनाते हैं जो बड़े जनसमूह को आसानी से समझ में नहीं आती है। लेकिन वह उस शैली पर टिके रहे, वह कभी अपने भरोसे से भटके नहीं।” अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी ने दासगुप्ता के साथ 'स्वप्नेर दिन' और 'अमी यास्मीन आर अमर मधुबाला' में काम किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि "बुद्धदेव दासगुप्ता भारतीय सिनेमा और अंतरराष्ट्रीय फिल्म हलकों में एक प्रेरक प्रकाश थे।" अभिनेता चंदन रॉय ने कहा कि वह सहजता से सपनों को वास्तविकता के जोड़ देते थे।दासगुप्ता ने अपने जीवनकाल में 12 राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। वह उदारवादी विचारधारा के थे और हाल के वर्षों में उन्होंने कई राजनीतिक गतिविधियों की आलोचना की थी। वह युवा फिल्मकार अनिक दत्ता के साथ तब खड़े रहे जब सत्ता वर्ग विरोधी फिल्म ‘भोबिष्योतर भूत' को रिलीज़ होने के एक हफ्ते बाद सिनेमा घरों से हटा दिया गया था। बॉलीवुड अभिनेता नवाज़दुद्दीन सिद्दीकी ने दासगुप्ता को “एक सच्चे दिग्गज निर्देशक" और एक "महा मानव" बताया। उन्होंने कहा कि वह भाग्यवान हैं कि उन्हें ‘अनवर का अजब किस्सा' में निर्देशक के साथ काम करने का मौका मिला। इसी फिल्म में काम करने वाले ‘मिर्जापुर' के अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने कहा कि उनका फिल्मकार के साथ बहुत शानदार और स्नेह का रिश्ता था। वह सिनेमा के मास्टर थे और उनका आज चले जाना बहुत दुखद है। दासगुप्ता को बंगाली सिनेमा का बेहतरीन निर्देशक बताते हुए अभिनेत्री दीप्ती नवल ने कहा , “"मुझे उनके साथ 'अंधी गली' नामक एक हिंदी फिल्म में काम करने का सौभाग्य मिला और तब से बुद्ध दा के लिए उनके मन में न केवल एक अच्छे निर्देशक के रूप में बल्कि एक अत्यंत संवेदनशील कवि और एक अद्भुत, सौम्य इंसान के रूप में भी बहुत सम्मान है।” वेनिस फिल्म उत्सव सिल्वर लायन, लोकार्नो क्रिटिक्स पुरस्कार और लोकार्नो स्पेशल जूरी पुरस्कार के विजेता ने कुछ साल पहले अपनी एक फिल्म को व्यावसायिक रिलीज न मिलने पर कहा था, “मुझे दुख होता है कि मेरी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलती है लेकिन कोलकाता और बंगाल के अन्य हिस्सों में वे सिनेमाघरों में नहीं पहुंच पाती हैं।
- भोपाल । मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने राज्य में कोविड-19 से जान गंवाने वाले 86 कर्मचारियों के परिजनों को आठ दिन के अंदर अनुकंपा आधार पर नियुक्ति देने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। सिलावट ने बृहस्पतिवार को यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘प्रदेश में कोविड-19 महामारी के कारण जल संसाधन विभाग के कुल 86 कर्मचारियों की जान चली गई। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे कर्मियों के परिजनों को आठ दिन के अंदर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दी जाए।'' उन्होंने प्रदेश के सभी संबंधित अधिकारियों को इस मुद्दे पर कार्यवाही के साथ विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय को अद्यतन करने का भी निर्देश दिया। इससे पहले, सिलावट चौकीदार उत्तम मेश्राम के घर गये और उनके बेटे मनीष को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र सौंपा। इसके साथ ही मंत्री ने अधिकारियों के साथ मनीष को कार्यालय भेजा ताकि वह आज ही सेवा में शामिल हो सके। उत्तम मेश्राम की कोविड-19 बीमारी से मृत्यु हो गई थी। सिलावट इसके बाद कर्मचारी अशोक कुमार खरे के घर भी पहुंचे। खरे की भी कोविड-19 के कारण मृत्यु हो गई थी। मंत्री ने खरे की पत्नी को 3.25 लाख रुपये बकाया राशि का मंजूरी पत्र सौंपा। इसके साथ ही उन्होंने एक अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के लिए नामित किया कि खरे के परिवार को उनकी सभी बकाया सुविधाएं हासिल हों। मंत्री ने प्रदेश के सभी संभागों में एक-एक अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के लिए नामित किया कि कोविड-19 के कारण जान गंवाने वाले विभाग के कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को उनकी सभी बकाया सुविधाएं हासिल हों। साथ ही सिलावट ने मृतक कर्मचारियों के परिवार से संपर्क में रहने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। मंत्री ने अनुकंपा के आधार पर कर्मचारियों के घर जाकर व्यक्तिगत रूप से नियुक्ति पत्र सौंपने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।
- जयपुर। राजस्थान के राजसमंद जिले के केलवाड़ा थाना क्षेत्र में बृहस्पतिवार को दो भाइयों के शव एक पेड़ से लटके मिले। थानाधिकारी शैतान सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने शवों को पेड़ से लटका देखकर पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेजा है। उन्होंने बताया कि अंबालाल (22) और उसका छोटा भाई प्रकाश (18) गुजरात में काम करते थे और कुछ दिन पहले ही राजसमंद लौटे थे। दोनों के शव बृहस्पतिवार को पेड़ से लटके मिले। पुलिस मामले की जांच कर रही है।-file photo
- अंतिम तिथि 15 सितम्बरनयी दिल्ली। केंद्र ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह पद्म पुरस्कारों को ‘‘जनता का पद्म'' में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र ने साथ ही सभी नागरिकों से प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान के लिए स्व-नामांकन सहित नामांकन और सिफारिशें करने का आग्रह किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि गणतंत्र दिवस, 2022 की पूर्व संध्या पर घोषित किए जाने वाले इन पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन नामांकन या सिफारिशें खुली हैं, जिसकी अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2021 है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ऐसे नामांकन और सिफारिशें केवल ऑनलाइन प्राप्त की जाएंगी।पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में शामिल हैं जिनमें मुख्य तौर पर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री शामिल है। बयान में कहा गया है कि सरकार पद्म पुरस्कारों को ‘‘जनता का पद्म'' में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसलिए सभी नागरिकों से नामांकन, स्व-नामांकन सहित सिफारिशें करने का अनुरोध किया जाता है। नामांकन और सिफारिशों में पोर्टल पर उपलब्ध प्रारूप में निर्दिष्ट सभी प्रासंगिक विवरण शामिल होने चाहिए, जिसमें वर्णनात्मक रूप में एक उद्धरण (अधिकतम 800 शब्द), होना चाहिए जिसमें व्यक्ति की विशिष्ट और असाधारण उपलब्धियां और व्यक्ति द्वारा प्रदान की गई सेवाएं शामिल होनी चाहिए। केंद्र सरकार ने पहले ही सभी राज्यों को संभावित पुरस्कार विजेताओं का पता लगाने के लिए एक विशेष खोज समिति गठित करने के लिए कहा है, जिन्हें उनकी असाधारण सेवाओं के बावजूद इस पुरस्कार के लिए उनके नाम पर अब तक विचार नहीं किया गया है। 2014 से मोदी सरकार ऐसे ‘नायकों' को पद्म पुरस्कार प्रदान कर रही है जिन्होंने विभिन्न तरीकों से समाज में योगदान दिया है। गृह मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, राज्यों सरकारों, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन भारत रत्न और पद्म विभूषण पुरस्कार विजेताओं और उत्कृष्टता संस्थानों से अनुरोध किया है कि महिलाओं, समाज के कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति में से प्रतिभाशाली व्यक्तियों की पहचान करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। बयान में कहा गया है कि 'दिव्यांग' व्यक्ति जो समाज की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं और जिनकी उत्कृष्टता और उपलब्धियां वास्तव में सम्मान के पात्र हैं। गृह मंत्रालय ने हाल ही में राज्यों को भेजे एक पत्र में कहा था कि अक्सर ऐसे कई लोगों को मुख्य रूप से इस कारण से अनदेखा किया जा सकता है कि वे सार्वजनिक क्षेत्र में प्रचार या ध्यान दिये जाने की चाहत नहीं रखते। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आर के सिंह द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है, ‘‘इसलिए, ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने के लिए ठोस प्रयास करने का अनुरोध किया जाता है जिनकी उत्कृष्टता और उपलब्धियों को मान्यता दी जानी चाहिए और उनके पक्ष में उपयुक्त नामांकन करें। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि ऐसे योग्य व्यक्तियों की मान्यता केवल इन पुरस्कारों की प्रतिष्ठा को बढ़ाएगी।'' उन्होंने कहा, ‘‘उपरोक्त पृष्ठभूमि में मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया गणतंत्र दिवस, 2022 के अवसर पर घोषित किए जाने वाले पद्म पुरस्कारों के लिए उपयुक्त नामांकन भेजें। इस संबंध में, यह सुझाव दिया जाता है कि आप पहचान करने, विचार करने और अंतिम रूप देने के लिए एक विशेष खोज समिति का गठन कर सकते हैं।
- आगरा ।आगरा में बृहस्पतिवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 पर स्थित छलेसर फ्लाईओवर पर एक बस वहां खड़े एक कैंटर वाहन से टकरा गई। हादसे में बस में सवार कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि हादसा एत्मादपुर थाना क्षेत्र में आने वाले इलाके में सुबह करीब 4.30 बजे हुआ। उत्तर प्रदेश रोडवेज की बस कानपुर से आ रही थी और आगरा बस स्टैंड की ओर जा रही थी। पुलिस उप-निरीक्षक उदयवीर सिंह ने बताया कि बस पहले सड़क पर खड़े कैंटर से टकराई और उसके बाद डिवाइडर पर चढ़ गई। उन्होंने कहा कि मृतकों की पहचान मणि (60), रेशम (65), मंडलेश्वर (28) और नरेंद्र सिंह चौहान (52) के तौर पर की गई है। एसआई सिंह के अनुसार घायलों का यहां सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है।
- संभल (उत्तर प्रदेश) । सम्भल जिले में एक कारोबारी से कथित रूप से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगे जाने के मामले में एक युवक को हिरासत में लिया गया है। पुलिस सूत्रों ने बृहस्पतिवार को बताया कि प्लाईवुड व्यापारी शरद कुमार के रामनौमी मुहल्ले में स्थित उनके घर पर आठ जून की दोपहर को एक व्यक्ति ने घंटी बजायी और दरवाजे पर एक लिफाफा फेंककर भाग गया। उन्होंने बताया कि लिफाफे में रखे एक पत्र में एक करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की गई। इस मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। घर के बाहर लगे सीसीटीवी की फुटेज के आधार पर एक युवक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्रा ने बताया कि एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया गया है । मामले की जांच की जा रही है।
- लंदन। ब्रिटेन और भारत के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से एक कम लागत वाला सेंसर विकसित किया है, जो अपशिष्ट जल में कोविड-19 के लिये जिम्मेदार वायरस के अंशों का पता लगा सकता है। इससे स्वास्थ्य अधिकारियों के लिये इस बात की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी कि यह रोग कितने बड़े हिस्से में फैला है। स्ट्रैथसाइडल विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-बॉम्बे द्वारा विकसित इस तकनीक का इस्तेमाल निम्न और मध्यम आय वाले देशों में कोविड-19 के व्यापक प्रसार पर नजर रखने में किया जा सकता है, जो बड़े पैमाने पर लोगों की जांच करने के लिये संघर्ष कर रहे हैं। हाल ही में 'सेंसर्स एंड एक्चुएटर्स बी: कैमिकल' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अनुसंधान के अनुसार सेंसर का पोर्टेबल उपकरण के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें सार्स-कोव-2 वायरस का पता लगाने के लिये मानक पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) जांच का उपयोग किया जाता है। इसमें समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण पीसीआर जांच के लिये महंगे रसायनों और प्रयोगशाला की जरूरत नहीं होती। मुंबई में एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से एकत्र किए गए अपशिष्ट जल के साथ सेंसर का परीक्षण किया गया था, जिसमें सार्स-कोव-2 राइबोन्यूक्लिक एसिड (आरएनए) था। सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग में चांसलर फेलो डॉ एंडी वार्ड ने कहा: ''कई निम्न-से-मध्यम आय वाले देशों को सामूहिक परीक्षण के लिए आवश्यक सुविधाओं तक सीमित पहुंच के कारण लोगों के बीच कोविड -19 का पता लगाने में चुनौती का सामना करना पड़ता है। अपशिष्ट जल में वायरस के अंशों के बारे में पता चलने से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि यह बीमारी कितने बड़े क्षेत्र में कितनी फैली है।'' आईआईटी बॉम्बे में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सिद्धार्थ तल्लूर ने कहा: “हमने जो तरीका विकसित किया है वह सिर्फ सार्स-कोव-2 पर लागू नहीं है, इसे किसी भी अन्य वायरस पर लागू किया जा सकता है, इसलिए यह बहुत बहुमुखी है।'' उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में हम सटीकता बढ़ाने के लिए परीक्षण को और अधिक अनुकूल करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
- मॉस्को।रूस के स्वेर्दलोवस्क क्षेत्र में बृहस्पतिवार सुबह एक बस चालक के वाहन से नियंत्रण खोने के बाद हुई दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इस बस में श्रमिक सवार थे जो लेस्नॉय के एक संयंत्र में जा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार वाहन के ब्रेक फेल हो गए जिससे यह संयंत्र के दरवाजों से टकराया और निकट के बस स्टॉप पर खड़े लोगों को भी इसने कुचल दिया। इस मामले की आपराधिक जांच भी शुरू की गई है।
- मुंबई। मुंबई के मलवनी इलाके में रहने वाले रफीक शेख यह समझ नहीं पा रहे हैं कि खुद की जान बचने पर वह ईश्वर का शुक्रिया अदा करें या पत्नी सहित परिवार के आठ सदस्यों की जान जाने पर शोक मनाएं। दरअसल बुधवार देर रात तीन मंजिला इमारत की दो मंजिल, एक मंजिले घर पर गिर जाने से आठ बच्चों सहित 11 लोगों की मौत हो गई थी। शेख (45) उसी इमारत में परिवार के साथ किराए पर रहते थे और इमारत गिरने से महज कुछ मिनट पहले दूध लेने के लिए घर से बाहर गए थे। शेख जब लौटे तो पाया कि उनकी दुनिया ही उजड़ चुकी है। उनकी पत्नी, भाई, भाभी और दोनों परिवारों के छह बच्चों की जान इस हादसे में चली गई। शेख ने पत्रकारों को बताया कि परिवार का एक अन्य सदस्य मलबे में दबने की वजह से घायल हुआ है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके परिवार में अब 16 साल का बेटा बचा है जो हादसे के वक्त दवा खरीदने के लिए घर से बाहर था। शेख ने बताया, ‘‘जब हादसा हुआ, तब मैं सुबह की चाय के लिए दूध लेने गया था। मैं नहीं जानता था कि इमारत इतनी खस्ताहाल है। मेरे परिवार को इमारत गिरने के वक्त वहां से निकलने का समय ही नहीं मिला।'' उन्होंने बताया कि जब वह लौटे तो देखा कि कई स्थानीय लोग बचाव दल के आने से पहले घटना स्थल से मलबा हटा रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि इलाके में अधिकतर मकान गैर कानूनी तरीके से बने हैं और बाद में बिना नगर निकाय की मंजूरी के, इन्हें तीन या चार मंजिला इमारतों में तब्दील किया गया है। उन्होंने बताया कि अधिकतर मकानों के मालिक अन्य स्थानों पर रहते हैं और ये मकान गरीब लोगों को किराए पर दे दिये गये हैं। इससे पहले निकाय अधिकारी ने बताया कि मलवनी इलाके के अब्दुल हमीद रोड स्थित कलेक्टर परिसर में यह इमारत बुधवार देर रात करीब 11 बजकर 15 मिनट पर गिरी। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) विश्वास नांगरे पाटिल ने बताया कि इमारत को गैर कानूनी तरीके से बनाया गया था और उसमें ढांचागत खामी थी। उन्होंने बताया कि इमारत को पिछले माह चक्रवाती तूफान ताउते की वजह से भी नुकसान पहुंचा था।-
- नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया दो अगस्त से शुरू करने का निर्णय लिया है जो कोविड-19 के मामले बढऩे के कारण टल गई थी। एक आधिकारिक वक्तव्य में यह जानकारी दी गई।यूपीएससी द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) तथा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों का चयन करने के लिए तीन चरणों में सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन किया जाता है। उम्मीदवारों को प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण (साक्षात्कार) से गुजरना होता है।कोरोना वायरस के मामले बढऩे के कारण आयोग ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए होने वाले साक्षात्कार इस वर्ष अप्रैल में टाल दिए थे। यूपीएससी की ओर से जारी वक्तव्य में बताया गया, हालात की समीक्षा करने के बाद आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 के लिए व्यक्तित्व परीक्षण की प्रक्रिया दो अगस्त 2021 से आरंभ करने का निर्णय लिया है। साक्षात्कार के लिए ई-समन पत्र जल्द ही उपलब्ध करवाए जाएंगे तथा इन्हें आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकेगा।मुख्य परीक्षा के परिणाम इस वर्ष 23 मार्च को घोषित किए गए थे तथा साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू करने के लिए 26 अप्रैल की तारीख तय की गई थी लेकिन कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इन्हें एहतियाती तौर पर टाल दिया गया।
- हाजीपुर (बिहार)। वैशाली जिले के गंगा ब्रिज थाना क्षेत्र के जरूआ बाजार स्थित एचडीएफसी बैंक की एक शाखा से गरुवार की सुबह हथियारबंद लुटेरों ने बैंककर्मियों को बंधक बनाकर 1.19 करोड़ रुपये लूट लिए ।वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राघव दयाल ने बताया कि बाइक सवार चार बदमाशों ने इस घटना को अंजाम दिया। बैंक शाखा खुलने पर आज सुबह करीब 10.20 बजे इन बदमाशों ने शाखा में प्रवेश किया और हथियार के बल बैंककर्मियों को बंधक बनाकर उक्त राशि लूटने के बाद फरार हो गए । वैशाली के पुलिस अधीक्षक मनीष ने अन्य पुलिस पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का मुआयना किया और बैंककर्मियों से पूछताछ की। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष दल का गठन किया है।
- नई दिल्ली। मैनकाइंड फार्मा ने गुरुवार को कहा कि उसने देश में ब्लैक फंगस के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा पोसाकोनाजोल गैस्ट्रो प्रतिरोधी टैबलेट की पेशकश की है।कंपनी ने इस दवा को पोसाफोर्स 100 ब्रांड नाम से बाजार में उतारा है। मैनकाइंड फार्मा ने एक बयान में कहा, चूंकि ब्लैक फंगस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए इस संक्रमण से लडऩे के लिए दवा की पेशकश की गई है। दवा कंपनी हमेशा फार्मास्युटिकल उद्योग में सर्वोत्तम गुणवत्ता मानकों के साथ सस्ती दवाएं पेश करने की कोशिश करती है। देश में अब तक घातक ब्लैक फंगस के 12 हजार से अधिक मामले देखे गए हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में हैं।
- नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को राहत दी है। इसके तहत कर्मचारियों के माता-पिता या परिवार का कोई आश्रित सदस्य यदि कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाते हैं तो वे उस स्थिति में 15 दिनों के विशेष आकस्मिक अवकाश (एससीएल) लेने के लिए पात्र होंगे। कार्मिक मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि यदि परिवार के किसी सदस्य/माता-पिता को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ती है और यह 15 दिनों का एससीएल खत्म हो जाता है तो ऐसी स्थिति में सरकारी कर्मचारी को अपने उस रिश्तेदार के अस्पताल से छुट्टी मिलने तक कोई अन्य छुट्टी दी जा सकती है।मंत्रालय ने कोविड महामारी के दौरान इलाज, अस्पताल में भर्ती, पृथक-वास आदि के बारे में उसके सामने कई तरह की जिज्ञासाएं सामने आने पर विस्तृत आदेश जारी किया है। उसने सरकारी कर्मचारियों के सामने आ रही परेशानियों को भी ध्यान में रखा है। आदेश में कहा गया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी कोविड-19 से संक्रमित हो जाता है और वह घर में पृथक-वास या अन्यत्र पृथकवास में है तो उसे 20 दिनों तक की परिवर्तित छुट्टी दी जा सकती है।उसमें कहा गया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी कोविड-19 संक्रमित पाया जाता है और वह घर में पृथकवास में है और उसे अस्पताल में भी भर्ती किया जाता है तो उसे संक्रमित पाए जाने के समय से 20 दिनों तक के लिए परिवर्तित अवकाश/एससीएल/अर्जित अवकाश दिया जा सकता है।केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के लिए जारी किए गए इस आदेश में कहा गया है कि यदि कोविड संक्रमित पाए जाने के 20वें दिन बाद भी सरकारी कर्मचारी को अस्पताल में रखना पड़ता है तो उसे इस संबंध में दस्तावेजी सबूत के आधार पर परिवर्तित अवकाश मिलेगा।
- खरीफ मौसम की अन्य फसलों के एमएसपी भी बढ़ाए गएनई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को फसल वर्ष 2021-22 के दौरान धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 72 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 1,940 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। इसके साथ ही खरीफ मौसम की अन्य फसलों के एमएसपी भी बढ़ाये गये हैं। धान खरीफ मौसम की प्रमुख फसल है, जिसकी बुवाई दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत आने के साथ शुरू हो जाती है। मौसम विभाग ने जून-सितंबर अवधि में मानसून सामान्य रहने का अनुमान लगाया है।प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इससे किसानों को खरीफ मौसम में फसल की बुवाई को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। एमएसपी की घोषणा और दक्षिण पश्चिम मानसून के आगे बढऩे के साथ खरीफ मौसम की बुवाई भी आगे बढ़ती है।मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर से एमएसपी के बारे में आशंकाओं को दूर करते हुए कहा, एमएसपी (फसलों पर) जारी है, इसे बढ़ाया जा रहा है और भविष्य में भी यह क्रम जारी रहेगा।मंत्रिमंडल ने फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) के लिए धान (सामान्य किस्म) के एमएसपी को एक साल पहले के 1,868 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1,940 रुपये प्रति क्विंटल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसी तरह, बाजरा का एमएसपी चालू वर्ष के लिए पिछले वर्ष के 2,150 रुपये से बढ़ाकर 2,250 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। कृषि मंत्री ने कहा कि एमएसपी को नियमित रूप से बढ़ाया जा रहा है और इसका लाभ किसानों तक पहुंच रहा है।
- नयी दिल्ली उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने बुधवार को चुनाव आयुक्त का पदभार संभाल लिया। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। पांडेय आयोग में दो निर्वाचन आयुक्तों में से एक हैं। उनके अलावा राजीव कुमार भी निर्वाचन आयुक्त हैं। सुशील चंद्रा मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। वर्ष 1984 बैच के आईएएस अधिकारी रहे पांडेय को मंगलवार को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया था। वह फरवरी, 2024 में 65 साल की आयु पूरा होने पर निर्वाचन आयोग की सेवा से मुक्त होंगे। निर्वाचन आयोग में आने से पहले पांडेय राष्ट्रीय हरित अधिकण निगरानी समिति (उप्र) के सदस्य थे। उनके उत्तर प्रदेश का मुख्य सचिव रहने के दौरान प्रयाग राज में कुंभ मेले और राज्य में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन किया गया था। वह उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास आयुक्त भी रह चुके हैं।





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