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- कोलंबो. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच संभावित ईंधन संकट से निपटने के लिए श्रीलंका ने सोमवार को चार दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत अब हर बुधवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। वर्तमान में श्रीलंका में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है।आवश्यक सेवाओं के आयुक्त प्रभात चंद्रकीर्ति ने कहा कि 18 मार्च से हर बुधवार को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं, बंदरगाह, जल आपूर्ति और सीमा शुल्क विभाग पर लागू नहीं होगी। हालांकि स्कूलों, विश्वविद्यालयों और न्यायपालिका में यह लागू रहेगा। सरकार ने निजी क्षेत्र से भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाने की अपेक्षा की है। यह फैसला राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की अध्यक्षता में हुई एक विशेष बैठक में लिया गया।
- ब्रसेल्स. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को यूरोपीय संघ (ईयू) के शीर्ष नेतृत्व और विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात के दौरान भारत-ईयू के बीच हुए समझौतों के कार्यान्वयन और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के दो-दिवसीय दौरे पर पहुंचे जयशंकर ने ईयू के विदेश मामलों की परिषद की बैठक में भाग लिया। इसके लिए उन्हें ईयू की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने आमंत्रित किया था। इस अवसर पर जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 2026 में भारत-ईयू संबंधों में 'नया अध्याय' खुला है और बैठक में दोनों पक्षों के बीच हुए विभिन्न समझौतों को ठोस परिणामों में बदलने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि वार्ता में विशेष रूप से व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, आवागमन और रक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने कहा कि इन चर्चाओं ने 'बहुध्रुवीय विश्व में भारत और ईयू के बीच मजबूत सहमति' को भी दर्शाया और पश्चिम एशिया संकट, यूक्रेन की स्थिति तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर विचार-विमर्श किया गया। जयशंकर ने इस दौरे पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष अर्सुला फॉन डेर लायन से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि जनवरी में लायन का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों में 'मोड़' लेकर आया और इस पर तेजी से अमल किया जा रहा है।फॉन डेर लायन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईयू और भारत अब हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और सुरक्षा साझेदारी के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। फॉन डेर लायन ने कहा, "जनवरी में हुए ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में हमने एफटीए और सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे। अब हम इसे प्रभावी रूप से लागू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि यूरोप और भारत के लोगों को जल्द परिणाम मिल सके।" जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल, स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार, और यूनान के विदेश मंत्री जियोर्गोस जेरापेट्रिटिस से भी द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि इन मुलाकातों में मुख्य रूप से रक्षा, विनिर्माण, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का यूरोपीय संघ के साथ कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर का रहा, जिसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर और आयात 60 अरब डॉलर रहा।
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नई दिल्ली। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है। सोमवार को 17वें दिन भी बाहरी दुनिया से संपर्क साधने में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इंटरनेट गतिविधियों पर नजर रखने वाले नेटब्लॉक्स के अनुसार देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से बहुत नीचे गिर चुकी है, जिससे लोगों के लिए ऑनलाइन सेवाओं और बाहरी दुनिया से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है।
इस ब्लैकआउट के कारण ईरान में केवल कुछ व्हाइटलिस्टेड सेवाएं और राष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क (एनआईएन) ही सीमित रूप से काम कर पा रहे हैं, जबकि ज्यादातर वैश्विक वेबसाइट और प्लेटफॉर्म ठप पड़े हैं। एनआईएन को ‘हलाल इंटरनेट’ नाम से भी जाना जाता है; यह एक घरेलू इंट्रानेट सिस्टम है, जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट को बंद करने के बावजूद आंतरिक सेवाओं (बैंकिंग, सरकारी वेबसाइट) को चलाने के लिए प्रयोग में लाती है। 2026 की शुरुआत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान जब व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट लागू किया गया तो जनता को इसी नियंत्रित नेटवर्क पर स्विच कर दिया गया, जिससे उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया था।दरअसल, सामान्य इंटरनेट ‘ब्लैकलिस्ट’ पर काम करता है, यानी सब ओपन रहता है, बस कुछ चीजों पर पाबंदी रहती है। ये पाबंदियां पूरी दुनिया पर लागू नहीं होती हैं, यानी दूसरे देश के लोग इसे देख सुन सकते हैं। हलाल इंटरनेट ‘व्हाइटलिस्ट’ पर चलता है; इसमें सब कुछ बंद है, केवल वे वेबसाइटें खुली हैं जिन्हें सरकार ने ‘हलाल’ या ‘सुरक्षित’ घोषित किया है। नेटब्लॉक्स के मुताबिक, अगर आप ईरान में हैं, तो इसके जरिए मोहल्ले के दुकानदार को पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, लेकिन किसी दूसरे देश में संपर्क नहीं साध सकते। आप केवल सरकार की ओर से सुझाई गई या अप्रूव न्यूज पढ़ सकते हैं, लेकिन इंस्टाग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया का एक्सेस आपको नहीं होता है। -
काहिरा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ''बंद करने'' के ईरान के प्रयास से प्रभावित देशों से आग्रह किया है कि वे वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस संकरे समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए पोत भेजें। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ उसके युद्ध के समाप्त होने के कोई आसान नजर नहीं आने के बीच, लोगों से संयुक्त अरब अमीरात के तीन बंदरगाहों को खाली करने का आग्रह किया। ईरान ने पश्चिम एशिया के सबसे व्यस्त बंदरगाह और संयुक्त अरब अमीरात के दो अन्य बंदरगाहों को खाली करने का आह्वान किया है। यह पहली बार है जब ईरान ने किसी पड़ोसी देश की गैर-अमेरिकी परिसंपत्तियों पर हमले की खुले तौर पर धमकी दी है। ईरान ने कोई साक्ष्य दिए बिना कहा कि अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात के मुख्य टर्मिनल वाले खार्ग द्वीप पर हमला करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में ''बंदरगाहों, गोदियों और ठिकानों'' का इस्तेमाल किया। उसने लोगों से उन इलाकों को छोड़ने का आग्रह किया, जहां उसके अनुसार अमेरिकी बलों ने शरण ली है। इस बीच, लेबनान का मानवीय संकट और गहरा गया है। इजराइल ने ईरान समर्थित हिज्बुल्ला चरमपंथियों के खिलाफ कई हमले किए जिनमें 800 से अधिक लोग मारे गए हैं और 8,50,000 लोग विस्थापित हुए हैं। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज भेजने का आग्रह किया तथा कहा कि अमेरिका तटरेखा पर बमबारी जारी रखेगा और ईरानी पोतों एवं नौकाओं को निशाना बनाएगा। अमेरिका एवं इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हमला शुरू किया था और ईरान की जवाबी कार्रवाई के साथ यह युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया। ईरानी हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को प्रभावित किया है जो कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच शनिवार को इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर एक हेलीपैड पर मिसाइल से हमला हुआ जबकि संयुक्त अरब अमीरात में ईरान की रोकी गई मिसाइल का मलबा तेल संयंत्र पर गिर गया। 'एसोसिएटेड प्रेस' की तस्वीरों में बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास से धुआं उठता दिखा। इसके अलावा यूएई में फुजैरा बंदरगाह में आग लगती हुई दिखी जहां अधिकारियों के अनुसार एक ड्रोन को मार गिराया गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने खार्ग द्वीप और अबू मूसा द्वीप पर संयुक्त अरब अमीरात के दो स्थानों- रस अल खैमाह और दुबई के ''बेहद करीब'' एक जगह से हमला किया। उन्होंने इसे खतरनाक बताते हुए कहा कि ईरान ''वहां आबादी वाले किसी भी क्षेत्र पर हमला नहीं करने के लिए सावधानी बरतने की कोशिश करेगा।''
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नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय यूनियन (ईयू) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता के लिए रविवार को ब्रसेल्स का दो दिवसीय दौरा शुरू किया। जनवरी में दोनों पक्षों के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगने के बाद भारत की ओर से ब्रसेल्स का यह पहला उच्चस्तरीय दौरा है। ब्रसेल्स में ईयू का मुख्यालय है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास के निमंत्रण पर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स जा रहे हैं, जहां वह 27 देशों वाले ईयू के विदेश मंत्रियों से एक बैठक के दौरान बातचीत करेंगे। मंत्रालय ने कहा, "यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री यूरोपीय यूनियन के नेताओं और बेल्जियम तथा अन्य ईयू सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ बैठकें भी करेंगे।" मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, "ऐतिहासिक 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के ठीक बाद हो रही विदेश मंत्री की इस यात्रा से भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है।" भारत और यूरोपीय यूनियन ने 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ईयू के शीर्ष नेताओं के शिखर सम्मेलन के बाद मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। - काठमांडू,। नेपाल के मध्य क्षेत्र में भारतीय तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक यात्री बस के दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। यह घटना शनिवार को नेपाल के गंडकी प्रांत में हुई।पुलिस के अनुसार, तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस मनकामना मंदिर से लौट रही थी तभी गोरखा जिले में सड़क से नीचे गिर गई। गोरखा जिले के जिला यातायात पुलिस कार्यालय के प्रमुख सूरज आर्यल ने बताया कि मृतकों में दो महिलाएं और पांच पुरुष शामिल हैं और ये सभी भारतीय नागरिक हैं। जिला पुलिस कार्यालय प्रमुख भरत बहादुर बीके के अनुसार, पीड़ितों की पहचान मुथु कुमार (58), अनामलिक (58), मीनाक्षी (59), शिवगामी (53), विजयल (57), मीना (58) और तमिलारसी (60) के रूप में की गई है। 'काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, सात अन्य घायल यात्रियों को बचा लिया गया है और उनका आंबुखैरेनी के एक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। 'हिमालयन टाइम्स' के अनुसार, इलेक्ट्रिक बस का चालक बाल-बाल बच गया, जबकि उसका सहायक इस घटना में घायल हो गया। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
- इस्लामाबाद. शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार ने शनिवार को सरकारी स्वामित्व वाले उपक्रमों (एसओई) और स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों के वेतन में पांच से 30 प्रतिशत तक कटौती को मंजूरी दे दी। यह कदम व्यापक मितव्ययिता अभियान के तहत उठाया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकारी बचत उपायों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री शरीफ ने की। बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकारी कर्मचारियों की तरह ही राज्य के स्वामित्व वाले उपक्रमों और सरकार के संरक्षण में चलने वाले स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों के वेतन में भी 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी। बयान में कहा गया है कि इन उपायों से होने वाली बचत का उपयोग केवल जनता को राहत देने के लिए किया जाएगा। बैठक में यह भी बताया गया कि सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में 50 प्रतिशत कटौती की निगरानी तीसरे पक्ष के ऑडिट के माध्यम से की जाएगी, जबकि अगले दो महीनों में 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को सड़कों से हटा दिया जाएगा। बयान के अनुसार, सरकार द्वारा नए वाहनों की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध और अन्य सरकारी खरीद पर रोक के फैसले को भी लागू रखा जाएगा। कैबिनेट सदस्यों, मंत्रियों, सलाहकारों और विशेष सहायकों के दो महीनों के वेतन को भी जनकल्याण के लिए बचत के रूप में उपयोग किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और विशेष सहायकों की विदेशी यात्राओं पर लगाया गया पूर्ण प्रतिबंध जारी रहेगा। अमेरिका-ईरान युद्ध के तीसरे सप्ताह में पहुंचने के बाद पाकिस्तान पर इसका असर दिखने लगा है। पिछले शुक्रवार को पेट्रोलियम कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के बाद सरकार ने ईंधन खपत कम करने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी।
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दुबई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान के तेल नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण एक द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों पर शुक्रवार को बमबारी की। इस बीच एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध के लगभग दो सप्ताह बाद पश्चिम एशिया में 2,500 और मरीन एवं एक युद्धपोत भेजा जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग द्वीप पर स्थित ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। खार्ग द्वीप पर ईरान के तेल निर्यात का मुख्य टर्मिनल स्थित है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि द्वीप के तेल बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। इससे ठीक एक दिन पहले ईरानी संसद के अध्यक्ष ने कहा था कि यदि ऐसा हमला किया गया तो ईरान की ओर से और भी बड़े स्तर की जवाबी कार्रवाई की जाएगी। ईरान की राजधानी में शुक्रवार को एक भीषण विस्फोट हुआ जिससे शहर के केंद्रीय चौक को हिला कर रख दिया। विस्फोट के दौरान वहां हजारों लोग फलस्तीनियों के समर्थन में और इजराइल के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग को लेकर सरकार द्वारा आयोजित वार्षिक रैली में एकत्रित हुए थे। इजराइल ने चेतावनी दी थी कि वह मध्य तेहरान के इस इलाके को निशाना बनाएगा।
विस्फोट में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। हालांकि बाद में कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में प्रदर्शन को जारी रखने का निर्णय लिया गया। ईरान ने इजराइल और पड़ोसी खाड़ी देशों पर व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है। होर्मुज जलडमरुमध्य मार्ग से दुनिया के तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा गुजरता है। वहीं, अमेरिकी और इजराइली युद्धक विमान समूचे ईरान में सैन्य और अन्य लक्ष्यों पर बमबारी कर रहे हैं। 'फॉक्स न्यूज' को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने ईरान सरकार को गिराए जाने के सवाल पर संयमित रुख अपनाते हुए कहा, ''मुझे लगता है कि जिन लोगों के पास हथियार नहीं हैं, उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती है।'' उन्होंने ईरान के अर्द्धसैनिक बल बासिज का उदाहरण दिया जिसने हाल में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरान में ''दमनकारी साम्राज्य'' को रोकना उनके लिए तेल की कीमतों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू करने के बाद से तेल की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जहाजों और तेल अवसंरचना पर ईरानी हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, ''अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो हमें बहुत फायदा होता है। लेकिन राष्ट्रपति के रूप में मेरे लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण मुद्दा ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है, ताकि वह पश्चिम एशिया और वास्तव में पूरी दुनिया को नष्ट न कर दे।'' ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने सांसदों के साथ वार्ता की हैं। हालांकि, ऐसी खबरें भी हैं कि ट्रंप युद्ध में हासिल की गई प्रगति को लेकर मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में मीडिया पर 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के उद्देश्यों के बारे में मिली-जुली जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ''शुरुआत से ही, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पूरी टीम ने अमेरिकी जनता के सामने लगातार स्पष्ट उद्देश्य रखे हैं कि अमेरिकी सेना इन सफल प्रमुख युद्ध अभियानों के माध्यम से क्या हासिल करना चाहती है।''
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न्यूयॉर्क. दिग्गज कंपनी गूगल ने बृहस्पतिवार को अपने डिजिटल मानचित्र मंच 'गूगल मैप्स' में बड़े बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि अब यह सेवा लोगों को कहीं जाने की योजना बनाने और वहां पहुंचने का बेहतर तरीका बताने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) का अधिक इस्तेमाल करेगी। गूगल की 'जेमिनी' प्रौद्योगिकी से संचालित इस बदलाव के तहत मैप्स में दो नई एआई आधारित सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। दुनिया भर में 200 करोड़ से अधिक लोग इस सेवा का इस्तेमाल करते हैं। पहली सुविधा 'आस्क मैप्स' है, जो उपयोगकर्ताओं को बातचीत के अंदाज में सुझाव देगी। इसके जरिये उपयोगकर्ता मोबाइल चार्ज करने की नजदीकी जगह, कम भीड़ वाले कैफे या कई ठहराव वाली सड़क यात्रा के लिए विस्तृत यात्रा कार्यक्रम जैसी जानकारी पूछ सकेंगे। कंपनी ने बताया कि जेमिनी के सुझाव 30 करोड़ से अधिक स्थानों के डेटाबेस और 50 करोड़ से ज्यादा योगदानकर्ताओं की समीक्षा पर आधारित होंगे। 'आस्क मैप्स' सुविधा शुरुआत में गूगल मैप्स के मोबाइल ऐप पर अमेरिका और भारत में आईफोन एवं एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी। इसे बाद में कंप्यूटर और अन्य देशों में भी शुरू किया जाएगा। दूसरी नई सुविधा 'इमर्सिव नेविगेशन' है, जिसे गूगल ने मैप्स के ड्राइविंग निर्देशों में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव बताया है। यह सुविधा तीन-आयामी दृश्य के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को रास्ते की बेहतर समझ देगी। इसमें जेमिनी द्वारा तैयार 3डी दृश्य में प्रमुख इमारतें, सड़क के बीच बने डिवाइडर और आसपास का भू-भाग भी दिखेगा, जिससे वाहन चालकों को रास्ता समझने में आसानी होगी। यह सुविधा एक ही गंतव्य तक पहुंचने के लिए अलग-अलग मार्गों के फायदे एवं नुकसान भी बताएगी। इसके अलावा गंतव्य पर पहुंचने के बाद पार्किंग के बेहतर स्थानों की जानकारी भी दे सकेगी। गूगल ने कहा कि उसका एआई सुरक्षा ढांचा इतना मजबूत हो गया है कि जेमिनी प्रौद्योगिकी अब गलत या अस्तित्वहीन स्थान दिखाने जैसी समस्या से बच सकेगी। नई एआई-आधारित मार्गदर्शन सुविधा फिलहाल अमेरिका में गूगल मैप्स के मोबाइल ऐप और कारप्ले एवं एंड्रॉयड ऑटो से लैस वाहनों में उपलब्ध होगी।
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दुबई. अपने दिवंगत पिता की जगह संभालने के बाद ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने पहला बयान जारी कर बृहस्पतिवार को कहा कि ईरान अपने खाड़ी अरब के पड़ोसियों पर हमले जारी रखेगा और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के रणनीतिक लाभ का इस्तेमाल अमेरिका व इजराइल के खिलाफ दबाव के लिये करेगा। सरकारी टेलीविजन पर शीर्ष नेता खामेनेई (56) का बयान एक समाचार प्रस्तोता द्वारा पढ़ा गया। खामेनेई कैमरे के सामने नहीं आए और इजराइली आकलन से पता चलता है कि युद्ध की शुरुआती गोलीबारी में वह घायल हो गए थे। उन्होंने एक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए 165 लोगों समेत युद्ध में मारे गए लोगों का बदला लेने का संकल्प जताया। इस बयान से उस युद्ध को जारी रखने की इच्छा का संकेत मिलता है जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और खाड़ी अरब देशों को प्राप्त सापेक्ष सुरक्षा को बाधित किया है, और जिसने ईरान के नेतृत्व, सैन्य और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी भारी असर डाला है। युद्ध शुरू होने के बाद से खामेनेई को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।
फारस की खाड़ी में पोत परिवहन और ऊर्जा अवसंरचना पर ईरान के लगातार हमलों के कारण बृहस्पतिवार को तेल की कीमतें फिर से 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। अमेरिकी और इजराइली हमलों ने इस्लामिक गणराज्य पर कहर बरपाया और युद्ध के अंत के कोई स्पष्ट संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। ईरान वैश्विक स्तर पर इतना आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है जिससे अमेरिका और इजराइल पर बमबारी रोकने का दबाव पड़े। अमेरिका व इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले के साथ युद्ध की शुरुआत की थी। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि जब तक ईरान को किसी अन्य हमले के खिलाफ सुरक्षा गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक उसके हमले जारी रहेंगे, जिससे यह संकेत मिलता है कि युद्धविराम या अमेरिका द्वारा जीत की घोषणा के बावजूद संघर्ष रुकेगा नहीं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "काम पूरा करने" का वादा किया है, हालांकि उन्होंने दावा किया है कि ईरान "लगभग पूरी तरह से नष्ट हो चुका है"। इसी बीच, ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आतंकवादियों ने लेबनान से उत्तरी इजराइल पर लगभग 200 रॉकेट दागे, जबकि अन्य क्षेत्रों में सायरन बजने लगे और ईरानी मिसाइलों को रोके जाने से उत्पन्न तेज धमाकों की आवाजें सुनी जा सकती थीं। इजराइल ने तेहरान और लेबनान पर एक बार फिर हमले किये, जिसमें 11 लोग मारे गए। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने कहा है कि ईरान में चल रहे युद्ध के कारण लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। एजेंसी ने बताया कि इनमें से अधिकांश लोग तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों से भागकर देश के उत्तरी भाग या ग्रामीण क्षेत्रों की ओर चले गए हैं। इसमें कहा गया है कि लेबनान में कम से कम 759,000 लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं। बृहस्पतिवार को इजराइल की सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक और बड़े इलाके के निवासियों को उनके घर छोड़ने की चेतावनी दी। उसने कहा कि उन्हें जहरानी नदी के उत्तर में चले जाना चाहिए, जिसका मध्य बिंदु इजराइल की सीमा से लगभग 56 किलोमीटर दूर है। ईरानी अधिकारियों ने पीछे हटने की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है।
खामेनेई के बयान से पहले, ईरान के शिया धर्मतंत्र में अपेक्षाकृत उदारवादी माने जाने वाले राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने ऑनलाइन सुझाव दिया था कि युद्ध को समाप्त करने के लिए, दुनिया को ईरान के "वैध अधिकारों" को मान्यता देनी होगी, हर्जाना देना होगा और भविष्य में होने वाले हमलों के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी देनी होगी।
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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया। इसके बाद तेहरान ने सुरक्षा परिषद के खुलेआम दुरुपयोग की निंदा की। ईरान के खिलाफ ये प्रस्ताव बहरीन की ओर से रखा गया, जिसमें खाड़ी देशों पर ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई।
इससे पहले बहरीन के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि जमाल फारिस अलरोवैई ने कहा था था कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने सामूहिक रूप से ईरान की ओर से दागी गई 954 से अधिक मिसाइलों, 2,500 ड्रोन और 17 विमानों को इंटरसेप्ट किया है। जमाल फारिस अलरोवैई ने कहा था कि तेहरान की निंदा के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा।उन्होंने कहा कि छह सदस्यीय जीसीसी देशों पर हुए ये हमले व्यापार और समुद्री मार्गों को बाधित कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका असर सभी पर पड़ रहा है। ईरानी ने ये हमले आवासीय इमारतों, खाद्य वितरण केंद्रों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को निशाना बनाकर किए।संयुक्त अरब अमीरात के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि मोहम्मद अबूशहाब ने कहा कि यूएई ने स्पष्ट कर दिया था कि उसकी जमीन, हवाई क्षेत्र और क्षेत्रीय जल का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद तेहरान ने उनके देश को निशाना बनाया। यूएई ने अपने रक्षा संसाधनों का उपयोग कर इन हमलों का सामना किया और यदि ये क्षमताएं न होतीं तो भारी नुकसान और जान-माल की क्षति हो सकती थी। उन्होंने बताया कि 25 देशों के नागरिक ईरानी हमलों से प्रभावित हुए हैं।प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की गई इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसे कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। बहरीन ने ईरान द्वारा इन देशों के खिलाफ किए जा रहे सभी हमलों को तुरंत बंद करने की मांग की। साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत मान्यता प्राप्त व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया।इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के क्षेत्रों सहित नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की गई है।बहरीन के इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद ने 13 वोटों से पारित कर लिया गया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए कहा कि वह इन हमलों से अछूता नहीं है। सुरक्षा परिषद ने ईरान के साथ संवाद को सुगम बनाने और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के उद्देश्य से जीसीसी देशों और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के मध्यस्थता प्रयासों को भी स्वीकार किया।साथ ही आगे तनाव बढ़ने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। साथ ही खाड़ी राज्यों और जॉर्डन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए अपने समर्थन को दोहराया।इससे पहले रूस ने मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने पर एक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें सभी पक्षों से अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने और आगे तनाव बढ़ाने से बचने का आग्रह किया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया।रूस के इस प्रस्ताव के पक्ष में रूस, चीन, सोमालिया और पाकिस्तान के चार मत प्राप्त हुए, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और लातविया ने इसके विरुद्ध मतदान किया। वहीं, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, बहरीन, कोलंबिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, डेनमार्क, ग्रीस, लाइबेरिया और पनामा सहित नौ सदस्यों ने मतदान से परहेज किया। -
दुबई. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध अल्पकालिक हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस्लामी गणराज्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित करता है तो लड़ाई और तेज हो सकती है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उनके पुत्र अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को उनका उत्तराधिकारी चुना गया। इसके एक दिन बाद ही तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। निवेशकों का मानना है कि यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध के 10 दिन बाद ईरान अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। हालांकि बाद में कीमतों में थोड़ी नरमी आई, जिसके बाद अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई और यह उम्मीद जगी कि संभवत: ईरान के साथ युद्ध ज्यादा समय तक नहीं चलेगा। ट्रंप ने मियामी के पास अपने गोल्फ क्लब में रिपब्लिकन सांसदों से कहा, ''हम कुछ शैतानी ताकतों को खत्म करने के इरादे से कुछ समय के लिए पश्चिम एशिया में थे और मुझे उम्मीद है कि यह सब जल्द खत्म हो जाएगा।'' कुछ घंटे बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया: ''अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के प्रवाह को रोकने वाला कोई भी कदम उठाता है तो अमेरिका उस पर अब तक की तुलना में बीस गुना अधिक जोरदार हमले करेगा।'' ईरान के सरकारी मीडिया में ट्रंप की टिप्पणियों के प्रकाशन के बाद सीधा जवाब देते हुए अर्द्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' के प्रवक्ता अली मोहम्मद नाइनी ने कहा ''ईरान तय करेगा कि युद्ध कब खत्म करना है।'' राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध की शुरुआत में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की विचारधारा उनसे कुछ अलग थी, हालांकि उन्होंने दोनों के बीच मतभेद की बात को सिरे से खारिज कर दिया। सोमवार को अपने गोल्फ क्लब में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वेंस शायद युद्ध में जाने को लेकर उतने उत्साहित नहीं थे, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हवाई हमले शुरू करने का उनका फैसला जरूरी था। ट्रंप ने कहा, ''मुझे लगा कि यह करना जरूरी था। मुझे नहीं लगता था कि हमारे पास कोई और विकल्प था।
इस युद्ध ने विश्व बाजारों में तेल और गैस की प्रमुख आपूर्ति को बाधित कर दिया है और अमेरिका भर में ईंधन की कीमतें बढ़ गई हैं। इस लड़ाई के कारण विदेशी नागरिक व्यापारिक केंद्रों से पलायन कर रहे हैं और लाखों लोग शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं क्योंकि बम हमलों में सैन्य ठिकानों, सरकारी इमारतों, तेल और जल संयंत्रों, होटलों और स्कूल को निशाना बनाया जा रहा है। ट्रंप ने सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर बात की और युद्ध तथा अन्य मुद्दों पर चर्चा की। पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि खाड़ी देशों के नेताओं और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ बातचीत के बाद पुतिन ने संघर्ष के त्वरित राजनीतिक और राजनयिक समाधान के संबंध में कुछ विचार व्यक्त किए। ईरान के 56 वर्षीय धर्मगुरु खामेनेई इस्लामी गणराज्य के इतिहास में केवल तीसरे सर्वोच्च नेता हैं। उनके अर्द्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से घनिष्ठ संबंध हैं। इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान में कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई, जिसे 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से राजधानी पर सबसे भीषण हवाई हमला माना जा रहा है। ईरानी मीडिया ने नुकसान और हताहतों के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं दी। इजराइल ने सोमवार को कहा कि वह ईरान के इस्फहान शहर के साथ-साथ तेहरान और दक्षिणी ईरान में बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है। इजराइली सेना ने कहा कि उसने कई बुनियादी ढांचा स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें रिवोल्यूशनरी गार्ड का ड्रोन मुख्यालय भी शामिल है। -
दुबई. भारत ने बहरीन में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए सोमवार को एक परामर्श जारी कर क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को देखते हुए सतर्क रहने, उचित सावधानी बरतने और स्थानीय अधिकारियों के सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने का आग्रह किया। बहरीन स्थित भारतीय दूतावास ने एक परामर्श में कहा, ''भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे बहरीन स्थित भारतीय दूतावास और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी अद्यतन जानकारी और सलाह का पालन करें।'' परामर्श में कहा गया है कि बहरीन स्थित भारतीय दूतावास सामान्य रूप से कार्य कर रहा है।
यह परामर्श अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए हमलों के मद्देनजर जारी की गई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त रुप से हमला किया था, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच युद्ध जारी है। दूतावास ने सलाह जारी करते हुए कहा कि फंसे भारतीय नागरिकों, विशेषकर पर्यटक या अल्पकालिक वीजा धारकों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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दुबई. सऊदी अरब में एक आवासीय परिसर पर हुए मिसाइल हमले में किसी भी भारतीय की मौत नहीं हुई है। रियाद में भारतीय दूतावास ने सोमवार को यह बात कही। उसने कहा कि रविवार को इस घटना में घायल हुए एक भारतीय नागरिक का सरकारी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''राहत की बात है कि कल शाम अल खर्ज में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में किसी भी भारतीय की जान नहीं गयी।'' दूतावास ने बताया कि वह इस मामले में संबंधित सऊदी प्रशासन के संपर्क में है।
परामर्शदाता (सामुदायिक कल्याण) वाई साबिर ने रविवार रात अल खर्ज का दौरा किया और घटना में घायल हुए भारतीय नागरिक से मुलाकात की। दूतावास ने बताया, ''उनका (घायल व्यक्ति का) अल खर्ज के एक सरकारी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। रविवार को 'सऊदी सिविल डिफेंस' ने बताया था कि अल खर्ज में रखरखाव और सफाई से संबंधित एक कंपनी के आवासीय परिसर पर मिसाइल गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक भारतीय नागरिक था। उसने कहा था कि इस घटना में एक बांग्लादेशी नागरिक की भी मौत हो गई और 12 अन्य घायल हो गए।
हालांकि, सऊदी प्रशासन ने मृतकों की पहचान जारी नहीं की थी। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी से ईरान पर संयुक्त हमला शुरू किया था। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तेहरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए समझौते के लिए दबाव बढ़ाने के बाद कई दिनों से की जा रही तैयारियों के बाद हुआ। ईरान की जवाबी कार्रवाई ने युद्ध को पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैला दिया। -
दुबई. सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को आगाह किया कि अगर वह अरब देशों पर हमले करता रहा तो उसे अब तक का ''सबसे बड़ा नुकसान'' उठाना पड़ेगा। सऊदी अरब का यह बयान उस नए ड्रोन हमले के बाद आया, जिसमें जाहिर तौर पर उसके बड़े शायबा तेल क्षेत्र को निशाना बनाया गया। इसने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन द्वारा शनिवार को दिये गये इस बयान को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने खाड़ी अरब देशों पर अपने हमले रोक दिए हैं। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "देश इस बात की पुष्टि करता है कि ईरानी पक्ष ने इस बयान पर अमल नहीं किया, न तो राष्ट्रपति के भाषण के दौरान और न ही उसके बाद। ईरान ने बिना किसी ठोस वजह के अपना आक्रमण जारी रखा है।" बयान में कहा गया कि ईरानी हमले का मतलब है, "तनाव में और वृद्धि, जिसका वर्तमान और भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा।
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दुबई. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का कहना है कि ईरान ने रविवार को ताजा हमलों में 16 बैलिस्टिक मिसाइलें और 117 से अधिक ड्रोन दागे हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने सभी 16 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 17वीं मिसाइल समुद्र में गिर गई। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागे गए अधिकांश ड्रोन को आसमान में ही नष्ट कर दिया, लेकिन चार ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात की धरती पर गिरे। मंत्रालय ने कहा कि वह इन हमलों का 'दृढ़तापूर्वक सामना' करने के लिए तैयार है। इससे पहले, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इजराइल और अमेरिका द्वारा जारी हमलों के मद्देनजर रविवार को पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ाने की धमकी दी थी।
- काठमांडू. रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह 'बालेन' नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बन गए हैं। बालेन ने नेपाल के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में के.पी. शर्मा ओली को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया। ओली चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 'बालेन' के नाम से प्रसिद्ध बालेंद्र शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। बालेन ने 2022 में काठमांडू के महापौर पद के लिए हुए चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। पिछले साल सितंबर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हिंसक प्रदर्शनों के बाद ओली नीत गठबंधन सरकार गिर गयी थी। उसके बाद जेनरेशन जेड के युवाओं ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए 35 वर्षीय इंजीनियर बालेन को लोकप्रिय उम्मीदवार माना था। जेनरेशन जेड 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी है। लेकिन बालेन ने उस समय अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह संसदीय चुनाव लड़कर पूर्ण कार्यकाल के लिए सरकार का नेतृत्व करना पसंद करेंगे। जनवरी में, वह रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए और जल्द ही उन्हें पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। काठमांडू के महापौर के रूप में, बालेन को व्यापक सुधारों और महानगर के सौंदर्यीकरण का श्रेय दिया जाता है। अपने त्यागपत्र में बालेन ने कहा, ''काठमांडू के महापौर के रूप में, मैंने महानगर और इसके निवासियों के कल्याण के लिए यथासंभव ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया है।'' काठमांडू में जन्मे बालेन आयुर्वेद चिकित्सक राम नारायण शाह और गृहिणी ध्रुवदेवी शाह के सबसे छोटे पुत्र हैं। उन्हें बचपन से ही संगीत और कविता में रुचि थी और शिक्षा के दौरान उन्होंने रैप संगीत की ओर रुख किया। काठमांडू से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद, बालेन ने कर्नाटक के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की।
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यरूशलम. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि तेहरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया था और वह ''कुछ ही महीनों में परमाणु प्रतिरक्षा प्राप्त कर लेता''। नेतन्याहू ने मंगलवार को फॉक्स न्यूज से कहा कि ईरान पर हमला करना बेहद जरूरी था क्योंकि तेहरान अपने मिसाइल एवं परमाणु कार्यक्रमों को हमलों से बचाने के लिए नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था। उन्होंने कहा, "ईरान ने नए ठिकाने, नए स्थल, भूमिगत बंकर बनाना शुरू कर दिया, जो उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु बम कार्यक्रम को कुछ ही महीनों में सुरक्षित कर देते। अगर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।" इजराइली प्रधानमंत्री ने टीवी चैनल से कहा, ''हमें अभी कार्रवाई करनी पड़ी, इसका कारण यह है कि पिछले साल जून में हुए 12 दिवसीय युद्ध में उनके परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर हमला करने के बाद... उन्होंने नए ठिकाने और भूमिगत बंकर बनाने शुरू कर दिए, जो कुछ ही महीनों में उनके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु बम कार्यक्रम को सुरक्षित कर देते।'' उन्होंने कहा, ''अगर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।''
यह नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल किए गए दावों के विपरीत है।इजराइली नेता ने कहा था कि इजराइल ने ईरान पर ''ऐतिहासिक विजय'' हासिल की है जो ''पीढ़ियों तक कायम रहेगी''। वहीं, ट्रंप ने दावा किया था कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से ''नष्ट'' हो गया है। साक्षात्कार में नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका और इजराइल ईरान के खिलाफ ''अंतहीन युद्ध'' में लगे हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अभियान जल्द ही समाप्त हो जाएगा। इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैंने लोगों को यह कहते सुना है कि यहां एक अंतहीन युद्ध होने वाला है - लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि... ईरान में यह आतंकी शासन अपनी स्थापना के बाद से सबसे कमजोर दौर में है।'' उन्होंने कहा, ''यह एक त्वरित और निर्णायक कार्रवाई होने वाली है।''नेतन्याहू ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों से ईरान में सत्ता परिवर्तन की परिस्थितियां उत्पन्न होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया की ''95 प्रतिशत'' समस्याएं ईरान के कारण उत्पन्न होती हैं, और शासन के पतन से इजराइल तथा उसके अरब और मुस्लिम पड़ोसियों के बीच शांति समझौतों की बाढ़ आ जाएगी। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि अमेरिका-इजराइल के अभियान से ''शांति के एक ऐसे युग की शुरुआत होगी जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी''। इजराइली नेता ने इन आरोपों का खंडन किया कि इजराइन ने अमेरिका को युद्ध में घसीटा है।उन्होंने कहा, ''यह हास्यास्पद है। डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता हैं। वह वही करते हैं जो उन्हें अमेरिका के लिए सही लगता है। वह वही करते हैं जो उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सही लगता है।'' नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस्लामी गणराज्य से उत्पन्न खतरों को समझते हैं। -
न्यूयॉर्क/ अमेरिका में एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत रातोंरात 11 सेंट बढ़कर लगभग 3.11 डॉलर हो गई। वाहन संघ 'अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (एएए)' ने यह जानकारी दी। अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने से पहले ही पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही थीं, क्योंकि तेल कंपनियां गर्मियों के लिए अलग तरह का ईंधन तैयार कर रही हैं। लेकिन युद्ध के कारण इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। इसकी मुख्य वजह ईरान द्वारा किए गए जवाबी हमले हैं, जिनमें सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास पर किया गया ड्रोन हमला भी शामिल है। अमेरिका के प्रमुख कच्चे तेल की कीमत 8.6 प्रतिशत बढ़कर 77.36 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 6.7 प्रतिशत बढ़कर 81.29 डॉलर प्रति बैरल हो गया। युद्ध के कारण कच्चे तेल का वैश्विक प्रवाह अवरुद्ध होने की चिंता के कारण सप्ताह की शुरुआत में वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल आया। -
लंदन. पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण फंसे हवाई यात्रियों को निकालने के लिए सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात से कुछ गिनी-चुनी उड़ानों का संचालन किया गया, हालांकि इस क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों में वाणिज्यिक उड़ानें अब भी बंद हैं। उड़ानों की स्थिति की जानकारी देने वाली 'फ्लाइटरडार24' के अनुसार, सोमवार को तीन घंटे के दौरान अबू धाबी से इस्लामाबाद, पेरिस, एम्स्टर्डम, मुंबई, मॉस्को और लंदन जैसे शहरों के लिए एतिहाद एयरवेज की कम से कम 16 उड़ानें रवाना हुईं। हालांकि, विमानन कंपनी की वेबसाइट पर दिखाया गया कि उसकी सभी नियमित वाणिज्यिक उड़ानें बुधवार दोपहर तक निलंबित रहेंगी। लंबी दूरी की उड़ानें संचालित करने वाली विमानन कंपनियां एतिहाद एयरवेज, एमिरेट्स और फ्लाईदुबई ने सोमवार को कहा कि वे देश से सीमित संख्या में उड़ानें संचालित करेंगी। दुबई और अबू धाबी से सीमित संख्या में उड़ानें ऐसे समय में शुरू हुईं जब अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने "गंभीर सुरक्षा खतरे" के कारण अपने नागरिकों से संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, सऊदी अरब, मिस्र, लेबनान और ओमान समेत 13 देशों से तुरंत वाणिज्यिक उड़ानों से निकलने को कहा। एयरलाइन विश्लेषण कंपनी सिरियम के अनुसार, शनिवार से पश्चिम एशिया से आने-जाने वाली लगभग 32,000 उड़ानों में से करीब 13,000 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
- वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चार से पांच सप्ताह तक सैन्य अभियान जारी रह सकता है, लेकिन वह ''इससे ज्यादा समय तक के लिए भी'' तैयार हैं। उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।ईरान पर इजराइल और अमेरिका के ताजा हमलों के बाद सोमवार को पश्चिम एशिया में युद्ध ने व्यापक रूप ले लिया। इसके बाद, ईरान और उसके सहयोगी देशों ने इजराइल, खाड़ी देशों और तेल-गैस उत्पादन वाले स्थानों पर हमला किया। हमले बढ़ना, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का मारा जाना, और किसी भी स्पष्ट योजना का न होना इस बात का संकेत है कि यह लड़ाई लंबे समय तक जारी रह सकती है तथा इसके व्यापक परिणाम हो सकते हैं।
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काठमांडू. नेपाल में सोमवार को होली का उत्सव शुरू हो गया और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने कहा कि यह त्योहार लोगों को सामाजिक विकृतियों और बुरी प्रथाओं को समाप्त करने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति पौडेल ने देश के पहाड़ी जिलों में मनाए जा रहे रंगों के त्योहार के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। हालांकि, तराई क्षेत्र में यह त्योहार मंगलवार को मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह त्योहार लोगों को सामाजिक विकृतियों और बुरी प्रथाओं को समाप्त करने के लिए प्रेरित करने के साथ ही देश में सामाजिक सद्भाव और एकता बनाए रखने में मदद कर सकता है। उत्सव की औपचारिक शुरूआत सात फरवरी को काठमांडू के बसंतपुर दरबार चौक पर 32 फुट से अधिक लंबी बांस की छड़ी 'चिर' की स्थापना के साथ हुयी। रंग-बिरंगे कपड़े छड़ी पर बांधे गए, जो उत्सव के प्रारंभ का प्रतीक था। हालांकि, लोग होली का मुख्य दिन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा के दिन मनाते हैं, जो हिंदू पंचांग का एक महत्वपूर्ण महीना है और मुख्य रूप से सर्दियों से वसंत ऋतु में आने का प्रतीक है। सोमवार की आधी रात नेपाल में पांच मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा चुनावों से पहले चुनाव प्रचार का आखिरी दिन भी है। त्योहार के बावजूद, काठमांडू और अन्य जगहों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार, जिनमें स्वतंत्र उम्मीदवार भी शामिल हैं, अपना चुनाव प्रचार करते नजर आ रहे हैं।
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दुबई। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने रविवार को अमेरिका और इजराइल के नेताओं को ''घृणित अपराधी'' करार दिया और कहा कि ईरान पर हमले के जिम्मेदार लोगों को उचित जवाब दिया जाएगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने एक टेलीविज़न संबोधन में यह टिप्पणी की। शनिवार को शुरू हुए हमलों के बाद से कलीबाफ कैमरे पर आने वाले सबसे उच्च पदस्थ अधिकारी हैं। उन्होंने कहा, ''आप सीमाएं लांघ गए हैं और आपको इसकी कीमत चुकानी होगी। हम आपको ऐसा करारा जवाब देंगे कि आप खुद रहम की भीख मांगने पर मजबूर हो जाएंगे।''
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ब्रसेल्स। यह कब तक चलेगा? क्या यह और बढ़ेगा? ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर और ईरान के साथ जारी टकराव का हम पर और दुनिया की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? शनिवार को ये सवाल पश्चिम एशिया और दुनियाभर के लोगों की जेहन में छाए रहे। हालांकि, अमेरिका-इजराइल के ईरान पर किए गए हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने संयमित प्रतिक्रिया दी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ घंटे पहले खोमेनेई की मौत की घोषणा करते हुए कहा कि इससे ईरानियों को अपने देश की बागडोर अपने हाथों में ''वापस लेने का सबसे बड़ा मौका'' मिला है। ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के 86 वर्षीय नेता की मौत की पुष्टि की लेकिन मौत की वजह नहीं बताई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई ।
वहीं, एक बयान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका-ईरान से फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके देश ईरान पर हुए हमलों में शामिल नहीं हैं, लेकिन वे अमेरिका, इजराइल और क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ये तीनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से समाधान की कोशिशों में आगे रहे हैं।उन्होंने कहा, "हम क्षेत्र के देशों पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। ईरान को बिना सोचे समझे सैन्य हमले करने से बचना चाहिए। आखिर में, ईरानी लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने देना चाहिए।" बाद में, आपात सुरक्षा बैठक में मैक्रों ने कहा कि ईरान पर हुए हमलों के बारे में फ्रांस को न पहले से बताया गया था और न ही फ्रांस इसमें शामिल था। उन्होंने कहा कि बातचीत से समाधान निकालने की कोशिशें और तेज करनी चाहिए।मैक्रों ने कहा, "ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसकी बैलिस्टिक गतिविधियों और क्षेत्र में अस्थिरता जैसे मुद्दे सिर्फ हमलों से ही हल हो जाएंगे, यह सोचना गलत है।" 22 देशों के अरब लीग ने ईरान के हमलों को "शांति का समर्थन करने और स्थिरता लाने की कोशिश करने वाले देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन" बताया। यह समूह पहले भी इजराइल और ईरान के ऐसे कदमों की निंदा करता रहा है जिनसे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा हो सकता है। मोरक्को, जॉर्डन, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात ने कुवैत, बहरीन, कतर और अमीरात समेत क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डो को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों की निंदा की। पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के समय में सीरिया इस क्षेत्र में ईरान का बहुत करीबी सहयोगी था और इजराइल का कड़ा आलोचक भी था। लेकिन सीरिया के विदेश मंत्रालय के बयान में सिर्फ ईरान की निंदा की गई, जो दिखाता है कि नयी सरकार आर्थिक रूप से शक्तिशली देशों और अमेरिका के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। सऊदी अरब ने कहा कि वह "ईरान की विश्वासघाती आक्रामक कार्रवाई और संप्रभुता के खुले उल्लंघन की कड़े शब्दों में निंदा करता है।" ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने बयान में कहा कि अमेरिका की कार्रवाई "अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के सिद्धांत का उल्लंघन है। विवाद शुत्रता और खून-खराबे से नहीं, शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाए जाने चाहिए।" इस पूरे मामले पर देशों के बयान बेहद संयमित शब्दों में आ रहे हैं।न्यूजीलैंड ने खुलकर पूरा समर्थन नहीं किया, लेकिन शनिवार को कहा कि अमेरिका-इजराइल के हमले ईरान सरकार को भविष्य का खतरा बनने से रोक रहे हैं। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्जन और विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने संयुक्त बयान में कहा, "किसी सरकार की वैधता उसके लोगों के समर्थन पर टिकी होती है। ईरानी शासन बहुत पहले ही वह समर्थन खो चुका है।" रूस के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को "पहले से तय और बिना उकसावे का, एक संप्रभु और संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश पर सशस्त्र हमला" बताया। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम की चिंता की ''आड़'' ले रहे हैं, जबकि उनका असली मकसद सत्ता को बदलना है। इसी तरह चीन की सरकार ने कहा कि वह ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों को लेकर "बहुत चिंतित" है। चीन ने सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया। चीन के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, "ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके क्षेत्र की अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।" अमेरिका के साथ हाल में तनावपूर्ण रहे संबंधों के बावजूद कनाडा ने भी इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, "ईरान का इस्लामी शासन पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और आतंक का सबसे बड़ा स्रोत है।" कई देशों में चिंता साफ दिख रही है।नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ आइडे ने नॉर्वे के प्रसारक एनआरके से बातचीत में कहा कि उन्हें चिंता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम होने का मतलब पश्चिम एशिया में "एक नया, बड़ा युद्ध" हो सकता है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन 'इंटरनेशनल कैंपेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन' ने अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। इस संगठन की कार्यकारी निदेशक मेलिसा पार्के ने कहा, "ये हमले पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। इससे तनाव और बढ़ सकता है, साथ ही परमाणु हथियारों के विस्तार और परमाणु हथियार के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ सकता है।" यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने शनिवार को संयुक्त बयान जारी करके सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास बढ़ाने की अपील की, ताकि "परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित" की जा सके। अरब लीग ने भी सभी अंतरराष्ट्रीय नेताओं से कहा कि वे "जितनी जल्दी हो सके तनाव कम करने" के लिए काम करें, ताकि क्षेत्र को अस्थिरता और हिंसा की मार से बचाया जा सके, और फिर से बातचीत की राह अपनाई जा सके।



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