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- नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने विशेष जोर देते हुए कहा है कि सरकार उद्योग जगत पर पूरी तरह और व्यापक रूप से भरोसा करती है। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वह अब और भी अधिक प्रोफेशनल नजरिए से श्रम या कामगारों को काम पर लगाने की योजना बनाए तथा इसके साथ ही उनका कौशल बढ़ाने में भी जुटे। वित्त मंत्री ने कहा, उद्योग जगत में विचार मंथन करने वालों को इस तरह से कामगारों को काम पर लगाने की मिसाल पेश करने की जरूरत है जो सभी को स्वीकार्य हो।वित्त मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के साथ बातचीत में ये बातें कहीं, जिसकी स्थापना के 125 वर्ष 2020 में पूरे हो रहे हैं। इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए सीआईआई को बधाई देते हुए श्रीमती सीतारमन ने कहा कि सीआईआई ने देश में अत्यंत अहम भूमिका निभाई है और इसके सदस्यों ने भी अपने-अपने सेक्टरों में मजबूत भूमिका निभाई है। उन्होंने सीआईआई से नीति निर्माण प्रक्रिया में एक प्रतिमान या आदर्श बनने का आह्वान किया।वित्त मंत्री ने कहा कि उद्योग जगत को कामगारों के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से तय करने और अकुशल कामगारों सहित सभी कामगारों के लिए योजना बनाने की जरूरत है। उन्होंने उद्योग जगत से अकुशल श्रमिकों को काम पर लगाने के लिए प्रोफेशनल नजरिए से विचार करने और सभी स्तरों पर कर्मचारियों का कौशल बढ़ाने की दिशा में काम करने का आग्रह किया।एमएसएमई सेक्टर के संबंध में एक सवाल पर श्रीमती सीतारमन ने कहा कि यहां तक कि कोविड-19 से पहले भी ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमों की सहायता हेतु एमएसएमई और एनबीएफसी के लिए स्पष्ट रूप से मार्गदर्शन करने की घोषणा की गई थी। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी ऋण के लिए ऋण उपलब्धता का उद्देश्य सभी एमएसएमई तक पहुंचना है, इसलिए सरकार ने ऋण देने में हिचकिचाहट या संकोच को दूर करने के लिए बैंकों को गारंटी प्रदान की है। उन्होंने कहा,सरकार लॉकडाउन के बाद विशेष उद्देश्य कंपनी के साथ पूर्ण और आंशिक गारंटी प्रदान कर रही है, इसलिए बैंकों का संकोच दूर कर दिया गया है।कृषि से जुड़े एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि व्यापक सुधारों की घोषणा कर दी गई है। तीन मॉडल अधिनियम राज्य सरकारों के साथ साझा किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने भूमि सुधारों पर काम शुरू कर दिया है।वित्त मंत्री ने बुनियादी ढांचे से संबंधित एक प्रश्न के जवाब में कहा कि राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि मांग व्यापक रूप से बढ़ सके। उन्होंने कहा कि बड़ी परियोजनाओं को सामने लाया जाएगा और इनसे सकारात्मक ऊर्जा और भावनाएं आएंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी पर निष्पक्ष और खुली चर्चा हुई है जो अंतप्र्रवाह या आवक के मामले में निचले स्तर पर आ गया है। इस पर चर्चा चल रही है। उन्होंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि बिजली क्षेत्र में 90 हजार करोड़ रुपये की तरलता को जल्द सुनिश्चित किया जाएगा।सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि उद्यमियों ने एमएसएमई की नई परिभाषा का स्वागत किया है, जैसा कि सीआईआई के सर्वेक्षण से पता चला है।
- मुंबई। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार आठ मई को समाप्त पखवाड़े के अंत में बैंक ऋण एक साल पहले के मुकाबले 6.52 प्रतिशत बढ़कर 102.52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया जबकि इस दौरान बैंकों में जमा धन 10.64 प्रतिशत बढ़कर 138.50 लाख करोड़ रुपये था।इससे पहले 10 मई 2019 को समाप्त पखवाड़े में बैंक ऋण 96.24 लाख करोड़ रुपये और जमा 125.17 लाख करोड़ रुपये थी। इससे पिछले पखवाड़े से तुलना करने पर बैंक ऋण 21,010.36 करोड़ रुपये घटकर 102.52 लाख करोड़ रुपये रह गया। इससे पिछले सप्ताह 24 अप्रैल 2020 को समाप्त पखवाड़े में यह राशि 102.73 लाख करोड़ रुपये थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने एमएसएमई, कृषि और खुदरा सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिये 6.45 लाख करोड़ रुपये के ऋण मंजूर किये हैं। ये मंजूरी एक मार्च से 15 मई के बीच दी गई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 8 मई की समाप्ति तक 5.95 लाख करोड़ का ऋण मंजूर किया।इससे पहले सीतारमण ने ट्वीट किया था, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एक मार्च से 15 मई के बीच एमएसएमई, खुदरा, कृषि और कारपोरेट क्षेत्रों के 54.96 लाख खातों में 6.45 लाख करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी है। यह आठ मई को मंजूर किये गये 5.95 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अब तक 1.03 लाख करोड़ रुपये का आपात ऋण सुविधा और कार्यशील पूंजी विस्तार दिया है। यह विस्तार 20 मार्च से 15 मई की अवधि में हुआ है। आठ मई तक के 65,879 करोड़ रुपये के ऋण के मुकाबले इसमें यह बड़ी वृद्धि हुई है।----
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नयी दिल्ली। टाटा पावर का एकीकृत शुद्ध लाभ जनवरी-मार्च तिमाही में एक साल पहले की इसी तिमाही की तुलना में दो गुना बढ़कर 475 करोड़ रुपए रहा। कंपनी ने एक बयान में कहा कि एक साल पहले 2019-20 की इसी तिमाही में कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 172 करोड़ रुपये रहा था। टाटा पावर ने कहा, कंपनी का शुद्ध लाभ मार्च 2020 को समाप्त तिमाही में 177 प्रतिशत बढ़कर 475 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 172 करोड़ रुपये था। कारनेगी में निवेश की बिक्री से कंपनी का लाभ बढ़ा है। कंपनी की एकीकृत आय 2019-20 की चौथी तिमाही में 6,881 करोड़ रुपये रही जो एक साल पहले इसी तिमाही में 7,597 करोड़ रुपये थी। मुख्य रूप से कोविड-19 संकट के कारण सौर ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण) के क्रियान्वयन में देरी और बिजली मांग में कमी है।
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मुंबई। बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स सोमवार को 1,069 अंक का गोता लगा गया। विशेषज्ञों के अनुसार कोविड19 से जुड़ी सार्वजनिक पाबंदियों की अवधि बढ़ा जाने तथा सरकार के वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज से घरेलू निवेशकों में अभी भरोसा न जगाने से बाजार का उत्साह ठंडा रहा। बैंक और वाहन कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली के बीच तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,068.75 अंक यानी 3.44 प्रतिशत लुढ़क कर 30,028.98 अंक जबकि एनएसई निफ्टी 313.60 अंक यानी 3.43 प्रतिशत टूटकर 8,823.25 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के शेयरों में सर्वाधिक नुकसान में इंडसइंड बैंक रहा। इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आयी। इसके अलावा एचडीएफसी, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक और अल्ट्राट्रेक सीमेंट में भी गिरावट दर्ज की गयी।
- नई दिल्ली। भारतीय उद्योग जगत ने आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के हिस्से के रूप में शनिवार को घोषित सुधारवादी उपायों का स्वागत करते हुए कहा कि ये दीर्घकालिक वृद्धि की की नींव रखेंगे, निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करेंगे और रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।सरकार ने शनिवार को रक्षा विनिर्माण में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की सीमा में वृद्धि करने, छह अन्य हवाईअड्डों के निजीकरण, नागर विमानन क्षेत्र के लिये और अधिक वायु क्षेत्र खोलने और कोयले के वाणिज्यिक खनन में निजी क्षेत्र को प्रवेश देने की घोषणाएं की। इसके साथ ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिये वैसे हथियारों की सूची का विस्तार किया जायेगा, जिनका आयात नहीं किया जा सकता है। निजी क्षेत्र को ग्रहों की खोज और अंतरिक्ष यात्रा की भविष्य की परियोजनाओं के साथ-साथ उपग्रहों के प्रक्षेपण समेत भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी शामिल किया जायेगा।फिक्की की अध्यक्ष संगीता रेड्डी ने कहा कि सरकार कोरोनो वायरस संकट को भारत के लिये एक अवसर में बदल रही है। उन्होंने कहा, आज घोषित किये गये उपाय भारतीय उद्योग के लिए अधिक अवसर पैदा करने और बड़े कारोबारी घरानों के साथ-साथ स्टार्टअप की क्षमताओं का लाभ उठाने की दिशा में हैं। ये उपाय दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की नींव रखेंगे और भारत के भविष्य को तय करने वाले क्षेत्रों को ये उपाय गति प्रदान कर सकते हैं।सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि ये घोषणाएं अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि ये घोषणाएं स्थानीय विनिर्माण, आयात को कम करने और रोजगार को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आकार देती हैं। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष डी के अग्रवाल ने कहा कि ये सुधार निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करेंगे। इसके साथ ही ये कोयला, खनिज, रक्षा, हवाई अड्डे व वायु क्षेत्र प्रबंधन, बिजली, अंतरिक्ष क्षेत्र, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र समेत भारतीय अर्थव्यवस्था के रणनीतिक और वृद्धि की उम्मीदों वाले क्षेत्रों की स्थिति बेहतर करेंगे।जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने कहा, इन सुविचारित सुधारों से यह पता चलता है कि सरकार जमीनी हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ है। ये उपाय हमारी अर्थव्यवस्था को महामारी की वजह से उत्पन्न मौजूदा स्थिति से बाहर निकालने में मदद करेंगे।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये करीब दो महीने से लागू लॉकडाउन की मार से अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिये घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त के उपायों की यहां एक संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी। पैकेज की चौथी किस्त बड़े पैमाने पर सुधारों और लगभग नगण्य हो चुके नये निवेश पर केंद्रित है। सीतारमण ने कहा कि अब विदेशी निवेशकों को स्वचालित मार्ग के तहत रक्षा विनिर्माण उपक्रमों में 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की अनुमति होगी। अभी रक्षा विनिर्माण में एफडीआई की सीमा 49 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा मंजूरी मानदंडों के अधीन होगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार सालाना समयसीमा के साथ आयात के लिये प्रतिबंधित हथियारों व प्लेटफार्म की सूची का विस्तार करेगी। इसके साथ ही कुछ आयातित पुर्जों को देश में बनाने के कदम उठाए जाएंगे। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारी रक्षा आयात खर्च में कमी लाने में मदद मिलेगी।---
- नई दिल्ली। वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं के संगठन एक्मा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए की गयी राहत घोषणाओं का स्वागत किया।लॉकडाउन (बंद) के चलते एमएसएमई क्षेत्र पर भारी दबाव है और इस पैकेज से क्षेत्र को वृद्धि करने में मदद मिलेगी। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) ने सभी वाहन और उनके कलपुर्जों को माल एवं सेवाकर (जीएसटी) की 18 प्रतिशत दर के दायरे में लाने की पुरानी मांग को दोहराया।एक्मा के अध्यक्ष दीपक जैन ने एक बयान में कहा एक्मा लंबे समय से एमएसएमई उद्योगों की परिभाषा में बदलाव का सुझाव देता रहा है। इस नये वर्गीकरण से एक्मा के कई सदस्यों को लाभ मिलेगा क्योंकि कलपुर्जा क्षेत्र में अधिकतर छोटी कंपनियां ही काम करती हैं। उन्होंने कहा कि बिना गारंटी के स्वत: मंजूरी वाले ऋण की सुविधा और अधीनस्थ ऋण योजनाओं से क्षेत्र में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। इससे क्षेत्र की कार्यशील पूंजी की चुनौतियां कम करने में मदद मिलेगी। जैन ने उम्मीद जतायी कि सरकार वाहन क्षेत्र में मांग बढ़ाने के लिए भी जल्द एक पैकेज की घोषणा करेगी।--
- हैदराबाद। एनएमडीसी ने लौह अयस्क की कीमतों में कटौती की है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने कहा कि उसने लौह अयस्क लंप्स और फाइंस दोनों के दाम में 400 रुपये प्रति टन की कटौती की है।इसके अलावा कंपनी ने डीआरसीएलओ (डीआर कैलिब्रेटेड लंप ओर) की कीमतों में 470 रुपये प्रति टन की कटौती की है। एनएमडीसी ने इससे पहले चार अप्रैल को लौह अयस्क के दाम 500 रुपये प्रति टन और डीआरसीएलओ की कीमतों में 580 रुपये प्रति टन की कटौती की थी। एनएमडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस कटौती के बाद लंप्स की कीमत 2,250 रुपये प्रति टन और फाइंस की 1,960 रुपये प्रति टन पर आ गई है। वहीं डीआरसीएलओ का दाम घटकर 2,610 रुपये प्रति टन रह गया है।
- मुंबई। रिजर्व बैंक ने निर्यातकों को माल लदान से पहले और बाद में मिलने वाले निर्यात रिण पर ब्याज सब्सिडी की अवधि एक साल बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तक कर दी है। इससे निर्यातकों को काफी राहत मिलेगी।ये योजना इस साल 31 मार्च को समाप्त हो गई थी। रिजर्व बैंक ने एक अधिसूचना में कहा है, भारत सरकार ने निर्यात माल लदान से पहले और बाद में दिये जाने वाले रुपया निर्यात रिण पर ब्याज समानीकरण योजना की अवधि के विस्तार को मंजूरी दे दी है। यह योजना इसी आकार और कवरेज के साथ एक साल और यानी 31 मार्च 2021 तक लागू रहेगी। इसमें कहा गया है कि योजना का विस्तार एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 तक किया गया है।---
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को आकलन वर्ष 2020- 21 के दौरान आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 कर दिया । इसके साथ ही कर विवादों के निपटान के लिये लाई गई विवाद से विश्वास योजना का लाभ भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है।केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मंगलवार को घोषित आर्थिक पैकज का ब्यौरा रखते हुये सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) उद्योग के लिये कई तरह की राहतों का एलान करने के साथ ही पिछले वित्त वर्ष के लिये इस आकलन वर्ष में भरी जाने वाली व्यक्तिगत आयकर रिटर्न और अन्य रिटर्न दोनों के लिये अंतिम तिथि 30 नवंबर 2020 तक बढ़ी दी गई है। पुराने लंबित कर विवादों के निपटारे के लिये लाई गई विवाद से विश्वास योजना का लाभ भी अब 31 दिसंबर 2020 तक उपलब्ध होगा।वित्त मंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत लंबित विवादों के निपटारे की चाह रखने वाले करदाता अब 31 दिसंबर 2020 तक आवेदन कर सकेंगे। इसके लिये उन्हें अलग से किसी तरह का कोई शुल्क नहीं देना होगा। वित्त मंत्री ने एक अन्य घोषणा में कहा कि सभी धर्मार्थ न्यासों, गैर- कारपोरेट कारोबारों, पेशेवरों, एलएलपी फर्मों, भागीदारी फर्मों सहित को उनका लंबित रिफंड जल्द लौटाया जायेगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले सरकार पांच लाख रुपये तक के 18 हजार करोड़ रुपये तक रिफंड करदाताओ को कर चुकी है। यह रिफंड 14 लाख करदाताओं को किया गया।
- नई दिल्ली। उद्योग जगत ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा समय की जरूरत थी।उद्योग मंडलों का कहना है कि इससे कोविड-19 महामारी और उसकी रोक थाम के लिए लागू पाबंदियों से प्रभावित अर्थव्यवस्था के पुनरूद्धार में मदद मिलेगीऔर आर्थिक वृद्धि को नई गति मिलेगी। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को 20 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज की घोषणा की जो देश के कल घरेलू उत्पाद का 10 प्रतिशत है। वित्तीय पैकेज के बारे में उन्होंने कहा, सरकार के हाल के निर्णय, रिजर्व बैंक की घोषणाओं को मिलाकर यह पैकेज करीब 20 लाख करोड़ रुपये का होगा जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10 प्रतिशत है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जल्दी ही इसके बारे में विस्तार से जानकारी देंगी। उद्योग मंडल सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, प्रधानमंत्री ने जमीन, श्रम, नकदी और कानून को सरल बनाने के बारे में बात की, हम उसकी सराहना करते हैं। ये अर्थव्यवस्था के लिये प्रमुख चुनौती है। इन चार क्षेत्रों में सुधारों से संकट की इस घड़ी में आर्थिक वृद्धि को नई गति मिलेगी। फिक्की की अध्यक्ष संगीता रेड्डी ने कहा कि पांच आधार...अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, व्यवस्था, जनसंख्या और मांग को मजबूत करने से भारत फिर से सतत वृद्धि के रास्ते पर आएगा। उन्होंने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब पैकेज की रूपरेखा की घोषणा करेंगी, गरीबों और जरूरतमंदों, एमएसएमई और उद्योग तथा आम लोगों की जरूरतों का समाधान होगा। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिये जमीन, श्रम और नकदी पर जोर की जरूरत है। एसोचैम और नारेडको के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि यह पैकेज अर्थव्यवस्था को गति देगा। उन्होंने कहा कि यह सचमुच एक सराहनीय पैकेज है... इसकी प्रतीक्षा थी इससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा, भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिये पांच बुनियाद को मजबूत बनाने से हम एक भेरसेमंद वैश्विक ताकत बनेंगे....।उन्होंने कहा कि आर्थिक पैकेज के साथ कृषि, कराधान, बुनियादी ढांचा, मानव संसाधन और वित्तीय प्रणाली में सुधारों से निवेशक आकर्षित होंगे और मांग को बढ़ाने में मदद मिलेगी। मेक इन इंडिया निवेश आकर्षित करने के लिहाज से मुख्य उत्प्ररेक होगा...। पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष डी के अग्रववाल ने कहा कि इस मौके पर प्रोत्साहन पैकेज समय की जरूरत है। इससे अर्थव्यवस्था के बुनियाद को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमाबइल मैनुफैक्चरर्स ने उम्मीद जतायी कि जब वित्त मंत्री पैकेज की बारीकियों की घोषणा करेंगी, देश के वाहन उद्योग की मदद के लिये एक केंद्रित पैकेज का ऐलान करेंगी।--
- नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के निदेशक एस. गुरुमूर्ति ने सोमवार को कर्जों के एकबारगी पुनर्गठन पर जोर देते हुए कहा कि इससे कोरोना वायरस महामारी के संकट से जूझ रहे व्यावसायिक जगत को बैंक और कर्ज दे सकेंगे।स्वदेशी विचार धारा वाले गुरुमूर्ति ने रिजर्व बैंक द्वारा घाटे को नोट छापकर पूरा करने का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा कि विदेशों से कोष लेने के बजाय यह बेहतर विकल्प होगा। बैंकों ने 2004 से 2009 के बीच जरूरत से ज्यादा कर्ज दिया जिससे वह परेशानी में आये और अब बैंक कर्ज नहीं देकर अर्थव्यवस्था को परेशानी में डाल रहे हैं। उन्होंने इस समस्या के लिये गलत नियमों को जिम्मेदार ठहराया। गुरुमूर्ति भारत प्रकाशन दिल्ली द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण-चुनौतियां और अवसरों पर आयोजित वेबिनार में कहा कि बैंकों ने 11 लाख करोड़ रुपये की जमा में से कम से कम छह लाख करोड़ रुपये रिजर्व बैंक में रखे हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि नियमों के हिसाब से 80 प्रतिशत कर्जदार और कर्ज लेने के पात्र नहीं है ऐसे में बैंक उन्हें कर्ज नहीं दे पा रहे हैं। गुरुमूर्ति ने कहा, बैंकों ने 2004 से 2009 के दौरान जरूरत से ज्यादइा कर्ज दिया और अब वे कर्ज नहीं देकर समस्या में घिर रहे हैं। ऐसे समय जब अर्थव्यवस्था को धन की जरूरत है, बैंकों के पास पैसा है भी , लेकिन बैंक कर्ज नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि हम गलत विवेकपूर्ण नियमों का अनुसरण कर रहे हैं।--
- मुंबई। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने रेपो दर से जुड़े अपने आवास ऋण की ब्याज दर में 0.3 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर उधार लेने वालों तथा रियल्टी कंपनियों के बढ़े ऋण जोखिमों को लेकर बाजार संकेतों के बीच यह कदम उठाया गया है।एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। बैंक ने अचल संपत्ति के एवज में लिये जाने वाले व्यक्तिगत ऋण पर भी ब्याज दर में 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। माना जा रहा है कि बाजार में अग्रणी स्थान रखने वाले भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के इस कदम के बाद दूसरे बैंक भी इसका अनुसरण करेंगे। एसबीआई ने गुरुवार को ही अपनी प्रधान उधारी दर में 0.15 प्रतिशत की कटौती की थी, जिसके बाद कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) से जुड़ी आवास ऋण की ब्याज दर भी घट गई। स्टेट बैंक के ज्यादातर आवास ऋण रेपो दर के आधार पर या एमसीएलआर के आधार पर ही दिए जाते हैं।एसबीआई ने हालांकि, वाह्य मानक पर आधारित उधारी दरों को 7.05 प्रतिशत पर स्थिर रखा है, लेकिन विभिन्न गृह ऋण उत्पादों में मार्जिन में 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर गृह ऋण की दरों को बढ़ाया गया है। बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक नई दरें एक मई से प्रभावी हैं।उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण जारी लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां में व्यवधान पैदा हुआ है। इससे कंपनियों और व्यक्तियों की आय भी प्रभावित हुई है। स्टेट बैंक ने एक महीने के भीतर ही इसमें संशोधन किया है। एक माह पहले उसने आवास रिण की दर में 0.75 प्रतिशत की कमी की थी। रिजर्व बैंक के रेपो दर में 0.75 प्रतिशत की कमी के बाद स्टेट बैंक ने एक अप्रैल 2020 को रेपो दर से जुड़ी ब्याज दरों में कटौती की थी। इस वृद्धि के बाद स्टेट बैंक के 75 लाख रुपये तक के आवास रिण पर ब्याज दर में 0.20 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी जबकि 30 लाख रुपये तक के आवास रिण पर बाह्य बेंचमार्क से से जुड़ी ब्याज दर (ईबीआर) और उसके ऊपर होने वाली वृद्धि के साथ यह ब्याज दर 7.40 प्रतिशत होगी। एक अप्रैल 2020 को यह 7.20 प्रतिशत तय की गई थी।--
- नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) हरियाणा के मानेसर कारखाने में उत्पादन 12 मई को फिर शुरू करने जा रही है।.कंपनी ने शेयर बाजार को यह सूचना दी है। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए आवागमन पर राष्ट्रव्यापी पाबंदियों के चलते कंपनी ने अपने कारखाने बंद कर रखे हैं। पाबंदियों को धीरे-धीरे उठाने के सरकार के निर्णय के बाद वाहन और कई अन्य क्षेत्रों की कंपनियां अपने कल-कारखाने फिर चालू कर रही हैं। इसके लिए उन्हें सरकारों की ओर से जारी कुछ हिदायतों का पालन करना जरूरी है। मारुति ने बताया कि हरियाणा सरकार से उसे मानेसर कारखाना चालू करने की अनुमति 22 अप्रैल को ही मिल चुकी है। लेकिन वह वाहनों के उत्पादन में निरंतरता बनाए रखने और बाजार में उनकी बिक्री की सुविधा का आकलन करने के बाद ही उत्पादन शुरू करेगी। कंपनी ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि वह मानेसर कारखाने में 12 मई को फिर उत्पादन चालू करेगी। गुडगांव जिला प्रशासन ने मारुति सुजुकी को अभी एक पाली के आधार पर काम शुरू करने की छूट दी है। कारखाने में फिलहाल कुल 4,696 कर्मचारियों को को काम पर रखने की इजाजत है। कंपनी का मानेसर कारखाना गुडग़ांव (गुरुग्राम) नगर निगम की सीमा से बाहर है जबक गुरुग्राम संयंत्र शहर की सीमा में है। दोनों काराखानों में कुल मिलाकर वार्षिक 15.5 लाख कार बनाने की क्षमता है। दोनों कारखाने 22 मार्च से बंद हैं।--
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वस्तु और सेवा कर-जीएसटी के लिए वार्षिक रिटर्न भरने की तिथि और आगे बढ़ा दी है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर और कस्टम बोर्ड ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीएसटी ऑडिट और वार्षिक रिर्टन भरने की तारीख 30 सितंबर 2020 कर दी है।सरकार ने 24 मार्च को या उससे पहले के सभी ई-वे बिल भरने की तिथि भी 31 मई तक बढ़ा दी है। पहले इनकी वैधता 20 मार्च से 15 अप्रैल के बीच समाप्त होनी थी। इस छूट से सड़क परिवहन के माध्यम से माल की निर्बाध आपूर्ति और आवाजाही हो सकेगी।वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के मुताबिक, कंपनी एक्ट 2013 के प्रावधानों के तहत रजिस्टर्ड लोग इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड के जरिए जीएसटीआर-3- बी जमा कर सकते हैं।इसके पहले सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीएसटी रिटर्न फाइल की तारीख बढ़ाकर 30 जून की थी। साथ ही कारोबारियों को कहा गया था कि 5 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली कंपनियों से जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में देरी पर कोई विलंब शुल्क, जुर्माना या ब्याज नहीं लिया जायेगा। वित्त मंत्रालय ने देरी से रिटर्न फाइल करने के मामले में को लेट फीस को 12 फीसदी से घटाकर 9 फीसदी कर दिया था।---
- नई दिल्ली। प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया ने कहा है कि उसने लॉकडाउन के तीसरे चरण में राहत देने वाले सरकारी दिशा निर्देशों के तहत अपने सभी कारखानों में उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है।कंपनी ने हैंड सेनेटाइजर, हैंड वाश, कीटाणुनाशक, आयुर्वेदिक दवाओं, जूस, नारियल पानी और शहद जैसी आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर तीन मई तक अपने सभी संयंत्रों में उत्पादन अस्थाई रूप से बंद कर दिया था। कंपनी ने बताया कि उसके कॉर्पोरेट कार्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों ने भी जरूरी कर्मचारियों के साथ काम शुरू कर दिया है। डाबर इंडिया ने शेयर बाजार को बताया कि एक मई को गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा निर्देशों और जमीनी स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद कंपनी ने सभी विनिर्माण स्थानों पर उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है।
- 0 आने वाले महीनों के लिए भी हैं बड़े ऑर्डर, लॉकडाउन खत्म होने के बाद घरेलू बाजार से मांग निकलने की उम्मीदनई दिल्ली। नवीन जिन्दल के नेतृत्व वाली कंपनी जिन्दल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) ने देश में चल रहे लॉकडाउन के समय भी निर्यात क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी ने अप्रैल महीने में 2 लाख 48 हजार टन स्टील और संबंधित उत्पादों का निर्यात किया, जो मार्च 2020 के मुकाबले 109 फीसदी अधिक है। इसके साथ ही अप्रैल माह में कंपनी की कुल बिक्री में निर्यात हिस्सेदारी 74 फीसदी दर्ज की गई है।कंपनी के प्रबंध निदेशक वी.आर. शर्मा ने जेएसपीएल के कर्मचारियों और अधिकारियों के उत्साह, संकल्प और समर्पण को इस सफलता का श्रेय दिया है। उन्होंने कहा, जहां दुनिया दीवार देखती थी, हमारे संस्थापक चेयरमैन ओपी जिन्दल जी द्वार देखते थे। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही चेयरमैन नवीन जिन्दल के दूरदर्शी नेतृत्व में जेएसपीएल की अनुभवी टीम सफलता के नए सोपान गढ़ रही है। देशव्यापी लॉकडाउन से उत्पन्न विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कंपनी की घरेलू इकाइयों ने अप्रैल माह में 5 लाख 50 हजार टन लोहा-स्टील का उत्पादन कर शानदार 5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जबकि इसी अवधि में जेएसपीएल ग्रुप ने कुल 6 लाख 55 हजार टन उत्पादन कर सफलता के झंडे गाड़ दिये।श्री शर्मा ने कहा, मार्च महीने के तीसरे सप्ताह तक कोविड19 पूरे देश में फैल गई, जिस कारण सरकार को लॉकडाउन करना पड़ा और पूरी अर्थव्यवस्था इस महामारी के शिकंजे में आ गई। इन परिस्थितियों में घरेलू बाजार की नाजुक स्थिति को देखते हुए निर्यात की ठोस रणनीति बनाई गई, बड़े पैमाने पर ऑर्डर बुक किये गए ताकि फैक्टरियां निर्बाध गति से चलती रहें और कंपनी का आर्थिक स्थिति भी अच्छी बनी रहे। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि रेल विभाग और पारादीप, विशाखापत्तनम व गंगावरम् बंदरगाह प्रबंधन के सराहनीय सहयोग की बदौलत हम राष्ट्र के लिए विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सफल हुए हैं।उन्होंने कहा कि जेएसपीएल की पूरी टीम का उत्साह बढ़ा है और कंपनी चीन, मलेेशिया, जर्मनी, स्पेन, इटली, डेनमार्क, फ्रांस, ओमान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को निरंतर अपने उत्पाद निर्यात कर रही है। हम हाई स्पीड रेल के लिए फ्रांस को ब्लूम्स का निर्यात भी कर रहे हैं।अंगुल प्लांट स्थित देश के सबसे बड़े ब्लास्ट फरनेस की उपलब्धियां गिनाते हुए श्री शर्मा ने कहा कि यहां अप्रैल माह में 2 लाख 98 हजार टन हॉट मेटल का उत्पादन हुआ। इसके साथ ही प्रति कार्य दिवस औसत 10 हजार टन हॉट मेटल का उत्पादन इस ब्लास्ट फरनेस से हो रहा है।कंपनी के कारोबार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल महीने में जेएसपीएल की घरेलू इकाइयों ने 3 लाख 35 हजार टन की बिक्री की और शेष उत्पाद बंदरगाहों पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जो मई माह में अपनी मंजिल तक पहुंच जाएंगे। इसी माह जेएसपीएल ग्रुप ने 4 लाख 56 हजार टन स्टील और संबंधित उत्पादों की बिक्री की। ओमान स्थित जिन्दल शदीद ने अप्रैल माह में 1 लाख 6 हजार टन स्टील का उत्पादन और 1 लाख 20 हजार टन की बिक्री की।श्री शर्मा ने बताया कि संकट की इस घड़ी में जेएसपीएल ने अपने सभी प्लांटों में केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का अक्षरश: पालन सुनिश्चित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुरूप कंपनी अपने सभी कार्यालयों और प्लांटों में फिजिकल डिस्टेंसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।उन्होंने निर्यात मोर्चे पर जेएसपीएल को सहयोग एवं प्रोत्साहन देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेलमंत्री पीयूष गोयल, इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जहाजरानी मंत्री मनसुख मंडाविया का आभार जताया।श्री शर्मा ने उम्मीद जताई कि लॉकडाउन खुलने के बाद हालात सुधरेंगे और घरेलू बाजार से भी मांग निकलेगी। मध्यम एवं लघु उद्योग मंत्री नितिन गडकरी की करीब 450 परियोजनाएं शुरू करने की घोषणा को उद्योगों के लिए शुभ संकेत बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे देश भर में कारोबार और रोजगार दोनों के लिए बेहतरीन अवसर उपलब्ध होंगे।जेएसपीएल ने भारतीय रेल के लिए आर 260 ग्रेड पटरियां विकसित की हैं जो मौजूदा 64 के मुकाबले प्रति वैगन 75 टन का भार सहन कर सकेंगी। इसी तरह कंपनी ने विशेष तरह की प्लेट और राउंड बिलेट्स भी विकसित किये हैं।---
- मुंबई। भारतीय फ्रोंजन फूड उद्योग में वर्ष 2020-24 के दौरान सालाना 17 प्रतिशत की दर से वृद्धि होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोनो वायरस महामारी ने लोगों को स्वास्थ के बारे में अधिक जागरूक किया है।अमेरिकी सोयाबीन निर्यात परिषद द्वारा आयोजित एक परिचर्चा के अनुसार, कई क्षेत्रों में मंदी का सामना करने के बावजूद, फ्रोजेन खाद्य पदार्थो के उद्योग में तेजी आई है, जो लोगों के स्वास्थ्य के प्रति सचेत होने के कारण निरंतर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि इससे पहले, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की उच्च लागत, इस क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि, समाज में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और आत्म-सजग लोगों की संख्या बढऩे से इस पूरे उद्योग का कायांतर हो गया है। वैश्विक बाजार अनुसंधान कंपनी आईएमएआरसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फ्रोजन फूड बाजार 2024 तक सालाना 17 प्रतिशत की दर से फैलेगा।---
- नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने शनिवार को बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक की। इस बैठक में कोविड-19 संकट के बीच आर्थिक स्थिति और वित्तीय प्रणाली के दबाव को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए कदमों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।यह बैठक दो सत्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई। रिजर्व बैंक ने बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि इसमें प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शामिल हुए। अपने शुरुआती संबोधन में गवर्नर ने लॉकडाउन के दौरान बैंकों के परिचालन को सामान्य और सामान्य से सामान्य के करीब रखने के प्रयासों की सराहना की। बैठक के दौरान अन्य बातों के अलावा मौजूदा आर्थिक स्थिति और वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता पर चर्चा की गई। इसके साथ ही बैठक में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को ऋण के प्रवाह...मसलन गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), सूक्ष्म वित्त संस्थानों, आवास वित्त कंपनियों, म्यूचुअल फंड आदि को नकदी की स्थिति पर चर्चा हुई। साथ ही बैठक में लॉकडाउन के बाद ऋण के प्रवाह..कार्यशील पूंजी के प्रावधान और सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उपक्रमों (एमएसएमई) को ऋण प्रदान करने पर विचार-विमर्श किया गया। रिजर्व बैंक ने कोविड-19 की वजह से कर्ज की मासिक किस्त (ईएमआई) के भुगतान पर तीन माह की रोक लगाई है।बैठक में इसकी भी समीक्षा की गई। उच्चतम न्यायालय ने इसी सप्ताह रिजर्व बैंक को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके ऋण के भुगतान पर तीन माह की रोक के निर्देशों का अक्षरक्ष: अनुपालन हो। बयान में कहा गया है कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के मद्देनजर बैंकों की विदेशों में स्थित शाखाओं की निगरानी पर भी विचार-विमर्श हुआ। रिजर्व बैंक ने कर्ज लेने वाले ग्राहकों, ऋणदाताओं और म्यूचुअल फंडों सहित अन्य इकाइयों पर दबाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। फरवरी, 2020 से रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 प्रतिशत के बराबर नकद धन डाल चुका है। रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में 0.75 प्रतिशत की कटौती कर इसे 11 साल के निचले स्तर 4.4 प्रतिशत पर ला दिया है। अब केंद्रीय बैंक द्वारा बैंकों पर भी कर्ज पर ब्याज की दर कम करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर को भी घटाकर 3.75 प्रतिशत कर दिया है। इससे बैंक अधिक कर्ज देने के लिए प्रोत्साहित होंगे। आशंका जताई जा रही है कि कोविड-19 की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठप रहने के चलते अप्रैल-जून की तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर में भारी गिरावट आएगी।
- - किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए खाद्यान्न और फल व सब्जियां खरीदने हेतु आगे आने का आग्रह कियानई दिल्ली। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) और इसके सदस्यों के साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के वर्तमान स्थिति और लॉकडाउन के बाद के परिदृश्य में उद्योग की आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की।फिक्की के महासचिव दिलीप चेनॉय ने केंद्रीय एफपीआई मंत्री का स्वागत किया और लॉकडाउन की शुरुआत के बाद से ही खाद्य उद्योग में निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने देश के विभिन्न हिस्सों में तैयार फसलों और फल व सब्जियां के नुकसान होने पर चिंता व्यक्त की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने सभी सदस्यों से अनुरोध किया था कि वे तैयार गेहूं, धान आदि फसलों और फलों, सब्जियों व अन्य की खरीद के लिए आगे आएं ताकि बर्बादी को कम किया जा सके और किसानों को लाभ पहुंचाया जा सके।उद्योग के सदस्यों ने मंत्रालय के आवश्यक हस्तक्षेप के लिए कुछ मौजूदा मुद्दों का हवाला दिया। इनमें शामिल हैं - विभिन्न कन्टेनमेंट ज़ोन में संचालन सुविधाओं के लिए एसओपी की आवश्यकता, चुनौतियों के समाधान के लिए राज्य स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए समर्पित नोडल अधिकारी, सुविधाओं को संचालित करने और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए श्रमिकों को जारी किये जाने वाले मानकीकृत प्रोटोकॉल, कोविड क्लस्टर / क्षेत्रों की पहचान करने की प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन आदि।केंद्रीय मंत्री ने कन्टेनमेंट ज़ोन में खाद्य उद्यमों के संचालन तथा 60-75 प्रतिशत श्रमिकों को उद्यमों में काम करने की अनुमति देने के विचार के साथ साथ उद्योग के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों के बारे में उद्योग संघ की मांग पर सहमति व्यक्त की, यदि उद्योग अपने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। सदस्यों ने उल्लेख किया कि बड़े खाद्य पैक की मांग बढऩे के कारण खाद्य उद्योग में तेजी आने की सम्भावना है और कहा कि आपूर्ति श्रृंखला पुन: स्थापित होते ही उद्योग में फिर से रफ़्तार आ जाएगी।एफपीआई सचिव पुष्पा सुब्रह्मण्यम ने संकट के इस समय में खाद्य उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखने में समर्थन के लिए फिक्की और इसके सदस्यों को धन्यवाद दिया। यह जानकारी दी गयी कि लौजिस्टिक्स, गोदाम संचालन, श्रमिकों और वाहनों की आवाजाही आदि से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए सरकार द्वारा आवश्यक परामर्श पहले ही जारी किये जा चुके हैं।फिक्की की फूड प्रोसेसिंग कमेटी के अध्यक्ष और आईटीसी फूड्स डिवीजन के सीईओ हेमंत मलिक, कारगिल इंडिया के अध्यक्ष साइमन गेरोगे, कोका कोला इंडिया के अध्यक्ष टी कृष्णकुमार, केलॉग इंडिया के प्रबंध निदेशक मोहित आनंद, मोंडेलेज़ इंटरनेशनल इंडिया के अध्यक्ष दीपक अय्यर, एमटीआर फ़ूड्स के सीईओ संजय शर्मा, अमूल के प्रबंध निदेशक आर.एस. सोढ़ी, ज़ायडस वेलनेस के सीईओ तरुण अरोरा समेत कई अन्य लोगों ने उद्योग के वर्तमान परिदृश्य एवं आगे की योजना पर अपने विचार साझा किए।उद्योग के सदस्यों को अवगत कराया गया कि इन सिफारिशें पर आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ पहले ही बातचीत की जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री ने उद्योग - सदस्यों को मंत्रालय से आवश्यक समर्थन का आश्वासन दिया और उन्हें किसी भी सहायता के लिए टास्क फोर्स के संपर्क में रहने की सलाह दी।---
- नई दिल्ली। जाने-माने बैंकर सुरेश एन पटेल ने आज सतर्कता आयुक्त के रूप में शपथ ली। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त संजय कोठारी ने सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए उन्हें वीडियो लिंक के माध्यम से उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण समारोह में सतर्कता आयुक्त शरदकुमार तथा आयोग के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।श्री पटेल के पास बैंकिंग क्षेत्र में तीन दशकों का अनुभव रहा है। वह आंध्रा बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं। इसके अलावा वह भारतीय बैंक संघ की प्रबंधन समिति और बैंकर्स ग्रामीण विकास संस्थान के सदस्य भी थे। वह नाबार्ड,आंध्र प्रदेश की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति तथा बैंकर्स इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट के अध्यक्ष भीरह चुके हैं।सतर्कता आयुक्त के पद पर नियुक्त किए जाने के पूर्व श्री पटेल रिजर्व बैंक के विनियमन और पर्यवेक्षण तथा भुगतान एवं निपटान प्रणाली (बीपीएसएस) बोर्ड के एक स्थायी आमंत्रित सदस्य और बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी (एबीबीएफएफ) के सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल चार वर्ष या 65 साल की उम्र पूरी होने तक रहता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग में एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और दो सतर्कता आयुक्त हो सकते हैं।---
- -राज्य में इलेक्ट्रानिक्स, ऑटोमोबाइल, आयरन एवं स्टील, भारी इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, ऑप्टिकल फायबर उद्योग को आमंत्रित करने उद्योग विभाग करेगा पहलरायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्य में प्रत्यक्ष विदेश निवेश के संबंध में उद्योग विभाग के प्रस्तावित कार्ययोजना को सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। उन्होंने उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव को कुछ चुनिंदा सेक्टर के उद्योगों को छत्तीसगढ़ में आमंत्रित करने हेतु आवश्यक चर्चा एवं पत्राचार करने की भी बात कही।राज्य में ऑटोमोबाइल, आयरन एवं स्टील, भारी इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिक वायर एवं ऑप्टिकल फायबर, कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेक्सटाईल, इलेक्ट्रानिक्स आदि उद्योगों की स्थापना के लिए प्राथमिकता से विदेशी पूंजी निवेश के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।प्रमुख सचिव उद्योग मनोज पिंगुआ ने पावर पाइंट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से विदेशी पूंजी निवेश के संबंध में प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि कोविड-19 संक्रमण की वजह से वर्तमान में विश्व में जो स्थिति निर्मित हुई है, उसको देखते हुए भारत, विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य में चीन से बाहर निकलने को इच्छुक विदेशी औद्योगिक संस्थानों को यहां उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित करने के अवसर निर्मित हुए हैं। उन्होंने बताया कि यू.एस.ए., जापान, दक्षिण कोरिया, ताईवान एवं वियतनाम की प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में अपना उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभाग द्वारा प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई है।श्री पिंगुआ ने बताया कि उक्त देशों की कंपनियों की कई ईकाइयाँ भारत में पहले से ही कार्यरत हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य में भी अपना उद्यम शुरू करने के लिए आमंत्रित किया जाना उपयुक्त होगा, इसके लिए आवश्यक सुविधाएँ एवं रियायते भी दी जा सकती है। श्री पिंगुआ ने बताया कि विदेशी कंपनियों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापना के लिए सिंगल स्ट्रोक क्लीयरेंस, प्लग एण्ड प्ले सुविधा के साथ भूमि, कुशल श्रम शक्ति, प्रोजेक्ट की स्वीकृति का सरलीकरण, निवेश पैकेज, स्थानीय निवेशकों से साथ ज्वाईंट वेंचर, आवश्यक अधोसंरचना, बिजली, पानी के अधिभार में छूट दिया जा सकता है। विदेशी निवेश सम्बंधी त्वरित निर्णय लेने हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ सचिवों की समिति गठित करने की सहमति भी दी गयी है ।--------------
- -फिक्की के पदाधिकारियों को दिलाया भरोसारायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से छत्तीसगढ़ के उद्योगों को उबरने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा हर संभव सहयोग दिया जाएगा। राज्य के औद्योगिक संस्थाओं को कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर उत्पादन एवं विक्रय की व्यवस्था बेहतर हो सके इसके लिए राज्य सरकार सभी जरूरी कदम उठाएगी।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज शाम आपने निवास कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए फिक्की के पदाधिकारियों से चर्चा करते हुए उक्त बातें कहीं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य सरकार यहां के उद्यमियों को कोरोना संक्रमण की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ही अपनी ओर से पहल की है। राज्य के लघु एवं मध्यम उद्योगों को विशेष राहत देने के लिए केन्द्र सरकार से सहायता का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के उद्योग पूरी क्षमता से संचालित हो तथा उनके उत्पादित माल के लिए इस मुश्किल घड़ी में भी बाजार उपलब्ध हो सके, सरकार द्वारा इसके लिए भी आवश्यक उपाय और पहल की जा रही है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी वर्गों और विशेषकर उद्योग जगत से मिले सहयोग के लिए सभी उद्यमियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की स्थिति में राज्य के उद्यमियों ने अपने यहां कार्यरत श्रमिकों के रहने एवं उनके भोजन की व्यवस्था की। यही वजह रही कि छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को परेशानी नहीं हुई जबकि अन्य राज्यों में उद्योगों के बंद होने की वजह से न सिर्फ अफरा-तफरी का माहौल रहा बल्कि श्रमिक अपने राज्य वापस लौटने के लिए सड़कों पर उतर आए और उन्हें बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगे कहा कि राज्य में उद्योगों के उत्पादित माल के परिवहन एवं बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने फिक्की के पदाधिकारियों से कहा कि देश के ग्रीन जोन के जिलों में वह अपने उत्पादित माल की सप्लाई आवश्यक एहतियात बरतते हुए करें। इसके लिए आवश्यक होने पर राज्य सरकार अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं अधिकारियों से भी चर्चा कर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों से उद्योगों के संचालन के लिए आने वाले कच्चे माल एवं अन्य आवश्यक सामग्री बिना किसी अड़चन के छत्तीसगढ़ आ सके इस संबंध में भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए है। उन्होंने राज्य के उद्यमियों से कहा कि अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ माल लेकर आने वाले मालवाहकों के चालक-परिचालक एवं हम्मालों के ठहरने एवं उनके भोजन की पृथक से व्यवस्था करें और यह भी सुनिश्चित करें कि वे स्थानीय लोगों के संपर्क में न आएं। इसी तरीके का एहतियात अन्य राज्यों में माल की सप्लाई के दौरान भी रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी उद्योगों में फिलहाल 80 प्रतिशत के आस-पास उत्पादन चालू है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में यहां के उद्योग शत-प्रतिशत प्रोडक्शन करने लगेेंगे। मुख्यमंत्री ने वर्तमान स्थिति में उद्यमियों से यह भी आग्रह किया कि वे उद्योग संचालन के लिए स्थानीय श्रमिकों की सेवाएं लें ताकि कोरोना संक्रमण की स्थिति में राज्य में नियंत्रित रहे।----- - नई दिल्ली। वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली कंपनी फ्लिपकार्ट ने ई-कॉमर्स कंपनियों को भी धीरे-धीरे गैर-आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की अनुमति दिए जाने का सुझाव दिया है। फ्लिपकार्ट का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उपक्रमों (एमएसएमई) के पास जमा हो चुके सामान के भंडार को निकालने में भी मदद मिलेगी।कोरोना वायरस की वजह से लागू राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों को सिर्फ खाद्य सामान और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की बिक्री की अनुमति है। फ्लिपकार्ट का यह बयान ऐसे समय आया है कि जबकि सरकार ने लॉकडाउन के दौरान शहरी इलाकों के रिहायशी परिसरों की दुकानों को कुछ शर्तों के साथ के साथ खोलने की अनुमति दे दी है।
- नई दिल्ली। छोटे व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देशभर में गली-मोहल्लों, स्वतंत्र तौर पर चलने वाली दुकानों को खोलने की अनुमति देने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि दुकानदार इस मामले में अपने राज्य की सरकार के निर्देश के अनुसार काम करेंगे।कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने एक बयान में कहा, केंद्र के आदेश को लागू करने के लिए राज्य सरकारों को आवश्यक निर्देश जारी करने होंगे। व्यापारी उसी के आधार पर अपनी दुकानें खोल पाएंगे। उन्होंने कहा, 'कैट ने देशभर के व्यापारियों से अपने अपने राज्य में सरकार के आदेश की प्रतीक्षा करने की अपील की है। साथ ही आवश्यक रूप से स्वास्थ्य सुरक्षा एवं आपस में मेल जोल के समय शारीरिक दूरी के मानदंडों का पालन करने के लिए कहा है।कैट ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी को एक पत्र भेजकर फिर से कहा कि दुकानें अथवा बाजार खोलने से पहले उन्हें अच्छी तरह से कीटाणुमुक्त करना बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार को इसे लेकर एक स्पष्ट योजना तुरंत बनानी चाहिए। इससे पहले खुदरा कारोबार करने वाली फर्मों के संगठन रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) ने भी शनिवार को आदेश में उल्लेखित बाजार परिसर (मार्केट काम्प्लेक्स) जैसे शब्दों का अर्थ आसानी से समझ नहीं आने का उदाहरण देते हुए, इसे और स्पष्ट करने की जरूरत बतायी है।
- नई दिल्ली। गोदरेज समूह ने मच्छर भगाने वाले तथा इस तरह के अन्य उत्पादों को जरूरी सामानों की सूची में शामिल करने का सरकार से अनुरोध किया है।कंपनी ने एक बयान में कहा कि मई से डेंगू और मलेरिया के मामले बढऩे लगते हैं और अगस्त तक सामने आते रहते हैं। इनके लिये अप्रैल से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कंपनी ने कहा, मच्छर भगाने वाले उत्पाद जैसे मॉस्क्यिटो रीपैलेंट, पर्सनल रीपैलेंट, लिक्विड वेपराइजर्स आदि को जरूरी सामानों की सूची में डाला जाना चाहिये। इससे घरों में कीड़ों को भगाने के लिये इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी और यह लॉकडाउन के पूरी तरह से हटाये जाने तक लोगों को आसानी से उपलब्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि गोदरेज समूह की कंपनी गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड इस तरह के उत्पादों की प्रमुख कंपनी है।















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