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 जीएसटी संग्रह मई में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये के पार

नयी दिल्ली.  माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह मई में 3.2 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह वृद्धि वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति में सुधार तथा आयात से मिलने वाले कर संग्रह में लगातार बढ़ोतरी के कारण हुई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। मई, 2025 में सकल जीएसटी संग्रह 1.88 लाख करोड़ रुपये रहा था।
 घरेलू लेनदेन से मई के दौरान केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) संग्रह 37,397 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 45,143 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 51,990 करोड़ रुपये रहा। इस अवधि में कर योग्य वस्तुओं की आपूर्ति में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो घरेलू मांग को दर्शाती है। वहीं सेवाओं के क्षेत्र में यह वृद्धि 22.2 प्रतिशत रही जो घरेलू खपत की मजबूती को दिखाती है। आयात से आईजीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर मई में 59,654 करोड़ रुपये हो गया जो औद्योगिक क्षमता के विस्तार का संकेत है। जीएसटी 'रिफंड' 2.6 प्रतिशत बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये हो गया।
'रिफंड' समायोजित करने के बाद, मई में शुद्ध जीएसटी राजस्व 3.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे पहले अप्रैल में जीएसटी संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
 वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल और मई) में कुल मिलाकर जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत बढ़कर 4.37 लाख करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह 4.11 लाख करोड़ रुपये था। सूत्रों ने कहा, '' सालाना आधार पर यह संचयी प्रदर्शन अच्छा है और समूचे वर्ष के लिए तय जीएसटी राजस्व लक्ष्य को हासिल करने के अनुरूप है।'' सरकार ने चालू वित्त वर्ष में जीएसटी से 10.19 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
 आंकड़ों पर कर संबंधी सलाह देने वाली प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के साझेदार प्रतीक जैन ने कहा कि अप्रैल और मई, 2026 को मिलाकर संग्रह में तुलनीय आधार पर 8.8 प्रतिशत की मजबूत सालाना वृद्धि दिखती है। उन्होंने कहा कि सितंबर, 2025 से दरों में तेज कटौती और पिछले कुछ महीनों में भू-राजनीतिक व्यवधानों के बावजूद यह वृद्धि हुई है। साथ ही, वस्तुओं और सेवाओं के आयात तथा घरेलू खपत में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। वैश्विक पेशेवर सेवा कंपनी केपीएमजी के अप्रत्यक्ष कर प्रमुख एवं साझेदार अभिषेक जैन ने कहा, '' आयात जीएसटी में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, लेकिन यह रुपये में गिरावट के कारण भी हो सकती है। आधार अवधि में दूरसंचार के एकबारगी भुगतान को समायोजित करने पर घरेलू संग्रह मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप मध्यम वृद्धि दर्शाता है। '' पेशेवर सेवा कंपनी डेलॉयट इंडिया के साझेदार एवं अप्रत्यक्ष कर प्रमुख महेश जे. ने कहा कि मई में घरेलू प्रदर्शन अपेक्षाकृत नरम रहा, जिसे अप्रैल के मजबूत आधार के संदर्भ में देखना चाहिए। हालांकि, जीएसटी 2.0 के तहत दरों के युक्तिकरण और सरलीकरण के उपाय बिना राजस्व पर बड़ा असर डाले खपत एवं मांग को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी जीएसटी परिषद की बैठक से उद्योग जगत को उम्मीद है कि कारोबार सुगमता बढ़ाने और कार्यशील पूंजी को और मुक्त करने के उपाय किए जाएंगे।

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