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 प्रसिद्ध पौराणिक इतिहास समेटा महामाया मंदिर, जहां सूर्यास्त में देवी के चरणों को छूती है सूर्य की किरणें

-36 शक्तिपीठों में से एक मां महामाया मंदिर आस्था का केंद्र
 रायपुर । रायपुर के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में पुरानी बस्ती में स्थित देवी महामाया मंदिर शामिल है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के 36 शक्तिपीठों में से एक है। यह प्राचीन मंदिर 17वीं-18वीं शताब्दी के बीच मराठा संघ के शासकों द्वारा पुनर्निर्मित किया गया। मंदिर परिसर में दो मंदिर हैं, मां महामाया मंदिर और मां समलेश्वरी मंदिर। इस मंदिर में खास आकर्षण का केन्द्र हैं, जो सूर्यास्त के समय सूर्य की किरणें मां महामाया के चरणों को छूती हैं, और सूर्याेदय के समय किरणें मां समलेश्वरी के चरणों को छूती हैं।
नगर निगम स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा इसके आस-पास सौर्दयीकरण कराया है और इसे हैरिटेज वाक में शामिल किया गया। जिसमें समय समय पर पर्यटक यहां भ्रमण के लिए आते रहे। यह रायपुर के मध्य स्थित होने के कारण यहां पर पहुंचना आसान है, स्थानीय यातायात के साधन से यहां पहुंचा जा सकता है।
मां महामाया मंदिर लगभग 1400 वर्षों पुराना है। इतिहासकारों के मुताबिक, हैहय राजाओं ने छत्तीसगढ़ में छत्तीस किले बनवाए और प्रत्येक किले की शुरुआत में मां महामाया के मंदिर बनवाए और यह मंदिर उनमें से एक किला है। वर्तमान में किले का कोई प्रमाण यहां नहीं है, लेकिन महामाया और समलेश्वरी को समर्पित मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण हैहय के राजा मोरध्वज ने तांत्रिक विधि से करवाया था, जो इसे अघोरियों और तांत्रिकों के लिए तीर्थस्थल बनाता है। वर्तमान मंदिर का जीर्णाेद्धार नागपुर के मराठों द्वारा किया गया था।

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