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कई मुश्किलें आईं; 'महाप्रभु' ने हमेशा मुझे उनसे बाहर निकाला

राष्ट्रपति मुर्मू ने भगवान जगन्नाथ पर लिखा लेख
नयी दिल्ली
.  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी श्रद्धा जताई और बताया कि कैसे उन्हें अहम मौकों पर भगवान से मार्गदर्शन मिला, जिसमें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए उनकी उम्मीदवारी की घोषणा भी शामिल है। अपने लिखे एक लेख को 'एक्स' पर साझा करते हुए मुर्मू ने कहा कि वह बचपन से ही महाप्रभु जगन्नाथ की भक्त रही हैं। राष्ट्रपति ने लिखा, ''बचपन से मैं जगनाथ जी की भक्त हूं। वे सर्वदा मेरे परम आराध्य हैं। मेरे जीवन के उत्थान और पतन के वे नियंता हैं। मेरे दुख-सुख के कर्ता-धर्ता हैं। जीवन में मैंने बहुत कष्ट भी सहे हैं। उन सब दुख से उबारा है मुझे महाबाहु ने। मैं उनकी बेटी जो हूं!'' उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति पद के लिए मुझे उम्मीदवार बनाने की घोषणा होते ही मैंने महाप्रभु का स्मरण किया। इतनी ऊंचाई पर मुझे ले जा रहे हो प्रभु, पग-पग पर मुझे सहारा देना, सदा मेरे पास रहना - यह मेरी प्रार्थना थी। उन्होंने मेरी प्रार्थना सुनी, सुन भी रहे हैं।'' मुर्मू ने कहा, ''राष्ट्रपति पद की उमीदवार के रूप में दिल्ली में रहने के दौरान रथयात्रा का महापर्व आया। परंतु पुरी जाना संभव नहीं था। रथयात्रा के दिन बड़े भोर में दिल्ली के हौजखास में बने जगन्नाथ मंदिर जाकर मैंने महाप्रभु के दर्शन किए। मन आनंद से भर गया। उनका आशीष मुझ पर बरस गया। बड़े आत्मविश्वास से मैंने अपना नामांकन-पत्र दाखिल किया।'' 'इस विशाल पथ पर' शीर्षक वाला लेख रथ यात्रा के अवसर पर साझा किया गया।
मुर्मू ने 25 जुलाई, 2022 को देश के 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली, जिससे वह देश की पहली आदिवासी राष्ट्राध्यक्ष बन गईं। मुर्मू ने याद किया, ''अत्यंत उत्साह से चुनाव प्रचार में भाग लिया। 25 जुलाई, 2022 को संसद के केंद्रीय कक्ष में शपथ लेने जाते समय मैं जगन्नाथ जी से प्रार्थना करते-करते जा रही थी। उनके आशीवाद से मेरा शपथ-पाठ खूब अच्छी तरह संपन्न हुआ। राष्ट्रपति के रूप में मेरे प्रथम भाषण के समय मानो वे मेरे साथ ही थे।'' उन्होंने कहा कि जल्द ही 10 नवंबर 2022 को पुरी जाने का कार्य्रकम तय हो गया।
राष्ट्रपति ने कहा, ''श्रीमंदिर के सिंहद्वार के पास पहुंचते ही मैं स्थिर नहीं रह पाई। तब तक मैं खुद को भूल चुकी थी। पावन-पथ की धूल में साष्टांग लेटकर मैंने महाप्रभु को प्रणाम किया। उसके बाद मंदिर में प्रवेश। गर्भगृह में पहुंचकर चतुर्धा मूर्तियों का दर्शन करते ही मैं आनंद से अभिभूत हो गई। महाप्रभु जगत के नाथ हैं, अनाथों के नाथ हैं। जगत के लोगों का दुःख दूर करने के लिए वे सदा तत्पर रहते हैं।'' इससे पहले दिन में 'एक्स' पर एक अलग पोस्ट में, मुर्मू ने रथ यात्रा के मौके पर लोगों को बधाई दी और देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

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