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बच्चों में बार-बार मिडिल ईयर इंफेक्शन क्यों होता है?

 बच्चों में कान में इंफेक्शन होने की समस्या बहुत आम है और कई बार पेरेंट्स एंटीबायोटिक दवाएं देकर इसे ठीक करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि कान में इंफेक्शन के कारण बच्चों को बुखार तक भी हो जाता है। अगर किसी बच्चे को बार-बार कान में इंफेक्शन हो रहा है, तो इसकी पहचान करके डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।  
 Cureus में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार इंफेक्शन 6 से दो साल के बच्चों में ज्यादा होता है, क्योंकि उनमें इम्यूनिटी कमजोर होती है और साथ ही कान की यूस्टेशियन ट्यूब की बनावट वयस्कों की तुलना में ज्यादा सीधी होती है और इस वजह से गले का इंफेक्शन आसानी से कान में पहुंच जाता है। अगर कान का इंफेक्शन ज्यादा समय के लिए रह जाए, तो बच्चा ठीक से सुन नहीं पाता, तो इससे उसके बोलने और भाषा सीखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। “बच्चों में बार यूस्टेशियन ट्यूब कान को नाक और गले से जोड़ती है। छोटे बच्चों में यह ट्यूब छोटी, संकरी और सीधी होती है। इस वजह से तरल पदार्थ मिडिल ईयर में फंस जाता है। जब तरल बाहर नहीं निकल पाता, तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।”
 ज्यादातर मामलों में मिडिल ईयर इंफेक्शन की शुरुआत सर्दी-जुकाम से होती है और फिर धीरे-धीरे नाक बंद होना और गले में इंफेक्शन से यूस्टेशियन ट्यूब बंद हो सकती है। इससे कान के अंदर हवा का दबाव बदल जाता है और पर्दे के पीछे तरल जमा होने लगता है। अगर यही कंडीशन लगातार बनी रही है, तो बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं।” कुछ बच्चों में कान में इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि उनकी न सिर्फ इम्यूनिटी कमजोर होती है, बल्कि इसके कई फैक्टर्स होते हैं। जो बच्चे डे-केयर या स्कूल जाते हैं, उन्हें वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज्यादा होती है। इसके अलावा, अगर घर में कोई स्मोक करता है, धूल, एलर्जी या बार-बार सर्दी-जुकाम होता है, तो उन्हें कान में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। अगर मां शिशु को लिटाकर दूध पिलाती है, तो यह आदत भी कान में इंफेक्शन का कारण हो सकती है।
 पेरेंट्स को किन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए?
-छोटे बच्चे अपनी समस्या नहीं बता पाते, इसलिए पेरेंट्स को उनका बिहेवियर देखना चाहिए।
-अगर बच्चा बार-बार कान पकड़कर खींच रहा हो, तो यह कान में इंफेक्शन होने का कारण हो सकता है।
-बच्चे का ठीक से न सो पाना, दूध या खाना कम लेना भी कान में इंफेक्शन की वजह हो सकता है।
-अगर बच्चे को बार-बार बुखार हो रहा हो, तो इसका कारण कान में इंफेक्शन हो सकता है।
-अगर बच्चा एक बार में समझ न पाए, तो सुनने की क्षमता भी कम हो सकती है।
-कान से मवाद या पानी निकलने पर बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
-कान के इंफेक्शन को डायग्नोज करने के लिए क्या चेकअप होते है?
  बच्चे के कान के पर्दे की जांच के लिए ओटोस्कोप या माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है। अगर डॉक्टर को लगता है कि बच्चे को कम सुनाई दे रहा है, तो उसका टाइम्पेनोमेट्री या हियरिंग टेस्ट भी कराया जा सकता है। कई बार यह भी चेक किया जाता है कि बच्चे को एडेनॉइड, एलर्जी या यूस्टेशियन ट्यूब से जुड़ी समस्या तो नहीं है। पेरेंट्स को अपने बच्चों को बार-बार एंटीबायोटिक नहीं देना चाहिए। सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही दवा दें। इसके अलावा, कुछ लोग कान की समस्या को मौसमी वायरल या इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन पेरेंट्स को ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर बच्चे को कान में दर्द है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि देरी करने से बच्चे के सुनने की क्षमता भी कम हो सकती है, जो उसके सीखने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

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