घरेलू महिला से ‘लखपति दीदी’ तक निर्मला कोशले की प्रेरक उड़ान
बिलासपुर /जिले के बिल्हा विकासखंड के भैंसबोड़ क्लस्टर के ग्राम भोजपुरी की निर्मला कोशले की कहानी हजारों महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है। एक साधारण गृहिणी से ‘लखपति दीदी’ बनने तक का उनका सफर न केवल आर्थिक प्रगति की मिसाल है, बल्कि ग्रामीण भारत में नारी सशक्तिकरण की जीवंत तस्वीर भी प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित ‘मिनी माता’ स्व-सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर निर्मला ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सही अवसर, मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिल जाए, तो कोई भी महिला अपनी तकदीर स्वयं लिख सकती है।
समूह से जुड़ने से पहले निर्मला का जीवन सामान्य ग्रामीण महिलाओं की तरह घर-गृहस्थी और खेत तक सीमित था। 13 मार्च 2018 को जब ‘मिनी माता’ स्व-सहायता समूह का गठन हुआ और उन्हें समूह की जिम्मेदारी मिली, तभी से उनके जीवन ने नई दिशा पकड़ी। जिम्मेदारी ने उन्हें डराया नहीं, बल्कि उनके भीतर छिपी नेतृत्व क्षमता को जगाया। समूह के माध्यम से उन्हें 1 हजार रुपये की आरएफ (रिवॉल्विंग फंड) राशि, 20 हजार रुपये की सीआईएफ सहायता तथा 10 हजार रुपये का बैंक ऋण प्राप्त हुआ। बाद में समूह को भी 15 हजार रुपये आरएफ, 60 हजार रुपये सीआईएफ तथा 3 लाख रुपये का बैंक ऋण मिला। छोटी प्रतीत होने वाली ये राशियाँ उनके जीवन में बड़े परिवर्तन की आधारशिला बनीं।
कृषि कार्य को जारी रखते हुए निर्मला ने एक साथ कई आजीविका गतिविधियाँ प्रारंभ कीं। उन्होंने हल्दी, मिर्च और मसालों का लघु प्रसंस्करण इकाई स्थापित की, श्रृंगार सामग्री की दुकान खोली तथा पशुपालन को भी आय का स्रोत बनाया। पहले उनकी वार्षिक आय केवल कृषि पर आधारित लगभग 55 हजार रुपये थी। लेकिन नई गतिविधियों से आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई-श्रृंगार दुकान से लगभग 65 हजार रुपये वार्षिक आय, मसाला प्रसंस्करण से लगभग 36 हजार रुपये, पशुपालन से लगभग 36 हजार रुपये अतिरिक्त आय।
इस प्रकार उनकी कुल वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 92 हजार रुपये तक पहुँच गई। अब उनका परिवार न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर पा रहा है, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बचत और बेहतर भविष्य की योजनाएँ भी बना रहा है। निर्मला की प्रगति केवल आय वृद्धि तक सीमित नहीं रही। पहले वे केवल घर तक सीमित थीं, आज वे समूह की सचिव, सफल उद्यमी और ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जाती हैं। वे घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, बैंक से सीधे संवाद करती हैं और बाजार में आत्मविश्वास के साथ अपने उत्पाद बेचती हैं। समूह बैठकों और प्रशिक्षण ने उन्हें बचत की आदत, वित्तीय प्रबंधन, निवेश की समझ और व्यवसाय संचालन का ज्ञान दिया। एनआरएलएम टीम के मार्गदर्शन ने उन्हें यह आत्मविश्वास प्रदान किया कि किस गतिविधि में कितना निवेश करना है और बाजार की मांग के अनुसार व्यवसाय को कैसे आगे बढ़ाना है। आज निर्मला केवल स्वयं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।निर्मला कोशले अब केवल एक नाम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले, तो वे आर्थिक और सामाजिक दोनों ही क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर सकती हैं। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि आत्मविश्वास, परिश्रम और सामूहिक प्रयास से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।



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