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 महाराष्‍ट्र मंडल ने नर्सों की सेवा को किया नमन

 
-  महिला दिवस समारोह में खुलकर हुई नारी शक्ति पर चर्चा
 -  तात्कालिक भाषण में प्रखर वक्ता की भूमिका में नजर आई महिलाएं
 रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के महिला दिवस समारोह में नर्सों की सेवा को नमन करते हुए उन्‍हें मंच पर बुलाकर सम्‍मानित किया गया। वहीं तात्कालिक भाषण में महिलाएं अपने-अपने विषय पर प्रखर वक्ता की तरह धारा प्रवाह बोलतीं नजर आईं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। 
इस मौके पर मुख्‍य अतिथि ईएनटी विशेषज्ञ डा. अनुपमा आनंद जोशी ने कहा कि नारी अबला नहीं है। नारी अनपढ़ ही क्यों न हो, वह अपनी इच्छाशक्ति से सब कुछ कर सकती है। नारी की शक्ति ही परिवार को जोड़ती है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सिर्फ एक दिन है, नारियों का सम्मान तो हर दिन होना चाहिए। 
कार्यक्रम के विशेष अतिथि वरिष्‍ठ पत्रकार गोविंद ठाकरे ने कहा कि नारी देह के आगे दिव्‍य है। जब हम नारी को देह से आगे देखते हैं, तो उनमें हमें मां, बहन, बेटी दिखाई देती है। नारी के आगे कोई कुछ भी नहीं। ठाकरे ने कहा कि वे काफी अरसे से महाराष्‍ट्र मंडल आते रहे हैं। यहां संगठन और कार्यक्रमों में महिलाओं को जो महत्‍व दिया जाता है, सम्‍मान किया जाता है, वह प्रेरक व प्रशंसनीय है।  
अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने अपने अध्‍यक्षीय संबोधन में कहा कि दो चोटी बनाकर घर से निकलने वाली महिलाएं आज सफलता की चोटी पर है। सभी क्षेत्रों में महिलाओं ने अपना लोहा मनवा लिया है। हमारे यहां विभिन्न प्रकल्पों के 150 से अधिक पदाधिकारियों में 80 फीसद महिलाएं हैं। इसी तरह यहां कार्य करने वाले 120 कर्मचारियों में भी 80 फीसदी महिलाएं ही हैं। 
कार्यक्रम में पिछले समारोह के आयोजक केंद्रों की संयोजिकाओं व सह संयाजिकाओं को प्रोत्‍साहन स्‍वरूप सम्‍मानित किया गया। हमारे गौरवशाली इतिहास की महानतम महिलाओं में छत्रपति शिवाजी महाराज की माता जीजा बाई के वेश में पल्‍लवी मुकादम, सिंधुताई सपकाल के वेश में संध्‍या खंगन, महिलाओं में शिक्षा की ज्‍यो‍त जलाने वाली ज्‍योतिबा फुले की भूमिका में विराज भालेराव, महारानी अहिल्‍या बाई के रोल में सौदामिनी बर्वे नजर आईंं। 
कार्यक्रम के अंतिम चरण में महिलाओं ने ढोल की थाप पर जमकर नृत्य किया। चौबे कॉलोनी, रोहिणीपुरम, डंगनिया और सुंदर नगर केंद्र की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उपाध्‍यक्ष गीता श्‍याम दलाल और महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले का विशेष मार्गदर्शन रहा। कार्यक्रम का संचालन संगीता निमोणकर और चित्रा जावलेकर ने किया। 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच तात्कालिक भाषण स्‍पर्धा में 12 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें महिलाओं ने स्वावलंबन, डिजि‍टल क्रांति, सकारात्मक सोच, महिला उद्यमी जैसे कई विषयों पर अपने विचार रखे। डा. वृंदा काले ने कहा कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनका आत्मविश्वास प्रबल होता है।अदिति देशपांडे ने मजबूत कुटुंब और डा. विनया मास्कर ने आत्मबल पर जोर दिया।

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