सारनाथ का इतिहास सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराई गई खुदाई के बाद सामने आया था:एएसआई
वाराणसी (उप्र). भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यह स्वीकार किया है कि सारनाथ का इतिहास सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराई गई खुदाई के बाद सामने आया था। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। एएसआई महानिदेशक वाई. एस. रावत ने कहा कि सारनाथ में सबसे पहले खुदाई का काम जगत सिंह ने कराया था, जिसके कारण इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व का पता चला। रावत ने बताया कि जगत सिंह के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने एएसआई को साक्ष्यों के दस्तावेज सौंपे थे, जिनसे यह साबित होता है कि इस स्थल पर पहली खुदाई जगत सिंह ने ही कराई थी। वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, फलस्वरूप बौद्ध धर्म के प्रसार की शुरुआत हुई। प्रदीप नारायण सिंह ने बताया कि सारनाथ का इलाका कभी उनके परिवार की ज़मींदारी के अंतर्गत आता था और ऐतिहासिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि बाबू जगत सिंह ने 1787-88 में वहां खुदाई का काम करवाया था।
उन्होंने कहा, ''जगत सिंह ने उस इलाके में कुछ खुदाई का काम कराया था, जिसके परिणामस्वरूप अंततः इस स्थल की खोज हुई।'' रावत ने कहा कि सारनाथ परिसर में लगी पट्टिका (शिलालेख) में अब संशोधन कर दिया गया है, जिसमें जगत सिंह की भूमिका को मान्यता देते हुए उनका नाम भी शामिल किया गया है। यह संशोधन हाल में सारनाथ परिसर में लगाई गई नई पट्टिका में देखा जा सकता है। जहां पहले वाली पट्टिका में इस स्थल के पुरातात्विक महत्व की पहली खोज का श्रेय 1798 में ब्रिटिश अधिकारियों को दिया गया था, वहीं नई पट्टिका में यह बताया गया है कि इस स्थल का महत्व 18वीं सदी के आखिर में तब सामने आया, जब काशी के बाबू जगत सिंह ने निर्माण सामग्री के लिए एक प्राचीन टीले की खुदाई कराई थी, फलस्वरूप कई महत्वपूर्ण पुरावशेषों की खोज हुई। इस तरह, संशोधित शिलालेख इस जगह पर शुरुआती खुदाई के काम में जगत सिंह की भूमिका को मान्यता देता है।
साथ ही, वह यह भी बताता है कि कई पुरातत्वविदों ने बाद में खुदाई की, जिसमें तीसरी सदी ईसा पूर्व से लेकर 12वीं सदी ईस्वी तक के मठ, स्तूप, मंदिर और मूर्तियां मिलीं। वाराणसी के जगतगंज शाही परिवार के प्रतिनिधि और बाबू जगत सिंह के छठी पीढ़ी के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि उनके पूर्वज के ऐतिहासिक योगदान के बारे में शोध और दस्तावेज़ी सबूत इकट्ठा करने की कोशिशें लंबे समय से चल रही थीं। उन्होंने कहा, ''अब एएसआई ने औपचारिक रूप से यह मान लिया है कि सारनाथ का इतिहास सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराई गई खुदाई के बाद ही सामने आया था।'' प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सारनाथ और उसके प्राचीन अवशेषों की खोज अंग्रेजों ने की थी, लेकिन एएसआई की इस मान्यता से यह साफ़ हो गया है कि जगत सिंह ने उनसे पहले ही यह काम कर लिया था। प्रदीप नारायण सिंह के अनुसार एएसआई की यह मान्यता इस बात का भी संकेत है कि ब्रिटिश काल के दौरान बाबू जगत सिंह के योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया था और उन्हें सारनाथ की खोज का सही श्रेय नहीं मिला था।



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