स्वनिधि योजना से मिला आर्थिक संबल
अपर्णा और ज्योति ने आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाए कदम
बिलासपुर/ सुशासन तिहार के तहत तालापारा में आयोजित समाधान शिविर कई जरूरतमंद लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया। शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जब सीधे लोगों तक पहुंचा, तब अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी।तालापारा की अपर्णा डे और ज्योति मिरी को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत आर्थिक सहायता मिली है। इस सहायता ने न केवल उनके छोटे व्यवसाय को नई दिशा दी है , बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी मिला है।
ज्योति मिरी पिछले कई वर्षों से सब्ज़ी व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं। वे प्रतिदिन सुबह बाजार से सब्ज़ियां खरीदकर मोहल्लों और आसपास के क्षेत्रों में बेचती थीं। सीमित पूंजी होने के कारण उन्हें कम मात्रा में ही सामान खरीदना पड़ता था, जिससे आमदनी भी सीमित रहती थी। कई बार आर्थिक परेशानियों के चलते व्यवसाय को जारी रखना भी मुश्किल हो जाता था। इसके बावजूद ज्योति ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं।
सुशासन तिहार के दौरान आयोजित समाधान शिविर में उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की जानकारी मिली। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। अब ज्योति इस राशि से अपने व्यवसाय का विस्तार करने की योजना बना रही हैं। वे अधिक मात्रा में सब्ज़ियां खरीद सकेंगी, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकेगी। ज्योति कहती हैं कि यह सहायता उनके लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक नया अवसर है।
वहीं अपर्णा डे सिलाई कार्य में कुशल हैं और लंबे समय से घर से छोटा सिलाई सेंटर संचालित कर रही थीं। वे महिलाओं और बच्चों के कपड़ों की सिलाई कर अपने परिवार की मदद करती थीं। लेकिन संसाधनों की कमी और सीमित आय के कारण वे अपने काम को बड़े स्तर पर शुरू नहीं कर पा रही थीं। कई बार उन्हें ऑर्डर मिलने के बावजूद पर्याप्त मशीन और सामग्री नहीं होने के कारण काम छोड़ना पड़ता था।
समाधान शिविर में स्वनिधि योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने अपर्णा के सपनों को नई उड़ान दी है। अब वे सिलाई मशीन, आवश्यक सामग्री और अन्य संसाधन खरीदकर अपने सिलाई सेंटर को व्यवस्थित रूप से संचालित करने की तैयारी कर रही हैं। अपर्णा का सपना है कि भविष्य में वे अपने सेंटर में अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण और रोजगार का अवसर दें, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।












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