मच्छरों की करेंगे स्कैनिंग
रायपुर /छत्तीसगढ़ में हर साल 20 हजार से ज्यादा लोग मलेरिया की चपेट में आते हैं और औसतन 40-50 लोगों की मौत होती है। अब बीमारी फैलने के बाद मरीज खोजने के बजाय पहले यह पता लगाने की तैयारी है कि राज्य के किस इलाके में किस बीमारी को फैलाने वाले मच्छर मौजूद हैं।
अमेरिका की एक रिसर्च यूनिवर्सिटी की टीम सभी जिलों में इलाकेवार सर्वे करेगी। मच्छरों की स्कैनिंग के लिए विशेष डिवाइस का इस्तेमाल होगा, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस इलाके में कौन सी बीमारी फैलाने वाले मच्छर मौजूद है।
अलग-अलग जिलों में मलेरिया के साथ डेंगू, फाइलेरिया, चिकनगुनिया, जीका और जापानी इंसेफलाइटिस फैलाने वाले मच्छर पाए जाते हैं। सर्वे के लिए स्वास्थ्य विभाग अमेरिका के जाॅन हॉप्किन्स विवि के साथ स्वास्थ्य विभाग ने अनुबंध करेगी है। अमेरिकी विशेषज्ञ डिवाइस की मदद से मच्छर की पहचान कर यह पता लगाया जा सकता है कि वह किस बीमारी को फैला सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की दो दिवसीय पार्टनर्स कंसल्टेटिव मीटिंग नवा रायपुर में हुई। इसमें स्वास्थ्य विभाग, डब्ल्यूएचओ और देश-विदेश की संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। उसी में मच्छरों का सर्वे करने का निर्णय लिया गया। इसमें अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका सहित विभिन्न संस्थाओं और रिसर्च यूनिवर्सिटी की टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में संभावित सहयोग का प्रेजेंटेशन दिया।
इसमें मुख्य सचिव विकास शील, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, संचालक संजीव कुमार झा, डब्ल्यूएचओ के मनोज झालानी, भारत में डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि यवन एच. एफ. ह्यूटिन और डिजिटल हेल्थ एवं एआई के क्षेत्रीय सलाहकार डॉ. कार्तिक अडापा शामिल हुए।












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