पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. अरुण कुमार शर्मा का निधन
-विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शोक व्यक्त किया
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. अरुण कुमार शर्मा का बुधवार रात निधन हो गया। वे 92 साल के थे। अरुण शर्मा की मांग पर अयोध्या में राम जन्म भूमि पर खुदाई कराई गई थी। उन्होंने ही खुदाई में मिले अवशेषों के रिसर्च के आधार पर कोर्ट में मंदिर होने के सबूत पेश किए थे।
डॉ. अरुण शर्मा (जन्म : 1933) भारत के पुरातत्त्वविद् थे। 2017 में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने छत्तीसगढ़ के अलावा भारत के अन्य स्थानों पर भी खुदाई कराई है। छत्तीसगढ़ के सिरपुर और राजिम के अलावा राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मामले में अहम भूमिका निभाई थी।
डॉ. शर्मा ने करियर का आरम्भ भिलाई इस्पात संयंत्र से की थी। उन्हें इस काम में कुछ नयापन नहीं लगा, इसलिए नौकरी छोड़ दी। इसके पश्चात भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) नागपुर में तकनीकी सहायक पद पर भर्ती हुए। डॉ. शर्मा ने अपने एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्हें ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी प्राय: ग्रामीण देते थे। छत्तीसगढ़ में बालोद स्थित करकाभाट में महापाषाण काल के टीलों की जानकारी गांववालों ने ही दी थी। डॉ. अरुण शर्मा ने ‘राम जन्म भूमि-बाबरी मजिस्द’ प्रकरण में इलाहबाद उच्च न्यायालय में बतौर मुख्य गवाह साक्ष्य, तर्क और तथ्यों के आधार पर बताया कि स्थल पर पूर्व में हिन्दू मंदिर होने के पर्याप्त प्रमाण हैं। डॉ. अरुण शर्मा के बयान के आधार पर विवादित स्थल पर कोर्ट ने राम जन्मभूमि का होना माना।
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर वे बहुत खुश थे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शोक व्यक्त किया
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डॉ. अरुण कुमार शर्मा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा-प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता, पद्मश्री डॉ. अरूण कुमार शर्मा जी के निधन का समाचार अत्यंत दु:खद है।
अयोध्या के श्री रामजन्म भूमि, सिरपुर और राजिम के उत्खनन में उनकी अहम भूमिका रही। प्रदेश के ऐसे सपूत का जाना हम सभी के लिए अपूर्णीय क्षति है। प्रभु श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान तथा परिजनों को यह दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करें।




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