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महिलाओं को सम्मानजनक तरीके से दर्शाने वाली फिल्मों में काम करना चाहती हूं: ज्योतिका
मुंबई। दक्षिण भारत की अभिनेत्री ज्योतिका ने कहा कि उनकी नई फिल्म ‘उड़ानपिराप्पे' में उन्हें खुद की उम्र से थोड़ी ज्यादा उम्रदराज किरदार अदा करने का मौका मिला और इसे उन्होंने स्वीकार किया क्योंकि उनका मानना है कि फिल्मों में इस तरह की भूमिका महिलाओं के लिए दुर्लभ तौर पर ही लिखी जाती है। फिल्म एक ऐसे भाई-बहन की कहानी है जो वर्षों से गहरे मतभेद का सामना कर रहे परिवार को एकजुट करने का प्रयास करते हैं। इस फिल्म में वैरावन का किरदार शशि कुमार ने और माथंगी का किरदार ज्योतिका ने अदा किया है। ‘'उड़ानपिराप्पे' फिलहाल तमिल और तेलुगु भाषा (रक्त संबंधम) में अमेजन प्राइम वीडियो पर प्रसारित हो रहा है। ‘खुशी', ‘पेराझगन', ‘चंद्रमुखी' और ‘मोझी' जैसी फिल्मों में काम कर चुकीं ज्योतिका का कहना है कि इस फिल्म ने उन्हें एक ऐसा किरदार अदा करने का मौका दिया, जिस तरह का अनुभव उन्होंने पहले कभी नहीं किया था। ज्योतिका ने कहा कि महिला कलाकारों को समय के साथ अपनी पसंद की फिल्में करने का मौका बहुत कम ही मिलता है इसलिए ऐसे में जब कलाकार को अलग-अलग आयु वर्ग के किरदार अदा करने का मौका मिलता है तो यह ‘अच्छा' है। ज्योतिका ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म निर्माता प्रियदर्शन की फिल्म ‘डोली सजा के रखना' से 1998 में की थी और वह तमिल फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्रियों में से एक हैं। अभिनेत्री ने कहा कि वह अब अपने करियर में ऐसे मुकाम पर हैं, जहां वह ऐसे किरदार चुनना चाहती हैं जो महिलाओं का प्रतिनिधित्व ईमानदारी से करते हों। 

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