भारत और इटली ने अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई
रोम. भारत और इटली ने बुधवार को अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई, रक्षा औद्योगिक रूपरेखा को अंतिम रूप दिया और 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक बढ़ाने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी ने बढ़ती भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मद्देनजर द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के लिए व्यापक वार्ता की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति और क्षेत्र के साथ-साथ दुनिया के बाकी हिस्सों पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए संवाद और कूटनीति के जरिये संघर्ष का समाधान निकालने पर जोर दिया। मोदी और मेलोनी ने नौवहन की स्वतंत्रता और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को पुनः शुरू करने का भी आह्वान किया। मोदी-मेलोनी वार्ता के बाद भारत और इटली ने एक रक्षा औद्योगिक रूपरेखा जारी की, जिसका उद्देश्य हेलीकॉप्टर और समुद्री हथियारों सहित अन्य सैन्य उपकरणों के साझा विकास एवं उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करना है। इसके अलावा, दोनों देशों ने इटली में भारतीय नर्सों के आवागमन और उच्च शिक्षा के लिए नयी रूपरेखा को भी अंतिम रूप दिया। दोनों पक्षों ने 10 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, समुद्री परिवहन और समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने से जुड़े करार शामिल हैं। मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में मंगलवार रात रोम पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा का मकसद रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना था। मोदी और मेलोनी ने जनवरी में अंतिम रूप दिए गए भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने पर सहमति जताई और इसके शीघ्र कार्यान्वयन का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ''मुझे खुशी है कि हम अपने संबंधों को एक विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ा रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 हमारी साझेदारी के लिए एक व्यावहारिक और भविष्योन्मुखी ढांचा प्रदान करती है। हम इस पर समयबद्ध तरीके से प्रगति कर रहे हैं। हमारे संयुक्त प्रयासों के जरिये द्विपक्षीय व्यापार तेजी से 20 अरब यूरो के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।'' इस बीच, मेलोनी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां चीन अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। इतालवी प्रधानमंत्री ने भारत-इटली संबंधों को मौजूदा रणनीतिक साझेदारी से विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाए जाने का भी जिक्र किया। एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, दोनों पक्षों ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा करने और विशेष रणनीतिक साझेदारी को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति जताई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मोदी और मेलोनी व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं नवाचार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, शिक्षा और सांस्कृतिक जुड़ाव में सहयोग और बढ़ाने पर सहमत हुए। मोदी ने कहा, ''प्रौद्योगिकी और नवाचार हमारी साझेदारी के आधार हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हमारे बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''हम भारत-इटली नवाचार केंद्र पर काम कर रहे हैं, ताकि दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान केंद्रों और उद्योगों को जोड़ा जा सके।'' उन्होंने कहा कि रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग ''गहरे आपसी विश्वास'' का प्रतीक है। मोदी ने कहा, ''दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के साथ-साथ हमारी सेनाओं के बीच भी सहयोग बढ़ रहा है।''
दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रूपरेखा को अपनाने का स्वागत किया, जो हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध कौशल सहित तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष जहाजरानी, बंदरगाह आधुनिकीकरण, रसद और समुद्री अर्थव्यवस्था पर मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ''हमने तीसरे देशों में भी अपनी लाभकारी साझेदारी का विस्तार करने पर चर्चा की। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए, हम अफ्रीका में ठोस परियोजनाओं पर काम करने के लिए सहमत हुए।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इटली इस बात पर एकमत हैं कि आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर चुनौती है और इसके वित्तपोषण के खिलाफ दोनों पक्षों की संयुक्त पहल ने पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा, ''भारत और इटली ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जिम्मेदार लोकतंत्र न केवल आतंकवाद की निंदा करते हैं, बल्कि इसके वित्तीय नेटवर्क को बाधित करने के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं।'' मोदी ने कहा, ''हम यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में संघर्षों के संबंध में लगातार संपर्क में हैं। भारत का स्पष्ट मत है कि सभी समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।'' दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की तथा वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया रूप देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता को मान्यता दी। मोदी और मेलोनी ने परियोजना को लेकर हुई प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए 2026 में होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय बैठक में इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। मोदी और मेलोनी ने छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल श्रमिकों की आवाजाही बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में जोर दिया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच सहयोग और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों का भी स्वागत किया। एक संयुक्त घोषणा के अनुसार, मोदी और मेलोनी ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की।
इसमें कहा गया है कि दोनों नेताओं ने आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 प्रतिबंध प्रणाली में सूचिबद्ध लोग भी शामिल हैं। संयुक्त घोषणा के अनुसार, ''दोनों नेताओं ने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों एवं बुनियादी ढांचे को नष्ट करने, आतंकवादी नेटवर्क का सफाया करने और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने की दिशा में काम जारी रखने का आह्वान किया।'

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