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 भारत आज अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में कर रहा निवेश : राजनाथ सिंह

गांधीनगर. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को यहां आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत रक्षा और सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। सिंह ने कहा कि भारत आज अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है, जिससे रक्षा समाधानों की परिकल्पना और विकास के तरीके में बदलाव आ रहा है। उन्होंने गुजरात के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में रक्षा अताशे के लिए आयोजित दो-दिवसीय गोलमेज सम्मेलन को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारत मानता है कि प्रौद्योगिकी प्रगति अलग-थलग रहकर नहीं हो सकती। 'वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी परिदृश्य में आत्मनिर्भर भारत: नवाचार, निर्यात और संयुक्त प्रौद्योगिकी साझेदारी को गति देना' विषय पर आयोजित दो-दिवसीय सम्मेलन में अफ्रीका, एशिया, प्रशांत और कैरेबियन सहित 24 देशों के राजनयिक और रक्षा प्रतिनिधि शामिल हुए। सिंह ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ''पिछले एक दशक में, भारत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में नवाचार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से प्रेरित होकर, हमारा दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर जुड़े रहते हुए आत्मनिर्भरता का निर्माण करना है।''
उन्होंने कहा, ''भारत आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवरहित प्रणालियों से लेकर अंतरिक्ष और उन्नत डिजिटल क्षमताओं तक, अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है, जिससे रक्षा समाधानों की परिकल्पना और विकास के तरीके में बदलाव आ रहा है।'' रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी प्रगति अलग-थलग रहकर नहीं हो सकती और साइबर जगत से लेकर हाइब्रिड खतरों तक, युद्ध के बदलते स्वरूप से गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि साझेदारी, सह-विकास, ज्ञान साझाकरण, प्रशिक्षण और सहयोगात्मक क्षमता निर्माण के माध्यम से ही स्थायी सुरक्षा का निर्माण होता है। सिंह ने कहा, ''विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा संबंधी गतिविधियों का भारत का बढ़ता नेटवर्क इसी विश्वास को दर्शाता है।'' उन्होंने कहा कि भारत एक सुरक्षित, खुले और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए साझेदारों के साथ संवाद, संयुक्त अभ्यास और औद्योगिक सहयोग कर रहा है। सिंह ने कहा, ''यह मंच उन रणनीतिक विशेषज्ञों और भरोसेमंद साझेदारों को एक साथ लाता है जो रक्षा सहयोग के माध्यम से शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं। उनकी उपस्थिति विश्वास और मित्रता की भावना को दर्शाती है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के जुड़ाव का मूल आधार है।'' रक्षामंत्री ने कहा कि यह गोलमेज सम्मेलन रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में संवाद, नवाचार और साझेदारी के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव और सामने आर रही सुरक्षा चुनौतियों के इस युग में सहयोग न केवल वांछनीय, बल्कि आवश्यक हो गया है। सिंह ने रक्षा अताशे की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये सैन्य, सरकार और रक्षा उद्योग के बीच एक सेतु का काम करते हैं और वैश्विक सुरक्षा सहयोग की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, भारत दुनिया का 'विश्व मित्र', एक भरोसेमंद दोस्त और भागीदार बनने की आकांक्षा रखता है।''

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