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चुनावी राज्य बंगाल में राम नवमी का त्योहार भाजपा, तृणमूल के शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हुआ

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में बृहस्पतिवार को राम नवमी के अवसर पर एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हिंदुत्व के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाती हुई दिखी, वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल (टीएमसी) कांग्रेस भी विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को धार्मिक विमर्श पर एकाधिकार स्थापित करने से रोकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही। राज्य की राजधानी कोलकाता और कई जिलों में राम नवमी के अवसर पर भगवा ध्वज लहरा रहे थे, भीड़ भरी सड़कों पर ''जय श्री राम'' के नारे गूंज रहे थे और सैकड़ों की संख्या में झांकियां निकाली गईं। कोलकाता शहर में 60 से अधिक छोटी-बड़ी रैलियां निकाली गईं, जबकि हावड़ा, हुगली, बीरभूम और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में भी इसी तरह की झांकी निकाली गईं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए थे, हजारों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय बलों को मुस्तैद रखा गया था। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर में राम नवमी की झांकी में शामिल हुए, जो दक्षिण कोलकाता का वह निर्वाचन क्षेत्र है जहां वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा नेता शुभेंदु ने रैली में भाग लेते हुए कहा, ''राम नवमी हमारी सभ्यता और संस्कृति का उत्सव है। बंगाल भर के लोग बड़ी संख्या में श्रद्धा प्रदर्शित करने के लिए सड़कों पर एकत्र हो रहे हैं।'' कई भाजपा नेताओं और उम्मीदवारों ने भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में झांकी में भाग लिया, जिससे यह धार्मिक उत्सव संगठनात्मक शक्ति के प्रदर्शन में तब्दील हो गया। भाजपा के लिए, राम नवमी पिछले एक दशक में बंगाल में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि भाजपा और संघ परिवार में उसके वैचारिक सहयोगियों ने दो दिनों के उत्सव के दौरान लगभग दो करोड़ लोगों से संपर्क साधने के उद्देश्य से राज्य भर में कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच को रेखांकित करता है। हालांकि, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी इस उत्सव के जरिये अपना जनाधार बढ़ाने में कोई कसर छोड़ती नजर नहीं आ रही है। पिछले कुछ वर्षों में, कई तृणमूल नेताओं ने राम नवमी कार्यक्रमों में भाग लेना या स्वयं स्थानीय झांकी का आयोजन करना शुरू कर दिया है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक भाजपा के हिंदुत्ववादी दृष्टिकोण का मुकाबला करने के लिए पार्टी (तृणमूल) के प्रयास के हिस्से के रूप में देखते हैं। तृणमूल के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष कई स्थानीय नेताओं के साथ उत्तरी कोलकाता में राम नवमी रैली में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल में कहा था, ''राम किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं। वह सबके हैं।''
बनर्जी की इस टिप्पणी को हिंदू विमर्श पर भाजपा को एकाधिकार स्थापित करने से रोकने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। वामपंथी और कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर बंगाल में ''उत्तर भारतीय हिंदुत्व की राजनीति'' थोपने का आरोप लगाया है। उन्होंने तृणमूल की इस बात के लिए आलोचना की है कि वह भाजपा के विमर्श का राजनीतिक रूप से मुकाबला करने के बजाय ''नरम हिंदुत्व'' का सहारा ले रही है। माकपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ''राजनीति में धर्म का यह आक्रामक उपयोग बंगाल की समन्वयवादी परंपरा में नयी चीज है।'' बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में, 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा और मतगणना चार मई को होगी।

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