युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा हाइपरटेंशन का खतरा, एम्स के डॉक्टरों ने दी सलाह- खानपान और लाइफस्टाइल बदलें
नई दिल्ली। भारत में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन अब तेजी से एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप लेता जा रहा है। चिंता की बात यह है कि अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़ी संख्या में युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते जागरूकता, नियमित जांच और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में देश में दिल और दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। JACC में प्रकाशित नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 30 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं। हालांकि, इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें यह तक पता नहीं कि वे हाइपरटेंशन के मरीज हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर एक “साइलेंट एपिडेमिक” बन चुका है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते और लोग लंबे समय तक बिना जांच के रहते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण इलाकों में बहुत कम लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में है, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। करोड़ों लोग या तो इलाज शुरू ही नहीं करते या फिर बीच में दवाइयां छोड़ देते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यही लापरवाही आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनती है।
दिल्ली और आसपास के इलाकों को लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। पिछले दो दशकों में राजधानी और उसके आसपास हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में दो से तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसके पीछे खराब जीवनशैली, अत्यधिक नमक का सेवन, तनाव, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों में कमी को प्रमुख कारण मानते हैं।
AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं में बढ़ता हाइपरटेंशन बेहद चिंताजनक संकेत है। तेजी से बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक श्रम में कमी युवाओं को इस बीमारी की ओर धकेल रही है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना, संतुलित आहार लेना, नमक कम करना, रोजाना व्यायाम करना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में हाई ब्लड प्रेशर का इलाज संभव और अपेक्षाकृत सुलभ है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक दवाइयों और नियमित फॉलोअप की पहुंच अब भी सीमित है। ऐसे में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान, डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी और आसान इलाज प्रोटोकॉल अपनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभी से व्यापक जागरूकता अभियान नहीं चलाए गए तो आने वाले समय में भारत में हृदय और मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का बोझ और तेजी से बढ़ सकता है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि हाई ब्लड प्रेशर को सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज न करें, क्योंकि समय रहते जांच, सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव ही इस “खामोश बीमारी” से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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