मोदी के शासन में गुजरात में जल प्रबंधन के क्षेत्र में आया आमूलचूल बदलाव: शाह
अमरेली (गुजरात) . केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि 2001 में नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से गुजरात में जल प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया तथा पिछले 25 वर्षों में राज्य में कभी भी सूखे जैसे हालात नहीं बने। शाह गुजरात के अमरेली जिले के दुधला गांव में डायमंड कारोबारी और पद्मश्री से सम्मानित सावजीभाई ढोलकिया के ट्रस्ट द्वारा विकसित 21 एकड़ की झील का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे। सन 1985, 1986 और 1987 के भीषण सूखे को याद करते हुए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर फैला हुआ था, जिसमें सूखे के समय सरकारी राफलेश्वर मवेशी शिविर में हुआ भ्रष्टाचार भी शामिल था। शाह ने कहा, ''अगर हम बारिश की हर एक बूंद को बचाने और उसे जमीन में अवशोषित कर लिये जाने का तंत्र बना लें, तो हमारे देश और राज्य पर कभी भी सूखे का खतरा नहीं मंडराएगा। उस सूखे के दौरान कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और राफलेश्वर घोटाले जैसे बड़े घोटाले हुए थे।
शाह ने कहा, ''तब हम छोटे थे। लोग सूखा राहत कार्यों में लगे थे, वे गड्ढे खोदते और उन्हें वापस भरते थे ताकि रोजाना मजदूरी कमा सकें। हमने सूखे से परेशान लोगों को 250 ग्राम सुखड़ी (एक मिठाई) और घरों से इकट्ठा की गई पुरानी चप्पलें बांटीं।'' उन्होंने राजकोट में एक बस अड्डे के पास लगे सार्वजनिक नल को जमीन में बने एक गड्ढे में नीचे किए जाने की घटना को याद किया, क्योंकि पानी का दबाव इतना कम था कि वह सतह तक भी नहीं पहुंच पा रहा था। शाह ने कहा, ''2001 में नरेन्द्रभाई के मुख्यमंत्री बनने से पहले ऐसी स्थिति थी।'' उन्होंने दावा किया कि मोदी की नीतियों ने सौराष्ट्र और उत्तरी गुजरात को सूखा-ग्रस्त इलाकों से पानी की बेहतर उपलब्धता वाले क्षेत्रों में बदल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में मोदी सरकार ने 2003 में एक ही साल में 1.5 लाख 'चेक डैम' बनाए और बाद में नर्मदा नहर नेटवर्क, सौनी योजना एवं सुजलाम-सुफलाम योजना जैसी परियोजनाओं के जरिए जल संरक्षण के प्रयासों को बढ़ाया। शाह ने कहा कि नर्मदा परियोजना की आधारशिला 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी, लेकिन इसके गेट मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खोले गए। केंद्रीय गृहमंत्री के अनुसार, मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने 'जल शक्ति मंत्रालय' बनाकर जल प्रबंधन को संस्थागत महत्व दिया। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी सौराष्ट्र, कच्छ और खावड़ा तक पहुंच चुका है, जबकि अतिरिक्त पानी को 'सौनी योजना' के तहत जलाशयों और नदियों में भेजा गया है। शाह ने कहा, ''जब मोदी मुख्यमंत्री बने , तब से 2026 तक गुजरात में एक बार भी सूखा नहीं पड़ा है। इस बार सब कह रहे थे कि अल-नीनो की वजह से सूखा पड़ सकता है। हालांकि कुछ गांवों में बारिश कम हुई, लेकिन मवेशियों को लेकर दक्षिण गुजरात की ओर पलायन करने की गंभीर स्थिति कभी नहीं बनी।'' उन्होंने कहा, ''आज गुजरात सचमुच सूखा-मुक्त है। झीलों की संख्या बढ़ी है, चेक डैम की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, कृषि क्षेत्र ने तरक्की की है, हरियाली बढ़ी है और इंद्र देवता की कृपा रही है। 2001 से 2026 तक, यानी 25 सालों में कहीं भी सूखा न पड़ना मोदी की योजना का ही सीधा परिणाम है।




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