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0- छत्रपति शिवाजी सभागृह में आयोजित वीर सावरकर जयंती पर बच्चों की फैंसी ड्रेस स्पर्धा होगी आकर्षण का केंद्र
रायपुर। नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में सोमवार को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से पद्मश्री प्राप्त करने के बाद डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले दंपती को महाराष्ट्र मंडल गुरुवार, 28 मई को शाम 06:30 बजे सम्मानित करने जा रहा है। मंडल के य.गो. जोगलेकर स्मृति छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में आयोजित होने वाले विनायक दामोदर सावरकर जयंती समारोह में डॉ. गोडबोले दंपती सम्मानित किए जाएंगे। इस मौके पर डॉक्टर दंपती अपने 35 वर्षों से बस्तर के अबूझमाड़ में शोषित पीड़ित और बीमार आदिवासियों का नि:शुल्क इलाज करने से लेकर वहां इलाज को लेकर फैली भ्रांतियों और उन्हें दूर करने को लेकर किए गए भगीरथ प्रयास के बारे में चर्चा भी करेंगे।
उपाध्यक्ष गीता दलाल ने जानकारी दी कि महाराष्ट्र मंडल में गुरुवार को वीर सावरकर जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। इस मौके पर वीर सावरकर पर आमंत्रित किए गए लेख के आधार पर निर्णायक परिणाम तय कर विजेताओं, उप विजेताओं के नामों की घोषणा करेंगे, जिन्हें कार्यक्रम के दौरान ही पुरस्कृत व प्रोत्साहित भी किया जाएगा। प्रथम पुरस्कृत लेख का सामूहिक वाचन विजेता प्रतिभागी करेंगे। कार्यक्रम का सबसे रोचक सेगमेंट बच्चों की वीर सावरकर पर आधारित फैंसी ड्रेस स्पर्धा है। इसमें बच्चे विभिन्न परिधानों और स्टाइल वाले विनायक दामोदर सावरकर का भेष धारण कर मंच पर उतरेंगे।
मंडल की साहित्यिक समिति की प्रभारी कुमुद लाड ने बताया कि वीर सावरकर पर सोमवार तक पर्याप्त लेख मिल गए हैं। इधर वीर सावरकर फैंसी ड्रेस स्पर्धा को लेकर बच्चे खासे उत्साहित हैं और उनके अभिभावकों की ओर से भरपूर पूछताछ करने के बाद पंजीयन भी कराया गया है। कुमुद के अनुसार सावरकर जयंती समारोह में हमारे मुख्य अतिथि अथवा प्रमुख वक्ता 'वीर सावरकर की वर्तमान परिस्थितियों में प्रासंगिकता' पर अपना संबोधन देंगे।
- 0- 19 होलसेल एवं 73 रिटेल मेडिकल प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 3 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारीरायपुर. उप संचालक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, रायपुर द्वारा जिले में वजन घटाने हेतु उपयोग की जा रही औषधियों के क्रय-विक्रय संबंधी दस्तावेजों की विशेष जांच कार्यवाही की गई। औषधि निरीक्षकों द्वारा संबंधित फर्मों से औषधियों के क्रय-विक्रय बिल, स्टॉक रजिस्टर, सप्लायर विवरण, बैच नंबर, एक्सपायरी विवरण तथा वैध अनुज्ञप्ति अभिलेखों का परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बिना चिकित्सकीय परामर्श के विक्रय, संदिग्ध स्टॉक तथा अभिलेखों में विसंगतियों की विशेष रूप से जांच की गई।कार्यवाही के अंतर्गत कुल 19 होलसेल एवं 73 रिटेल मेडिकल प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। जांच में 03 फर्मों में अनियमितताएं पाई गईं। उक्त प्रकरणों में संबंधित फर्मों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 एवं नियमावली 1945 के प्रावधानों के अंतर्गत कारण बताओ सूचना नोटिस जारी किया गया है, साथ ही नियमानुसार जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा संबंधित फर्मों को भविष्य में समस्त क्रय-विक्रय अभिलेख संधारित रखने तथा औषधियों का विक्रय निर्धारित नियमों के अनुसार करने हेतु कड़ी चेतावनी भी दी गई है। जांच कार्यवाही सतत जारी है तथा प्राप्त जवाब के आधार पर नियमानुसार आगामी वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
- 0- “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” के तहत शासकीय कर्मचारी बच्चों संग साझा कर रहे हैं खुशियाँरायपुर. जिले में शासकीय कर्मचारियों के जन्मदिन अब केवल व्यक्तिगत आयोजन नहीं रह गए हैं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना और न्योता भोज के अंतर्गत संचालित “प्रोजेक्ट आओ बाँटें खुशियाँ” का उद्देश्य ही है - खुशियों को बाँटना, और इस पहल को शासकीय कर्मचारी पूरे उत्साह के साथ अपना रहे हैं।इसी क्रम में असिस्टेंट टीचर साइंस श्री प्रकाश सोनी ने आंगनबाड़ी केंद्र कस्तूरबा एवं नर्सिंग ऑफिसर सुश्री भुवनेश्वरी साहू ने आँगनबाड़ी केंद्र भनपुरी बाजार चौक में विद्यार्थियों के साथ जन्मदिवस के अवसर पर बच्चों के साथ केक काटकर, फल और पौष्टिक आहार वितरित कर इस दिन को विशेष बनाया।
- रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रतिबद्धता के अनुरूप रायपुर जिला प्रशासन द्वारा “प्रोजेक्ट ग्रीन पालना” अभियान को प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत शासकीय अस्पतालों में प्रसव उपरांत माताओं को फलदार पौधे भेंट स्वरूप दिए जा रहे हैं, ताकि एक नई ज़िंदगी के आगमन के साथ एक नया वृक्ष भी धरती पर जन्म ले।कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के मार्गदर्शन में इस अभियान के तहत आज ग्रीन पालना में एमसीएच कालीबाड़ी में 10 एवं कुरा में 01, आज दिनांक में कुल 11 प्रसुताओं को 55 पौधे भेंट किए गए।यह प्रयास मातृत्व के साथ प्रकृति से जुड़ाव को भी बढ़ावा देता है। प्रोजेक्ट ग्रीन पालना न सिर्फ नवजात के जीवन की शुरुआत को यादगार बनाता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरियाली और शुद्ध वातावरण की नींव भी रखता है।
- 0- कलेक्टर - एसपी ने ली कोल डिपो संचालकों की बैठक0- गुणवत्ता से से समझौता नहीं करने की सख्त चेतावनीबिलासपुर. जिले में संचालित कोयला डिपो में कोयले की गुणवत्ता, अवैध मिलावट और चोरी-तस्करी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने सोमवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में जिले के कोल डिपो संचालकों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।कलेक्टर ने बैठक में कहा कि प्रदेश में 130 से अधिक स्पंज आयरन प्लांट संचालित हैं, जिन्हें एसईसीएल से कोयला प्राप्त होता है। ऐसे में कोयले की गुणवत्ता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिस गुणवत्ता का कोयला एसईसीएल की खदानों से प्राप्त हो, उसी गुणवत्ता का कोयला उद्योगों तक पहुंचे। किसी भी प्रकार की मिलावट या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने कोल डिपो संचालकों को यह भी निर्देशित किया कि उद्योगों को आपूर्ति किए जाने वाले कोयले का रिकॉर्ड पारदर्शी ढंग से रखा जाए तथा भंडारण और परिवहन की व्यवस्था नियमों के अनुरूप हो। प्रशासन ने साफ किया कि कोयले में मिलावट या अवैध भंडारण पाए जाने पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध खनिज अधिनियम सहित आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ डिपो में उच्च गुणवत्ता वाले कोयले में निम्न गुणवत्ता का कोयला और शेल मिलाकर उद्योगों को सप्लाई किया जा रहा है। इससे उद्योगों के उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कलेक्टर ने कहा कि उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण कोयला उपलब्ध कराना डिपो संचालकों की जिम्मेदारी है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बैठक में कहा कि जिले में कोयला डिपो से जुड़े अवैध कारोबार, चोरी और तस्करी की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी डिपो में सीसीटीवी कैमरे, वाहनों की जीपीएस मॉनिटरिंग और आवक-जावक का पूरा रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से रखा जाए। डिपो में कार्यरत मैनेजर, मुंशी और कर्मचारियों की जानकारी भी प्रशासन और पुलिस को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी डिपो में अवैध गतिविधि, कोयले की मिलावट या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संचालक के खिलाफ खनिज अधिनियम और आपराधिक प्रकरणों के तहत कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा समय-समय पर कोल डिपो की जांच भी की जाएगी।कोल डिपो एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को भरोसा दिलाया कि सभी संचालक नियमों का पालन करेंगे और अवैध गतिविधियों की रोकथाम में पुलिस एवं प्रशासन का सहयोग करेंगे।बैठक में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि कोयला भंडारण स्थलों पर अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाए तथा बारिश के दौरान कोयले का दूषित पानी सीधे नालों और जलस्रोतों में न जाने पाए, इसके लिए आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। प्रशासन ने सभी कोयला भंडारण अनुज्ञप्तिधारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि नियमों का कड़ाई से पालन करें, अन्यथा भविष्य में कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, उप संचालक खनिज प्रशासन किशोर गोलघाटे, खनि अधिकारी, सहायक खनि अधिकारी, खनि निरीक्षक सहित कोल डिपो संचालक उपस्थित रहे।
- 0- अवकाश के दिन भी खुली रहेंगी सहकारी समितियां0- अब तक 5 हज़ार मीट्रिक टन खाद एवं 1590 क्विंटल बीज वितरितबिलासपुर। खरीफ वर्ष 2026 की खेती को सुचारू एवं समयबद्ध रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिले की सहकारी समितियों में रासायनिक उर्वरक एवं बीज का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी आवश्यकता के अनुसार अभी से खाद एवं बीज का उठाव सुनिश्चित करें, ताकि बोनी के समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।कृषि विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार खरीफ सीजन 2026 के लिए सहकारी क्षेत्र में कुल 44 हजार मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत अब तक विभिन्न उर्वरकों का भंडारण किया गया है। जिसमें यूरिया 13,644 टन,डीएपी 4,065 टन,एनपीके 5,140 टन, एमओपी 781टन,एसएसपी 1,595 टन शामिल हैं। इस प्रकार कुल 25,225 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण समितियों में किया जा चुका है। वहीं अब तक किसानों को विभिन्न उर्वरकों का वितरण भी किया जा चुका है, जिसमे यूरिया 2,919 टन, डीएपी 798 टन,एनपीके 786 टन, एमओपी 91 टन, एसएसपी 194 टन वितरित किया जा चुका है। इस प्रकार कुल मिलाकर अब तक 4,788 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है तथा वितरण कार्य लगातार जारी है।इसी प्रकार जिले की सहकारी समितियों में 7,934.12 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है, जबकि अब तक 1,589.96 क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देशानुसार किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले की सभी सहकारी समितियां शनिवार एवं रविवार सहित अवकाश के दिनों में भी खुली रखी जा रही हैं। कृषि विभाग ने कहा है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मानसून समय पर आने की संभावना है, इसलिए किसान अभी से खाद एवं बीज का उठाव कर लें ताकि बोनी कार्य में देरी न हो। विभाग ने किसानों से संतुलित मात्रा में उर्वरकों के उपयोग की अपील करते हुए कहा है कि पात्रता अनुसार सहकारी समितियों से खाद एवं बीज प्राप्त किए जा सकते हैं।
- 0- जनप्रतिनिधियों ने हितग्राहियों को किया लाभान्वितबिलासपुर. सुशासन तिहार के तहत आज मंगला स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित समाधान शिविर में तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह एवं बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला शामिल हुए। उन्होंने शिविर में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक प्राथमिकता से पहुंचे तथा किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। इस अवसर पर महापौर पूजा विधानी, नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, जोन कमिश्नर रंजना अग्रवाल, पार्षद रमेश पटेल, हेमन्त मरकाम सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य शासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि समाधान शिविरों के माध्यम से नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं और योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अनेक जरूरी सेवाओं का लाभ लोगों को सरलता से मिल रहा है, जिससे आमजन को काफी सुविधा हो रही है। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि शासन की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंगला क्षेत्र के दो वार्डों में लगभग 150 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिससे जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को 5 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रतिमाह सहायता राशि प्रदान की जा रही है।महापौर पूजा विधानी ने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद शासन स्वयं जनता के द्वार पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहा है। समाधान शिविरों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग अब तक किसी योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए हैं, वे शिविरों में पहुंचकर जानकारी एवं लाभ प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में महिलाओं की गोदभराई, शिशुओं का अन्नप्राशन एवं श्रम विभाग द्वारा सहायता राशि वितरण जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं, जिससे आमजन में उत्साह का वातावरण है। उन्होंने लोगों से शिविरों का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे ने कहा कि समाधान शिविर के माध्यम से लोगों को योजनाओं का सीधे लाभ मिल रहा है। शिविर में प्राप्त आवेदनों एवं समस्याओं का त्वरित निराकरण प्राथमिकता से किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। शिविर में असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना के तहत कांति बांधे को 20 हजार रुपये का चेक वितरित किया गया। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत शिवांगी क्षत्रवाणी को 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही 4 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत ऋण स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। 5 शिशुओं का अन्नप्राशन एवं 5 बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरित कर विभिन्न योजनाओं से हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया।
- 0-कुल 190 शिविरों के माध्यम से 23 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिला सीधे योजनाओं का लाभ0- बालोद जिले में "जनजातीय गरिमा उत्सव जन भागीदारी अभियान" का हुआ सफल समापनबालोद. भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम "जनजातीय गरिमा उत्सव जन भागीदारी अभियान" का बालोद जिले में गरिमापूर्ण एवं सफल समापन हुआ। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल निर्देशन में यह विशेष अभियान जिला स्तर पर 18 मई 2026 से 25 मई 2026 तक आयोजित किया गया।इस दौरान बालोद जिले के सभी विकासखण्डों (गुंडरदेही, बालोद, गुरुर, डौंडी और डौंडीलोहारा) के अंतर्गत आने वाले कुल 186 चयनित गांवों में कुल 190 शिविरों के माध्यम से 23 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिला सीधे योजनाओं का लाभ मिला। उल्लेखनीय है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राथमिकता के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर आई.ई.सी. कैंपेन चलाकर "जनभागीदारी - सबसे दूर, सबसे पहले" की थीम पर जमीनी स्तर पर अंतिम व्यक्ति तक संपर्क स्थापित करना था। इसके तहत स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, सेवा संतृप्ति और जनसमस्याओं के त्वरित निवारण जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की गईं। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा के निर्देशानुसार जिला, विकासखण्ड एवं ग्राम स्तर पर नियुक्त किए गए सभी नोडल अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया गया। अभियान के दौरान प्रत्येक चयनित गांव में ट्राईबल डांस, साइकिल रैली, वृक्षारोपण तथा जनसेवा केंद्रों में विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने स्वयं पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और उचित माध्यम से उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया गया।
- 0- दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रहण एवं संरक्षण कार्य के लिए डॉ. प्रकाश पतंगिवार को किया गया सम्मानितबालोद. संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्य के अंतर्गत बालोद जिले में सर्वे का कार्य निरंतर जारी है। सर्वे के दौरान जिले के अलग-अलग स्थानों में निरंतर पाण्डुलिपियां प्राप्त हो रही है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने आज अपने कक्ष में दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रहण एवं संरक्षण कार्य के लिए गुरूर विकासखण्ड के ग्राम ठेकवाडीह निवासी डॉ. प्रकाश पतंगिवार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने डाॅ. पतंगिवार के दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रहण एवं संरक्षण कार्य की सराहना करते हुए उनके द्वारा संग्रहित पाण्डुलिपियों को अमूल्य धरोहर बताया। इस मौके पर कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने डॉ. प्रकाश पतंगिवार द्वारा लाए गए दुर्लभ पांडुलिपियों का द्वारा अध्ययन और मूल्यांकन किया गया। ज्ञातव्य हो कि ऐतिहासिक महत्व की इन सभी पांडुलिपियों की प्रविष्टियां डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए ’ज्ञान भारतम’ मोबाइल एप्लीकेशन में भी दर्ज की गई। इस अवसर पर ज्ञान भारतम अभियान की सहायक नोडल अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर भी उपस्थित थीं।
- 0- समिति प्रबंधकों की बैठक लेकर धान उठाव, लेखा मिलान, खाद, बीज की व्यवस्था एवं वितरण के उपायों के संबंध में विस्तृत समीक्षा कीबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने कहा कि खरीफ वर्ष 2026 के लिए जिले के सहकारी समितियों में किसानों के लिए समुचित मात्रा में खाद, बीज का भण्डारण कर ली गई है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने सभी समिति प्रबंधकों को राज्य शासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर खाद, बीज का समुचित वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा आज संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में खरीफ वर्ष 2026 के लिए जिले के किसानों को खाद, बीज की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु सहकारी समितियों के प्रबंधकों की बैठक लेकर उक्ताशय के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्रीमती मिश्रा द्वारा मौजूदा खरीफ वर्ष में किसानों को खाद, बीज की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु जिले के सभी विकासखण्डों के समिति प्रबंधकों की बैठक ली जा रही है।कलेक्टर श्रीमती मिश्रा द्वारा गत दिनों बालोद, डौण्डी एवं गुरूर विकासखण्ड के समिति प्रबंधकों की बैठक लेकर इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। इसके अंतर्गत कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने डौण्डीलोहारा एवं गुण्डरदेही विकासखण्ड के समिति प्रबंधकों की बैठक लेकर मौजूदा खरीफ वर्ष में किसानों को समुचित मात्रा में खाद, बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु की जा रही व्यवस्थाओं की समीक्षा की। बैठक में कलेक्टर ने सहकारी समितियों से धान उठाव, लेखा मिलान के अलावा खाद, बीज की समुचित उपलब्धता एवं वितरण की व्यवस्था के संबंध में समिति प्रबंधकों से बारी-बारी से जानकारी ली। बैठक में जिला विपणन अधिकारी श्री टिकेन्द्र राठौर ने बताया कि जिले के सहकारी समितियों में पोटाश, युरिया, डीएपी, सुपरफास्फेट, एनपीके सहित अब तक कुल 34 लाख 07 हजार टन खाद का भण्डारण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशानुसार किसानों को इसकी समुचित वितरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। बैठक में कृषि विभाग के उप संचालक श्री आशीष चंद्राकर, सहायक संचालक श्री एसएन ताम्रकार सहित अन्य अधिकारियों के अलावा समिति प्रबंधकगण उपस्थित थे।
- 0- समय-सीमा की बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देशबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने सभी विभाग प्रमुखों को सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आम जनता से अपने-अपने विभागों से संबंधित प्राप्त आवेदनों का निर्धारित समयावधि में युक्तियुक्त ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा आज संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में सभी विभाग एवं कार्यालय प्रमुखों को उक्ताशय के निर्देश दिए हैं। बैठक में श्रीमती मिश्रा ने सुशासन तिहार के अंतर्गत विभागवार प्राप्त आवेदनों एवं इसके निराकरण की स्थिति की बारी-बारी से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत प्राप्त सभी आवेदनों का निर्धारित समयावधि में गुणवत्तायुक्त निराकरण सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक, श्री अजय किशोर लकरा, श्री नूतन कंवर संयुक्त कलेक्टर श्रीमती मधुहर्ष सहित राजस्व अनुविभागीय अधिकारियों के अलावा अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।बैठक में कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित होने वाली जनसमस्या निवारण शिविरों के आयोजन की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को सभी शिविरों में निर्धारित समयावधि तक अधिकारी-कर्मचारियों का अनिवार्य रूप से उपस्थित सुनिश्चित कराने के भी निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने भीषण गर्मी को देखते हुए शिविर में उपस्थित आम नागरिकों के अलावा अधिकारी-कर्मचारियों के लिए भी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर ने रविवार 24 मई को जिले के जीवनदायिनी तांदुला नदी के अतिक्रमण हटाने हेतु राजस्व, पुलिस, जल संसाधन एवं अन्य संबंधित विभागों के द्वारा की गई कार्यवाही की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इस कार्य में लगे सभी अधिकारी-कर्मचारियों को उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। कलेक्टर ने बताया कि रविवार 24 मई को तांदुला नदी के अतिक्रमण हटाने हेतु की गई कार्यवाही के अंतर्गत नदी के कुल 7.5 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया गया है। बैठक में कलेक्टर ने वर्तमान में चल रहे पश्चिम एशियाई संकट के मद्देनजर जिले के पेट्रोल पंपों में पेट्रोल एवं डीजल की उपलब्धता के संबंध में जानकारी ली। श्रीमती मिश्रा ने शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी से स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु की जा रही कार्यवाही के संबंध में भी जानकारी ली। इसके अलावा उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों से राज्य शासन द्वारा जिले में शासकीय व्यय में मितव्ययिता एवं वित्तीय अनुशासन का क्रियान्वयन हेतु की जा रही कार्यवाही के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने जिले के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने जेएसजेबी 2.0 के अंतर्गत बालोद जिले में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत अब तक बालोद जिले में कुल 02 लाख 03 हजार जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जो कि बहुत ही सराहनीय है। श्रीमती मिश्रा ने जल संचय, जन भागदारी अभियान 2.0 के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा निर्मित किए जा रहे जल संरचना तथा जेएसजेएबी पोर्टल में उनके एंट्री के संबंध में भी जानकारी ली। उन्होंने इस कार्य को विशेष प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में श्रीमती मिश्रा ने ग्रीष्म ऋतु के दौरान जिले में आम नागरिकों के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था, किसानों के लिए खाद, बीज की समुचित उपलब्धता एवं वितरण की स्थिति, तेंदुपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान आदि विभिन्न विषयों की समीक्षा करते हुए इसके लिए पुख्ता उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- -ट्रैक्टरों से जुताई और सिंचाई पंपों के लिए किसानों को आवश्यकता अनुसार डीजल उपलब्ध कराने के निर्देश-ड्रम और जरीकेन में डीजल वितरण पर प्रतिबंध में किसानों को दी गई छूटरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए किसानों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। राज्य में पेट्रोल एवं डीजल की उपलब्धता की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टरों तथा सिंचाई पंपों हेतु किसानों को आवश्यकता अनुसार डीजल की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि खेती-किसानी के कार्य प्रभावित न हों।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और खरीफ सीजन की तैयारी में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने खाद्य विभाग, जिला प्रशासन तथा ऑयल कंपनियों को निर्देशित किया है कि किसानों को डीजल समय पर और बिना किसी कठिनाई के उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा है कि आगामी खरीफ सीजन में खेती के लिए किसानों को डीजल सुगमता से प्राप्त हो, इसका ध्यान सभी ऑयल कंपनी और जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से रखा जाये।उल्लेखनीय है कि खाद्य विभाग द्वारा 22 मई 2026 को जारी निर्देशानुसार पेट्रोल एवं डीजल के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से प्रदेश के 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों से ड्रम एवं जरीकेन में ईंधन प्रदाय पर प्रतिबंध लगाया गया है।हालांकि किसानों की जरूरतों और खरीफ सीजन की तैयारियों को देखते हुए इस व्यवस्था में आवश्यक छूट प्रदान की गई है, ताकि खेतों की जुताई, बोवाई और सिंचाई कार्य बाधित न हों।खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल एवं डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्तमान में प्रदेश में 4 करोड़ 03 लाख लीटर पेट्रोल तथा 5 करोड़ 55 लाख लीटर डीजल का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं, 24 मई 2026 को राज्य को 23 लाख 33 हजार लीटर पेट्रोल तथा 62 लाख 40 हजार लीटर डीजल प्राप्त हुआ है। राज्य में आवश्यकतानुसार पेट्रोल एवं डीजल की नियमित आपूर्ति जारी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों विशेषकर किसानों को आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार खरीफ सीजन के दौरान खेती-किसानी की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतों की जुताई, बोवाई और सिंचाई के लिए किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों को आवश्यक समन्वय और सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
- -ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशनरायपुर, / मुख्य सचिव श्री विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने सर्वाेच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है।मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा।बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त श्री एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -1 जून से कलेक्टर्स देंगे प्रतिदिन रिपोर्ट, संवेदनशील क्षेत्रों और बड़े जलाशयों पर रखी जाएगी चौबीसों घंटे नजररायपुर / आगामी मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राज्य शासन के विभिन्न विभागों द्वारा की गई तैयारियों की गहन समीक्षा की गई। राहत शिविरों के प्रबंधन से लेकर आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं पर व्यापक रणनीति तैयार की गई। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।- मुख्य सचिव ने राज्य के सभी जिला कलेक्टर्स एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्षों को मानसून 2026 के मद्देनजर सुरक्षा और राहत व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। सभी कलेक्टर्स को आगामी 1 जून से प्रतिदिन वर्षा की स्थिति और उससे होने वाली संभावित क्षति की जानकारी अनिवार्य रूप से शासन को भेजनी होगी। प्रत्येक जिले में बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।- बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में जून माह में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। आपदा के समय त्वरित सहायता और समन्वय के लिए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) क्रियाशील कर दिया गया है। महत्वपूर्ण संपर्क सूत्र (स्टेट कंट्रोल रूम) राज्य स्तर पर दूरभाष क्रमांक 0771-2223471, 0771-2221242 ओर फैक्स क्रमांक 0771-2223472 इसके साथ ही सभी जिला मुख्यालयों में भी जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जा चुके हैं। बैठक में मुख्य सचिव ने बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति में जनहानि को शून्य रखने के लिए विभागों को उनकी जिम्मेदारी दी है।-पहुंचविहीन और संवेदनशील क्षेत्रों में राशन, नमक, केरोसिन और जीवन रक्षक दवाओं का अग्रिम भंडारण अभी से सुनिश्चित किया जाए। बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए विशेष चिकित्सा दलों का गठन किया जाए। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।-हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले निचले इलाकों की पहचान कर वहां चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए। बाढ़ से बचाव के उपकरणों और मोटरबोट्स की तत्काल मरम्मत करा ली जाए। नगर सेना और नागरिक सुरक्षा अमले को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है। बड़े बांधों का जलस्तर बढ़ने पर जल निकासी (पानी छोड़ने) से कम से कम 12 घंटे पहले निचले जिलों और सीमावर्ती राज्यों को अलर्ट जारी करना अनिवार्य होगा।- प्रदेश के जर्जर व कमजोर हो चुके पुल-पुलियों, रपटों और सरकारी इमारतों की पहचान कर तत्काल मरम्मत कराई जाए। दुर्घटनाजन्य स्थलों पर बैरियर और सूचना पटल लगाए जाएं। बाढ़ प्रभावितों के मकान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में वन विभाग नजदीकी डिपो में बांस-बल्ली का पर्याप्त भंडारण रखे।नगरीय निकायों को मानसून के दौरान शहरों की सभी छोटी-बड़ी नालियों की निरंतर सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलभराव की स्थिति न बने।- मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी भारी वर्षा की चेतावनियों को समय पर जिला कंट्रोल रूम और आम जनता तक पहुँचाया जाए। किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से मौसम का पूर्वानुमान भेजा जाए।बाढ़ से फसलों को होने वाले नुकसान का सर्वे राजस्व, कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे और त्वरित रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।-मुख्य सचिव ने नगरीय क्षेत्रों में स्थित जर्जर और खतरनाक भवनों की लगातार निगरानी करने तथा वहां रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए। नागरिकों की सुरक्षा के लिए विभिन्न आपदा प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान मोबाइल ऐप्स का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया गया। उच्च स्तरीय बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा सहित गृह, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, खाद्य, जनसम्पर्क, रेलवे, दूरदर्शन, रेडक्रॉस सोसाइटी और भारत संचार निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई, कहा - सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता राष्ट्र निर्माण का श्रेष्ठ उदाहरण-बस्तर के सुदूर वनांचलों में दशकों से स्वास्थ्य सेवा, जागरूकता और मानवता की अलख जगा रहे हैं डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोलेरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर के सुदूर जनजातीय अंचलों में दशकों से निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा और मानवता की मिसाल प्रस्तुत करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे समूचे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बताया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा गोडबोले दंपति को यह सम्मान प्रदान किया जाना जनसेवा, समर्पण और संवेदनशीलता के मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोडबोले दंपति ने वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। बस्तर के बारसूर जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम वनांचल में रहकर उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोगों तक निःशुल्क उपचार, स्वास्थ्य जागरूकता और जनविश्वास का प्रकाश पहुँचाया। कुपोषण मुक्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण-जनजातीय समाज में स्वास्थ्य के प्रति चेतना विकसित करने में उनका योगदान अत्यंत अनुकरणीय और प्रेरणादायी रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जिस प्रतिबद्धता के साथ समाज के सबसे दूरस्थ और जरूरतमंद लोगों के बीच कार्य किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सेवा भावना समाज में करुणा, दायित्वबोध और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा को और मजबूत करेगी।
- रायपुर / वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित आदिवासी अंचलों में चार दशकों से अधिक समय तक निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्य करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले को पद्मश्री 2026 सम्मान से अलंकृत होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि यह सम्मान केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि मानव सेवा, समर्पण और करुणा की उस भावना का सम्मान है, जिसने हजारों आदिवासी परिवारों के जीवन में आशा की नई किरण जगाई है। उन्होंने कहा कि डॉ. रामचंद्र गोडबोले और श्रीमती सुनीता गोडबोले ने बस्तर जैसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का कार्य किया, जहां वर्षों तक मूलभूत चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध नहीं थीं। आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य सुधार, कुपोषण से लड़ाई और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए इस दंपति ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।वित्त मंत्री ने कहा कि गोडबोले दंपति की सेवा भावना समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके योगदान आने वाली पीढ़ियों को मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
- - नैनो यूरिया-नील हरित काई जैसे विकल्प अपनाने किसानों से अपील-राज्य में अभी 9.29 लाख मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक खाद उपलब्ध-केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटितरायपुर / पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। वर्तमान में राज्य में 9.29 लाख मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के रासायनिक खाद का स्टॉक गोदामों और सोसायटियों में उपलब्ध है। जबकि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयास से केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को इस खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। राज्य सरकार किसानों के धान बुआई एवं उत्पादन प्रभावित न हो इस उद्देश्य से तरल नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का स्टॉक भी समानांतर रूप से भण्डारित करने की रणनीति पर भी कार्य कर रही है।वहीं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को नैनो डीएपी उर्वरक के उपयोग हेतु जागरूक किया जा रहा है। कृषि क्रांति की ओर एक कदम” अभियान के अंतर्गत नैनो डीएपी को फॉस्फोरस एवं नाइट्रोजन युक्त उन्नत तरल उर्वरक के रूप में किसानों के बीच प्रचारित किया जा रहा है, जिससे कम लागत में अधिक एवं संतुलित उत्पादन प्राप्त किया जा सके।कृषि विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनो डीएपी के उपयोग से किसानों को संतुलित पोषण, बेहतर परिणाम एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही ठोस डीएपी पर निर्भरता में कमी आएगी तथा उर्वरक उपयोग की दक्षता में वृद्धि होगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार एक एकड़ क्षेत्र में परंपरागत डीएपी के उपयोग की तुलना में नैनो डीएपी के उपयोग से लागत में कमी संभव है। जहां 50 किलोग्राम डीएपी पर लगभग 1350 रुपये की लागत आती है, वहीं 25 किलोग्राम डीएपी एवं 500 मिली नैनो डीएपी के संयुक्त उपयोग से लगभग 1275 रुपये की लागत आती है।कृषि विभाग ने नैनो डीएपी के उपयोग की वैज्ञानिक विधि भी किसानों को बताई है। प्रथम चरण में आधार खाद के रूप में 25 किलोग्राम डीएपी अथवा 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट अथवा 38 किलोग्राम 12-32-16 मिश्रित उर्वरक का उपयोग करने की सलाह दी गई है। दूसरे चरण में बीज उपचार हेतु 150 मिली नैनो डीएपी को 3 लीटर पानी में मिलाकर बीज उपचार करने तथा पौध उपचार हेतु 250 मिली नैनो डीएपी को 50 लीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ों को उपचारित करने की जानकारी दी गई है। तीसरे चरण में फसल रोपाई के लगभग 30 दिन बाद 250 मिली नैनो डीएपी को 125 लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।मंत्री श्री नेताम ने बताया कि पश्चिमी एशियाई संकट के चलते रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।कृषि मंत्री श्री नेताम ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार द्वारा 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। जिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश के गोदामों एवं समितियों में लगभग 9.29 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी किसानों को पारदर्शिता के साथ पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद का आबंटन सुनिश्चित हो।कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर उर्वरकों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को भी प्राथमिकता में रखा गया है। हर जिले में सुगंधित धान की प्रजाति के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही दलहन-तिलहन फसलों तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने किसानों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर नैनो डीएपी का उपयोग करने तथा उर्वरक प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने की अपील की है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ खेती की लागत को भी कम किया जा सके।
- =राजस्व मंत्री के औचक निरीक्षण से रायपुर तहसील कार्यालय में हड़कंप=डायवर्सन में देरी पर SDM को फटकाररायपुर । राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने सोमवार को रायपुर तहसील कार्यालय और नवीन संभाग आयुक्त कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। मंत्री के इस अचानक दौरे से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान राजस्व मामलों के निपटारे में कछुआ गति और लापरवाही सामने आने पर मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने आम जनता से जुड़े नामांतरण, त्रुटि सुधार, सीमांकन और बंटवारे जैसे संवेदनशील प्रकरणों में हो रहे विलंब को लेकर अधिकारियों को आड़े हाथों लिया और इन्हें शीघ्र निपटाने के कड़े निर्देश दिए। विशेष रूप से डायवर्सन (व्यपवर्तन) के मामलों में बेहद धीमी प्रगति पाए जाने पर मंत्री ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) रायपुर को जमकर फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान राजस्व मंत्री ने कार्यालय परिसर की साफ-सफाई की व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने परिसर में फैली गंदगी और फाइलों के अव्यवस्थित रखरखाव पर अप्रसन्नता व्यक्त की। मंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि आम जनता की सुविधा के लिए कार्यालय में स्वच्छ वातावरण और बैठने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, साथ ही सभी शासकीय दस्तावेजों व फाइलों को पूरी तरह व्यवस्थित रखा जाए। तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझने के लिए राजस्व मंत्री स्वयं भुइयां शाखा, कानूनगो शाखा, WBN शाखा और मालजमादार शाखा पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने तहसीलदार और नायब तहसीलदार न्यायालयों का भी सघन निरीक्षण किया। अदालती कार्यवाही की समीक्षा करते हुए उन्होंने साफ कहा कि राजस्व कोर्ट में सुनवाई निरंतर होनी चाहिए ताकि तारीख-पे-तारीख के चक्कर में आम जनता को परेशान न होना पड़े। लोग सुबह से आकर शाम तक बैठे रहते हैं और सुनवाई किए बिना अगली तारीख दे दी जाती है, यह रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने आंकड़ों का ब्यौरा देते हुए बताया कि तहसील में अब तक दर्ज कुल 65,390 मामलों में से 64,702 का निराकरण किया जा चुका है और वर्तमान में केवल 688 मामले लंबित हैं। इस पर मंत्री ने बचे हुए सभी लंबित मामलों को भी समय-सीमा के भीतर तत्काल शून्य करने का टारगेट दिया।मंत्री ने न केवल फाइलों को खंगाला, बल्कि परिसर में मौजूद आम जनता के बीच पहुंचकर उनसे सीधा संवाद भी किया। उन्होंने लोगों की शिकायतें और समस्याएं सुनीं और मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। तहसील कार्यालय के बाद मंत्री ने नवीन संभाग आयुक्त कार्यालय का रुख किया। वहां उन्होंने लंबित राजस्व मामलों को समय-सीमा के भीतर निपटाने के लिए संभाग आयुक्त को निर्देशित किया। कामकाज में कसावट लाने और कप्तानी की निगरानी को मजबूत करने के साथ ही मंत्री ने संभाग आयुक्त को संभाग के सभी जिलों में राजस्व कार्यों की वास्तविक प्रगति का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।
- -किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने सरसों उत्पादक किसानों के हित में 30 मई तक खरीदी हेतु पुनः पोर्टल खुलवाने का आग्रह कियारायपुर । रबी सीजन 2026-27 की नयी दलहनी - तिलहनी फसल को बीते 01 मार्च से आसन्न 31 मई तक समर्थन मूल्य पर खरीदने घोषणा के 15 दिन पहले ही तिलहनी फसल सरसों की खरीदी शासन ने बंद कर दी है । बीते 16 मई से संबंधित पोर्टल बंद कर दिये जाने के कारण किसान भटक रहे हैं । बीते दिनों आरंग विकास खंड के ग्राम सिवनी में आयोजित सुशासन तिहार में ग्राम कुंडा के 6 किसानों ने इसकी शिकायत भी दर्ज करायी है पर पोर्टल अभी तक खोला नहीं गया है ।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , कृषि मंत्री रामविचार नेताम , मुख्य सचिव विकासशील व सी एम सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को मेल से प्रेषित ज्ञापन में यह जानकारी देते हुये किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने सरसों उत्पादक किसानों के हित में आसन्न 30 मई तक खरीदी हेतु पुनः पोर्टल खुलवाने का आग्रह किया है । ज्ञापन में जानकारी दी गयी है कि भारत सरकार की समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत रबी सीजन 2026-27 की नई फसल चना , मसूर व सरसों को घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदने की घोषणा करते हुये खरीदी केन्द्रों का निर्धारण किया गया था । इसके प्रचार - प्रसार के लिये जारी विभागीय पोस्टर में इसकी खरीदी के लिये 01 मार्च से 30 मई निर्धारित होने की भी जानकारी पोस्टर में दी गयी थी । इसके आधार पर जब किसान 16 मई को तिलहनी फसल सरसों ले खरीदी केन्द्रों में पहुंचे तो जानकारी दी गयी कि इसके खरीदी का पोर्टल 16 मई से बंद कर दिया गया है व इसके खरीदी की निर्धारित तिथि 15 मई थी जबकि दलहनी फसल चना व मसूर की खरीदी तिथि आसन्न 30 मई है । विभागीय भ्रामक प्रचार - प्रसार के चलते 15 मई तक समर्थन मूल्य पर सरसों न बेच पाने वाले प्रदेश के किसानों के सरसों आसन्न 30 मई तक खरीदने पोर्टल पुनः खुलवाने का आग्रह करते हुये ज्ञापन में लिखा गया है कि विभागीय त्रुटि की सजा किसानों को न दी जावे ।
- बालोद जिले में खनिज रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण पर की जा रही है निरंतर कार्रवाईबालोद ।कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में खनिज विभाग द्वारा गुण्डरदेही विकासखण्ड में 24 मई 2026 को औचक निरीक्षण किया गया। जिला खनि अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान खनिज रेत के अवैध परिवहन करते पाये जाने के कारण कुल 04 वाहनों को जप्त किया गया। जिसमे रेत से भरी हाईवा वाहन (सीजी 17 केएन 2793, सीजी 07 बीएन 7715, सीजी 08 एके 4335) तथा 01 ट्रेक्टर मय ट्रॉली रेत जिसे थाना, आरक्षी केन्द्र गुण्डरदेही के अभिरक्षा में रखा गया है। उन्होंने बताया कि उक्त प्रकरण मे नियमानुसार खान व खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत् कार्रवाई की जाएगी एवं भविष्य में भी खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण करते पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- -बस्तर की आंगनबाड़ियों में खेल-खेल में विज्ञान, कला और आत्मविश्वास की नई उड़ानरायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की आंगनबाड़ी केन्द्रों में इन दिनों नन्हे हाथ सिर्फ खेल नहीं रहे, बल्कि अपने सपनों, कल्पनाओं और सीखने की नई दुनिया को आकार दे रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वंयसेवी संस्था ‘तितली’ के सहयोग से चल रही रचनात्मक गतिविधियों ने बच्चों के लिए आंगनबाड़ी को आनंद, जिज्ञासा और नवाचार का केंद्र बना दिया है।माटी की सोंधी खुशबू के बीच जब छोटे-छोटे बच्चों ने अपने हाथों से दीये बनाए, तो वह सिर्फ एक कलाकृति नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास और रचनात्मकता की पहली चमक थी। गीली मिट्टी को आकार देते हुए बच्चों ने स्पर्श, संतुलन और कल्पनाशीलता को महसूस किया। पारंपरिक दीये बनाते हुए वे अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी सहज रूप से जुड़ते चले गए।वहीं दूसरी ओर साधारण पेपर कप और धागे से तैयार किया गया ‘पेपर कप फोन’ बच्चों के लिए किसी जादू से कम नहीं था। जब एक छोर से बोली गई आवाज दूसरे छोर तक पहुंची, तो बच्चों की आंखों में आश्चर्य और खुशी एक साथ झलक उठी। इस छोटे से प्रयोग ने नन्हे मनों को विज्ञान के उस अद्भुत संसार से परिचित कराया, जहां सीखना किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि अनुभवों से जुड़ा होता है।इन गतिविधियों ने बच्चों को केवल मनोरंजन नहीं दिया, बल्कि संवाद, ध्यान से सुनना, मिलकर काम करना और नई चीजें बनाने का आत्मविश्वास भी सिखाया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि बच्चों में अब सवाल पूछने और खुद से प्रयोग करने की उत्सुकता बढ़ रही है।विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रारंभिक अवस्था में इस तरह की खेल-आधारित शिक्षा बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में बेहद प्रभावी होती है। बस्तर की आंगनबाड़ियों में हो रहे ये प्रयास इस बात का प्रेरक उदाहरण हैं कि यदि बच्चों को सीखने का सहज और आनंददायक वातावरण मिले, तो वे बहुत कम उम्र में ही रचनात्मक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर सकते हैं।बस्तर की ये तस्वीर आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रही है, जहां आंगनबाड़ी केन्द्र केवल पोषण तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नौनिहालों के सपनों, जिज्ञासाओं और उज्ज्वल भविष्य को गढ़ने वाले सशक्त सीख केंद्र बनते जा रहे हैं।
- -जेसीबी से खेतों की मेड़ तोड़कर किया जा रहा नदी के समानांतर समतलीकरण, तांदुला नदी का लौटाया जाएगा पुराना वैभव-राजस्व और पुलिस प्रशासन की टीम सुबह 05:30 बजे से कर रही है कार्यवाही, अतिक्रमणकारियों को दिया गया था 24 घंटे का अल्टीमेटमबालोद, । बालोद जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी को उसके वास्तविक और मूल स्वरूप में वापस लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ी और निर्णायक कार्यवाही शुरू कर दी गई है। जिला मुख्यालय के समीप ग्राम सिवनी और देउरतराई क्षेत्र में तांदुला नदी के तट पर किए गए अवैध कब्जे को हटाने के लिए आज सुबह से ही प्रशासनिक अमला मैदान पर उतर चुका है।तहसीलदार द्वारा सभी 14 अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया था। समय सीमा समाप्त होते ही आज सुबह 05:30 बजे से राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी है। नदी क्षेत्र की लगभग साढ़े सात एकड़ भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए खेतों की मेड़ों को मशीनों के माध्यम से तोड़ा जा रहा है। इन अवैध खेतों को नदी के समानांतर समतल करने का कार्य तेजी से जारी है। समतलीकरण के बाद इस पूरे क्षेत्र में जलभराव किया जाएगा, जिससे तांदुला नदी को उसका पुराना वैभव और जल संचय क्षमता वापस मिल सकेगा।उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले भी इस क्षेत्र में अवैध कब्जा हटाने की मुहिम शुरू की गई थी, लेकिन तब खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की फसल लगी होने के कारण मानवीय दृष्टिकोण से इसे रोक दिया गया था। अब चूंकि धान की फसल कट चुकी है, प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए पुनः इस कब्जा हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया है। राजस्व विभाग की जांच और ड्रोन सर्वे में पता चला था कि जो तांदुला नदी 220 मीटर चौड़ी थी, वह अवैध कब्जों के कारण कई जगहों पर सिकुड़कर मात्र 80 से 90 मीटर ही रह गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश अतिक्रमणकारियों के पास अन्य जगहों पर अपनी जमीनें हैं और वे किराना दुकान, सैलून आदि जैसे मुख्य व्यवसाय चलाते हैं। कुछ लोगों द्वारा नदी की जमीन पर अवैध कब्जा कर इसे दूसरों को रेगहा पर देने की बात भी प्रमाणित हुई है। अवैध कब्जा हटाने का यह कड़ा कदम तांदुला नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए बेहद जरूरी हो गया था। जिला प्रशासन का मुख्य संकल्प नदी को उसके पुराने और वास्तविक स्वरूप में वापस लाना है, जो आज सुबह से जारी इस त्वरित और बड़ी कार्यवाही से साकार होता दिख रहा है। इस कार्यवाही के दौरान एसडीएम श्री नूतन कंवर, एसडीओपी श्री बोनिफस एक्का, तहसीलदार श्री आशुतोष शर्मा, नायब तहसीलदार श्री मुकेश गजेंद्र, थाना प्रभारी श्री शिशुपाल सिंह, ट्रैफिक टीआई श्री रविशंकर पाण्डेय, गुण्डरदेही थाना प्रभारी श्री नवीन बोरकर, रक्षित निरीक्षक श्रीमती रेवती वर्मा, जल संसाधन विभाग के उप अभियंता श्री विशाल राठौर सहित राजस्व, पुलिस और जल संसाधन विभाग के कर्मचारी मौजूद थे।
- -विशेष अभियान में 23 वाहन जब्त, 2 जेसीबी, 8 हाइवा और 13 ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कार्रवाईबिलासपुर / कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश एवं उप संचालक खनिज किशोर गोलघाटे के मार्गदर्शन में जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर विभिन्न क्षेत्रों में जांच एवं कार्रवाई की गई।अभियान के दौरान तेंदुआ, कोटा, चौरसढ़ी, कछार, लोफंदी, सेंदरी, निरतु, लखराम, गढ़वत, खैरखुंडी, लोखंडी, तुर्काडीह एवं सकरी क्षेत्र में जांच की गई। जांच में अवैध रूप से खनिज रेत, मिट्टी, मुरूम तथा गिट्टी डस्ट के उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त कुल 23 वाहनों को जब्त किया गया। कार्रवाई के तहत तेंदुआ एवं कोटा क्षेत्र में खनिज रेत का परिवहन करते हुए 4 हाइवा एवं 3 ट्रैक्टर पकड़े गए। वहीं कोटा क्षेत्र में खनिज मिट्टी का अवैध उत्खनन करते हुए 1 जेसीबी मशीन एवं 1 ट्रैक्टर जब्त किया गया। चौरसढ़ी क्षेत्र में मुरूम उत्खनन करते 1 जेसीबी एवं 1 हाइवा वाहन पर कार्रवाई की गई। इसी प्रकार लोखंडी क्षेत्र में रेत परिवहन करते 1 हाइवा तथा उत्खनन करते 1 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गई।सकरी क्षेत्र में गिट्टी डस्ट परिवहन करते 2 हाइवा एवं खनिज मिट्टी-ईंट परिवहन करते 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी गईं। कछार एवं सेंदरी क्षेत्र में रेत उत्खनन करते 4 ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा सेलर एवं गढ़वत क्षेत्र में रेत उत्खनन एवं परिवहन करते 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गईं। उप संचालक खनिज श्री गोलघाटे ने बताया कि जब्त सभी वाहनों के विरुद्ध खान एवं खनिज अधिनियम 1957 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जब्त वाहनों को कोनी, कोटा, रतनपुर एवं सकरी थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया है। खनिज, राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
- -पहले चरण में 32 नगरीय निकायों का चयन, शहरी अधोसंरचना और जन सुविधाओं को मिलेगी नई गति-मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छोटे शहरों और कस्बों को भी मिलेगा आधुनिक विकास का नया मॉडल-200 करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ कार्यों के चयन के लिए संभाग स्तरीय समितियों का गठन, 15 दिनों में मांगी गई कार्ययोजना-आदर्श शहर समृद्धि योजना से छोटे और मध्यम शहरों को मिलेगा व्यवस्थित विकास का नया आधार : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय-प्रदेश के छोटे शहरों को भी मिलेगा आधुनिक शहरी विकास का नया मॉडल : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण सावबिलासपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते नगरों और कस्बों को भी आधुनिक शहरी सुविधाओं से सुसज्जित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ प्रारंभ की जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप यह योजना पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगमों के लिए प्रारंभ हुई मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना की तर्ज पर नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अधोसंरचना को मजबूत करने, जन सुविधाओं का विस्तार करने तथा विकास कार्यों को गति देने का माध्यम बनेगी। योजना के जरिए छोटे और मध्यम शहरों में भी सुव्यवस्थित शहरी विकास की नई आधारशिला रखी जाएगी।राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आज योजना के प्रथम चरण के लिए प्रदेशभर के 32 नगरीय निकायों का चयन कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के तहत कार्यों के चयन, स्थल निरीक्षण और प्राथमिकता निर्धारण के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय (संभागीय) कार्यालयों के संयुक्त संचालकों की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समितियों का गठन भी किया गया है। समितियों को आगामी 15 दिनों के भीतर कार्यों का चिन्हांकन, स्थल निरीक्षण कर प्राथमिकता के क्रम में सूची तैयार करते हुए अनुमानित राशि की जानकारी शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देशानुसार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और समन्वय के लिए पांचों राजस्व संभागों में कार्यों के चयन एवं मॉनिटरिंग हेतु संचालनालय के यांत्रिकी प्रकोष्ठ के मुख्य अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, ताकि कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।पहले चरण में प्रदेश के 32 नगरीय निकायों को मिला अवसरआदर्श शहर समृद्धि योजना के पहले चरण में प्रदेश के 32 नगरीय निकायों को शामिल किया गया है। इनमें बस्तर, सरगुजा और रायपुर संभाग के छह-छह, बिलासपुर संभाग के नौ तथा दुर्ग संभाग के पांच निकाय शामिल हैं।बस्तर संभाग के अंतर्गत सुकमा नगर पालिका के साथ भोपालपटनम, गीदम, केशकाल, पखांजूर और नरहरपुर नगर पंचायत को शामिल किया गया है। दुर्ग संभाग में पंडरिया और खैरागढ़ नगर पालिका के साथ गुरूर, घुमका और छुईखदान नगर पंचायतों का चयन किया गया है।रायपुर संभाग के अंतर्गत कुरूद, महासमुंद, आरंग और बलौदाबाजार नगर पालिका तथा पिथौरा एवं चंदखुरी नगर पंचायत को योजना में शामिल किया गया है। वहीं सरगुजा संभाग में सूरजपुर, पत्थलगांव और मनेंद्रगढ़ नगर पालिका के साथ लखनपुर, कोतबा और कुनकुरी नगर पंचायतों को शामिल किया गया है।बिलासपुर संभाग के अंतर्गत तखतपुर, मुंगेली, लोरमी, जांजगीर-नैला और सक्ती नगर पालिका के साथ बिल्हा, घरघोड़ा, पुसौर और सरिया नगर पंचायत को योजना के प्रथम चरण में शामिल किया गया है।सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज से स्मार्ट सुविधाओं तक होगा समग्र विकासमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सोच के अनुरूप आदर्श शहर समृद्धि योजना केवल आधारभूत निर्माण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि नागरिक जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में समग्र विकास मॉडल के रूप में कार्य करेगी। योजना के अंतर्गत सड़क, ड्रेनेज, जलापूर्ति, परिवहन, पार्क, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक सेवाएं, रोजगार, व्यापार, उद्यमिता प्रोत्साहन, ई-गवर्नेंस, स्मार्ट ट्रैफिक, सुरक्षा प्रणाली, हरित क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, सुझाव, शिकायत निवारण तथा रिपोर्टिंग प्रणाली जैसे कार्य प्रमुखता से किए जाएंगे।स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से होंगे कार्यों का चयनयोजना के तहत शहरों की स्थानीय आवश्यकताओं और जन अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त संचालक की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समितियां गठित की गई हैं। नगर पालिका अथवा नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को समिति का सदस्य-सह-सचिव बनाया गया है।रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर तथा सरगुजा संभाग के लिए गठित पांच सदस्यीय समितियों में दो-दो कार्यपालन अभियंता और एक सहायक अभियंता सदस्य होंगे, जबकि बस्तर संभाग की चार सदस्यीय समिति में एक कार्यपालन अभियंता तथा एक सहायक अभियंता सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। निकाय अध्यक्षों, पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से शहरों की आवश्यकता के अनुसार प्राथमिकता तय कर कार्यों का चयन किया जाएगा।"हमारी सुशासन सरकार बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते नगरों और कस्बों के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आदर्श शहर समृद्धि योजना के माध्यम से नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अधोसंरचना, जन सुविधाओं और रोजगार के नए अवसरों को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार छोटे शहरों को भी बड़े शहरों की तरह सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा यह योजना प्रदेश के शहरी विकास को नई गति और नई दिशा देने का काम करेगी - मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय"आदर्श शहर समृद्धि योजना राज्य के छोटे और मध्यम शहरों के व्यवस्थित विकास की महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज, स्मार्ट सुविधाओं, हरित क्षेत्र और नागरिक सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। कार्यों के चयन के लिए संभाग स्तरीय समितियों का गठन कर प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया गया है तथा सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के हर नगर में नागरिकों को बेहतर अधोसंरचना और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है - उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव
- -कटेकल्याण शिविर में 70 से अधिक ग्रामीणों को मिला बी-1 दस्तावेजदंतेवाड़ा। प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशानुसार आमजन को त्वरित एवं पारदर्शी प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में सुशासन तिहार के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड कटेकल्याण में आयोजित शिविर में ग्रामीण किसानों को बड़ी राहत मिली, जहां लगभग 70 से अधिक किसानों को बी-1 दस्तावेज की प्रतियां तत्काल उपलब्ध कराई गईं।राजस्व विभाग द्वारा शिविर स्थल पर ही किसानों के भूमि अभिलेखों का परीक्षण कर बी-1 दस्तावेज प्रदान किए गए। पहले ग्रामीणों को ऐसे दस्तावेजों के लिए तहसील कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सुशासन तिहार के माध्यम से गांव स्तर पर ही समाधान मिलने से किसानों में खुशी देखी जा रही है। बी-1 दस्तावेज प्राप्त होने से किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड, बैंक ऋण, फसल बीमा, सीमांकन तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं राज्य शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब प्रशासन गांव तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करते हुए शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का सतत प्रयास किया जा रहा है।












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