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- -ग्राम नमना के कृषक भरोस राम पोर्ते ने 0.80 हेक्टेयर में किया कोदो उत्पादनअम्बिकापुर । राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के माध्यम से सरगुजा जिले में किसानों को परंपरागत खेती के साथ फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के सकारात्मक परिणाम अब किसानों की आर्थिक स्थिति में भी दिखाई देने लगे हैं। उदयपुर विकासखंड के ग्राम नमना निवासी कृषक भरोस राम पोर्ते ने योजना के तहत कोदो की खेती कर बेहतर उत्पादन एवं अतिरिक्त आय अर्जित की है।कृषक भरोस राम पोर्ते के पास कुल 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है। योजना से पूर्व वे खरीफ मौसम में धान, मक्का एवं सब्जियों की खेती तथा रबी मौसम में गेहूं एवं सब्जियों का उत्पादन करते थे। सीमित संसाधनों के कारण उनकी अधिकांश भूमि खाली रह जाती थी, जिससे खेती से अपेक्षित आय प्राप्त नहीं हो पाती थी और आर्थिक स्थिति सामान्य बनी हुई थी।राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई ) के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा उन्हें 0.80 हेक्टेयर क्षेत्र में कोदो फसल का प्रदर्शन कराया गया। इसके लिए विभाग द्वारा 8 किलोग्राम (दो पैकेट) उन्नत कोदो बीज उपलब्ध कराया गया तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने का प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया गया। विभागीय सलाह के अनुरूप खेती करने से उन्हें उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हुए।फसल कटाई के उपरांत कृषक को 0.80 हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग 10 क्विंटल कोदो का उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पाद के विक्रय से उन्होंने लगभग 30 हजार रुपये की आय अर्जित की। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।कृषक भरोस राम पोर्ते ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्राप्त उन्नत बीज एवं तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें कोदो की खेती में अच्छा उत्पादन मिला। उन्होंने कहा कि इस फसल से बेहतर लाभ मिलने के बाद वे इस वर्ष में भी कोदो की खेती जारी रखेंगे तथा इसके रकबे में वृद्धि करेंगे।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई ) का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ना, मोटे अनाज (श्रीअन्न) के उत्पादन को बढ़ावा देना तथा उनकी आय में वृद्धि करना है। योजना के अंतर्गत गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम नमना के कृषक भरोस राम पोर्ते ने वैज्ञानिक खेती, गुणवत्तायुक्त बीज एवं विभागीय सहयोग के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय बढ़ाई हैं। उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायी बन रही है।
- -वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन को मिला नया आयामरायपुर । दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत का संरक्षण दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत सर्प एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था वाला जहरीला सांप है, जो हाल ही में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में देखा गया है। शरीर में रंगद्रव्य (मेलानिन) की कमी के कारण इसका शरीर सफेद या हल्के रंग का नजर आता है। वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में छत्तीसगढ़ को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। दुर्ग वनमंडल के चरौदा क्षेत्र के पंचशील नगर में एक घर से मिले अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी (Leucistic) करैत सर्प का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।यह कार्रवाई वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। वन विभाग द्वारा दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है।उल्लेखनीय है कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार और वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य में वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।विगत 21 जुलाई को पंचशील नगर में सफेद रंग का सांप होने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम और सर्प रेस्क्यूअर श्री विजय शर्मा मौके पर पहुंचे। सांप का सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद इसकी पहचान श्वेतवर्णी (Leucistic) करैत (Bungarus fasciatus) के रूप में हुई। श्वेतवर्णता एक दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था है, जिसमें शरीर में रंगद्रव्य (मेलानिन) की कमी के कारण जीव का रंग सामान्य से अलग दिखाई देता है। इसी कारण यह करैत सामान्य करैत की तुलना में सफेद रंग का दिखाई देता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के दुर्लभ करैत का पाया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ घटना है।श्वेतवर्णी करैत के मिलने की घटनाएं दक्षिण एशिया में बहुत कम दर्ज की गई हैं। भारत में महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कुछ चुनिंदा स्थानों से ही इसके मिलने के अभिलेख उपलब्ध हैं। ऐसे में दुर्ग जिले में इस दुर्लभ करैत का मिलना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संपदा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।सर्प विशेषज्ञों से जांच के बाद करैत के श्वेतवर्णी होने की पुष्टि की गई। इसके बाद दुर्ग वनमंडलाधिकारी श्री दिपेश कपिल के निर्देश पर 23 जुलाई 2026 को दुर्ग आर.ए. के श्री प्रमोद यादव, सर्प मित्र श्री विजय शर्मा और सर्प विशेषज्ञ श्री अविनाश मौर्य ने इसे राजनांदगांव वनमंडल के अंतर्गत कक्ष क्रमांक आर.एफ. 549 स्थित प्राकृतिक पर्यावास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया।वन विभाग का यह कदम वन्यजीवों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और जैव विविधता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
- -31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन, 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चे कर सकते हैं आवेदनरायपुर । बच्चों की असाधारण प्रतिभा, नवाचार, साहस और सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार-2026 के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के प्रतिभाशाली बच्चों, अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों से अधिक से अधिक संख्या में आवेदन करने की अपील की है।प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार देश का सर्वाेच्च बाल सम्मान माना जाता है, जो उन बच्चों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हों। यह प्रतिष्ठित सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है।विभागीय जानकारी के अनुसार 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे इस पुरस्कार के लिए पात्र हैं। नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक बच्चे स्वयं भी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा अभिभावक, स्कूल, सामाजिक संस्थाएं और अन्य व्यक्ति भी योग्य बच्चों का नामांकन कर सकते हैं।सभी आवेदन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। राज्य शासन ने प्रदेश के नवाचारी, प्रतिभाशाली और प्रेरणादायी बच्चों से इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपनी उपलब्धियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन करने का आग्रह किया है।आवेदन एवं विस्तृत जानकारी के लिएawards.gov.in पर विजिट किया जा सकता है।
- -स्व-सहायता समूह से मिला आर्थिक संबल, खेती-किसानी और आजीविका गतिविधियों से बनीं ‘लखपति दीदी’रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेशभर की महिलाएं कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, लघु उद्यम और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से हजारों महिलाएं आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।सरगुजा जिले के ग्राम बरकेलाला (पोस्ट सखौली) की श्रीमती मीरा बाई इस परिवर्तन की प्रेरक मिसाल हैं। तारा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने खेती और मत्स्य पालन के माध्यम से आर्थिक समृद्धि हासिल की और आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।मीरा बाई बताती हैं कि उनके स्वयं सहायता समूह में 10 महिलाएं शामिल हैं, जो नियमित बचत, बैंकिंग गतिविधियों और सामूहिक आजीविका कार्यों से जुड़ी हैं। समूह के माध्यम से प्राप्त एक लाख रुपये के ऋण का उपयोग कृषि और मत्स्य पालन जैसी आयवर्धक गतिविधियों के विस्तार में किया गया, जिससे सभी सदस्यों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।समूह की महिलाओं ने ऋण राशि से धान, मक्का और अरहर की खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन का कार्य भी शुरू किया। आधुनिक कृषि पद्धतियों और सिंचाई सुविधाओं का लाभ मिलने से उत्पादन बढ़ा और बेहतर आय प्राप्त हुई। प्राप्त आय से समूह ने समय पर ऋण का भुगतान भी किया तथा आवश्यकता अनुसार पुनः ऋण लेकर आजीविका गतिविधियों का विस्तार किया।मीरा बाई वर्तमान में ‘लखपति दीदी’ अभियान से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना चुकी हैं। वे अन्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने, स्वरोजगार अपनाने और आयवर्धक गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयास और योजनाओं का सही उपयोग महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।मीरा बाई ने अपनी सफलता का श्रेय शासन की योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर प्रदान किया है। प्रदेश में ‘बिहान’ योजना के माध्यम से हजारों महिलाएं कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, लघु उद्यम और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- रायपुर ।छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत ने गुरुवार को कोंडागांव स्थित शिल्पनगरी का दौरा कर शिल्पकारों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने जिले के 40 शिल्पियों को आधुनिक टूल किट वितरित किए। इसमें 20 बेलमेटल एवं 20 लौहशिल्प के शिल्पकार शामिल हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य शासन स्थानीय कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प के संरक्षण, संवर्धन तथा शिल्पकारों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कोंडागांव की शिल्पकला जिले की विशिष्ट पहचान है, जिसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि शिल्पकार अपनी कलाकृतियों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए शबरी एम्पोरियम एक माध्यम है। साथ ही आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लेकर बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करें, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि शिल्पकारों को केवल प्रोत्साहन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी आवश्यक है।बोर्ड की अध्यक्ष ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पादों की बेहतर ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी विपणन के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक तकनीकों का समावेश करते हुए शिल्पकारों की आवश्यकताओं के अनुरूप हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएं। नगरपालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल ने कहा कि कोंडागांव अपनी समृद्ध पारंपरिक शिल्पकला के कारण शिल्पनगरी के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक टूल किट शिल्पकारों के कार्य को अधिक सुगम, गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर श्रीमती लक्ष्मी ध्रुव, सुश्री सोनामणि पोयाम, श्रीमती सुषमा खोब्रागड़े, श्री कुलवंत चहल, श्री जितेन्द्र सुराना, श्री दयाराम पटेल, श्री नागेश देवांगन एवं हस्त शिल्प कोण्डागांव के सहायक प्रबंधक श्री आर. डी. खूंटे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में शिल्पकार उपस्थित रहे।
- -साइबर सुरक्षा, महिला अधिकार, आत्मरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं की दी गई जानकारीरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में संचालित बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत बालिकाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा एवं जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सूरजपुर जिले के विकासखंड प्रतापपुर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पंछीडांड़ (केरता) में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों से बचाव, महिला एवं बाल अधिकार, लैंगिक समानता, वित्तीय साक्षरता तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें सुरक्षित एवं जागरूक नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, घरेलू हिंसा से संरक्षण, महिला उत्पीड़न की रोकथाम, मासिक धर्म स्वच्छता, बाल विवाह के दुष्परिणाम तथा बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी दी। विद्यार्थियों को आवश्यकता पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 तथा आपातकालीन सेवा 112 का उपयोग करने के बारे में भी बताया गया। साथ ही यातायात नियमों एवं सुरक्षित डिजिटल व्यवहार पर भी जागरूक किया गया।शिविर के दौरान नोनी सुरक्षा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना तथा महतारी वंदन योजना सहित राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इसके अलावा सखी वन स्टॉप सेंटर द्वारा महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता सेवाओं से भी छात्राओं एवं उपस्थित महिलाओं को अवगत कराया गया।कार्यक्रम में छात्राओं को आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया गया तथा जागरूकता संबंधी ब्रोशर वितरित किए गए। विद्यालय परिवार, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के सहयोग से आयोजित यह शिविर बालिकाओं में जागरूकता, आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
- -अब चक्कर काटने से मिली मुक्ति, 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्ररायपुर । डिजिटल क्रांति और त्वरित नागरिक सेवाओं के बल पर नारायणपुर का ‘सेवा सेतु केंद्र’ आमजनों के लिए भरोसे का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की जनहितैषी सोच और कलेक्टर के कुशल निर्देशन में संचालित इस केंद्र ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इतना सरल और पारदर्शी बना दिया है कि ग्रामीणों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से पूर्णतः मुक्ति मिल गई है।नारायणपुर जिले के दूरस्थ ग्राम साकड़ीबेड़ा के निवासी तेजराम भोयर को अपने पुत्र मनोज भोयर की आगे की पढ़ाई के लिए आय प्रमाण पत्र की अत्यंत आवश्यकता थी। पूर्व के अनुभवों को याद करते हुए तेजराम आशंकित थे कि प्रमाण पत्र बनवाने में हफ्तों का समय और बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने में पैसे बर्बाद होंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपनी अर्जी सेवा सेतु केंद्र में जमा की, उनका यह संशय दूर हो गया। मात्र एक दिन (24 घंटे) के भीतर उनके पुत्र का आय प्रमाण पत्र तैयार होकर उनके हाथ में था। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से मनोज की उच्च शिक्षा की राह में आने वाली बाधा दूर हो गई और उनका प्रवेश बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित हो सका। श्री तेजराम भोयर ने कहा कि पहले एक छोटे से कागज़ के लिए कई बार दफ्तरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और पैसा दोनों नष्ट होते थे। लेकिन सेवा सेतु केंद्र की बदौलत मेरा काम सिर्फ एक दिन में हो गया। यह व्यवस्था हम ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।सेवा सेतु केंद्र की इस त्वरित एवं पारदर्शी कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर तेजराम भोयर ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का सहृदय आभार व्यक्त किया।मुख्यमंत्री जी की दूरगामी सोच से शुरू की गई यह पहल ग्रामीण अंचलों में सुशासन की नई परिभाषा गढ़ रही है। घर के पास ही डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध शासकीय सेवाएं मिलने से न केवल आम नागरिकों का विश्वास शासन-प्रशासन पर बढ़ा है, बल्कि यह कदम छत्तीसगढ़ में 'लास्ट माइल डिलीवरी' (अंतिम व्यक्ति तक सेवा) का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
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-आंगनबाड़ी सहायिकाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षक प्रशिक्षण, पोषण बाड़ी विकसित करने पर जोर
-बच्चों के पूरक पोषण आहार में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने की पहलरायपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण संवर्धन प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में राज्य के विभिन्न जिलों में स्थानीय खाद्य संसाधनों पर आधारित पोषण शिक्षा और पोषण बाड़ी की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में दंतेवाड़ा जिले में 'निरमान' संस्था द्वारा डब्ल्यूएचएच परियोजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से पोषण शिक्षा को व्यवहारिक स्वरूप दिया जा रहा है।इस पहल के तहत दंतेवाड़ा जिले की आठ परियोजनाओं में आंगनबाड़ी सहायिकाओं को स्थानीय, विविध एवं मौसमी खाद्य पदार्थों के महत्व के साथ-साथ मिलेट्स आधारित पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों के पूरक पोषण आहार को अधिक पौष्टिक, संतुलित और स्थानीय संसाधनों पर आधारित बनाना है।प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में पोषण बाड़ी (न्यूट्री गार्डन) विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि केंद्रों में फल एवं हरी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और बच्चों को ताजा एवं पौष्टिक आहार मिल सके।इसी कड़ी में प्रशिक्षण के बाद 'निरमान' टीम ने परियोजना अधिकारियों के सहयोग से दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों में पपीता, कटहल, अमरूद, सहजन (मोरिंगा), भिंडी, लौकी, बरबटी, मक्का एवं कद्दू सहित विभिन्न फलदार एवं सब्जी फसलों के पौधे और बीज रोपे। आगामी चरण में बारसूर परियोजना के 30 से 40 आंगनबाड़ी केंद्रों में भी पोषण बाड़ी विकसित की जाएगी। -
*जल संरक्षण, सिंचाई, मत्स्य पालन और रोजगार को मिला नया आधार*
बिलासपुर/जिले के विकासखंड कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत नवागांव कर्रा के मजौलीपारा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सामुदायिक डबरी का निर्माण किया गया। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल स्तर में वृद्धि, सिंचाई सुविधा का विस्तार, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना तथा ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना था। इस कार्य के लिए कुल 5.11 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। निर्माण कार्य ग्राम पंचायत द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन एवं नियमानुसार मनरेगा के पात्र श्रमिकों के माध्यम से पूर्ण कराया गया। ग्राम के समीप स्थित मुक्तिधाम क्षेत्र में वर्षा जल के उचित संग्रहण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।बरसात का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, जिससे गर्मी के मौसम में जल संकट, भू-जल स्तर में गिरावट तथा सिंचाई की समस्या बनी रहती थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए सामुदायिक डबरी का निर्माण कराया गया, जिससे वर्षा जल का प्रभावी संचयन संभव हुआ। डबरी निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा, जिससे कृषि गतिविधियों को नई गति मिली। साथ ही जल उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन की शुरुआत हुई, जिसने ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का नया स्रोत तैयार किया। इस कार्य ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। डबरी में संचित पानी के कारण आसपास के पेड़-पौधों एवं हरियाली के संरक्षण में सहायता मिली। वर्षा के पानी के अनियंत्रित बहाव में कमी आने से मिट्टी कटाव पर भी नियंत्रण हुआ तथा क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हुआ। इससे ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी। डबरी का निर्माण मुक्तिधाम के समीप होने के कारण सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। पहले यहां अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों के दौरान जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जबकि अब इस डबरी से आवश्यक जल उपलब्ध होने लगा है। इसके साथ ही यह सामुदायिक परिसंपत्ति गांव के अन्य सामाजिक कार्यों में भी उपयोगी साबित हो रही है।आज यह सामुदायिक डबरी ग्राम नवागांव कर्रा के लिए जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बन चुकी है। इस पहल से जहां एक ओर कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन और भू-जल संरक्षण को मजबूती मिली है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हुआ है। यह कार्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। - -कलाकारों, शिक्षाविदों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का किया सम्मानरायपुर । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवा, सुशासन और जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में प्रबुद्ध एवं सम्मानित नागरिकों से उनके निवास पर पहुंचकर आत्मीय मुलाकात की तथा संवाद किया।इस दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने चाँदनी चौक स्थित संगीत एवं नृत्य गुरु श्री शरद वैष्णव से भेंट कर उनके कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में योगदान की सराहना की। उन्होंने फ्रेंड्स कॉलोनी, कोतरा रोड बायपास में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के सदस्य डॉ. राजू अग्रवाल से मुलाकात कर उनका सम्मान किया। साथ ही सुभाष नगर, कोतरा रोड में भारतीय मजदूर संघ के वरिष्ठ नेता श्री एल.पी. कटकवार से भेंट कर विभिन्न सामाजिक विषयों पर चर्चा की।इसी क्रम में उन्होंने पूर्व प्राचार्य एवं सरस्वती शिशु मंदिर से जुड़े वरिष्ठ शिक्षाविद् श्री बाबूलाल चंद्रा से भी मुलाकात की। वित्त मंत्री ने प्रतिष्ठित शिक्षाविद एवं पेंटिंग आर्टिस्ट श्री पी.एस. खोडियार, सेवानिवृत्त प्राध्यापक श्री प्रताप खुरियार तथा श्रीमती कल्याणी मुखर्जी से भी उनके निवास पर पहुंचकर आत्मीय संवाद किया।सभी स्थानों पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा रामचरितमानस की प्रति भेंट की। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ एवं प्रबुद्ध नागरिकों का अनुभव, ज्ञान और मार्गदर्शन राष्ट्र निर्माण की अमूल्य पूंजी है। उनके विचार और जीवनानुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में देश ने सेवा, सुशासन, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। विशेष जनसंपर्क अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर संवाद स्थापित किया जा रहा है तथा केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी साझा की जा रही है।इस अवसर पर सभी सम्मानित नागरिकों ने वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के विकास एवं जनकल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
- -कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश-गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने कहारायपुर । लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने प्रदेश के विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आज आयोजित बैठक में जिलों के कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में शामिल हुए। लोक निर्माण विभाग के विभिन्न संभागों के कार्यपालन अभियंता, ठेकेदार और जेल अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठक में जुड़े।लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में प्रदेश की विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन बैरकों, बाउंड्रीवॉल्स, शौचालयों और वॉच टॉवर्स के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ ही सभी जेलों के अधीक्षकों से निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को कार्यस्थलों का नियमित दौरा कर कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों को भी निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए कार्यों में तेजी लाने और उन्हें समय पर पूरा करने को कहा।श्री बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और जेल अधीक्षकों को सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए जेल परिसर के भीतर निर्माण सामग्रियों के परिवहन की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने जेल अधीक्षकों को श्रमिकों को रोज काम के लिए पर्याप्त समय देने को कहा। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता ने बैठक में कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे हैं। नए बैरकों के निर्माण और मौजूदा सुविधाओं के विस्तार से राहत मिलेगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मैदानी अधिकारियों, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को तेज गति से काम कर कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण करने को कहा।लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में रायपुर केन्द्रीय जेल में पार्किंग शेड, पाठशाला शेड, मुलाकातियों-परिजनों के लिए शेड व शौचालय निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर के नगोई में 1500 आवास क्षमता के विशेष जेल, जिला जेल धमतरी और गरियाबंद में बाउंड्रीवॉल, जिला जेल जांजगीर, रामानुजगंज, सूरजपुर, कांकेर, संजारी-बालोद तथा उप जेल सारंगढ़ में बैरक निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। विभागीय सचिव ने कवर्धा उप जेल में मुख्य दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के कार्य, केन्द्रीय जेल अंबिकापुर और जगदलपुर में कैदियों के लिए बैरक एवं शौचालय निर्माण, जिला जेल दंतेवाड़ा में शौचालय निर्माण, जिला जेल सुकमा की मुख्य दीवारों के चारों ओर कंसर्टीना वायर फेंसिंग तथा वॉच टॉवर निर्माण एवं उप जेल बीजापुर में वॉच टॉवर निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
- -राज्य के विभिन्न जिलों के डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने कांकेर के छिपे पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार और विरासत पर्यटन के संवर्धन पर साझा किए सुझावरायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार नवाचारपूर्ण प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में कांकेर के ऐतिहासिक कांकेर पैलेस में आज छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की टीम तथा राज्य के विभिन्न जिलों से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स (इंफ्लुएंसर्स) ने कांकेर पैलेस के युवराज श्री जयप्रताप से सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात प्रदेश में हेरिटेज टूरिज्म को नई दिशा देने, कांकेर की ऐतिहासिक धरोहरों को व्यापक पहचान दिलाने तथा बस्तर अंचल की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही।भेंट के दौरान युवराज श्री जयप्रताप ने कांकेर रियासत के गौरवशाली इतिहास, राजमहल की स्थापत्य कला, स्थानीय संस्कृति तथा क्षेत्र की विशिष्ट परंपराओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कांकेर केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति और सांस्कृतिक विविधता के कारण भी पर्यटकों के लिए अत्यंत आकर्षक गंतव्य है। उन्होंने कहा कि विरासत स्थलों का संरक्षण और उनका प्रभावी प्रचार-प्रसार पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है।बैठक में विशेष रूप से कांकेर और आसपास के ऐसे कम चर्चित पर्यटन स्थलों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन अभी तक वे व्यापक स्तर पर पर्यटकों की पहुंच से दूर हैं। इन स्थलों को डिजिटल माध्यमों के जरिए देश-विदेश के यात्रियों तक पहुंचाने, उनकी विशिष्टताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा उन्हें पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए अनेक सुझाव सामने आए। यह भी विचार किया गया कि प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और विरासत पर्यटन को एकीकृत रूप से विकसित कर कांकेर को एक बहुआयामी पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है।राज्य के विभिन्न जिलों से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कम चर्चित लेकिन अत्यंत मनोहारी पर्यटन स्थलों, स्थानीय लोक संस्कृति, जनजातीय जीवन, पारंपरिक कला, खान-पान और प्राकृतिक सौंदर्य को रचनात्मक वीडियो, फोटोग्राफी और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के माध्यम से देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।बैठक के दौरान हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा पर्यटन आधारित रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। इंफ्लुएंसर्स ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके डिजिटल मंचों के माध्यम से कांकेर और समूचे बस्तर अंचल की अनूठी पर्यटन पहचान लाखों लोगों तक पहुंचेगी और प्रदेश के पर्यटन को नई गति मिलेगी।युवराज श्री जयप्रताप ने भी छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने का यह प्रयास निश्चित रूप से सार्थक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय विरासत, इतिहास और प्राकृतिक धरोहरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो कांकेर आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख हेरिटेज पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड इन दिनों राज्य के विभिन्न जिलों से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के साथ बस्तर पर्यटन परिचय यात्रा का आयोजन कर रहा है। इस यात्रा के माध्यम से बस्तर संभाग के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके। यह पहल डिजिटल माध्यमों की शक्ति का उपयोग करते हुए छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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खोंगसरा आदिवासी छात्रावास के विद्यार्थियों को जल्द मिलेगी आधुनिक सुविधाओं से युक्त नई आवासीय व्यवस्था
बिलासपुर/ जिले के खोंगसरा स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास के विद्यार्थियों को शीघ्र ही नए और आधुनिक छात्रावास भवन की सुविधा मिलने जा रही है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए भवन को 15 अगस्त तक हर हाल में पूर्ण करने को कहा है, ताकि विद्यार्थियों को नए भवन में स्थानांतरित कर बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।उल्लेखनीय है कि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 50 सीटर नवीन छात्रावास भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद छात्रावास का संचालन नए भवन में किया जाएगा। वर्तमान में छात्रावास में 24 विद्यार्थी निवासरत हैं, जिन्हें पुराने भवन के सुरक्षित कमरों में व्यवस्था कर उनकी सुरक्षा तथा आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।सहायक आयुक्त श्री संजय चंदेल ने बताया कि नए भवन का निर्माण अंतिम चरण में है। कार्य में तेजी लाकर इसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। भवन पूर्ण होते ही विद्यार्थियों को नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जिससे उन्हें सुरक्षित, सुविधायुक्त एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि पूर्व में निर्माण कार्य मई-जून तक पूर्ण होने की संभावना को देखते हुए पुराने भवन में बड़े मरम्मत कार्य नहीं कराए गए थे। हालांकि निर्माण अवधि बढ़ने के बाद भी विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सुरक्षित कमरों में रखा गया है तथा नए भवन में शीघ्र स्थानांतरण की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रह रही है।नया छात्रावास शुरू होने के बाद विद्यार्थियों को बेहतर आवास, अध्ययन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। - -महिला एवं बाल विकास विभाग ने उद्योगों के साथ बनाई दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति-आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे" – प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार-आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, कुपोषण उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और नवाचार आधारित परियोजनाओं पर विस्तृत मंथनरायपुर / महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से राज्य में पोषण, बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से आज सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का समग्र विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा संचालित योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में उद्योगों की सामाजिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, महिला सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने उद्योगों से विभाग के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा, "आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे।"महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने कहा कि विभाग तीन प्रमुख आयामों—महिला सशक्तिकरण, बच्चों का संरक्षण तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण—पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, डिजिटल संसाधन, पोषण संवर्धन, स्वच्छ पेयजल, खेल सामग्री, स्वच्छता सुविधाएं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है।बैठक में विभाग द्वारा तैयार की गई संभावित सीएसआर परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन, पोषण वाटिका एवं मुनगा पौधारोपण, प्रारंभिक बाल विकास गतिविधियां, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।बैठक के दौरान उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग के प्रस्तावों में रुचि व्यक्त करते हुए विभिन्न योजनाओं में सहयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव साझा किए। यह निर्णय लिया गया कि विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी तथा चरणबद्ध तरीके से सीएसआर परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा।बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सीएसआर सहयोग केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देगा। विभाग इसके लिए उद्योगों के साथ नियमित संवाद, समन्वय एवं समीक्षा की प्रभावी व्यवस्था विकसित करेगा।उल्लेखनीय है कि सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 'पंखुड़ी' पोर्टल विकसित किया गया है। वहीं राज्य शासन द्वारा 'सर' (State CSR) पोर्टल का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विभागीय प्राथमिकताओं और सीएसआर परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
- गरियाबंद । छत्तीसगढ़ शासन की सेवा सेतु पहल ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक शासकीय सेवाओं की सहज, त्वरित और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित कर रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए लोगों को बार-बार शासकीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है।ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर श्री मिथलेश देवांगन ने बताया कि ग्राम मैनपुरकला निवासी नैन सिंह ने अपनी पुत्री तथा ग्राम नहानबिरी निवासी बोध सिंह ने अपने पुत्र के लिए सेवा सेतु केंद्र, तहसील मैनपुर में आय प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन किया था। दोनों आवेदकों को 24 घंटे के भीतर आय प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। आय प्रमाण-पत्र प्राप्त होने पर दोनों हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सेवा सेतु पोर्टल के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। उन्होंने शासन-प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अब सरल, सुगम और समयबद्ध हो गई है।
- -समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने और विभागवार मासिक कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देशरायपुर। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे सुधार कार्यों एवं उनके क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से विभागवार मासिक कार्ययोजना तैयार कर उसके अनुसार कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि योजना के तहत तय लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके।बैठक में राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के तहत जारी दिशा-निर्देशों एवं विभिन्न परिचालन गाइडलाइंस के अनुरूप विभागवार सुधार कार्यों की प्रगति, अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध लक्ष्य-पूर्ति तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।बैठक में वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर.शंगीता, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. सारांश मित्तर, वित्त विभाग के विशेष सचिव श्री चंदन कुमार, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल श्री विवेक आचार्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
- - चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास, फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करने पर हुई विस्तृत चर्चारायपुर। छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। रायपुर में आयोजित इस बैठक में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य से भारत भाग्य विधाता फिल्म के डायरेक्टर श्री मनोज तापड़िया तथा फिल्म निर्माता श्री आदि शर्मा ने सौजन्य भेंट कर राज्य में विकसित की जा रही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की अवधारणा, उसकी संभावनाओं तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़ की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरें, जलप्रपात, वन क्षेत्र, जनजातीय संस्कृति तथा विविध प्राकृतिक लोकेशन राज्य को फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाते हैं। इन विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर राज्य को फिल्मांकन का आकर्षक गंतव्य बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।चर्चा के दौरान चित्रोत्पला फिल्म सिटी को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक ऐसे समग्र फिल्म परिसर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जहाँ फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध हों। साथ ही फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों का विस्तार करने तथा इस क्षेत्र में निजी और संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से मंथन हुआ।प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने कहा कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी का विकास छत्तीसगढ़ के फिल्म और पर्यटन क्षेत्र के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। इससे राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, फिल्म निर्माण गतिविधियों को गति मिलेगी तथा स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, रचनात्मक युवाओं और फिल्म से जुड़े अन्य पेशेवरों के लिए रोजगार एवं कौशल विकास के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग के विकास से पर्यटन, आतिथ्य, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को भी व्यापक लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों, निर्माताओं और निर्देशकों के साथ निरंतर संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य की प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और विकसित की जा रही आधुनिक फिल्म अवसंरचना के समन्वय से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे। बैठक में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास, फिल्म पर्यटन के विस्तार तथा भविष्य में फिल्म निर्माण और पर्यटन संवर्धन के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर सहमति व्यक्त की गई।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधानों पर राज्यपाल से विचार-विमर्श किया। श्री डेका ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के सबंद्ध में अपने विचार साझा किए।इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई दुर्ग के कुलाधिपति श्री आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलाधिपति श्री सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, गरियाबंद और रायपुर के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति श्री अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय रायपुर के सीईओ श्री चिन्मय दावड़ा, कोलंबिया विश्वविद्यालय रायपुर के प्रो. कुलाधिपति श्री हरजीत सिंह हूरा उपस्थित थे।
- कांकेर । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने आज जिला एवं सत्र न्यायालय कांकेर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, परिवार न्यायालय, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, व्यवहार न्यायाधीश के न्यायालयों एवं सेंट्रल प्रोसेस अनुभाग, अभिलेखागार, सर्वर, लीगल एंड डिफेंस काउंसिल सिस्टम, मालखाना, लेखा अनुभाग, ग्रंथालय, डिजिटलीकरण एवं स्कैनिंग केंद्र, पीड़िता विश्राम कक्ष, किलकारी कक्ष सहित विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल रजिस्ट्री के अधिकारी एवं कर्मचारी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांकेर श्री संजीव कुमार टामक, श्री रमाशंकर प्रसाद न्यायाधीश परिवार न्यायालय, कलेक्टर कांकेर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश पखांजूर श्री विजय मिंज एवं प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश भानुप्रतापपुर श्री दीपक गुप्ता, प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांकेर श्रीमती विभा पांडेय, मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट श्री भास्कर मिश्र, सचिव जिला विधिक प्राधिकरण श्रीमती शांति प्रभु, सिविल जज सीनियर डिवीजन पखांजूर श्रीमती अंकिता तिग्गा, सिविल जज जुनियर डिवीजन पखांजूर श्री धु्रवराज ग्वाल, सिविल जज जुनियर डिवीजन श्री निखिल साहू, सुश्री आयुषी शुक्ला, श्री हिमांशु चंद्राकर, श्री मयंक धु्रव, एसपी श्री निखिल राखेचा सहित जिला न्यायालय कांकेर के समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश श्री सिन्हा द्वारा सभी न्यायालयों में व्यवस्था को बेहतर रूप में और अधिक व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण उपरांत माननीय न्यायमूर्ति श्री सिन्हा ने जिला न्यायालय कांकेर के कांफ्रेंस हॉल में न्यायिक अधिकारीगण एवं अधिवक्तागणों से चर्चा की एवं समस्त न्यायालयीन कर्मचारियों से भेंट की। मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा के जिला सत्र न्यायालय कांकेर पहुंचने पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री संजीव कुमार टामक एवं श्री रमाशंकर प्रसाद न्यायाधीश परिवार न्यायालय सहित न्यायालय के सभी न्यायाधीशों के द्वारा पुष्प गुच्छ भेंटकर आत्मीय स्वागत किया गया।‘एक पेड़ मां के नाम’ पौधरोपणछत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने न्यायालय परिसर कांकेर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ सागौन पौधा का रोपण भी किया।
- कांकेर । जिले में संचालित समस्त शासकीय तथा अशासकीय महाविद्यालयों, मेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी जो आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की पात्रता रखते हैं। उनके लिए शिक्षा सत्र 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 के बैंक खाता एवं आधार सीडिंग संबंधी संशोधन की कार्यवाही वेबसाइटhttps://postmatric-scholarship.cg.nic.in/ ऑनलाइन की जा रही है। ऑनलाइन वेबसाइट पर जिन विद्यार्थियों का बैंक खाता गलत है, उसमें सुधार कर सकते हैं तथा जिनके बैंक खाते से आधार सीडिंग नहीं हुई है, वे इसे भी पूर्ण करा सकते हैं। बैंक खाता संशोधन एवं आधार सीडिंग कराने की अंतिम तिथि 28 जुलाई निर्धारित की गई है। उक्त तिथि पश्चात इस संबंध में किसी प्रकार का अतिरिक्त अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा। निर्धारित तिथि पश्चात् ऑनलाइन संशोधन एवं आधार सीडिंग की प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद संबंधित दस्तावेज सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय कांकेर में जमा करना होगा।
- दुर्ग. राज्य शासन कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उद्यानिकी फसलों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ मौसम में फसल बीमा कराने हेतु 31 जुलाई 2026 तक समय सीमा तय किया गया है।उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे किसानों को विपरीत मौसम जैसे कम तापमान, अधिक तापमान, बीमारी अनुकूल मौसम, कीट व्याधियो का प्रकोप, लगातार अवर्षा की स्थिति निर्मित होना ओला वृष्टि आदि से होने वाले नुकसान से बचाने पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा लागू की गई है। खरीफ वर्ष 2026 में दुर्ग जिले अन्तर्गत बीमा कराने वाले कृषकों को अधिसूचित फसल के अनुसार निर्धारित कुल बीमित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत अथवा वास्तविक प्रीमियम जो भी कम हो राशि कृषक अंश के रूप में ऋणि एवं अऋणि दोनो प्रकार के कृषको को जमा करने होंगें। अऋणि कृषक फसल लगाने का स्वघोषित प्रमाण पत्र, नक्शा खसरा, आधार कार्ड अपने बैंक पासबुक की छाया प्रति जिसमें आईएफएससी कोड इत्यादि का उल्लेख हो, जमा कर बीमा करा सकते है।योजना के अंतर्गत ऋणी कृषकों के लिये विकल्प चयन के आधार पर क्रियान्वित होगी। ऋणी कृषक जो योजना में शामिल नही होना चाहते, उन्हें भारत सरकार द्वारा जारी चयन प्रपत्रानुसार हस्ताक्षरित घोषणा पत्र बीमा आवेदन की अंतिम तिथि के 07 दिवस पूर्व तक संबंधित वित्तीय संस्थान में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। निर्धारित समय-सीमा में हस्ताक्षरित घोषणा पत्र जमा नही करने पर संबंधित बैंक द्वारा संबंधित मौसम के लिये स्वीकृत/नवीनीकृत की गई अल्पकालीन कृषि ऋण को अनिवार्य रूप से बीमाकृत किया जाएगा। इस मामले में बैंक द्वारा किसी भी प्रकार की चूक/त्रुटि होने पर संबंधित बैंक किसानों के स्वीकार्य दावो के भुगतान करने के लिये उत्तरदायी होगा।मुख्य/मूल कवरेज अंतर्गत फसल टमाटर हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 1,20,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 6,000 रूपए। फसल बैंगन हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 77,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 3850 रूपए। फसल मिर्च हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 68,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 3400 रूपए। फसल अदरक हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 1,50,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 7500 रूपए। फसल केला हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 85,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,250 रूपए। फसल पपीता हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 87,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,350 रूपए। फसल अमरूद हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 45,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 2,250 रूपए निर्धारित है। अतिरिक्त/एड-ऑन-कवरेज अंतर्गत फसल मिर्च हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 22,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 1100 रूपए। फसल केला हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 80,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,000 रूपए। फसल पपीता हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 38,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 1900 रूपए निर्धारित है।इसके अलावा फसल केला के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 31 मई 2027, चक्रवाती हवाएं हेतु दिनांक 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027, फसल पपीता के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 30 अप्रैल 2027, चक्रवाति हवाएं हेतु दिनांक 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027, फसल मिर्च के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 जोखिम अवधि निर्धारित है।उद्यानिकी फसलों के बीमा हेतु इच्छुक कृषक च्वाइस सेंटर/ भारतीय कृषि बीमा कम्पनी के प्रतिनिधी/ लोक सेवा केन्द्र/ बैंक शाखा/ सहकारी समिति /ऑनलाइन पंजीयन/ विकासखंड में स्थापित विभागीय शासकीय उद्यान रोपणी विकासखंड दुर्ग (श्री रविश कुमार साहू, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी,मो. नं 9993146452), विकासखंड धमधा (श्री कमलेश सिन्हा, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी, मो. नं 9340113341) एवं वि.ख. पाटन (श्रीमती सुरभि श्रीवास्तव, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी, मो. नं 9011648203) में संपर्क कर सकते है।
- 0- 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर प्लांट ने दुर्ग के संतोष मेहता को बनाया ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरदुर्ग. प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम बनकर सामने आई है। योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र परिवार को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ते हुए बिजली बिल के बोझ को कम करना तथा अतिरिक्त बिजली उत्पादन के माध्यम से आय का अवसर उपलब्ध कराना है। दुर्ग शहर के गिरधारी नगर, वार्ड क्रमांक 9 की निवासी संतोष मेहता इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपने परिवार का बिजली खर्च लगभग समाप्त करने में सफल हुए हैं, बल्कि अब अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर आर्थिक लाभ की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।श्री संतोष मेहता बताते हैं कि कुछ समय पहले तक उनके परिवार को हर माह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से बिल भी अधिक आता था, जिससे घरेलू बजट प्रभावित होता था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना की पूरी प्रक्रिया समझी और अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कराया।उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से ₹78,000 तथा छत्तीसगढ़ शासन से ₹30,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई। कुल ₹1.08 लाख की सरकारी सहायता मिलने से सोलर प्लांट की स्थापना आसान और किफायती हो गई।सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद उनके घर की अधिकांश बिजली आवश्यकता सूर्य की ऊर्जा से पूरी होने लगी। अब उन्हें पहले की तरह हर महीने बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। इसके साथ ही सोलर प्लांट से घर की आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन भी हो रहा है। यह अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग प्रणाली के माध्यम से विद्युत वितरण कंपनी के ग्रिड में भेजी जा रही है। निर्धारित अवधि के बाद इस अतिरिक्त बिजली का आर्थिक लाभ भी उन्हें प्राप्त होगा।श्री मेहता का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने उनके परिवार को केवल बिजली बिल से राहत ही नहीं दी, बल्कि भविष्य के लिए बचत का एक नया माध्यम भी उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होती है। उन्होंने जिले के अन्य नागरिकों से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि जिनके घरों की छत उपलब्ध है, वे इस योजना का लाभ अवश्य लें। सरकार द्वारा दी जा रही आकर्षक सब्सिडी के कारण सोलर प्लांट लगाना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और किफायती हो गया है।प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना आज दुर्ग सहित पूरे देश में हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। दुर्ग के संतोष मेहता की सफलता इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं की सही जानकारी और उनका समय पर लाभ उठाकर आम नागरिक अपने जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
- 0- डॉ वर्णिका शर्मा के प्रयास से शिक्षा की मुख्यधारा से दोबारा जुड़े दो भाईरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में संचालित बाल चौपाल 2.0 अभियान केवल बच्चों की समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल भी कर रहा है। हाल ही में तिल्दा विकासखंड के ग्राम सिनोधा में आयोजित बाल चौपाल 2.0 के दौरान बच्चों ने खुलकर अपने विचार और समस्याएं साझा कीं। इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों को बाल श्रम, शिक्षा का अधिकार तथा बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। संवाद के दौरान बच्चों ने बताया कि उनका एक मित्र, जो अत्यंत मेधावी छात्र रहा है, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पिछले लगभग दो वर्षों से बाल श्रम करने को विवश है और इसी वजह से वह शिक्षा के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो गया है।बच्चों द्वारा दी गई जानकारी को गंभीरता से लेते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने बाल चौपाल के पश्चात संबंधित क्षेत्र का स्वयं भ्रमण किया तथा बालक एवं उसके परिजनों से मुलाकात कर उनकी परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की। आयोग द्वारा स्थानीय प्रशासन एवं ग्राम पंचायत के समन्वय से आवश्यक पहल की गई। आयोग की सक्रिय पहल एवं ग्राम पंचायत के सहयोग से संबंधित बालक तथा उसके बड़े भाई, जो अन्य स्थान पर कार्यरत थे, दोनों का पुनः विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। वर्तमान में दोनों बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जाकर अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल चौपाल 2.0 का उद्देश्य केवल बच्चों की समस्याओं को सुनना नहीं, बल्कि उनके समाधान तक पहुंचना है। आयोग 'समस्या से संवाद, संवाद से समाधान' की कार्यसंस्कृति पर कार्य करते हुए प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह अभियान केवल संकल्प का नहीं, बल्कि सिद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का अभियान बन चुका है, जिसके माध्यम से बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी बच्चे के बाल श्रम, शिक्षा से वंचित होने अथवा बाल अधिकारों के उल्लंघन की जानकारी मिले, तो तत्काल इसकी सूचना संबंधित प्रशासन अथवा आयोग को दें, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित भविष्य प्रदान किया जा सके।
- 0- तालाबों की धरती पर खुलेगी समृद्धि की नई राह, किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का बन सकता है बड़ा माध्यमरायपुर. छत्तीसगढ़ को वर्षों से "धान का कटोरा" कहा जाता है, लेकिन अब यह राज्य मखाना उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बनाने की क्षमता रखता है। प्रदेश में हजारों तालाब, सिंचाई जलाशय, अनुकूल जलवायु और मेहनतकश मछुआरा समुदाय मखाना खेती के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मखाना उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।मखाना आज केवल एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि देश-विदेश में लोकप्रिय "सुपरफूड" बन चुका है। उच्च पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और बढ़ती बाजार मांग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 में मखाना विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना शुरू की है, जिसमें छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया है।छत्तीसगढ़ के लिए क्यों है सुनहरा अवसर?प्रदेश के अधिकांश जिलों में बड़े और छोटे तालाबों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। इनमें से अनेक जलाशयों का अभी भी पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए, तो एक ही जलाशय से दोहरी आय प्राप्त की जा सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की कन्हार मिट्टी, पर्याप्त जल उपलब्धता और जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाकर यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव है।मखाना मिशन से बदल सकती है तस्वीरकेंद्र सरकार की मखाना विकास योजना के प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, मखाना क्षेत्र का विस्तार, किसानों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, वैज्ञानिक खेती तकनीकों का प्रसार, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा, निर्यात को प्रोत्साहन तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना है।यदि इन उद्देश्यों के अनुरूप प्रदेश में कार्य किया जाए, तो मखाना खेती किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और मछुआरा सहकारी समितियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खोल सकती है।नवाचार से मिली नई दिशाछत्तीसगढ़ में मखाना खेती को बढ़ावा देने में कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रदेश की परिस्थितियां मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। उनके तकनीकी मार्गदर्शन में बालोद जिले में सफल मखाना खेती का प्रयोग किया गया है।केवल खेती ही नहीं, बल्कि लगभग 1.35 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला मखाना प्रोसेसिंग सेंटर भी स्थापित किया गया, जिससे उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं। "दाऊजी मखाना" ब्रांड ने भी बाजार में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है।मछली और मखाना: दोहरी कमाई का मॉडलफिश-कम-मखाना फार्मिंग मॉडल छत्तीसगढ़ के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन करने से एक ही जलाशय से दोहरी आय, मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव, महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योग विकसित हो सकेंगे।महिला समूहों के लिए रोजगार के अवसरमखाना खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके साथ जुड़े कई कार्य रोजगार सृजन के बड़े माध्यम बन सकते हैं, जैसे बीज प्रसंस्करण, मखाना भूनना और फोड़ना, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंगमूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माणमखाना आधारित लघु उद्योग स्थापित कर स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में एक समर्पित "छत्तीसगढ़ मखाना मिशन" शुरू किया जाना चाहिए। इसके तहत कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सिंचाई और पंचायत विभागों को मिलकर कार्य करना होगा। साथ ही किसानों, युवाओं, महिला समूहों और मछुआरा समितियों को प्राथमिकता देकर उन्हें प्रशिक्षण, अनुदान और बाजार से जोड़ना होगा।छत्तीसगढ़ के पास वह सब कुछ है, जो मखाना उत्पादन के लिए आवश्यक है जल, भूमि, श्रमशक्ति और संभावनाएं। यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम करें, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल "धान का कटोरा" ही नहीं, बल्कि "देश का उभरता हुआ मखाना राज्य" भी कहलाएगा।मखाना खेती किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण, मछुआरा समुदाय के आर्थिक उत्थान और ग्रामीण उद्योगों के विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। अब आवश्यकता है दूरदर्शी सोच और ठोस पहल की।
- 0- भू-अर्जन, किसान पंजीयन एवं स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा0- बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुल-पुलियों का सर्वे कर कार्ययोजना बनाने के निर्देशबिलासपुर. कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आज जिला कार्यालय के मंथन सभा कक्ष में आयोजित राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के विभिन्न प्रकरणों एवं शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने राजस्व अधिकारियों को सभी लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि राजस्व सेवाओं का लाभ आम नागरिकों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए। बैठक में नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे एवं एडीएम श्री शिवकुमार बनर्जी मौजूद थे।बैठक में कलेक्टर ने राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल परियोजनाओं, आपसी सहमति से भूमि क्रय एवं भू-अर्जन अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि भू-अर्जन से जुड़े सभी मामलों का समय पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा विधिवत भू-अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए। निर्माण एजेंसियों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों एवं पुल-पुलियों का सर्वे कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त संरचनाओं के सुधार एवं पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि किसानों का पंजीयन एक जुलाई से प्रारंभ हो चुका है तथा एग्रीस्टैक के माध्यम से पंजीयन किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए आरईओ एवं तहसीलदारों को समन्वय बनाकर पंजीयन कार्य में गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के पंजीयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। एफआरए (वनाधिकार) पट्टों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने पात्र हितग्राहियों को शीघ्र पट्टों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं स्वामित्व योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि यह शासन की प्राथमिकता वाली योजना है, इसलिए इसके सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं।बैठक में कलेक्टर ने नक्शा बंटांकन, आधार सीडिंग, डिजिटल हस्ताक्षरित खसरा, अभिलेख शुद्धता, अविवादित एवं विवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित अन्य राजस्व प्रकरणों की भी समीक्षा की तथा सभी मामलों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), निर्माण एजेंसी के अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।


























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