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- -मुख्यधारा में लौटे 113 युवाओं के जीवन में आया नया सवेरा, 5G कनेक्टिविटी और खेलों से संवर रहा भविष्यरायपुर / नक्सलवाद के दंश को पीछे छोड़ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब बदलाव की एक नई और बेहद खूबसूरत इबारत लिख रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवाओं (42 महिलाएं और 71 पुरुष) के जीवन में वास्तव में नया सवेरा आ चुका है। कभी जंगलों में भटकने और हाथों में घातक हथियार थामने वाले ये युवा अब न सिर्फ समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, बल्कि पुनर्वास केंद्र के परिसर में पहली बार इनके द्वारा लगाए गए भारत माता की जय के नारे सुकमा के बदलते और सुरक्षित होते भविष्य की गवाही दे रहे हैं। पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासित, सुरक्षित और रचनात्मक हो चुकी है। सुबह उठकर बागवानी (गार्डनिंग) और साफ-सफाई करने के बाद सभी युवा मिल-जुलकर नाश्ता और भोजन तैयार करते हैं। प्रशासन ने इनके बौद्धिक विकास के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है, जो इन्हें प्रतिदिन सुबह-शाम अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी सिखाते हैं। समाज का वैध और सम्मानित हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन कलेक्ट्रेट के सिंगल विंडो रूम के माध्यम से इन सभी के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज प्राथमिकता से बनाया जा रहा है। इसके साथ ही इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) भी दी जा रही है। प्रशासन की इस मानवीय पहल का सबसे खूबसूरत रंग खेल और मनोरंजन के मैदान में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा के अनुरूप, जब इन पूर्व नक्सलियों से उनके मनोरंजन और खेल की पसंद पूछी गई, तो सबसे ज्यादा रुझान वॉलीबॉल के प्रति दिखा। इसके बाद प्रशासन ने केंद्र में खेल प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें युवक-युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कभी अत्याधुनिक हथियार संभालने वाले इन हाथों में जब वॉलीबॉल आई, तो मैदान पर उनकी खेल प्रतिभा और किक देखकर हर कोई हैरान रह गया। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाकर बेहद खुश और उत्साहित हैं।दिनभर की रचनात्मक गतिविधियों और खेल के बाद शाम को सभी युवा संगीत कक्ष में सुर-ताल मिलाते हैं, जिससे उनका भरपूर मनोरंजन होता है। वर्तमान डिजिटल युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए जिला प्रशासन ने इन युवाओं को 5G स्मार्टफोन भी उपलब्ध कराए हैं। इस आधुनिक तकनीक के जरिए देश-दुनिया की खबरों से कटे रहने वाले ये युवा अब समकालीन समाज और नई जानकारियों से सीधे जुड़ पा रहे हैं।सुकमा जिला पुनर्वास केंद्र का यह मानवीय और विकासात्मक मॉडल साबित करता है कि यदि सही दिशा, उचित संसाधन और संवेदनशीलता मिले, तो मुख्यधारा से भटके हुए युवाओं को भी परिष्कृत कर देश की प्रगति का मजबूत स्तंभ बनाया जा सकता है।
- -कलेक्टर रोज कर रहे समीक्षा, 114 सहकारी समितियों सहित निजी दुकानों से हो रहा खाद का उठावरायपुर / खरीफ सीजन 2026 के मद्देनजर बिलासपुर जिले में किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा प्रतिदिन खाद-बीज की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण की समीक्षा की जा रही है। जिले की 114 सहकारी समितियों तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और मांग के अनुरूप निरंतर वितरण किया जा रहा है।उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार खरीफ 2026 के लिए जिले को 68,950 टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके विरुद्ध अब तक 46,780 टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 60.28 प्रतिशत है। वहीं किसानों को अब तक 19,912 टन से अधिक उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।जिले में वर्तमान में कुल 41,560 टन उर्वरक का भंडार उपलब्ध है। इनमें यूरिया 22,996 टन, डीएपी 5,621 टन, एनपीके 6,808 टन, एसएसपी 4,981 टन तथा एमओपी 1,155 टन शामिल है। कृषि विभाग द्वारा लगातार उर्वरक कंपनियों से अतिरिक्त रैक प्राप्त कर भंडारण बढ़ाया जा रहा है ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।कृषि विभाग के अधिकारियों को समितियों एवं निजी विक्रेताओं के यहां नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित वितरण पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराया जाए तथा मांग और आपूर्ति की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अधिकृत सहकारी समितियों एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी तत्काल कृषि विभाग को दें। जिले में खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता होने से खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।
- -करूहानार के चुन्नूलाल साहू को बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में मिल रही मददरायपुर // प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुरूप किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मुंगेली जिले के किसानों के लिए सहारा बन रही है। जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से हजारों किसान लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को खेती-किसानी में बड़ी राहत प्रदान कर रही है। लोरमी विकासखंड के ग्राम करूहानार निवासी किसान चुन्नूलाल साहू ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सराहना करते हुए कहा कि योजना के तहत प्रतिवर्ष मिलने वाली 06 हजार रुपये की सहायता राशि खेती-किसानी के कार्यों में काफी उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि इस राशि से बीज, खाद एवं कृषि कार्यों में जरूरी खर्च आसानी से पूरे हो जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम हुआ है।किसान श्री साहू ने बताया कि उन्हें अब तक योजना की 22 किश्तों का लाभ प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही यह योजना किसानों के लिए संबल बन गई है। समय पर मिलने वाली राशि से खेती की तैयारी में सुविधा होती है और कृषि कार्यों में आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
- गौरेला पेंड्रा मरवाही। सुशासन तिहार के दौरान आयोजित हो रहे शिविरों के माध्यम से आम नागरिकों को त्वरित और सहज प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। पेंड्रा स्थित असेम्बली हॉल में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में मात्र 20 दिन के नवजात शिशु रुद्र कुमार गुप्ता को निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र एवं अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए। रुद्र कुमार गुप्ता के पिता आश्रित कुमार गुप्ता ने अपने नवजात पुत्र के आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए शिविर में आवेदन किया था। राजस्व विभाग ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए। इन दस्तावेजों को नवजात के माता-पिता को सौंपा गया। इन प्रमाण पत्रों के प्राप्त होने से भविष्य में रुद्र कुमार गुप्ता को विभिन्न शासकीय योजनाओं, छात्रवृत्तियों तथा अन्य आवश्यक सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी। परिवार को अब अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी और उन्हें एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सेवाएं मिल गईं।रुद्र कुमार गुप्ता के माता-पिता ने राजस्व विभाग और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के कारण उन्हें समय पर महत्वपूर्ण दस्तावेज प्राप्त हुए, जिससे उनकी चिंताएं दूर हो गईं। यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि सुशासन तिहार केवल योजनाओं का प्रचार-प्रसार नहीं, बल्कि आम नागरिकों तक शासन की सेवाओं को सरल, सुलभ और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। राजस्व विभाग की इस विशेष पहल ने नवजात शिशु के परिवार को समय पर राहत और सुविधा प्रदान कर सुशासन की भावना को सार्थक किया है।
- -रायगढ़ के सेठ किरोड़ीमल गौशाला पहुंचे वित्त मंत्री, कहा-गौवंश की सुरक्षा हमारी सांस्कृतिक व सामाजिक जिम्मेदारीरायपुर / जन्मदिवस के विशेष अवसर पर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ स्थित ऐतिहासिक सेठ किरोड़ीमल गौशाला पहुंचकर गौ-माता की सेवा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने गौशाला परिसर का भ्रमण कर वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया और गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की भूरि-भूरि सराहना की। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि गौ-माता की सेवा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अमूल्य प्रतीक है। अपने जन्मदिवस के अवसर पर गौ-माता की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत सुखद, संतोषजनक और प्रेरणादायी अनुभव है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि गौ-संरक्षण और संवर्धन के लिए इस गौशाला द्वारा किया जा रहा कार्य पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। गौवंश की सुरक्षा और उनकी उचित देखभाल करना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।श्री चौधरी ने निस्वार्थ भाव से जुटे गौशाला के संचालकों और सेवाभावी कार्यकर्ताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन कार्यकर्ताओं के समर्पण, कड़ी मेहनत और अटूट प्रयासों के कारण ही क्षेत्र में गौ-संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय और सकारात्मक कार्य हो रहे हैं। कार्यक्रम के समापन पर वित्त मंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हुए सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। इस गरिमामय अवसर पर गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
- -सरकारी, NGO और निजी संस्थानों की साझेदारी से 91% लक्ष्य हासिल, 15 जिले बने कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्रीरायपुर । छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है।स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है।कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है। प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।
- रायपुर /वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी अपने जन्मदिवस के अवसर पर रायगढ़ के महापल्ली में आयोजित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जन्मदिवस के इस विशेष अवसर पर प्रभु श्रीराम एवं संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने प्रदेश के विकास, जनकल्याण और सभी नागरिकों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की।श्री चौधरी ने जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं देने वाले सभी नागरिकों, समर्थकों, शुभचिंतकों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी का स्नेह, प्रेम और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
- -प्रगतिशील किसान शंकर लाल गुप्ता बने रोल मॉडल, कम लागत में बेहतर उत्पादन का दिया संदेशअम्बिकापुर। जिले में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। खेती की लागत कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने तथा उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से किसान अब वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। इसी क्रम में अंबिकापुर के देवीगंज रोड निवासी एवं ग्राम बरकेला के प्रगतिशील किसान श्री शंकर लाल गुप्ता ने पिछले वर्ष अपने कृषि रकबे में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का सफल प्रयोग कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।श्री गुप्ता ने बताया कि वे वर्षों से पारंपरिक दानेदार यूरिया एवं डीएपी का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन पिछले वर्ष कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से धान की फसल अधिक स्वस्थ, हरी-भरी तथा सुदृढ़ दिखाई दे रही है। फसल की वृद्धि बेहतर होने के साथ-साथ उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से परिवहन एवं भंडारण संबंधी समस्याओं में कमी आई है। पहले 65 एकड़ क्षेत्र के लिए बड़ी मात्रा में खाद की बोरियों को ट्रैक्टरों से लाना पड़ता था, जिससे परिवहन, मजदूरी एवं भंडारण पर अतिरिक्त खर्च होता था। इसके विपरीत नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की छोटी बोतलें आसानी से खेत तक पहुंचाई जा सकती हैं, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है।श्री गुप्ता के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत में भी कमी आई है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी किफायती हैं, जिसके कारण उर्वरक पर होने वाला खर्च कम हुआ है तथा प्रति एकड़ शुद्ध लाभ बढ़ने की संभावना बढ़ी हुई है।उन्होंने बताया कि पारंपरिक उर्वरकों का एक बड़ा हिस्सा बहाव अथवा अन्य कारणों से नष्ट हो जाता है, जबकि नैनो उर्वरकों का फसलों पर सीधे छिड़काव किया जाता है। इससे पौधों की पत्तियां पोषक तत्वों को शीघ्र अवशोषित कर लेती हैं और उर्वरक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। परिणामस्वरूप फसल को सीधे लाभ मिलता है तथा पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है।नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणामों से उत्साहित श्री शंकर लाल गुप्ता ने क्षेत्र के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग न केवल किफायती है, बल्कि इसके परिवहन, भंडारण एवं उपयोग में भी सुविधा है। इससे खेती की लागत कम होती है और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है।नैनो उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। यह तकनीक उर्वरकों के अधिक दक्ष उपयोग को सुनिश्चित करती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक है। श्री शंकर लाल गुप्ता के सफल अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जिले के अधिक से अधिक किसान आधुनिक एवं स्मार्ट कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
- -मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को वितरित किए विभिन्न योजनाओं के लाभ: ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद-सुशासन का संदेश लेकर गांव-गांव पहुंच रही सरकार, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने स्वयं पहुंचे मुख्यमंत्रीरायपुर /प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
- -नैनो तकनीक से शैलेंद्र ने पकड़ी आधुनिक खेती की राह, बने मिसालरायपुर / पारंपरिक खेती के पुराने ढर्रे को छोड़कर जब कोई किसान आधुनिक तकनीकों का हाथ थामता है, तो वह न सिर्फ अपनी तकदीर बदलता है बल्कि पूरे अंचल के लिए प्रेरणा बन जाता है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम लटुवा के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे आज क्षेत्र में ऐसी ही एक अभिनव मिसाल बनकर उभरे हैं। पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरक (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) का लगातार उपयोग कर वे उन्नत और स्मार्ट खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। कृषक शैलेंद्र कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेती में लगातार बढ़ती लागत और पारंपरिक बोरी वाले खादों को दुकान से खेत तक लाने (परिवहन) तथा उनके छिड़काव में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों ने उन्हें कुछ नया सोचने पर मजबूर किया था। कृषि विभाग की सलाह पर जब उन्होंने नैनो तकनीक को अपनाया, तो इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले और संतोषजनक रहे। शैलेंद्र बताते हैं कि नैनो उर्वरक बाजार में पारंपरिक खाद की तुलना में बेहद कम दाम पर और आसानी से उपलब्ध हो जाता है, जिससे खेती के शुरुआती खर्च में ही बड़ी बचत हो जाती है।शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जहाँ पहले भारी-भरकम बोरियों को ढोने और संभालने में किसानों का पसीना छूट जाता था, वहीं अब महज आधे लीटर की छोटी बोतलें आसानी से जेब या थैले में रखकर खेत तक ले जाई जा सकती हैं। पानी में घोलकर फसलों पर सीधे छिड़काव करने से पौधों को पोषक तत्व सीधे और सही मात्रा में मिलते हैं, जिससे खाद की बर्बादी नहीं होती। इस तकनीक के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार आया है और प्रति एकड़ पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अपनी इस शानदार सफलता से उत्साहित होकर शैलेंद्र ने इस वर्ष भी अपनी फसलों में पूरी तरह से केवल नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का ही उपयोग करने का निर्णय लिया है। लटुवा के इस जागरूक किसान की यह अनूठी पहल आज पूरे बलौदाबाजार जिले के किसानों को आधुनिक, कम लागत वाली और आत्मनिर्भर खेती की एक नई राह दिखा रही है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग भी शैलेंद्र की इस सफलता को रोल मॉडल के रूप में पेश कर अन्य ग्रामीण किसानों को नैनो तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।
- -समूह से मिली आर्थिक सहायता और मेहनत ने दिलाई नई पहचान-व्यवसाय से बढ़ी आय, अब दूसरी महिलाओं को कर रही प्रेरितकवर्धा ।महिलाएं यदि ठान लें तो अपनी मेहनत से जीवन की दिशा बदल सकती हैं। कभी परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करने वाली रानी यादव आज अपने गांव में आत्मनिर्भर महिला के रूप में पहचान बना चुकी हैं। स्व-सहायता समूह से मिली मदद और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया, जिससे उनकी आय में कई गुना बढ़ोतरी हुई। अब वे दूसरी महिलाओं को भी रोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत राम्हेपुर की रहने वाली श्रीमती रानी यादव जय मां शारदा स्व-सहायता समूह की सचिव हैं। समूह से जुड़ने से पहले रानी यादव का जीवन काफी कठिनाइयों भरा था। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें मजदूरी और खेती पर निर्भर रहना पड़ता था। खेती और मजदूरी से सालाना आय लगभग 35 हजार रुपये ही थी, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था। इसी दौरान रानी यादव जय मां शारदा स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की बैठकों और प्रशिक्षण के दौरान उन्हें स्वरोजगार और बचत के बारे में जानकारी मिली। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई। रानी यादव को चक्रीय निधि से 5 हजार रुपये, सीआईएफ से 60 हजार रुपये और बैंक ऋण से 1 लाख रुपये की सहायता मिली।मिली हुई राशि से रानी यादव ने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने छोटे स्तर पर काम शुरू किया, लेकिन मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उनका व्यवसाय बढ़ने लगा। आज रानी यादव की आय पहले से कई गुना बढ़ चुकी है। खेती से लगभग 30 हजार रुपये, मुर्गी पालन व्यवसाय से करीब 1 लाख 60 हजार रुपये और मजदूरी से लगभग 20 हजार रुपये की आय हो रही है। इस तरह अब उनके परिवार की कुल वार्षिक आय लगभग 2 लाख 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है। रानी यादव बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब वे आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे गांव की दूसरी महिलाओं को भी समूह से जुड़कर अपना रोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
- -पदमनी और मधु को मिला नया आत्मविश्वास, नई ताकतमहासमुन्द । पदमनी और मधु को मिला नया आत्मविश्वास, नई ताकतमां बनना हर महिला के जीवन का सबसे सुखद अनुभव होता है, लेकिन इस दौरान स्वास्थ्य और आर्थिक जरूरतों की चुनौतियां भी सामने आती हैं। महासमुन्द शहरी परियोजना क्षेत्र अंतर्गत श्रीमती पदमनी यादव और श्रीमती मधु यादव के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ऐसे समय में सहारा बनकर आई। योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से उन्हें गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य जांच एवं बच्चों की देखभाल में मदद मिली।महासमुन्द नगर के वार्ड 11 की रहने वाली श्रीमती पदमनी यादव ने बताया कि वे जब गर्भावस्था में थी तो उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं महिला बाल विकास विभाग की सेक्टर सुपरवाईजर शीला प्रधान ने उन्हें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के बारे जानकरी दी। आवश्यक पंजीयन के पश्चात उनकी पहली बेटी के जन्म के बाद उन्हें इस योजना की राशि 5 हजार रुपए मिली। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने बच्चे के पोषण और उनकी अच्छी देखभाल के लिए उपयोग किया।इसी तरह वार्ड 11 की ही श्रीमती मधु यादव को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का डबल फायदा मिला। पहले बच्चे के जन्म के समय 5 हजार और फिर बेटी के जन्म के बाद उन्हें 6 हजार की राशि योजना के माध्यम से प्रदान की गई। उनका कहना है कि इस सहायता ने मातृत्व की जिम्मेदारियों को निभाने में उन्हें आत्मविश्वास और संबल प्रदान किया।श्रीमती पदमनी यादव और श्रीमती मधु यादव दोनों ही अपने बच्चों का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर रही हैं और इसके लिए प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना को एक महत्वपूर्ण सहयोग मानती हैं। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।महासमुंद शहरी क्षेत्र में 321 हितग्राहियों को इसका लाभ मिल चुका है, जबकि जिले में अब तक कुल मिलाकर 27 हजार महिलाओं को लाभान्वित किया जा चुका है।
- -100 से अधिक नामांकनों में देश की चुनिंदा 9 संस्थाओं में बनाया स्थान, छत्तीसगढ़ को मिला राष्ट्रीय गौरवरायपुर । पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण, जैविक कृषि, वृक्षारोपण, नशामुक्ति जागरूकता एवं जनसहभागिता आधारित पर्यावरणीय अभियानों में उत्कृष्ट एवं नवाचारपूर्ण कार्यों के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अधीनस्थ लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर को कल देहरादून में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित “पर्यावरण चैंपियन अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित नमामि गंगे परियोजना तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया गया। देशभर से प्राप्त 100 से अधिक नामांकनों में से कठोर मूल्यांकन एवं बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के पश्चात केवल 9 संस्थाओं को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया, जिनमें एक विश्वविद्यालय, पांच विद्यालय एवं तीन महाविद्यालय शामिल थे।सम्मानित संस्थाओं में बिहार, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि शामिल थे। चयनित संस्थाओं में उत्तराखंड का सुप्रसिद्ध सामुदायिक रेडियो “रेडियो केदार” भी सम्मिलित रहा। ऐसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिस्पर्धी मंच पर नारायणपुर महाविद्यालय का चयन संस्था के उत्कृष्ट पर्यावरणीय कार्यों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। समारोह के दौरान सभी चयनित प्रतिभागियों एवं संस्थाओं द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, वृक्षारोपण एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में किए गए कार्यों की वीडियो प्रस्तुति प्रदर्शित की गई। लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय, नारायणपुर द्वारा प्रस्तुत गतिविधियों एवं उपलब्धियों को उपस्थित विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों एवं प्रतिभागियों द्वारा विशेष सराहना प्राप्त हुई।लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय को यह सम्मान ट्रॉफी एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर दिया गया। यह सम्मान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री श्री कल्याण सिंह रावत, प्रख्यात पर्यावरणविद्, मैती आंदोलन के प्रणेता एवं जल-जंगल-जमीन संरक्षण के राष्ट्रीय प्रेरणास्रोत, तथा विशिष्ट अतिथि पद्मश्री श्रीमती मधुरी बर्थवाल, सुप्रसिद्ध लोकगायिका, लोकसंस्कृति संवाहक एवं उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत की सशक्त प्रतिनिधि के करकमलों से प्रदान किया गया। कार्यक्रम में डॉ. रुचि बडोला, डीन, फैकल्टी ऑफ वाइल्डलाइफ साइंसेज एवं नोडल अधिकारी परियोजना की गरिमामयी उपस्थिति रही।उल्लेखनीय है कि लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर द्वारा विगत वर्षों में जैविक खेती को बढ़ावा देने, व्यापक वृक्षारोपण अभियान, जल संरक्षण गतिविधियों, नशामुक्ति जनजागरूकता कार्यक्रमों, किसानों एवं विद्यार्थियों के प्रशिक्षण तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं। इन्हीं सतत, प्रभावशाली एवं समाजोपयोगी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देते हुए संस्थान को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया। यह उपलब्धि केवल महाविद्यालय की नहीं, बल्कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिवार, बस्तर संभाग एवं संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गौरव का विषय है। राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि दूरस्थ अंचलों में भी समर्पण, नवाचार और जनसहभागिता के माध्यम से किए गए कार्य देशभर के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। “जब शिक्षा, समाज और प्रकृति संरक्षण का संकल्प एक साथ आगे बढ़ता है, तब परिवर्तन की नई इबारत लिखी जाती है। ‘पर्यावरण चैंपियन अवार्ड 2026’ नारायणपुर की धरती से उठी उसी सकारात्मक पहल को मिला राष्ट्रीय सम्मान है।
- -’मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा - दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता’-’बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर बना आधुनिक बेली ब्रिजरू कनेक्टिविटी और विकास को मिली नई गति’रायपुर ।जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं, वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।’कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक’भारतीय सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।’बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक’उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।’बदलते बस्तर की नई पहचान’मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है। यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
- -निगम की संयुक्त टीम ने की बड़ी कार्रवाईभिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा शहर को व्यवस्थित, सुगम एवं यातायात बाधा मुक्त बनाने के उद्देश्य से लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार जोन-1 नेहरू नगर क्षेत्र अंतर्गत चौहान टाउन से शासकीय शाला जुनवानी चौक तक विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस दौरान अवैध रूप से संचालित दुकानों, सड़क किनारे किए गए अस्थायी कब्जों तथा यातायात में बाधा उत्पन्न करने वाले खड़े वाहनों को हटाया गया।कार्रवाई के दौरान जोन राजस्व विभाग, बेदखली दस्ता एवं पुलिस बल की संयुक्त टीम ने पूरे मार्ग का निरीक्षण कर सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए अतिक्रमण को हटाया। टीम ने सड़क किनारे अवैध रूप से लगाए गए टीन-शेड, गुमटी, दुकान विस्तार एवं अन्य अस्थायी संरचनाओं को हटाते हुए संबंधित लोगों को भविष्य में दोबारा अतिक्रमण नहीं करने की चेतावनी भी दी। निगम अधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों का सामान सड़क तक फैलाकर रखा गया था, जिससे आम नागरिकों एवं वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी हो रही थी। वहीं सड़क किनारे लंबे समय से खड़े वाहनों के कारण भी यातायात प्रभावित हो रहा था। अभियान के दौरान ऐसे वाहनों को हटवाकर मार्ग को सुचारू बनाया गया।निगम आयुक्त ने कहा है कि सार्वजनिक सड़कों, नालियों, फुटपाथों एवं शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहर की यातायात व्यवस्था, स्वच्छता एवं नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने नागरिकों और व्यापारियों से अपील की है कि वे स्वयं आगे आकर अतिक्रमण हटाएं तथा सार्वजनिक स्थलों को अवैध कब्जे से मुक्त रखने में निगम प्रशासन का सहयोग करें। इस कार्रवाई से क्षेत्र में सड़क चौड़ी एवं व्यवस्थित दिखाई देने लगी हैए वहीं आम नागरिकों ने भी निगम की इस पहल का स्वागत करते हुए नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाने की मांग की है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
- - छत्रपति शिवाजी सभागृह में हुई सभासदों ने नशा न करने, लोगों को जागरूक करने की ली शपथरायपुर। अंतरराष्ट्रीय धुम्रपान दिवस पर अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में नशामुक्ति को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर नशे से होने वाले स्वास्थ्गत नुकसान पर चर्चा करने के साथ इसे रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने की बात सभी वक्ताओं ने कही। वहीं इस अवसर पर उपस्थित जनों ने खुद नशा न करने और लोगों को नशा न करने देने के लिए जागरूक करने की शपथ ली।महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुदानित सियान गुड़ी, दिव्यांग बालिका विकास गृह में शासन की ओर से जारी पत्र के परिप्रेक्ष्य में नशा मुक्ति कार्यशाला लगाई गई। इस अवसर पर अजय मधुकर काले ने नशे को उत्तम समाज का सबसे बड़ा शत्रु बताते हुए कहा कि आए दिन अखबारों में नशे के बढ़ते कारोबार और उससे नुकसान को हम पढ़ते है। न जाने कितने घर आज इसके कारण बर्बाद हो रहे हैं। हमें इसे लेकर लोगों को जागरूक करना होगा।श्याम सुंदर खंगन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि राजधानी रायपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में डेंटल क्लीनिक और कैंसर हास्पिटल खुल रहे हैं। कहीं न कहीं इसका कारण गुटखा खाने वालों की बढ़ती संख्या है। खंगन ने उपस्थित जनों को नशा न करने औऱ लोगों को नशे से बचने के लिए जागरूक करने की शपथ दिलाई। इस मौके पर उपाध्यक्ष गीता दलाल, सचिव चेतन गोविंद दंडवते सहित तमाम कार्यकारिणी सदस्य, विभिन्न समितियों के पदाधिकारी व सदस्य सहित बड़ी संख्या में सभासद उपस्थित रहे।
- ग्रामीणों को मिल रहा है समुचित मात्रा में शुद्ध पेयजल एवं निस्तारी हेतु पर्याप्त पानीबालोद/ विकासखण्ड डौंडी के ग्राम पंचायत सिंघोला के अंतर्गत आने वाले आश्रित ग्राम सुकड़ीगुहान में ग्रामीणों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन और पंचायत द्वारा लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। लगभग 70 परिवारों की 250 की आबादी वाले इस क्षेत्र में पीने के पानी की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया की ग्रामीणों को पानी के लिए किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए गांव में एक अत्याधुनिक सोलर पैनल आधारित पेयजल प्रणाली संचालित की जा रही है। इसके साथ ही एक बड़ी सिन्टेक्स टंकी और एक आईआरपी भी क्रियाशील है. पंचायत द्वारा क्षेत्र में अतिरिक्त व्यवस्था के तौर पर दो अन्य बोरवेल में मोटर पंप स्थापित किए गए हैं, जिससे सुचारू रूप से पानी की आपूर्ति हो रही है. अधिकारियों और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में गांव में पेयजल के पर्याप्त स्रोत पाए गए है। उन्होंने बताया कि पेयजल स्रोतों के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रशासन अब नलों में नई टोंटियाँ (टैप) लगाने की तैयारी कर रहा है,जिससे पानी की हर बूंद का सही उपयोग हो सके और बर्बादी को रोका जा सके। इसके साथ ही, ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों और निस्तारी कार्यों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा एक नए स्टॉपडैम का निर्माण कराया जा रहा है। जिसका कार्य वर्तमान में तेजी से प्रगति पर है। क्षेत्र के विकास और पानी की उपलब्धता की निगरानी के लिए स्थानीय सरपंच श्रीमती कौशिल्या बाई ठाकुर ग्रामीणों के साथ सतत संपर्क में हैं। पंचायत स्तर पर भविष्य की किसी भी विशेष या आकस्मिक जरूरत से निपटने के लिए एक पानी का टैंकर भी सिंघोला मुख्यालय में आरक्षित रखा गया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुकड़ीगुहान भेजा जा सकता है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के आपसी समन्वय से गांव में बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत किया जा रहा है।
- परंपरा और तकनीक का संगम23 एकड़ में विविध खेती, ड्रिप सिंचाई और जी-9 केले की उन्नत खेती से लिखी सफलता की नई कहानी-कृषि छात्र संजना धीरज की रिपोर्टबिलासपुर/ जिले के मोपका ग्राम के किसान श्री भरत क्षेत्रपाल आज उन प्रगतिशील किसानों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपने अनुभव, नवाचार और मेहनत के बल पर खेती को लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय का स्वरूप दिया है। लगभग 30 से 35 वर्षों के कृषि अनुभव के साथ उन्होंने अपनी 23 एकड़ भूमि को विविधतापूर्ण और आधुनिक कृषि का सफल मॉडल बना दिया है।खेती के प्रति समर्पण और दूरदर्शिता ने उन्हें क्षेत्र के किसानों के बीच एक अलग पहचान दिलाई है। वर्षों से खेती करते हुए उन्होंने विभिन्न फसलों के उत्पादन में दक्षता हासिल की है। अरबी (जिमीकंद) और हल्दी उनकी प्रमुख फसलें हैं, जिनकी खेती में उन्हें विशेष सफलता मिली है। इन फसलों के साथ उन्होंने केले की उन्नत खेती को भी अपनाया और उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए।वर्तमान में श्री क्षेत्रपाल अपनी 8 एकड़ भूमि पर जी-9 किस्म के केले की खेती कर रहे हैं। उनके खेत में केले की दूसरी फसल सफलतापूर्वक तैयार हो रही है, जो उनकी वैज्ञानिक खेती और बेहतर प्रबंधन क्षमता का प्रमाण है। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की उनकी सोच ने उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि की है। श्री क्षेत्रपाल अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करते हैं। इस तकनीक से पानी की बचत होने के साथ-साथ फसलों को आवश्यकतानुसार नमी प्राप्त होती है। इससे उत्पादन लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।उनकी कृषि उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2006 और 2011 में भारत सरकार द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित “कृषिरत्न” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी लगन, नवाचार और कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है।विपणन के क्षेत्र में भी वे सजग और जागरूक किसान हैं। वे अपनी उपज का विक्रय मंडी के माध्यम से करते हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य प्राप्त होता है और आय में स्थिरता बनी रहती है। खेती के साथ बाजार की समझ ने उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाया है। श्री भरत क्षेत्रपाल की सफलता यह संदेश देती है कि यदि पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा जाए, तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बनाया जा सकता है। उनकी उपलब्धियां न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। आज वे इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि मेहनत, अनुभव, नवाचार और वैज्ञानिक सोच के बल पर खेती में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।
- रायपुर/छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग श्री अरुण साथ के मार्गदर्शन में नगरीय निकाय क्षेत्र अंतर्गत रायपुर नगर पालिक निगम के सभी 10 जोनों के विभिन्न 10 स्थानों पर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर लगाये जायेंगे। इस हेतु छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ शासन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और रायपुर जिला प्रशासन के मार्गनिर्देशन में रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र अंतर्गत सभी 10 जोनों में सुशासन विहार 2026 अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर आयोजन की प्रशासनिक कार्यवाही जोनवार निरन्तर प्रगति पर है।यहां उल्लेखनीय है कि सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के अंतर्गत रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में रायपुर नगर पालिक निगम जोन 7 अंतर्गत वार्ड कमांक 22, 23, 24, 25, 36, 37 एवं 38 क्षेत्र हेतु दिनांक 8 जून 2026 को रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में अंतिम और दसवां जनसमस्या निवारण शिविर पंडित दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में लगाया जायेगा।सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत रायपुर ग्रामीण एवं रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम जोन 10 के वार्ड क्रमांक 49, 50, 52, 53, 54, 55 एवं 56 में दिनांक 5 जून 2026 को देवपुरी धर्मशाला (गुरुद्वारा) कमल विहार (कौशल्या विहार ) गेट के पास रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में नवें जनसमस्या निवारण शिविर का सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में जोनवार क्रमानुसार आयोजन रखा गया है।रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र में जोनवार जनसमस्या निवारण शिविर आयोजन हेतु संबंधित जोन क्षेत्र के जोन कमिश्नर को सुशासन तिहार 2026 अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जोन कमिश्नर नोडल अधिकारी शिविर के आयोजन हेतु उत्तरदायी होंगे। आम जनता से उनकी समस्याओं के संबंध में शिविर स्थलों में प्रातः 11 बजे से अपरान्ह 1 बजे तक आवेदन प्राप्त किये जायेंगे। जनसमस्या निवारण शिविर में रायपुर नगर पालिक निगम सहित ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, राजस्व, विद्युत, खाद्य, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशु धन विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, ईडीएम, श्रम विभाग आदि हितग्राहीमूलक योजनाओं से संबंधित सर्व विभाग भी उपस्थित रहेंगे।निर्देश दिये गये है कि सुशासन तिहार के सफाई और सुव्यवस्थित संचालन हेतु आवश्यक अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की जाये और अभियान को जन आंदोलन का रूप देते हुए अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित की जाये। जिससे शासन की योजनाओं का व्यापक लाभ नागरिको को प्राप्त हो सके। विभिन्न शासकीय योजनाओं के संबंध में व्यापक जनजागरूकता सुनिश्चित करने शिविर में पात्र हितग्राहियों को लाभवितरण किये जाने, शिविरों में प्राप्त आवेदन पत्रों का अधिकतम 1 माह में निराकरण सुनिश्चित किये जाने, प्रत्येक आवेदक को उनके आवेदन के निराकरण की सूचना अनिवार्य रूप से प्रदान किया जाना सुनिश्चित करने संबंधित शिविर से जुड़े क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को आवश्यक सूचना उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने, शिविर स्थल पर अनुशांगिक व्यवस्था जैसे छाया, कुर्सी टेबल, पेयजल हेतु घडे आदि की व्यवस्था एवं पानी पिलाने वाले कर्मचारी सहित अन्य की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने, सुशासन तिहार अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरो का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है।
- -- ‘मैं अनिकेत हूं’ के सफलतम मंचन के बाद मुख्य अतिथि एसएसपी शशि मोहन ने कहा- नाटकों के प्रति लोगों का प्रेम अभी भी जिंदा हैरायपुर। महाराष्ट्र मंडल के सुपरहिट हिंदी नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ ने रायगढ़ में भयंकर आंधी, बारिश और ब्लैक आउट के बीच रायगढ़ के पांच सौ से अधिक रंगप्रेमी दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। हाल ही में रायगढ़ के जिंदल ऑडिटोरियम में मंचित नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ ने दर्शकों के मन में यह सवाल छोड़ दिया कि कोर्ट रूम में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा सामने खडे हुआ जले चेहरे वाला वह व्यक्ति आखिर कौन है? अनिकेत है या शशिकांत जाधव।नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ के निर्देशक शशि वरवंडकर ने अनिकेत की केंद्रीय भूमिका में जान फूंक दी है। कोर्ट रूम में जज के सामने अनिकेत अपने पहले ही संवाद ‘ये मेरी जिंदगी को बर्बाद करने की यह सुनियोजित और घृणित साजिश है। दो महीने पहले हुई ट्रेन दुर्घटना में बुरी तरह घायल होने के कारण मैं अपने ही लोगों के लिए करीब-करीब लापता था। इस वाक्या का फायदा उठाते हुए, जो लोग मुझे जिंदा नहीं देखना चाहते थे, उन्होंने मेरे अस्तित्व की संभावनाओं को नकारते हुए यह अफवाह फैलाई कि अब मैं इस दुनिया में नहीं रहा। मैं अनिकेत शर्मा, अगर लौट आने पर अपने ही घर में जाता हूं तो इसमें मेरा अपराध क्या है’ से दर्शकों पूरी तरह नाटक से जोड़ लेते हैं। सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी भूमिका में शशि वरवंडकर अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों को पूरे 80 मिनट तक नाटक के हर एक फ्रेम में बांधे रखते हैं।वकील भारद्वाज के रोल में चेतन दंडवते, अनिकेत की पत्नी मीनाक्षी के रोल में डॉ. अनुराधा दुबे, जज के किरदार में दिलीप लांबे और डॉ. गजानन ब्रह्रमानंद शिरोडकर के रूप में रंजन मोड़क अपने सधे व संतुलित अभिनय से अनिकेत के साथ नाटक में अपनी सामूहिक पकड़ को मजबूत करते हैं। रविंद्र ठेंगड़ी, भारती पलसोदकर, प्रकाश खांडेकर, समीर टल्लू, डॉ. प्रीता लाल, डॉ. अभया जोगलेकर, डॉ. शुचिता देशमुच, श्याम सुंदर खंगन, पंकज सराफ और विनोद राखुंडे अपने पात्रों के साथ न्याय करते हुए नाटक की गति को लगातार बनाए रखते हैं। मंच सज्जा से लेकर प्रकाश व ध्वनि व्यवस्था में अजय पोतदार, प्रवीण क्षीरसागर, प्रकाश गुरव की मेहनत नाटक में दिखाई देती है।नाटक शुरू होने से पहले रायगढ़ के एसएसपी शशिमोहन सिंह, विशिष्ट अतिथि और रोटरी स्टील सिटी के अस्टिटेंट गवर्नर विजय अग्रवाल, डिस्ट्रिक 3261 के डीएसजी सुशील रामदास अग्रवाल, जिंदल स्कूल के प्राचार्य आरके त्रिवेदी, जिंदल स्टील के ईवीपी संजीव चौहान ने दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम शुरू किया। कार्यक्रम के पूर्व दर्शकों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एसएसपी शशिमोहन सिंह ने कहा कि तेज अंधड़ और बारिश के चलते पूरे शहर की लाइट गुल है। उसके बाद भी आडिटोरियम में लोगों की इतनी अधिक उपस्थिति यह बता रही है कि रायगढ़ में रंगमंच और नाटकों के प्रति लोगों का प्रेम अभी भी जिंदा है। तमाम विशिष्ट अतिथियों ने भी नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ की जमकर प्रशंसा करते हुए इसे अभूतपूर्व और अकल्पनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह नाटक स्थानीय नाट्य प्रतिभाओं को भी प्रेरित कर रंगमंच की ओर लौटने में सहायक होगा।
- 0- सहकारी समितियों एवं निजी दुकानों में कालाबाजारी पाए जाने पर होगी कड़ी कार्यवाहीरायपुर। जिले में किसी भी प्रकार के खाद की कमी नहीं है एवं किसान जिले के सहकारी समितियों और निजी दुकानों से यूरिया प्राप्त कर सकते हैं। यह जानकारी कृषि विभाग के उप संचालक श्री सतीश अवस्थी द्वारा दी गयी| श्री अवस्थी ने बताया कि रायपुर जिले के प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों पर्याप्त मात्रा में यूरिया का भंडारण किया गया है एवं कृषि विभाग द्वारा सभी सहकारी समितियों और निजी दुकानों में पीओएस मशीन के माध्यम से उर्वरकों के विक्रय के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निजी दुकानों में अवैध भंडारण पाए जाने पर जब्ती की कार्रवाई के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इस हेतु लगातार उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की निगरानी की जा रही है|जिले में 31 हजार 600 मीट्रिक टन यूरिया के लक्ष्य के विरुद्ध 32 हजार 549 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 103 प्रतिशत है एवं भंडारित यूरिया में से 31 हजार 123 मीट्रिक टन का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो कुल भंडारण का 96 प्रतिशत है।विभाग द्वारा किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर हरी खाद के लिए ढैंचा एवं मूंग के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिले में 1000 एकड़ क्षेत्र में हरी खाद के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा इसके लिए किसानों के बीच प्रचार-प्रसार कर बीज वितरण किया जा रहा है।उर्वरकों की कालाबाजारी और अधिक मूल्य पर बिक्री रोकने के लिए निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर विभागीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों से अपील की गई है कि यदि कहीं भी उर्वरकों की कालाबाजारी या निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री की शिकायत मिले तो इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को दें, ताकि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
- 0- खाते में कर रहीं नियमित बचत, मिला बेटी के उज्जवल भविष्य का भरोसारायपुर. सुकन्या समृद्धि योजना ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत श्रीमति फनिता साहू की बेटी लेकिशा के उज्जवल भविष्य हेतु खाता खुलवाया गया। श्रीमति साहू आरंग विकासखण्ड के ग्राम रानीसागर की रहने वाली हैं। उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से इस योजना की जानकारी मिली। खाता खुलने के पश्चात् उन्होंने आपनी बेटी के खाते में नियमित रूप से बचत करना शुरू किया। इस योजना से उनके परिवार को यह भरोसा मिला है कि भविष्य में उनकी बेटी की शिक्षा और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए आवश्यक जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध रहेगी।
- रायपुर. आर्थिक रूप से कमजोर श्री ईश्वर साहू की बेटी लीलीमा का भविष्य अब सुरक्षित है, क्योंकि छत्तीसगढ़ शासन की योजना नोनी सुरक्षा योजना के तहत उनकी बेटी का बीमा किया गया है।श्री साहू एवं उनका परिवार आरंग विकासखण्ड के ग्राम बनरसी में निवारत हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें अपनी बेटी के भविष्य की चिंता रहती थी। इसी बीच आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें इस योजना के बारे में पता चला और आपनी बेटी के नाम से बीमा कराया। अब उनकी बेटी विद्यालय में पढ़ाई और उज्जवल भविष्य को लेकर बहुत उत्साहित है। इस योजना से उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ यह विश्वास भी मिला है कि उनकी बेटी आगे चलकर अपनी शिक्षा पूरी करेगी और अपने सपने को साकार करेगी।उल्लेखनीय है कि नोनी सुरक्षा योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य, उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार तथा भ्रूण हत्या रोकने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना है| इस योजना के तहत बीपीएल परिवारों में जन्मी बेटियों के नाम पर राज्य सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से 5 वर्षों तक हर साल ₹5,000 जमा करती है|
- बालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार अपर कलेक्टर श्री अजय किशोर लकरा ने आज संयुक्त जिला कार्यालय के जनदर्शन कक्ष में जिले के विभिन्न स्थानों से पहुँचे लोगों से मधुर एवं आत्मीय बातचीत कर उनकी मांगों एवं समस्याओं की जानकारी ली। इस अवसर पर उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को तलब कर आवेदकों के मांगों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। जनदर्शन में आज गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम सिकोसा के श्री चंद्रकुमार ने पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ दिलाने, ग्राम तमोरा की याचिका ने आधार कार्ड में सुधार कराने हेतु आवेदन प्रस्तुत किए। इसी तरह डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के आदिमजाति सहकारी समिति मर्यादित खेरथा ने विद्युत पोल का स्थानांतरण करने, डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम बिटाल के श्री राम सिंह कोठारी ने भूमि पट्टा दिलाने एवं सुरडोंगर के बसंती साहू ने बोर खनन की अनुमति प्रदान करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया।--
- 0- सहकारी समिति में खाद बीज लेने पहुंचे बहुर सिंह ने मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री का जताया आभारबालोद. छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी योजनाओं और जिले में कृषि की सुचारू व्यवस्था से किसानों का जीवन सँवर रहा है। बालोद जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के लिए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को समय पर अपनी सहकारी समितियों से उच्च गुणवत्ता वाले बीज और खाद मिल रहे हैं। शासन की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ उठाकर जिले के किसान अब आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। जिले के गुरूर विकासखंड के ग्राम अरमरीकला के प्रगतिशील किसान श्री बहुर सिंह की कहानी अन्य किसानों के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है। किसान श्री बहुर सिंह ने शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाया है। धान बेचने के बाद समय पर मिले भुगतान और कृषक उन्नति योजना की राशि के सही प्रबंधन से उन्होंने अपनी खेती को और मजबूत करने का फैसला किया। इसी का परिणाम है कि उन्होंने खेती के कार्यों को आसान और आधुनिक बनाने के लिए स्वयं का नया ट्रैक्टर खरीद लिया है।श्री बहुर सिंह कुल 07 एकड़ भूमि पर धान की खेती करते हैं। अपनी मेहनत, आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग और उन्नत किस्म के बीजों की बदौलत वे हर साल बंपर पैदावार ले रहे हैं। समय पर सोसायटी से खाद-बीज मिलने के कारण उन्हें कभी भी खेती के सीजन में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। आज वे अपने क्षेत्र में एक उन्नत और जागरूक किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। किसान श्री बहुर सिंह ने बताया कि पहले खेती के लिए दूसरों के ट्रैक्टर और संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समय और पैसा दोनों का नुकसान होता था। लेकिन सरकार की नीतियों और समय पर मिलने वाली सुविधाओं के कारण आज मेरा खुद का ट्रैक्टर लेने का सपना पूरा हो सका है।बालोद जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग के प्रयासों से इस बार सोसायटियों में खाद-बीज का अग्रिम उठाव तेजी से हुआ है। किसानों को लाइनों में नहीं लगना पड़ रहा है, जिससे वे बिना किसी समस्या के अपनी बोआई और थरहा की तैयारी में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें धान की खेती में भरपूर सहयोग मिल रहा है। किसान श्री बहुर सिंह ने कृषक उन्नति योजना और किसान सम्मान निधि जैसी किसान हितैषी योजनाओं के संचालन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।


























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