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- रायपुर / वाणिज्य और उद्योग एवं श्रम विभाग मंत्री और कबीरधाम जिले के प्रभारी मंत्री श्री लखनलाल देवांगन शुक्रवार 30 अगस्त को कबीरधाम जिले के प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे जिला कार्यालय के सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक लेंगे और सरकार की योजनाओं की समीक्षा करेंगे। वाणिज्य और उद्योग एवं श्रम विभाग मंत्री और कबीरधाम जिले के प्रभारी मंत्री श्री देवांगन 30 अगस्त को 11 बजे रायपुर से कवर्धा जिला कबीरधाम के लिए कार द्वारा प्रस्थान करेंगे। एक बजे विश्राम भवन कवर्धा आगमन जनप्रतिनिधियों से भेंट मुलाकात करेंगे। इसके बाद अपरान्ह 3 बजे जिला कार्यालय के सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक लेंगे। तत्पश्चात वे 4.30 बजे कबीरधाम से रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।
- -खाद्य मंत्री ने 2.36 करोड़ रूपए के विभिन्न विकास कार्यों का किया भूमिपूजन-आयुर्वेदिक औषधालय और धान उपार्जन केन्द्रों में होगा फड़ सीमेंटीकरण का कार्य-बदनारा में आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिलरायपुर, /खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल बघेल ने बुधवार को बेमेतरा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम बदनारा में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम शामिल हुए। उन्होंने इस मौके पर ग्राम बदनारा में औषधालय सहित आस-पास के उपार्जन केन्द्रों में फड़ सीमेंटीकरण के लिए 2.36 करोड़ रूपए के विकास कार्योें का भूमिपूजन किया।मंत्री श्री बघेल ने भूमिपूजन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार किसानों को प्राथमिकता में रखकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गारण्टी को पूरा करते हुए प्रदेश के किसानों, गरीबों, महिलाओं और युवाओं के हित में बेहतर नीतिगत् फैसले लेकर प्रदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में निरन्तर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समर्थन मूल्य एवं कृषि उन्नति योजना के तहत किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रूपए की भाव से खरीदने के वादे को पूरा किया है। वहीं प्रदेश के लगभग 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत 1000 रूपए प्रति माह उनके खाते में अंतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री बनते ही आवास हीन परिवारों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने का काम किया।मंत्री श्री बघेल ने कहा कि जिन कार्यों का भूमिपूजन हुआ इनमें आयुर्वेदिक औषधालय बदनारा के लिए 16 लाख रूपए और सेवा सहकारी समिति बदनारा में फड़ सीमेंटीकरण के लिए 20 लाख रूपए का भूमिपूजन शामिल हैं। इसी प्रकार मंत्री श्री बघेल ने सेवा सहकारी समिति सम्बलपुर, कुवरा, पुटपुरा, गोढ़ीकला, बुंदेला, बोरतरा, झाल, रनबोड, नेवसा और मजगांव में भी बीस-बीस लाख रूपए के फड़ सीमेंटीकरण कार्य का भूमिपूजन किया।इस अवसर पर बेमेतरा जिला पंचायत के सदस्य श्री अंजू बघेल, वरिष्ठ सामजिक कार्यकर्ता सर्व श्री टार्जन साहू, परश वर्मा, इन्द्रा राजपूत, मनीष जायसवाल, अजय साहू, वल्लभ ठाकुर, चंद्रपाल साहू और लालन यादव सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
- -शेष जिलों के विद्यार्थियों को 1 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलेगा ऋण-कमजोर आर्थिक स्थिति वाले विद्यार्थियों को मिलेंगे तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के बेहतर अवसर-मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना: 2 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थी होंगे पात्र-डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 35 तकनीकी एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल-ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा 4 लाख रूपए-कलेक्टरों को अभियान चलाकर अधिक से अधिक छात्रों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देशरायपुर /छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक से प्रभावित जिलों में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को तकनीकी एवं व्यावसायिक उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर दिलाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इन जिलों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों को ’मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना’ के तहत लाभान्वित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए विशेष अभियान चलाने कहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य के अन्य जिलों के कलेक्टरों को भी कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को भी तकनीकी एवं व्यावसायिक उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत के ब्याज दर पर दी जा रही ऋण सुविधा का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए हैं।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के संचालन के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इस योजना के अंतर्गत डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 35 तकनीकी एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। योजना में ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा रूपये 4 लाख निर्धारित है।मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के तहत तकनीकी शिक्षा एवं अन्य व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेशित ऐसे छात्रों को, जिनके परिवारों की वार्षिक आय 2 लाख से कम है, उनको मोेरेटोरियम अवधि के पश्चात ऋण किश्तों के नियमित भुगतान की स्थिति में केवल एक प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा। शेष ब्याज की राशि का भुगतान राज्य शासन द्वारा सीधे संबंधित बैंक को किया जायेगा।राज्य के माओवादी आतंक प्रभावित जिले बस्तर, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, जशपुर, उत्तर बस्तर कांकेर, कोरिया, नारायणपुर, राजनांदगांव, सरगुजा, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद, सुकमा, कोण्डागांव एवं बलरामपुर जिले के छात्रों को ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा।इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित शर्ताें में छात्र को छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना चाहिए। छत्तीसगढ़ राज्य में स्थापित तथा सक्षम प्राधिकारी (यथा एआईसीटीई, यूजीसी) मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम प्रवेशित हो। अधिकतम पारिवारिक आय रूपये 2 लाख होनी चाहिए, जो कि सक्षम अधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए। योजना के अंतर्गत ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा रूपये 4 लाख है। ब्याज अनुदान का लाभ लेने के लिए नियमित रूप से ऋण किश्तों का भुगतान अनिवार्य है। ड्राप ऑउट एवं निष्कासित छात्र इस योजना के लाभार्थी नहीं बने रहेंगे किन्तु चिकित्सीय कारणों से एक वर्ष की अधिकतम सीमा तक अध्ययन में रूकावट होने की दशा में पात्रता बनी रहेगी।इन पाठ्यक्रमों में मिलेगा लाभयोजना के अंतर्गत बीई/बीटेक, एमई, एम टेक, डी आर्क, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, एमसीए, एम.बी.ए, डीई, बी.पी.एड, एमपीएड, पी.जी.डी.सी.ए., बी.एच.एम.एस., बी.ए.एम.एस, बी.एन.वाई.एस, बी.एन.एस., बी.यू.एम.एस, वी.एफ.एस.सी., बी.टेक डेयरी, बी.एग्री, बी.डी.एस, एमडीएस, एमबीबीएस, बीव्हीएससी, बीएससी नर्सिंग बेसिक तथा पोस्ट बेसिक, बी. फार्मा, एम फार्मा, डी फार्मा, डिप्लोमा इन मॉर्डन आफिस मेनेजमेंट, डिप्लोमा इन इंटीरियर डेकोरेशन एण्ड डिजाइन, डिप्लोमा इस कास्टयूम डिजाईन एण्ड ड्रेस मेकिंग, बीएड, डीएड, एमएड, के पाठ्यक्रमों में अध्ययन के लिए योजना का लाभ लिया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 0771-2331231 सम्पर्क तथा वेबसाइट http://www.cgdteraipur.cgstate.gov.in पर अवलोकन किया जा सकता है।
- -स्व-सहायता समूह कोसाफल उत्पादन कर कमा रहा 70 से 75 हजार रुपए की आमदनी-महात्मा गांधी नरेगा और रेशम विभाग के संयुक्त अभिसरण से बुंदेला गांव में रोपे गए 41 हजार अर्जुन के पौधेरायपुर / जहाँं चाह - वहाँ राह इस उक्ती को चरितार्थ कर दिखाया है जांजगीर चांपा जिले के ग्राम बुंदेला के स्व-सहायता समूह ने, इस समूह के सदस्यों को प्रतिवर्ष 70 से 75 हजार रूपए का मुनाफा होने लगा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और रेशम विभाग से हुए 41 हजार अर्जुन के पौधरोपण से पर्यावरण हरा-भरा हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर इन पौधारोपण से स्व सहायता समूह आजीविका के साथ आय अर्जित कर वृद्धि करते हुए हुए समृद्धि की ओर बढ़ रहा है। यह समृद्धि जिला मुख्यालय जांजगीर चांपा से 40 किलोमीटर दूर पामगढ़ विकासखंड के गाँव बुंदेला में देखने को मिल रही है। यहाँ करीब चार साल पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और रेशम विभाग के अभिसरण के साथ से अर्जुन (कौहा) के पौधे रोपे गए थे। रोपण के बाद, पौधे बढ़े होने लगे तो इनमें कोसाफल उत्पादन का कार्य शुरु किया गया और कोसा कृमिपालन करते हुए स्व-सहायता समूह के सदस्यों को प्रतिवर्ष 70 से 75 हजार रूपए का मुनाफा होने लगा।जांजगीर-चांपा के विकासखण्ड पामगढ़ के बुंदेला ग्राम पंचायत है। यहाँ लगभग 10 हेक्टेयर की शासकीय भूमि अनुपयोगी एवं खाली पड़ी थी। जिस पर अवैध रूप से कब्जा बना हुआ था, इस जमीन पर कब्जाधारियों से मुक्त कराकर ग्राम पंचायत के सहयोग से इस भूमि का उपयोग गाँव की महिलाओं की आजीविका की समृद्धि के लिए शुरू करने की योजना बनाई गई। रेशम विभाग द्वारा इस जमीन पर अर्जुन का पौधरोपण करने का प्लान तैयार किया गया। और वर्ष 2018 में रेशम विभाग और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी नरेगा) से 4 साल की कार्ययोजना तैयार करते हुए 41 हजार पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया। इसके लिए मनरेगा से पौधरोपण व जल संरक्षण एवं संचय के रूप में प्रशासकीय स्वीकृति 14.188 लाख रूपए दिए गए। पौधरोपण के कार्य में महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से जॉबकार्डधारी परिवारों ने काम करते हुए और रेशम विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन ने कार्य को बेहतर बनाया और चार साल की इस परियोजना की शुरूआत की गई। इसमें पहले साल 40 हजार पौधे रोपे गए जिसमें गाँव के मनरेगा श्रमिकों को 918 मानव दिवस का सीधा रोजगार मिला था और मजदूरी भी मिली। उपसंचालक रेशम मनीष पंवार ने बताया कि 2018 में अर्जुन के पौधों का रोपण वैज्ञानिक पद्धति से किया गया था। इसके लिए सभी पौधों को कतार से कतार में पौधे से पौधे में निर्धारित दूरी पर रोपा गया था, ताकि ये अच्छी तरह से बड़े हो सके। वर्तमान में इनकी लंबाई 6 से 7 फीट तक हो चुकी है। यहाँ कोसाफल का उत्पादन का कार्य गांव के ग्रामीणों ने कोसा कृमिपालन स्व-सहायता समूह बनाकर कार्य करना शुरू किया और रेशम विभाग द्वारा समूह को प्रशिक्षण भी दिया गया है और नियमित अंतराल पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। चार साल में पौधरोपण और उनके संधारण का कार्य करते हुए मनरेगा के श्रमिकों को 3 हजार 429 मानव दिवस सृजित भी हुआ।समूह के मनोज साहू का कहना हैं कि खेती-किसानी के साथ ही इस कार्य को करने से अतिरिक्त आमदनी हो रही है। गांव में युवाओं, महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। इस कार्य में श्रीमती अन्नपूर्णा साहू, श्रीमती नम्रता साहू, सुरेन्द्र कुमार साहू, सोनसाय साहू, सतीश निर्मलकर कार्य करते हुए आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। इस वर्ष 25 हजार कोसाफल के उत्पादन संभावित है। जिसे स्थानीय एवं चांपा के कोसा कपड़ा व्यवसाय करने वालों को बेचकर मुनाफा अर्जित करंेगे। इसके पूर्व के वर्ष में भी समूह को 70 से 75 हजार रूपए की आमदानी हो रही है।
- -अब हर माह 25 हजार से अधिक की हो रही है आयरायपुर/ मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से लाभ पाकर गरियाबंद जिला के ग्राम लोहरसी निवासी श्री भावेश तिवारी अब खुद के मेडिकल स्टोर के मालिक बन गए हैं। मेडिकल स्टोर से उन्हें 20 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह का मुनाफा हो रहा है, जिससे वे बहुत खुश हैं तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का हृदय से आभार मान रहा है।श्री भावेश तिवारी ने बताया कि वे डिप्लोमा इन फार्मेसी करने के बाद शासकीय सेवा की तैयारी कर रहा था। लेकिन किसी कारणवश उनका शासकीय सेवा में चयन नहीं हो पाया। साथ ही उनके पास आय का कोई अन्य साधन भी नहीं होने के कारण उन्होंने स्वयं का मेडिकल स्टोर्स स्थापित करने के बारे में सोचा। मेडिकल स्टोर के लिए उनके पास पर्याप्त पूंजी नही था, जिससे वे मेडिकल स्टोर्स स्थापित नहीं कर सका। फिर किसी ने भावेश को बताया कि मेडिकल स्टोर्स शुरू करने में दिक्कत हो रही है तो वे जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र से संपर्क कर जानकारी लें। उन्होंने एक दिन जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र कार्यालय गरियाबंद पहुंचकर अधिकारियों से सम्पर्क किया। वहां के अधिकारियों ने उन्हें स्वरोजगार योजना के बारे में विस्तारपूर्वक से जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्हें इस योजना के लिए आवेदन करने प्रेरित किया। उन्होंने निर्धारित प्रारूप में जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र में आवेदन प्रस्तुत किया। उनके आवेदन को बारिकी से परीक्षण करने के पश्चात यूनियन बैंक फिंगेश्वर प्रेषित किया गया, जिसे बैंक द्वारा 12 दिसम्बर 2023 को एक लाख 80 हजार रूपये का उन्हें ऋण वितरण किया गया। साथ ही विभाग द्वारा 20 हजार रूपये का अनुदान प्रदान किया गया। भावेश तिवारी ने फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम बेलर में स्वयं का मेडिकल स्टोर्स स्थापित किया, जिससे उन्हें रोजगार तो मिला ही साथ एक अन्य व्यक्ति को भी रोजगार दे रहा है। उन्होंने बताया कि मेडिकल स्टोर्स से उन्हें प्रतिमाह 25 हजार रूपये का शुद्ध आय प्राप्त कर रहा है, जिससे वे अपने परिवार का अच्छे से भरण पोषण कर रहा है। श्री भावेश तिवारी ने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र एवं राज्य शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा चलाए जा रहे स्वरोजगार योजना हमारे जैसे अन्य युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है।
- -दुग्ध उत्पादन बना अतिरिक्त आय का जरियारायपुर/ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत् पंजीकृत श्रमिकों को न केवल रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि आजीविका के नए-नए साधन एवं सुविधाएं भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बैकुंठपुर जिला के ग्राम पंचायत पटना के निवासी श्री दीपक और उनका परिवार मनरेगा में पंजीकृत है। जहां एक ओर वो मनरेगा से श्रमिक का काम करते हैं वहीं दूसरी ओर उनका रुझान गौपालन की तरफ भी था। उनके पास दो दुधारू गाय हैं, जिसके रखने के लिए उनके पास पक्का शेड नहीं था, जिसके कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। जब उन्हें पता चला कि मनरेगा के तहत् पशुओं को रखने के लिए पक्का शेड निर्माण करके दिया जाता है तब उन्होंने ग्राम पंचायत को आवेदन दिया। ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत कर ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाया गया। इसके लिए एक लाख पच्चीस हजार रुपए की राशि खर्च कर गत वर्ष इनका कार्य पूर्ण कराया गया। इस निर्माण कार्य में श्रमिक के रूप में कार्य करके भी श्री दीपक को चार हजार रुपए की अतिरिक्त आय मनरेगा पारिश्रमिक के रूप में भी प्राप्त हुआ।पक्का पशु आश्रय बन जाने से अब उन्हें गौपालन में आसानी हुई है, उनके घर प्रतिदिन सात लीटर से अधिक दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। वह दुग्ध का व्यवसाय प्रारंभ किया है, जिससे उनके परिवार को लगभग आठ से दस हजार रूपए प्रतिमाह की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। मनरेगा के हितग्राही श्री दीपक और उनका परिवार अब बेहतर जीवन यापन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।गौरतलब है कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत पक्का पशु आश्रय बनने से ग्रामीण इलाकों में लोगों को कई तरह के लाभ हो रहे हैं। पक्का पशु आश्रय बनने से पशुओं को सुरक्षित स्थान मिलता है, जहां वे मौसम की मार से बचे रहते हैं। इससे पशुओं की मृत्यु दर में कमी आती है और उनकी सेहत में सुधार होता है। पशुओं की सेहत में सुधार होने से दूध उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे ग्रामीणों की आमदनी बढ़ती है। इसके अलावा, स्वस्थ पशु बेहतर खेती के लिए उपयोगी होते हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाता है। मनरेगा के तहत इन आश्रय स्थलों के निर्माण के दौरान ग्रामीणों को रोजगार मिलता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है। यह ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करता है और गरीबी कम करने में मदद करता है। पशु आश्रय के निर्माण से ग्रामीण समुदायों में सहयोग और आपसी समझ बढ़ती है। यह कार्य समुदायों को एकजुट करता है और सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है। इस प्रकार, मनरेगा के तहत पक्का पशु आश्रय बनने से ग्रामीण इलाकों में लोगों को आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े कई लाभ मिल रहा है।
- -कृषि अभियंताओं के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी का शुभारंभ-कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अभियंता सम्मानितरायपुर/ कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा है कि कुछ दशक पूर्व किसान खेती में परंपरागत कृषि उपकरणों का उपयोग करते थे। लेकिन प्रौद्योगिकी के विकास के कारण आज खेतों में ट्रैक्टर चलित कल्टिवेटर, रोटावेटर, कम्बाइन जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों एवं मशीनरी का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही अब कृषि में ड्रोन तथा ए.आई. तकनीक का उपयोग भी होने लगा है। कृषि मशीनरी के तकनीकी विकास के कारण कृषि के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है, इसके लिए देश के कृषि अभियंता तथा कृषि वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं।कृषि मंत्री श्री नेताम राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित कृषि अभियंताओं के दो दिवसीय 36वें राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की। इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजिनियर्स (इंडिया) छत्तीसगढ़ स्टेट सेन्टर, रायपुर एवं स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कृषि अभियांत्रिकी संकाय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर से आए कृषि अभियंता शामिल हुए।सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री नेताम ने कहा कि ‘‘सतत विकास के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हेतु कृषि अभियंताओं का योगदान’’ विषय पर आयोजित इस सगोष्ठी का विषय काफी ज्वलंत, प्रासंगिक एवं सारगर्भित है। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में आज अनेकों चुनौतियां विद्यमान है। जलवायु परिवर्तन के कारण किसान फसल उत्पादन संबंधी अनेक चुनौतियां से जूझ रहे हैं। ऐसे में कृषि अनुसंधान प्रौद्योगिकी विकास तथा कृषि यंत्रीकरण के द्वारा ही इस चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। श्री नेताम ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विभिन्न फसलों की 65 नई जलवायु लचीली फसल प्रजातियों का लोकार्पण किया है जो मौसम की प्रतिकूलताओं में भी अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कृषि अभियंताओं के इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी के सार्थक परिणाम प्राप्त होंगे। श्री नेताम ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि अभियंताओं द्वारा किये गये नवीन अनुसंधानों एवं प्रौद्योगिकी विकास की सराहना की।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि भारत में कृषि के क्षेत्र में जो तीन मुख्य कमियां चिन्हित की गई हैं इनमें से कृषि के क्षेत्र में यंत्रों का उपयोग प्रमुख है। पिछले दशकों में कृषि मशीनरी के विकास तथा उपयोग को बढ़ावा मिलने के बावजूद आज भी हमारे देश में कृषि के क्षेत्र में मशीनरी का उपयोग अन्य विकसित देशों की अपेक्षा काफी कम है। उन्होंने कहा कि देश भर में कृषि मशीनरी के डिजाइन तथा तकनीक के विकास का कार्य किया जा रहा है, जिसके सार्थक परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं और किसान अब कृषि यंत्रों का ज्यादा उपयोग करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं कृषि अभियंताओं द्वारा कृषि मशीनरी के प्रौद्योगिकी विकास की दिशा में काफी काम किया गया है और स्थानीय परिस्थितियों एवं किसानों की आवश्यकताओं को देखते हुए अनेक नवीन कृषि यंत्र विकसित किये गये हैं जिनका उपयोग छत्तीसगढ़ के किसान कर रहे हैं। समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय भू-जल बोर्ड, भारत सरकार के अध्यक्ष डॉ. सुनील के. अम्बस्ट ने कहा कि कृषि मशीनरी के विकास के साथ ही भू-जल संरक्षण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में भी अधिक कार्य किये जाने की आवश्यकता है।इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कृषि अभियंताओं के राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया गया। इसके साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रकाशित पुस्तिका तथा 9 सितम्बर 2024 को आयोजित होने वाले बलराम जयंती समारोह के ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कृषि अभियंताओं का सम्मान भी किया गया जिनमें डॉ. इन्द्रमणी मिश्रा, कुलपति वसंत राव नाईक, मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ परभणी, डॉ. टी.बी.एस. राजपूत, वरिष्ठ वैज्ञानिक, जल प्रौद्योगिकी केन्द्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली, डॉ. टी. विद्या लक्ष्मी, वरिष्ठ वैज्ञानिक केन्द्रीय पोस्ट हार्वेस्टिंग इंजिनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.सी.ए.आर. लुधियाना), डॉ. मधुरेश द्विवेदी सहायक प्राध्यापक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला तथा इं. राजकुमार श्रीवास संचालक शुभी एग्रोटेक प्राईवेट लिमिटेड रायपुर शामिल हैं। इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विनय पाण्डेय को लाईफटाइम अचीवमेन्ट अवार्ड से सम्मनित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठा प्रशासनिक आधिकारी, वैज्ञानिक एवं अभियंता उपस्थित थे।इस राष्ट्रीय सम्मेलन सह संगोष्ठी में वर्तमान समय में कृषि के विकास हेतु बहु प्रासंगिक विषयों जैसे - इंजीनियरिंग इनपुट का संरक्षण और प्रबंधन, फार्म मशीनरी, कृषि प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत, मिट्टी और जल संरक्षण और प्रबंधन’’ आदि पर विस्तृत चर्चा होगी एवं शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इनमें मुख्यतः कृषि में जुताई-बुआई से लेकर कटाई-मड़ाई एवं प्रसंस्करण की क्रियाओं का मशीनीकरण, ड्रोन का उपयोग, रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग, कृषि बागवानी में अत्याधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोटिक्स एवं आई.ओ.टी. का प्रयोग आदि विषयों पर सार्थक संवाद, प्रदर्शन, प्रस्तुतिकरण एवं विचारों का आदान-प्रदान होगा। जलवायु परिवर्तन एवं कृषि कार्यों के समय पर संपादन में कृषि श्रमिकों की घटती उपलब्धता के परिपेक्ष्य में कृषि अभियंताओं के बढ़ते महत्व एवं कस्टम हायरिंग जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता विकास की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डाला जाएगा। इस कार्यक्रम में अभियंता, उद्यमी, वैज्ञानिक, उद्योगपति, शोधकर्ता, प्रगतिशील कृषक एवं देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के विद्वत्तजन शामिल हुए जो किसानों की आय बढ़ाने के लिए यथोचित रणनीति को अंतिम रूप देंगे।
- -राष्ट्रीय वन खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन 16 से 20 अक्टूबर तक रायपुर में होगारायपुर/ 27वीं अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय चयन प्रतियोगिता का शुभारंभ आज श्री व्ही. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ द्वारा स्थानीय कोटा स्टेडियम में किया गया। पूरे प्रदेश के 6 वन वृत्तों से आये लगभग 500 खिलाड़ियों को वन बल प्रमुख द्वारा शपथ दिलायी गयी। वन वृत्त बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, कांकेर, सरगुजा, रायपुर से आये खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।समस्त खिलाड़ियों द्वारा मार्च पास्ट का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय वन खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन 16 से 20 अक्टूबर 2024 को रायपुर में होना सुनिश्चित है जो छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उक्त राष्ट्रीय प्रतियोगिता में विविध खेलों हेतु राज्य स्तरीय टीम का चयन दिनांक 29 से 31 अगस्त 2024 के मध्य प्रतियोगिताएं आयोजित कर किया जा रहा है।श्री श्रीनिवास राव ने अपने संबोधन में बताया कि यह आयोजन महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने छत्तीसगढ़ को 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट 2024 की मेजबानी का अवसर दिए जाने पर वन मंत्रालय भारत सरकार का आभार व्यक्त किया एवं छत्तीसगढ़ राज्य के वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशन में 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट 2024 को सफल बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे कठिन परिश्रम कर अपने खेल कौशल को निखारें और 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट में राज्य का नाम रोशन करें।चयन टूर्नामेंट के दौरान अगले दो दिनों में विभिन्न खेल स्पर्धाओं में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला होगा, जिसमें सफल खिलाड़ी 27वें ऑल इंडिया फारेस्ट स्पोर्ट्स मीट 2024 में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग की टीम गत वर्ष पंचकूला, हरियाणा में आयोजित राष्ट्रीय वन खेलकूद प्रतियोगिता की चौम्पियन टीम रही है। राज्य स्तरीय चयन प्रतियोगिता में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरूण पाण्डेय, सुनील मिश्रा, संजीता गुप्ता, ओ.पी. यादव, नोडल अधिकारी शालिनी रैना, राजू अगासीमनी मुख्य वन संरक्षक रायपुर, विश्वेश कुमार, मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी अन्य वन वृत्तों एवं अरण्य भवन से आये वरिष्ठ अधिकारी, प्रदेश के समस्त वन वृत्तों से आये वन विभाग के उत्कृष्ट खिलाड़ी, रेफरी एवं कोच उपस्थित रहें।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना सरस्वती साइकिल योजना छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रही है। कोरिया जिला के ग्राम जगतपुर की रहने वाली कुमारी डिम्पल ने बताया कि उनके पास साइकिल नहीं होने के कारण पहले 5-6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती थी। अन्य लड़कियों को साइकिल से स्कूल आते देखकर उसे भी साइकिल चलाकर स्कूल जाने का मन करता था। पर मुख्यमंत्री साइकिल योजना के तहत् उन्हें साइकिल मिलने से अब वह 15 से 20 मिनट से भी कम समय में आसानी से स्कूल पहुंच जाती है। साइकिल मिलने से अब घर के सभी सदस्य बहुत प्रसन्न है।इसी तरह ग्राम तिलवन डाँड़ से कुमारी वंदना कुर्रे, उजियारपुर की कुमारी पलक, रटगा से अन्नू देशमुख ने सरस्वती साइकिल योजना से साइकिल मिलने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए बताया कि उन्हें स्कूल आने के लिए घर से करीब एक-डेढ़ घण्टे पहले निकलना होता था, कभी पैदल तो कभी किसी के साथ बैठकर आते थे, लेकिन अब सायकिल मिलने से उन्हें परेशानियों से छुटकारा मिला है। शासन की पहल से शिक्षा विभाग की सरस्वती सायकल योजना ने छात्राओं के सपने को साकार किया है साथ ही पढ़ाई-लिखाई व अन्य कार्यों में भी अब यह सायकिल मददगार साबित हो रहे हैं।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा छात्राओं के लिए सरस्वती साइकिल योजना की शुरूवात की गई है। सरस्वती साइकिल योजना के तहत 9 वीं कक्षा में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य वर्ग के बीपीएल परिवार की बालिकाओं को साइकिल दी जाती है। ये योजना एक ऐसी महत्वाकांक्षी योजना है जो ना सिर्फ बेटियों को स्कूल आने-जाने में मदद करती है, बल्कि इससे बेटियों की शिक्षा की राह आसान हुई है।
- -पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के स्वयं के सुंदर आशियाने का सपना हो रहा पूरा-सरगुजा जिले में पीवीटीजी परिवारों के लिए 2084 आवास हुए स्वीकृतरायपुर / प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के लोगों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। इस योजना ने पीवीटीजी (विशेष पिछड़ी जनजाति) परिवारों के लिए सामाजिक और आर्थिक उत्थान का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, नलजल, शिक्षा, बिजली, कृषि, सड़क, और आधार पंजीयन जैसी योजनाओं के माध्यम से न केवल समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक हैं, बल्कि उनके जीवन स्तर को भी सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।सरगुजा जिले के जनपद पंचायत सीतापुर के ग्राम पंचायत पेटला की श्रीमती बिखनी बाई प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित होने वालों में से एक हैं। हाल ही में उन्होंने पूरे परिवार के साथ हरेली त्योहार के दिन अपने नए सपनों के सुंदर आशियाने पक्के घर में विधिवत पूजा-अर्चना कर गृहप्रवेश किया। बिखनी बाई ने बताया कि पहले हमारा कच्चा घर था, जिसमें बारिश के दिनों में पानी टपकता था और कीड़े-मकोड़े की समस्याएं भी थीं। हम ऐसे सुंदर-स्वच्छ घर का सिर्फ सपना ही देख सकते थे। लेकिन प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत हमें प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति मिली और अब हमारा यह सुंदर और स्वच्छ घर बनकर तैयार हो गया है। बिखनी बाई ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णदेव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके प्रयासों से उनका परिवार अब पक्के घर में रहने के लिए उत्साहित है और उनका जीवन पहले से बेहतर हो गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरगुजा जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए 2084 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 1469 हितग्राहियों को प्रथम किस्त, 804 को द्वितीय किस्त, 387 को तृतीय किस्त, और 17 को चतुर्थ किस्त की राशि प्रदान की जा चुकी है। वहीं जिले में 30 परिवारों के आवास पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुके हैं।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर मिली स्वीकृति राज्य सरकार ने जारी किया निविदारायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर जशपुर जिला के कुनकुरी में प्रस्तावित 220 बिस्तर की क्षमता वाले अत्याधुनिक अस्पताल के भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार ने निविदा जारी कर दिया है। इस अस्पताल के लिए राज्य सरकार ने 32 करोड़ 9 लाख रूपये की राशि स्वीकृत की है। उल्लेखनीय है राज्य में विष्णुदेव साय सरकार ने अपने बजट में कुनकुरी में 220 बिस्तर की क्षमता वाली अत्याधुनिक अस्पताल निर्माण की घोषणा की थी। इस बजट में अस्ताल भवन निर्माण के लिए आवश्यक राशि की स्वीकृति मुख्यमंत्री श्री साय ने दी है।आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले के लिए इस अस्पताल को मील का पत्थर माना जा रहा है। सरकार की मंशा आगे चल कर, इसे मेडिकल कालेज के रूप में विकसित करने की है। जानकारी के लिए बता दें कि बीते वर्ष दिसंबर माह में राज्य की बागडोर सम्हालने के बाद मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जशपुर सहित पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा के विस्तार और इसमें गुणात्मक सुधार के लिए लगातार कार्य कर रहें हैं। उन्होनें शपथ ग्रहण करने के तत्काल बाद प्रदेश में एंबुलेंस सेवा में सुधार के लिए जिम्मेदार अधिकारियोें को सख्त निर्देश दिये थे। इस परिपालन में जरूरतमंद मरीजों या परिजनों से काल प्राप्त होने के आधा घंटे के अंदर मरीज को एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया था। केबिनेट की पहली बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी सरकारी चिकित्सालयों में मरीजों के लिए सस्ती जेनरीक दवाओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिये थे। बीते 8 माह के कार्यकाल के दौरान जशपुर जिले में स्वास्थ्य सेवा के विस्तार के लिए तेजी से काम हो रहा है।कुनकुरी में 220 बिस्तर के अस्पताल के साथ ही मरीजों की सुविधा के लिए 25 अतिरिक्त एंबुलेंस और 1 शव वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 7 उप स्वास्थ्य केन्द्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का दर्जा देते हुए, आवश्यक मानव संसाधन को स्वीकृति दी जा चुकी है। जिले में 19 एमबीबीएस चिकित्सक और 7 विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना कर, चिकित्सकों की कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अस्पतालों में मशीनों की कमी को दूर करने के लिए 2 करोड़ 32 लाख की स्वीकृति राज्य सरकार ने दी है। इस राशि से कुनकुरी में डायलिसिस केन्द्र शुरू करने के साथ ही जशपुर, मनोरा, लोदाम, बगीचा के अस्पतालो में आवश्यक उपकरणों की खरीदी में किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा जशपुर जिले को स्वास्थ्य सेवा कर क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाना है, ताकि मरीज और उनके स्वजनों को उपचार के लिए भटकना ना पड़े।
- रायपुर /राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए गए राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक एक जून 2024 से अब तक राज्य में 899.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में 01 जून 2024 से आज 29 अगस्त सवेरे तक रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार बीजापुर जिले में सर्वाधिक 1862.9 मिमी और सरगुजा जिले में सबसे कम 497.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी है।राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक सूरजपुर जिले में 910.4 मिमी, बलरामपुर में 1312.8 मिमी, जशपुर में 780.9 मिमी, कोरिया में 929.2 मिमी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 922.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी।इसी प्रकार, रायपुर जिले में 742.1 मिमी, बलौदाबाजार में 937.3 मिमी, गरियाबंद में 853.9 मिमी, महासमुंद में 689.5 मिमी, धमतरी में 781.3 मिमी, बिलासपुर में 840.8 मिमी, मुंगेली में 940.1 मिमी, रायगढ़ में 871.6 मिमी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 525.9 मिमी, जांजगीर-चांपा में 981.8 मिमी, सक्ती 843.8 मिमी, कोरबा में 1213.5 मिमी, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 929.1 मिमी, दुर्ग में 533.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गयी। कबीरधाम जिले में 702.7 मिमी, राजनांदगांव में 869.6 मिमी, मोहला-मानपुर-अंबागढ़चौकी में 981.3 मिमी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 643.4 मिमी, बालोद में 908.3 मिमी, बेमेतरा में 496.2 मिमी, बस्तर में 945.8 मिमी, कोण्डागांव में 860.8 मिमी, कांकेर में 1066.1 मिमी, नारायणपुर में 1002.7 मिमी, दंतेवाड़ा में 1110.8 मिमी और सुकमा जिले में 1195.8 मिमी औसत वर्षा एक जून से अब तक रिकार्ड की गई।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ के 4 आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है। मंत्रालय से इसे लेकर बुधवार को आदेश जारी हुआ। आदेश के अनुसार 2 आईएएस को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। आर प्रसन्ना को नए आदेश के मुताबिक वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ-साथ उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।राजेद्र कुमार कटारा को उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के मिशन संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं आईएएस जनक प्रसाद पाठक को बिलासपुर संभाग का आयुक्त बनाया गया है। वहीं नीलम नामदेव एक्का को मंत्रालय में सचिव का दायित्व सौंपा गया है।

- रायपुर / राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किए गए उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज के सभी वर्गों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से 1 से 8 सितम्बर 2024 तक देशव्यापी साक्षरता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान शिक्षा और साक्षरता पर केन्द्रित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। साक्षरता सप्ताह का समापन 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाएगा।स्कूल शिक्षा सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि इस साक्षरता सप्ताह के दौरान, पूरे देश भर में, जिला, ब्लॉक, नगरीय क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों के साथ-साथ प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से बुनियादी साक्षरता, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल, और सतत् शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।साक्षरता सप्ताह कार्यक्रम के अंतर्गत पहले दिन 01 सितम्बर को उल्लास रथ की रवानगी और शैक्षणिक संस्थाओं में विभिन्न सेमिनार व सम्मेलन का आयोजन, दूसरे दिन 02 सितम्बर को समस्त शैक्षणिक संस्थानों में उल्लास ‘सबके लिए शिक्षा’ पर केन्द्रित गीत, नृत्य, पेंटिंग जैसे विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन, तीसरा दिन 03 सितम्बर को पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों में उल्लास कार्यक्रम पर चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसी तरह चौथे दिन 04 सितम्बर को उल्लास महिला साक्षरता पर केंद्रित कार्यक्रम और व्यावसायिक कौशल पर आधारित सामग्री का प्रदर्शन, पांचवां दिन 05 सितम्बर को शैक्षणिक संस्थानों में उल्लास नवभारत साक्षरता पर केन्द्रित थीम पर भाषण और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन, छठवां दिन 06 सितम्बर को नवाचारी गतिविधियों का प्रदर्शन और सतत शिक्षा पर केंद्रित कार्यक्रम, सातवां दिन 07 सितम्बर को शैक्षणिक संस्थाओं में उल्लास साक्षरता रैली का आयोजन एवं अंतिम दिवस 08 सितम्बर को राज्य स्तरीय उल्लास मेला और अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का आयोजन किया जाएगा।
- -पुरस्कार वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 के लिए 97 पुरस्कारग्राही खिलाड़ियों को दी जाएगी 76 लाख की पुरस्कार राशि-पदक विजेता 502 खिलाड़ियों के बैंक खाते में जाएंगे 60.33 लाख रूपए-खिलाड़ियों को मिलेंगे, 01 करोड़ 36 लाख 33 हजार रूपए-अलंकरण समारोह पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में दोपहर 12 बजे सेरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय गुरूवार 29 अगस्त 2024 को राज्य खेल अलंकरण समारोह में राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को पुरस्कृत करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह करेंगे। कार्यक्रम के अतिविशिष्ट अतिथि केन्द्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री द्वय श्री अरूण साव और श्री विजय शर्मा तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री टंकराम वर्मा होंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य खेल अलंकरण समारोह का आयोजन राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में दोपहर 12 बजे से किया जाएगा।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक सर्व श्री राजेश मूणत, पुरन्दर मिश्रा, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, इन्द्रकुमार साहू, गुरू खुशवंत साहेब होंगे।कार्यक्रम में राज्य शासन द्वारा वर्ष 2021-22 के लिए शहीद राजीव पाण्डे पुरस्कार के लिए 06, शहीद कौशल यादव पुरस्कार के लिए 06, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार के लिए 02, शहीद पंकज विक्रम सम्मान 11, शहीद विनोद चौबे सम्मान के लिए 05 एवं मुख्यमंत्री ट्राफी वर्ष 2021-22 के लिए 11 खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।इसी प्रकार वर्ष 2022-23 हेतु शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार के लिए 04, शहीद कौशल यादव पुरस्कार के लिए 07, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार के लिए 01, शहीद पंकज विक्रम सम्मान 15, शहीद विनोद चौबे सम्मान के लिए 05 एवं मुख्यमंत्री ट्राफी वर्ष 2022-23 के लिए 24 चयनित खिलाड़ियों को ट्राफी देकर सम्मानित किया जाएगा।खेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पुरस्कार वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 के लिए 97 पुरस्कारग्राही खिलाड़ियों को दी जाएगी 76 लाख रूपए की पुरस्कार राशि, पदक विजेता 502 खिलाड़ियों के बैंक खाते में जाएंगे 60.33 लाख रूपए की राशि इस तरह खिलाड़ियों को मिलेंगे 01 करोड़ 36 लाख 33 हजार रूपए शामिल हैं।
- -शेष जिलों के विद्यार्थियों को 1 प्रतिशत ब्याज दर पर मिलेगा ऋण-कमजोर आर्थिक स्थिति वाले विद्यार्थियों को मिलेंगे तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के बेहतर अवसर-मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना: 2 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थी होंगे पात्र-डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 35 तकनीकी एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल-ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा 4 लाख रूपए-कलेक्टरों को अभियान चलाकर अधिक से अधिक छात्रों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देशरायपुर। छत्तीसगढ़ के माओवादी आतंक से प्रभावित जिलों में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को तकनीकी एवं व्यावसायिक उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर दिलाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इन जिलों में अधिक से अधिक विद्यार्थियों को ’मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना’ के तहत लाभान्वित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए विशेष अभियान चलाने कहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य के अन्य जिलों के कलेक्टरों को भी कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को भी तकनीकी एवं व्यावसायिक उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत के ब्याज दर पर दी जा रही ऋण सुविधा का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए हैं।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के संचालन के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इस योजना के अंतर्गत डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 35 तकनीकी एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। योजना में ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा रूपये 4 लाख निर्धारित है।मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के तहत तकनीकी शिक्षा एवं अन्य व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेशित ऐसे छात्रों को, जिनके परिवारों की वार्षिक आय 2 लाख से कम है, उनको मोेरेटोरियम अवधि के पश्चात ऋण किश्तों के नियमित भुगतान की स्थिति में केवल एक प्रतिशत की दर से ब्याज देय होगा। शेष ब्याज की राशि का भुगतान राज्य शासन द्वारा सीधे संबंधित बैंक को किया जायेगा।राज्य के माओवादी आतंक प्रभावित जिले बस्तर, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, जशपुर, उत्तर बस्तर कांकेर, कोरिया, नारायणपुर, राजनांदगांव, सरगुजा, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद, सुकमा, कोण्डागांव एवं बलरामपुर जिले के छात्रों को ब्याज मुक्त ऋण मिलेगा।इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित शर्ताें में छात्र को छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना चाहिए। छत्तीसगढ़ राज्य में स्थापित तथा सक्षम प्राधिकारी (यथा एआईसीटीई, यूजीसी) मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम प्रवेशित हो। अधिकतम पारिवारिक आय रूपये 2 लाख होनी चाहिए, जो कि सक्षम अधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।योजना के अंतर्गत ब्याज अनुदान के लिए शिक्षा ऋण की अधिकतम सीमा रूपये 4 लाख है। ब्याज अनुदान का लाभ लेने के लिए नियमित रूप से ऋण किश्तों का भुगतान अनिवार्य है। ड्राप ऑउट एवं निष्कासित छात्र इस योजना के लाभार्थी नहीं बने रहेंगे किन्तु चिकित्सीय कारणों से एक वर्ष की अधिकतम सीमा तक अध्ययन में रूकावट होने की दशा में पात्रता बनी रहेगी।इन पाठ्यक्रमों में मिलेगा लाभयोजना के अंतर्गत बीई/बीटेक, एमई, एम टेक, डी आर्क, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, एमसीए, एम.बी.ए, डीई, बी.पी.एड, एमपीएड, पी.जी.डी.सी.ए., बी.एच.एम.एस., बी.ए.एम.एस, बी.एन.वाई.एस, बी.एन.एस., बी.यू.एम.एस, वी.एफ.एस.सी., बी.टेक डेयरी, बी.एग्री, बी.डी.एस, एमडीएस, एमबीबीएस, बीव्हीएससी, बीएससी नर्सिंग बेसिक तथा पोस्ट बेसिक, बी. फार्मा, एम फार्मा, डी फार्मा, डिप्लोमा इन मॉर्डन आफिस मेनेजमेंट, डिप्लोमा इन इंटीरियर डेकोरेशन एण्ड डिजाइन, डिप्लोमा इस कास्टयूम डिजाईन एण्ड ड्रेस मेकिंग, बीएड, डीएड, एमएड, के पाठ्यक्रमों में अध्ययन के लिए योजना का लाभ लिया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 0771-2331231 सम्पर्क तथा वेबसाइटhttp://www.cgdteraipur.cgstate.gov.inपर अवलोकन किया जा सकता है।
- -स्वास्थ्य संचालक ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से सभी जिलों को दिए सावधानी बरतने एवं मरीजों के त्वरित उपचार करने के निर्देशरायपुर। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्री ऋतुराज रघुवंशी ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों को बीमारियों को देखते हुए सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। वीडियो कांफ्रेंस में प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा समस्त सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से डायरिया एवं H1N1 प्रकरणों की वर्तमान स्थिति , उनकी रोकथाम एवं उपचार के लिए की जा रही तैयारियों की स्थिति पर चर्चा एवं समीक्षा की गयी।=समीक्षा बैठक में श्री रघुवंशी ने मलेरिया, डेंगू, जापानी इन्सेफेलाइटिस, सर्पदंश के प्रकरणों की वर्तमान स्थिति और उनकी रोकथाम एवं उपचार की तैयारियों की भी समीक्षा की । इसके साथ ही राज्य में दवाइयों एवं कंस्यूमेबल्स की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति की जिलेवार जानकारी ली गयी। इसके साथ ही मातृत्व स्वास्थ्य अंतर्गत हाई रिस्क प्रेगनेन्सी के प्रकरणों की स्थिति की भी समीक्षा की गयी। बैठक में मातृत्व मृत्यु अंकेक्षण की स्थिति, टी.बी. की वर्तमान स्थिति एवं दवाइयों की उपलब्धता की स्थिति, टीकाकरण की वर्तमान स्थिति और सिकल सेल उन्मूलन मिशन अंतर्गत स्क्रीनिंग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गयी। इसके साथ ही बान्डेड चिकित्सकों के जॉइनिंग की स्थिति, स्थानांतरित चिकित्सकों के कार्यमुक्त होने की स्थिति और नाको अंतर्गत संचालित ओएसटी केन्द्रों की स्थिति की समीक्षा भी बैठक में की गयी।
- रायपुर । विगत 06 माह से जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के अंतर्गत विचरण कर रहें बाघ के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु आज वनमंडल स्तरीय चरवाहों का एक दिवसीय सम्मेलन सह कार्यशाला बारनवापारा अभ्यारण्य में आयोजन किया गया। कार्यशाला में उपवनमंडलाधिकारी कसडोल आई.एफ.एस अक्षय दिनकर भोसले के द्वारा पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से बाघ के व्यवहार एवं अन्य गतिविधियों के बारे में बारीकी से विस्तृत जानकारी साझा किया गया। उनके द्वारा बाघ विचरण क्षेत्र में की जाने वाली गतिविधियों, ट्रैकिंग के संबंध में निर्धारित स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर एवं विचरण क्षेत्र में विभिन्न वन्यप्राणियों के खान-पान और व्यवहार के बारे में विस्तार से चर्चा कर जानकारी दी गई।वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार मयंक अग्रवाल के द्वारा विगत लगभग 06 माह से क्षेत्र में विचरण कर रहे बाघ के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा किया गया। मॉनिटरिंग हेतु वनमण्डल अंतर्गत 250 ट्रैप कैमरा के मदद से बाघ विचरण की सतत् निगरानी की जा रही है। बाघ की सुरक्षा हेतु विशेष स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बाघ निगरानी दल बनाया गया है। वनक्षेत्रों में किसी भी प्रकार से जनहानि, जनघायल, पशुहानि, फसल हानि, एवं अन्य सम्पत्ति की क्षति होने पर तत्काल सूचित करने तथा अवैध शिकार एवं वन्यप्राणियों की जानकारी प्राप्त होने पर तत्काल वन विभाग को सूचित करने हेतु कार्यशाला में उपस्थित चरवाहों तथा ग्रामीणों से अपील किया गया। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों द्वारा वन्यप्राणियों के द्वारा किये गये जनहानि पर 6 लाख लाख रू., पूर्ण रूप से अपंगता होने पर 2 लाख रू., सामान्य जन घायल पर 5 लाख 91 हजार रूपये , पशु हानि होने पर अधिकतम 30 हजार रू. तथा फसल, मकान एवं अन्य क्षति होने पर मुल्यांकन अनुसार क्षतिपूर्ति राशि शासन द्वारा प्रदान की जाने की जानकारी दी गई । वनक्षेत्रों में अवैध शिकार, बिजली हुकिंग तथा अन्य अवैध गतिविधियों की जानकारी होने पर वन विभाग को प्राथमिकता से सूचित करने पर वन विभाग के द्वारा प्रदाय किये जाने वाली गोपनीय पुरूस्कार राशि से अवगत कराया गया। ग्रामीणों को वन विभाग से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या हो तो सुविधानुसार निकटम वनाधिकारी / जांच नाकों में सूचित करने हेतु अह्वान किया गया ताकि, त्वरित कार्यवाही कर समस्यों का निराकरण किया जा सके।
- -वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली से लिया जाएगा तकनीकी मार्गदर्शनरायपुर, / कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़ द्वारा पूर्व में 23 अगस्त को रायपुर जिला सहित प्रदेश में कानूनन संरक्षण पाए तोतो एवं अन्य पक्षियों के धडल्ले से बिक्री के संबंध में कार्यवाही के निर्देश जारी किए गए थे। जिसमें संशोधन करते हुए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) छत्तीसगढ़ अटल नगर, रायपुर द्वारा सभी मुख्य वन संरक्षक एवं वनमण्डालधिकारी को पत्र प्रेषित किया गया है, जिसके तहत प्रतिबंधित संरक्षण पाए गए वन पक्षियों की धड़ल्ले से हो रही बिक्री के संबंध में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 यथा संशोधित 2022 के तहत वर्तमान में हो रही खरीदी बिक्री पर प्रतिबंध हेतु आवश्यक कार्यवाही किया जाना है। परन्तु तोतों एवं अन्य पक्षी जो घरों में पाले गए है, उनके संबंध में इस कार्यालय द्वारा 23 अगस्त के तहत जारी निर्देशों पर भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली एवं वन्यप्राणी प्रभाग से आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन लिए जाने तक कार्यवाही स्थगित रखा जाएगा।
- -विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे शुभारंभ, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम करेंगे अध्यक्षता-दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में जुटेंगे देश भर के कृषि अभियंतारायपुर / इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में 29 और 30 अगस्त 2024 को ‘सतत विकास के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हेतु कृषि अभियंताओं का योगदान’ विषय पर 36वां राष्ट्रीय सम्मेलन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ 29 अगस्त को सुबह 10ः45 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। इस कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुनील के. अम्बस्ट, और इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के उपाध्यक्ष डॉ. नूतन के. दास विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर, रायपुर, स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, कृषि अभियांत्रिकी संकाय और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। सम्मेलन में इंजीनियरिंग इनपुट का संरक्षण और प्रबंधन, फार्म मशीनरी, कृषि प्रसंस्करण, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, मिट्टी और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसमें कृषि में मशीनीकरण, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आई.ओ.टी. के उपयोग पर विचार-विमर्श किया जाएगा।कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख वैज्ञानिक, उद्यमी, शोधकर्ता, और प्रगतिशील कृषक शामिल होंगे, जो किसानों की आय बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। आई.आई.टी. खड़गपुर के पूर्व प्राध्यापक डॉ. बी.सी. मल, परभणी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इंद्रमणी, मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सिंह, वैशाली बिहार के कुलपति डॉ. गौड, सचिव और महानिदेशक, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), कोलकाता के डॉ. सयाली, सहायक महानिदेशक डॉ. ए.के. सिंह, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारत सरकार, नई दिल्ली के डॉ. रमना राव, निदेशक एन.आई.टी., रायपुर, डॉ. मेहता निदेशक, केन्द्रीय कृषि इंजीनियरिंग संस्थान, भोपाल, सहित देश भर के विख्यात विषय विशेषज्ञ इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
- -महतारी वंदन योजना से सास-बहू की आर्थिक समस्या हुई दूररायपुर / कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर पहाड़ो से घिरा गाँव है कारीमाटी..। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले इस गाँव में खपरैल वाले कच्चे मकान में एक साथ रहने वाली सास-बहू मंगली बाई और प्रमिला बाई को बहुत ही विपरीत परिस्थितियों में रहना पड़ता है। इनके छोटे से गाँव से अन्य गाँव की दूरी अधिक होने और रास्ते में घना जंगल तथा पहाड़ होने की वजह से रोजी-मजदूरी का काम भी मिल नहीं पाता था, ऐसे में कई जरूरी कार्यों के लिए पैसे और आर्थिक तंगी के बीच जीवन में भी उदासी थी। महतारी वंदन योजना प्रारंभ होने के बाद नगदी के लिए तरसते सास-बहू को अब खाते में ही हर महीने रुपये मिल जाते हैं, जिससे उन्हें उनकी जरुरतों का सामान खरीदने में कोई परेशानी नहीं आती। हर महीने मिलने वाली महतारी वंदन की राशि इनकी उदासी हटाने के साथ ही खुशियों की वजह भी बन रही है।पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम कारीमाटी में रहने वाली प्रमिला बाई और उनकी सास मंगली बाई ने बताया कि अन्य गाँव से उनके गाँव की दूरी अधिक होने की वजह से वे कही जा नहीं पाते। गाँव में जो थोड़ा बहुत खेत है उसमें ही खेती किसानी में सहयोग कर लेती हैं। उन्होंने बताया कि गाँव में हाजिरी मजदूरी मिलना मुश्किल है। अन्य गाँव की दूरी इतनी अधिक हैं कि वे चाहकर भी जा नहीं सकते। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना प्रारंभ होने के दौरान उन्होंने भी आवेदन जमा किया था। योजना से जुड़ने के पश्चात हर महीने उनके बैंक खाते में एक हजार की राशि आती है। इस राशि से घर में किराना सहित अन्य जरूरतों की पूर्ति आसानी से हो पाती है। मंगली बाई ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा महतारी वंदन योजना लागू किए जाने पर हम जैसी पहाड़ और वनांचल क्षेत्र में रहने वाली जरूरतमंद महिलाओं को खुशहाल जीवन का एक आधार मिल गया। ग्रामीण महिलाओं के लिए एक हजार की राशि कोई छोटी रकम नहीं होती। उन्होंने कहा कि वह अपनी बहू के साथ हर महीने बैंक जाकर पैसा निकाल लाती है और इस राशि का उपयोग घर के बहुत जरूरी कार्यों में करती है।
- -हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर उनके योगदान को किया यादरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त पर प्रदेशवासियों, खिलाड़ियों और खेल-प्रेमियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। श्री साय ने कहा कि हॉकी के जादूगर माने जाने वाले मेजर ध्यानचंद के सम्मान और याद में उनके जन्मदिन को हम हर साल खेल दिवस के रूप में मनाते हैं। श्री साय ने मेजर ध्यानचंद के खेल के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए कहा कि ध्यानचंद जी ने हॉकी में अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर भारत को ओलंपिक में तीन बार गोल्ड मेडल दिलाया। उन्होंने अपने खेल से भारतवासियों का सिर गर्व से ऊंचा किया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खेलों का जीवन में बहुत महत्व होता है। खेल से व्यक्तित्व में नेतृत्व, समर्पण, अनुशासन जैसे गुण विकसित होते हैं जो जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के लिए मदद करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए खेल के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को उभारने के लिए खेल विकास प्राधिकरण का गठन सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल अधोसंरचनाओं का निर्माण किया गया है।
- रायपुर / प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन गुरूवार 29 अगस्त को एक दिवसीय बालोद प्रवास पर रहेंगे। इसके अलावा वे राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य खेल अंलकरण समारोह में भी शामिल होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार केबिनेट मंत्री श्री देवांगन दोपहर 12 बजे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में आयोजित राज्य खेल अंलकरण समारोह में शामिल होंगे। तत्पश्चात् अपरान्ह 2 बजे शंकर नगर रायपुर से बालोद के लिए रवाना होकर शाम 4 बजे जिला मुख्यालय बालोद पहुंचेंगे। वहां वे टाउनहॉल बालोद में आयोजित देवांगन समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में सम्मिलित होंगे। तत्पश्चात् शाम 5.40 बजे बालोद से रवाना होकर देर शाम 7.40 बजे रायपुर लौट आयेंगे।
- रायपुर । संघ लोक सेवा आयोग नई दिल्ली द्वारा आयोजित कम्बाईन्ड डिफेंस सर्विस (सीडीएस) आगामी एक सितम्बर आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा 3 पालियों में आयोजित की जाएगी। प्रथम पाली प्रातः 9 बजे से 11 बजे, द्वितीय पाली दोपहर 12 बजे से 2 बजे एवं तृतीय पाली दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक आयोजित होगी। नेशनल डिफेंस एकेडमी एण्ड नेवल एकेडमी परीक्षा (एनडीए) 2024 एक सितम्बर को प्रात 10 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक एवं दोपहर 2 बजे से 4.30 बजे तक संचालित की जाएगी। इस परीक्षा के नोडल अधिकारी श्री केदार पटेल रोजगार अधिकारी, सहायक नोडल अधिकारी श्री भगवान सिंह यादव एवं श्री चन्द्रमणी वर्मा लाइब्रेरी सहायक को बनाया गया है।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में एक फोन कॉल पर समस्या का समाधान हो रहा है। वार्ड क्रमांक 52 निवासी श्री धनश्याम श्रीवास्तव ने समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायत की थी। उन्होनंे बताया था कि लगभग 12 दिन पहले गैस सिलेंडर बुक करवाया था। लेकिन इसके बाद भी एंजेसी से सिलंेडर की डिलीवरी नहीं हुई। जिससे इनको परेशानी का सामना करना पड रहा था। उन्होंने कलेक्टोरेट के जनसमस्या निवारण कॉल सेंटर में फोन किया और जहां से उनकी समस्याओं का निराकरण करने के लिए संबंधित विभाग को जानकारी दी गयी। जिसके बाद संबंधित गैस एंजेसी ने इनको 2 घंटे के अंदर सिलेंडर की डिलीवरी मिल गई। समस्या का निदान होने पर श्री श्रीवास्तव काफी खुश है और उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति भी आभार जताया।

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