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- जोन 6 ने बकाया अदा नहीं करने पर वार्ड 61 में 4 आवासीय सह व्यवसायिक परिसरों को सीलबंद किया, इनमें से 1 सम्पतिकर धारक ने स्थल पर 33175 रूपये का पार्ट पेमेंट किया-30 जून 2026 तक वर्तमान वर्ष 2026-27 का सम्पतिकर का पूर्ण भुगतान करने वाले सभी सम्पतिकर दाताओं को सम्पतिकर की राशि में 6:25 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रहीरायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर आज दिनांक 25 जून 2026 गुरूवार को रायपुर नगर निगम राजस्व विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य अनुसार 1 करोड़ रूपये से भी अधिक 634 सम्पतियों से 1 करोड़ 33 लाख 20157 रूपये का राजस्व वसूला गया.आज जोन 1 ने 55 सम्पतियों से 10 लाख 91078 रूपये, जोन 2 ने 52 सम्पतियों से 13 लाख 36 हजार 622 रूपये राजस्व वसूली की.इसी प्रकार जोन 3 ने 59 सम्पतियों से 13 लाख 56581 रूपये, जोन 4 ने 59 सम्पतियों से, 12 लाख 36151 रूपये, जोन 5 ने 61 सम्पतियों से 10 लाख 23 हजार 256 रूपये, जोन 6 ने 45 सम्पतियों से 10 लाख 48 हजार 889 रूपये, जोन 7 द्वारा 41 सम्पतियों से 16 लाख 12 हजार 219 रूपये, जोन 8 द्वारा 63 सम्पतियों से 13 लाख 51 हजार 858 रूपये का राजस्व वसूला गया. जोन 9 द्वारा 96 सम्पतियों से 10 लाख 52 हजार 411 रूपये का राजस्व और नगर निगम जोन 10 द्वारा 103 सम्पतियों से 22 लाख 11 हजार 92 रूपये का राजस्व आज दिनांक 25 जून 2026 गुरूवार को वसूला गया.वहीं जोन 6 राजस्व विभाग की टीम द्वारा जोन अंतर्गत वार्ड 61 क्षेत्र में नगर निगम जोन 6 राजस्व विभाग को बकाया राशि अदा नहीं किये जाने पर 4 आवासीय सह व्यवसायिक परिसरों में सीलबंदी की कार्रवाई की गई. इनमें से स्थल पर एक सम्पतिधारक ने तत्काल 33 175 रूपये का पार्ट पेमेंट जोन 6 राजस्व विभाग को किया गया.यहां यह उल्लेखनीय है कि दिनांक 30 जून 2026 तक वित्त वर्ष 2025-26 के देय सम्पतिकर की राशि की पूर्ण अदायगी करने वाले सम्पति करदाता नागरिकों को सम्पतिकर की राशि में 6:25 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है.
- नगर निगम जोन 4 क्षेत्र में पाथ आईएएस एकेडमी के अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं का किया गया औचक संयुक्त निरीक्षण, सम्बंधित संचालक को कड़े निर्देश दिए गएरायपुर/छत्तीसगढ़ शासन एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य शासन एवं रायपुर जिला प्रशासन, जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के मार्गनिर्देशन में रायपुर नगर पालिक निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा के दिशा - निर्देश पर नगर निगम रायपुर क्षेत्र में अग्निशमन विभाग एवं अन्य विभागों की टीमों द्वारा संयुक्त रूप से कोचिंग सेंटर में अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं का लगातार औचक निरीक्षण जारी है.आज इस क्रम में नगर निगम जोन 4 क्षेत्र में पाथ आईएएस एकेडमी में अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं का औचक निरीक्षण किया गया और सम्बंधित संचालक को नियमानुसार कड़े निर्देश स्थल पर दिए गए.
- नगर निगम जोन 4 क्षेत्र में पाथ आईएएस एकेडमी के अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं का किया गया औचक संयुक्त निरीक्षण, सम्बंधित संचालक को कड़े निर्देश दिए गएरायपुर/छत्तीसगढ़ शासन एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य शासन एवं रायपुर जिला प्रशासन, जिला कलेक्टर डॉ गौरव कुमार सिंह के मार्गनिर्देशन में रायपुर नगर पालिक निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा के दिशा - निर्देश पर नगर निगम रायपुर क्षेत्र में अग्निशमन विभाग एवं अन्य विभागों की टीमों द्वारा संयुक्त रूप से कोचिंग सेंटर में अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं का लगातार औचक निरीक्षण जारी है.आज इस क्रम में नगर निगम जोन 4 क्षेत्र में पाथ आईएएस एकेडमी में अग्नि सुरक्षा एवं अन्य सुविधाओं का औचक निरीक्षण किया गया और सम्बंधित संचालक को नियमानुसार कड़े निर्देश स्थल पर दिए गए.
- -यदि किसी रहवासी नागरिक के पास ऐसा नल कनेक्शन है, जो नगर निगम के रिकार्ड में दर्ज नहीं है, तो नल कनेक्शन वैध करवाने के अवसर का लाभ उठाएं, अवैध नल कनेक्शन को वैध बनाएं”भविष्य में किसी भी अप्रिय दण्डात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपने नजदीकी जोन कार्यालय में तुरंत सम्पर्क कर योजना का लाभ लेने दिनांक 15 जुलाई से 15 अक्टूबर 2026 के मध्य सम्पर्क करें, इसके पश्चात अवैध नल कनेक्शन विच्छेदन की कार्रवाई की जाएगी*-नल कलेक्शन वैध करवाने नियमितीकरण शुल्क की 3 गुना राशि अधिरोपित की जायेगीरायपुर/ रायपुर नगर पालिक निगम द्वारा नगर निगम क्षेत्र के रहवासी नागरिकों से विनम्र अपील की गयी है कि रायपुर शहर की जलप्रदाय प्रणाली को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए 'एकमुश्त जलकर निपटान योजना' लागू की गई है यदि नगर निगम क्षेत्र के किसी भी रहवासी नागरिक के पास कोई ऐसा नल कनेक्शन है, जो रायपुर नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, तो उसे वैध कराने का यह एक सुनहरा और अंतिम अवसर है.रायपुर नगर पालिक निगम ने अपील की है कि भविष्य में किसी भी अप्रिय दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए इस योजना का तुरंत लाभ उठाएंसम्बंधित रहवासी अपना आवेदन अपने नजदीकी *जोन कार्यालय में 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक दे सकते हैं।आवासीय एवं व्यवसायिक कनेक्शन को वैध कराने के लिए ₹15,882 की राशि निर्धारित है, जिसका योजना के तहत पूरी राशि का भुगतान एक साथ (सिंगल इनस्टॉमेंट ) में करना अनिवार्य है。> ध्यान दें: दिनांक दिनांक 15 अक्टूबर 2026 * तक आवेदन नहीं कराने की स्थिति में *नल कनेक्शन विच्छेदन (काटने) की कार्रवाई की जाएगी अथवा नियमितीकरण शुल्क की तीन गुना (3X) राशि का भारी जुर्माना अधिरोपित किया जाएगा. भविष्य की किसी भी वैधानिक प्रक्रिया, मानसिक परेशानी और नल विच्छेदन की कार्रवाई से बचने के लिए आज ही अपने संबंधित जोन कार्यालय में संपर्क करेंकिसी भी तकनीकी समस्या हेतु 9301953298 पर संपर्क करें।
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-पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा और रामअवतार तिवारी सम्मानित- स्व. कमलनारायण शर्मा स्मृति व्याख्यान एवं सम्मान समारोह संपन्न-कार्यक्रम में 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारजनों के अलावा अधिवक्ता भी हुए सम्मानितरायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा और रामअवतार तिवारी को 26 जून को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अवसर था स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय कमलनारायण शर्मा स्मृति व्याख्यान और सम्मान समारोह का। इसका आयोजन समाज सेवी संस्था 'ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा' द्वारा रायपुर के शहीद स्मारक भवन में किया गया था।गौरतलब है कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक, राष्ट्रभक्त एवं प्रखर अधिवक्ता स्वर्गीय कमलनारायण शर्मा की पुण्य स्मृति में समाज सेवी संस्था 'ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा' द्वारा उनके जीवन मूल्यों, त्याग और देशप्रेम को नमन करने हेतु प्रतिवर्षानुसार व्याख्यान एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस साल यह कार्यक्रम 26 जून को रायपुर के शहीद स्मारक भवन में हुआ।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र ने की। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक तिवारी और स्व कमल नारायण शर्मा की सुपुत्री सविता पाठक उपस्थित थीं।इस वर्ष के व्याख्यान का विषय 'सुरक्षित भारत - चुनौतियाँ एवं समाधान' रखा गया, जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था, नीतिगत पहलुओं एवं जनसहभागिता पर गंभीर चिन्तन को प्रोत्साहित किया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अश्विनी उपाध्याय ने राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिक अधिकारों और कानूनी सुधारों पर सशक्त विचार व्यक्त करते हुए धर्मान्तरण और घुसपैठ देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। भारत की सुरक्षा चुनौतियों एवं उनके समाधान पर उनके विचार उपस्थित जनसमूह, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं एवं बुद्धिजीवियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहे।कार्यक्रम में 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवारों को सम्मानित किया गया, जिनमें स्व. मोतीलाल त्रिपाठी, स्व. नारायण दास राठौर, स्व. नारायण प्रसाद दुबे, स्व. वल्लभ दास गुप्ता, स्व. सरदार सुंदर सिंह, स्व. जगन्नाथराव नायडू, स्व. नागरदास बावरिया, स्व. पारस राम सोनी, स्व. छेदीलाल दूबे, स्व. कुंजलाल मिश्रा एवं स्व. जगदीश प्रसाद मिश्रा के उत्तराधिकारी शामिल थे।इसके अलावा विधि सेवा के क्षेत्र में विनोद प्रधान, बृजेश नाथ पांडेय और श्रीमती रूपाली शर्मा को सम्मानित किया गया।समारोह में सांस्कृतिक एवं स्मृति प्रस्तुति भी आयोजित की गई, जिसने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया।इस आयोजन में रायपुर एवं आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिकों, बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, छात्रों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं प्रेस मीडिया ने उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाया।कार्यक्रम में जिंदगी ना मिलेगी दोबारा संस्था प्रमुख सुषमा तिवारी सहित संरक्षक अजय शर्मा , सचिव ममता शर्मा सहित समस्त पदाधिकारी एवम सदस्य गण उपस्थित थे। - दुर्ग. केंद्रीय जेल दुर्ग में आज बंदियों के पुनर्वास एवं समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से "नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराना तथा उन्हें स्वस्थ, अनुशासित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।कार्यक्रम में श्रीमती हिमांशु जैन, प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय जिला दुर्ग द्वारा नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं पारिवारिक दुष्प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही नशे से मुक्ति के प्रभावी उपाय, परामर्श (काउंसलिंग) तथा आत्मविश्वास एवं इच्छाशक्ति के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।इस अवसर पर बंदियों ने नशामुक्त जीवन अपनाने एवं समाज में लौटकर जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।जेल प्रशासन द्वारा बताया गया कि बंदियों के सर्वांगीण विकास एवं सफल पुनर्वास के लिए समय-समय पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम, योग, ध्यान, कौशल विकास एवं परामर्श गतिविधियों का आयोजन निरंतर किया जाता है। इस प्रयासों का उद्देश्य बंदियों में समारात्मक सोच विकसित करना तथा उन्हें अपराध एवं नशे से दूर रखते हुए समाज की मुख्यधारा में पुनर्स्थापित करना है। "नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम" के आयोजन में जेल अधीक्षक श्री मनीष सम्भाकर एवं अन्य जेल स्टॉफ उपस्थित रहें।
- 0- जल संरक्षण के साथ आजीविका संवर्धन का सफल माध्यम बने निजी कुएँरायपुर. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत जल संरक्षण और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से जिले में निजी कुओं का निर्माण कराया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में जिले में कुल 185 निजी कुओं का निर्माण किया गया है, जिससे अनेक ग्रामीण परिवारों को सिंचाई की स्थायी सुविधा उपलब्ध हुई है।सिंचाई की उपलब्धता बढ़ने से फसल उत्पादन में सुधार होने के साथ-साथ सब्जी एवं बाड़ी जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। इससे किसानों की आय बढ़ने की नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।यह पहल केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण एवं जल संचयन की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। भूजल स्तर की सतत निगरानी के लिए प्रतिवर्ष मानसून से पहले और मानसून के बाद 'जलदूत एप' के माध्यम से नवीन एवं पूर्व से निर्मित सभी निजी कुओं का जलस्तर मापन दर्ज किया जा रहा है। इससे जल संसाधनों के संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन में भी मदद मिल रही है।
- 0- जल्द मिले समाधान से उत्साहित दुर्गा बाई ने जताता मुख्यमंत्री के प्रति आभाररायपुर. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप आम जनता की समस्याओं के समयबद्ध समाधान और सुशासन को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है।इसी क्रम में रायपुर की श्रीमती दुर्गा बाई साहू का लंबे समय से लंबित आधार अपडेट का मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज होने के मात्र दो दिनों के भीतर सुलझ गया।श्रीमती साहू ने बताया कि पिछले 2-3 वर्षों से अपना आधार अपडेट कराने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से उनका काम नहीं हो पा रहा था। आधार अपडेट नहीं होने से उन्हें सरकारी योजनाओं और अन्य आवश्यक सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।समस्या से परेशान होकर उन्होंने 13 जून 2026 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही संबंधित अधिकारियों और चिप्स कार्यालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उनसे संपर्क किया तथा आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई। इसके परिणामस्वरूप 15 जून 2026 को उनका आधार सफलतापूर्वक अपडेट कर दिया गया।दुर्गा बाई ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की त्वरित कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित उनकी समस्या का मात्र दो दिनों में समाधान होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।
- 0- जिले में 1381 बूथों पर 3,45,373 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का लक्ष्य0- छूटे हुए बच्चों को 29-30 जून को घर-घर जाकर पिलाई जाएगी खुराकरायपुर। कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के निर्देशानुसार राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर 28 जून 2026 को पूरे रायपुर जिले में पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी। जिला स्वास्थ्य समिति ने सभी पालकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को निकटतम बूथ पर ले जाकर दवा अवश्य पिलाएं।भारत पोलियो मुक्त है, लेकिन पड़ोसी देशों में अभी भी पोलियो वायरस से ग्रसित बच्चे पाए गए हैं। इससे देश में पोलियो संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इसी खतरे को देखते हुए 0 से 5 वर्ष के बच्चों को प्रतिरक्षित करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।अभियान के तहत जिले के समस्त ग्रामों एवं वार्डों में कुल 1381 पोलियो बूथ बनाए जाएंगे। प्रत्येक बूथ पर 04 टीकाकर्मी दो टीमों में बंटकर बच्चों को दवा पिलाएंगे। बूथों की मॉनिटरिंग के लिए प्रत्येक 05 बूथ पर एक सुपरवाइजर की ड्यूटी लगाई गई है।यदि कोई बच्चा 28 जून को बूथ पर दवा पीने से छूट जाता है तो 29 एवं 30 जून को घर-घर भ्रमण कर ऐसे बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी। पूरे अभियान की निगरानी एवं मॉनिटरिंग जिला मुख्यालय के अधिकारी व कर्मचारी करेंगे।रायपुर जिले में 3,45,373 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित है। अभियान की सभी आवश्यक तैयारियां जैसे पोलियो मार्कर पेन, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, प्रशिक्षण, ओरल पोलियो वैक्सीन की उपलब्धता जिले के सभी विकासखण्डों एवं शहरी क्षेत्र में पूरी कर ली गई है।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी के मार्गदर्शन में अभियान का संचालन किया जा रहा है। यह जानकारी जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. श्वेता सोनवानी ने दी।राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, मितानिन, महिला आरोग्य समिति का सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही आइस पैक जमाने के लिए सिलेस्ट्री आइसक्रीम फैक्ट्री तथा कैप्स फूड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भी सक्रिय सहयोग दिया जा रहा है।जिला स्वास्थ्य समिति ने सभी पालकों से अपील की है कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को बूथ में ले जाकर पोलियो रोधी दवा पिलाकर उन्हें पोलियो वायरस से सुरक्षित करें।
- -शहीद की माताजी से की आत्मीय भेंट, अंत्योदय कार्ड जारी करने के दिए निर्देशरायपुर । महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने सुकमा जिले के जगरगुंडा स्थित शहीद एएसआई रामू राम नाग के निवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र की रक्षा एवं जनसेवा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने शहीद की माताजी से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान प्रदेश और देश की अमूल्य धरोहर है तथा उनके परिवारों का सम्मान और संरक्षण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।इस अवसर पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने संबंधित अधिकारियों को शहीद परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए शहीद की माताजी के लिए अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण करने को कहा, ताकि उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सहजता से प्राप्त हो सके।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, विश्वास और शांति के नए युग की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में प्रदेश के वीर सपूतों के त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखना हम सभी का दायित्व है। शहीद परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।
- -कभी नक्सल प्रभाव का प्रतीक रहे इलाकों में अब विकास, विश्वास और जनभागीदारी की नई इबारतरायपुर। बस्तर अब भय और हिंसा की पहचान से आगे बढ़कर विकास, विश्वास और जनसहभागिता के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे सुदूर अंचलों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आजीविका के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। इसी परिवर्तनशील बस्तर की तस्वीर को और सशक्त करने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एक दिवसीय प्रवास पर सुकमा जिले के जगरगुंडा, चिंतलनार, पूर्वर्ती और सिलगेर पहुंचीं।विशेष महत्व की बात यह रही कि श्रीमती राजवाड़े सड़क मार्ग से जगरगुंडा पहुंचने वाली पहली महिला मंत्री बनीं। वर्षों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में उनका आगमन विकास और शासन की संवेदनशील उपस्थिति का प्रतीक बनकर उभरा।दौरे के दौरान मंत्री ने पूर्वर्ती एवं सिलगेर स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया तथा अन्नप्राशन और गोदभराई कार्यक्रमों में शामिल होकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय समय बिताया, ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिकाधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और हिंसा के कारण चर्चा में रहते थे, वहीं आज महिला स्वावलंबन, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास के केंद्र बन रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और नई संभावनाओं का सृजन कर रही हैं।प्रवास के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जगरगुंडा स्थित कृतिका महिला संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) भवन का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।ग्रामीण महिलाओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि पहली बार कोई महिला मंत्री सड़क मार्ग से सीधे जगरगुंडा पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और संवाद करने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल शासन के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत करने वाली है तथा यह अनुभव कराती है कि विकास की मुख्यधारा अब वास्तव में उनके गांव तक पहुंच चुकी है।श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसमर्थन और सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का नया वातावरण निर्मित हुआ है। जगरगुंडा, पूर्वर्ती और सिलगेर जैसे क्षेत्रों में आज बच्चों की मुस्कान, महिलाओं का बढ़ता आत्मविश्वास और विकास की नई संभावनाएं बदलते बस्तर की सशक्त पहचान बन चुकी हैं।
- -उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा पहुंचे नक्सलियों की मांद कहलाने वाले ग्राम किसकोड़ो, ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं-आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा किसकोड़ो - उप मुख्यमंत्री श्री शर्मारायपुर/ कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे "भारत माता की जय" के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी श्री आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी, एडीएम श्री एएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़ श्री राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
- रायपुर / महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बस्तर संभाग के सुकमा जिले के प्रवास के दौरान सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र, लस्केपारा (छिंदगढ़) की पोषण वाटिका में नन्हें बच्चों के साथ मुनगा एवं पपीता के पौधों का पौधरोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘‘हर-घर मुनगा, घर-घर सुपोषण’’ का संदेश देते हुए पौष्टिक आहार, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का आह्वान किया।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों को मुनगा और पपीता के पोषण संबंधी महत्व, इनके स्वास्थ्य लाभ तथा संतुलित आहार में उनकी उपयोगिता के बारे में सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों के हाथों से भी पौधे लगवाए और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि मुनगा को "सुपोषण वृक्ष" के रूप में पहचान मिल चुकी है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां और फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं तथा कुपोषण की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पपीता भी विटामिन एवं खनिज तत्वों का उत्कृष्ट स्रोत है, जो बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों के अभिभावकों से अपने घरों एवं आंगनों में मुनगा के पौधे लगाने की अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने आसपास पौष्टिक वृक्ष लगाए, तो घर के समीप ही पोषक आहार उपलब्ध होगा और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी सुनिश्चित होगी।उन्होंने कहा कि स्वस्थ बचपन, सुपोषित परिवार और हरित भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पौधरोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प भी है। राज्य सरकार द्वारा संचालित सुपोषण अभियान के अंतर्गत पोषण वाटिकाओं के माध्यम से बच्चों, किशोरियों और माताओं को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। बस्तर अंचल से शुरू हुआ यह संदेश प्रदेश में पोषण, स्वास्थ्य और हरियाली के प्रति जनजागरूकता का प्रभावी अभियान बनकर उभर रहा है।
- file photo0- जोगनीपाली स्थित उर्वरक गोदाम से 978 बोरी उर्वरक जब्तमहासमुंद. किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरक भंडारण एवं विक्रय में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सरायपाली विकासखंड के ग्राम जोगनीपाली स्थित एक उर्वरक गोदाम का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान टीम ने मेसर्स अग्रवाल ट्रेडर्स, सरायपाली के स्वामित्व वाले गोदाम का भौतिक सत्यापन किया। जांच में गोदाम में 440 बोरी यूरिया, 250 बोरी 20:20:0:13 तथा 288 बोरी एस.एस.पी.सहित कुल 978 बोरी उर्वरक भंडारित पाया गया।निरीक्षण के समय प्रतिष्ठान संचालक द्वारा उर्वरक भंडारण केंद्र से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सरायपाली अनुपमा आनंद की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया गया तथा उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के खंड 28(1)(डी), प्रोफार्मा-2, प्रोफार्मा-2ए एवं प्रोफार्मा-4 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की गई।संयुक्त टीम द्वारा उक्त भंडारण केंद्र को सील करते हुए वहां मौजूद कुल 978 बोरी उर्वरक को जब्त किया। जब्त उर्वरक को आवश्यक कार्रवाई पूर्ण करते हुए मेसर्स अग्रवाल ट्रेडर्स, सरायपाली को सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है। कृषि विभाग ने बताया कि जिले में उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण की नियमित निगरानी की जा रही है तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।
- 0- एम.टेक. (डाटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) में प्रवेश का सुनहरा अवसर0- प्रतिमाह 50 हजार रुपए की फेलोशिप, ट्यूशन फीस का पूरा खर्च वहन करेगी राज्य सरकाररायपुर। तकनीकी शिक्षा को सुशासन और नवाचार से जोड़ने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित मुख्यमंत्री आईटी फेलोशिप 2026 के अंतर्गत एम.टेक. (डाटा साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कार्यक्रम में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 7 जुलाई 2026 कर दी गई है। पूर्व में आवेदन की अंतिम तिथि 1 जुलाई निर्धारित थी।यह कार्यक्रम नवा रायपुर स्थित IIIT-NR में संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को प्रतिमाह 50 हजार रुपए की फेलोशिप प्रदान की जाएगी। साथ ही उनकी ट्यूशन फीस का संपूर्ण व्यय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वहन किया जाएगा।मख्यमंत्री आईटी फेलोशिप कार्यक्रम की विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ राज्य शासन के विभिन्न विभागों में वास्तविक परियोजनाओं (Projects) पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। इससे प्रतिभाशाली युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डाटा साइंस के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा तथा शासन की डिजिटल सेवाओं और नवाचार आधारित पहलों में योगदान देने का अवसर भी मिलेगा।इच्छुक अभ्यर्थी, जिनका मूल निवास छत्तीसगढ़ का हो, 7 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रक्रिया के लिए IIIT-NR की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण का अवलोकन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए कार्यालयीन समय में दूरभाष क्रमांक 0771-2474048 एवं 0771-2474182 पर संपर्क किया जा सकता है।
- 0- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन की प्राथमिकता— बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण व्यवस्थाओं से कोई समझौता नहीं0- औचक निरीक्षण में मिली अव्यवस्थाओं पर जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, कई अधिकारियों के प्रभार भी बदले गएरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था के संकल्प के अनुरूप सुकमा जिले में छात्रावासों एवं आश्रमों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 प्रारंभ होने से पहले कलेक्टर के नेतृत्व में छात्रावासों का औचक निरीक्षण किया गया, जिसमें लापरवाही और अव्यवस्था पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।25 जून को कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में कई छात्रावासों एवं आश्रमों में साफ-सफाई की कमी, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अनुपस्थिति तथा संचालन में लापरवाही जैसी गंभीर कमियां पाई गईं। पूर्व में समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के बावजूद सुधार नहीं होने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं के आधार पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन तथा प्रभार से पृथक करने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दायरे में कन्या आश्रम दुब्बाटोटा की अधीक्षिका श्रीमती सुशीला कवासी, प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास दुब्बाटोटा के अधीक्षक श्री पुनेम हिरमा, पोस्ट-मैट्रिक कन्या छात्रावास की अधीक्षिका श्रीमती सविता यादव तथा प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के श्री भोजराज ठाकुर शामिल हैं। छात्रावासों का संचालन प्रभावित न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक अधिकारियों को जिम्मेदारी भी सौंप दी है।कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों और आश्रमों में अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शासन की मंशा के अनुरूप सभी संस्थाओं में गुणवत्तापूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।जिला प्रशासन की यह कार्रवाई शासकीय छात्रावासों और आश्रमों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे व्यवस्थाओं में सुधार आएगा, अनुशासन मजबूत होगा और विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुशासन की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।
- 0- मोटर वाहन नियमों के उल्लंघन पर होगी चालानी कार्रवाई, परिवहन विभाग ने जारी किए निर्देश0- सड़कों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगारायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन नियमों के प्रभावी पालन के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में परिवहन विभाग ने रबर टायर के बिना दोहरे लोहे के पिंजरे (आयरन केजव्हील) वाले ट्रैक्टरों के सामान्य सड़कों पर संचालन पर सख्ती बरतने के निर्देश जारी किए हैं।परिवहन विभाग ने सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे ट्रैक्टरों के सड़क पर संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ट्रैक्टरों में लगाए जाने वाले आयरन केजव्हील केवल कृषि कार्य और खेतों में उपयोग के लिए बनाए गए हैं। इन्हें रबर टायर के स्थान पर डामर, सीमेंट की सड़कों तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलाना मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।लोक निर्माण विभाग के अनुसार ऐसे ट्रैक्टरों के सड़क पर चलने से डामर और सीमेंट की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। साथ ही दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने इस पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों और वाहन चालकों को मोटर वाहन नियमों तथा आयरन केजव्हील के सुरक्षित एवं निर्धारित उपयोग की जानकारी दी जाएगी।परिवहन विभाग ने स्थानीय समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विशेष अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना तथा मोटर वाहन नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना है।
- 0- सेव और नाशपाती की बागवानी का किया अवलोकन, किसानों से की चर्चाजशपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से नव-नियुक्त 7 डिप्टी कलेक्टरों ने मैदानी प्रशिक्षण के अंतर्गत जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड का भ्रमण किया। छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, निमोरा (रायपुर) द्वारा आयोजित इस परिचयात्मक प्रशिक्षण का उद्देश्य युवा अधिकारियों को ग्रामीण विकास, स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्रीय संभावनाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना है।भ्रमण के दौरान प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने मनोरा क्षेत्र में विकसित सेव (एप्पल) और नाशपाती की बागवानी का अवलोकन किया। उन्होंने उद्यानिकी विशेषज्ञों एवं किसानों से चर्चा कर जशपुर की अनुकूल जलवायु, आधुनिक बागवानी तकनीकों तथा फल उत्पादन की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने क्षेत्र में हो रही उन्नत बागवानी की सराहना करते हुए इसे स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बताया। जशपुर प्रवास पर आए प्रशिक्षणार्थी डिप्टी कलेक्टरों में श्री रविशंकर वर्मा, सुश्री निधि प्रधान, सुश्री नंदनी साहू, श्री मनीष बघेल, श्री सौरभ दीवान, श्री लखेश्वर यादव एवं श्री सत्येन्द्र कुमार बंजारे शामिल रहे। मैदानी प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने जिले की विकास गतिविधियों, ग्रामीण आजीविका और कृषि आधारित नवाचारों का भी अध्ययन किया।
- कोंडागांव। जिले के ग्राम ग्राम दावड़ीबेड़ा (चिखलपुटी) के युवा किसान पुनम नेताम आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना रहे हैं। उन्होंने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर अपनी फसलों में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया है। पिछले दो वर्षों से वे धान, मक्का और सब्जियों की खेती में नैनो उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।पुनम नेताम ने बताया कि गत वर्ष उन्होंने 10 एकड़ भूमि में मक्का की खेती की थी। नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसल की वृद्धि अच्छी हुई और उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। उनका कहना है कि नैनो उर्वरक का छिड़काव सीधे पौधों की पत्तियों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्व शीघ्रता से पौधों तक पहुंचते हैं। इससे उर्वरक की उपयोग क्षमता बढ़ती है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।पुनम ने बताया कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने अन्य किसानों से भी वैज्ञानिक पद्धतियों और नैनो उर्वरकों के उपयोग को अपनाने की अपील की। राज्य एवं केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता तथा कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन से जिले के किसान आधुनिक कृषि की ओर अग्रसर हो रहे हैं और खेती को अधिक लाभकारी बना रहे है।
- 0- एक ही दिन में मिला स्थानीय निवास प्रमाण-पत्र, वंदना हेमला बोलीं— अब सरकारी सेवाएं घर के नजदीक और आसानबीजापुर। जिला प्रशासन बीजापुर की डिजिटल पहल 'सेवा सेतु' ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए सुशासन का प्रभावी माध्यम बन रही है। सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से अब नागरिकों को विभिन्न शासकीय प्रमाण-पत्र और अन्य आवश्यक सेवाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल रही हैं। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बच रहे हैं तथा शासन के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हो रहा है।विकासखंड भैरमगढ़ की ग्राम पंचायत तड़केल निवासी वंदना हेमला ने सेवा सेतु केन्द्र नेलेसनार के माध्यम से स्थानीय निवास प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया। आवेदन प्राप्त होने के बाद उसी दिन उनका आवेदन निराकृत कर स्थानीय निवास प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया।सेवा सेतु केन्द्र के प्रबंधक श्री मुकेश कुमार बघेल ने उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान किया। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध रही, जिससे उन्हें किसी भी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े।वंदना हेमला ने बताया कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण-पत्र के लिए कई बार कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों खर्च होते थे। लेकिन सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन की प्रक्रिया बहुत आसान रही और उन्हें एक ही दिन में प्रमाण-पत्र मिल गया। इससे उनके जरूरी कार्य भी समय पर पूरे हो सके।वंदना हेमला का कहना है कि सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से अब सरकारी सेवाएं गांव के नजदीक ही उपलब्ध हो रही हैं। इससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से भी मुक्ति मिली है। जिला प्रशासन बीजापुर द्वारा संचालित सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से स्थानीय निवास, जाति, आय, जन्म, मृत्यु, विवाह सहित अनेक शासकीय सेवाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल शासन की डिजिटल सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और सुशासन को मजबूत बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।ग्राम तड़केल, विकासखंड भैरमगढ़ निवासी वंदना हेमला ने बताया कि सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से मुझे स्थानीय निवास प्रमाण-पत्र बहुत कम समय में मिल गया। पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल एवं जिला प्रशासन बीजापुर और सेवा सेतु केन्द्र का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।
- 0- बलौदाबाजार जिले के 1लाख 40 हजार से अधिक बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्यबलौदाबाजार। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस "पल्स पोलियो अभियान 2026" का आयोजन जिले में 28 से 30 जून 2026 तक किया जाएगा। अभियान अंतर्गत प्रथम दिवस 28 जून को जिले के लगभग 831 बूथ पर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई जायेगी। 29 एवं 30 जून को घर-घर भ्रमण कर मितानिन,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्रशिक्षु नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्राओं द्वारा पिलाई जाएगी।अभियान के तहत जिले के 1 लाख 40 हजार 879 बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिले के सभी 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के अभिभावकों से पोलियो बूथ में पहुंचकर अपने बच्चों को दवा पिलाने की अपील की है। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकताओं का सहयोग करने का आग्रह किया है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कुमार अवस्थी ने बताया कि विश्व पोलियो उन्मूलन अंतर्गत राष्ट्रीय टीकाकरण का आयोजन किया जा रहा है जिसके तहत जिले में 1 लाख 40 हज़ार 879 बच्चे लक्षित हैं। इसकी निगरानी के लिए अधिकारी- कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई लगाई गई है । इस बाबत पोलियो वैक्सीन और आवश्यक प्रशिक्षण सहित पूरी तैयारी कर ली गई है। समस्त टीमों को समय पर पोलियो की दवा उपलब्ध कराने एवं कार्य संपादन की निगरानी जिम्मेदारी दी गई है।सभी ब्लॉक के ग्रामों के अलावा बस स्टैंड, रेल्वे स्टेशन में पोलियो बूथ बनाने के साथ ट्रांजिट टीमों द्वारा निर्माणाधीन क्षेत्र, खदानों, ईट भट्टा, स्लम एरिया, मेला, बाजार आदि में छूटे हुए बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने हेतु ट्रांजिट टीम का गठन किया गया है।
- कवर्धा। कवर्धा (कबीरधाम) जिले के बासिनझोरी, बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा धान खरीदी केंद्रों की संयुक्त जांच में करीब 81.19 लाख रुपए का धान घोटाला पकड़ा गया है। तीनों केंद्रों के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर कुल 2,441.92 क्विंटल धान और लगभग 21,982 नग खाली बारदाने गायब पाए गए। तीनों केंद्रों के प्रबंधक (मैनेजर) गंगादास मानिकपुरी थे, जिन्होंने अन्य फड़ प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मिलकर इस हेरफेर को अंजाम दिया।किसानों को फंसाने की साजिश: जांच में सामने आया कि तौल पत्रकों पर जानबूझकर ऑपरेटरों/प्रबंधकों के हस्ताक्षर नहीं थे, ताकि जांच होने पर केवल किसानों के हस्ताक्षर के जरिए उन्हें फंसाया जा सके।हुई कानूनी कार्रवाई:मामला सामने आने के बाद सहसपुर लोहारा थाने में मुख्य आरोपी प्रबंधक, फड़ प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों सहित 6 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।18 जून 2026 को खाद्य, सहकारिता और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के संयुक्त जांच दल द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में बासिनझोरी, बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा धान खरीदी केंद्रों से कुल 2,441.92 क्विंटल धान और 21,982 बारदाने गायब पाए गए। प्रारंभिक जांच में इस कथित घोटाले की राशि लगभग 81.19 लाख रुपए आंकी गई है। जांच के अनुसार बासिनझोरी केंद्र में 585.98 क्विंटल धान और 4,130 बारदाने, बिरनपुर कला में 1,032.36 क्विंटल धान और 5,777 बारदाने, जबकि सहसपुर लोहारा केंद्र में 823.58 क्विंटल धान और 12,075 बारदाने की कमी दर्ज की गई। खास बात यह है कि तीनों केंद्रों का संचालन एक ही प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी के जिम्मे था। बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा में वे प्रबंधक के साथ-साथ खरीदी प्रभारी की भूमिका भी निभा रहे थे। मामले में पुलिस ने प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी, सहसपुर लोहारा के फड़ प्रभारी बलदाऊ डड़सेना, कंप्यूटर ऑपरेटर बिहारी राम साहू, बासिनझोरी के फड़ प्रभारी तुकाराम साहू, कंप्यूटर ऑपरेटर पीलूराम साहू तथा बिरनपुर कला के कंप्यूटर ऑपरेटर महावीर साहू के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।
- 0- गांवों के विकास में सहभागी बनने किया आह्वान, पुनर्वासित युवाओं की सुनी समस्याएं0- सुविधाओं, प्रशिक्षण की ली जानकारी, सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए निर्देशनारायणपुर. उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अपने नारायणपुर प्रवास के दौरान शनिवार देर शाम पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा से जुड़े पुनर्वासित युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप भी उपस्थित रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों एवं शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य प्रत्येक पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पुनर्वासित युवाओं से अपील की कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मुलाकात कर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का मार्ग ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।उप मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्र में संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी जानकारी ली। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही उत्साहपूर्ण भागीदारी की उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण है। युवाओं से चर्चा के दौरान जब खेतों में सिंचाई के लिए बोर व्यवस्था की आवश्यकता बताई गई, तब उप मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों एवं पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे कृषि के माध्यम से स्थायी आजीविका अर्जित कर सकें।श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली भ्रामक और भटकाने वाली सूचनाओं से सावधान रहने का आग्रह करते हुए कहा कि बस्तर का विकास बस्तर के लोगों के सहयोग से ही संभव है। उन्होंने पुनर्वासित युवाओं का आह्वान किया कि वे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनें। वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण और विकास तक आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लेने वाले युवाओं ने इस परिवर्तन की शुरुआत कर दी है और अब सभी को मिलकर क्षेत्र तथा समाज के समग्र विकास के लिए कार्य करना चाहिए।इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नाराश्री रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- 0- कलेक्टर ने बोथापारा और चनागांव का किया जमीनी निरीक्षण0- वैज्ञानिक मत्स्य पालन और बागवानी के इंटीग्रेटेड मॉडल से किसानों की आय होगी दोगुनी0- कॉर्पोरेट पार्टनरशिप (एबिस कंपनी) से इनपुट कॉस्ट में 25% की छूट, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकसरायपुर. छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक स्वावलंबन और जल संरक्षण को लेकर एक बेहद अनूठा और सफल प्रयोग सामने आ रहा है। धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और 'जल निधि परियोजना' के बेहतरीन तालमेल ने पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के नए द्वार खोल दिए हैं। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों (डबरी) को महज जल संचय तक सीमित न रखकर, उन्हें वैज्ञानिक मत्स्य पालन से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। इसी जमीनी हकीकत और इसकी भविष्य की संभावनाओं को परखने के लिए कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के सुदूर ग्राम बोथापारा और चनागांव का सघन दौरा किया। उन्होंने सीधे खेतों की मेढ़ पर पहुंचकर महिला मत्स्य पालकों और प्रगतिशील किसानों से संवाद किया और इस आजीविका मॉडल को ग्रामीण समृद्धि की एक नई और स्थायी दिशा बताया।अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को बताया कि प्रत्येक आजीविका डबरी का एक मानक आकार तय किया गया है। ग्रामीण इस मॉडल को अपनाकर बेहद कम लागत में अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। लगभग 33 हजार रुपये की लागत से वैज्ञानिक देखरेख में लगभग 6 महीने में 20*20*3 मीटर की आजीविका डबरी का निर्माण किया जा सकेगा।इस मॉडल को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने 'एबिस कंपनी' के साथ हाथ मिलाया है। सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनी इन ग्रामीण मत्स्य पालकों को मछली दाना (फीड) की खरीदी पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दे रही है। इससे किसानों की उत्पादन लागत काफी घट गई है और उनका शुद्ध लाभांश बढ़ गया है। नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक श्रीमती सावित्री दर्रो के खेत पहुंचकर कलेक्टर ने खुद डबरी का मुआयना किया। सावित्री ने बताया कि उनके पास करीब 7 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे बरसों से पारंपरिक रूप से सिर्फ धान की खेती करती आ रही थीं। लेकिन अब उन्होंने अपने खेत में दो आजीविका डबरियां तैयार की हैं, जिनमें कतला, रोहू और मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन हो रहा है।इस कहानी में नया मोड़ तब आया जब अधिकारियों ने बताया कि सावित्री के बेटे ओमप्रकाश को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की एडवांस ट्रेनिंग के लिए अगले महीने पुरी (ओडिशा) भेजा जा रहा है। वहां से ट्रेनिंग लेकर लौटने के बाद वह न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके के युवाओं को उन्नत और आधुनिक मत्स्य पालन की बारीकियां सिखाएगा। इसके बाद कलेक्टर चनागांव के प्रगतिशील किसान श्री नारायण सिंह नेताम के खेत पहुंचे। श्री नेताम ने अपनी 5 एकड़ कृषि भूमि में से दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं। खास बात यह है कि वे डबरी के पानी से सिर्फ मछली पालन नहीं कर रहे, बल्कि उसके चारों तरफ आम की बागवानी (हॉर्टिकल्चर) भी अपना चुके हैं। डबरी के पोषक तत्वों से भरपूर पानी की वजह से बागवानी की फसल भी बंपर हो रही है, जिससे उन्हें सालभर एक फिक्स और मोटी आमदनी मिल रही है।कलेक्टर ने खुद मौके पर जाकर डबरी के पानी की गुणवत्ता (Water Quality) की जांच भी कराई।कलेक्टर ने जिले के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत बनने वाली हर एक सरकारी और निजी परिसंपत्ति का शत-प्रतिशत उत्पादक उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य सिर्फ गड्ढे खुदवाना या अस्थाई रोजगार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के हाथ में एक ऐसा साधन सौंपना है जिससे वे जीवनभर कमाई कर सकें। मनरेगा, जल संरक्षण और वैज्ञानिक मत्स्य पालन का यह त्रिवेणी संगम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, गांवों में कुपोषण दूर कर पोषण सुरक्षा लाएगा और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देगा।वर्तमान में धमतरी जिले के 16 गांवों में यह आजीविका मॉडल सफलतापूर्वक जमीन पर उतर चुका है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब अगले चरण में 50 गांवों की 50 आजीविका डबरियों में इस मत्स्य पालन विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और सतत कृषि विकास (Sustainable Agriculture) को गति देने की दिशा में यह प्रयोग एक नजीर बन चुका है।
- राजनांदगांव। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गुंजन झा ने बताया कि अल-नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य एवं पूर्वी भाग के समुद्री जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके प्रभाव से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, वर्षा में कमी या असमान वितरण हो सकता है तथा सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को अग्रिम तैयारी करने की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा वर्ष 2026 के खरीफ मौसम में संभावितअल-नीनो प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श एवं आकस्मिक कार्ययोजना जारी की गई है। इसमें मानसून के आगमन में विलंब, कम वर्षा तथा लंबे शुष्क अंतराल (ड्राई स्पेल) की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है। कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करें। धान की रोपा पद्धति के स्थान पर सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता दें। खेतों में मजबूत मेड़बंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करें। उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाएं। फसल विविधीकरण द्वारा जोखिम को कम करें। बुवाई से पूर्व बीजों का कार्बेन्डाजिम एवं थायमेथोक्साम व इमिडाक्लोप्रिड से उपचार करें। धान में एजोस्पिरिलम, अन्य फसलों में एजोटोबैक्टर तथा दलहनी फसलों में राइजोबियम जैव उर्वरकों का उपयोग करें। बुवाई के 3 से 5 दिन के भीतर अनुशंसित अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी का प्रयोग करें। यदि 15 जुलाई तक पर्याप्त अंकुरण न हो तो पुन: बुवाई करें तथा सामान्य बीज दर से 10 प्रतिशत अधिक बीज का उपयोग करें। जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द तथा अगस्त माह में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि की अरहर की बुवाई करें। कतार पद्धति से बुवाई एवं मल्चिंग अपनाकर मिट्टी की नमी संरक्षित रखें। गांवों में नालों पर अस्थायी बांध बनाकर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें। कम वर्षा की स्थिति में नत्रजन उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें। 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव तथा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करें। दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल का छिड़काव करें। तालाब, कुएं एवं अन्य जल संरचनाओं में वर्षा जल संग्रहित करें तथा आवश्यकता पडऩे पर जीवन रक्षक सिंचाई दें। ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाएं। मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनाएं तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें। किसान समय रहते उचित तैयारी, जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर एल-नीनो के संभावित प्रतिकूल प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।


























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