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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने रेलवे पुलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और मेट्रो रेल की विद्युत प्रणालियों को उन्नत बनाने के लिए 895.30 करोड़ रुपए की प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य सुरक्षा, क्षमता और संचालन दक्षता को बेहतर बनाना है। कोलकाता मेट्रो के उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए 671.72 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी मिली है। इसके तहत 7 नए ट्रैक्शन सबस्टेशन बनाए जाएंगे और मौजूदा 11 केवी बिजली प्रणाली को 33 केवी में अपग्रेड किया जाएगा।इस उन्नयन से मेट्रो की संचालन क्षमता में बड़ा बदलाव आएगा। पहले जहां ट्रेनें 5 मिनट के अंतराल पर चलती थीं, अब उन्हें 2.5 मिनट के अंतराल पर चलाने की मंजूरी मिल गई है, जिससे बढ़ती यात्री मांग को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
1980 के दशक में विकसित मेट्रो सिस्टम अब अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुका है। पुराने सबस्टेशन और उपकरणों में स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण रखरखाव में दिक्कतें आ रही थीं। नए उन्नयन से बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय होगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।दक्षिण पूर्वी रेलवे के आद्रा डिवीजन में 223.58 करोड़ रुपए की लागत से पुल अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा। मधुकुंडा-दामोदर खंड पर स्थित पुराने पुल (संख्या 520) के आधारभूत ढांचे का पुनर्निर्माण किया जाएगा, जो 1903 और 1965 में बनाए गए थे और अब कमजोर हो चुके हैं।यह खंड आसनसोल और टाटानगर के बीच एक अहम रेलवे लिंक है और कोयला गलियारे का हिस्सा भी है। इस परियोजना से सुरक्षा, विश्वसनीयता और संचालन दक्षता में सुधार होगा। साथ ही दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों को बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलेगा।इन परियोजनाओं के जरिए भारतीय रेलवे आधुनिक, सुरक्षित और उच्च क्षमता वाली रेल प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मेट्रो उन्नयन से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, जबकि पुल परियोजना से माल ढुलाई और औद्योगिक संपर्क को मजबूती मिलेगी। ( -
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि 1 साल से कम उम्र के बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम, 3 साल की उम्र तक ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के बढ़े हुए खतरे से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती उम्र में स्क्रीन के अधिक संपर्क से बच्चों के मस्तिष्क विकास और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें बच्चों के व्यवहार, संचार और सामाजिक संपर्क में अंतर देखा जाता है। कई मामलों में इसके संकेत 12 से 18 महीने की उम्र में ही दिखने लगते हैं, जिससे समय पर पहचान और हस्तक्षेप बेहद जरूरी हो जाता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के 2025 के अनुमान के अनुसार, लगभग हर 31 में से 1 व्यक्ति में ASD पाया जाता है। यह आंकड़ा मजबूत पब्लिक हेल्थ सिस्टम और जागरूकता की जरूरत को दर्शाता है।एम्स के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शेफाली गुलाटी ने बताया कि कई शोध और मेटा-एनालिसिस में पाया गया है कि जिन बच्चों में स्क्रीन एक्सपोज़र जल्दी शुरू होता है और स्क्रीन टाइम अधिक होता है, उनमें ऑटिज्म के लक्षण ज्यादा देखे जाते हैं।एम्स के अध्ययन में भी यह सामने आया कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों में स्क्रीन टाइम की शुरुआत कम उम्र में हुई थी। साथ ही, लड़कों में इसकी दर अधिक देखी गई, हालांकि लड़कियों में भी लक्षण स्पष्ट रूप से मौजूद थे।विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित रखना बेहद आवश्यक है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइडलाइंस के अनुसार 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। 18 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए सीमित और उद्देश्यपूर्ण (एक्टिव) स्क्रीन उपयोग की सलाह दी जाती है, जबकि 7 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को अधिकतम 2 घंटे तक सीमित रखने की अनुशंसा की गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मोबाइल या टीवी के जरिए व्यस्त रखने के बजाय माता-पिता के साथ सीधा संवाद और इंटरैक्शन उनके मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए ज्यादा जरूरी है।ऑटिज्म की पहचान आमतौर पर 2 से 3 साल की उम्र में होती है, हालांकि 18 महीने के बाद इसके संकेत देखे जा सकते हैं। इसका कोई एक निश्चित मेडिकल टेस्ट नहीं है; पहचान बच्चे के व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक प्रतिक्रिया के आधार पर की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती वर्षों में संतुलित माहौल, सीमित स्क्रीन टाइम और परिवार के साथ अधिक समय बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए बेहद जरूरी है। जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप से ऑटिज्म से जुड़ी चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। -
नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रख्यात गीतकार, लेखक और संचार विशेषज्ञ श्री प्रसून जोशी को भारत के सार्वजनिक सेवा प्रसारक प्रसार भारती का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
श्री जोशी साहित्य, विज्ञापन, सिनेमा और सार्वजनिक संचार के क्षेत्र में व्यापक योगदान देने वाले एक प्रतिष्ठित रचनात्मक व्यक्ति हैं। अपने प्रभावशाली लेखन और गहरी सांस्कृतिक संवेदनशीलता के लिए जाने जाने वाले जोशी ने समकालीन भारतीय मीडिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके कार्यों में प्रशंसित फिल्मी गीत, विज्ञापन अभियान और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानियां शामिल हैं जो देश भर के विभिन्न दर्शकों से जुड़ती हैं।उनकी नियुक्ति पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “प्रसार भारती बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में श्री प्रसून जोशी जी की नियुक्ति पर हार्दिक बधाई। प्रसून जी एक विलक्षण रचनात्मक व्यक्तित्व हैं, जिन्हें विज्ञापन, साहित्य, कला और सिनेमा जगत में विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त है, फिर भी उनका हृदय भारत के लिए धड़कता है। उनके शब्दों में हमारी मिट्टी की सुगंध समाई है और उनकी दृष्टि हमारी संस्कृति के शाश्वत सार को प्रतिबिंबित करती है। उनके नेतृत्व में प्रसार भारती को नई ऊर्जा, गहरा उद्देश्य और एक नई रचनात्मक आवाज मिलेगी। उनके आगामी कार्यकाल के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।”इस नियुक्ति से पहले, श्री जोशी अगस्त 2017 से मुंबई स्थित केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे हैं, जहां उन्होंने फिल्म उद्योग के हितधारकों के साथ जुड़कर फिल्म प्रमाणन प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने में योगदान दिया। सीबीएफसी में उनका कार्यकाल रचनात्मक अभिव्यक्ति और नियामक उत्तरदायित्व के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे पहले, वे मैक्कैन वर्ल्ड ग्रुप इंडिया के सीईओ और मैक्कैन वर्ल्ड ग्रुप एशिया पैसिफिक (मैक्कैन एरिक्सन की एक सहायक कंपनी) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह 2016 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के न्यासियों में से एक हैं।रचनात्मक उद्योगों और सार्वजनिक संचार में अपने व्यापक अनुभव के साथ, श्री जोशी से प्रसार भारती के नेतृत्व में एक अनूठा दृष्टिकोण लाने की उम्मीद है, ऐसे समय में जब सार्वजनिक प्रसारण तीव्र तकनीकी परिवर्तन और विकसित होती श्रोताओं की अपेक्षाओं का सामना कर रहा है।प्रसार भारती के बारे मेंप्रसार भारती (ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) अधिनियम, 1990 के तहत स्थापित और 1997 से कार्यरत, प्रसार भारती भारत का वैधानिक स्वायत्त सार्वजनिक सेवा प्रसारक है। इसके दो प्रमुख विभाग हैं:ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर)- विश्व के सबसे बड़े रेडियो नेटवर्कों में से एक, जो शहरी और ग्रामीण भारत में लाखों श्रोताओं तक कई भाषाओं और बोलियों में पहुंचता है।दूरदर्शन (डीडी)- भारत का राष्ट्रीय टेलीविजन प्रसारक, जो समाचार, शिक्षा, मनोरंजन और सांस्कृतिक सामग्री सहित व्यापक कार्यक्रम प्रस्तुत करता है।प्रसार भारती ने सार्वजनिक प्रसारण की भावना को बढ़ावा देने के लिए फ्री-टू-एयर ओटीटी सेवाओं को मजबूत करने हेतु वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है।प्रसार भारती सूचना के प्रसार, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और देश भर में विश्वसनीय सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपने विशाल स्थलीय और डिजिटल नेटवर्क के साथ, यह डिजिटल प्लेटफॉर्म, डीटीएच सेवाओं और अभिलेखीय पहलों के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार करना जारी रखता है। - नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को शिक्षाविद जोरम अनिया और विद्वान-लेखक आर. बालासुब्रमण्यम को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया।इन दो नियुक्तियों के साथ ही आयोग में उपाध्यक्ष सहित सदस्यों की कुल संख्या सात हो गई है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष हैं।कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, “प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने डॉ. आर बालासुब्रमण्यम और डॉ. जोरम अनिया को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से और अगले आदेश तक पूर्णकालिक सदस्यों पर लागू होने वाले समान नियमों एवं शर्तों पर नियुक्त करने की स्वीकृति दी है।”सरकार ने 24 अप्रैल को नीति आयोग का पुनर्गठन करते हुए अशोक कुमार लाहिड़ी को उपाध्यक्ष और अर्थशास्त्री के.वी. राजू, एम्स के निदेशक एम. श्रीनिवास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय करंदीकर, वैज्ञानिक गोबर्धन दास और पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गाबा को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया था।प्रधानमंत्री मोदी ने नए नियुक्त सदस्यों को बधाई देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त होने पर डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम जी और डॉ. जोरम अनिया जी को हार्दिक बधाई। विभिन्न मुद्दों पर उनका व्यापक अनुभव और गहन समझ नीति निर्माण प्रक्रिया को मजबूत करेगी।”उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि उनका (बालासुब्रमण्यम और अनिया का) योगदान सभी क्षेत्रों में नवाचार और विकास को गति प्रदान करेगा। उनके उज्ज्वल और सफल कार्यकाल की कामना करता हूं।”सूत्रों के अनुसार, अनिया का आयोग में शामिल होना एक ऐतिहासिक क्षण है, जिससे अरुणाचल प्रदेश की एक प्रख्यात बुद्धिजीवी को राष्ट्रीय नीति-निर्माण के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचने का अवसर मिला है।कुशल शिक्षाविद, एसोसिएट प्रोफेसर और अरुणाचल प्रदेश निजी शिक्षा नियामक आयोग की सदस्य अनिया को शिक्षण, अनुसंधान और सार्वजनिक नीति में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है।वह निशि समुदाय की पीएचडी हासिल करने वाली पहली महिला होने के साथ ही राज्य में हिंदी भाषा में पीएचडी करने वाली पहली महिला हैं, जिन्होंने साहित्य, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।विद्वान-लेखक बालासुब्रमण्यम सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ और विकास कार्यकर्ता हैं।योग्य चिकित्सक होने के साथ-साथ वह स्वामी विवेकानंद युवा आंदोलन और ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट (ग्राम) के संस्थापक हैं। बालासुब्रमण्यम ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के हार्वर्ड कैनेडी स्कूल से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है।
- नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात में नेशनल हाईवे-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर देश की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-रहित टोलिंग प्रणाली का शुभारंभ किया। यह नई तकनीक वाहनों को बिना रुके टोल भुगतान की सुविधा देती है। इस अत्याधुनिक प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और FASTag तकनीक का उपयोग किया गया है। इससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी और टोल संग्रह पूरी तरह स्वचालित तरीके से होगा। एमएलएफएफ प्रणाली को भारत के टोलिंग इकोसिस्टम के डिजिटलीकरण और राष्ट्रीय राजमार्गों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और टोल संचालन अधिक पारदर्शी बनेगा।इस नई व्यवस्था से वाहनों के रुकने की आवश्यकता खत्म होने के कारण ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। साथ ही, टोल संचालन में मानवीय हस्तक्षेप कम होने से प्रणाली अधिक कुशल और विश्वसनीय बनेगी। नितिन गडकरी ने कहा कि यह पहल आम नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर बनाएगी और देश में माल एवं लॉजिस्टिक्स की तेज आवाजाही सुनिश्चित कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार विश्व स्तरीय, तकनीक आधारित और यात्री-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 2 मई 2026 को देशव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली का शुभारंभ करेंगे। यह प्रणाली दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से विकसित की गई है।
एनडीएमए ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) द्वारा विकसित एकीकृत अलर्ट सिस्टम ‘SACHET’ को लागू किया है। यह प्रणाली कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है और देश के सभी 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है। इस प्रणाली के जरिए अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से अधिक एसएमएस अलर्ट भेजे जा चुके हैं। इसका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं, मौसम चेतावनियों और चक्रवात जैसी स्थितियों में प्रभावी ढंग से किया गया है। नई व्यवस्था के तहत एसएमएस के साथ सेल ब्रॉडकास्ट (CB) तकनीक जोड़ी गई है। इसके जरिए किसी विशेष क्षेत्र के सभी मोबाइल फोनों पर एक साथ अलर्ट भेजा जाएगा, जिससे लगभग वास्तविक समय में सूचना पहुंच सकेगी। शुभारंभ के दौरान देश के सभी राज्यों की राजधानियों, दिल्ली और एनसीआर में मोबाइल पर टेस्ट संदेश भेजा जाएगा। यह संदेश हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में होगा, जिसमें नागरिकों को सूचित किया जाएगा कि यह केवल परीक्षण है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि टेस्ट संदेश मिलने पर घबराएं नहीं और किसी प्रकार की कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है। यह केवल आपदा चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता जांचने के लिए किया जा रहा है। यह पहल समय-संवेदनशील परिस्थितियों—जैसे भूकंप, सुनामी, बिजली गिरने या रासायनिक दुर्घटनाओं—में त्वरित चेतावनी देने की क्षमता को मजबूत करेगी और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी। -
जयपुर. अलवर जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर चलती कार में आग लगने से तीन महिलाओं और एक नाबालिग लड़की समेत पांच लोगों की जलकर मौत हो गई। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। यह घटना बुधवार रात को लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के मौजपुर के पास हुई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि पुलिस को कल देर रात वाहन में आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। उन्होंने कहा, ''लगभग 15 मिनट में आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक कार पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।'' पुलिस ने बताया कि सभी मृतक मध्य प्रदेश के शिवपुर जिले के निवासी थे और वैष्णो देवी की तीर्थयात्रा से लौट रहे थे। पुलिस उपाधीक्षक कैलाश जिंदल ने बताया कि चलती गाड़ी में आग लगने का कारण अब तक पता नहीं चल पाया है, हालांकि शॉर्ट सर्किट की आशंका है। सीएनजी की मौजूदगी से भी आग और भड़क उठी, जिससे वाहन में सवार लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला। मृतकों में तीन महिलाएं, एक नाबालिग लड़की और एक पुरुष शामिल है। उन्होंने बताया, "वाहन से केवल कंकाल बरामद हुए हैं। उनकी पहचान के लिए डीएनए परीक्षण किए जाएंगे।"
कार चालक विनोद कुमार वाहन से कूदने में कामयाब रहा, लेकिन वह लगभग 80 प्रतिशत झुलस गया। अधिकारियों ने बताया कि उसे पहले पास के एक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है। -
क्योंझर. ओडिशा के क्योंझर जिले में अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा उसका कंकाल बैंक में ले जाकर उसकी मौत का प्रमाण पेश करने से जुड़े मामले की जांच राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को शुरू कर दी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त (आरडीसी) को इस घटना की जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ था, जिसमें 50 वर्षीय आदिवासी व्यक्ति कंकाल को ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा में ले जाते हुए दिखा था। वीडियो के प्रसारित हो जाने से हंगामा मच गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले की जांच का निर्देश दिया। उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त संग्राम केशरी महापात्रा, क्योंझर जिले के आयुक्त विशाल सिंह और अन्य अधिकारी बृहस्पतिवार को जांच के सिलसिले में ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि महापात्रा ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और घटना के कारणों का पता लगाने के लिए बैंक अधिकारियों से पूछताछ की। टीम क्योंझर जिले के पटाना ब्लॉक के डियानाली गांव भी पहुंची और जीतू मुंडा से पूछताछ की जो अपनी बहन करला मुंडा (56) का कंकाल लेकर बैंक आया था। इस बीच, कांग्रेस की इकाई के पूर्व अध्यक्ष निरंजन पटनायक के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिन में मुंडा से मुलाकात की। बीजू जनता दल (बीजद)की एक तथ्य-अन्वेषी टीम भी बुधवार को मुंडा के घर पहुंची थी और पार्टी ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। अधिकारियों ने बताया कि ओडिशा सरकार ने मुंडा को 30,000 रुपये की सहायता प्रदान की है। मुंडा को अपनी दिवंगत बहन के बैंक खाते से पैसे मिल चुके हैं।
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चंडीगढ़. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 'विकसित भारत' की दिशा में अपने सफर में सभी क्षेत्रों में, विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, एक लंबी छलांग लगाई है। वह यहां सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में बेहतर और अनुकरणीय प्रथाओं तथा नवाचारों पर 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। नड्डा ने कहा, ''अगर मुझे इन पहलों के बारे में बात करनी हो, तो मैं निश्चित रूप से विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में हमारी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दूंगा।'' उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी के गतिशील नेतृत्व में हमने पिछले दशक में एक लंबी छलांग लगाई है और कई नयी पहल शुरू की हैं।'' नड्डा ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण नीति वह है जिसका वह प्राय: उल्लेख करते हैं, वह है 2017 की व्यापक स्वास्थ्य नीति। उन्होंने कहा, ''अगर हम 1997-98 में शुरू की गई स्वास्थ्य नीति की बात करें, तो वह एक उपचारात्मक स्वास्थ्य नीति थी, जो लंबे समय से लागू थी। इसका मुख्य ध्यान उपचारात्मक पहलू पर था।'' नड्डा ने कहा, ''लेकिन 2017 में, जब हमने एक नयी नीति जारी की तो वह एक व्यापक, समग्र और समावेशी नीति थी।'' उन्होंने कहा कि इसमें रोकथाम, प्रोत्साहन, उपचारात्मक, पुनर्वास और वृद्धावस्था संबंधी पहलू शामिल हैं। इस अवसर पर, नड्डा ने स्वस्थ भारत और जननी पोर्टल, सर्वोत्तम प्रथाओं पर सार-संग्रह, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीम के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके-2.0) की शुरुआत की। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों) के बारे में नड्डा ने कहा कि लगभग 1.85 लाख ऐसे केंद्र स्थापित किए गए हैं जो 1.40 अरब लोगों को जोड़ने वाले पहले संपर्क बिंदु हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ''हमारा प्रयास रोकथाम के पहलू को ध्यान में रखना है। चाहे वह उच्च रक्तचाप हो, मधुमेह हो, मुंह का कैंसर हो, स्तन कैंसर हो या गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर हो, हमने इन सभी बीमारियों के लिए 30 वर्ष की आयु में जांच अनिवार्य कर दी है।''
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बेंगलुरु. बेंगलुरु में बुधवार शाम हुई भारी बारिश ने तबाही मचा दी, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए, कई प्रमुख इलाकों में जलभराव हो गया और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बेंगलुरु के बड़े हिस्सों में लगभग एक घंटे तक अचानक और तेज बारिश हुई, जिससे पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए और निचले इलाकों में पानी भर गया। कई सड़कें जलमग्न होने के कारण आवागमन ठप हो गया, जिससे व्यस्त समय में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। मूसलाधार बारिश के दौरान बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल की एक दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें छह साल की एक बच्ची भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में दो लोग केरल के थे, जो अध्ययन दौरे पर आए थे। वे दीवार के पास शरण लिए हुए थे, तभी दीवार गिर गई। एक अन्य घटना में 35 वर्षीय रघु की बैनरघट्टा रोड स्थित वेगा सिटी मॉल के पास करंट लगने से मौत हो गई।
पुलिस ने बताया कि यारब नगर में एक अन्य घटना में छात्र सैयद सुफियान की बारिश के दौरान मोटरसाइकिल खड़ी करते समय बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई। चामराजपेट में भी एक हादसे में मंजुनाथ नामक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जब तूफान के दौरान घर की छत का एक हिस्सा अचानक ढह गया। अचानक हुई इस बारिश ने पूरे शहर में भारी नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने बताया, ''अब तक बारिश से जुड़े हादसों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है।'' इन हादसों में दीवार गिरना, करंट लगना और ढांचागत नुकसान शामिल हैं। नगर निकाय के अनुसार, बेंगलुरु में कम से कम 87 पेड़ उखड़ गए और 131 शाखाएं टूट गईं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। इनमें से 60 पेड़ और 98 शाखाएं हटा दी गई हैं, जबकि मरम्मत का काम जारी है। सड़क किनारे खड़ी कई कारें और दोपहिया वाहन गिरे हुए पेड़ों के नीचे दब गए।
प्रमुख चौराहों और अंडरपास में जलभराव हो गया, जिसमें केआर सर्किल अंडरपास पूरी तरह डूब गया, जिससे पुलिस को वहां अवरोधक लगाने पड़े। यातायात जाम के कारण यात्री घंटों फंसे रहे। अधिकारियों ने बताया कि कई इलाकों में इमारतों को आंशिक नुकसान पहुंचा है और अचानक इतनी तीव्रता के तूफान के लिए लोग तैयार नहीं थे। प्रशासन ने अगले तीन दिनों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। -
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश को पूरी तरह रोकने के लिए एक नई और आधुनिक क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रणाली ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर कार्य करेगी और मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से लागू होगी। इसमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ ही 5 राज्यों के 7 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शामिल हैं। बाद में इसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी भविष्य के आम चुनावों और उपचुनावों में विस्तारित किया जाएगा।यह पहल पिछले एक वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा की गई 30 से अधिक सुधारात्मक पहलों की कड़ी में शामिल है। इससे पहले ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी मानकीकृत क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र शुरू किए जा चुके हैं। नई प्रणाली मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाएगी।मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया गया है। इनमें पहले और दूसरे स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा जारी पारंपरिक फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी। तीसरा और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा (मतगणना कक्ष के निकट) में प्रवेश केवल क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही मिलेगा। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के अंदर जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।नए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों पर लागू होंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों और मतगणना कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इनमें मुख्य रूप से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।अधिकृत मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए हर मतगणना केंद्र पर मतगणना कक्षों के पास एक अलग मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश पहले की भांति आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर ही रहेगा।जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है ताकि पहुंच नियंत्रण निर्बाध और सुरक्षित रहे।सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। -
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India, ECI) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश को पूरी तरह रोकने के लिए एक नई और आधुनिक क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रणाली ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर कार्य करेगी और मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से लागू होगी। इसमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ ही 5 राज्यों के 7 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शामिल हैं। बाद में इसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी भविष्य के आम चुनावों और उपचुनावों में विस्तारित किया जाएगा।यह पहल पिछले एक वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा की गई 30 से अधिक सुधारात्मक पहलों की कड़ी में शामिल है। इससे पहले ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी मानकीकृत क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र शुरू किए जा चुके हैं। नई प्रणाली मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाएगी।मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया गया है। इनमें पहले और दूसरे स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा जारी पारंपरिक फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी। तीसरा और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा (मतगणना कक्ष के निकट) में प्रवेश केवल क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही मिलेगा। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के अंदर जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।नए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों पर लागू होंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों और मतगणना कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इनमें मुख्य रूप से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।अधिकृत मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए हर मतगणना केंद्र पर मतगणना कक्षों के पास एक अलग मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश पहले की भांति आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर ही रहेगा। जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है ताकि पहुंच नियंत्रण निर्बाध और सुरक्षित रहे।सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 1 मई को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV (PMGSY-IV) के शुभारंभ के साथ राज्य को बड़ी विकासात्मक सौगात देंगे। इस दौरान 1,701.84 किलोमीटर लंबाई की 827 सड़क परियोजनाओं को करीब 1,698.04 करोड़ रुपए की लागत से आगे बढ़ाया जाएगा।
यह कार्यक्रम रायगड़ा के आईएसीआर ग्राउंड, बरिजोला में आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री मुख्यमंत्री को PMGSY-IV की स्वीकृति पत्र सौंपेंगे और संयुक्त रूप से परियोजनाओं का शुभारंभ एवं शिलान्यास किया जाएगा।इस पहल से 898 बसावटों को पहली बार बारहमासी सड़क संपर्क मिलेगा। इससे स्कूल, अस्पताल, ग्रामीण मंडियों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी।नई सड़क परियोजनाओं से स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ओडिशा पहले ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुका है। राज्य में अब तक 17,963 सड़कों (74,725 किमी) और 707 पुलों को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 17,760 सड़कों (71,742 किमी) और 658 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नायक सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल होंगे। यह पहल नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य के साझा विकास संकल्प को भी दर्शाती है। -
नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायक और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश खेर अपने हालिया आध्यात्मिक एल्बम ‘जोगी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सिंगर ने ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में नया एल्बम लॉन्च किया और अब वे बद्रीनाथ धाम में नारायण की भक्ति में रंगे दिखे। सिंगर ने अपने साथ दर्शन करने आए सभी श्रद्धालुओं को अपने गीत से मंत्रमुग्ध कर दिया।
बीते बुधवार को कैलाश खेर बद्रीनाथ धाम दर्शन करने पहुंचे थे। सिंगर ने मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। अब अभिनेता ने एक बहुत ही प्यारा वीडियो शेयर किया है जिसमें वे भक्तों के सामने श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि का जाप कर रहे हैं। भक्त भी सिंगर के साथ मिलकर नारायण का ध्यान कर रहे हैं। इस मौके पर सिंगर पीले कपड़ों में नजर आए और माथे पर तुलसी की माला धारण कर रखी है। सिंगर इस तरीके से पूरे होश के साथ नारायण नाम का जाप कर रहे हैं, वो सुनकर किसी को भी गूजबंप्स आना तय है।बता दें कि 23 अप्रैल को भव्य पूजा-अर्चना के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए थे। छोटी चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ धाम महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भक्त गंगोत्री और यमुनोत्री के बाद बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं। बद्रीनाथ धाम भारी बर्फबारी की वजह से 6 माह तक बंद रहते हैं और अप्रैल के महीने में मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।इससे पहले सिंगर को हरिद्वार के गंगा घाट पर सिंगर के गंगा आरती के समय बाबा के भक्ति से भरे गीत गाते हुए देखा गया था। सिंगर फिलहाल धार्मिक यात्रा पर है और अपने पड़ाव की जर्नी को फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं। बात अगर उनके नए एलबम सॉन्ग की करें तो भक्ति गीत में आदि शंकराचार्य के संन्यास से लेकर हिंदू शास्त्रार्थ, धर्म पुनर्जागरण और भारत के आध्यात्मिक क्षेत्रों की शक्ति को प्रभावी तरीके से शब्दों में पिरोकर लिखा गया है। भक्ति गीत सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। - जबलपुर। जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर बरगी बांध में गुरुवार शाम आंधी-तूफान के बीच बड़ा हादसा हो गया। तेज मौसम के चलते यात्रियों से भरा एक क्रूज अचानक डूब गया। पर्यटन विभाग द्वारा संचालित क्रूज में 35-40 लोग सवार थे। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए हैं। बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। हादसे में अब तक पांच पर्यटकों के मौत हो चुकी है। रेस्क्यू टीम को पांचों के शव मिल चुके है। लगभग 15 लोगों को बचा लिया गया है। 15 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। रेस्क्यू जारी है।घटना गुरुवार की शाम लगभग छह बजे की है। बताया जाता है कि क्रूज पर्यटकों को लेकर लहरों के बीच जा रहा था। तभी अचानक तेज आंधी चली और क्रूज अनियंत्रित होकर बरगी बांध की लहरों में समा गया। क्रूज कैप्टन महेश पटेल भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल उनकी खोज में जुटा है।
- सुलतानपुर. सुलतानपुर जिले में बुधवार को तेज आंधी-तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में दो बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुड़वार थाना क्षेत्र के पूरे शिववंश दुबे निवासी 20 वर्षीय महेंद्र तिवारी की आंधी तूफान की वजह से गिरे बिजली के खंभे की चपेट में आने से मौत हो गई। उन्होंने बताया कि महेंद्र अपनी बहन की शादी के लिए 10 दिन पहले ही घर लौटा था और बुधवार शाम को उसे परिवार के साथ बहन कौशिक का तिलक लेकर अलीगंज बाजार जाना था। सूत्रों ने बताया कि बल्दीराय थाना क्षेत्र में आंधी तूफान जनित घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई।उन्होंने बताया कि कस्बा माफियात में सुरेश कुमार सोनकर की आठ वर्षीय बेटी महिमा की मौत आंधी तूफान के दौरान छप्पर पर ईंट गिरने से हुई। सूत्रों ने बताया कि बल्दीराय थाना क्षेत्र के ही सिंघनी गांव में 58 वर्षीय रामबरन के घर पर तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई वहीं गंभीर रूप से घायल उसकी पत्नी श्यामलली को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक एक अन्य घटना में हलियापुर थाना क्षेत्र के पूरे निधई तिवारी मजरे डोभियारा में 35 वर्षीय रीता की मौत कच्ची दीवार और छप्पर गिरने से हो गयी। एक अन्य घटना में अखंडनगर थाना क्षेत्र के बरामदपुर गांव में आठ वर्षीय सुरेमन की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में विकास (16) और किशन (11) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज अम्बेडकरनगर में जारी है। सूत्रों के अनुसार बंधुआकला थाना के अलीगंज दाऊदपुर में घर के पास जामुन का पेड़ गिरने से उसके नीचे दबकर सुषमा गुप्ता (40) की मौत हो गई है। उधर, कूरेभार थाना क्षेत्र में पटना मनीपुर में आंधी पानी के दौरान गिरी कच्ची दीवार के मलबे में दबकर 70 वर्षीय केवला देवी की मौत हो गई है।--
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बैंक अब उधारकर्ताओं के अनुरोध का इंतजार किए बिना ही उन्हें राहत दे सकेंगे। नए नियम एक जुलाई, 2026 से लागू हो जाएंगे। केंद्रीय बैंक ने अपने निर्देश में कहा है कि कर्जदाताओं को सभी पात्र उधारकर्ताओं को अपने स्तर पर ही राहत देने की अनुमति होगी। हालांकि ग्राहक चाहें तो प्राकृतिक आपदा घोषित होने के 135 दिनों के भीतर इससे बाहर निकल सकते हैं।नए दिशा-निर्देश वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, सहकारी बैंकों, एनबीएफसी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों पर लागू होंगे। आरबीआई के मुताबिक, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बैंक अस्थायी परिसरों से शाखाएं चला सकेंगे और सैटेलाइट ऑफिस, एक्सटेंशन काउंटर या मोबाइल बैंकिंग के जरिए सेवाएं बहाल कर सकेंगे। एटीएम सेवाओं को जल्द चालू करने और नकदी जरूरतों के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बैंक अपने विवेक से एक वर्ष तक शुल्क और अन्य मदों में छूट या कटौती कर सकते हैं। राहत केवल उन खातों को मिलेगी जो 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में हैं और आपदा के समय 30 दिन से अधिक बकाया में नहीं थे। आरबीआई ने यह भी कहा, "अगर आपदा के बाद कोई खाता गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) हो जाता है, तो समाधान योजना लागू होने पर उसे फिर से 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में अद्यतन किया जा सकेगा।" साथ ही, बैंकों को ऐसे खातों पर बकाया कर्ज का अतिरिक्त पांच प्रतिशत प्रावधान करना होगा, जो मौजूदा प्रावधानों के अतिरिक्त होगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह ढांचा आपदा से प्रभावित एवं किसी तरह के वित्तीय तनाव से मुक्त उधारकर्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और यह मौजूदा नियमों की तुलना में अधिक लचीला है।--
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वाराणसी . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समेत विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को रोकने के लिए हमला किया और कहा कि वह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि महिलाओं के आरक्षण के अधिकार को लागू कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। संसद में इस विधेयक के गिरने के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को 'जन-आक्रोश महिला सम्मेलन' को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ''आज इस कार्यक्रम में आप सभी बहनों-बेटियों से एक महायज्ञ की शुरुआत के लिए आशीर्वाद लेने आया हूं।''
उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि ''काशी के सांसद, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे देश हित में एक बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप सबका आशीर्वाद चाहिए। यह बड़ा लक्ष्य लोकसभा विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना है।'' मोदी अपने सम्बोधन में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के संसद में पारित नहीं होने के मुद्दे को लेकर विपक्ष पर खासे हमलावर रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति ही विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तम्भ है और आज हर क्षेत्र और हर मोर्चे पर भारत की बेटियां इतना शानदार काम कर रही हैं तो स्वाभाविक है कि नीति निर्माण और राष्ट्र के भविष्य से जुड़े फैसलों में भी बहनों और बेटियों की भूमिका और बढ़नी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने नया संसद भवन बनने के बाद सबसे पहले संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून पारित करने का ही काम किया था और इसे जल्द लागू करने के लिये पिछले दिनों में संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव लाया गया था लेकिन 40 साल से इस मामले को लटकाये कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक जैसी पार्टियों ने महिलाओं को एक बार फिर 'धोखा' दिया। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, ''असली बात यह है कि यह सारे परिवारवादी और तुष्टीकरण में डूबे दल नारी शक्ति से डरे हुए हैं। यह परिवारवादी दल देश की उन बेटियों को विधानसभा और संसद में नहीं आने देना चाहते हैं जो कॉलेज कैंपस से लेकर पंचायतों और स्थानीय निकायों तक हर जगह अपने दम पर नेतृत्व दे रही हैं। यह जानते हैं कि अगर धरातल पर काम करने वाली बेटियां ऊपर आ गईं तो इनका नियंत्रण खत्म हो जाएगा, इनकी सत्ता पर सवाल खड़े हो जाएंगे, इसलिए ही वे संसद में हुए विरोध में सबसे आगे रहे।'' उन्होंने पश्चिम बंगाल तथा चुनाव से गुजर रहे अन्य राज्यों में हुए बम्पर मतदान को लेकर दावा करते हुए कहा, ''देश की बहने और बेटियां महिला आरक्षण का विरोध करने वाले दलों की कुटिल मंशा को पहचान गयीं और असम, केरलम, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बहनों ने रिकार्ड मतदान किया है। महिला आरक्षण विरोधी दलों को अंदाजा नहीं है कि बहनों का एक वोट महिला विरोधी इन दलों को सजा देने के लिए हुआ है।''मोदी ने कहा कि कांग्रेस और सपा जैसे दलों की वजह से महिला आरक्षण से जुड़ा सरकार का प्रयास संसद में भले ही सफल नहीं हो पाया लेकिन वह सभी महिलाओं को फिर से भरोसा दिलाते हैं कि उनका आरक्षण का हक लागू करवाने में वह कोई कोर—कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे।
महिलाओं को विशेष महत्व देते हुए उन्होंने कहा कि ''हमारी काशी माता श्रृंगार गौरी, माता अन्नपूर्णा, माता विशालाक्षी, माता संकटा और मां गंगा जैसी दिव्य शक्तियों की भूमि है, ऐसे में आप सभी बहन बेटियों के इस समागम ने इस अवसर को बहुत दिव्य बना दिया।' प्रधानमंत्री ने कभी महिलाओं से भोजपुरी तो कभी हिंदी में संवाद करते हुए मोदी ने कहा कि अतीत में बहनों-बेटियों को बहुत संघर्ष करना पड़ा है और काशी की बहनों ने भी कई तरह की मुश्किलें देखी हैं। मोदी ने पूर्वांचल में बोली जाने वाली भोजपुरी में किये जाने वाले संवादों को दोहराते हुए कहा ''लोग अतीत में महिलाओं से कहते ''तू का करबू'' ''तूहे का जरूरत ह'', ''ई काम तोहसे ना हो पाई।' प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बार तो सवाल भी नहीं पूछे जाते थे, सीधे फरमान सुनाया जाता था।
मोदी ने कहा, ''जब 25 साल पहले गुजरात में मुख्यमंत्री बना था तो सबसे पहले मैंने ऐसी धारणाओं को तोड़ने का प्रयास किया था। उस दौरान बेटियों के लिए समर्पित दो बड़ी योजनाएं शुरू की गई थीं, एक थी शाला प्रवेश उत्सव, जो स्कूल में बच्चियों की दाखिले की मुहिम थी और दूसरी थी मुख्यमंत्री कन्या केलवणि निधि योजना, ताकि स्कूल की फीस देने में बच्चियों की मदद की जा सके। तब से आज तक हमारी सरकार की नीतियों में महिला कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।''प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अपनी सरकार द्वारा महिलाओं की सुविधा के लिये शुरू की गयी विभिन्न परियोजनाओं का विस्तार से जिक्र किया और कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में उनकी सरकार बनने के बाद देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया, 30 करोड़ से अधिक महिलाओं का बैंक खाता खुला और ढाई करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली का कनेक्शन दिया गया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का पूरा जोर बहनों की सुविधा और सुरक्षा पर रहा है क्योंकि यही दो चीजें हैं जो सशक्तीकरण की नींव को मजबूत करती हैं।मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो बेटियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था लेकिन अब भाजपा की सरकार में बेटियों के विरुद्ध गलत सोच रखने वाला अच्छी तरह से जानता है कि उसका अंजाम क्या होगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता ने भी बहनों और बेटियों को सुरक्षा का नया भरोसा दिया है क्योंकि इसके तहत महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में फैसले तेजी से आने लगे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब महिलाओं की आर्थिक शक्ति बढ़ती है तो घर में उनकी आवाज भी उतनी ही बुलंद हो जाती है इसलिए सुविधा और सुरक्षा का विश्वास देने के साथ-साथ सरकार ने बहनों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश की करीब 10 करोड़ बहने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं जिन्हें लाखों रुपये की मदद मिल रही है। इस मौके पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी समेत कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या तथा अन्य महिलाओं ने प्रधानमंत्री को विभिन्न कलाकृतियां भेंटकर उनका स्वागत किया। इस आयोजन की विशेषता रही कि इसकी पूरी कमान महिलाओं ने संभाली। यहां तक कि सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मी तैनात की गईं। -
वाराणसी . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन बुधवार सुबह वाराणसी में रोड शो किया, जिसे देखने के लिए सड़क पर भारी भीड़ उमड़ी। पार्टी नेताओं ने यह जानकारी दी। रोड शो बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्लू) से शुरू हुआ और लहरतारा, कचहरी, आंबेडकर चौराहा, चौकाघाट, तेलियाबाग, लहुराबीर और मैदागिन से होते हुए काशी विश्वनाथ धाम पर समाप्त हुआ, जहां प्रधानमंत्री पूजा-अर्चना करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मीडिया प्रभारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि लोग प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए उत्सुक दिखे और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, पदाधिकारी और स्थानीय निवासी पूरे मार्ग में कतारों में खड़े रहे। प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए श्रद्धालु और समर्थक ''हर हर महादेव'' और ''जय श्री राम'' के जयकारे लगाते नजर आए। प्रधानमंत्री ने भी हाथ जोड़कर और हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। मिश्रा ने बताया कि पूरे मार्ग में स्वागत के लिए कई जगह निर्धारित की गई थी, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा तथा ढोल और शंख बजाकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि लगभग 14 किलोमीटर लंबा यह रोड शो शहर में अब तक के सबसे बड़े रोड शो में से एक है।
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नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल में इस चुनाव के लिये मतदान समाप्त होने से पहले ही, भाजपा ने उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित सात राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इन सात राज्यों में पहले से ही "जमीनी स्तर का काम" शुरू कर दिया है। एक सूत्र ने बताया, "भारतीय राजनीति में एक मशहूर कहावत है: 'भाजपा कभी सोती नहीं'। पिछले तीन-चार दिनों की राजनीतिक गतिविधियां इसका जीता-जागता सबूत हैं। जहां विपक्षी दल पश्चिम बंगाल में मतदान के अंतिम चरण में व्यस्त हैं, वहीं भाजपा ने अन्य राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करना शुरू कर दिया है।" सूत्र ने कहा, "जहां अधिकांश क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियां चुनाव नजदीक आने पर ही अपनी नीतियां और रणनीतियां बनाती हैं, वहीं भाजपा साल भर चौबीसों घंटे सक्रिय रहती है। पार्टी 'इंतजार करो और देखो' की नीति में विश्वास नहीं रखती। हमारे लिए, एक चुनाव का समापन अगले चुनाव की तैयारियों की शुरुआत का प्रतीक है।" पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था, वहीं राज्य 29 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के लिए तैयार है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान हुआ था। केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ था। सभी पांच विधानसभा चुनावों के परिणाम चार मई को मतों की गिनती के साथ घोषित किए जाएंगे। नवीन ने चुनाव वाले इन पांचों राज्यों का कई बार दौरा किया, वहां रहकर तैयारियों की समीक्षा की और पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कई "रणनीतिक बैठकें" कीं, साथ ही चुनाव प्रचार में भी भाग लिया। सूत्रों ने बताया कि इन व्यस्त कार्यक्रमों के बीच, भाजपा अध्यक्ष ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए गोवा, गुजरात और उत्तर प्रदेश का दौरा भी किया और वहां अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने इन राज्यों में पार्टी की चुनावी रणनीति की योजना बनाने के लिए प्रमुख पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें भी कीं। उन्होंने आगे बताया कि नवीन अगले सप्ताह उत्तराखंड का दौरा करने वाले हैं।
गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। भाजपा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने का पूरा भरोसा है, साथ ही वह अपने सहयोगियों के साथ असम और पुडुचेरी में भी सत्ता में वापसी करेगी। पार्टी को यह भी उम्मीद है कि इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन तमिलनाडु में द्रमुक को सत्ता से बेदखल कर देगा और केरल विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत कर पाएगी। पार्टी के एक सूत्र ने कहा, "हमें इन विधानसभा चुनावों में अपनी सफलता का पूरा भरोसा है। लेकिन पार्टी केवल तात्कालिक परिणामों पर ही ध्यान नहीं दे रही है। वह अपने संगठनात्मक विकास पर भी ध्यान दे रही है, जिसमें उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना शामिल है जहां वह मजबूत है और अन्य राज्यों में भी अपना प्रभाव बढ़ाना शामिल है।" सूत्र ने कहा, "यह 'दीर्घकालिक दृष्टि' और 'कार्यकर्ता-आधारित राजनीति' ही है जो भाजपा को चुनावी तंत्र के मामले में अजेय बनाती है।"
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नयी दिल्ली. चुनाव पश्चात जारी कई सर्वेक्षणों (एग्जिट पोल) में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बढ़त मिलने और असम में उसके जीत की हैट्रिक लगाने तथा केरल में यूडीएफ की जीत की संभावना जताई गई है, जबकि एक सर्वे ने तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के बड़ा उलटफेर करने का अनुमान लगाया है। प्रमुख चुनाव सर्वेक्षण एजेंसी 'एक्सिस माय इंडिया' का अनुमान है कि तमिलगा वेट्री कषगम(टीवीके) अपने पहले ही चुनाव में 98 से 120 सीटों के साथ सरकार बनाने के करीब पहुंच सकती है। यदि असल नतीजों में यही रहता है तो यह विजय का चुनावी राजनीति में करिश्माई पदार्पण होगा। यह पार्टी फरवरी, 2024 में अस्तित्व में आई है।
पश्चिम बंगाल में बुधवार को दूसरे एवं अंतिम चरण में मतदान संपन्न हुआ। इससे पहले बीते 23 अप्रैल को राज्य की 152 सीटों पर मतदान हुआ था। प्रदेश में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं। केरल, असम और पुडुचेरी में नौ अप्रैल तथा तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बुधवार शाम आए कई चुनाव सर्वेक्षण एजेंसियों के सर्वे में भाजपा को निर्णायक बढ़त या बहुमत मिलने की संभावना जताई गई। हालांकि कुछ सर्वेक्षणों ने तृणमूल कांग्रेस की सरकार बरकरार रहने का अनुमान जताया है। 'पीपुल्स प्लस' के सर्वे में कहा गया है कि तृणमूल कांग्रेस 177 से 187 सीटें हासिल करके अपनी सत्ता बरकार रख सकती है। भाजपा को 95 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस को एक से तीन सीट मिलने की संभावना जताई गई है। 'जनमत पोल्स' के एग्जिट पोल के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस को 195 से 205 सीटें मिल सकती हैं तो भाजपा को 80 से 90 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। 'पोल डायरी' के सर्वे का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वेक्षण के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। 'मैट्रिज' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है तथा वह सत्ता से बाहर हो सकती है। 'पी-मार्क' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं तो टीएमसी को 118-138 सीटें मिलने का अनुमान है। असम को लेकर सभी सर्वेक्षणों में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत की संभावना जताई गई है।
'एक्सिस माय इंडिया' के सर्वेक्षण के अनुसार, राजग 88 से 100 सीटें जीत सकता है तथा कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 24 से 36 सीटें मिल सकती हैं। 'मैट्रिज' के एग्जिट पोल में कहा गया है कि असम में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 85 से 95 सीटें के साथ प्रचंड बहुमत मिल सकता है, जबकि कांग्रेस नीत गठबंधन 25 से 32 सीटों पर ही सिमट सकता है। 'जनमत पोल्स' के अनुसार, असम में भाजपा नीत गठबंधन को 87 से 98 सीटें हासिल हो सकती हैं तथा कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन 29 से 30 सीटों पर ही सिमट सकता है। 'जेवीसी' के एग्जिट पोल में कहा गया है कि असम में भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन को 88 से 101 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिल सकता है, वहीं कांग्रेस नीत गठबंधन को सिर्फ 23 से 33 सीटें मिलने का अनुमान है। असम में विधानसभा की कुल 126 सीटें हैं।
केरल को लेकर लगभग सभी सर्वेक्षण एजेंसियों ने सत्ता से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की सत्ता से विदाई और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की जीत की संभावना जताई है। 'एक्सिस माय इंडिया' के एग्जिट पोल में कहा गया है कि यूडीएफ को 78 से 90 सीटें मिल सकती हैं, वहीं एलडीएफ को 49 से 62 सीटें मिलने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' ने केरल में यूडीएफ को 75 से 85 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जताई है। उसका अनुमान है कि माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ को 55 से 65 सीटें ही मिलेंगी और वह सत्ता से बाहर हो जाएगा। 'वोट वाइब' के सर्वे में कहा गया है कि यूडीएफ को 70 से 80 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एलडीएफ को 58 से 68 सीटें मिल सकती हैं। 'पीपुल्स इनसाइट' के सर्वेक्षण के अनुसार, यूडीएफ को 66 से 76 सीटें हासिल हो सकती हैं तथा एलडीएफ को 58 से 68 सीटें हासिल होने का अनुमान है। उसने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 10 से 14 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। केरल में विधानसभ की 140 सीटें हैं।
तमिलनाडु में अधिकतर सर्वेक्षणों ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का अनुमान जताया है, हालांकि 'एक्सिस माय इंडिया' ने टीवीके की पहले ही चुनाव में बहुमत के करीब पहुंचने का अनुमान लगाया है। उसका आकलन है कि विजय की पार्टी को 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 से 120 सीटें मिल सकती हैं। टीवीके का गठन फरवरी, 2024 में हुआ था।
'एक्सिस माय इंडिया' के सर्वेक्षण में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को 92 से 110 सीटें मिलने तथा अन्नाद्रमुक की अगुवाई वाले राजग को सिर्फ 22 से 32 सीटें हासिल होने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को 125 से 145 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। उसका अनुमान है कि राजग को 65 से 80 तथा अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम(टीवीके) को 18 से 24 सीटें मिलेंगी। 'मैट्रिज' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन 122 से 132 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रख सकता है तथा अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राजग को 87 से 100 सीटें मिलने का अनुमान है। टीवीके को 10 से 12 हासिल हो सकती हैं। पुडुचेरी को लेकर ज्यादातर सर्वेक्षण का अनुमान है कि ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) की अगुवाई वाले राजग गठबंधन को बहुमत मिल सकता है। 'एक्सिस मॉय इंडिया' के एग्जिट पोल के अनुसार, पुडुचेरी में राजग को 16 से 20 सीटें मिल सकती हैं, वहीं कांग्रेस और द्रमुक के गठबंधन को छह से आठ सीटें मिलने का अनुमान है। टीवीके को दो से चार सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। पीपुल्स प्लस के अनुसार, राजग को 16-18 सीटें मिल सकती हैं और कांग्रेस और द्रमुक को 10-12 सीटें मिल सकती हैं। 'कामख्या एनालिटिक्स' ने पुडुचेरी में राजग को 17 से 24 सीटों के पूर्ण बहुमत हासिल करने का अनुमान जताया है। उसका आकलन है कि कांग्रेस और द्रमुक का गठबंधन चार से सात सीटों पर ही सिमट सकता है। पुडुचेरी में विधानसभा की 30 सीटें हैं। -
नयी दिल्ली/ देश भर में जारी लू की स्थिति के बीच श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उसने श्रमिकों को सूरज के सीधे संपर्क से बचाने के लिए देशव्यापी परामर्श जारी किया है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को भेजे गए एक पत्र में मंत्रालय ने इसके लिए बहु-क्षेत्रीय और बहु-आयामी नजरिये की जरूरत पर जोर दिया है। इसमें विशेष रूप से बाहरी और श्रम-प्रधान क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की सुरक्षा के लिए एक समन्वित योजना की बात कही गई है। बयान के अनुसार मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से देश भर में बढ़ते तापमान और लू की स्थिति के प्रतिकूल प्रभावों से श्रमिकों और मजदूरों को बचाने के लिए तत्काल उपाय करने का आग्रह किया है। इन उपायों में विभिन्न क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए काम के घंटों का पुनर्निर्धारण, पीने का पर्याप्त पानी सुनिश्चित करना और विश्राम क्षेत्रों तथा कार्यस्थलों को ठंडा रखने का प्रावधान शामिल है। राज्यों से कहा गया है कि गर्मी से संबंधित बीमारियों को रोकने के लिए वे नियोक्ताओं को आपातकालीन आइस पैक, नियमित स्वास्थ्य जांच और अन्य वस्तुओं की व्यवस्था करने का निर्देश दें। कारखाना और खदान प्रबंधनों को भी श्रमिकों को अधिक लचीलापन देने की सलाह दी गई है, जिसमें अत्यधिक गर्मी के दौरान काम की गति को धीमा करना, विश्राम क्षेत्र बनाना और पर्याप्त हवा तथा शीतलन की व्यवस्था करना शामिल है। निर्माण श्रमिकों, ईंट भट्ठा श्रमिकों, दैनिक वेतन भोगी और आकस्मिक मजदूरों पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की गई है।
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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को बिश्केक में अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जून से मुलाकात की और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के संबंध में चर्चा की। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन के इतर यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में प्रयासरत हैं। सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा, ''बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून से बातचीत कर खुशी हुई।'' इस बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है कि सिंह और डोंग के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई। पता चला है कि सिंह और डोंग ने एलएसी पर समग्र स्थिति के संबंध में चर्चा की, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर भी जोर दिया गया। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि वार्ता में पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा हुई या नहीं। यह बैठक भारत और चीन के संबंधों को सुधारने के प्रयासों के बीच हुई है। पिछले कुछ महीनों में, दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को फिर से सुधारने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था। राजनयिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की वार्ताओं के बाद, दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ गतिरोध वाले कई बिंदुओं से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुला लिया। रक्षा मंत्री ने रूस के अपने समकक्ष आंद्रेई बेलोसोव से भी मुलाकात की।
सिंह ने कहा, ''बिश्केक में एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोसोव के साथ बातचीत अच्छी रही।'' पता चला है कि सिंह और बेलोसोव ने रूस द्वारा भारत को एस-400 वायु रक्षा मिसाइलों की आपूर्ति सहित विभिन्न रक्षा खरीद परियोजनाओं पर चर्चा की। अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ पांच अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता किया था, जिसके तहत पांच मिसाइल प्रणाली इकाइयों की खरीद की जानी थी, और इनमें से तीन इकाइयां पहले ही भारत को सौंप दी गई हैं। चौथी इकाई के अगले कुछ दिनों में मिलने की उम्मीद है, जबकि पांचवीं इकाई नवंबर में भेजे जाने की संभावना है। पिछले महीने, भारत ने रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली की नयी खेप के तहत पांच और प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी, जिससे इनकी कुल संख्या 10 हो जाएगी। सिंह ने एससीओ बैठक के इतर बेलारूस के अपने समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन से भी मुलाकात की।
सिंह ने 'एक्स' पर कहा, ''बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान बेलारूस के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। हमारी बातचीत दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रही।'' सिंह एससीओ के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे थे। -
लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत कई प्रमुख नेताओं के साथ काशी स्थित बाबा विश्वनाथ धाम में विधिवत दर्शन-पूजन किया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने 'एक्स' पर पोस्ट करके कहा, "अविनाशी काशी में बाबा श्री काशी विश्वनाथ जी के गर्भगृह में विधिवत दर्शन-पूजन कर महादेव का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया। देवाधिदेव महादेव के चरणों में राष्ट्र की निरंतर प्रगति, जनकल्याण और प्रत्येक नागरिक की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। हर हर महादेव।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से लिखा, "भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ आज शिवनगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान भोलेनाथ सभी भक्तों व प्रदेशवासियों का कल्याण करें, यही प्रार्थना है।" भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 'एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, "अविनाशी नगरी काशी स्थित श्री विश्वनाथ धाम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ बाबा विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग का पूजन-अर्चन किया।" चौधरी ने कहा, "इस दौरान मा. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे।" उन्होंने कहा कि बाबा से यही प्रार्थना है कि वे चराचर जगत का कल्याण करें और राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें, हर-हर महादेव। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज मंगलवार 28 अप्रैल से उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री इस अवसर पर मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र में एक सभा को भी संबोधित करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत उप्र के सभी प्रमुख नेता काशी पहुंचे हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर समर्पित उष्ण लहर प्रबंधन इकाइयों को चालू करने और गर्मी के दौरान सामान्य से अधिक लू चलने की आशंका को देखते हुए एम्बुलेंस सेवाओं की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित करने को कहा है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) पोर्टल पर उष्ण लहर के मामलों की प्रारंभिक चेतावनी के समय पर प्रसार और वास्तविक समय की रिपोर्टिंग की आवश्यकता को दोहराया। यह पत्र 23 अप्रैल को लिखा गया था। इसमें भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा अप्रैल से जून 2026 तक के गर्म मौसम के लिए जारी किए गए अद्यतन मौसमी पूर्वानुमान और अप्रैल 2026 के लिए मासिक पूर्वानुमान का उल्लेख किया गया है। श्रीवास्तव ने पत्र में कहा, "यह दोहराया जाता है कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सभी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों पर समर्पित लू प्रबंधन इकाइयों का संचालन सुनिश्चित करना होगा; एम्बुलेंस सेवाओं की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित करनी होगी; समय पर कार्रवाई के लिए प्रारंभिक चेतावनियों का प्रसार करना होगा; और इस मंत्रालय के आईएचआईपी पोर्टल पर लू के मामलों की वास्तविक समय में रिपोर्टिंग करनी होगी।" स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सक्रिय योजना और समन्वित कार्रवाई से आने वाले महीनों में अत्यधिक गर्मी के स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।






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