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नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) श्रम-प्रधान उद्योगों में छिपी संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है, जिससे देश के 99 प्रतिशत निर्यात को बगैर-शुल्क (जीरो-ड्यूटी) बाजार पहुंच मिलेगी। शाह ने कहा कि बुधवार से लागू होने वाला यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना वाले 'विकसित भारत' की कुंजी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''यह समझौता श्रम-प्रधान उद्योगों में मौजूद कई संभावनाओं के द्वार खोलने वाला है। इससे भारतीय निर्यात का 99 प्रतिशत हिस्सा शुल्क-मुक्त हो जायेगा, जिनमें कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र शामिल हैं।'' उन्होंने कहा कि यह समझौता केंद्र सरकार की जन-हितैषी कूटनीति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह समझौता ब्रिटेन में भारतीय पेशेवरों को भी महत्वपूर्ण छूट प्रदान करेगा। बुधवार से लागू हुए वृहद आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर पिछले वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के उनके समकक्ष केअर स्टॉर्मर ने हस्ताक्षर किये थे।
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नयी दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टरों ने चार महीने के एक शिशु के फेफड़े बचाने के लिए उसकी बेहद जटिल और दुर्लभ सर्जरी सफलतापूर्वक की है। यह शिशु जन्मजात विकृति से पीड़ित था, जिससे उसके दोनों फेफड़े प्रभावित थे। अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को यह जानकारी दी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ऑपरेशन के महज दो दिन बाद शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, फेफड़े के एक हिस्से को निकालने वाली 'सेगमेंट-लेवल लंग रिसेक्शन या सेगमेंटेक्टॉमी सर्जरी' इतनी कम उम्र के मरीज पर की गई अपनी तरह की सबसे दुर्लभ सर्जरी में से एक है। यह देश के अग्रणी संस्थान में उपलब्ध उन्नत बाल चिकित्सा सर्जिकल सुविधाओं को भी दर्शाती है। डॉक्टरों के अनुसार, शिशु के दाएं फेफड़े में यह सर्जरी की गई, जबकि बाएं फेफड़े की सर्जरी कुछ महीने बाद निर्धारित की जाएगी। डॉक्टरों ने बताया कि जन्म से पहले ही शिशु में जन्मजात पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन (सीपीएएम) की पहचान कर ली गई थी। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान फेफड़े का कुछ हिस्सा असामान्य रूप से विकसित हो जाता है और उसमें गांठ जैसी संरचनाएं बन जाती हैं, जो फेफड़े के सामान्य ऊतकों की तरह काम नहीं कर पातीं। डॉक्टरों ने बताया कि यह मामला विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इस विकृति ने एक फेफड़े के बजाय दोनों फेफड़ों को प्रभावित किया था, जबकि आमतौर पर यह स्थिति केवल एक ही फेफड़े में देखी जाती है। उन्होंने बताया कि पूरे फेफड़े के एक हिस्से को निकालने से भविष्य में फेफड़ों की क्षमता में काफी कमी आ सकती थी, इसलिए डॉक्टरों की टीम ने फेफड़े को बचाने वाली तकनीक अपनाई और दाएं फेफड़े के केवल प्रभावित हिस्सों को ही हटाया। प्रत्येक फेफड़ा छोटे-छोटे कार्यात्मक हिस्सों में बंटा होता है, जिन्हें सेगमेंट कहा जाता है। इनमें से हर हिस्से की अपनी अलग वायु नली और रक्त आपूर्ति होती है। डॉक्टरों ने बताया कि जहां फेफड़े के एक बड़े हिस्से को निकालने की सर्जरी अपेक्षाकृत आसान होती है, वहीं सेगमेंटेक्टॉमी में गहराई में स्थित रक्त वाहिकाओं और वायु नलियों को बेहद सावधानी से अलग करना पड़ता है, ताकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को सुरक्षित रखा जा सके। यह सर्जरी बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. विशेष जैन के नेतृत्व में की गई। ऑपरेशन बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरा हुआ और शिशु को दो दिन बाद स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि फेफड़ों की जन्मजात विकृति से पीड़ित चुनिंदा शिशुओं में समूचे हिस्से को हटाने के बजाय केवल प्रभावित भाग को निकालना संभव है। उन्होंने कहा कि इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद मिलती है और मरीज के लिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को बुधवार को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य देश में एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना और सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले इस उर्वरक के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूर नए निवेश ढांचे के तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, ''पिछले एक दशक में छह नए संयंत्र स्थापित होने से यूरिया आयात पर भारत की निर्भरता कम हुई है। आठ से नौ नए संयंत्रों की स्थापना से देश अपनी पूरी आवश्यकता की पूर्ति घरेलू स्तर पर कर सकेगा और इस उर्वरक के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा।'' उन्होंने कहा कि यूरिया की मांग हर साल लगभग पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। भारत में यूरिया का उत्पादन लगभग तीन करोड़ टन है जबकि मांग चार करोड़ टन है। एक करोड़ टन की कमी आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। आज मंजूर की गई नीति का उद्देश्य अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता सृजित करना और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। वैष्णव ने कहा कि इस नीति के तीन प्रमुख स्तंभ -सब्सिडी की गणना के लिए स्थिर एवं परिवर्तनीय लागत को अलग करना, यूरिया संयंत्र संचालित करने वाली कंपनियों के लिए 12-16 प्रतिशत के बीच सुनिश्चित प्रतिफल और विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करना है। उन्होंने कहा कि नई नीति, नई निवेश नीति (एनआईपी)-2012 का विस्तार है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) और सामाजिक सुरक्षा समझौता लागू होने को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण क्षण बताया और कहा कि इससे आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन दोनों समझौतों से भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंध और अधिक गहरे होंगे तथा दोनों देशों की साझा महत्वाकांक्षा लोगों के लिए ठोस अवसरों में बदलेगी। मोदी ने कहा कि सीईटीए से किसानों, उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही कई प्रमुख क्षेत्रों को ब्रिटेन के बाजार तक अधिक मजबूत पहुंच प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाओं और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को भी गहरा करेगा तथा कुशल भारतीय प्रतिभाओं की अधिक आवाजाही को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, '' यह भारत-ब्रिटेन साझेदारी में एक महत्वपूर्ण क्षण है। व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) तथा सामाजिक सुरक्षा समझौता लागू होने से हमारे आर्थिक संबंध और अधिक गहरे होंगे। ये दोनों समझौते मिलकर हमारी साझा महत्वाकांक्षा को हमारे लोगों के लिए ठोस अवसरों में बदलेंगे।'' मोदी ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा समझौता ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को अमूल्य सहयोग प्रदान करेगा और भारतीय उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, '' यह क्षण हमारे देशों के बीच विश्वास और व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश एवं नवाचार से प्रेरित भविष्य की साझेदारी बनाने के हमारे संकल्प को दर्शाता है। भारत और ब्रिटेन साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।'' भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बुधवार से लागू हो गया। इससे शुल्कों में कटौती की प्रक्रिया शुरू होगी और वस्तुओं तथा सेवाओं की दोनों दिशाओं में आवाजाही बढ़ने से द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी। सीईटीए पर पिछले साल जुलाई में हस्ताक्षर किए गए थे।
गौरतलब है कि यह समझौता 2030 तक दोनों देशों के बीच मौजूदा अनुमानित 48 अरब पाउंड के सालाना व्यापार को कम से कम दोगुना करने में मदद करेगा। साथ ही, दीर्घावधि में दोनों देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हर साल करीब पांच अरब पाउंड की वृद्धि में योगदान देगा। -
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की घटना से "हम जैसे राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है", लेकिन इस मामले के बहाने अयोध्या और राम जन्मभूमि को बदनाम करना उचित नहीं है। इंडिया टुडे समूह के कार्यक्रम "पंचायत आज तक" को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा), पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अपने पुराने रिकॉर्ड के बावजूद आस्था से जुड़े मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "अयोध्या की घटना ने निश्चित रूप से हम सभी की, हम जैसे राम भक्तों की आस्था को चोट पहुंचाई है। राम मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और सरकार को इसके मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। ट्रस्ट ने जांच का अनुरोध किया और राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया। जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट आई, कार्रवाई शुरू कर दी गई।" उन्होंने कहा कि चोरी की घटना में कथित रूप से शामिल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनकी सहायता करने के आरोप में दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। योगी ने कहा कि गिरफ्तारी के साथ-साथ नैतिक आधार पर दो इस्तीफे भी हुए हैं, जिनमें ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा शामिल हैं। उन्होंने कहा, "लेकिन इस घटना का इस्तेमाल अयोध्या, राम जन्मभूमि और हिंदुओं की आस्था को बदनाम करने के लिए करना उचित नहीं है।"
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नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अवसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को मजबूत करने और तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने के प्रयासों से पूर्वोत्तर अब वैज्ञानिक नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। डॉ. सिंह ने शिलांग स्थित उत्तर पूर्व प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं पहुंच केंद्र (NECTAR) में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों की समीक्षा बैठक की और नई भू-सूचना विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले पूरे पूर्वोत्तर में केवल दो मौसम रडार थे, जिनमें मेघालय में सिर्फ एक रडार था, जबकि चेरापुंजी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। अब पूरे क्षेत्र में 13 मौसम रडार कार्यरत हैं। इसी तरह भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या 84 से बढ़कर 171 हो गई है। उन्होंने बताया कि मेघालय और त्रिपुरा में पहली बार बिजली गिरने का पता लगाने वाले विशेष स्टेशन भी स्थापित किए गए हैं, जिससे आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक तैयारी मजबूत हुई है।शिलांग में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विभिन्न संस्थानों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि NECTAR प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को किसानों, युवाओं, उद्यमियों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विज्ञान का लाभ सीधे आम नागरिकों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।जितेंद्र सिंह ने NECTAR और CSIR-CFTRI द्वारा विकसित मोबाइल फूड प्रोसेसिंग यूनिट का अवलोकन किया। उन्होंने इसे “चलती-फिरती प्रसंस्करण इकाई” बताते हुए कहा कि यह तकनीक सीधे किसानों तक पहुंचकर कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन, खाद्य गुणवत्ता, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।उन्होंने पीएम-डिवाइन कार्यक्रम के तहत स्थापित वसुंधरा मृदा कार्बनिक कार्बन पहचान प्रयोगशाला की सराहना करते हुए कहा कि यह सुविधा किसानों को वैज्ञानिक मृदा परीक्षण और सटीक कृषि सलाह उपलब्ध करा रही है। अब तक लगभग 2,500 किसानों को मृदा परीक्षण किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं, जिससे क्षेत्र का व्यापक मृदा स्वास्थ्य डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी।डॉ. सिंह ने NECTAR की STEM शिक्षा प्रयोगशाला का दौरा किया, जहां रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 3D प्रिंटिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से पूर्वोत्तर में 50 STEM प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिनसे लगभग 25,000 विद्यार्थियों को लाभ मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान ने अब तक 569 ड्रोन तकनीशियन, 247 GIS एवं रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ, 107 प्रमाणित ड्रोन पायलट और 4,500 से अधिक छात्रों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया है।केंद्रीय मंत्री ने NECTAR की अत्याधुनिक भू-सूचना विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि 17 उन्नत ड्रोन, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक से लैस यह प्रयोगशाला वन कार्बन आकलन, जैव विविधता संरक्षण, आपदा प्रबंधन और खनन बहाली जैसी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ड्रोन आधारित मैपिंग से स्वामित्व योजना के तहत 700 से अधिक गांवों और लगभग 25,000 किसानों से जुड़ी वैज्ञानिक जैविक कृषि परियोजनाओं को भी सहायता मिली है।डॉ. सिंह ने कहा कि NECTAR वैज्ञानिक जैविक कृषि, सामुदायिक बीज बैंक, केले के रेशे का मूल्य संवर्धन, खाद्य प्रसंस्करण, बांस और प्राकृतिक रेशा तकनीक, उद्यमिता और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से किसान संगठनों को मजबूती मिल रही है, बाजार तक पहुंच बेहतर हो रही है और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।केंद्रीय मंत्री ने न्यू शिलांग में NECTAR के स्थायी परिसर के निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इसके पूरा होने पर अनुसंधान, नवाचार, इन्क्यूबेशन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि NECTAR भविष्य में भू-स्थानिक विज्ञान, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय केंद्र बनकर विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। -
नई दिल्ली। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए उद्योग-उन्मुख कुशल कार्यबल तैयार करने की दिशा में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम), तंजावुर ने आईटीसी लिमिटेड के इंटीग्रेटेड कंज्यूमर गुड्स मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स (आईसीएमएल), त्रिची के सहयोग से सहायक बेकिंग तकनीशियन (एनएसक्यूएफ लेवल-3) प्रमाणपत्र कार्यक्रम के तहत अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण की शुरुआत की है। 3 जुलाई 2026 को आईटीसी-आईसीएमएल, त्रिची परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन एनआईएफटीईएम-तंजावुर के निदेशक प्रो. वी. पलानीमुथु ने किया। इस अवसर पर आईटीसी-आईसीएमएल के महाप्रबंधक एवं प्रमुख सुरजीत सिंह रोरिया और वरिष्ठ मानव संसाधन प्रबंधक पद्मनाभन टी. भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के पहले बैच में 18 प्रशिक्षुओं का चयन किया गया है। इन्हें 7 जुलाई से 20 अगस्त 2026 तक आईटीसी-आईसीएमएल के औद्योगिक परिसर में व्यावहारिक और उद्योग-एकीकृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक उत्पादन वातावरण में कौशल विकास कराया जाएगा।एनआईएफटीईएम ने बताया कि इस बैच के सभी प्रशिक्षुओं को पहले ही आईटीसी लिमिटेड में रोजगार का आश्वासन दिया जा चुका है। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण के साथ रोजगार उपलब्ध कराकर उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।संस्थान के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे उद्योग-एकीकृत कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। एनसीवीईटी से मान्यता प्राप्त डीम्ड अवार्डिंग बॉडी के रूप में एनआईएफटीईएम-तंजावुर राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराता रहेगा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के उद्योग-तैयार कार्यबल विकसित करने के मिशन को आगे बढ़ाएगा। -
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन् ने उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में ‘द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स’ पुस्तक का विमोचन किया। प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार द्वारा संपादित और कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन (सीएलईए) के सहयोग से थॉमसन रॉयटर्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के भाषणों, व्याख्यानों और विचारों का संकलन किया गया है। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक अनुभव, संवैधानिक अनुशासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व से परिपक्व न्यायिक सोच का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि यह संविधान, विधि के शासन, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है तथा संवैधानिक विमर्श और विधिक अध्ययन को नई मजबूती देगी।
सी. पी. राधाकृष्णन् ने कहा कि भारतीय संविधान एक जीवंत और निरंतर विकसित होने वाला दस्तावेज है, जिसने पिछले 75 वर्षों में अधिकार और जवाबदेही, अधिकारों और कर्तव्यों तथा निरंतरता और परिवर्तन के बीच संतुलन बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि संविधान लोकतांत्रिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बना हुआ है, जबकि संसद की संशोधन शक्ति उसे समय की जरूरतों के अनुरूप विकसित होने में सक्षम बनाती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यायपालिका की भूमिका संवैधानिक शासन व्यवस्था और विधि के शासन में नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में अधिकारों के साथ संयम भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार मजबूत संस्थाएं और न्याय व्यवस्था संस्थागत सत्यनिष्ठा, संवैधानिक अनुशासन, जनविश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर ही कायम रहती हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक शासन व्यवस्था को समाज की बदलती जरूरतों और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी रहना चाहिए। वंचित समुदायों के सशक्तीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, अवसर और आशा सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।उपराष्ट्रपति ने न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन और सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने की अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है।अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने विधि जगत से जुड़े लोगों से समय-समय पर गरीब और वंचित लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की अपील की, ताकि न्याय सभी के लिए सुलभ बन सके।कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, सीएलईए के अध्यक्ष एवं पुस्तक के संपादक प्रो. (डॉ.) एस. शिवकुमार, थॉमसन रॉयटर्स के प्रकाशक गौरी शंकर नटेशन सहित विधि जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत टेक्स 2026 का उद्घाटन किया। चार दिवसीय आयोजन में रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय भागीदारी दर्ज की गई है। 130 से अधिक देशों के 6,000 से ज्यादा खरीदार, 1.3 लाख से अधिक व्यापारिक आगंतुक और 20,000 से अधिक वस्त्र उत्पाद इस आयोजन का हिस्सा हैं। इसे भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन (बीटीटीएफ) आयोजित कर रहा है। उद्घाटन समारोह में गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत टेक्स 2026 भारत के वस्त्र विजन को वैश्विक व्यापारिक अवसरों से जोड़ने वाला मंच है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय एमएसएमई, पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों और मैन्युफैक्चरर्स को वैश्विक खरीदारों से जोड़ने के साथ भारत को विश्वसनीय, इनोवेटिव और सस्टेनेबल सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करेगा।
आयोजन 16 लाख वर्ग फुट से अधिक प्रदर्शनी क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। इसमें टेक्सटाइल वैल्यू चेन के सभी प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन किया गया है। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा, वस्त्र सचिव नीलम शमी राव, विभिन्न राज्यों के मंत्री, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, वैश्विक खरीदार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहे। रूस और न्यूजीलैंड के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। भारत टेक्स 2026 में आठ प्रायोजक राज्यों—मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु—के अलावा आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, मणिपुर, राजस्थान और पश्चिम बंगाल सहित नौ अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने औद्योगिक बुनियादी ढांचे, निवेश अवसरों और नीतिगत पहलों का प्रदर्शन किया।आगामी चार दिनों में आयोजन के दौरान 100 से अधिक नॉलेज सेशन होंगे, जिनमें 39 पैनल चर्चा, 16 राउंडटेबल, 37 मास्टरक्लास और आठ स्टेट सेशन शामिल हैं। साथ ही 4,000 से अधिक क्यूरेटेड बी2बी बैठकें, 100 से ज्यादा बी2जी बैठकें और व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी तथा मार्केट एक्सेस से जुड़े 30 से अधिक एमओयू पर हस्ताक्षर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।भारत टेक्स 2026 में सीआईटीआई टेक्सटाइल सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन भी होगा, जिसमें जिम्मेदार व्यावसायिक प्रथाओं को सात प्रमुख श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। आयोजन के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल बिजनेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई आधारित सहायता, बायर-सैलर मैचमेकिंग, डिजिटल बैज, क्यूआर आधारित लीड कैप्चर और मीटिंग शेड्यूलिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। -
भुवनेश्वर. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को बंगाल की खाड़ी में संभावित रूप से बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव के कारण रथयात्रा के दौरान तीर्थनगरी पुरी सहित ओडिशा के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा इस वर्ष 16 जुलाई को पुरी में आयोजित की जाएगी। इस उत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आईएमडी के दोपहर की बुलेटिन के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बांग्लादेश तट पर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। मौसम प्रणाली के प्रभाव से बुधवार से शुक्रवार सुबह तक पुरी में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने बुधवार सुबह तक केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर और भद्रक जिलों के कई हिस्सों में भी भारी बारिश का अनुमान जताते हुए इन तीन जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। समुद्र की स्थिति खराब से बहुत खराब रहने की संभावना है और आईएमडी ने इसे देखते हुए मछुआरों को 14 से 18 जुलाई तक ओडिशा तट के आसपास एवं समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। आईएमडी ने मयूरभंज, क्योंझर, बालासोर, जाजपुर, खुर्दा, पुरी, कटक, नयागढ़, गंजाम और गजपति जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' तथा देवगढ़, सुंदरगढ़, अंगुल, बौध, ढेंकनाल, कंधमाल और रायगडा जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किये है। इसी तरह बुधवार के लिए जगतसिंहपुर जिले में 'रेड अलर्ट' और केंद्रपाड़ा, भद्रक, क्योंझर, खुर्दा, पुरी, कटक, जाजपुर, कंधमाल और नयागढ़ जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। आईएमडी ने 15 जुलाई के लिए मयूरभंज, बालासोर, देवगढ़, सुंदरगढ़, अंगुल, बौध, ढेंकनाल, गंजाम, गजपति और रायगडा जिलों के वास्ते 'येलो अलर्ट' जारी किया है। इसके अलावा 16 जुलाई को केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, क्योंझर, खुर्दा, पुरी, जाजपुर, देवगढ़, सुंदरगढ़, संबलपुर, झारसुगुड़ा, बरगढ़, अंगुल, बौध, ढेंकनाल, गंजाम, गजपति, रायगडा, कंधमाल और नयागढ़ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
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गुवाहाटी. प्रख्यात साहित्यकार, अनुवादक और शिक्षाविद तथा पद्मश्री से सम्मानित गीता उपाध्याय का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण तेजपुर में निधन हो गया। वह 87 वर्ष की थीं। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता थीं और असम की पहली गोरखा महिला थीं जिन्होंने स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की थी। वह गोरखा समुदाय के अखिल भारतीय संगठन भारतीय गोरखा परिसंघ (बीजीपी) की असम इकाई की संस्थापक अध्यक्ष भी थीं। उपाध्याय को तेजपुर के एक निजी अस्पताल में कुछ समय के लिए भर्ती कराया गया था और स्वस्थ होने के बाद वह सोमवार दोपहर घर लौट आई थीं। हालांकि, इसके कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और रात करीब नौ बजे उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "असमिया और नेपाली साहित्य में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रख्यात शिक्षाविद और लेखिका श्रीमती गीता उपाध्याय के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है।" उन्होंने कहा, "पद्मश्री और 2026 के सती साधनी पुरस्कार से सम्मानित गीता उपाध्याय की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।" शर्मा ने कहा, "इस दुख की घड़ी में उनके परिवार, प्रशंसकों और शुभचिंतकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं। दिवंगत आत्मा की सद्गति के लिए प्रार्थना करता हूं।" बीजीपी, असम के महासचिव नंदा किराती देवान ने कहा कि उपाध्याय के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए संगठन ने मंगलवार से एक सप्ताह के शोक की घोषणा की है। 14 फरवरी, 1939 को असम के तत्कालीन दरांग ज़िले (अब विश्वनाथ ज़िला) के गंगमौथान में जन्मीं उपाध्याय एक प्रतिष्ठित परिवार से थीं। वह स्वतंत्रता सेनानी छबीलाल उपाध्याय की पोती थीं जो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पहले (चयनित) अध्यक्ष भी थे। उन्होंने 2012 में 'करेन्गोर लिगिरी' का असमिया से नेपाली में 'दरबारी सुसारे' के रूप में अनुवाद करने के लिए साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार जीता। 2016 में, उपाध्याय ने अपने दादाजी के जीवन पर आधारित नेपाली उपन्यास 'जन्मभूमि मेरो स्वदेश' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता था।
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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने आज भोजशाला विवाद को सुलझाने के लिए रोज़ाना सुनवाई करने पर सहमति जताई। हालांकि, न्यायाधीश सूर्यकांत, जॉयमाल्य बागची और न्यायाधीश वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की उस अंतरिम आदेश की मांग को ठुकरा दिया जिसमें पुरानी स्थिति बहाल करने को कहा गया था। इस पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत मुसलमानों को तय दिनों पर हिंदुओं की पूजा के साथ-साथ शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त थी। पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह विवादित जगह के पास ही मुस्लिम पक्ष के लिए शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच नमाज़ पढ़ने के लिए एक अलग खुली जगह उपलब्ध कराए।
पीठ ने साफ़ किया कि यह व्यवस्था फ़िलहाल के लिए अस्थाई है और मामले के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी। पीठ ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा। शीर्ष अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली कई अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि धार ज़िले में विवादित भोजशाला परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है और वहां नमाज़ पढ़ने पर रोक लगा दी गई थी। -
नई दिल्ली। भारत ने आज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय दो जहाजों, एमटी अल बहिया और एमटी मोम्बासा पर हुए हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने आज सुबह नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास के उप मिशन प्रमुख को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। दोनों जहाजों पर सवार 46 सदस्यीय चालक दल में से 30 भारतीय नाविक थे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि एमटी अल बहिया पर सवार 12 भारतीय नागरिकों में से एक की मृत्यु हो गई है और एक घायल हो गया है। एमटी मोम्बासा पर सवार 18 भारतीय नागरिकों में से नौ घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। मंत्रालय ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय मिशन और दूतावास स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव सहायता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के संपर्क में हैं। भारत ने नाविकों को निशाना बनाकर किए गए इन हमलों और हिंसा की कड़ी निंदा की है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध और सुरक्षित नौवहन बाधित हुआ है। भारत ने पश्चिम एशियाई क्षेत्र में हमलों की दोबारा शुरुआत और शत्रुता बढने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। साथ ही क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए हिंसा को तत्काल रोकने और संवाद तथा कूटनीति की ओर लौटने का आह्वान किया है। बयान में कहा गया है कि क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए ताकि क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। -
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 13 जुलाई, 2026 को अपने आधिकारिक स्पेन दौरे की शुरुआत की। यात्रा के पहले दिन उन्होंने भारत-स्पेन आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से कई उच्च स्तरीय बैठकों में भाग लिया। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, नवाचार, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ नए आर्थिक अवसरों की तलाश पर जोर दिया। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और स्पेन अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं और वर्ष 2026 को भारत-स्पेन द्विभाषी संस्कृति, पर्यटन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष के रूप में मना रहे हैं।
पीयूष गोयल ने स्पेन के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं अर्थव्यवस्था, व्यापार और व्यवसाय मंत्री कार्लोस कुएर्पो कैबालेरो से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने, बाजार पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, उन्नत विनिर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, अवसंरचना और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भी विचार-विमर्श किया तथा नए निवेश को बढ़ावा देने के लिए फास्ट ट्रैक तंत्र का प्रभावी उपयोग करने और इस वर्ष के अंत में भारत-स्पेन संयुक्त आयोग की बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई।गोयल ने स्पेन के उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहर से भी मुलाकात की। बैठक में सतत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, गतिशीलता, उन्नत विनिर्माण, पर्यटन, ऑटोमोटिव, रेलवे और स्मार्ट बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने “मेक इन इंडिया” के तहत सी-295 कार्यक्रम को औद्योगिक साझेदारी का सफल उदाहरण बताया और वर्ष 2026 को भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष के रूप में मनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत-स्पेन व्यापार मंच रहा, जिसका आयोजन एफआईसीसी, स्पेन चैंबर ऑफ कॉमर्स, सीईओई और आईसीईएक्स स्पेन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट ने संयुक्त रूप से किया। मंच में दोनों देशों के सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताते हुए स्पेनिश कंपनियों को विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया।गोयल ने स्पेन की व्यापार एवं निवेश प्रोत्साहन एजेंसी आईसीईएक्स के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर निवेश प्रवाह बढ़ाने, प्रौद्योगिकी सहयोग और कारोबारी संबंधों को आसान बनाने के उपायों पर चर्चा की। दिन के अंत में उन्होंने एफआईसीसी के नेतृत्व वाले भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर स्पेन में निवेश और व्यापार विस्तार के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने विश्वास जताया कि यह यात्रा व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग और नवाचार के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगी। -
नई दिल्ली। भारत ने फिलिस्तीन की संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण सदस्यता की मांग का फिर से समर्थन किया है। साथ ही, इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए “दो-राष्ट्र समाधान” (Two-Nation Solution) पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय (MEA) की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने सोमवार को ब्रुसेल्स में ‘फिलिस्तीन डोनर ग्रुप’ की मंत्री-स्तरीय बैठक में भारत का आधिकारिक रुख रखा।
बैठक में रंगनाथन ने कहा कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीन का विश्वसनीय साझेदार रहा है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के निरंतर समर्थन और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की दावेदारी के समर्थन को दोहराया।उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत फिलिस्तीन की UN पूर्ण सदस्यता का समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजराइल और फिलिस्तीन दोनों देशों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का समर्थन करता है।MEA सचिव ने फिलिस्तीन में भारत द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न विकास कार्यक्रमों का जिक्र किया। भारत की परियोजनाएं मुख्य रूप से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, क्षमता निर्माण और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित हैं। ब्रुसेल्स बैठक के दौरान श्रीप्रिया रंगनाथन ने फिलिस्तीनी लोगों के लिए और सहायता बढ़ाने की दिशा में पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी नई परियोजनाओं की घोषणा भी की।भारत का यह रुख उसकी पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जिसमें वह फिलिस्तीनी मुद्दे पर लंबे समय से संतुलित और सिद्धांतवादी रुख अपनाता आया है। यह बैठक यूरोपीय संघ, उसके सदस्य देशों, फिलिस्तीन और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच फिलिस्तीनी अथॉरिटी को वित्तीय सहायता और मानवीय मदद पहुंचाने पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार, 15 जुलाई को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन करेंगी। आयुष मंत्रालय के तहत आयोजित यह सेमिनार 15 से 17 जुलाई तक चलेगा, जबकि 14 जुलाई को पूर्व-कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत की जयंती के अवसर पर आयोजित हो रहा है।
सेमिनार में आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा के एकीकरण पर देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम के दौरान एनसीआईएसएम द्वारा तैयार “आयुर्वेद महिला स्नातकों के पेशेवर करियर का मूल्यांकन” विषयक राष्ट्रीय अध्ययन भी जारी किया जाएगा। इसके अलावा, 14.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई प्रणाली का उद्घाटन होगा। इस प्रणाली में एआई-सक्षम वर्कफ्लो, बायोमेट्रिक्स और उन्नत इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी।चर्चा के प्रमुख विषयतीन दिवसीय कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रस्तुतियां होंगी। मुख्य विषयों में शामिल हैं:– मलाशय रोग विज्ञान– पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा– एकीकृत ऑन्कोलॉजी– चिकित्सा-कानूनी मुद्दे– सर्जरी में बौद्धिक संपदा– घाव प्रबंधन, अग्निकर्म, क्षारसूत्र और मर्म चिकित्साअंतरराष्ट्रीय भागीदारीसेमिनार में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत के प्रमुख सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन आयुर्वेद की प्राचीन शल्य विद्या को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक आयोजित 13 दिवसीय ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस यात्रा में सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा बलों के 28 बाइक सवार अपने परिवारों के साथ 1,900 किलोमीटर की दूरी तय कर 1999 के कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यात्रा का आदर्श वाक्य ‘एक सवारी, एक राष्ट्र, एक सलाम’ रखा गया है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 1999 की विजय भारत के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है कि देश अपनी भूमि, पहचान और सम्मान पर किसी भी शत्रुतापूर्ण दुस्साहस का पूरी शक्ति से जवाब देगा। उन्होंने कहा कि लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के कठिन मौसम में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को वापस हासिल किया और तिरंगे का गौरव कायम रखा। रक्षा मंत्री ने परम वीर चक्र से सम्मानित कप्तान विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) के योगदान को याद करते हुए कहा कि ये सभी वीर सैनिक देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। यात्रा के दौरान बाइक सवार चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक और लेह युद्ध स्मारक सहित कई प्रमुख सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके अलावा वे वीरांगनाओं से मुलाकात कर उनके साहस और योगदान का सम्मान भी करेंगे। यह अभियान 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास में संपन्न होगा।इस अभियान के दौरान बाइक सवार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा कलश अपने साथ लेकर जाएंगे, जिसे कारगिल में शहीदों की स्मृति में अर्पित किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और कारगिल की मिट्टी का मिलन वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और देश के वीर नायकों की अमर गाथा का प्रतीक बनेगा।रक्षा मंत्री ने कहा कि शौर्य विजय यात्रा देश के विभिन्न हिस्सों से आए सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और नागरिकों को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, परंपराएं और पृष्ठभूमियां होने के बावजूद एक तिरंगा, एक राष्ट्र और वीरों के प्रति साझा सम्मान ही भारत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान विशेषकर युवाओं में देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा और उन्हें कर्तव्य, सम्मान तथा नि:स्वार्थ सेवा के मूल्यों के प्रति प्रेरित करेगा। -
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अग्निवीरों को ट्रेनिंग देने की जानकारी साझा की है। भारतीय सेना की ओर से कहा गया कि हर बाधा को पार करना ऑपरेशनल एक्सीलेंस (काम में बेहतरीन प्रदर्शन) की दिशा में एक कदम है। डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कठिन बाधा-पार प्रशिक्षण (ऑब्सटेकल ट्रेनिंग) से गुजरना पड़ता है। इससे उनमें सहनशक्ति, फुर्ती, मानसिक मजबूती और दबाव में काम करने का आत्मविश्वास पैदा होता है।
सेना की ओर से कहा गया कि युद्ध के मैदान की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का अनुभव कराने के लिए डिजाइन की गई यह ट्रेनिंग तेजी से फैसला लेने, टीमवर्क और मुश्किल हालात में डटे रहने की क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही, यह मिलिट्री ऑपरेशन के लिए जरूरी अनुशासन और लड़ने का जज्बा भी पैदा करती है।सेना ने कहा कि हकीकत के करीब, चरणबद्ध और मिशन पर केंद्रित ट्रेनिंग के जरिए, हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया प्रेरित युवा रंगरूटों को ऐसे आत्मविश्वासी और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों में बदल रहा है, जो आधुनिक युद्ध के मैदान की चुनौतियों का हिम्मत और दृढ़ संकल्प के साथ सामना कर सकें। आज पार की गई हर बाधा कल के लिए एक योद्धा को और मजबूत बनाती है।वहीं, भारतीय सेना ने शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स के ‘स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स’ के बारे में जानकारी दी। सेना की ओर से कहा गया कि मिशन की सफलता की शुरुआत जबरदस्त तैयारी से होती है। शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स ने हाल ही में एक गहन ‘स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स’ (एसएचबीओ) अभ्यास किया। इसमें उन्होंने ज्यादा जोखिम वाले आतंकवाद-विरोधी मिशनों के लिए अपनी ऑपरेशनल तैयारी को बेहतर बनाने के मकसद से, शहरी इलाके में बंधकों को छुड़ाने जैसे मुश्किल हालात का अभ्यास किया।सेना ने कहा कि इस अभ्यास में टैक्टिकल हेलीकॉप्टर इंसर्शन (जैसे स्लिदरिंग, एसटीआईई और लो-होवर ड्रिल) के जरिए जमीन और हवा के बीच बेहतरीन तालमेल दिखाया गया। इसके बाद छत पर सटीक तरीके से उतरने और कमरे के अंदर तेजी से और सटीक कार्रवाई (सीक्यूबी) करने का अभ्यास किया गया। सेना ने बताया कि हर चरण में असली ऑपरेशन जैसे हालात में तेजी, तालमेल, सटीकता और मजबूत टीमवर्क की जरूरत थी। ऐसे में असल और मिशन पर केंद्रित ट्रेनिंग से तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता मजबूत होती है और लड़ने की कुशलता बढ़ती है। इससे यह भी पक्का होता है कि भारतीय सेना के पैराट्रूपर्स किसी भी आपात स्थिति में तेजी और असरदार ढंग से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहें। कड़ी ट्रेनिंग, सटीक हमला, मिशन पूरा करना। - लखनऊ. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि अगले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश में पांच लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं पूरी की जाएंगी। उन्होंने राज्य के लिए 50,000-60,000 करोड़ रुपये की नयी सड़क परियोजनाओं की भी घोषणा की।गडकरी ने 4,850 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आश्वस्त करता हूं कि आज अधिकारियों के साथ हुई बैठक में जिन 50,000-60,000 करोड़ रुपये की नयी परियोजनाओं पर चर्चा हुई, उन्हें मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश में पांच लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं पूरी कर ली जाएंगी।'' उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा आर्थिक विकास की आधारशिला है और बिजली, परिवहन तथा संचार निवेश आकर्षित करने तथा व्यापार एवं उद्योग को बढ़ावा देने के प्रमुख स्तंभ हैं। गडकरी ने कहा, ''जहां अच्छा बुनियादी ढांचा होता है, वहां व्यापार, कारोबार और उद्योग फलते-फूलते हैं। पूंजी निवेश बढ़ता है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी, भूख तथा बेरोजगारी में कमी आती है।'' उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने से पहले उत्तर प्रदेश का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो रहा था, लेकिन उसके बाद इसमें तेजी आई है। गडकरी ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहने के दौरान अपने कार्यालय में प्रदर्शित अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा, ''अमेरिका की सड़कें अच्छी इसलिए नहीं हैं कि अमेरिका समृद्ध है, बल्कि अमेरिका समृद्ध इसलिए है क्योंकि वहां की सड़कें अच्छी हैं।'' उन्होंने कहा, ''45 वर्ष के अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने कभी झूठे वादे नहीं किए। यदि कोई परियोजना संभव नहीं होती, तो मैं सार्वजनिक रूप से यह बात कह देता हूं।'' उत्तर प्रदेश को 'भारत का हृदय' बताते हुए गडकरी ने कहा कि देश का विकास राज्य की प्रगति से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, ''यदि उत्तर प्रदेश समृद्ध होगा, प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी, निर्यात में वृद्धि होगी और सड़क अवसंरचना मजबूत होगी तो भारत की विकास दर भी तेज होगी।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यद्यपि मेट्रो परियोजनाएं उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं, फिर भी सरकार रोपवे आधारित प्रणालियों और एलिवेटेड इलेक्ट्रिक बसों सहित विद्युत आधारित जन परिवहन के अन्य विकल्पों पर काम कर रही है। उन्होंने लखनऊ-सीतापुर राजमार्ग को लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन का बनाने की घोषणा करते हुए कहा कि इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय दो घंटे से घटकर लगभग 50 मिनट रह जाएगा। गडकरी ने कहा कि उन्होंने कानपुर से लखनऊ तक का सफर मात्र 22 मिनट में पूरा किया।लखनऊ से सांसद एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले लखनऊ के लिए सड़क परियोजनाओं की मांग रखी, इसलिए उन्हें यह परियोजनाएं मिल सकीं। उन्होंने कहा, ''मैं सबसे पहले बोलने के लिए इसलिए खड़ा हुआ, क्योंकि मुझे लगा कि यदि बाद में बोलूंगा तो शायद लखनऊ के लिए इन परियोजनाओं की मांग करने का अवसर नहीं मिलेगा। इसी कारण मैंने पहले बोलने का आग्रह किया।'' सिंह ने कहा कि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की मांग लंबे समय से की जा रही थी। ''जैसे ही मैंने नितिन गडकरी जी के समक्ष यह प्रस्ताव रखा, उन्होंने बिना देर किए इसे मंजूरी दे दी।'' उन्होंने बताया कि उन्होंने लखनऊ हवाई अड्डे से शहीद पथ होते हुए आउटर रिंग रोड तक 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा था, जिसे तत्काल मंजूरी मिल गई। सिंह ने कहा, ''शहीद पथ का निर्माण उस समय शुरू हुआ था, जब अटल जी प्रधानमंत्री थे और मैं सड़क परिवहन मंत्री था। उसके शिलान्यास समारोह में भी मैं मौजूद था। आज यह लखनऊ की जीवनरेखा बन चुका है। यदि यह नहीं होता तो शहर में यातायात का दबाव कितना बढ़ जाता, इसकी कल्पना की जा सकती है।'' उन्होंने कहा कि जिले में एलिवेटेड सड़क के ऊपर मेट्रो परियोजना को भी मंजूरी मिल गई है।रक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने में कभी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई की स्थापना का श्रेय भी मुख्यमंत्री को दिया। सिंह ने कहा, ''ब्रह्मोस मिसाइल इकाई यहां पहले ही स्थापित हो चुकी है। वह दिन दूर नहीं, जब लखनऊ के आसपास कई और बड़े उद्योग भी स्थापित होंगे।''
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार इस साल 16 जुलाई को होने वाले रथ यात्रा उत्सव से पहले राज्य की 60 रथ यात्रा समितियों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राज्य की धार्मिक विरासत को संरक्षित करना है।
उन्होंने कहा, ''कोलकाता में हर साल कई रथ यात्रा समारोह आयोजित किए जाते हैं। लेकिन पिछली सरकार केवल पुलिसकर्मियों की तैनाती करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर देती थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर हमारी सरकार ने इस वर्ष की रथ यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। सरकार ने 60 प्रतिष्ठित रथ यात्रा समितियों को पांच-पांच लाख रुपये का अनुदान देने का फैसला किया है। साथ ही, राज्य भर में लगने वाले 75 पारंपरिक रथ यात्रा मेलों में श्रद्धालुओं की सहायता के लिए सेवा केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।'' उन्होंने कहा कि ये सेवा केंद्र उत्सव के दौरान मेलों में आने वाले श्रद्धालुओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएंगे। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि लाभार्थियों की सूची पहली बार तैयार की गई है। उन्होंने अपील की कि यदि कोई योग्य समिति छूट जाए तो कृपया सहयोग और समझदारी का परिचय दें। उन्होंने कहा, ''यदि इस वर्ष की सूची में कोई त्रुटि हो, तो मैं सभी से क्षमाशील दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध करता हूं। हम आने वाले वर्षों में त्रुटिहीन सूची तैयार करेंगे। यह पहल आगे बढ़ेगी। आज लगाया गया पौधा कल एक विशाल वृक्ष बनेगा और अंततः एक परंपरा बन जाएगा।'' मुख्यमंत्री वार्षिक रथ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य सचिवालय में आयोजित समन्वय बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगामी 'श्रावण मेले' के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा कि इस दौरान श्रद्धालुओं के मार्गों पर निश्चित अंतराल पर ऐसे ही सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, ''सरकार शेउड़ाफुलि से तारकेश्वर तक हर पांच किलोमीटर पर 'सेवा केंद्र' स्थापित कर रही है। श्रावण मेले के दौरान भी मार्गों पर निश्चित अंतरालों पर 'सेवा केंद्र' स्थापित किए जाएंगे ताकि कंधों पर पवित्र जल लेकर चलने वाले लोग आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक सेवाओं का लाभ उठा सकें।'' उन्होंने कहा, ''हम तारकेश्वर धाम में 15 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवा रहे हैं।''
सोमवार को हुई समन्वय बैठक 16 जुलाई को होने वाली रथ यात्रा के मद्देनजर व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। शुभेंदु अधिकारी ने आगे आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने त्योहारों में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की थीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन बड़े तीर्थ स्थलों - तारकेश्वर, जलपाईगुड़ी जिले में जलपेश मंदिर और भूटान सीमा के पास जयंती इलाके में एक मंदिर को चुना है, जहां तीर्थयात्रियों के लिए खास सुविधाएं दी जाएँगी। उन्होंने कहा कि इन जगहों पर पुलिस सहायता शिविर, अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र, पीने का पानी, ओआरएस और आराम करने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारी ने कहा, ''दूसरे राज्यों में मैंने देखा है कि सरकारें ऐसी धार्मिक परंपराओं का सक्रिय रूप से समर्थन करती हैं। पश्चिम बंगाल को सालों से ऐसा समर्थन नहीं मिला। यह सरकार वह समर्थन देगी।'' उन्होंने कहा कि अगर मौसम ठीक रहा, तो सावन के पवित्र महीने में हर सोमवार को तीर्थयात्रियों पर हेलीकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मंगलवार को तारकेश्वर में मौजूद रहेंगे।
उन्होंने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाली जगहों को संरक्षित करने की सरकारी कोशिशों के तहत राज्य के बजट में एक ''तीर्थ सर्किट'' विकसित करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ द्वारा चलाए जा रहे अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत लाया गया है। अधिकारी ने यह भी घोषणा की कि सरकार ने स्वामी विवेकानंद की जन्मस्थली 'सिमला स्ट्रीट' के लिए पांच करोड़ रुपये के स्थायी कोष को मंजूरी दी है। -
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने संगठित अपराध और हिंसक विरोध-प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने के मकसद से सोमवार को दो विवादित कानून लागू कर दिए, जिनके तहत अधिकारियों को बिना मुकदमे के संदिग्धों को हिरासत में रखने और दंगाइयों की संपत्ति कुर्क करके नुकसान की भरपाई करने का अधिकार दिया गया है। पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026, जिसे 'गुंडा रोधी कानून' भी कहा जाता है तथा पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 सोमवार से प्रभावी हो गए। इन दोनों विधेयकों को राज्य विधानसभा ने 29 जून को पारित किया था। अधिकारियों के अनुसार, गुंडा रोधी कानून जिलाधिकारियों और पुलिस आयुक्तों को यह अधिकार देता है कि यदि किसी व्यक्ति के असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका हो, तो उसे अधिकतम 12 महीने तक एहतियाती (निवारक) हिरासत में रखने का आदेश दिया जा सकता है। हिरासत से जुड़े आदेश को 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को मंजूरी देनी होगी और तीन सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इस कानून में 'गुंडा' की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब इसमें केवल आदतन हिंसक अपराधी ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े लोग, ऐसे अपराधों का वित्तपोषण या सहयोग करने वाले, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी प्रदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत बार-बार अपराध करने वाले तथा समाज के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है। इस कानून में 'असामाजिक गतिविधियां' की परिभाषा का भी काफी विस्तार किया गया है। अब इसमें ऐसी गतिविधियां शामिल होंगी जो लोगों में भय या दहशत फैलाती हों और लोक व्यवस्था को खतरे में डालती हो। इसके अलावा, वैध व्यापार या कारोबार में बाधा उत्पन्न करने, संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां भी इसमें शामिल की गई हैं। अवैध खनन, बिना अनुमति रेत खनन, वन एवं वन्यजीव अपराध जैसे आर्थिक और पर्यावरण संबंधी अपराधों को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है। नये प्रावधानों के तहत जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त तड़ीपार करने के आदेश भी जारी कर सकेंगे, जिसके तहत संदिग्ध अपराधियों को एक वर्ष तक किसी निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, जिससे पुलिस को बिना वारंट तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तारी करने का अधिकार मिलेगा। पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत सरकार को दंगों या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क कर उनकी नीलामी करने का अधिकार दिया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इन विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा था कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध गिरोहों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए राज्य को कड़े कानूनी प्रावधान करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि मौजूदा कानून पर्याप्त रूप से निरोधक नहीं हैं। वहीं, विपक्ष, विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस, ने इन कानूनों की आलोचना करते हुए इन्हें दमनकारी बताया और आरोप लगाया कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और असहमति जताने वालों के खिलाफ किया जा सकता है।
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जम्मू. कश्मीर घाटी में वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को 7,700 से अधिक श्रद्धालुओं का 12वां जत्था जम्मू में दो आधार शिविरों से रवाना हुआ। अब तक, 2,52,000 से अधिक तीर्थयात्री 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर में भगवान शिव के 'हिमलिंगम' के दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि कुल 7,754 तीर्थयात्री 303 वाहनों में रवाना हुए जिनमें 5,383 पुरुष, 2,071 महिलाएं, 222 साधु, 58 साध्वियां, 16 बच्चे और चार ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल थे। काफिले को दो अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। बालटाल मार्ग का काफिला तड़के 3:30 बजे रवाना हुआ जिसमें 133 गाड़ियां और 2,896 तीर्थयात्री शामिल थे, जबकि पहलगाम मार्ग का काफिला तड़के सुबह 4:05 बजे निका जिसमें 170 गाड़ियों में 4,858 तीर्थयात्री सवार थे। शुक्रवार को रवाना हुए श्रद्धालुओं के साथ दो जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से कुल 87,701 तीर्थयात्री जम्मू आधार शिविर से कश्मीर के लिए रवाना हो चुके हैं। श्रद्धालुओं ने ''बम बम भोले'', ''हर हर महादेव'' और ''जय बर्फानी बाबा की'' के जयकारों के बीच भगवती नगर आधार शिविर से अपनी यात्रा शुरू की। कई तीर्थयात्रियों ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। गुफा मंदिर की 57 दिनों की यह वार्षिक तीर्थयात्रा 28 अगस्त को संपन्न होने वाली है।
- नागपुर. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गरीबों, वंचितों, शोषितों और दलितों की सेवा में विश्वास रखती है तथा इन वर्गों को आत्मसम्मान के साथ जीवन-यापन का अवसर देना पार्टी का मिशन है। यहां महर्षि सुदर्शन वाल्मीकि वसाहत आवासीय परिसर के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए गडकरी ने 'सफाई कामगारों' के कल्याण के लिए विशेष प्रयास करने को लेकर नागपुर महानगरपालिका और राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा, ''भारतीय जनता पार्टी गरीबों, वंचितों, शोषितों और दलितों की सेवा करना चाहती है तथा उन्हें भोजन, वस्त्र और आवास उपलब्ध कराना चाहती है। यह भाजपा का मिशन है कि वे आत्मसम्मान के साथ जीवन-यापन करें।'' स्थानीय सांसद गडकरी ने कहा कि भाजपा सफाई कामगारों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के वास्ते प्रतिबद्ध है, ताकि वे खुशहाल जीवन जी सकें। उन्होंने कहा, ''यही हमारा सपना है।'' गडकरी ने बताया कि उनकी मां की याद में नागपुर में हाल में शुरू किए गए एक स्वास्थ्य जांच केंद्र ने पिछले नौ महीनों में करीब 53 हजार जरूरतमंद लोगों को बेहद किफायती दरों पर मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने कहा कि 11 साल पहले उन्होंने दोपहिया वाहन आधारित ऐप टैक्सी सेवा से जुड़ी एक फाइल को मंजूरी दी थी, जिससे करीब 3.5 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों में यह योजना शुरू नहीं हुई है, उनसे इसे शुरू करने का आग्रह किया जाएगा। इससे पहले दिन में, गडकरी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ नागपुर में महाराष्ट्र रेल अवसंरचना विकास निगम (महारेल) द्वारा निर्मित चार रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार अंडरपास और एक रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) का उद्घाटन किया। गडकरी ने मुख्यमंत्री के साथ-साथ स्थानीय पार्षदों और विधायकों को बधाई देते हुए कहा, ''फडणवीस के नेतृत्व में महारेल ने बेहतरीन काम किया है।''
- अयोध्या (उप्र) . राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने रविवार को कहा कि राम मंदिर और निर्माणाधीन राम कथा संग्रहालय की कुल लागत 1,600 करोड़ रुपये से 1,800 करोड़ रुपये के बीच होगी। इसमें संग्रहालय के निर्माण पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मिश्रा ने अयोध्या में पत्रकारों से कहा, ''मैं सटीक राशि नहीं बता सकता, लेकिन मंदिर और संग्रहालय की कुल लागत 1,600 करोड़ रुपये से 1,800 करोड़ रुपये के बीच रहेगी।'' उन्होंने बताया कि राम मंदिर का निर्माण कार्य 15 अगस्त तक पूरा होने की संभावना है।शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे मिश्रा ने मंदिर निर्माण और राम कथा संग्रहालय से संबंधित कई बैठकों की अध्यक्षता की। उन्होंने उम्मीद जताई कि संग्रहालय अगले छह से आठ महीने में तैयार हो जाएगा। मिश्रा ने कहा, ''इस बार संग्रहालय के लिए हमारा लक्ष्य विभिन्न दीर्घाओं और बजट को अंतिम रूप देना था। आगंतुकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।'' उन्होंने कहा, ''स्मारिका दुकान और कॉफी कॉर्नर जैसी सुविधाओं से युक्त विश्राम क्षेत्र पहले ही तैयार किया जा चुका है। प्रवेश शुल्क को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि प्रवेश टिकट व्यवस्था लागू की जाए या संग्रहालय में प्रवेश निशुल्क रखा जाए। अंतिम फैसला ट्रस्ट करेगा।'' मिश्रा ने बताया कि भगवान राम का देश की नदियों से जुड़ाव दर्शाने वाली एक दीर्घा की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने कहा, ''एक ऐसी पटकथा तैयार की जाएगी, जिसमें सरयू नदी से शुरू होकर गुप्तार घाट पर समाप्त होने वाली भगवान राम की यात्रा को दर्शाया जाएगा। इसमें उनके वनवास की कथा के साथ उन स्थानों और संदेशों का भी उल्लेख होगा, जहां-जहां वह ठहरे थे। यह भी तय किया गया है कि पूरी प्रस्तुति के मुख्य पात्र भगवान राम ही होंगे।'' मिश्रा ने कहा, ''निर्माण एजेंसियों के बिल और वेंडर के भुगतान की समीक्षा की जा रही है। साथ ही ट्रस्ट को संपत्ति रजिस्टर सौंपने की प्रक्रिया भी जारी है। इसमें निर्माण कार्य का पूरा विवरण, खर्च और भविष्य के लिए आवश्यक सावधानियां दर्ज होंगी। संबंधित एजेंसियों ने भरोसा दिलाया है कि यह कार्य 30 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा।'' उन्होंने बताया कि मंदिर में 24 घंटे प्रज्ज्वलित रहने वाली 'ज्वाला' के डिजाइन को शनिवार को अंतिम रूप दे दिया गया है और अगले 15 दिन में इस पर काम शुरू हो जाएगा। राम कथा संग्रहालय के संबंध में मिश्रा ने कहा कि पटकथा लेखन का काम पूरा हो चुका है और दीर्घाओं की रूपरेखा भी लगभग अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, ''पटकथा के साथ प्रौद्योगिकी को जोड़ने की योजना तैयार कर ली गई है। इसके आधार पर एक महीने के भीतर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा और प्रत्येक दीर्घा के निर्माण के लिए निविदाएं जारी की जाएंगी।
- कोटा। राजस्थान के बारां जिले में सो रहे एक युवक पर अज्ञात हमलावर ने कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में कुल्हाड़ी का धारदार हिस्सा उसके सिर में गहराई तक धंस गया, जिसे रविवार को कोटा के एक अस्पताल में तीन घंटे से अधिक समय तक चली जटिल सर्जरी के बाद निकाला गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, बारां जिले के भंवरगढ़ थाना क्षेत्र निवासी 30-वर्षीय रामजीलाल सहरिया पर 11-12 जुलाई की दरमियानी रात उस समय हमला किया गया, जब वह अपने घर में पत्नी ममता और बेटी के साथ सो रहे थे। पुलिस ने बताया कि कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर उनकी पत्नी रात करीब दो बजे जगीं। उन्होंने देखा कि रामजीलाल फर्श पर खून से लथपथ पड़े हैं और उनके सिर के बाईं ओर कुल्हाड़ी का धारदार हिस्सा गहराई तक धंसा हुआ है। पड़ोसियों की मदद से उन्हें तुरंत भंवरगढ़ के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उन्हें बारां जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोटा भेज दिया गया। रविवार सुबह करीब पांच बजे परिजन उन्हें न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) लेकर पहुंचे। उस समय कुल्हाड़ी का हिस्सा उनके सिर में धंसा हुआ था। एनएमसीएच के न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एस. एन. गौतम ने बताया कि मरीज को अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। कुल्हाड़ी का धारदार हिस्सा सिर में करीब 2.5 सेंटीमीटर तक धंसा हुआ था। उनका रक्तचाप बहुत कम था और काफी मात्रा में रक्त बह चुका था। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन से पहले मरीज की स्थिति और रक्तचाप को स्थिर किया गया तथा चोट की गंभीरता का आकलन करने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय जांच की गई। हालांकि, सिर में धंसी कुल्हाड़ी के कारण सीटी स्कैन करना भी काफी चुनौतीपूर्ण था।डॉ. गौतम ने बताया कि अपराह्न करीब तीन बजे चिकित्सकों की टीम ने सर्जरी शुरू की, जो तीन घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान कुल्हाड़ी के धारदार हिस्से को अत्यंत सावधानी से निकाला गया, ताकि मस्तिष्क की कोशिकाओं को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि मरीज की हालत फिलहाल नाजुक बनी हुई है और खतरा टला नहीं है। अगले आठ से दस दिन उसकी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इस बीच, भंवरगढ़ के क्षेत्राधिकारी गोपीचंद आर्य ने बताया कि पुलिस ने अज्ञात हमलावर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि पीड़ित ट्रैक्टर चालक के रूप में काम करता है। उस पर हुए इस जानलेवा हमले के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल सका है।












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