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- नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि निर्माणाधीन 85 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं कानूनी और भूमि अधिग्रहण संबंधी मुद्दों सहित विभिन्न कारणों से तीन साल से अधिक विलंबित हैं। सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने विलंब और लागत में वृद्धि से बचने के लिए विभिन्न पहल की हैं। गडकरी ने कहा, ''उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में, निर्माणाधीन 85 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भूमि अधिग्रहण, वैधानिक मंजूरी, उपयोगिता स्थानांतरण, अतिक्रमण और कानून व्यवस्था संबंधी मुद्दों जैसी विभिन्न समस्याओं के कारण तीन साल से अधिक विलंबित हैं।''उन्होंने कहा कि अन्य कारणों में ठेकेदार की कार्यान्वयन क्षमता को प्रभावित करने वाला वित्तीय संकट, ठेकेदार का खराब प्रदर्शन और कोविड-19 महामारी, कानून में परिवर्तन जैसी अप्रत्याशित घटनाएं शामिल हैं। गडकरी ने कहा कि सरकार ने देरी और लागत में वृद्धि को रोकने के लिए विभिन्न पहल की हैं। इन प्रयासों में सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) और 'जीआईएस' आधारित भूमि अधिग्रहण योजना के साथ एकीकृत ''भूमि राशि'' पोर्टल का उपयोग करके भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, वन और पर्यावरण संबंधी मंजूरी में तेजी लाने के लिए 'परिवेश' पोर्टल को नया रूप देना, परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं की समीक्षा और समाधान के तंत्र का लाभ उठाना शामिल है।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह के साथ पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति पर विचार-विमर्श किया और कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना सर्वोपरि प्राथमिकता बनी हुई है। दोनों नेताओं ने टेलीफोन पर हुई बातचीत में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक संपर्क बनाये रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मैंने कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बात की और उन्हें ईद की शुभकामनाएं दीं।'' उन्होंने कहा, ''हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और हाल के घटनाक्रम को लेकर चिंता व्यक्त की।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों की निंदा की।उन्होंने कहा, ''होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए निरंतर राजनयिक संपर्क आवश्यक है।'' मोदी ने कुवैत में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए निरंतर समर्थन देने के वास्ते युवराज को धन्यवाद भी दिया। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के लगभग तीन सप्ताह बाद प्रधानमंत्री ने कुवैत के नेता से दूसरी बार बात की। इस संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने भी कई खाड़ी देशों को निशाना बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है। इनमें सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, जॉर्डन, इजराइल और ईरान के नेता शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि 2025 में महिलाओं से ऑनलाइन दुर्व्यवहार, अश्लील सामग्री का प्रसार और उनका पीछा करने जैसी 76,650 से अधिक साइबर अपराध की घटनाएं राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज की गईं, जो 2024 की तुलना में 28,322 अधिक हैं। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिकायतों में अश्लील सामग्री और बाल यौन शोषण सामग्री से संबंधित मामले शामिल हैं।
पिछले पांच वर्षों में एनसीआरपी पर दर्ज, महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित साइबर अपराध की घटनाओं के आंकड़े साझा करते हुए मंत्री ने कहा कि ऐसी शिकायतों की संख्या 2021 में 52,048 थी जो 2022, 2023, 2024 और 2025 में क्रमश: 62,224; 40,066; 48,335 और 76,657 थी। आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अश्लील सामग्री से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक 37,743 थीं। मंत्री ने ऑनलाइन और सोशल मीडिया से संबंधित अपराध श्रेणी के तहत दर्ज मामलों का भी विवरण साझा किया। आंकड़ों के अनुसार, इस श्रेणी में शिकायतों की संख्या 2021 में 72,301 थी जो 2022 में 1,31,634; 2023 में 1,41,264; 2024 में 1,57,054 और 2025 में 1,73,766 हो गई। -
नई दिल्ली। असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। नगांव (Nagaon) से लगातार दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि प्रद्युत बोरदोलोई कल भाजपा में शामिल हो सकते हैं। वहीं इस राजनीतिक घटनाक्रम से राज्य की चुनावी रणनीति और समीकरणों पर महत्वपूर्ण असर भी पड़ सकता है।
भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस संबंध में कहा है कि अगर बोरदोलोई भाजपा में शामिल होना चाहते हैं तो उनका स्वागत करेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि अगर बोरदोलोई भाजपा में शामिल होते हैं तो भाजपा उन्हें आगामी चुनावों में टिकट दे सकती है। 9 अप्रैल को असम में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान है।गौरतलब हो बोरदोलोई के बेटे प्रतीक बोरदोलोई को मार्घेरिटा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट मिला है और बोरदोलोई कांग्रेस के करीबी नेताओं में कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर गौरव गोगोई से नाराज थे और यही वजह थी कि प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। - नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय और सुरक्षा बढ़ाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जैसे तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों की जगह लाभदायक फसलों को बढ़ावा देना, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, फसल बीमा योजना में सुधार और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना।संसद के निचले सदन में सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों से तंबाकू की खेती छोड़ने की अपील की है और इसके बदले कई फायदे वाली फसलों की पहचान की है। इनमें हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन्स, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, ताकि किसानों की नकद आय सुरक्षित बनी रहे।मंत्री ने कहा कि देश के ज्यादातर किसानों के पास छोटी जमीन होती है, इसलिए केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इसको देखते हुए सरकार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) के कई मॉडल तैयार किए हैं, जिनका अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन भी किया जा रहा है।इन मॉडलों के तहत किसान अनाज (गेहूं और धान), सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ अपना सकते हैं। इससे उन्हें पूरे साल स्थिर और ज्यादा आय मिल सकती है। कृषि मंत्री चौहान ने आगे बताया कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाया गया है और इस सीजन में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है।उन्होंने कहा कि सरकार ने दालों जैसे तूर, मसूर और उड़द के लिए भी व्यवस्था की है, जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी पूरी उपज बेच सकते हैं और सरकार उसे खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे दाल उत्पादक किसानों को बड़ा सहारा मिला है। फसल बीमा योजना को लेकर उन्होंने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा पाने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अगर किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है तो उसे मुआवजा मिलना जरूरी होगा।उन्होंने यह भी बताया कि अगर 21 दिनों के भीतर बीमा राशि किसान के खाते में नहीं आती है, तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इससे किसानों को देरी का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और फसल बीमा या अन्य योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि रक्षक पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाती है, वहां दोषियों पर कार्रवाई की जाती है।उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान सहित कई राज्यों में फसल बीमा के तहत हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए हैं, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिला है।
- नयी दिल्ली. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने तीन चुनावी राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के सत्तारूढ़ दलों को मंगलवार को ''विकास विरोधी'' करार देते हुए कहा कि इन्होंने इन प्रदेशों में रेलवे परियोजनाओं को अवरुद्ध कर रखा है। इन तीनों प्रदेशों तथा असम और पुडुचेरी में अगले महीने विधानसभा चुनाव होना है। वैष्णव ने रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इन ''विकास विरोधी'' सरकारों को जनता उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने केरल का उल्लेख करते हुए कहा, ''कांग्रेस और वाम दल केरल को विकास से दूर रखते हैं और फिर कहते हैं कि परियोजनाएं पूरी नहीं हो रही हैं।'' रेल मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु में भी यही स्थिति है।उन्होंने कहा, ''रेलवे परियोजनाओं के लिए तमिलनाडु में 4,326 हेक्टेयर की जरूरत है, जिसमें 24 प्रतिशत जमीन अधिग्रहित की गई हैं। रेलवे परियोजनाओं का काम तभी पूरा हो सकता है जब राज्य सरकार जमीन अधिग्रहित करके दे।'' वैष्णव ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की विकास विरोधी सरकार ने राज्य के साथ बड़ा अन्याय किया है। उन्होंने कहा, ''60 ऐसी रेलवे परियोजनाएं हैं जिन्हें विकास विरोधी सरकार ने रोक रखा है और उनके लिए जमीन नहीं दे रही।''
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच घरों में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। सीतारमण ने राज्यसभा में अनुदान संबंधी पूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि देश में खरीफ फसल के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और अगली रबी फसल के लिए पोषक तत्वों की खरीद को लेकर वैश्विक बोली प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। भारत अपनी घरेलू एलपीजी आवश्यकताओं का लगभग 65 प्रतिशत आयात करता है और इसका 90 प्रतिशत हिस्सा युद्ध से प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट ने एक नई चुनौती पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भरता पर जोर देने तथा भारत की बुनियादी मांगों को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों से देश को मदद मिली है। उन्होंने कहा, ''लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात में कुल 65 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। इसके परिणामस्वरूप, यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि हमें एलपीजी मिलेगी या नहीं। इस संकट के समय में हम निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं और इस बारे में पर्याप्त रिपोर्ट मौजूद हैं।'' एलपीजी क्षेत्र के बारे में सीतारमण ने कहा कि देश उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है और ''इस समय भी जिस तरह से हमने एलपीजी में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, उससे भी मदद मिल रही है।''उल्लेखनीय है कि सरकार ने आठ मार्च को तेल रिफाइनरियों और पेट्रोरसायन परिसरों को एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया था। सीतारमण ने कहा, ''इसके परिणामस्वरूप, घरेलू स्तर पर भी, हम एलपीजी आपूर्ति के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं, और घरेलू एलपीजी उत्पादन लगभग 25 प्रतिशत बढ़ रहा है और इस बढ़ी हुई क्षमता से प्राप्त पूरा उत्पादन घरेलू उपभोक्ताओं को जा रहा है।'' उन्होंने कहा, "इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि परिवारों को परेशानी न हो, न केवल पोत परिवहन के जरिये निरंतर प्रवाह बना हुआ है, बल्कि हमने घरेलू स्तर पर भी एलपीजी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए अन्य हाइड्रोकार्बन पदार्थों से एलपीजी उत्पादन की ओर रुख किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, घरेलू आपूर्ति पर्याप्त रूप से व्यवस्थित होगी और आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी।" उर्वरकों के बारे में मंत्री ने कहा कि खरीफ सत्र के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है और रबी फसल (शीतकाली) के लिए आयात को लेकर वैश्विक बोली प्रक्रिया शुरू होगी।--
- जम्मू. उधमपुर-रियासी रेंज की पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) सारा रिजवी ने चैत्र नवरात्र से पहले मंगलवार को माता वैष्णो देवी मंदिर और यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। वैष्णो देवी तीर्थयात्रा के आधार शिविर कटरा में संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए रिजवी ने नवरात्र के दौरान सुचारू और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए किए गए इंतजामों का आकलन किया। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।अधिकारियों के अनुसार, डीआईजी ने वाहनों की जांच तेज करने के लिए विभिन्न स्थानों पर औचक चौकियां स्थापित करने तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा चौबीसों घंटे संयुक्त गश्त के निर्देश दिए। उन्होंने पैदल गश्त बढ़ाने, ऊंचाई वाले स्थानों पर अतिरिक्त तैनाती, ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) को सक्रिय करने, क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने जैसे उपायों पर जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भगदड़ जैसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भीड़ प्रबंधन पर विशेष बल दिया गया। डीआईजी ने कटरा शहर में आने वाले प्रवासियों, निर्माण श्रमिकों, पोनी चालक और अन्य व्यक्तियों का सत्यापन करने के निर्देश दिए। बैठक में रियासी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमवीर सिंह के अलावा सीआरपीएफ, सेना, खुफिया ब्यूरो, अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी), भारतीय रेल, यातायात पुलिस और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक के दौरान एसएसपी ने कटरा शहर के लिए व्यापक सुरक्षा ग्रिड योजना प्रस्तुत की और आधार शिविर, यात्रा मार्ग तथा गुफा मंदिर में की गई व्यवस्थाओं की जानकारी दी। देशभर में नवरात्र उत्सव 19 से 27 मार्च तक मनाया जाएगा।
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि स्वास्थ्य बीमा इस सरकार की प्राथमिकता है और उम्मीद है कि 2033 तक देश में सभी लोग बीमा के दायरे में आ जाएंगे। वित्त मंत्री ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि बीमा क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और 2024-25 के दौरान इसने देश में 58 करोड़ लोगों को कवर किया। उन्होंने कहा, ''स्वास्थ्य बीमा इस सरकार की प्राथमिकता है। वास्तव में, हम उम्मीद कर रहे हैं कि 2033 तक सभी को बीमा कवर मिल जाएगा।'' मंत्री ने कहा कि दिसंबर 2025 में, सरकार ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने के लिए एक विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य बाजार को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि बीमा नियामक आईआरडीएआई ने ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ बढ़ाने के लिए 2024 में नियम अधिसूचित किए। वित्त मंत्री ने कहा, ''अगर सामान्य तौर पर बीमा की बात करें, तो हमारे सामने एक चुनौती है।''उन्होंने कहा कि हालांकि बीमा कवरेज अब भी कम है लेकिन सरकार लक्षित सुधारों और किफायती उपायों के माध्यम से इस अंतर को पाटने के लिए प्रयासरत है। वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य बीमा बाजार का जिक्र करते हुए कहा, ''आज यह क्षेत्र काफी विकसित हो चुका है और 2024-25 में 1,17,505 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें 58 करोड़ लोगों को बीमा कवरेज प्राप्त है। इसमें सार्वजनिक, निजी और स्वतंत्र बीमा कंपनियों का संतुलित योगदान है।'' मंत्री ने कहा कि यदि बीमा कंपनियों द्वारा कोई भी कदाचार किया जाता है, तो नियामक उनके खिलाफ कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां कानून का उल्लंघन करने वाली बीमा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कई निजी बीमा कंपनियों पर 1-2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने कहा कि 2023-24 में, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उन्होंने बताया कि इसी तरह, बजाज फाइनेंस लिमिटेड, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस सहित अन्य कंपनियों पर भी जुर्माना लगाया गया है।--
- नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से कई छोटे उद्यमियों को फायदा हुआ है और इस योजना के शुरू होने के बाद से 39.48 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 8 अप्रैल, 2015 को शुरू की गई मुद्रा योजना के तहत कुल निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) कुल ऋणों का लगभग 2 प्रतिशत हैं। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के उत्तर देते हुए, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एक बहुत ही लोकप्रिय योजना है और इससे कई छोटे उद्यमियों को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा, ''...योजना शुरू होने के बाद से 39.48 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसलिए यह सबसे बड़ी बैंक ऋण योजनाओं में से एक है, जो उन लोगों तक पहुंची है जिनके पास गिरवी रखने के लिए कुछ भी नहीं है।'' सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तीन घटक हैं- शिशु, किशोर और तरुण।उन्होंने कहा कि 31 मार्च, 2025 तक, शिशु श्रेणी में कुल ऋण राशि का 12.4 प्रतिशत बकाया है। किशोर श्रेणी में 9.48 प्रतिशत और तरुण श्रेणी में कुल दी गई राशि का 7.92 प्रतिशत बकाया है। उन्होंने कहा कि बैंक इन बकाया ऋणों की वसूली के लिए प्रयासरत हैं। वित्त मंत्री सीतारमण ने प्रश्नकाल के दौरान ही एक अन्य पूरक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में आर्थिक सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) मानदंडों का पालन नहीं करने के लिए विभिन्न कंपनियों पर कुल मिलाकर लगभग 20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी कानून के तहत, लाभ कमाने वाली कुछ कंपनियों के लिए एक वित्तीय वर्ष में अपने तीन साल के औसत वार्षिक लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सीएसआर खर्च से संबंधित हर निर्णय संबंधित कंपनी के बोर्ड द्वारा लिया जाता है। उन्होंने कहा, ''कंपनी और उसका बोर्ड यह तय करते हैं कि कितना खर्च करना है और कहां खर्च करना है। इसमें हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते।'' इस पर हस्तक्षेप करते हुए, राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने पूछा कि क्या मानदंडों में बदलाव किया जा सकता है ताकि पिछड़े राज्यों को सीएसआर निधि का लाभ मिल सके। इस पर वित्त मंत्री ने कहा, "सभापति के रूप में, आपने यह कहा है। मैं इसे एक सुझाव के रूप में लेती हूं और इस पर गौर करूंगी।''--
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीरता और साहस के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि एक साहसी व्यक्ति अपने पराक्रम से पूरे विश्व को प्रभावित कर सकता है और कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वीरता और पराक्रम ऐसी पूंजी है, जिसके बल पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इस सोच को लगातार मजबूती दे रहा है और देश के लिए प्रेरणा बन रहा है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किया पोस्टप्रधानमंत्री ने X पर अपने संदेश में लिखा- “वीरता और पराक्रम वो पूंजी है, जिससे हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इसी की प्रेरणा देता है।”संस्कृत सुभाषित के जरिए दिया संदेशप्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया-“एकेनापि हि शूरेण पादाक्रान्तं महीतलम्।क्रियते भास्करेणेव स्फारस्फुरिततेजसा ॥”सूर्य के उदाहरण से समझाया पराक्रम का प्रभावइस सुभाषित का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य अपने प्रखर और विस्तृत तेज से पूरी पृथ्वी को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार एक वीर व्यक्ति अपने साहस और पराक्रम से पूरे विश्व को प्रभावित कर सकता है। -
नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय का रक्षा उत्पादन विभाग एक बड़ा आयोजन करने जा रहा है। इस आयोजन को ‘नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव 2026’ नाम दिया गया है। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य स्वदेशी रक्षा उपकरण के निर्माण को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम दिल्ली में 19 और 20 मार्च को मानेकशॉ सेंटर में आयोजित होगा।
यह कॉन्क्लेव रक्षा उपकरणों को भारत में बनाने के लिए मजबूत तंत्र स्थापित करने में मदद करेगा। खास तौर पर छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई को इस सेक्टर से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है ताकि वे भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में हिस्सा ले सकें। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्यक्रम दिल्ली में 19 और 20 मार्च को मानेकशॉ सेंटर में होगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इस बार का फोकस नई और एडवांस टेक्नोलॉजी पर है। इस थीम भी ‘एडवांस मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजीस’ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, 3डी प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) और स्मार्ट मैटेरियल्स।दरअसल, सरकार चाहती है कि भारत की डिफेंस इंडस्ट्री अब पुराने तरीके से नहीं, बल्कि हाई-टेक व स्वदेशी तकनीक से आगे बढ़े। इस कार्यक्रम में सिर्फ सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियां, डिफेंस पीएसयू, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिक, टेक एक्सपर्ट और उच्च शिक्षण संस्थानों व यूनिवर्सिटीज से जुड़े शिक्षाविद व विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इस दौरान मंथन होगा कि भारत कैसे जल्द रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकता है और दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है। यहां एक बड़ी प्रदर्शनी भी लगेगी, जिसमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपनी नई तकनीक और प्रोडक्ट्स दिखाएंगी।इसके अलावा, स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए कुछ नए चैलेंज भी लॉन्च किए जाएंगे, ताकि वे डिफेंस सेक्टर के लिए नए आइडिया और समाधान लेकर आएं। यह कॉन्क्लेव एक ऐसा मंच है जहां सरकार, उद्योग और तकनीकी विशेषज्ञ एक साथ आकर यह विमर्श करेंगे कि आने वाले समय में भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को कैसे और तेज, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाया जाए।मंगलवार को -
नयी दिल्ली. राजा रवि वर्मा की दुर्लभ "यशोदा और कृष्ण" पेंटिंग, 8वीं शताब्दी की बुद्ध की कश्मीरी मूर्ति, और एम एफ हुसैन की "अंटाइटल्ड (बनारस)'' जैसी कृतियां सैफ्रोनार्ट की 'स्प्रिंग लाइव' और ऑनलाइन नीलामी में प्रमुख आकर्षण होंगे। नीलामी घर ने घोषणा की है कि वह 'पूर्व-आधुनिक और आधुनिक भारतीय कला के सावधानीपूर्वक चयनित संग्रह को एक साथ पेश करेगा, जो शताब्दियों से चली आ रही कलात्मक परंपरा का व्यापक निरंतर प्रवाह दर्शाता है। इस नीलामी का केंद्र आधुनिक भारतीय कला के विकास को आकार देने वाली कलाकृतियों का समूह है और दुर्लभ प्राचीन कलाकृतियों, मूर्तियों और समकालीन कलाकृतियों को भी नीलामी में शामिल किया गया है। सूची में राजा रवि वर्मा, एम एफ हुसैन, एस एच रजा, एफ एन सूजा की प्रमुख कृतियां शामिल हैं।
राजा रवि वर्मा के 1890 के दशक के तैलचित्र में यशोदा को गाय का दूध निकालते हुए दिखाया है, जबकि बाल कृष्ण दूध के गिलास के लिए पीछे से हाथ बढ़ा रहे हैं। तैलचित्र की अनुमानित कीमत 80-120 करोड़ रुपये है।
सैफ्रोनआर्ट के सीईओ और सह-संस्थापक दिनेश वजरानी ने कहा कि वर्मा की कृति "यशोदा और कृष्ण" एक भावपूर्ण ध्यानमग्न रचना है। उन्होंने कहा, "हम अपनी 'स्प्रिंग लाइव' और ऑनलाइन नीलामी में आधुनिक और समकालीन कला, मूर्तिकला और प्राचीन वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करते हुए बेहद प्रसन्न हैं। राजा रवि वर्मा की असाधारण कृति 'यशोदा और कृष्ण' को पहली बार नीलामी में शामिल करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।" वहीं, हुसैन की 'अनटाइटल्ड" कृति की अनुमानित कीमत 10-15 करोड़ रुपये है। इसमें वाराणसी शहर का चित्रण किया गया है। यह भव्य कृति वाराणसी के ऐतिहासिक घाटों पर रोजमर्रा की जिंदगी से हुसैन के जुड़ाव को दर्शाती है। बुद्ध की एक दुर्लभ प्रारंभिक कश्मीरी कांस्य मूर्ति भी नीलामी में आकर्षण का केंद्र है, जो पहले प्रसिद्ध संग्राहक नलिनी और हरिदास स्वाली के संग्रह में थी। इस मूर्ति की अनुमानित कीमत 3 से 5 करोड़ रुपये है।
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भुवनेश्वर. ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखूंटिया ने मंगलवार को विधानसभा में सूचित किया कि अप्रैल 2022 से 10 मार्च 2026 के बीच राज्य में शिकार और दुर्घटनाओं सहित विभिन्न कारणों से 344 जंगली हाथियों की मृत्यु हुई है। विधायक प्रदीप कुमार डिशारी के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि इस अवधि के दौरान 23 हाथी शिकारियों द्वारा मारे गए और 15 हाथियों की मौत दुर्घटनाओं के कारण हुई। उन्होंने बताया कि सबसे अधिक 53 हाथियों की ढेंकानाल जिले में हुई। उन्होंने बताया कि इसके बाद क्योंझर में 42, मयूरभंज में 39, अंगुल में 39, कटक में 37, संबलपुर में 25 और सुंदरगढ़ में 21 हाथियों की मौत हुई। उन्होंने बताया कि 93 हाथियों की वित्त वर्ष 2022-23, 66 हाथियों की 2023-24 और 105 हाथियों की 2024-25 में मौत हुई। उन्होंने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष में 10 मार्च तक ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में 80 हाथियों की मौत हुई है।
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नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन की समीक्षा करने के साथ इसमें बढ़ोतरी की जाए। समिति ने 'एग्रीगेटर्स' द्वारा ई-श्रम पोर्टल पर गिग श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य करने और एग्रीगेटर की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की सिफारिश की है ताकि इन श्रमिकों को बीमा और दुर्घटना कवर जैसी सामाजिक सुरक्षाएं मिल सके/ कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति के बाद मासिक पेंशन प्रदान किया जाता है, जिसके लिए कम से कम 10 साल की सेवा अनिवार्य है। श्रम, वस्त्र और कौशल विकास संबंधी स्थायी समिति ने ईपीएस, 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन की तत्काल समीक्षा और वृद्धि की सिफारिश की है, जो वर्तमान में केवल 1,000 रुपये प्रति माह है। भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश की गई।
समिति ने कमजोर श्रमिकों की वास्तविक आय की रक्षा के लिए स्वचालित आवधिक संशोधन तंत्र का भी सुझाव दिया है। रिपोर्ट में सर्व शिक्षा अभियान के साथ राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के विलय पर पुनर्विचार करने की सिफारिश की गई है, ताकि बाल श्रम के उन्मूलन और पुनर्वास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा सके। -
नयी दिल्ली. तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति में कमी के कारण होटल, व्यवसायों और घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से पाइप के जरिये घरों में आपूर्ति की जाने वाली(पीएनजी) परियोजनाओं के अनुमोदन में तेजी लाने को कहा है। इसका उद्देश्य घरेलू रसोई गैस पर दबाव कम करना और वैकल्पिक व्यवस्था को तेजी से लागू करना है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति बाधित हुई है।
स्थिति को देखते हुए सरकार अब इंडक्शन कुकर जैसे वैकल्पिक माध्यमों के उपयोग को भी बढ़ावा दे रही है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, "स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन हम घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह ही आपूर्ति प्रदान कर रहे हैं।" होटल और रेस्तरां जैसी वाणिज्यिक एलपीजी खपत को शुरू में सीमित किया गया था, लेकिन बाद में इसे उनके सामान्य उपयोग का एक-पांचवां हिस्सा बहाल कर दिया गया। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''हमें विकल्पों पर विचार करना होगा।''
आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर को भराने के लिए अचानक घबराहट के कारण हुई बुकिंग 13 मार्च को 87.7 लाख तक पहुंच गई थीं, लेकिन उसके बाद इसमें कमी आई है और सोमवार को यह लगभग 70 लाख बुकिंग पर आ गई। युद्ध से पहले यह संख्या लगभग 55 लाख थी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव ने कहा कि एलपीजी की आपूर्ति में तेजी जारी है।
उन्होंने कहा, ''हमने 13 मार्च को 62.5 लाख सिलेंडर और 14 मार्च को 60 लाख सिलेंडर वितरित किए... इसकी तुलना में संघर्ष से पहले के समय में 50 लाख सिलेंडर वितरित किए जाते थे।" उन्होंने कहा कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने के बावजूद अभी भी लोग घबराकर बुकिंग करा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एलपीजी का घरेलू उत्पादन पांच मार्च के स्तर की तुलना में 38 प्रतिशत बढ़ गया है। शर्मा ने बताया कि एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए सरकार वाणिज्यिक और घरेलू एलपीजी उपयोगकर्ताओं को पीएनजी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। शहरी गैस वितरण कंपनियां प्रोत्साहन और त्वरित कनेक्शन की पेशकश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए शहरों में गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार भी कर रही है। केंद्र सरकार ने 16 मार्च को सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर शहरी गैस परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने का निर्देश दिया है। सरकार ने उनसे बड़ी शहरी गैस पाइपलाइन के लिए लंबित आवेदनों को स्वतः स्वीकृत करने, नई शहरी गैस परियोजनाओं को 24 घंटे के भीतर मंजूरी देने, सड़क मरम्मत शुल्क माफ करने और कार्य समयसारणी में ढील देने को कहा है। उन्होंने कहा, ''हालात अभी भी चिंताजनक हैं, लेकिन किसी भी एलपीजी वितरक के यहां आपूर्ति बंद नहीं हुई है।'' भारत की एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि आयात के लिए एक प्रमुख मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और जवाबी ईरानी कार्रवाई के बाद बाधित हो गया है। उन्होंने बताया कि ईंधन की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। वाणिज्यिक एलपीजी भंडारण राज्यों के पास रखा गया है और उन्हें इसका उपयोग प्राथमिकता के अनुसार तय करने को कहा गया है। बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड ने पहले ही वितरण दिशानिर्देश जारी किए हैं। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से यह जानना चाहा कि मृत खाताधारकों के बैंक खातों की जानकारी उनके वैध उत्तराधिकारियों को उपलब्ध कराने में क्या बाधा है, और इस संबंध में स्पष्ट नीति तैयार करने की जरूरत बताई। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पत्रकार सुचेता दलाल की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस याचिका में मृत खाताधारकों के निष्क्रिय पड़े हुए जमा की जानकारी उनके उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्था बनाने का निर्देश देने की अपील की गई है। पीठ ने कहा, "यदि कोई व्यक्ति अपने कई बैंक खातों का विवरण छोड़े बगैर मर जाता है, तो उसके वारिस उनमें जमा राशि के बारे में जानकारी कैसे जुटाएंगे? कानूनी वारिसों को जानकारी देने में क्या समस्या है? सरकार को इस पर नीति बनानी होगी।" याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि ऐसे खातों का विवरण सार्वजनिक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने भी "केंद्रीकृत और तलाश-योग्य डेटाबेस" बनाने की सिफारिश की है, जिससे लोग अपने दिवंगत परिजनों के खातों का पता लगा सकें। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वी वेंकटरमण ने कहा कि यदि कोई वास्तविक वारिस सामने आता है तो उसे 'जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष' से राशि वापस कर दी जाती है। आरबीआई ने यह कोष 2014 में बनाया था जिसमें बैंकों की निष्क्रिय जमाओं को रखा जाता है।
शीर्ष अदालत ने केंद्र और आरबीआई को इस मामले में नए हलफनामे दाखिल करने को कहा और अगली सुनवाई के लिए पांच मई की तारीख तय की। याचिका में कहा गया है कि मार्च, 2021 तक 'जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष' में 39,264 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा थी, लिहाजा ऐसे मामलों में पारदर्शिता और सरल प्रक्रिया की जरूरत और भी बढ़ जाती है। -
नयी दिल्ली. हाल में चयनित सिविल सेवा के सभी उम्मीदवारों से कहा गया है कि वे सोशल मीडिया पर अपना प्रचार करने और अनुचित पोस्ट डालने से बचें। इस संबंध में उनके लिए एक आधिकारिक परामर्श जारी किया गया है। उन्हें यह भी कहा गया है कि वे वाणिज्यिक और संस्थागत समर्थन से पेशेवर तौर पर दूरी बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि उनकी उपलब्धियों का निजी लाभ या प्रचार के लिए इस्तेमाल न किया जाए। परामर्श में कहा गया है कि सरकारी सेवक सार्वजनिक चेहरा होते हैं और उनका आचरण निरंतर सार्वजनिक निगरानी में रहता है। इसमें कहा गया है, "आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आम जनता, जन प्रतिनिधियों, निगम संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों, सरकारी कर्मचारियों, अन्य सभी गणमान्य व्यक्तियों और समाज के संवेदनशील वर्गों के साथ आपका व्यक्तिगत आचरण और आधिकारिक एवं सामाजिक संपर्क विनम्र, सम्मानजनक, गरिमापूर्ण और उचित हो।" सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई)-2025 के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों के लिए परामर्श जारी किया गया है। यह परामर्श मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) द्वारा जारी किया गया है, जो नौकरशाहों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान है। परीक्षा परिणाम छह मार्च को घोषित किया गया था। इसमें कहा गया, ''सोशल मीडिया जीवन के कई पहलुओं में व्याप्त है, और अकादमी भी संस्थागत स्तर पर प्रभावी प्रशासन में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के महत्व को पहचानती है, लेकिन किसी भी प्रकार के सोशल मीडिया का इस्तेमाल जो आत्मप्रचार बढ़ावा देता है, उसे दृढ़ता से हतोत्साहित किया जाता है।" परामर्श में कहा गया कि सोशल मीडिया पर की गई या अग्रसारित टिप्पणियां और पोस्ट भी सेवा पर प्रभाव डालेंगी। इसमें कहा गया, "इसलिए, इस स्तर पर भी, आपको ऐसी पोस्ट करने से बचना चाहिए जो सेवा या उसके सदस्यों के लिए मानहानिकारक हो सकती हैं। ऐसी सामग्री पोस्ट करने में सावधानी और समझदारी दिखाएं जिसे सेवा के अधिकारी/सदस्य के लिए गैर पेशेवर या अनुचित माना जा सकता है।" परामर्श में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे बयान पोस्ट करने से विशेष रूप से बचना चाहिए। इसमें "सोशल मीडिया शिष्टाचार" पर कहा गया है, "जो कुछ भी आप पोस्ट करने जा रहे हैं, उसके संभावित प्रभाव पर विचार करें। बल्कि, किसी भी प्रकार की ऐसी सामग्री पोस्ट करने से बचना ही बेहतर है, क्योंकि इससे व्यक्तिगत/संस्थागत स्तर पर गलतफहमी पैदा हो सकती है।" अकादमी ने कहा, "एक भावी सिविल सेवक के रूप में आपसे यह अपेक्षा की जाती है कि आप हर समय एक आदर्श व्यक्ति बनें।" यह भी कहा गया कि उनके पिछले कार्य उनके पूरे करियर में उनके चरित्र और व्यक्तित्व का प्रतिबिंब होंगे। सीएसई 2025 के परिणाम की घोषणा के दिन जारी सलाह में कहा गया है, "आपको आज से ही अधिकारी के लिए उपयुक्त अनुकरणीय आचरण प्रदर्शित करना शुरू कर देना चाहिए और अपने प्रशिक्षण शुरू होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। आप आगे चलकर शासन और सार्वजनिक सेवा मुहैया कराने वाले संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होंगे।" कुल 958 उम्मीदवार परीक्षा में उत्तीर्ण हुए और उन्हें विभिन्न केंद्रीय सिविल सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया। इसमें 659 पुरुष और 299 महिलाएं शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने मंगलवार को कहा कि जनगणना-2027 दिव्यांगता की सभी 21 मान्यता प्राप्त श्रेणियों का सटीक डेटा एकत्रित करने और दिव्यांगों से जुड़े नीति निर्माण को सक्षम बनाने का 'ऐतिहासिक अवसर' प्रदान करेगी। आठवले ने ''दृश्यमान से परे : दिव्यांगता समावेशन पर सांसदों के लिए मार्गदर्शिका'' के लोकार्पण अवसर पर कहा कि 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' के लागू होने के बाद पहली बार इस तरह का डेटा एकत्रित किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेहतर गणना और भिन्न-भिन्न प्रकार के डेटा सरकार को प्रभावी कार्यक्रम बनाने में मदद करेगा और दिव्यांग व्यक्तियों के बेहतर समावेशन को सुनिश्चित करेगा। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने कहा, ''दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 एक महत्वपूर्ण सुधार कानून था, जिसने दिव्यांगता की 21 श्रेणियों को मान्यता दी, जो कल्याण-आधारित दृष्टिकोण से अधिकार-आधारित दृष्टिकोण का प्रमाण है तथा इसके जरिये भारत को भी संयुक्त राष्ट्र के दिव्यांग अधिकार सम्मेलन के अनुरूप बनाया जा सका।'' नेशनल सेंटर फॉर प्रोमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल्स (एनसीपीईडीपी) के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने कहा कि यह मार्गदर्शिका सांसदों को कानूनी प्रावधानों को व्यावहारिक नीतियों में बदलने और दिव्यांग व्यक्तियों की भविष्य की बाधाओं को दूर करने में मदद के उद्देश्य से तैयार की गई है। उन्होंने कहा, ''यह पुस्तक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को वास्तविक विधायी कार्रवाई में बदलने और भारतीय लोकतंत्र में समावेशन को वास्तविक अनुभव बनाने में मदद करेगी।'' इस कार्यक्रम में समावेशी स्वास्थ्य कवरेज और राजनीतिक भागीदारी पर एक पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें केंद्रीय दिव्यांगता सलाहकार बोर्ड के सदस्य ईटी मोहम्मद बशीर, लोकसभा सदस्य ई. राजेंद्र, राज्यसभा सदस्य फौज़िया खान, भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान, भाजपा युवा संगठन की उपाध्यक्ष नेहा जोशी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनिश गवांडे शामिल थे।
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गुवाहाटी. असम विधानसभा चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए आयकर विभाग ने यहां चौबीसों घंटे संचालित होने वाला एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। एक आधिकारिक बयान में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। बयान में नागरिकों से आग्रह किया गया कि वे चुनाव के संबंध में नकदी, कीमती धातुओं या अन्य मूल्यवान वस्तुओं की संदिग्ध आवाजाही या वितरण के बारे में किसी भी विश्वसनीय जानकारी के साथ नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। इसमें कहा गया कि सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
असम विधानसभा के 126 सदस्यों के लिए चुनाव नौ अप्रैल को होंगे और वोटों की गिनती चार मई को होगी।
बयान में कहा गया है कि ''चुनावों में काले धन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने'' में निर्वाचन आयोग की सहायता करने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। -
नयी दिल्ली. भारतीय ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के बाद मंगलवार तड़के स्वदेश पहुंच गया। युद्ध क्षेत्र में फंसे अन्य 22 भारतीय जहाजों को सुरक्षित लाने के प्रयास जारी हैं। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि एलपीजी टैंकर नंदा देवी, मंगलवार तड़के लगभग 2:30 बजे गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। सोमवार को पहला जहाज, शिवालिक गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पर पहुंचा था।
दोनों जहाज पर लगभग 92,712 टन एलपीजी हैं। यह देश में एक दिन की खाना पकाने की गैस की आवश्यकता के बराबर है। सिन्हा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''दोनों जहाजों ने एलपीजी उतारना शुरू कर दिया है। इस समय, नंदा देवी मुख्य जहाज से अपने छोटे जहाजों में एलपीजी स्थानांतरित कर रहा है।'' उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय जहाजों से जुड़ी कोई भी घटना नहीं हुई है। एलपीजी लाने वाले दोनों जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था। इसके साथ ही युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित रूप से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या चार हो गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में 611 नाविकों को ले जा रहे 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर संचालन पर करीबी नजर रख रहा है। फारस की खाड़ी को खुले महासागर से जोड़ने वाला संकरा जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद प्रभावी रूप से बंद हो गया है। जब युद्ध शुरू हुआ था, तब जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में 24 और पूर्वी हिस्से में चार जहाज सहित कुल 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे। वर्तमान में, पश्चिमी हिस्से में 22 और पूर्वी हिस्से में दो जहाज बचे हैं। पूर्वी हिस्से में मौजूद जहाजों में से, कच्चे तेल का टैंकर जग लाडकी मंगलवार को लगभग 80,800 टन मुरबान कच्चे तेल के साथ भारत पहुंचने वाला है। जहाज पर सवार सभी 22 भारतीय नाविक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। एक अन्य टैंकर, जग प्रकाश जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर चुका है और तंजानिया के रास्ते में है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि अन्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारी क्षेत्र के सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से छह एलपीजी लाने वाले जहाज हैं, एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर हैं, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क कैरियर हैं। इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और उसमें कोई माल नहीं है और तीन नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में हैं। सिन्हा ने बताया कि पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दो एलपीजी टैंकर के चालक दल के साथ वीडियो कॉल के जरिये बातचीत की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य उन्हें धन्यवाद देना और उनके द्वारा दी गई उत्कृष्ट सेवा की सराहना करना था। ''वे सभी अपनी 'यूनिफॉर्म' में थे और स्वस्थ और खुश दिख रहे थे।'' सोनोवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर इस बातचीत का जिक्र भी किया है।
उन्होंने कहा, ''भारतीय तट पर पहुंचने के बाद भारतीय ध्वज वाले एलपीजी पोत शिवालिक और नंदा देवी के बहादुर चालक दल से बातचीत की। फारस की खाड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए उनका आचरण बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में सतर्कता, समन्वय और जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करता है।'' सिन्हा ने कहा कि लगभग 3.18 लाख भारतीय नाविक हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कार्यरत हैं। -
नयी दिल्ली. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से रिहा होने के बाद पहली सार्वजनिक टिप्पणी में मंगलवार को कहा कि रासुका के तहत उनकी हिरासत को रद्द करना ''सभी के लिए फायदेमंद'' है और केंद्र ने लद्दाख के लोगों के साथ सार्थक संवाद के लिए विश्वास कायम करने की दिशा में पहल की है। वांगचुक ने पत्नी और एचआईएएल की सह-संस्थापक गीतांजलि जे अंगमो के साथ यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि लद्दाख में विरोध प्रदर्शन का एकमात्र उद्देश्य रचनात्मक संवाद प्रक्रिया शुरू करना है। उन्होंने कहा, ''हमें अदालत में जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन सिर्फ जीत ही काफी नहीं थी। मैं सभी पक्षों के लिए फायदेमंद स्थिति चाहता हूं।'' वांगचुक ने सरकार की पहल को ''विश्वास कायम करने और सार्थक, रचनात्मक संवाद को सुविधाजनक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम'' करार दिया। जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ''उन्होंने रचनात्मक और सार्थक संवाद का प्रस्ताव रखा है। यही हम चाहते थे, और इसके लिए हमें बहुत संघर्ष करना पड़ा, दिल्ली तक पैदल चलना पड़ा, अनशन पर बैठना पड़ा। लद्दाख में सभी आंदोलन संवाद प्रक्रिया शुरू करने के लिए हैं।'
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नयी दिल्ली. संसद की विदेश मामलों की समिति ने कहा है कि ''हाल के घटनाक्रम'' से भारत के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं। हालांकि, समिति ने इस बात का स्वागत किया कि केंद्र इन घटनाक्रमों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के ''संपर्क में'' है। विदेश मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर विदेश मामलों की समिति की 12वीं रिपोर्ट मंगलवार को संसद में प्रस्तुत की गई। कांग्रेस सांसद शशि थरूर विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष हैं।
समिति की यह टिप्पणी काफी मायने रखती है क्योंकि यह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या 'टैरिफ' नीतियों में हाल ही में हुए बदलावों की पृष्ठभूमि में आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, ''समिति ने पाया कि चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसे संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था। जनवरी 2026 तक आवंटित राशि का पूरी तरह से उपयोग हो चुका था।'' विदेश मंत्रालय ने समिति को बताया कि ''2026-27 के दौरान इस मद के तहत कोई राशि आवंटित नहीं की गई है क्योंकि भारत ने 2024 में हस्ताक्षरित मुख्य अनुबंध के अनुसार बंदरगाह उपकरणों की खरीद के लिए 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर के योगदान की अपनी प्रतिबद्धता पहले ही पूरी कर ली है।'' रिपोर्ट में कहा गया है, ''हाल के घटनाक्रम से चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं।''
समिति का मानना है कि चाबहार, भारत के लिए एक ''महत्वपूर्ण और रणनीतिक महत्व का बंदरगाह'' है, क्योंकि यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच प्रदान करता है। यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा से जुड़ने के लिए भी एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। समिति ने कहा कि वह इस बात का स्वागत करती है कि ''भारत सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संपर्क में है। रिपोर्ट के अनुसार, समिति चाहती है कि मंत्रालय इस संबंध में सभी योजनाओं और प्रगति की जानकारी समिति को देते रहे। सरकार ने पांच फरवरी को संसद को बताया था कि वह चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या टैरिफ नीतियों में हाल में हुए बदलावों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के ''संपर्क में'' है। - नयी दिल्ली. सरकार ने एक संसदीय समिति को बताया है कि जीसीएमएमएफ (जो अमूल ब्रांड के तहत डेयरी उत्पाद बेचता है) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के दूध संग्रह केन्द्रों को एक सहकारी ढांचे के तहत लाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों को उचित मुनाफ़ा मिले। सोमवार को, कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर बनी एक स्थायी समिति ने लोकसभा में सहकारिता मंत्रालय के लिए अनुदान मांगों (2026-27) पर एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया, ''समिति ने यह मुद्दा उठाया कि दूध खरीद से होने वाला मुनाफ़ा किसानों तक नहीं पहुंच रहा है, बल्कि बड़े सहकारी संगठन इसे हड़प रहे हैं और सभी क्षेत्रों से आने वाला पैसा उन राज्यों की ओर मोड़ा जा रहा है जहां ऐसे बड़े सहकारी संगठनों के मुख्यालय हैं।'' इस मुद्दे पर संसदीय समिति को दिए गए अपने लिखित जवाब में, मंत्रालय ने बताया कि ''यह सुनिश्चित करने के लिए कि मुनाफ़ा उन किसानों तक पहुंचे जिनसे दूध खरीदा जा रहा है,'' उसने गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के दूध संग्रह केन्द्रों (एमसीसी) और दूध पूलिंग केंद्रों (एमपीपी) को सहकारी ढांचे के तहत लाने की पहल की है। इस पहल के तहत, लगभग 45,000 एमसीसी या एमपीपी को बहुउद्देशीय ग्राम सहकारी समितियों (एम-वीसीएस) के रूप में पंजीकृत करने और सरदार पटेल सहकारी डेयरी महासंघ लिमिटेड (एसपीसीडीई) तथा राष्ट्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संगठन लिमिटेड (एनसीएमपीओएल) के सदस्यों के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव है। ये दोनों ही बहु-राज्यीय सहकारी समितियां हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ''समिति को विश्वास है कि ऐसे उपायों से गांव के स्तर पर किसानों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी, और समिति इस उपाय के परिणामों के बारे में राज्यवार जानकारी प्राप्त करना चाहेगी।'' समिति ने सहकारिता क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण बनाने की भी वकालत की। समिति ने कहा कि केंद्र सरकार को, राज्य सरकारों के परामर्श से, सहकारी चुनावी शासन को मज़बूत करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना चाहिए।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को भुगतान एग्रीगेटर कैशफ्री पेमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर नियमों का पालन नहीं करने को लेकर 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। आरबीआई ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने एक एस्क्रो खाते से कुछ ऐसी निकासी की जिसकी नियमों के तहत अनुमति नहीं थी। कैशफ्री पर यह जुर्माना नौ मार्च के आदेश के तहत लगाया गया है। यह कार्रवाई अप्रैल, 2024 से जून, 2025 के बीच कंपनी के संचालन के संबंध में की गई वैधानिक जांच के बाद की गई। आरबीआई ने कहा कि उसने पहले कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और आरोप सही पाए जाने के बाद यह अर्थदंड लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई वैधानिक और नियामकीय अनुपालन में कमियों के आधार पर की गई है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर टिप्पणी करना नहीं है।



























