- Home
- देश
-
नयी दिल्ली. भारत के प्रमुख उत्सव दीपावली को बुधवार को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया। दिल्ली में लाल किले पर आयोजित यूनेस्को की एक अहम बैठक में यह फैसला लिया गया। यह पहली बार है कि भारत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) के संरक्षण के लिए अंतरसरकारी समिति के सत्र की मेजबानी कर रहा है। इस समिति का 20वां सत्र लाल किले में आठ से 13 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है।
यूनेस्को द्वारा दीपावली उत्सव को प्रतिष्ठित सूची में शामिल किए जाने की घोषणा के बाद ‘वंदे मातरम' और ‘भारत माता की जय' के नारे हवा में गूंज उठे। भारत की 15 चीजें वर्तमान में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल हैं, जिनमें कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा नृत्य, योग, वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा और रामलीला - महाकाव्य ‘रामायण' का पारंपरिक प्रदर्शन शामिल हैं। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से ‘आपका धन, आपका अधिकार' अभियान में हिस्सा लेने का बुधवार को आग्रह किया। इसके तहत पिछले दो महीनों में 2,000 करोड़ रुपये की बिना दावे वाली संपत्तियां उनके असली मालिकों को सफलतापूर्वक लौटाई गई हैं। सरकार ने चार अक्टूबर को ‘आपका पैसा, आपका अधिकार' राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य बैंक जमा, बीमा, लाभांश, शेयर, म्यूचुअल फंड और पेंशन सहित लावारिस पड़ीं वित्तीय संपत्तियों को उनके वैध दावेदारों तक पहुंचाने में मदद करना है। मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘ सभी हितधारकों खासतौर पर सरकार, नियामक निकायों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के समन्वित प्रयासों से करीब 2,000 करोड़ रुपये पहले ही उनके सही मालिकों को लौटाए जा चुके हैं।'' अक्टूबर से पांच दिसंबर 2025 तक 477 जिलों में शिविर आयोजित किए गए। इनमें जन प्रतिनिधियों, जिला प्रशासनों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री लोगों से ‘आपका पैसा, आपका अधिकार' आंदोलन में हिस्सा लेने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘ हम आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और व्यापक बनाना चाहते हैं।'' उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय बैंकों में हमारे ही नागरिकों का बिना दावे का 78,000 करोड़ रुपये पड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों के पास करीब 14,000 करोड़ रुपये की राशि बिना दावे के पड़ी है। साथ ही म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3,000 करोड़ रुपये और 9,000 करोड़ रुपये की ऐसी लाभांश राशि रखी है।
-
गढ़चिरौली. महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में बुधवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला के समक्ष 11 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों के सिर पर 82 लाख रुपये का इनाम था। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक जब नक्सलियों ने डीजीपी के सामने हथियार डाले, तब उनमें से चार 'वर्दी' में थे।
पुलिस की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य सरकार ने उन पर कुल 82 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। बयान में कहा गया है कि गढ़चिरौली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के संयुक्त प्रयासों के कारण इस वर्ष जिले में 112 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। - नयी दिल्ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि भारतीय शिल्पकारों ने अपने ज्ञान, समर्पण और कड़ी मेहनत से अपनी वैश्विक पहचान स्थापित की है तथा अब उन्हें अपने उत्पादों के लिए एक विशिष्ट जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मुर्मू ने यहां 2023 और 2024 के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा कि यह जीआई टैग अब भारतीय शिल्पकारों के उत्पादों की पहचान और विश्वसनीयता को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा, “मैं इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों से अनुरोध करती हूं कि वे अपने विशिष्ट उत्पादों के लिए जीआई टैग प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ें। इससे आपके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट पहचान मिलेगी तथा आपकी विश्वसनीयता बढ़ेगी।” इसके अलावा, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल जैसी योजनाएं भी भारत के क्षेत्रीय हस्तशिल्प उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत कर रही हैं। जीआई टैग एक ऐसा नाम या चिह्न है जो किसी उत्पाद को किसी विशिष्ट स्थान से उत्पन्न होने वाले, उस स्थान से जुड़े अद्वितीय गुणों, प्रतिष्ठा या विशेषताओं से युक्त बताता है। यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय विविधता पर प्रकाश डालता है। इस टैग वाले उत्पाद अपने अद्वितीय गुणों और पारंपरिक शिल्प कौशल के लिए पहचाने जाते हैं।राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हस्तशिल्प न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं, बल्कि आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है। यह क्षेत्र देश में 32 लाख से ज़्यादा लोगों को रोजगार देता है।'' उन्होंने कहा, “कला के प्रति उनका समर्पण, कड़ी मेहनत व प्रतिबद्धता हमारी परंपराओं को जीवित रखती है। मेरा मानना है कि कलाकारों का रचनात्मक अभ्यास भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।” सशक्तीकरण और सतत विकास के लिए हस्तशिल्प क्षेत्र के महत्व को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने पिछले दशक में इस क्षेत्र को मजबूत करने के वास्ते कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब, 1.5 लाख से अधिक हस्तशिल्प इकाइयां सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) से जुड़ चुकी हैं।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि पिछले तीन साल और सात महीनों में 1,60,950 करोड़ रुपये की वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) चोरी के 55,813 मामले सामने आए हैं। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि जीएसटी चोरी के ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां फर्जी बिल बनाने के लिए नकली संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तवर्ष में अक्टूबर तक, 41,664 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रभाव वाले कर-चोरी के 24,109 मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 के दौरान कर अधिकारियों ने 58,772 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रभाव वाले ‘‘इनपुट टैक्स क्रेडिट'' (आईटीसी) धोखाधड़ी के 15,283 मामलों का पता लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने फर्जी बिल के मामलों को रोकने और उनसे निपटने के लिए कई उपाय किए हैं।सरकार द्वारा किए गए कुछ उपायों में पांच करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले व्यवसायों के लिए सभी ‘‘बी 2 बी'' लेनदेन की खातिर इलेक्ट्रॉनिक बिलिंग प्रणाली (ई-चालान) को अनिवार्य करना और उच्च जोखिम वाले मामलों में भौतिक सत्यापन की आवश्यकता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के बाद, केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमाशुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) 22 सितंबर, 2025 से पहले और बाद में पैकेटबंद खाने की चीज़ों और दवाओं सहित ज़रूरी चीज़ों की कीमतों पर नज़र रख रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसका फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्राप्त सूचनाओं से पता चलता है कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद ये फायदे, आखिर में उपभोक्ताओं तक पहुंचा दिए गए है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने संसद को सूचित किया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने पिछले साढ़े पांच साल में 6.15 लाख करोड़ रुपये के ऋण बट्टे खाते में डाल दिए हैं। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, "भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले पांच वित्त वर्षों और मौजूदा वित्त वर्ष में 30 सितंबर, 2025 (अनंतिम डेटा) तक कुल 6,15,647 करोड़ रुपये का ऋण बट्टे खाते में डाल दिया है।'' उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 से सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कोई पूंजी नहीं डाली है। उन्होंने कहा कि इन बैंकों ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में काफी सुधार किया है, वे लाभ में आ गए हैं और अपनी पूंजीगत स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। चौधरी ने कहा कि ये बैंक अब अपनी पूंजीगत जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार स्रोत और आंतरिक स्रोतों पर निर्भर हैं और उन्होंने 1 अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2025 तक इक्विटी और बॉन्ड के जरिए बाजार से 1.79 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई है। उन्होंने कहा कि बैंक आरबीआई के दिशानिर्देशों और बैंकों के बोर्ड से मंज़ूर नीति के मुताबिक, चार साल पूरे होने पर गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) को बट्टे खाते में डालते हैं। चौधरी ने अपने उत्तर में यह भी कहा कि ऋण को बट्टे खाते में डालने (राइट-ऑफ करने) का मतलब यह नहीं है कि कर्जदारों की चुकाने की देनदारी खत्म हो जाएगी। उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारत में बैंक और वित्तीय संस्थान पारंपरिक रूप से निर्यात वित्तपोषण का मुख्य स्रोत रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों (वित्त वर्ष 20-21 से 24-25) में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, सिडबी और एक्जिम बैंक द्वारा दिया गया कुल निर्यात ऋण 21.71 लाख करोड़ रुपये था। एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में चौधरी ने कहा कि सितंबर 2025 तक पिछले साढ़े चार सालों में 3,588.22 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि इनमें से 238.83 करोड़ रुपये वापस हासिल किये जा चुके हैं। मंत्री ने कहा कि देश में डिजिटल भुगतान लेनदेन बढ़ने के साथ ही पिछले कुछ सालों में डिजिटल भुगतान में धोखाधड़ी समेत साइबर ठगी के मामले भी बढ़े हैं।
- नयी दिल्ली. सरकार ने मंगलवार को लोकसभा को सूचित किया कि जनगणना 2027 में वर्तमान निवास पर लोगों के रहने की अवधि और प्रवास के कारण से संबंधित प्रश्न भी शामिल होंगे। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी उस स्थान पर एकत्र की जाती है, जहां वे गणना की अवधि के दौरान पाए जाते हैं। मंत्री एक सदस्य के इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या जनगणना-2027 के दौरान प्रवासी श्रमिकों और अस्थायी निवासियों की गणना के लिए कोई विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं और क्या इसके लिए एक अलग डेटा संग्रह प्रक्रिया प्रस्तावित है। मंत्री ने कहा कि प्रवासन के आंकड़े प्रत्येक व्यक्ति के जन्म स्थान और अंतिम निवास स्थान के आधार पर एकत्र किये जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जनगणना में वर्तमान निवास पर रहने की अवधि और प्रवास के कारण के बारे में भी जानकारी एकत्र की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र के माध्यम से क्षेत्रीय कार्य से पहले जनगणना के लिए प्रश्नावली अधिसूचित की जाती है।'' जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच घरों की सूची और गणना होगी तथा फरवरी 2027 में लोगों की गिनती की जाएगी।
- अहमदाबाद. गुजरात के एक दंपति की 23 साल पुरानी शादी खान पान की पसंद के कारण टूट गई। दोनों के बीच विवाद रसोई से शुरू हुआ और इसकी वजह पत्नी की प्याज़ एवं लहसुन न खाने की आदत थी तथा इसे लेकर उनके बीच लंबे समय से तनाव था। गुजरात उच्च न्यायालय ने अहमदाबाद की एक पारिवारिक अदालत के तलाक के फैसले को बरकरार रखा, जिससे पति-पत्नी के बीच दो सबसे आम चीजों प्याज और लहसुन के सेवन को लेकर लंबे समय से जारी विवाद का अंत हो गया। न्यायमूर्ति संगीता विशेन और न्यायमूर्ति निशा ठाकोर की खंडपीठ ने विवाह विच्छेद को चुनौती देने वाली महिला की अपील को खारिज कर दिया। दंपति के बीच ‘झगड़ा' पत्नी के प्याज और लहसुन न खाने के कारण हुआ। पत्नी ने अपनी अपील में कहा कि मामला उसके एक खास संप्रदाय (स्वामीनारायण संप्रदाय) को मानने से जुड़ा है। इस संप्रदाय के अनुयायी प्याज और लहसुन नहीं खाते। अदालत के आदेश के अनुसार, अहमदाबाद के इस जोड़े की शादी 2002 में हुई थी। पति की मां पत्नी के लिए प्याज और लहसुन के बिना अलग से खाना बनाती थी, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के लिए प्याज लहसुन वाला खाना बनाया जाता था। फैसले में कहा गया, ‘‘धर्म का पालन और प्याज-लहसुन का सेवन दोनों पक्षों के बीच मतभेद का मुख्य कारण था।'' हालांकि, सुनवाई के दौरान पारिवारिक अदालत के तलाक के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, लेकिन पत्नी ने विवाह विच्छेद पर कोई आपत्ति नहीं जताई। आदेश में कहा गया, ‘‘पत्नी विवाह विच्छेद का विरोध नहीं कर रही बल्कि मुख्य चिंता न्यायाधीश द्वारा दिए गए गुजारा भत्ते को लेकर है।'' न्यायमूर्ति विशेन और न्यायमूर्ति ठाकोर की खंडपीठ ने पारिवारिक न्यायालय के तलाक के आदेश को बरकरार रखा। इससे पहले, पति ने अहमदाबाद के महिला थाने में एक आवेदन दायर किया था, जिसमें अपीलकर्ता (पत्नी) द्वारा ‘‘अत्याचार और उत्पीड़न'' का आरोप लगाया गया था। पति से अनबन के कारण पत्नी 2007 में अपने बच्चे के साथ ससुराल छोड़कर चली गई थी। आदेश के अनुसार, 2013 में पति ने अहमदाबाद पारिवारिक न्यायालय में इस आधार पर तलाक के लिए अर्जी दी कि उसके साथ ‘‘क्रूरता की गई है और पत्नी ने उसे छोड़ दिया है''। पारिवारिक न्यायालय ने मई 2024 में तलाक को मंज़ूरी दे दी। उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान महिला ने कहा कि पारिवारिक न्यायालय के निर्देश के बावजूद उसे 18 महीने से गुजारा भत्ता नहीं दिया गया है। पत्नी के वकील ने अदालत को बताया कि कुल बकाया गुजारा भत्ता 13,02,000 रुपये था, जिसमें से उसे अंतरिम गुजारे भत्ते के रूप में 2,72,000 रुपये मिल चुके हैं। मुकदमे के दौरान पति ने 4,27,000 रुपये पहले ही जमा कर दिए थे। उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सत्यापन के बाद यह राशि पत्नी को हस्तांतरित की जाए और पति को निर्देश दिया कि वह शेष राशि पारिवारिक न्यायालय में जमा कराए, जो धनराशि को महिला के बैंक खाते में हस्तांतरित कर देगा।
- गुवाहाटी. प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग को कॉटन यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को मरणोपरांत डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी. लिट.) की मानद उपाधि प्रदान की। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह के दौरान डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि प्रदान की। दिवंगत गायक एवं अभिनेता जुबिन गर्ग की बहन डॉ. पाल्मे बड़ठाकुर ने यह मानद उपाधि प्राप्त की। डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि प्राप्त करने के बाद बड़ठाकुर ने कहा, "यह एक शैक्षणिक सम्मान है और परिवार को उन पर बहुत गर्व है। उनकी अनुपस्थिति में इसे प्राप्त करना एक भावुक क्षण है।'' बड़ठाकुर ने दावा किया कि गायक ने अपने जीवनकाल में सभी की मदद की थी, लेकिन पिछले तीन महीनों में, ‘‘हमें एहसास हुआ कि लोग उनका कैसे फायदा उठाते थे।'' गायक की 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मृत्यु हो गई थी। सरकार ने उनकी मौत की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है और 12 दिसंबर को आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। बड़ठाकुर ने कहा कि परिवार अब एक मजबूत आरोप पत्र और दोषियों पर मुकदमा चलाए जाने की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम बस यही चाहते हैं कि उन्हें न्याय मिले। हमें जांच पर भरोसा है और 12 दिसंबर को आरोपपत्र के विवरण का पता चल जाएगा।'' मंगलवार को कॉटन यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में, राज्यपाल ने प्रख्यात असमिया लेखक और विद्वान रंजीत कुमार देव गोस्वामी को साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए मानद डी. लिट (ऑनोरिया कौसा) की उपाधि प्रदान की।
- गंगटोक. गंगटोक के एक रिहायशी इलाके में एक हिमालयी काला भालू देखा गया, जिसके बाद वन विभाग को अलर्ट जारी करना पड़ा। सोमवार आधी रात को सिक्किम की राजधानी में पानी हाउस के पास भालू को देखा गया। इस संबंध में एक वन अधिकारी ने कहा कि इसे नगर पार्षद नोरबू तमांग के आवास की सीसीटीवी फुटेज में देखा गया। वन विभाग ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तलाशी शुरू कर दी है और पानी हाउस, इंदिरा बाईपास तथा लिंगडिंग क्षेत्रों के निवासियों से भालू को सुरक्षित बचाए जाने तक सतर्क रहने का आग्रह किया है।file photo
- नयी दिल्ली. राज्यसभा की मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने मंगलवार को सरकार से प्राथमिक और उच्च विद्यालयों में राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्' का गायन अनिवार्य करने का आग्रह किया। इस गीत की रचना की 150वीं वर्षगांठ पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए मूर्ति ने कहा, ‘‘मैं यहां एक सांसद, समाजसेवी या लेखिका के रूप में नहीं खड़ी हूं। मैं यहां भारत माता की एक बेटी के रूप में खड़ी हूं।'' उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की भूमिका को याद करते हुए कहा, ‘‘जब भारत परतंत्र था, तो हमारा आत्मविश्वास डगमगा गया था और हम निराश थे।'' मनोनीत सदस्य ने कहा, ‘‘उस समय, वंदे मातरम् ज्वालामुखी के लावा की तरह फूट पड़ा। मैं हुबली के एक छोटे से कस्बे से हूं। मेरे दादाजी बताया करते थे कि यह ब्रिटिश राज के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक था। वंदे मातरम् में एक जादुई स्पर्श था।'' विद्यालयों में इस गीत को पढ़ाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को अगर यह नहीं पढ़ाया गया तो वे ‘वंदे मातरम्' का पूरा पाठ भूल जाएंगे।' मूर्ति ने शिक्षा विभाग से, खासकर प्राथमिक और उच्च विद्यालयों में, राष्ट्रीय गीत को अनिवार्य बनाने का अनुरोध किया। चर्चा में हिस्सा लेते हुए शिवसेना सदस्य मिलिंद देवरा ने कहा कि संगीतकार ए.आर. रहमान द्वारा ‘वंदे मातरम्' गीत की प्रस्तुति ने उन सभी लोगों को गलत साबित कर दिया है जो 88 साल पहले राष्ट्र गीत को छोटा करने के लिए ज़िम्मेदार थे। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्' केवल हमारा राष्ट्र गीत नहीं है, बल्कि यह वास्तव में भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य से कहना चाहेंगे कि ए.आर. रहमान का संस्करण एक गौरवान्वित भारतीय द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जो संयोग से एक मुसलमान भी हैं। शिवसेना सदस्य ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरा ‘वंदे मातरम्' कभी-कभी ही सुना जाता है।नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य चौधरी मोहम्मद रमज़ान ने कहा कि ‘वंदे मातरम्' गीत का जो अंश छोड़ा गया है, उसमें देवी-देवताओं की पूजा की बात है और इस्लाम मूर्ति पूजा की इजाजत नहीं देता। उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदू, ईसाई और सिखों का सम्मान करते हैं। अगर आप गाना चाहते हैं, गाए। हम इसका सम्मान करते हैं... इस्लाम देवी-देवताओं की पूजा की इजाज़त नहीं देता है। इसीलिए सिर्फ उन्हीं छंदों को लिया गया है।" उन्होंने मोहम्मद इक़बाल द्वारा रचित 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' का भी जिक्र किया और कहा कि यह गीत एक मुसलमान ने उर्दू में लिखा है।
- अमरावती. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संक्रांति त्योहार से लोगों को सभी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराएं। ‘रियल टाइम गवर्नेंस सिस्टम' (आरटीजीएस) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन सेवाओं से पारदर्शिता आएगी और शासन के प्रति लोगों की "संतुष्टि" भी बढ़ेगी। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया, "मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को अगली संक्रांति से सभी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने सभी विभागों से इस दिशा में कदम उठाने को कहा है।" तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख के अनुसार, सरकार की सभी सेवाओं को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को ड्रोन सेवाओं में विविधता लाने और इस उद्देश्य के लिए एक मास्टर प्लान बनाने का निर्देश दिया।
- नयी दिल्ली. भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी जनगणना के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति 15 जनवरी 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। यह जानकारी एक नवीनतम परिपत्र में दी गई है। परिपत्र के अनुसार, इस डेटा संग्रह कवायद के लिए प्रगणक और पर्यवेक्षक मुख्य जनगणना अधिकारी होंगे। इसमें कहा गया है कि लगभग 700-800 की आबादी के लिए एक प्रगणक को नियुक्त किया जाएगा और प्रत्येक छह प्रगणकों पर एक पर्यवेक्षक होगा। आपात स्थितियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक भी रखे जाएंगे। जनगणना नियम-1990 के नियम तीन के अनुसार, शिक्षक, लिपिक या राज्य सरकार/स्थानीय प्राधिकरण के किसी भी अधिकारी को प्रगणक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, जबकि पर्यवेक्षक सामान्यतः प्रगणक से उच्च रैंक का अधिकारी होगा। आगामी जनगणना 2027 में देश भर में जनगणना के कार्य को समय पर पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड अधिकारी तैनात किए जाएंगे। आरजीआई ने इन सभी गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस)' नामक एक वेब पोर्टल भी विकसित किया है। परिपत्र के अनुसार, जनगणना 2027 की नयी पहलों के कारण जनगणना अधिकारियों की अग्रिम नियुक्ति और सीएमएमएस पोर्टल पर कार्यकर्ताओं का सही विवरण के साथ पंजीकरण अत्यंत आवश्यक है। जनगणना 2027 दो चरणों में होगी: पहला चरण, मकान सूचीकरण और आवास गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा और दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। यह कवायद डिजिटल होगी और इसमें 30 अप्रैल को राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के निर्णय के अनुसार, जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।
- नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि अप्रैल से नवंबर के बीच उर्वरक कंपनियों के 5,371 लाइसेंस कालाबाजारी, जमाखोरी और निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक वितरण के आरोप में रद्द किए गए हैं। यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यसभा में दी।भाजपा सदस्य किरण चौधरी के सवाल के जवाब में नड्डा ने कहा कि राज्यों को कदाचार पर कार्रवाई करने का अधिकार है और केंद्र कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य निर्धारण जैसी कदाचार गतिविधियों को रोकने के लिए 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत कार्रवाई करता है। उन्होंने बताया कि निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक पर कार्रवाई भी उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत की जाती है।नड्डा ने कहा, “कालाबाजारी के लिए एक अप्रैल से 28 नवंबर तक 5,058 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 442 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई और 3,732 लाइसेंस रद्द किए गए।” उन्होंने बताया कि जमाखोरी के आरोप में 687 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 202 लाइसेंस रद्द किए गए और 446 प्राथमिकी दर्ज की गईं। वहीं, निम्न गुणवत्ता वाले उर्वरक के मामले में 3,811 कंपनियों को नोटिस भेजे गए, 1,437 लाइसेंस रद्द किए गए और 65 प्राथमिकी दर्ज की गईं। मंत्री ने बताया कि विपथन (डाइवर्ज़न) के मामलों में 3,058 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 464 लाइसेंस रद्द किए गए और 96 प्राथमिकी दर्ज की गईं। उनके अनुसार, पिछले सात महीनों में कुल 12,814 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 5,835 लाइसेंस रद्द किए गए और 649 प्राथमिकी दर्ज की गईं, जिनमें से 442 प्राथमिकी काला बाजारी के मामले में थीं। नड्डा ने बताया कि केंद्र ने सभी राज्यों को समय पर उर्वरक की आपूर्ति की है और इसकी ‘एकीकृत उर्वरक निगरानी प्रणाली' के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा, “किसान के पास 10 बैग उर्वरक का उपयोग करने की क्षमता हो सकती है, लेकिन वह 50 बैग ले जाता है। इससे निपटने में राज्य सरकार को केंद्र का सहयोग करना चाहिए।” दूसरे पूरक प्रश्न में भाजपा सदस्य चौधरी ने कहा कि किसान मजबूरी में उर्वरक के अलावा अन्य उत्पाद भी खरीदने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित होती है। उन्होंने इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ सख्त प्रोटोकॉल बनाने की आवश्यकता बताई। नड्डा ने कहा कि मंत्रालय इस मुद्दे पर डीलरों और कंपनियों के साथ चर्चा करेगा ताकि किसानों को इस तरह के चलन या किसी अन्य रूप में कोई समस्या न हो।
- भुवनेश्वर. ओडिशा के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने मंगलवार को विधानसभा को बताया कि अप्रैल 2024 से सितंबर 2025 के बीच बिजली का झटका लगने, रोगों, अवैध शिकार और दुर्घटनाओं सहित कई कारणों से 136 जंगली हाथियों की मौत हुई है। मंत्री ने कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 42 हाथियों की मौत बिजली का झटका लगने से, 31 हाथियों की मौत बीमारी के कारण और चार हाथियों की मौत ट्रेन दुर्घटनाओं में हुई। उन्होंने बताया कि 31 अन्य हाथियों की प्राकृतिक कारणों से मौत हुई।मंत्री ने बताया कि राज्य में मानव-हाथी संघर्ष के कारण चार हाथियों की मौत हुई और अवैध शिकार के चार मामले भी सामने आए। उन्होंने बताया कि 20 हाथियों की मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।खुंटिया ने सदन को बताया कि हाथियों की मौत में कथित संलिप्तता के लिए 92 लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अदालतों में मुकदमा चलाया जा रहा है और ऐसे सभी मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है।
- श्री विजयपुरम। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिष्ठित कविता ‘सागरा प्राण तलमलला' की 116वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक दिन के लिए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का दौरा कर सकते हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें शाह के 11 या 12 दिसंबर को वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने की प्रारंभिक जानकारी मिली है, लेकिन अंतिम यात्रा कार्यक्रम का इंतजार है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, शाह 12 दिसंबर को दक्षिण अंडमान के बेदनाबाद में एक कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां सावरकर की एक प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत भी इस समारोह में शामिल होने वाले हैं। शाम को गृह मंत्री श्री विजयपुरम स्थित डॉ. बी.आर. आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (डीबीआरएआईटी) में एक जनसभा को संबोधित कर सकते हैं, जहां सावरकर को समर्पित एक गीत का औपचारिक विमोचन किया जाएगा। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘वह श्री विजयपुरम में एक नवनिर्मित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन भी कर सकते हैं। गृह मंत्रालय से अब तक हमें जो भी जानकारी मिली है, वह प्रारंभिक है और उम्मीद है कि एक-दो दिन में हमें उनका अंतिम कार्यक्रम मिल जाएगा।'' सावरकर को 1911 में अंग्रेजों ने पोर्ट ब्लेयर (जिसे अब श्री विजयपुरम के नाम से जाना जाता है) की सेलुलर जेल (काला पानी) में कैद कर लिया था। उन्हें एकांत कारावास में रखा गया था और कैद के दौरान उनसे कठोर श्रम कराया गया था।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को शहीद दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक असम आंदोलन में शामिल वीरों के साहस और बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि असम आंदोलन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य की सांस्कृतिक मजबूती तथा समग्र विकास के संकल्प को दोहराती है।पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा- ‘यह आंदोलन देश के इतिहास में सदैव महत्वपूर्ण स्थान रखेगा’प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि शहीद दिवस पर असम आंदोलन का हिस्सा रहे सभी वीरों के साहस का स्मरण किया जाता है। यह आंदोलन देश के इतिहास में सदैव महत्वपूर्ण स्थान रखेगा। केंद्र सरकार उन सभी के सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, विशेष रूप से असम की संस्कृति को सुदृढ़ करने और राज्य की सर्वांगीण प्रगति के लिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम आंदोलन ने राज्य की अस्मिता, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव को नई दिशा प्रदान की।
- चेन्नई। तमिलनाडु के कैचमेंट इलाकों में भारी बारिश के बाद, चेन्नई के आसपास पीने के पानी के मुख्य जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे अधिकारियों ने निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है। प्रमुख जलाशयों में से पुझल झील लगातार दूसरे दिन अपनी पूरी भंडारण क्षमता तक पहुंच गई है, जिससे अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा रहा है। शहर के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चेन्नई को पीने का पानी सप्लाई करने वाले तीन मुख्य जलाशयों, चेम्बरमबक्कम झील, पुझल झील और पूंडी झील में पिछले कुछ दिनों से लगातार और व्यापक बारिश के कारण पानी के आने में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।ऊपरी इलाकों में भारी बारिश से पानी का भंडारण काफी बढ़ गया है, जिससे शहर की पीने के पानी की सुरक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।अधिकारियों ने पुष्टि की कि पुझल जलाशय मंगलवार को पूरी तरह भर गया था और बुधवार को भी दूसरे दिन उसी स्तर पर बना रहा। इसकी कुल भंडारण क्षमता 3,300 मिलियन क्यूबिक फीट (Million Cubic Feet) है।बाढ़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, अधिकारी अब जलाशय से लगभग 300 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड (क्यूसेक) अतिरिक्त पानी निचले चैनलों में छोड़ रहे हैं।इस बीच, चेम्बरमबक्कम और पूंडी जलाशयों में भी पानी के स्तर में लगातार और काफी वृद्धि देखी गई है, हालांकि दोनों अभी भी सुरक्षित सीमा के भीतर काम कर रहे हैं। संरचनात्मक सुरक्षा, पानी की आवक के पैटर्न और निचले इलाकों पर प्रभाव का आकलन करने के लिए सभी प्रमुख जल निकायों पर चौबीसों घंटे निगरानी दल तैनात किए गए हैं।पुझल से लगातार पानी छोड़े जाने और आगे बारिश की संभावना को देखते हुए, जिला प्रशासन ने नहरों, नदी के किनारों और निचले तटीय इलाकों में रहने वाले निवासियों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है।मछुआरों, झील के किनारे बसी बस्तियों के निवासियों और बाढ़ संभावित इलाकों के लोगों से आधिकारिक निर्देशों का सख्ती से पालन करने और यदि आवश्यक हो तो सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। राजस्व, पुलिस और आपदा प्रतिक्रिया टीमें स्टैंडबाय पर हैं, जबकि स्थानीय निकायों को निर्देश दिया गया है कि वे जल निकासी चैनलों को साफ रखें और अगर स्थिति बिगड़ती है तो आपातकालीन आश्रयों को इस्तेमाल के लिए तैयार रखें।--
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि बिहार की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार राज्य के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मोदी ने संसद भवन में बिहार के राजग सांसदों से मुलाकात के कुछ घंटों बाद यह टिप्पणी की।
उन्होंने ‘एक्स' पर इस मुलाकात की फोटो साझा करते हुए लिखा, “बिहार विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद आज संसद भवन में राज्य के राजग सांसदों से हुई मुलाकात ने नयी ऊर्जा से भर दिया। इस दौरान प्रदेश के मेरे परिवारजनों के जीवन को और आसान बनाने के लिए उनके संकल्प को देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। ‘डबल इंजन' सरकार राज्य की जनता-जनार्दन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाली है।” मोदी ने राजग सांसदों से हाल में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन की शानदार जीत के बाद लोगों के कल्याण के लिए और अधिक उत्साह के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “बड़ी जीत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।” लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने राजग सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को उस समय यह संदेश दिया, जब वे (राजग सांसद) उन्हें (मोदी को) बिहार चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन की भारी जीत की बधाई देने के लिए दिल्ली आए थे। बैठक के बाद शांभवी ने पत्रकारों से कहा, “हमने बिहार में शानदार नेतृत्व और प्रचार अभियान के समर्थन के लिए प्रधानमंत्री को बधाई दी तथा उनका आभार जताया, जिसके कारण हमारे चुनाव अभियान को मजबूत गति मिली थी। प्रधानमंत्री ने हमें याद दिलाया कि बड़ी जीत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।” शांभवी ने बताया कि मोदी ने सांसदों से बिहार के लोगों के कल्याण के लिए और अधिक उत्साह के साथ काम करने का आह्वान किया, क्योंकि सभी के लिए समावेशी विकास राजग की स्पष्ट प्राथमिकता है, फिर चाहे वे किसी भी वर्ग के हों। शांभवी के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने राजग सांसदों से कहा कि वे नकारात्मकता, घृणा और झूठ के बजाय प्रगति पर ध्यान केंद्रित करें। लोजपा (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि बिहार के सभी राजग सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर राज्य विधानसभा चुनावों में गठबंधन की शानदार जीत के लिए उनका आभार जताया। चिराग ने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कारण राजग ने बिहार चुनावों में “भारी जीत” दर्ज की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बिहार चुनाव में राजग की जीत के सूत्रधार रहे और उसके सभी पांच घटक दलों ने विपक्षी गठबंधन के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाया। चिराग ने कहा, “इसलिए सभी सांसदों ने उनसे मुलाकात की और उन्हें बधाई दी।”
सूत्रों के अनुसार, मोदी ने बिहार के राजग सांसदों को याद दिलाया कि उनका असली काम चुनाव के बाद शुरू होता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने गठबंधन के प्रत्येक सहयोगी दल से बातचीत की और बिहार में राजग की जीत के महत्व पर जोर दिया। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए पिछले महीने हुए चुनाव में राजग ने 202 सीट पर जीत दर्ज की, जिससे जनता दल यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख नीतीश कुमार के 10वीं बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। राजग को मिली कुल 202 सीट में से 89 पर भाजपा, 85 पर जद (यू), 19 पर लोजपा (रामविलास), पांच पर हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और चार पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत पर यूनेस्को की समिति के 20वें सत्र की मेजबानी करना देश की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो समाजों और पीढ़ियों को जोड़ने के लिए संस्कृति की शक्ति का उपयोग करने की है। यूनेस्को की प्रमुख बैठक आठ से 13 दिसंबर तक यहां लाल किले में आयोजित की जा रही है। यह पहली बार है जब भारत यूनेस्को की समिति के किसी सत्र की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स' पर पोस्ट में कहा, "यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 20वां सत्र भारत में आरंभ हुआ है। इस मंच ने हमारी साझी जीवंत परंपराओं को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया है। भारत को, वह भी लाल किले में इस सम्मेलन की मेज़बानी करने पर प्रसन्नता हो रही है।" उन्होंने कहा, "यह समाजों और पीढ़ियों को जोड़ने के लिए संस्कृति की शक्ति का उपयोग करने की हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।" बैठक का उद्घाटन समारोह रविवार शाम को आयोजित किया गया, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री मोदी का लिखित संदेश उद्घाटन समारोह में केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा पढ़ा गया। इस अवसर पर जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और यूनेस्को के महानिदेशक खालिद अल-एनानी सहित मंच पर अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह बहुत गर्व की बात है कि भारत इस महत्वपूर्ण सत्र की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने सत्र में शामिल लोगों से कहा, “आप न केवल अपने राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि उन जीवंत परंपराओं, कहानियों और ज्ञान का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मानवता को समय के साथ विरासत में मिली है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए विरासत कभी भी सिर्फ पुरानी यादें नहीं रही है, बल्कि यह एक जीवंत और बढ़ती नदी है, ज्ञान, रचनात्मकता एवं समुदाय की एक सतत धारा है। मोदी ने कहा कि अमूर्त विरासत विभिन्न समुदायों को पीढ़ियों तक बांधती है और तेजी से बदलती दुनिया में निरंतरता की भावना प्रदान करती है।
-
श्री विजय पुरम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत तीन दिवसीय अंडमान-निकोबार दौरे पर 11 दिसंबर को यहां पहुंचेंगे। इस दौरान, वह श्री विजय पुरम में वी डी सावरकर की एक प्रतिमा का अनावरण करेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। आरएसएस सरसंघचालक के रूप में भागवत का केंद्र शासित प्रदेश का यह पहला दौरा होगा। लगभग दो दशक पहले, वह संगठन के सरकार्यवाह (महामंत्री) के रूप में द्वीप समूह का दौरा कर चुके हैं। भागवत 11 दिसंबर को यहां पहुंचेंगे और स्थानीय आरएसएस पदाधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
वह 12 दिसंबर की सुबह दक्षिण अंडमान के बेओदनाबाद में सावरकर की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। उसी शाम, वह डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रौद्योगिकी संस्थान (डीबीआरएआईटी) में आयोजित एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। अधिकारियों ने बताया कि भागवत 13 दिसंबर की शाम को श्री विजय पुरम के नेताजी स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे और अगले दिन द्वीप समूह से रवाना हो जाएंगे। ये कार्यक्रम मुंबई के वैल्यूएबल ग्रुप द्वारा सावरकर की कविता ‘सागरा प्राण तलमलला'की 116वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं। अंग्रेजों ने सावरकर को इसी द्वीप समूह की कुख्यात सेलुलर जेल में कैद रखा था। अधिकारियों के अनुसार, भागवत के दौरे के मद्देनजर केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। -
नयी दिल्ली. दिल्ली का ऐतिहासिक लालकिला अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा पर यूनेस्को की मौजूदा महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी कर रहा है और ऐन मौके पर ‘शाहजहां' प्रतिनिधियों का स्वागत करने के लिए इस मुगलकालीन महल परिसर में ‘वापस' आ गए हैं। दरअसल, हम बादशाह शाहजहां के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि पुराने विमान बोइंग 747 - जंबो जेट के आकर्षक मॉडल के बारे में बात कर रहे हैं, जिसका नाम उनके नाम पर रखा गया है। यह विमान कभी एअर इंडिया के प्रतिष्ठित ‘महाराजा' बेड़े का हिस्सा था। इसे ब्रिटिशकालीन बैरक के सामने प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है, जिसमें एक नयी दीर्घा है। इस दीर्घा में एअर इंडिया के 'महाराजा संग्रह' से ली गई कुछ अमूल्य कलाकृतियां और वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे यूनेस्को सम्मेलन के उपलक्ष्य में दो पुरानी बैरकों - ‘ए1' और ‘ए2' में लगभग 300 वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें प्राचीन मूर्तियां, चोल कांस्य, मुगल लघु कला, कलमकारी कलाकृतियां, समकालीन चित्र और कई प्रतिष्ठित पुराने ‘एअर इंडिया' पोस्टर शामिल हैं। इन दोनों बैरकों की दीर्घाओं का संयोजन राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) द्वारा किया गया है, जिसके पास अब वह संग्रह है जो पहले मुंबई के नरीमन प्वाइंट पर ऐतिहासिक एअर इंडिया भवन में रखा हुआ था। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति (आईसीएच) का 20वां सत्र आठ से 13 दिसंबर तक लालकिले में आयोजित किया जा रहा है। इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर विचार-विमर्श में भाग लेने के लिए सैकड़ों प्रतिनिधि एकत्रित हुए हैं। भारत ने इस अवसर पर अपनी समृद्ध मूर्त और अमूर्त विरासत का प्रदर्शन किया है। केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा, ‘‘लालकिला परिसर में चार नयी दीर्घाएं स्थापित की गई हैं। इनमें से दो में एअर इंडिया के निजीकरण के बाद हमें एअर इंडिया संग्रह से जो कलाकृतियां मिलीं, उन्हें प्रदर्शित किया गया हैं।'' उन्होंने बताया कि हथियारों और शस्त्रागारों पर आधारित एक दीर्घा राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि चौथी दीर्घा लाल किला परिसर में खुदाई से प्राप्त या वहां से प्राप्त पुरातात्विक वस्तुओं पर आधारित है। ये दीर्घाएं लाल किला परिसर में 19वीं सदी के चार ब्रिटिशकालीन बैरकों में स्थापित की गई हैं।
लेकिन, इन वस्तुओं में सबसे आकर्षक है पुराने एअर इंडिया (एआई) विमान का मॉडल, जिसकी सफेद और लाल रंग की विशिष्ट सजावट और झरोखा शैली की खिड़की का डिज़ाइन है। एअर इंडिया ने 2021 में ‘एक्स' पर इस विमान की एक तस्वीर साझा की थी और लिखा था - ‘‘चार मई 1971 को, 'सम्राट शाहजहां' एअर इंडिया के बेड़े में शामिल होने वाला दूसरा विमान बना।'' अशोक समेत महान सम्राटों के नाम पर, एअर इंडिया ने अपने ग्राहकों के लिए इस आलीशान बेड़े को ‘आसमान में आपका महल' नाम से पेश किया था। टैगलाइन ‘शाहजहां' विमान के मॉडल के पिछले हिस्से पर लिखी है, जबकि आगे वाले हिस्से पर अंग्रेजी और हिंदी में, दोनों तरफ़ एक-एक नाम लिखा है। और, जब प्रतिनिधि दीर्घा में जाते हैं, तो उन्हें उस शाही संग्रह का भी अनुभव भी प्राप्त होता है जिसे दिग्गज उद्योगपति और विमानन अग्रणी जेआरडी टाटा और उनके शानदार परिवार के अन्य लोगों ने दशकों में बनाया था। लालकिला परिसर में अन्य ब्रिटिशकालीन बैरकों में स्थित पुरानी दीर्घाएं भी हैं, जो स्वतंत्रता संग्राम, 1857 के विद्रोह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज पर आधारित हैं और पिछले कुछ वर्षों में खोले गए आत्मनिर्भर भारत डिज़ाइन केंद्र भी हैं। यूनेस्को सम्मेलन में संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि वालिद अल हलानी ने मंगलवार को सत्र की मेजबानी कर रहे मुख्य मंडप के पास स्थित एक बैरक में स्थित स्वतंत्रता संग्राम दीर्घा का दौरा किया। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘पहली बार भारत आकर इस भूमि तथा इसके लोगों के बारे में और जानना मेरे लिए खुशी की बात है।'' -
नयी दिल्ली. यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में बांग्लादेश के तंगेल की पारंपरिक साड़ी बुनाई कला और अफगानिस्तान की बहजाद की लघु चित्रकला शैली को शामिल करने की मंगलवार को मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने बताया कि कई अरब देशों द्वारा नामित ‘बिष्ट' (पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला अबा या गाउन) बनाने के कौशल और तरीकों को भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल करने की मंजूरी दी गई। विभिन्न देशों द्वारा दिये गए इन प्रस्तावों पर दिल्ली में आयोजित यूनेस्को की एक अहम बैठक में मंजूरी दी गई। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति (आईसीएच) का 20वां सत्र 8 से 13 दिसंबर तक यहां लाल किले में आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले दिन में समिति द्वारा पाकिस्तान के सिंध प्रांत का प्राचीन लोक संगीत वाद्ययंत्र बोरींडो और उसकी धुनें, पैराग्वे की प्राचीन चीनी मिट्टी की शिल्पकला और केन्या के दाईदा समुदाय के म्वाजिंडिका आध्यात्मिक नृत्य को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची (आईसीएच) में मंगलवार को शामिल किया गया, जिन्हें तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। इसके बाद समिति ने अन्य नामांकनों पर विचार किया ताकि उन्हें आईसीएच में जगह दी जा सके।
विश्व निकाय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर सिलसिलेवार पोस्ट कर सूची में शामिल नयी प्रविष्टियों की जानकारी दी। यूनेस्को ने पोस्ट में कहा कि कतर, बहरीन,इराक,जॉर्डन,कुवैत, ओमान,सऊदी अरब,सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा नामांकित ‘बिष्ट'(पुरुषों) के आबा को बुनने की कला और परंपरा को अर्मूत सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने की बधाई! वेनेजुएला की जीवंत उत्सव परंपरा ‘जोरोपो', बोलिविया के ग्वाडालूप की वर्जिन का उत्सव ‘प्रोटनेस ऑफ सूक्रे', अर्जेंटीना के कॉर्डोबा शहर में आयोजित संगीत नृत्य और गीत को भी इस प्रतिष्ठित सूची में जगह दी गई है। अफगानिस्तान की ‘बहज़ाद की लघु चित्रकला शैली' का नाम 15वीं शताब्दी के उस कलाकार के नाम पर रखा गया है, जिनकी तकनीकों, परिप्रेक्ष्य और रंगों के प्रयोग ने उन्हें अपने समय के सबसे प्रसिद्ध चित्रकारों में से एक बना दिया था। यूनेस्को के अनुसार, ‘‘ यह अभ्यास मूलभूत कहानियों, मिथकों, मूल्यों और नैतिकताओं के प्रसारण में योगदान देता है।'' यूनेस्को ने बेल्जियम से नामांकित ब्रुसेल्स की रॉड मैरियोनेट परंपरा,बुल्गारिया के बैगपाइप बनाने और बजाने की कला को भी इस सूची में जगह दी है। विश्व निकाय ने जिबूती, कोमोरोस, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, जॉर्डन और सोमालिया की पारंपरिक जफा विवाह परंपरा को भी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत माना है। यह पहली बार है कि भारत यूनेस्को के किसी सत्र की मेजबानी कर रहा है।
पेरिस स्थित विश्व निकाय के अनुसार, समिति इस सत्र के दौरान यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने के लिए लगभग 80 देशों द्वारा प्राप्त ‘कुल 67 नामांकनों' पर विचार करेगी। यूनेस्को ने पोस्ट किया कि तत्काल संरक्षण की आवश्यकता वाली अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में अन्य नए नाम पनामा की आवास निर्माण शैली ‘क्विंचा हाउस और जुंटा डी एम्बारे/एम्बारा, पैराग्वे की पांरपरिक चीनी मिट्टी शिल्पकला नाइउपो कला, पुर्तगाल के एवेरो क्षेत्र की नौसैनिक बढ़ईगीरी कला मोलिसिरो नाव, तथा उज्बेकिस्तान की कोबीज शिल्पकला और वादन कला है। यूनेस्को ने इसी के साथ अरब देशों की ‘बिष्ट'कला, बेलारूस में गोमेल क्षेत्र के वेतका जिले की ‘नेगलिबुका' कपड़ा बुनाई परंपरा, अल्बानिया का लहुटा वाद्य यंत्र, उसके वादन और गायन को भी सूची में शामिल करने को हरी झंडी दे दी है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि सुरक्षा बलों ने 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सलियों को मार गिराया और अकेले इस साल माओवादियों की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के 14 सदस्य मारे गए हैं। सदन में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि नक्सल प्रभावित राज्यों की संख्या 2014 के 10 से घटकर 2025 (अक्टूबर तक) पांच रह गई है, जो 50 प्रतिशत की कमी है। उन्होंने कहा कि वहीं, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी इस अवधि के दौरान 91 प्रतिशत की तीव्र गिरावट देखी गई और यह संख्या 126 से घटकर 11 रह गई। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या अप्रैल 2018 के 126 से घटकर अक्टूबर 2025 में मात्र 11 रह गई। मंत्री ने कहा कि अब केवल तीन जिले ही वामपंथी उग्रवाद से ‘‘सबसे अधिक प्रभावित' हैं। मंत्री ने दावा किया कि वामपंथी उग्रवाद ‘मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएगा।'
नक्सलियों के खिलाफ केंद्र सरकार की ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति' के परिणाम को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा में 2010 के उच्चतम स्तर से 2024 तक 81 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। -
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल में प्राथमिकता लोगों की जिंदगी को आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि कानून या नियम आम लोगों की सुविधा के लिए होने चाहिए और उनकी वजह से किसी निर्दोष भारतीय को असुविधा नहीं होनी चाहिए। यहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि देश अब पूरी तरह ‘‘रिफॉर्म एक्सप्रेस'' के दौर में है, जहां सुधार तेजी से और स्पष्ट मंशा के साथ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के सुधार सिर्फ अर्थव्यवस्था या राजस्व पर केंद्रित नहीं है, ये पूरी तरह से नागरिक-केंद्रित हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि सरकार का लक्ष्य लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां दूर करना है, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता से आगे बढ़ सकें। बैठक के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को ‘‘बहुत अच्छे दिशानिर्देश'' दिए और यह संदेश दिया कि उनकी सरकार के तीसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा मुद्दा “रिफॉर्म एक्सप्रेस” है। इस बैठक में राजग के सभी सांसद शामिल हुए। रीजीजू ने कहा, ‘‘मैं इस बात पर बल देना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस' चल पड़ी है और अब यह रुकेगी नहीं। यह सुधार देश के हर नागरिक की जिंदगी बदलने के लिए है। जब हम सुधार की बात करते हैं तो कुछ लोग इसे आर्थिक सुधार समझते हैं, कुछ राजनीतिक, कुछ प्रशासनिक या सांस्कृतिक सुधार। लेकिन ‘सुधार' का असली मतलब है-हर नागरिक के जीवन में बेहतरी है।” उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने इस पर बल दिया कि जो भी कानून बनाया जाए, उसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए जो किसी नागरिक के लिए नुकसानदेह हो या उसे परेशान करे। नियम और कानून आम लोगों के लिए बोझ नहीं होने चाहिए। सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियम-कानून जनता की सुविधा के लिए हों और उनकी जिंदगी बेहतर बनाएं।'' रीजीजू ने प्रधानमंत्री के हवाले से कहा कि नियम-कानून, व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए होने चाहिए, लोगों को परेशान करने के लिए नहीं और कोई भी कानून ऐसा नहीं होना चाहिए जो बिना किसी वजह लोगों के लिए परेशान खड़ी करे। उन्होंने कहा, “अब हम इसी दिशा में काम करेंगे। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और नगरपालिकाओं व पंचायतों जैसी स्थानीय स्वशासी संस्थाओं, सभी को इसी दिशा में काम करना चाहिए...…। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने सांसदों से कहा कि वे आम लोगों की वास्तविक समस्याएं नियमित रूप से साझा करें, ताकि ‘‘रिफॉर्म एक्सप्रेस'' हर घर तक पहुंच सके और लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां दूर हो सकें। सूत्रों के अनुसार, मोदी ने यह भी कहा कि वह 30-40 पन्नों वाले फॉर्म और बेवजह की कागजी कार्रवाई की संस्कृति खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नागरिकों को सेवाएं उनके घर के द्वार पर मिलनी चाहिए और बार-बार एक ही जानकारी जमा कराने की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि सरकार ने लोगों पर भरोसा दिखाते हुए स्व-प्रमाणन की सुविधा दी थी, और पिछले 10 वर्षों में इसका कोई दुरुपयोग नहीं हुआ है, यह व्यवस्था बिल्कुल सफल साबित हुई है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि जीवन सुगमता और कारोबार सुगमता दोनों ही उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। बैठक की शुरुआत में मोदी को हाल में संपन्न बिहार चुनावों में राजग की शानदार जीत के लिए बधाई दी गई।
संसद भवन परिसर में आयोजित राजग संसदीय दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे. पी. नड्डा मौजूद रहे। जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) नेता संजय झा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानमंत्री को माला पहनाकर बधाई दी। सोमवार को बिहार के राजग नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मोदी से मुलाकात की थी और राज्य विधानसभा चुनावों में गठबंधन की शानदार जीत के लिए उन्हें बधाई दी थी। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने राजग सांसदों से कहा कि बिहार विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन की बड़ी जीत के बाद जनता के कल्याण के लिए और अधिक जोश के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा, “बड़ी जीत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।
पिछले माह हुए 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा चुनावों में राजग ने 202 सीट हासिल कीं, जिससे जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार के 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। गठबंधन सहयोगियों में भाजपा ने 89, जद(यू) ने 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने पांच और रालोमो ने चार सीट जीतीं।



























