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नयी दिल्ली. राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को देश भक्ति, त्याग और राष्ट्र चेतना का प्रतीक बताते हुए सोमवार को कहा जो लोग इस समय इसकी चर्चा करने के औचित्य और जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपनी सोच पर नये सिरे से विचार करना चाहिए। शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष होने पर उच्च सदन में चर्चा में भाग लेते हुए उम्मीद जतायी कि इस चर्चा के माध्यम से देश के बच्चे, युवा और आने वाली पीढ़ी यह बात समझ सकेगी कि वंदे मातरम् का देश को स्वतंत्रता दिलाने में क्या योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में इस विषय पर कुछ लोगों ने यह प्रश्न उठाया था कि आज वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों होनी चाहिए। शाह ने कहा कि वंदे मातरम् के प्रति समर्पण की जरूरत, जब यह बना तब थी, आजादी के आंदोलन में थी, आज भी है और जब 2047 में महान भारत की रचना होगी, तब भी रहेगी। शाह ने कहा कि यह अमर कृति ‘‘भारत माता के प्रति समर्पण, भक्ति और कर्तव्य के भाव जागृत करने वाली कृति है।'' गृह मंत्री ने कहा कि जिन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि आज इस पर चर्चा क्यों की जा रही है, उन्हें अपनी समझ पर नये सिरे से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस चर्चा को पश्चिम बंगाल में होने जा रहे चुनाव से जोड़ कर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बंगाल चुनाव से जोड़कर राष्ट्रीय गीत के महिमामंडन को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। लोकसभा में सोमवार को इस विषय पर हुई चर्चा में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर इस समय चर्चा कराये जाने की जरूरत पर प्रश्न उठाये थे। शाह ने कहा कि यह बात अवश्य है कि बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस रचना को बंगाल में रचा था किंतु यह रचना न केवल पूरे देश में बल्कि दुनिया भर में आजादी की लड़ाई लड़ रहे लोगों के बीच फैल गयी थी। उन्होंने कहा कि आज भी कोई व्यक्ति यदि सीमा पर देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देता है तो यही नारा लगाता है। उन्होंने कहा कि आज भी जब कोई पुलिसकर्मी देश के लिए अपनी जान देता है तो प्राण देते समय उसके मुंह में एक ही बात होती है, ‘वंदे मातरम्'। शाह ने कहा कि देखते देखते आजादी के आंदोलन में वंदे मातरम देश भक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ‘‘बंकिम बाबू'' ने इस गीत को जिस पृष्ठभूमि में लिखा, उसके पीछे इस्लामी आक्रांताओं द्वारा भारत की संस्कृति को जीण-शीर्ण करने के प्रयास और ब्रिटिश शासकों द्वारा एक नयी संस्कृति को थोपने की कोशिशें की जा रही थीं।
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नई दिल्ली। 18वीं लोकसभा के शीतकालीन सत्र के 8वें दिन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत या राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था।
‘बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया’पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा, “बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया। तब पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय का संकल्प बन गया। इसलिए वंदे मातरम् की स्तुति में लिखा गया था कि मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर, मोद में स्वार्थ का बलिदान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है। सजीवन मंत्र भी, विजय का विस्तृत मंत्र भी। यह शक्ति का आह्वान है। यह ‘वंदे मातरम्’ है। उष्ण शोणित से लिखो, वत्स स्थली को चीरकर वीर का अभिमान है। यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है।”‘वंदे मातरम् ने भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की’प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ उस समय लिखा गया था, जब 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार सतर्क थी और हर स्तर पर दबाव और अत्याचार की नीतियां लागू कर रही थी। उस दौर में ब्रिटिश राष्ट्रगान ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम चल रही थी। ऐसे समय में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी लेखनी से जवाब देते हुए ‘वंदे मातरम्’ लिखा और भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की।‘जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है’प्रधानमंत्री ने कहा, “जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है। वेदों में कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः, अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं। यही विचार भगवान राम ने भी व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। आज ‘वंदे मातरम्’ इसी महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप है।”वंदे मातरम् मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीकपीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि यह मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीक था। यह गीत उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और बलिदान का सम्मान करता है जिन्होंने इसे अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया।यह समय ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने काप्रधानमंत्री ने सदन में सभी सांसदों से कहा कि इस अवसर पर पक्ष-प्रतिपक्ष का कोई भेदभाव नहीं है, क्योंकि यह समय है ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने का, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदानों से पूरा किया। उन्होंने याद दिलाया कि आज भारत में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और आजादी है, वह इसी आंदोलन का परिणाम है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “संसद में बैठे सभी सांसदों के लिए यह अवसर है कि वे इस ऋण को स्वीकार करें और उस पवित्र संघर्ष को याद करें, जिसने हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र कराया।” - हैदराबाद. तेलंगाना सरकार ने कहा कि उसने प्रस्तावित ‘रीजनल रिंग रोड' (आरआरआर) पर आगामी ग्रीनफील्ड रेडियल रोड का नाम दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के नाम पर रखने का फैसला किया है। सरकार ने एक विज्ञप्ति में कहा कि एक अन्य प्रस्ताव में हैदराबाद में अमेरिका के महावाणिज्य दूतावास के साथ एक हाई-प्रोफाइल सड़क का नाम ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' रखा जाएगा। राज्य सरकार विदेश मंत्रालय और अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखकर योजनाओं की जानकारी देगी।इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने दिल्ली में वार्षिक यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) सम्मेलन को संबोधित करते हुए हैदराबाद में प्रमुख सड़कों का नामकरण अग्रणी वैश्विक कंपनियों के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा था। इसके अलावा गूगल और गूगल मैप्स के वैश्विक प्रभाव एवं योगदान को मान्यता देने के लिए एक प्रमुख मार्ग का नाम ‘गूगल स्ट्रीट' रखा जाएगा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि हैदराबाद के वित्तीय जिले में गूगल के आगामी परिसर के साथ वाली सड़क को यह नाम मिलेगा, जो अमेरिका के बाहर कंपनी का सबसे बड़ा परिसर होगा। ये प्रस्ताव तेलंगाना सरकार की उस पहल का हिस्सा हैं, जिसके तहत राज्य को नवाचार-संचालित विकास का केंद्र बनाया जाना है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप माइक्रोसॉफ्ट और विप्रो के नाम पर भी हैदराबाद के किसी स्थान का नाम रखे जाने की उम्मीद है, जिसमें विप्रो जंक्शन और माइक्रोसॉफ्ट रोड शामिल होंगे। राज्य सरकार विशिष्ट व्यक्तियों और कंपनियों के सम्मान में अतिरिक्त सड़कों के नाम रखने पर विचार कर रही है।
- बदायूं (उप्र). वृंदावन के एक मंदिर में 28 वर्षीय महिला की हथेली में 'चमत्कारिक रूप से' सोने की अंगूठी गिरने के बाद उसने भगवान कृष्ण की मूर्ति से यहां विवाह कर लिया। उसके पिता ने यह दावा किया। यह "चमत्कार" लगभग तीन महीने पहले बांके बिहारी मंदिर में हुआ।चंदौसी के एक कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर पिंकी शर्मा एक अत्यंत धार्मिक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि उनका परिवार कम से कम चार वर्षों से वृंदावन जा रहा है और घर पर प्रतिदिन पूजा-अर्चना करता है। उन्होंने कहा, "हम हमेशा पिंकी के लिए एक योग्य वर की कामना करते थे, जो स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में थी, लेकिन... उसने कहा कि उसका विवाह तभी होगा जब कृष्ण चाहेंगे।" सुरेश चंद्र के अनुसार, यह इच्छा परिवार की हाल में वृंदावन यात्रा के दौरान पूरी हुई।उन्होंने दावा किया, "पिंकी बांके बिहारी के सामने अपनी हथेलियां खोले खड़ी थी, तभी प्रसाद के साथ एक अंगूठी उसके हाथ में आ गिरी। उसने इसे एक दिव्य संकेत के रूप में लिया कि कृष्ण ने उसे चुना है।" पिंकी के लिए यह हस्तक्षेप ही काफ़ी था कि उसने अपने माता-पिता से उसके लिए वर ढूंढना बंद करने को कहा। परिवार ने शनिवार रात भगवान से "विवाह" करने की उसकी इच्छा का सम्मान किया। लगभग 100-150 गांव वाले बारात लेकर पिंकी के घर कृष्ण की एक मूर्ति लेकर आए।एक पंडाल लगाया गया, हिंदू विवाह की रस्में निभाई गईं और भोजन परोसा गया। पिंकी ने मूर्ति को माला पहनाई और अग्नि के चारों ओर सात फेरे लिए। पिंकी ने एक न्यूज़ एजेंसी कहा, "मैंने सब कुछ कृष्ण पर छोड़ दिया है। अब जो भी होगा, वह उनकी इच्छा के अनुसार होगा।" सुरेश चंद्र ने कहा कि हालांकि उनके पास पैसे की कमी है, फिर भी वह वृंदावन में उनके लिए एक छोटे से घर का प्रबंध कर सकते हैं। पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर की पिंकी फिलहाल अपनी बड़ी बहन और बहनोई के साथ रह रही है, जिन्हें परिवार ने प्रतीकात्मक रूप से "शादी" के दौरान "दूल्हे के पक्ष" के रूप में माना था।
- कोलकाता. पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों के साधुओं और साध्वियों सहित लाखों श्रद्धालुओं ने रविवार दोपहर कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवद गीता पाठ में हिस्सा लिया। आयोजकों ने यह जानकारी दी। भगवा वस्त्र पहने साधुओं ने आयोजन स्थल पर गीता की प्रतियों से एक स्वर में श्लोक पढ़े, जबकि बजरंगबली और भगवान राम की तस्वीरों वाले भगवा झंडे आयोजन स्थल पर लहरा रहे थे। आयोजकों के अनुसार, लगभग एक लाख लोग धर्मग्रंथ के प्रथम, नौवें और अठारहवें अध्याय के सामूहिक पाठ में शामिल हुए। प्रतिभागियों में पूर्व बर्धमान के मेमारी से अपने चार दोस्तों के साथ आए एक युवक देबराज रॉय भी शामिल थे। सभी तिलक लगाए हुए थे और उन्होंने भगवा पगड़ी पहन रखी थी तथा उनमें से एक के हाथ में झंडा था। लोगों ने राष्ट्र ध्वज भी लहराए और बार-बार ‘हरे कृष्ण हरे हरे, गीता पथ घरे घरे' का नारा लगाया।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले हिंदू वोट बैंक को ध्यान में रखकर इस कार्यक्रम के आयोजन के दावों के बारे में पूछे जाने पर, रॉय ने कहा, "हम किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हुए हैं। लेकिन हमारा मानना है कि हिंदुओं को राजनीतिक मान्यताओं से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए और अपनी आध्यात्मिक विरासत, आस्था व संस्कृति के प्रति सम्मान रखना चाहिए। हम विभिन्न धर्मों और आस्थाओं के लोगों के साथ सद्भाव से रहने में विश्वास करते हैं।" दक्षिण 24 परगना के बिरही निवासी और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े सम्राट सरकार ने कहा कि वह अकेले ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए, ताकि व्यवस्थित तरीके से श्लोकों के पाठ में हिस्सा ले रहे लाखों लोगों के उत्साहपूर्ण माहौल का हिस्सा बन सकें। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।केंद्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, पूर्व सांसद लॉकेट चटर्जी और विधायक अग्निमित्रा पॉल सहित वरिष्ठ भाजपा नेता आयोजन में मौजूद थे। कार्तिक महाराज के नाम से जाने जाने वाले स्वामी प्रदीप्तानंद महाराज तथा बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री जैसे प्रमुख धार्मिक नेताओं के साथ-साथ विभिन्न मठों के साधु भी इसमें शामिल हुए। ‘पंच लाखो कोंठे गीता पाठ' (पांच लाख स्वरों द्वारा गीता पाठ) नामक इस कार्यक्रम का आयोजन 'सनातन संस्कृति संसद' द्वारा किया गया था। यह विभिन्न मठों और धार्मिक संस्थानों के भिक्षुओं और आध्यात्मिक नेताओं का एक समूह है। पॉल ने कहा, "गीता केवल हिंदुओं के लिए नहीं है, यह भारत के सभी 140 करोड़ लोगों के लिए है।"आयोजकों ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की आध्यात्मिक विरासत को जागृत करना और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने दावा किया कि यह राज्य और संभवतः देश में इस तरह का सबसे बड़ा सामूहिक पाठन कार्यक्रम है।कार्तिक महाराज ने कहा, "विभाजन के माहौल में आध्यात्मिक अभ्यास शांति और दिशा बहाल कर सकता है।" उन्होंने कहा कि हजारों लोगों ने इसमें भाग लेने का संकल्प लिया है। विभिन्न हिंदू मठों द्वारा संचालित स्टाल पर गीता के लघु संस्करण, धार्मिक पुस्तकें और पूजा सामग्री बेची गईं। पाठ के बाद प्रसाद वितरण के लिए स्टाल पर लंबी कतारें लग गईं।भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए व्यापक प्रबंध किए गए थे और उम्मीद थी कि पांच लाख लोग इसमें शामिल होंगे। तीन बड़े मंच बनाए गए थे और मध्य कोलकाता में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। आध्यात्मिक नेतृत्व गीता मनीषी महामंडल के स्वामी ज्ञानानंदजी महाराज ने किया।
- बालाघाट/ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष बालाघाट जिले में रविवार को 10 इनामी नक्सलियों ने समर्पण कर दिया, जिसके बाद उन्होंने सभी नक्सलियों को संविधान की प्रति देते हुए शांतिपूर्ण जीवन जीने की अपील की। इन नक्सलियों पर 2.36 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और इन्होंने समर्पण के साथ ही एके 47, इंसास रायफल सहित कई अन्य हथियार मुख्यमंत्री के समक्ष समर्पित किए। बालाघाट पुलिस लाइन परिसर में आयोजित ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन' कार्यक्रम में आत्समर्पण करने वाले ये नक्सली भोरमदेव जंगल क्षेत्र में सक्रिय थे और इनपर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2.36 करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने नक्सलियों से सरकार की पुनर्वास योजना के तहत मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की और कहा कि जो कानून की राह अपनाते हैं, उनके पुनर्वास की चिंता सरकार करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की पुनर्वास योजना केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की गारंटी है। जो भी व्यक्ति हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करेगा, उसे सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और पुनर्वास का पूरा अवसर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य हर उस व्यक्ति को सुरक्षित भविष्य देना है जो विकास और शांति की राह पर चलना चाहता है।'' आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने मुख्यमंत्री को अपने हथियार सौंपे। इनमें चार महिला नक्सली भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सरकार मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘‘लाल सलाम को अब आखिरी सलाम देने का समय आ गया है। इस अभियान को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के अदम्य साहस के कारण इसे अब जनवरी 2026 तक ही पूरा कर लेने का रोडमैप तैयार कर लिया गया है।'' उन्होंने कहा कि एक भी व्यक्ति को हथियार उठाने की अनुमति नहीं है।मुख्यमंत्री ने कहा कि डिंडोरी और मंडला पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुके हैं और अब बालाघाट में जनवरी से ‘पूर्ण नक्सल उन्मूलन अभियान' चलेगा। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को 15 वर्ष तक पुनर्वास पैकेज मिलेगा और जो नक्सली मुख्यधारा में नहीं आएंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नक्सल उन्मूलन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में कुल 10 खूंखार नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने ढेर किया, जिन पर एक करोड़ 46 लाख रुपये तक का इनाम था। मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मुख्यमंत्री यादव के नेतृत्व में नक्सल विरोधी अभियान को सशक्त किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘नए कैंप स्थापित किए गए हैं, ‘हॉक फोर्स' और पुलिस बल में वृद्धि की गई है। साथ ही अधिकारियों और जवानों को सतत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन कार्रवाइयों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी नक्सलवादियों द्वारा आत्मसमर्पण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि रोजगार और कौशल विकास के प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस निर्धारित समय-सीमा में नक्सल मुक्ति के लिए प्रतिबद्ध है।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह (डीडी न्यूज़) दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘सुप्रभातम्’ की तारीफ की है। उन्होंने इसे दिन की शुरुआत करने का एक ताजा और प्रेरणादायक तरीका बताया। पीएम मोदी ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला सुप्रभातम् कार्यक्रम सुबह-सुबह ताजगी भरा एहसास देता है। इसमें योग से लेकर भारतीय जीवन शैली तक अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती है। भारतीय परंपराओं और मूल्यों पर आधारित यह कार्यक्रम ज्ञान, प्रेरणा और सकारात्मकता का अद्भुत संगम है।”एक अन्य एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने डीडी के इस शो के वीडियो क्लिप शेयर करते हुए लिखा, “सुप्रभातम् कार्यक्रम में एक विशेष हिस्से की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा। यह है संस्कृत सुभाषित। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और विरासत को लेकर एक नई चेतना का संचार होता है। यह है आज का सुभाषित…” साथ ही पीएम मोदी ने शो का यूट्यूब लिंक भी शेयर किया और दर्शकों को इसे देखने और कार्यक्रम की समृद्ध सांस्कृतिक सामग्री को जानने के लिए प्रोत्साहित किया।दरअसल, डीडी न्यूज़ (दूरदर्शन न्यूज़) पर प्रसारित होने वाला ‘सुप्रभातम्’ एक खास शो है जो भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को उजागर करता है। इस कार्यक्रम का मकसद दर्शकों को योग, स्वस्थ जीवन, पारंपरिक ज्ञान और भारतीय विरासत के विभिन्न पहलुओं पर सेगमेंट पेश करके उनके दिन को एक सार्थक शुरुआत देना है।इस शो में आमतौर पर योग, ध्यान और आयुर्वेद और अन्य प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों से प्रेरित जीवन शैली प्रथाओं पर विशेषज्ञ चर्चा, प्रदर्शन और जानकारी शामिल होती है। ये विषय सरकार के समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और व्यापक जनता के बीच पारंपरिक प्रथाओं को पुनर्जीवित करने के लगातार प्रयासों के अनुरूप हैं।सुप्रभातम् आमतौर पर सुबह प्रसारित होता है। हालांकि व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दूरदर्शन इस शो को कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। दर्शक इसे लाइव देख सकते हैं या डीडी न्यूज फेसबुक पेज या डीडी न्यूज यूट्यूब चैनल या कई निजी नेटवर्क जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से हाल के एपिसोड देख सकते हैं।उम्मीद जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन से सुप्रभातम् की दर्शक संख्या बढ़ेगी। खासकर उन दर्शकों के बीच जो सांस्कृतिक आधार के साथ स्वास्थ्य-उन्मुख विषयों को जोड़ने वाली सामग्री की तलाश में हैं। (
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नई दिल्ली। अमेरिका के नए रक्षा प्राधिकरण विधेयक (NDAA) में भारत को इंडो-प्रशांत क्षेत्र और परमाणु नीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। विधेयक में कहा गया है कि अमेरिका भारत के साथ उसकी परमाणु दायित्व नीति पर निरंतर बातचीत करेगा और भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल करेगा जो चीन की चुनौती का सामना करने के लिए नई रक्षा व्यवस्था तैयार कर रहे हैं।
अमेरिकी कांग्रेस के नेताओं ने वित्त वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (NDAA) का संयुक्त मसौदा जारी किया है। इस अधिनियम में भारत को अमेरिका की कई रणनीतियों- जैसे नागरिक परमाणु सहयोग, रक्षा सह-उत्पादन और समुद्री सुरक्षा में विशेष स्थान दिया गया है। यह बिल छह दशकों से हर साल पारित होता आया है और इस सप्ताह के अंत में इसके हाउस से पारित होने की उम्मीद है।विधेयक में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि अमेरिका और भारत मिलकर एक संयुक्त परामर्श तंत्र स्थापित करेंगे, जो 2008 के नागरिक परमाणु समझौते के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगा। साथ ही भारत के घरेलू परमाणु दायित्व नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, इन मुद्दों पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर ‘‘एक रणनीति विकसित करने’’ का कार्य भी इसी तंत्र को सौंपा गया है। अमेरिका को पांच वर्षों तक हर साल इस समीक्षा की रिपोर्ट कांग्रेस में पेश करनी होगी।विधेयक के अन्य हिस्सों में भारत को वैश्विक नागरिक परमाणु सहयोग में “सहयोगी देश” के रूप में चिन्हित किया गया है। कानून प्रशासन को अमेरिकी परमाणु निर्यात का विस्तार करने के लिए 10 वर्षीय रणनीति बनाने और रूस तथा चीन से होने वाली प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण करने का निर्देश देता है।इंडो-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों में भारत को प्राथमिक सहयोगियों की सूची में शामिल किया गया है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और न्यूजीलैंड भी हैं। इन देशों के साथ मिलकर रक्षा उद्योग, आपूर्ति श्रृंखला और नई तकनीकों पर संयुक्त कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।अमेरिकी रक्षा मंत्री को इस दिशा में समझौते करने, तकनीकी सहायता प्रदान करने और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों को जोड़ने का अधिकार होगा, ताकि संयुक्त उत्पादन और विकास को प्रोत्साहन मिल सके।संसद ने यह भी कहा है कि अमेरिका को क्वाड्रिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) सहित भारत के साथ अपना जुड़ाव बढ़ाना चाहिए, ताकि इंडो-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र और खुला रखा जा सके। इसमें सैन्य अभ्यास, रक्षा व्यापार, मानवीय सहायता और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं। चीन को रोकने के लिए अमेरिका अपनी क्षेत्रीय उपस्थिति और साझेदारी भी बढ़ाएगा।विधेयक में भारतीय महासागर क्षेत्र के लिए एक विशेष राजदूत नियुक्त करने का प्रावधान भी है, जिसका कार्य इस क्षेत्र में अमेरिका की कूटनीति का समन्वय करना और चीन के प्रभाव का संतुलन तैयार करना होगा।इन सभी कदमों से स्पष्ट होता है कि भारत अब अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति का केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण साझेदार बन चुका है। हाल के वर्षों में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग काफी मजबूत हुआ है। -
नई दिल्ली। देश आज भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत को याद कर रहा है। सोमवार, 8 दिसंबर को अदम्य साहस के प्रतीक जनरल बिपिन रावत की पुण्यतिथि है। 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में उनका निधन हो गया था।
16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में जन्मे जनरल रावत का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना से जुड़ा रहा है। उनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। पिता की प्रेरणा से बिपिन रावत ने अपनी शिक्षा भी सेना में जाने के लक्ष्य के अनुरूप प्राप्त की। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के बाद उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से प्रशिक्षण पूरा किया।उन्हें 16 दिसंबर 1978 को 11वीं गोरखा रायफल्स की 5वीं बटालियन में कमीशन मिला और जनवरी 1979 में उनकी पहली पोस्टिंग मिजोरम में हुई। सैन्य सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता के बल पर वे 31 दिसंबर 2016 को थल सेना प्रमुख बने और 31 दिसंबर 2019 तक इस पद पर रहे।1 जनवरी 2020 को उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया गया। यह भारतीय रक्षा ढांचे में एक अहम सुधार था, जिसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और क्षमता निर्माण सुनिश्चित करना था।अपने चार दशक के बहादुरी भरे करियर में जनरल रावत ने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया। वे सोपोर (जम्मू-कश्मीर) में कई सफल आतंकवाद-रोधी अभियानों के कमांडर रहे। उनकी ही लीडरशिप में पीओके स्थित आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था। एक मेजर जनरल के रूप में उन्होंने उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा के साथ एक इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली। कोर कमांडर रहते हुए उनकी देखरेख में म्यांमार में भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज ने आतंकी समूहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की, जिसे भारत की सामरिक संस्कृति में संयम से मुखरता की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव माना जाता है।2017 में डोकलाम विवाद और 2020 में गलवान घाटी तनाव के दौरान भी जनरल रावत ने भारतीय सेना का दृढ़ नेतृत्व किया। गोरखा रेजिमेंट से शुरू हुई उनकी सैन्य यात्रा उन्हें भारतीय सेना के शीर्ष पद तक ले गई। जनरल बिपिन रावत अपनी स्पष्ट, निर्णायक और साहसी नेतृत्व शैली के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। -
रांची। झारखंड के जमशेदपुर स्थित एक चिड़ियाघर में "जीवाणु संक्रमण" के कारण कम से कम 10 काले हिरणों की मौत हो गई है। यह जानकारी एक अधिकारी ने रविवार को दी। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क (टीएसजेडपी) में हिरणों की मौत एक दिसंबर से छह दिसंबर के बीच हुईं। आखिरी हिरण की मौत शनिवार को हुई थी। टीएसजेडपी के उप निदेशक डॉ. नईम अख्तर ने बताया, ‘‘उद्यान में अब तक दस काले हिरणों की मौत हो चुकी है। हिरण के शव को जांच और मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजा गया है। ऐसा लगता है कि यह जीवाणु संक्रमण के कारण हुआ है।'' रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय (आरवीसी) की पशु चिकित्सा पैथोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रज्ञा लकड़ा ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम हो चुका है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘संदेह है कि यह एच.एस. (रक्तस्रावी सेप्टिसीमिया) है, जो पास्चरेला प्रजाति के बैक्टीरिया से होने वाला एक जीवाणुजनित रोग है। इस रोग को पास्चरेलोसिस भी कहा जाता है।'' उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे की जांच सोमवार को की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘आगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद, हम बीमारी की पुष्टि कर सकते हैं।'' टीएसजेडपी में पक्षियों सहित लगभग 370 जानवर हैं। वहां 18 काले हिरण थे। अधिकारी ने बताया कि 10 काले हिरणों की मौतों के बाद, चिड़ियाघर में केवल आठ काले हिरण ही बचे हैं।
अख्तर ने बताया कि पहली मौत एक दिसंबर को हुई थी। उन्होंने बताया कि बाद में, मौत का कारण जानने के लिए नमूना रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजा गया। जमशेदपुर प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) सबा आलम ने कहा, ‘‘चिड़ियाघर प्राधिकरण के अनुरोध पर हमने नमूना रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय भेजने में मदद की। हमने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को मौतों के बारे में सूचित कर दिया है।'' रांची पशु चिकित्सा महाविद्यालय के पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एम के गुप्ता ने बताया कि पास्चरेला एक जीवाणु जनित रोग है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है और फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिससे अचानक मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि तेज बुखार, गर्दन में सूजन और दस्त इस बीमारी के कुछ सामान्य लक्षण हैं। अख्तर ने कहा कि उन्होंने संदिग्ध बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए व्यापक एहतियाती कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, "जीवाणुरोधी उपचार जारी है और स्थिति अब नियंत्रण में है।" इस बीच, रांची के ओरमांझी इलाके में स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान ने जमशेदपुर की घटना के बाद अलर्ट जारी कर दिया है। उद्यान को बिरसा चिड़ियाघर के नाम से भी जाना जाता है। बिरसा चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक ओ पी साहू ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया, "चिड़ियाघर में 69 काले हिरण हैं। इसलिए, हमने पहले ही एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल दवाओं का छिड़काव करके एहतियाती कदम उठा लिए हैं।'' रांची के ओरमांझी में 104 हेक्टेयर में फैले इस चिड़ियाघर में 83 विभिन्न प्रजातियों के लगभग 1,450 जानवर और पक्षी हैं। -
बहराइच (उप्र). बहराइच जिले की कैसरगंज तहसील स्थित मल्लहनपुरवा गांव में एक घर में संदिग्ध रूप से घुसा भेड़िया चार माह के एक बच्चे को उठा ले गया। वन विभाग की टीमें ड्रोन कैमरे की मदद से तलाश अभियान चला रही हैं मगर अब तक ना तो बच्चे का कुछ पता लगा है ना ही भेड़िया नजर आया है। पिछले नौ दिनों में इसी मल्लहनपुरवा गांव में भेड़िये के तीन हमले हो चुके हैं। पिछली 28 नवंबर को भेड़िये के हमले में पांच साल के लड़के की मौत हो गयी थी। वहीं, विगत पांच दिसंबर को भेड़िये ने पांच वर्षीय बच्ची को घायल किया था। ग्रामीणों के मुताबिक मल्लहनपुरवा गांव निवासी संतोष का चार माह का बेटा सुभाष छह/सात दिसम्बर की दरमियानी रात अपनी मां के साथ घर में सो रहा था और रात करीब डेढ़ बजे भेड़िया चुपचाप घर में घुसा और सुभाष को मां की गोद से अपने जबड़े में दबोचा और भाग गया। ग्रामीणों ने पीछा किया लेकिन भेड़िया बच्चे को लेकर ओझल हो गया। प्रभागीय वन अधिकारी राम सिंह यादव ने बताया कि संतोष के चार माह के पुत्र सुभाष को वन्यजीव द्वारा रात करीब डेढ़ बजे उठाकर जे जाने की सूचना मिली थी और सूचना मिलते ही गांव में पहले से तैनात वन विभाग की टीमों ने ड्रोन व अन्य तरीकों से खोज अभियाल शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि नदी के किनारे और गन्ने के खेतों में जहां-जहां वन्यजीव के होने की सूचना मिल रही है, वहां हमारी टीमें पहुंच कर तलाश में लगी हैं। अधिकारी ने बताया कि टीम में प्रशिक्षित शूटर भी शामिल हैं और शीघ्र ही हमलावर जीव को या तो पकड़ लिया जाएगा अथवा उसे गोली मार दी जाएगी। बहराइच जिले के कुछ गांवों में इसी साल नौ सितम्बर से अबतक भेड़ियों के हमलों में आठ बच्चों व एक बुजुर्ग दम्पत्ति सहित 10 लोगों की मौत हो चुकी है तथा 32 अन्य घायल हुए हैं। गत 27 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई सर्वेक्षण कर भेड़िये को पकड़ने और नहीं पकड़े जा पाने पर उसे गोली मारने के निर्देश दिये थे। उसके बाद से अब तक चार भेड़िये मारे जा चुके हैं।
- लेह. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बल ‘‘और भी बहुत कुछ कर सकते थे'' लेकिन उन्होंने जानबूझकर ‘‘संयमित'' और ‘‘संतुलित'' प्रतिक्रिया का विकल्प चुना। सिंह ने कहा कि मई में हुए ऑपरेशन ने भारतीय सेना की क्षमता और अनुशासन को रेखांकित किया, जिन्होंने बिना तनाव बढ़ाये आतंकी खतरों को बेअसर कर दिया। रक्षामंत्री सिंह ने देश के विभिन्न हिस्सों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा पूरी की गई 125 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, हमने अपने सशस्त्र बलों, नागरिक प्रशासन और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों के बीच जो समन्वय देखा, वह अविश्वसनीय था। मैं लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रत्येक नागरिक के प्रति हमारे सशस्त्र बलों को अपना समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त करता हूं।'' सिंह ने कहा, ‘‘यह समन्वय ही हमारी पहचान है। हमारा आपसी बंधन ही हमें दुनिया में सबसे अलग पहचान देता है।''ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सात मई को शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। यह अभियान जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को किये गए उस हमले का बदला लेने के लिए शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे और इस हमले में जान गंवाने वालों में से अधिकतर पर्यटक थे। उन्होंने कहा, “कुछ ही महीने पहले, हमने देखा कि कैसे पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के जवाब में, हमारे सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया जानती है कि उन्होंने आतंकवादियों के साथ क्या किया।'' रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, ‘‘बेशक, अगर हम चाहते तो और भी बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन हमारे बलों ने ना केवल वीरता, बल्कि संयम का भी परिचय दिया और केवल वही किया जो जरूरी था।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतना बड़ा ऑपरेशन मजबूत कनेक्टिविटी के कारण ही संभव हो पाया। सिंह ने कहा, ‘‘हमारे सशस्त्र बल समय पर रसद पहुंचाने में सक्षम थे।सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ संपर्क भी बनाए रखा गया, जिससे ऑपरेशन सिंदूर को ऐतिहासिक सफलता मिली।'' रक्षामंत्री सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुरक्षा को कई तरह से बदल रही है और सैनिकों को दुर्गम इलाकों में अधिक प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम बना रही है। उन्होंने कहा, ‘‘आज, हमारे सैनिक दुर्गम इलाकों में मजबूती से खड़े हैं क्योंकि उनके पास सड़कें, वास्तविक समय की संचार प्रणाली, उपग्रह सहायता, निगरानी नेटवर्क और रसद कनेक्टिविटी उपलब्ध है।'' सिंह ने कहा, ‘‘सीमा पर तैनात एक सैनिक का हर मिनट, हर सेकंड बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए, कनेक्टिविटी को केवल नेटवर्क, ऑप्टिकल फाइबर, ड्रोन और रडार तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षा की रीढ़ माना जाना चाहिए।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर वह देश के किसी भी कोने में सशस्त्र बलों से मिल पाते हैं, तो यह मजबूत संचार नेटवर्क और कनेक्टिविटी की वजह से ही संभव है।उन्होंने कहा, ‘‘संचार को सिर्फ बुनियादी ढांचे के लिहाज से नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक बहुत व्यापक शब्द है। शांति, सद्भाव और समाज की समझ के लिए संचार जरूरी है।'' उन्होंने कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास लद्दाख समेत सभी सीमावर्ती इलाकों के साथ संचार और कनेक्टिविटी को मज़बूत करना रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमावर्ती इलाकों के समग्र विकास के लिए पूरे उत्साह से काम कर रही है। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार, हमारे सशस्त्र बल और बीआरओ जैसे संगठन आपके साथ खड़े हैं। हमें बस इस संबंध को मजबूत करते रहना है ताकि हमारे संबंध किसी बाहरी तत्व से प्रभावित ना हो।'' उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी ना सिर्फ सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है, बल्कि आर्थिक विकास को भी गति दे रही है। वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि मजबूत संचार और कनेक्टिविटी नेटवर्क एक प्रमुख कारक रहे हैं, जिसे सरकार की विकास-समर्थक नीतियों और राष्ट्रव्यापी सुधारों का समर्थन प्राप्त है।
- नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अडिग साहस से काम करने के लिए रविवार को सशस्त्र बलों के प्रति गहरा आभार जताया। उन्होंने ‘एक्स' पर लिखा, “सशस्त्र बल झंडा दिवस पर, हम अडिग साहस के साथ हमारे राष्ट्र की रक्षा करने वाले साहसी पुरुषों और महिलाओं के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हैं।” प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बल झंडा दिवस कोष में भी योगदान दिया।प्रधानमंत्री ने कहा, “उनका अनुशासन, संकल्प और मनोबल लोगों की रक्षा करता है और हमारे राष्ट्र को मजबूत बनाता है। उनका समर्पण कर्तव्य,अनुशासन और राष्ट्र के प्रति भक्ति का एक शानदार उदाहरण है।” प्रधानमंत्री ने लोगों से सशस्त्र बल झंडा दिवस कोष में योगदान देने की अपील की।
- गोंडा (उप्र) . गोंडा जिले में रविवार को हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई तथा दो अन्य गंभीर रूप से जख्मी हो गये। पुलिस अधिकारियों ने यहां बताया कि आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रमोद गुप्ता के बेटे नितिन की शादी में शामिल होने के लिए उनकी बेटी नेहा (28), दामाद अक्षत अग्रवाल (35), नाती अनाया (तीन), दामाद की मां नीता अग्रवाल (55) और साढ़ू का बेटा आशू अग्रवाल (34) आए थे और कार्यक्रम में शामिल होकर वे सभी बेंगलूरू वापस जा रहे थे तथा बेटा नितिन सभी को छोड़ने के लिए कार से अयोध्या हवाई अड्डे जा रहा था। उन्होंने बताया कि रास्ते में गोंडा-अयोध्या राजमार्ग पर वजीरगंज थाना क्षेत्र के अनभुला मोड़ के पास अचानक कार का टायर फट गया जिससे बेकाबू कार सामने से आ रही उत्तराखंड परिवहन की बस से टकरा गई।अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में अक्षत, आशू और नीता की मौके पर ही मौत हो गई जबकि पीछे बैठे तीन लोग दरवाजा टूटने पर बाहर गिर पड़े और आगे बैठे लोग दो एयरबैग के खुलने की वजह से बच गए। नितिन और नेहा को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया है तथा अनाया को मामूली चोटें आई हैं। गोंडा मेडिकल कॉलेज के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर डीएन सिंह ने बताया कि दो मरीज गंभीर हालत में लाए गए, जबकि तीन लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि घायलों के परिजन चाहते थे कि उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाए इसलिए उन्हें लखनऊ भेज दिया गया। सिंह ने बताया कि तीनों शव पंचनामे के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे जाएंगे।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही घायलों के बेहतर उपचार के भी निर्देश दिए। अपर पुलिस अधीक्षक राधेश्याम राय ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
- नई दिल्ली। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने आज रविवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीकें आने वाले समय में भारत के विद्युत वितरण तंत्र को पूरी तरह बदल देंगी। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने बताया कि ये तकनीकें बिजली नेटवर्क को अधिक स्मार्ट, उपभोक्ता-केंद्रित और स्वयं अनुकूल बनने में मदद करेंगी। उनके अनुसार एआई और मशीन लर्निंग से विद्युत व्यवस्था न केवल तेज होगी, बल्कि उपभोक्ताओं का अनुभव भी बेहतर होगा।केंद्रीय मंत्री ने विस्तार से बताया कि स्मार्ट मीटर विश्लेषण, डिजिटल ट्विन, प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, बिजली चोरी का पता लगाने वाली प्रणाली, उपकरण-स्तर की बिजली खपत की जानकारी, आउटेज पूर्वानुमान और जनरेटिव-एआई आधारित निर्णय-सहायता जैसे समाधानों से वितरण कंपनियों (DISCOMs) की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के इस्तेमाल से उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय बिजली मिलेगी, कटौतियाँ कम होंगी और बिजली खरीद लागत में भी कमी आएगी।कार्यक्रम में मनोहर लाल ने सभी वितरण कंपनियों, तकनीकी भागीदारों, नवाचारकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों को लेकर फैल रही गलतफहमियों और अफवाहों को दूर करना जरूरी है, ताकि लोग AI और ML आधारित समाधानों पर विश्वास कर सकें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सही जानकारी और पारदर्शिता के साथ ये तकनीकें घर-घर तक बिजली प्रबंधन को सरल और सुरक्षित बना सकती हैं।इस सम्मेलन में राष्ट्रीय नवाचार चुनौती के तहत कुल 195 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें वितरण कंपनियाँ, एडवांस मीटरिंग सेवा प्रदाता, टेक्नोलॉजी कंपनियाँ और होम-ऑटोमेशन संस्थाएँ शामिल थीं। कई चरणों की जांच के बाद तमिलनाडु की टीएनपीडीसीएल और मध्य प्रदेश की एमपी ईस्ट को DISCOM श्रेणी में विजेता चुना गया। AMISP श्रेणी में टाटा पावर और अप्रावा, समाधान प्रदाता श्रेणी में प्रवाह और फ्लॉक एनर्जी तथा होम-ऑटोमेशन श्रेणी में टाटा पावर ने जीत हासिल की। इन विजेताओं ने स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स, राजस्व सुरक्षा, मांग प्रबंधन और ग्रिड इंटेलिजेंस जैसे समाधान प्रस्तुत किए।=सम्मेलन के दौरान मंत्री ने “स्टैलर” नामक संसाधन पर्याप्तता योजना उपकरण को भी लॉन्च किया, जिसे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने तैयार किया है। यह उपकरण वितरण कंपनियों को भविष्य की बिजली मांग का सटीक अनुमान लगाने में मदद करेगा। साथ ही इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम ने भी बिजली क्षेत्र में उपयोग होने वाले AI, ML, AR/VR और रोबोटिक्स समाधानों पर आधारित एक हैंडबुक जारी की, जिसमें कुल 174 उपयोग-मामले शामिल किए गए हैं।--
- नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को लद्दाख से सीमा सड़कों संगठन (BRO) की 125 रणनीतिक परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित कीं। यह एक ही समय में उद्घाटित की गई सबसे अधिक परियोजनाएं हैं। इनमें 28 सड़कें, 93 पुल और 4 अन्य परियोजनाएं शामिल हैं, जो दो केंद्र शासित प्रदेशों-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर और सात राज्यों अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम में फैली हैं। इन सभी परियोजनाओं को लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी मार्ग पर स्थित रणनीतिक श्योक सुरंग का उद्घाटन रहा। 920 मीटर लंबी यह कट-एंड-कवर सुरंग दुनिया के सबसे कठिन क्षेत्रों में बनी इंजीनियरिंग उपलब्धि मानी जा रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सुरंग अब पूरे वर्ष, खासकर कठोर सर्दियों के दौरान, सुरक्षित और भरोसेमंद आवाजाही सुनिश्चित करेगी। इससे दूरस्थ गांवों और अग्रिम सैन्य चौकियों तक आखिरी छोर की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और सुरक्षा व त्वरित तैनाती क्षमता में बड़ा सुधार आएगा।रक्षा मंत्री ने समारोह में गलवान युद्ध स्मारक का वर्चुअल उद्घाटन भी किया, जो गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों के अप्रतिम साहस और बलिदान को समर्पित है। उन्होंने कहा कि मजबूत सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल सुरक्षा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन, रोजगार और आपदा प्रबंधन के लिए भी जीवनरेखा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सड़कें, सुरंगें, स्मार्ट फेंसिंग, एकीकृत कमांड केंद्र और निगरानी प्रणालियाँ देश की सुरक्षा के स्तंभ हैं। BRO को तेजी और कुशलता से जटिल परियोजनाएं पूरी करने के लिए उन्होंने सराहा और कहा कि BRO अब “संचार” और “कनेक्टिविटी” का पर्याय बन गया है।राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सेना द्वारा की गई इस कार्रवाई की ऐतिहासिक सफलता मजबूत कनेक्टिविटी के कारण संभव हुई। उन्होंने कहा कि सेना, नागरिक प्रशासन और सीमा क्षेत्रों के लोगों के बीच सहयोग ही भारत की असली पहचान है। उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया-जहाँ 2025-26 की दूसरी तिमाही में GDP 8.2% तक पहुँच गई और कहा कि मजबूत अवसंरचना सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक समृद्धि की भी नींव है।रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में BRO ने 16,690 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड व्यय किया है और 2025-26 के लिए 18,700 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा उत्पादन, जो 2014 में 46,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा निर्यात भी 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये पहुँच गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम में BRO के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन ने अपने संबोधन में सभी कर्मियों के समर्पण और तकनीकी नवाचारों की प्रशंसा की। समारोह में कई राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सेना प्रमुख और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
- लेह. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देख रहा है, जो आयात पर निर्भर राष्ट्र से एक उभरते हुए उत्पादक-निर्यातक देश के रूप में सामने आ रहा है। सिंह ने कहा कि देश में एक समय घरेलू स्तर पर हथियार और उपकरण बनाने के लिए मजबूत प्रणाली का अभाव था, लेकिन पिछले दशक के दौरान किए गए निरंतर प्रयासों से स्थिति बदल गई है। सिंह ने देश के विभिन्न हिस्सों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा पूरी की गई 125 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में हमारी कड़ी मेहनत के कारण, हमारा रक्षा उत्पादन, जो 2014 में लगभग 46,000 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।हमारा रक्षा निर्यात, जो 10 वर्ष पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।'' केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर तथा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम समेत सात राज्यों में इन परियोजनाओं के तहत 28 सड़कों, 93 पुलों का काम और चार विविध कार्य 5,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरे हो चुके हैं। तकनीकी नवाचार में उल्लेखनीय प्रगति के लिए बीआरओ की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि उन्नत इंजीनियरिंग पद्धतियां बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी ला रही हैं। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के तहत ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स' के साथ साझेदारी में स्वदेशी रूप से विकसित क्लास-70 मॉड्यूलर पुलों को बीआरओ द्वारा अपनाने का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘कई अग्रिम स्थानों पर इन मॉड्यूलर पुलों का सफल निर्माण इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे स्वदेशी तकनीक सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में बदलाव ला रही है। पूरी तरह से भारत में निर्मित ये पुल, भारत की इंजीनियरिंग आत्मनिर्भरता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।'' रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में बीआरओ ने 16,690 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड व्यय किया, जो अब तक का सबसे अधिक है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 18,700 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो बीआरओ की क्षमताओं में सरकार के विश्वास को रेखांकित करता है।
- नयी दिल्ली. भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा कि बैंक का आवास ऋण पोर्टफोलियो पिछले महीने नौ लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है और उन्हें भरोसा है कि खुदरा, कृषि तथा एमएसएमई (आरएएम) क्षेत्र में जारी तेजी से चालू वित्त वर्ष में कुल ऋण वृद्धि 14 प्रतिशत रहेगी। आरएएम खंड सितंबर में ही 25 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।आर्थिक वृद्धि में सुधार को देखते हुए एसबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए ऋण वृद्धि लक्ष्य को पहले के 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया है। ' शेट्टी ने कहा, “हमने ऋण वृद्धि के अनुमान को बढ़ाया है। अब यह 12 प्रतिशत से 14 प्रतिशत है। हमें मजबूत ऋण वृद्धि दिख रही है, खासकर आरएएम खंड में। एमएसएमई क्षेत्र में 17-18 प्रतिशत और कृषि तथा खुदरा में करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।” उन्होंने बताया कि स्वर्ण ऋण में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण में दो अंकों की वृद्धि होगी। कुछ समय से सुस्त चल रहा कॉर्पोरेट ऋण खंड भी दूसरी तिमाही में पुनः गति पकड़ता दिखा और 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। शेट्टी ने कहा, “कॉर्पोरेट ऋण के लिए हमारा अनुमान निचले दो अंकों में है। इस तरह कुल मिलाकर 12-14 प्रतिशत ऋण वृद्धि हासिल करना पूरी तरह संभव है।” रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंक की और कटौती से ऋण सस्ते होंगे और नई मांग को बल मिलेगा।
- नई दिल्ली। एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा के वार्षिक दीक्षांत समारोह में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा योगदान प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करना, उनका विकास करना और उनकी क्षमताओं को सम्मान देने वाला मंच उपलब्ध कराना होता है। उन्होंने ऑनलाइन और ऑन-कैंपस मिलाकर लगभग 29,000 छात्रों के विशाल ग्रेजुएटिंग बैच को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियां ही इस समारोह का वास्तविक केंद्र हैं। केंद्रीय मंत्री ने विश्वविद्यालय की मेरिट-आधारित स्कॉलरशिप प्रणाली की प्रशंसा की, जिसने आवश्यकता-आधारित प्रवेश को संभव बनाया है। उन्होंने यह भी बताया कि यहाँ की आधी छात्र आबादी युवा महिलाओं की है और छात्रों के पास 450 से अधिक पेटेंट हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 50 फैकल्टी सदस्य रामलिंगम स्वामी फेलो हैं जो राष्ट्र सेवा के लिए वापस लौटे हैं।पीयूष गोयल ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस को याद करते हुए कहा कि संविधान के मूल्यों-समानता, सामाजिक सद्भाव और सभी के लिए अवसर को हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी शक्ति है और छात्रों का कर्तव्य है कि वे समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उन्होंने कहा कि आज का ग्रेजुएटिंग बैच भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आने वाले 25 वर्ष “विकसित भारत” के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित करें और देश के विकास में योगदान दें।गोयल ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख किया, जिसमें पीएम ने एक लाख युवाओं से सार्वजनिक जीवन और राजनीति में आने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि देश को ईमानदार और समर्पित सार्वजनिक नेताओं की आवश्यकता है जो 140 करोड़ नागरिकों को कर्तव्य और जिम्मेदारी का संदेश दे सकें-पहले परिवार के लिए, फिर समाज के लिए और अंत में राष्ट्र के लिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय राजनीति और सार्वजनिक जीवन पर गहरी समझ विकसित करने में छात्रों की मदद करें और उन्हें जनप्रतिनिधियों के साथ इंटर्नशिप के अवसर भी दें ताकि वे शासन और सार्वजनिक सेवा को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।उन्होंने कहा कि जैसा उन्हें कंप्यूटर शिक्षा में सिखाया गया था-“garbage in, garbage out” उसी तरह भारतीय राजनीति को अच्छे लोगों की जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि अधिक से अधिक युवा सार्वजनिक जीवन में आएँगे तो भारत दुनिया की महाशक्ति बनने की राह पर और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन को दोहराया कि देश का भविष्य “can-do generation” के हाथों में है और युवा ही नया भारत बनाएँगे।अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री के 15 अगस्त 2022 के भाषण में बताए गए पाँच प्रणों का भी उल्लेख किया। इनमें विकसित भारत का संकल्प, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, भारत की विरासत पर गर्व, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की एकता और कर्तव्य भावना शामिल थे। उन्होंने कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय इन प्रणों को अपनाएँ, तो भारत 2022 से 2047 की यात्रा में 4 ट्रिलियन डॉलर से 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और 2,500 डॉलर से 20,000 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय तक पहुँच सकेगा। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इन पाँच प्रणों पर गहराई से विचार करें और जो उन्हें प्रेरित करे उसे अपने जीवन में अपनाएँ।पीयूष गोयल ने शिक्षकों और माता-पिता के योगदान की सराहना की और कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ने छात्रों को इस मुकाम तक पहुँचाया है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपनी मातृसंस्था से जुड़े रहें और अपने शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करें। उन्होंने कहा कि जीवन में चुनौतियाँ और संघर्ष आते रहेंगे, लेकिन एमिटी यूनिवर्सिटी की शिक्षा और मूल्य उन्हें हर कठिनाई का सामना करने में सक्षम बनाएँगे। उन्होंने छात्रों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान देने की अपील की।-
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नई दिल्ली ।इंडिगो एयरलाइन की कई उड़ानों के रद्द होने और सर्दियों के मौसम में यात्रा के बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय रेलवे ने शनिवार को 89 विशेष ट्रेन सेवाओं की घोषणा की है। ये सेवाएं अगले तीन दिनों में 100 से अधिक यात्राओं को कवर करेंगी और प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, पुणे, हावड़ा और हैदराबाद में यात्री दबाव को कम करने के लिए चलाई जा रही हैं।
सेंट्रल रेलवे ने 14 विशेष ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है, जो पुणे, बेंगलुरु, हजरत निजामुद्दीन, मडगांव, लखनऊ, नागपुर, गोरखपुर और लोकमान्य तिलक टर्मिनस से जुड़ेंगी। ये ट्रेनें 6 से 12 दिसंबर के बीच चलेंगी। दक्षिण-पूर्व रेलवे ने सांत्रागाची से येलाहंका, हावड़ा से मुंबई CSMT और चेरलापल्ली से शालिमार तक सेवाओं की घोषणा की है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी। दक्षिण-केंद्र रेलवे (South Central Railway) ने 6 दिसंबर को चेरलापल्ली से शालीमार, सिकंदराबाद से चेन्नई इग्मोर और हैदराबाद से मुंबई LTT तक तीन विशेष ट्रेनें चलाईं।पूर्व रेलवे हावड़ा, नई दिल्ली, सीलदाह और मुंबई के बीच विशेष ट्रेनें चला रहा है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी। पश्चिम रेल ने मुंबई सेंट्रल और भिवानी, मुंबई सेंट्रल और शकुर बस्ती, तथा बांद्रा टर्मिनस और दुर्गापुरा के बीच सात विशेष ट्रेनें चलाई हैं। इनकी बुकिंग पहले ही खुल चुकी है। गोरखपुर से अतिरिक्त सेवाएं भी संचालित की जाएंगी, जो 7 से 9 दिसंबर के बीच आनंद विहार टर्मिनल और लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक चलेंगी। बिहार के यात्रियों की सुविधा के लिए ईस्ट सेंट्रल रेलवे पटना और दरभंगा से आनंद विहार टर्मिनल तक ट्रेनें चला रहा है, जो 6 से 9 दिसंबर तक चलेंगी।उत्तरी-पश्चिम रेलवे ने हिसार और खड़की, तथा दुर्गापुरा और बांद्रा टर्मिनस के बीच 7 और 8 दिसंबर को विशेष एक-बारगी ट्रेनें संचालित करने का निर्णय लिया है। उत्तरी रेलवे (Northern Railway) नई दिल्ली–उधमपुर वंदे भारत सेवा 6 दिसंबर को चला रहा है। इसके अलावा, नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल और अन्य स्थानों तक भी विशेष ट्रेनें चलेंगी। रेल मंत्रालय ने कहा कि इन अतिरिक्त सेवाओं का उद्देश्य यात्रियों की निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करना और हवाई यात्रा में रुकावट के कारण बढ़ी मांग को पूरा करना है। - नई दिल्ली।‘ परीक्षा पे चर्चा 2026 का नौवां संस्करण जनवरी 2026 में आयोजित होगा। शिक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि यह कार्यक्रम पीएम मोदी का एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म है, जिसमें देश-विदेश के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक परीक्षा से जुड़े तनाव, अनुभव और सकारात्मक तैयारी पर चर्चा करते हैं। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन MyGov पोर्टल (innovateindia1.mygov.in) पर शुरू हो चुके हैं और इसकी अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 है। कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक ऑनलाइन MCQ आधारित प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। जो प्रतिभागी गतिविधि पूरी करेंगे, उन्हें MyGov की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ पार्टिसिपेशन दिया जाएगा।पिछला आठवां संस्करण 10 फरवरी 2025 को नई दिल्ली स्थित सुंदर नर्सरी में एक नई और नवाचारी शैली में आयोजित हुआ था। इसमें देश के विभिन्न प्रकार के स्कूलों- सरकारी स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल, एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल, सीबीएसई स्कूल और नवोदय विद्यालय से चुने गए 36 विद्यार्थी शामिल हुए थे। इसके अलावा PRERANA के पूर्व छात्र, कला उत्सव और वीर गाथा के विजेता भी कार्यक्रम का हिस्सा बने। PPC 2025 में सात अलग-अलग एपिसोड शामिल थे, जिनमें खेल, अनुशासन, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, तकनीक, वित्त, रचनात्मकता और सकारात्मकता जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।PPC 2025 ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल की, जब इसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। इसमें 245 देशों के विद्यार्थी, 153 देशों के शिक्षक और 149 देशों के अभिभावक शामिल हुए। भागीदारी का यह स्तर 2018 में हुए पहले संस्करण से कई गुना अधिक है, जब केवल 22,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। PPC 2025 में 3.56 करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए, जबकि देशभर में आयोजित जन आंदोलन की गतिविधियों में 1.55 करोड़ लोगों ने भाग लिया। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 5 करोड़ लोगों की भागीदारी दर्ज की गई, जो इस कार्यक्रम की लोकप्रियता और प्रभाव को दर्शाती है।-
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नई दिल्ली। गोवा के अर्पोरा में एक रेस्टोरेंट‑क्लब में भीषण आग हादसे में 25 लोगों की मौत और 6 अन्य के घायल हो गए। पीएम मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि यह हादसा बहुत ही दुःखद है। उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना और घायलों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की। इसके अलावा पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की।
वहीं गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस घटना को राज्य के पर्यटन इतिहास में सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक बताया। उन्होंने पुष्टि की कि क्लब के मैनेजर और कुछ कर्मचारी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि क्लब मालिकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। सावंत ने कहा कि इस हादसे में 25 लोगों की मौत हुई और 6 घायल हैं, सभी घायलों की स्थिति स्थिर है और उन्हें सर्वश्रेष्ठ चिकित्सीय देखभाल मिल रही है। उन्होंने पूरे मामले की मैजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया है ताकि आग के कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी इस हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे को “गहरा दुःखद” बताते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन बचाव और राहत कार्य कर रहा है और प्रभावितों को आवश्यक देखभाल प्रदान की जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। आपातकालीन दलों ने आग को काबू में करने के लिए रातभर काम किया। अधिकारियों ने आग लगने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है।-( -
नयी दिल्ली. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि विपक्षी ‘इंडिया' गठबंधन इस समय जीवन रक्षक प्रणाली पर है और अंदरूनी खींचतान एवं भाजपा की 24 घंटे चलने वाली चुनावी मशीन से मुकाबला करने में विफलता के कारण उसके ‘आईसीयू' में जाने का खतरा है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में विपक्षी गठबंधन की ‘‘संगठनात्मक और रणनीतिक विफलताओं'' का विस्तार से उल्लेख किया और केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘अद्वितीय' कार्य नीति के साथ इसके दृष्टिकोण की तुलना की। अब्दुल्ला ने विपक्षी ‘इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) की वर्तमान स्थिति, विशेष रूप से हाल में हुए बिहार चुनावों के बाद, के बारे में कहा, ‘‘हम एक तरह से जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं, लेकिन कभी-कभी कोई अपना चप्पू निकालता है और हमें थोड़ा झटका देता है, और हम फिर से उठ खड़े होते हैं। लेकिन फिर, दुर्भाग्य से, बिहार जैसे परिणाम आते हैं, और हम फिर से नीचे गिर जाते हैं, और फिर किसी को हमें आईसीयू में ले जाना पड़ता है।'' अब्दुल्ला ने नीतीश कुमार की भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में वापसी के लिए भी ‘ इंडिया' गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हमने नीतीश कुमार को वापस राजग की गोद में धकेल दिया।'' उन्होंने विपक्षी गठबंधन द्वारा एकजुट दृष्टिकोण अपनाने में विफलता की ओर भी इशारा किया, तथा बिहार में पार्टी की मौजूदगी के बावजूद सीट-बंटवारे की व्यवस्था से जानबूझकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को बाहर रखने के निर्णय का हवाला दिया। अब्दुल्ला ने ‘इंडिया' गठबंधन के चुनाव प्रचार की तुलना भाजपा से की और कहा कि विपक्षी गठबंधन संरचनात्मक रूप से सत्तारूढ़ पार्टी के अनुशासित दृष्टिकोण के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ है। उन्होंने कहा, ‘‘उनके पास एक अद्वितीय चुनाव मशीन है'', तथा यह ताकत केवल संगठन और वित्तपोषण से कहीं अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘चुनावों के मामले में भी उनकी कार्यशैली अद्भुत है... वे हर चुनाव ऐसे लड़ते हैं मानो उनकी ज़िंदगी उस पर निर्भर हो। हम कभी-कभी चुनाव ऐसे लड़ते हैं मानो हमें कोई परवाह ही नहीं है।'' अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम द्वारा अपनाए गए राजनीति के चौबीस घंटे मॉडल को रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘एक चुनाव खत्म होते ही वे अगले क्षेत्र में चले जाते हैं... हम चुनाव से दो महीने पहले उन राज्यों में कदम रखते हैं। अगर हम नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख से पहले अपने चुनावी गठबंधन बना लें, तो हम भाग्यशाली होंगे।'' उन्होंने भविष्य की रणनीति पर कहा कि विपक्ष के लिए (भाजपा को) गंभीर चुनौती देने का एकमात्र तरीका अपने सबसे बड़े घटक दल कांग्रेस के इर्द-गिर्द एकजुट होना है क्योंकि भाजपा के अलावा वह एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसकी अखिल भारतीय उपस्थिति है। अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि क्षेत्रीय दल अपनी सीमित भौगोलिक पहुंच के कारण विवश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस को ही प्रमुखता से काम करना होगा।'' मुख्यमंत्री ने मुस्लिम मतदाताओं के संबंध में कहा कि पारंपरिक रूप से समुदाय का वोट प्राप्त करने वालों ने उन्हें हल्के में लेकर ‘गलती' की है। अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसे दलों ने केवल चुनाव से ठीक पहले ही समुदाय से संवाद किया, जिसके परिणामस्वरूप समुदाय में मंथन हुआ और लाभ एआईएमआईएम जैसे दलों को मिला है, जो ‘‘पूरे पांच साल उनके मुद्दों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।'' यह पूछे जाने पर कि क्या इसका मतलब यह है कि 2024 के आम चुनावों के परिणाम एक संयोग थे, अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘नहीं, मुझे लगता है कि देश ने 2024 में केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और अन्य को संदेश दिया कि चीजें उतनी अच्छी नहीं हैं जितनी आपने उन्हें बताया था, और हम लिए गए कुछ फैसलों से खुश नहीं हैं।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि 2024 के चुनावों के बाद, केंद्र ने अपना दृष्टिकोण बदला और दिखाया कि वह गठबंधन में भी काम कर सकता है। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘आज हममें से शायद ही किसी को याद हो कि यह एक गठबंधन सरकार है। हम सभी को लगा कि इस सरकार की कार्यशैली संप्रग (कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) या राजग जैसी स्थिति के अनुकूल नहीं है। मुझे तो शायद ही कभी याद आता है कि यह एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो वास्तव में अपने दो सहयोगियों पर निर्भर है।'' उन्होंने कहा कि केंद्र ने काम करने के अपने तरीके, लोगों को साथ लेकर चलने के अपने तरीके को नया रूप दिया है। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मेरा अभिप्राय है कि भाजपा सरकार कहने से लेकर अब वे खुद को राजग सरकार कहने लगे हैं। ये छोटे-मोटे बदलाव हैं, लेकिन इनका महत्व है।'' नेशनल कांफ्रेंस नेता हमेशा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में धांधली के व्यापक राजनीतिक आरोप से दूर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कभी भी उन लोगों का समर्थक नहीं रहा जो कहते हैं कि मशीनों में धांधली होती है।'' अब्दुल्ला ने हालांकि चुनावी धांधली और चुनावी हेरफेर के बीच अंतर बताया, जो उनके अनुसार एक वैध चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, ‘‘चुनावों में हेरफेर किया जा सकता है। और चुनाव में हेरफेर करने का सबसे आसान तरीका मतदाता सूची के माध्यम से या निर्वाचन क्षेत्रों की संरचना के माध्यम से ऐसा करना है।'' अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में की गई परिसीमन प्रक्रिया की ओर इशारा करते हुए इसे ‘‘मूलतः हेरफेर'' बताया। उन्होंने दलील दी कि इस प्रक्रिया में मतदाता सूचियों में फेरबदल करके और मतदाताओं के विशिष्ट वर्गों को बाहर करके ‘‘एक पार्टी और उसके एक सहयोगी'' को लाभ पहुंचाने के लिए नए निर्वाचन क्षेत्र बनाए गए, जो चुनावी हेरफेर करने के समान है। उन्होंने यह कहते हुए निष्कर्ष निकाला कि मतदाता सूची में परिवर्तन करने वाली कोई भी प्रक्रिया, जैसे कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), पक्षपात की आशंका को समाप्त करने के लिए ‘‘पारदर्शी'' और ‘‘निष्पक्ष'' तरीके से की जानी चाहिए। अब्दुल्ला ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि ईवीएम पर उनका निजी रुख उनके पिता फारूक अब्दुल्ला से अलग है, जो धांधली के प्रति आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा,‘‘मेरे पिता व्हाट्सऐप पर मिलने वाली हर बात पर विश्वास कर लेते हैं।''
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मथुरा. सिनेमा जगत में ‘ही-मैन' के नाम से मशहूर दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद शनिवार को मथुरा जिले के एक गांव में उनकी तेरहवीं का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 10 हजार लोग शामिल हुए। इस मौके पर हवन, शांतिपाठ आदि का आयोजन कर अपने प्रिय हीरो को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी बहुचर्चित फिल्म 'शोले' का एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शन किया गया। ब्रह्मभोज के आयोजकों में से एक, बचपन से धर्मेंद्र के प्रशंसक रहे बलदेव क्षेत्र के गांव सेलखेड़ा निवासी गोपाल सिंह पहलवान तथा लाखन सिंह ने बताया कि वे सभी उनके बड़े चहेते थे। उनके निधन से पूरे गांव को ही बहुत दुख हुआ है। वे सभी उन्हें भी एक प्रकार से अपने परिवार का ही सदस्य मानते थे। इसीलिए उन्होंने उनके प्रति अपना आदर व श्रद्धा जाहिर करने के लिए निधन के तेरहवें दिन तेरहवीं की रस्म निभाने की ठानी। उन्होंने बताया कि इसीलिए गांव में पूरे विधि-विधान से हवन एवं शांतिपाठ का आयोजन किया गया और उसके बाद ब्रह्मभोज किया गया। जिसमें उनके गांव के ही नहीं, आसपास के एक दर्जन गांवों के लोगों को भी बुलाया गया था। इसीलिए भोज व अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने वालों की संख्या दस हजार से भी ज्यादा ऊपर पहुंच गई। गौरतलब है कि 'धरम पा जी' के नाम से जाने जाने वाले अभिनेता का विगत 24 नवंबर को निधन हो गया था। वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उनकी पत्नी हेमामालिनी मथुरा से ही सांसद हैं, जो 2024 में तीसरी बार लोकसभा के लिए चुनी गई हैं। धर्मेंद्र खुद भी उनके लिए प्रचार में मथुरा गए थे।
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नयी दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा है कि शुक्रवार रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए आयोजित राजकीय भोज में “गर्मजोशी भरा और आत्मीय” माहौल था तथा कई लोगों से बातचीत करना आनंददायक था। थरूर की यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पुतिन के सम्मान में दिए गए भोज के एक दिन बाद आई है। थरूर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "शुक्रवार रात राष्ट्रपति पुतिन के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में शामिल हुआ। माहौल बेहद गर्मजोशी भरा और आत्मीय था। वहां उपस्थित कई लोगों से बातचीत करने का आनंद लिया, खासतौर पर रूसी प्रतिनिधिमंडल से आए साथी बेहद अच्छे थे।'' राष्ट्रपति मुर्मू ने भोज के दौरान पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में पुतिन की पहली भारत यात्रा के दौरान स्थापित हुई थी।
मुर्मू ने भारत-रूस “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के लिए पुतिन के समर्थन और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की भी सराहना की। कांग्रेस ने शुक्रवार को दावा किया था कि पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित राजकीय भोज में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को आमंत्रित नहीं किया गया है। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कांग्रेस सांसद थरूर के इस भोज में शामिल होने के फैसले को लेकर उन पर कटाक्ष किया और कहा कि ‘हम होते तो अंतरात्मा की आवाज सुनते।'



























