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- -अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और वैज्ञानिक नेतृत्व को मान्यता देने के लिए छह पुरस्कारनई दिल्ली। भारत के जीवन विज्ञान इकोसिस्टम में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और जन स्वास्थ्य पर उत्कृष्ट प्रभाव को मान्यता देने के लिए भारत लाइफ साइंसेज अवार्ड (बीएलएसए) 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। 7 करोड़ रुपये के अनुदान से समर्थित यह पुरस्कार स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान को बढ़ावा देने वाले उत्कृष्ट वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और इकोसिस्टम के नेताओं को सम्मानित करने के लिए स्थापित किया गया है। इस पहल का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसी) और लिली के सहयोग से किया गया है। इसे जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाइरैक-बीआईआरएसी) तथा इन्वेस्ट इंडिया का समर्थन प्राप्त है।इस पुरस्कार में पांच श्रेणियों में छह सम्मान शामिल हैं, जिनमें व्यक्तिगत उत्कृष्टता, सहयोगात्मक नवाचार, संस्थागत उत्कृष्टता, स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान स्टार्टअप और वैज्ञानिक इकोसिस्टम विकास शामिल हैं। चार श्रेणियों में अनुदान सहायता उपलब्ध है, जबकि दो श्रेणियां नवाचार और इकोसिस्टम निर्माण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देती हैं। आवेदनों का मूल्यांकन एक स्वतंत्र निर्णायक मंडल द्वारा पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।आवेदन 1 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक खुले हैं और इसके लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है। शोधकर्ता, वैज्ञानिक, सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान, विश्वविद्यालय और निजी क्षेत्र के नवप्रवर्तक इसमें भाग ले सकते हैं। पात्रता संबंधी विवरण और ऑनलाइन आवेदन के लिए www.bharatlifesciencesawards.com. पर जाएं।
- नई दिल्ली। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, एवीएसएम, एसएम ने बुधवार को भारतीय सेना के उप थल सेनाध्यक्ष (वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ) का पदभार ग्रहण किया। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन जून 1988 में महार रेजिमेंट में शामिल हुए थे। लगभग चार दशक के विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में कमान और स्टाफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं।लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र में एक इन्फैंट्री बटालियन की कमान संभाली। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा, उन्होंने स्ट्राइक कोर में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स तथा उत्तरी कमान में एक पिवट कोर की कमान भी संभाली। उनके सैन्य करियर में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा तथा नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव शामिल है। उन्होंने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के एक सेक्टर की कमान भी संभाली।लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने उत्तरी कमान में एक कोर की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने दक्षिणी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया, जहां क्षमता विकास, बल पुनर्गठन और समग्र परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेना कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने विभिन्न सैन्य इकाइयों और मुख्यालयों में अनेक महत्वपूर्ण स्टाफ और परिचालन नियुक्तियों पर कार्य किया है। इस दौरान उन्हें पारंपरिक सैन्य अभियानों, आतंकवाद विरोधी अभियानों, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों, संयुक्त राष्ट्र मिशनों और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य तैयारियों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने आर्मी वॉर कॉलेज के उच्च कमान पाठ्यक्रम और केन्या के राष्ट्रीय रक्षा पाठ्यक्रम में भी भाग लिया है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (एवीएसएम) और सेना पदक (एसएम) से सम्मानित किया जा चुका है।
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नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने दिल्ली सरकार के साथ टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन अलग-अलग प्रयासों से नहीं, बल्कि सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ समाज की व्यापक भागीदारी भी आवश्यक है। बैठक के दौरान जे.पी. नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अभियान की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की और कहा कि समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही टीबी उन्मूलन का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में आयोजित प्रगति (PRAGATI) बैठक में दिए गए मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए ‘माई भारत’ स्वयंसेवकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका से जागरूकता अभियान और मरीजों तक पहुंच को और मजबूत किया जा सकेगा।समीक्षा बैठक में बताया गया कि दिल्ली में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अब तक 28.83 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसके अलावा 21.67 लाख चेस्ट एक्स-रे और 3.65 लाख मॉलिक्यूलर टेस्ट किए गए हैं। अभियान के दौरान 1.75 लाख टीबी मरीजों को अधिसूचित (नोटिफाई) किया गया है। बैठक में अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके तहत निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) और वार्ड समितियों से अभियान की जिम्मेदारी अपने स्तर पर लेने और सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। -
नई दिल्ली। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची बुधवार शाम तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। उनके आगमन पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद साने ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत-जापान संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दौरे के दौरान साने ताकाइची की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साने ताकाइची का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी आधिकारिक यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में उनका स्वागत किया।भारत रवाना होने से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में साने ताकाइची ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के साथ सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों के आधार पर अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। जापान की प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। निवेश, व्यापार, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक, रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी तथा सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भागीदारी से मजबूत एवं टिकाऊ आर्थिक साझेदारी विकसित होगी। -
नई दिल्ली। अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने 1 जुलाई, 2026 को दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एओसी-इन-सी) के रूप में पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर दक्षिणी वायु कमान मुख्यालय में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। 16 दिसंबर 1989 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त करने वाले एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, हायर एयर कमांड और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से अध्ययन किया है। वे पायलट अटैक इंस्ट्रक्टर हैं और अपाचे, मिग-21, जगुआर, मिग-29, एसयू-30 तथा राफेल सहित विभिन्न लड़ाकू विमानों पर 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव रखते हैं।
लगभग चार दशकों के सैन्य करियर में एयर मार्शल मान ने एक फाइटर स्क्वाड्रन और एक प्रमुख फाइटर एयरबेस की कमान संभाली है। उन्होंने एयर डिफेंस कमांडर और एक कमांड में प्रशासनिक प्रभारी वरिष्ठ अधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वायु मुख्यालय में उन्होंने सहायक वायु स्टाफ प्रमुख (ऑपरेशंस-ऑफेंसिव) और महानिदेशक (वेपन सिस्टम्स) की जिम्मेदारी भी निभाई।अपनी नई नियुक्ति से पहले एयर मार्शल जसवीर सिंह मान पश्चिमी वायु कमान में वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त परिचालन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है।एयर मार्शल जसवीर सिंह मान ने एयर मार्शल मनीष खन्ना का स्थान लिया है, जो 30 जून, 2026 को लगभग चार दशकों की गौरवशाली सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। एयर मार्शल मनीष खन्ना को उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक से सम्मानित किया जा चुका है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की सेशेल्स गणराज्य की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और सेशेल्स के मत्स्य पालन, कृषि एवं नीली अर्थव्यवस्था मंत्रालय के कृषि विभाग के बीच कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कृषि अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को नई गति देना है। समझौता ज्ञापन के तहत दोनों देश संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रमों को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के आदान-प्रदान, उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों के साझा उपयोग तथा सर्वोत्तम कृषि प्रणालियों को अपनाने के लिए सहयोग बढ़ाया जाएगा।
समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 से 2031 तक की पंचवर्षीय कार्ययोजना पर भी हस्ताक्षर किए। इस कार्ययोजना में जलवायु-अनुकूल कृषि, बागवानी, फसलोत्तर प्रबंधन, पशुधन विकास तथा टिकाऊ खाद्य और पोषण सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।इस सहयोग का उद्देश्य संस्थागत संबंधों को मजबूत करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना, तकनीकी क्षमता का विकास करना तथा जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसी उभरती चुनौतियों का प्रभावी समाधान तैयार करना है। साथ ही सतत कृषि विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा। आईसीएआर विश्वभर के साझेदार संस्थानों के साथ 100 से अधिक समझौता ज्ञापनों के माध्यम से भारत की वैश्विक कृषि साझेदारी का लगातार विस्तार कर रहा है। सेशेल्स के साथ यह नया समझौता ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की भागीदारी को और मजबूत करेगा तथा सतत कृषि, नवाचार और वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (दिल्ली-जयपुर खंड) के मनोहरपुरा टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) आधारित टोलिंग प्रणाली शुरू कर दी है। इससे पहले 19 जून 2026 को एनएचएआई ने दौलतपुरा टोल प्लाजा पर राजस्थान की पहली एमएलएफएफ टोलिंग प्रणाली लागू की थी। एनएचएआई ने बताया कि मनोहरपुरा के बाद दिल्ली-जयपुर खंड पर यातायात को और सुगम बनाने के लिए शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर भी जल्द एमएलएफएफ प्रणाली शुरू की जाएगी। इस पहल से डिजिटल राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना को और मजबूती मिलेगी। एमएलएफएफ प्रणाली में बैरियर-रहित टोलिंग व्यवस्था अपनाई गई है। इसमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) तकनीक को फास्टैग (FASTag) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली के साथ जोड़ा गया है। इससे न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ वाहनों से स्वत: टोल शुल्क वसूला जाएगा और टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी।
एनएचएआई के अनुसार, इस प्रणाली से वाहनों की प्रतीक्षा अवधि लगभग समाप्त हो जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और टोल प्लाजा पर वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आएगी। यह पहल नागरिक-केंद्रित सेवाएं और कारोबार में सुगमता बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य के अनुरूप है। एमएलएफएफ प्रणाली के तहत वाहन चालकों को अपने फास्टैग खाते में पर्याप्त शेष राशि बनाए रखना आवश्यक होगा। यदि फास्टैग में बैलेंस कम है, फास्टैग अमान्य है या खराब है, तो संबंधित वाहन मालिक को ई-नोटिस जारी किया जाएगा। ई-नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर सामान्य टोल शुल्क जमा करना होगा। निर्धारित समय के बाद भुगतान नहीं करने पर सामान्य टोल दर का दोगुना शुल्क वसूला जाएगा। वाहन मालिक ई-नोटिस का भुगतान एनएचएआई के पोर्टल और ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप के माध्यम से कर सकेंगे। एनएचएआई का कहना है कि एमएलएफएफ प्रणाली से टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ेगी, टोल प्लाजा के संचालन की लागत कम होगी और देशभर में टोलिंग व्यवस्था अधिक कुशल बनेगी। -
नई दिल्ली। भारतीय रेल ने सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण और परिचालन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के रायपुर मंडल के दुर्ग-तारोकी खंड के 13 स्टेशनों पर 226 करोड़ रुपए की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना से ट्रेन परिचालन अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनेगा।
परियोजना के तहत 13 स्टेशनों पर मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली से बदला जाएगा। जिन स्टेशनों को इस परियोजना में शामिल किया गया है, उनमें मारौडा (एमएक्सए), रिसमा (आरएसए), गुंडार्देही (जीडीजेड), लाटाबोर (एलबीओ), बलोद (बीएक्सए), कुसुमकासा (केवाईएस), दल्ली राजहरा (डीआरजेड), गुडम (जीयूडीएम), भानुप्रतापुर (बीपीटीपी), केवटी (केईटीआई), अंतागढ़ (एएजीएच), तारोकी (टीडीओके) और रायपुर स्टोर डिपो (आरएसडी) शामिल हैं।इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक है, जो रूट सेटिंग और सिग्नलिंग कार्यों को स्वचालित बनाती है। इससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी, सिग्नलिंग में आने वाली तकनीकी खराबियों की संभावना कम होगी और किसी भी व्यवधान की स्थिति में सेवाओं को जल्दी बहाल किया जा सकेगा।इस परियोजना से ट्रेन परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ने के साथ समयपालन में भी सुधार होगा। साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री और माल यातायात के बेहतर संचालन के लिए मजबूत तकनीकी आधार तैयार होगा। भारतीय रेल ने कहा कि यह मंजूरी राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में उन्नत तकनीक के माध्यम से सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेल परिचालन सुनिश्चित करना है -
जयपुर. राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक बस के ट्रक से टकरा जाने के बाद दोनों वाहनों में आग लग गई जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई और 24 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह हादसा कोलवा थाना क्षेत्र में धनावड़ा के पास हुआ।
दौसा के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने बताया कि हादसे में पांच लोग जिंदा जल गए, जबकि दो की मौत सिर में गंभीर चोट लगने के कारण हुई। एक अन्य व्यक्ति ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सिर पर गंभीर चोट लगने से जान गंवाने वाले दो लोगों में से एक की पहचान धर्मेंद्र के रूप में हुई है। अपर पुलिस अधीक्षक शंकर लाल ने बताया कि अन्य मृतकों की पहचान की जा रही है। उन्होंने बताया कि हादसे में घायल हुए 24 लोगों की हालत स्थिर है। पुलिस अधीक्षक ने कहा, ''उत्तराखंड के ऋषिकेश से इंदौर जा रही हंस ट्रेवल्स की बस दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर आगे चल रहे एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद बस और ट्रक दोनों में आग लग गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने बताया कि घायलों को सुरक्षित निकालकर उपचार के लिए दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचीं तथा राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। बाद में आग पर काबू पा लिया गया। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने के लिए 6,969.67 करोड़ रुपये की लागत वाली छह-लेन की सुरंग परियोजना को बुधवार को मंजूरी दे दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि एनएच-148एई के लिए 8.1 किलोमीटर लंबी इस सड़क सुरंग का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत किया जाएगा और इसे पांच वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच तेज संपर्क उपलब्ध कराएगी तथा यूईआर-2/द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज से जोड़ेगी। इससे गुरुग्राम, द्वारका, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डा और पश्चिम दिल्ली से दक्षिण दिल्ली की ओर आने-जाने वाला यातायात सुगम होगा। सुरंग का 1.98 किलोमीटर लंबा हिस्सा सदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से होकर गुजरेगा।
बयान में कहा गया कि भूमिगत सुरंग (ट्विन-ट्यूब) के निर्माण से सतह पर न्यूनतम व्यवधान होगा और रिज क्षेत्र का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) एम्स और महिपालपुर के बीच एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का भी प्रस्ताव कर रहा है। यह कॉरिडोर सुरंग को बारापुला एलिवेटेड रोड से जोड़ेगा, जिससे पश्चिम और दक्षिण दिल्ली का संपर्क पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा से बेहतर होगा। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से बनने वाली यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के चौराहे से पहले समाप्त होगी। इस चौराहे पर यातायात का दबाव कम करने के लिए नेल्सन मंडेला मार्ग के साथ 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, मौजूदा फ्लाईओवर के समानांतर छतरपुर से महिपालपुर की ओर एक अतिरिक्त फ्लाईओवर भी प्रस्तावित है। छतरपुर की ओर दाहिने मुड़ने वाले वाहनों की सुविधा के लिए एक एलिवेटेड यू-टर्न बनाने का भी प्रस्ताव है। मुख्य मार्ग की लंबाई 6.3 किलोमीटर होगी। प्रस्तावित फ्लाईओवर और महिपालपुर-छतरपुर मार्ग पर एलिवेटेड यू-टर्न को शामिल करने पर परियोजना की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी। बयान के अनुसार, अनुमान है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रत्येक लेन-किलोमीटर के निर्माण से औसतन 264 मानव-दिवस प्रतिदिन प्रत्यक्ष रोजगार और 55 मानव-दिवस प्रतिदिन अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होता है। इस आधार पर, इस परियोजना से लगभग 7.54 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और 9.80 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होने का अनुमान है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को चिकित्सक दिवस और 'चार्टर्ड अकाउंटेंट' (सीए) दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि असंख्य लोग चिकित्सकों और सीए के अथक प्रयासों के लिए उनके आभारी हैं और उन पर भरोसा करते हैं। प्रधानमंत्री ने भूकंप प्रभावित वेनेजुएला में 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत अथक कार्य कर रहे भारत के सभी चिकित्सकों और चिकित्सा पेशेवरों की भी सराहना करते हुए कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में जरूरतमंद लोगों की सेवा करने के उनके प्रयास इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि समाज के सामने जब भी कोई चुनौती आती है तो चिकित्सा पेशेवर कैसे आगे आकर उससे निपटने में मदद करते हैं। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर 'पोस्ट' किए गए अलग-अलग संदेशों में कहा कि सरकार 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में काम कर रही है और देश के चिकित्सक बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने, चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान को आगे बढ़ाने, नवोन्मेष को अपनाने तथा सभी को सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में सीए के प्रयास ऐसा वातावरण बनाने में मदद करते हैं जिसमें उद्यम फल-फूल सकें और सभी के लिए अवसरों का विस्तार हो। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक 'पोस्ट' में कहा, ''हमारे समर्पित चिकित्सकों को चिकित्सक दिवस की शुभकामनाएं। उनकी कड़ी मेहनत, करुणा और प्रतिबद्धता भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ है। वे अक्सर अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अथक कार्य करते हैं जिसके कारण असंख्य लोग उनके आभारी हैं और उन पर भरोसा करते हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है जबकि स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। मोदी ने कहा, ''यह अभूतपूर्व वृद्धि चिकित्सक बनने के इच्छुक लोगों के लिए अधिक अवसर पैदा कर रही है, एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा कार्यबल तैयार कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा देश के हर कोने तक पहुंचे।'' मोदी ने पूरे सीए समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे भारत की आर्थिक यात्रा में लंबे समय से विश्वसनीय भागीदार रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और पेशेवर उत्कृष्टता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता के माध्यम से 'चार्टर्ड अकाउंटेंट' देश की वित्तीय प्रणालियों को मजबूत करते हैं, व्यवसायों को सहयोग देते हैं, उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं और निवेशकों में विश्वास पैदा करते हैं। मोदी ने कहा, ''उनकी विशेषज्ञता आर्थिक वृद्धि और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देती है।''
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नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे साइबर सुरक्षा को बढ़ावा दें। इसके लिए वे छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को 2.5 घंटे के 'साइबर हाइजीन सर्टिफिकेशन कोर्स' में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें और जागरूकता बढ़ाने वाली मासिक गतिविधियां आयोजित करने के लिए 'साइबर क्लब' बनाएं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ''यह पहल गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान के तहत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा 'साइबर हाइजीन' (सुरक्षित डिजिटल आदतों) को प्रोत्साहित करना है।'' उन्होंने कहा, ''यह इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि बच्चों द्वारा डिजिटल मंचों का बढ़ता उपयोग उन्हें ऑनलाइन जोखिमों-जैसे ग्रूमिंग (बहला-फुसलाकर शोषण), साइबर बुलिंग (ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न), ऑनलाइन उत्पीड़न और वित्तीय साइबर धोखाधड़ी- के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।'' बोर्ड ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे हर महीने के पहले बुधवार को 'साइबर जागरूकता दिवस' के तौर पर मनायें और इस दौरान वे क्विज, भाषण, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिताएं, शपथ लेने के कार्यक्रम, वाद-विवाद और जागरूकता सत्र जैसी गतिविधियां आयोजित करें। इसमें कहा गया कि स्कूल साइबर जागरूकता को सालाना कार्यक्रमों, अभिभावक-शिक्षक बैठकों और खास अभियानों में भी शामिल कर सकते हैं। अधिकारियों ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे छात्रों के बीच साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक शपथ बांटें और उनसे उस पर अपने माता-पिता के हस्ताक्षर करवाएं। यह प्रतिज्ञा सुरक्षित ऑनलाइन तौर-तरीकों, सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल और बुनियादी साइबर सुरक्षा आदतों पर केंद्रित है। आई4सी के निदेशक निशांत कुमार ने कहा, ''जागरूकता बचाव का हमारा सबसे मजबूत जरिया है। स्कूलों के जरिए छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचकर हम साइबर सुरक्षा का ऐसा माहौल बना रहे हैं जो परिवारों और समुदायों को उभरते हुए ऑनलाइन खतरों से बचाने में मदद कर सकता है।''
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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा आर्थिक सहयोग एवं निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फ्रांस की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को रवाना हुईं। इस दौरान वह उच्च स्तरीय बैठकों, आर्थिक संवाद और निवेशकों के साथ चर्चाओं में भाग लेंगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण आइक्स-एन-प्रोवेंस में होने वाला भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (ईएफडी) होगा। सीतारमण, फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त एवं औद्योगिक एवं ऊर्जा मंत्री रोलेंड लेस्क्यूर के साथ इसकी सह-अध्यक्षता करेंगी। ईएफडी के तहत दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान वित्त मंत्री कुछ चुनिंदा वैश्विक सीईओ (मुख्य कार्यपालक अधिकारियों) के साथ बैठकें करेंगी। प्रमुख व्यापारिक नेताओं के साथ गोलमेज बैठक में भाग लेंगी, जिसमें भारत की मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद, मौजूदा संरचनात्मक सुधार, बढ़ते निवेश अवसर और दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। वित्त मंत्री यूरोप के प्रमुख वार्षिक वैश्विक आर्थिक एवं सार्वजनिक नीति मंचों में से एक 'ले रेन्कोंत्रे इकॉनमिक्स डी आइक्स-एन-प्रोवेंस' में ''नए मध्यम वर्ग के विकास को कैसे बढ़ावा दें'' विषय पर चर्चा में भी भाग लेंगी। अपने कार्यक्रम के तहत वह इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर) परियोजना का भी दौरा करेंगी, जो दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में से एक है। इसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देश शामिल हैं और सहयोग कर रहे हैं। इसके अलावा वह कैम्पस साइबर का दौरा करेंगी, जो फ्रांस का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नवाचार, अनुसंधान एवं कौशल विकास केंद्र है। यहां साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवोन्मेषण बढ़ाने पर चर्चा होगी। वित्त मंत्री सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे द'जूर (पीएसीए) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनो म्यूजेलिएर से भी मुलाकात करेंगी। उनसे से वह निवेश, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। यात्रा के अंतिम दिन वित्त मंत्री फ्रांस में भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगी।
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नई दिल्ली। ‘डिजिटल इंडिया’ के 11 साल पूरे होने पर आज बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये पहल विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में इसने गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही देशवासियों के जीवन को आसान बनाया है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘डिजिटल इंडिया’ को लेकर कई पोस्ट किए। उन्होंने एक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आज ‘डिजिटल इंडिया’ पहल को शुरू हुए 11 साल पूरे हो रहे हैं। इस पहल ने गवर्नेंस को नए सिरे से परिभाषित किया है, नागरिकों को सशक्त बनाया है और सर्वांगीण विकास को गति दी है। इसने जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। आसान डिजिटल पेमेंट और लाभार्थियों तक पारदर्शिता के साथ सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) से लेकर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार तक, टेक्नोलॉजी ‘ईज ऑफ लिविंग’ को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।”पीएम मोदी ने इस पोस्ट में आगे कहा, “डिजिटल इंडिया ने नवाचार की लहर को भारत के हर हिस्से, खासकर गांवों और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक पहुंचाया है। देश के हर कोने से युवा उद्यमी, स्टार्टअप और इनोवेटर हमारे ग्रह के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों के समाधान तैयार कर रहे हैं। इस पहल ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, व्यापार और सार्वजनिक सेवा वितरण को मजबूत किया है, जिससे गवर्नेंस अधिक पारदर्शी, कुशल और सुलभ हो गई है।”उन्होंने कहा, “डिजिटल क्षेत्र में हमारी प्रगति ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती हुई तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे विकास और अवसरों के नए रास्ते भी खुलेंगे। हमारा ध्यान एक ऐसे भविष्य के निर्माण पर रहेगा जहां तकनीक मानवता की सेवा करे, हर नागरिक को सशक्त बनाए और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे।”एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “डिजिटल इंडिया के 11 सालों की सफलता से भारतवर्ष को दुनियाभर में एक नई पहचान मिली है। इससे इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को अपनाकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की देशवासियों की संकल्पशक्ति का पता चलता है।”उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर करते हुए लिखा, “विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवान्नरः। सोऽध्वनः पारमाप्नोति तद्विष्णोः परमं पदम्।” इसका अर्थ है, “वह मनुष्य जिसकी विवेकपूर्ण बुद्धि वैज्ञानिक सारथि के समान जागरूक हो और जिसका मन संयमित हो, वह जीवन-पथ की जटिलताओं को पार कर परम लक्ष्य तक पहुंच जाता है।”पीएम मोदी ने एक और पोस्ट किया, “डिजिटल इंडिया विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त नींव है। बीते 11 वर्षों में इसने गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही देशवासियों के जीवन को आसान बनाया है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार से लेकर डिजिटल ट्रांजैक्शन तक इस अभियान की अभूतपूर्व सफलता ने दुनियाभर का ध्यान भारत की ओर खींचा है। -
नई दिल्ली। ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम 2025’ एक जुलाई से पूरे ग्रामीण भारत में लागू हो गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कहा कि यह अधिनियम, जो हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-युक्त रोजगार की गारंटी देता है, ग्रामीण भारत को सशक्त बनाएगा। जानकारी के मुताबिक देशभर में इस नए ढांचे को लागू करने के लिए चालू वित्त वर्ष में 95,692 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
VB-G RAM G अधिनियम, बीस साल पुराने ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005’ की जगह लेगा। इस नए अधिनियम का उद्देश्य एक वित्तीय वर्ष में कानूनी रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करना है। रोजगार की इस बढ़ी हुई गारंटी का मकसद ग्रामीण विकास की गति को तेज करना, आय की बेहतर सुरक्षा प्रदान करना और ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाना है। यह अधिनियम समय पर, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से वेतन भुगतान पर ज़ोर देता है। नए अधिनियम में तय समय के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है। ‘विकसित भारत-GRAM G अधिनियम’ एक व्यापक कानूनी ढांचा है जिसे ग्रामीण रोजगार सृजन को 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप बनाने के लिए तैयार किया गया है।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025’ (VB-G RAM G) के लागू होने को एक “ऐतिहासिक दिन” बताया। आज से पूरे देश में इस नए ग्रामीण रोजगार और विकास ढांचे ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 की जगह ले ली है।केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि यह नया ढांचा पहले के रोजगार गारंटी कार्यक्रम की तुलना में एक बड़ा सुधार है।नई योजना के तहत रोजगार गारंटी के विस्तार और इसकी शुरुआत के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “आज एक ऐतिहासिक दिन है। कल MGNREGA का समापन हुआ। आज से MGNREGA से बेहतर एक योजना लागू हो गई है, जिसमें 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान है: VB-G RAM G।”रोजगार की बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण आजीविका को मजबूत करेगीइसे लागू करने के बारे में बात करते हुए, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक दिन के लिए भी काम से वंचित नहीं रहना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर नए ढांचे में सुचारू रूप से बदलाव सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंत्री ने कहा कि पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, कार्यान्वयन प्रणालियां पूरी तरह से तैयार हैं और चल रहे काम बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि 125 दिनों के वेतन-युक्त रोजगार की बढ़ी हुई गारंटी ग्रामीण आजीविका को मजबूत करेगी, टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियां बनाएगी और ‘विकसित भारत’ के विज़न को गति देगी।सभी राज्यों ने इसके लिए बजट का प्रावधानग्राम पंचायतों के माध्यम से वित्तीय आवंटन और विकेंद्रीकृत योजना पर जोर देते हुए उन्होंने आगे कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सभी राज्यों ने इसके लिए बजट का प्रावधान किया है और केंद्र सरकार ने इस साल VB-G RAM G के लिए ₹95,600 करोड़ से ज़्यादा की राशि आवंटित की है। ग्राम पंचायतें प्रभावी योजनाएं बनाएंगी; गांव के भाई-बहन मिलकर तय करेंगे कि उनके गांव में कौन से काम किए जाने हैं। विकसित भारत का रास्ता बनाने के लिए विकसित गांव बनाए जाएंगे।”नया अधिनियम लागू होने के साथ ही MGNREGA रद्दग्रामीण विकास मंत्रालय ने पहले जारी एक अधिसूचना में नए कानून के देशव्यापी कार्यान्वयन की पुष्टि की थी। इसके लागू होने के साथ ही MGNREGA को रद्द कर दिया गया है। सरकार ने इसे ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप “एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार और उत्पादकता-उन्मुख ग्रामीण बदलाव” की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव बताया है। केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए ₹95,600 करोड़ से ज्यादा आवंटित किए हैं।रिलीज में कहा गया है, “VB-G RAM G एक्ट के लागू होने के साथ ही, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 को उसी तारीख से रद्द कर दिया गया है। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव है और ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एकीकृत, भविष्य के लिए तैयार और उत्पादकता-उन्मुख ग्रामीण बदलाव के एक नए युग की शुरुआत करता है।” ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटीअधिनियम’ 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। यह अधिनियम 100 दिन की रोजगार गारंटी की जगह 125 दिन की गारंटी देता है। हालांकि, विपक्ष ने इस कानून की आलोचना की है क्योंकि इसमें योजना से महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया है और केंद्र व राज्यों के बीच फंड के 60:40 के हिस्से में बदलाव किया गया है। -
नई दिल्ली। श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर में सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। आज बुधवार को जम्मू में यात्रियों के लिए मौके पर ही पंजीकरण और आरएफआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। आगामी शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
जम्मू में मौके पर ही रजिस्ट्रेशन कराने और आरएफआईडी कार्ड के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री कतारों में खड़े नजर आए। अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह भी देखा गया। एक तीर्थयात्री ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे पहले बैच में मौका मिलेगा। मैं काफी समय से कोशिश कर रहा था।”जम्मू में श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा को लेकर की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं पिछली बार भी यात्रा पर गया था। इस बार भी यात्रा के लिए जा रहा हूं। यह व्यवस्थाएं बहुत अच्छी लग रही हैं।”तीसरे जत्थे में जाने वाले एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं तीसरी बार यात्रा के लिए जा रहा हूं। सारी सुविधाएं अच्छी हैं। हालांकि, रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी कार्ड के लिए थोड़ी परेशानी होती है। इसके बाद काफी सुकून मिल जाता है और विश्वास हो जाता है कि बाबा के दर्शन कर पाएंगे।”वहीं, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना होने से पहले श्रीनगर में यात्री ट्रांजिट कैंप में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। मैं वहां पहली बार जा रहा हूं।” एक महिला तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बाबा भोलेनाथ में आस्था लेकर आई हूं। उन्होंने हमें बुलाया है और वही दर्शन कराएंगे।”महिला ने बताया कि वह भी पहली बार अमरनाथ यात्रा के लिए आई हैं। उन्होंने प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हम बुधवार रात को ट्रांजिट कैंप पहुंचे थे। यहां व्यवस्थाएं अच्छी हैं। किसी भी चीज की कमी नहीं है।” गौरतलब हो कि अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू होगी और 28 अगस्त को खत्म होगी। पहलगाम रास्ते से मंदिर तक पहुंचने में लगभग चार दिन लगते हैं। बालटाल से जाने वाला रास्ता छोटा है, जहां दर्शन के बाद उसी दिन वापस लौटा जा सकता है। -
नई दिल्ली। तमिलनाडु राज्य के कृष्णगिरि ज़िले के होसुर में केलावरपल्ली बांध के पास दक्षिण पेन्नई नदी में लगातार जमा हो रहे जहरीले झाग ने कृष्णगिरि जिले के किसानों को चिंतित कर दिया है। किसान तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार से मांग कर रहे हैं कि वे मिलकर प्रदूषण के स्रोत की जांच करें और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं।
दरअसल, नदी में लगभग एक महीने से झाग दिखाई दे रहा है और कर्नाटक में हाल ही में हुई बारिश के बाद यह और बढ़ गया है, जिससे केलावरपल्ली बांध में पानी का बहाव भी बढ़ गया है। किसानों को डर है कि पानी की खराब होती गुणवत्ता का सिंचाई, खेती और नदी के पूरे इकोलॉजिकल स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। केलावरपल्ली बांध इस इलाके में हजारों एकड़ खेती की जमीन के लिए सिंचाई का एक अहम स्रोत है। इस जलाशय पर निर्भर किसानों ने चिंता जताई है कि लगातार प्रदूषण से फसल की खेती पर खतरा मंडरा सकता है और कमांड एरिया में खेती की लंबे समय तक चलने की क्षमता कम हो सकती है।वहीं, स्थानीय किसान संगठनों का मानना है कि यह प्रदूषण मुख्य रूप से साउथ पेन्नई नदी में ऊपर की तरफ (अपस्ट्रीम) बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज मिलने की वजह से है, खासकर कर्नाटक के शहरी इलाकों से। उन्होंने तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्यों में नदी के किनारे मौजूद मिलों समेत सभी इंडस्ट्रियल यूनिट्स की व्यापक जांच की भी मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इंडस्ट्री से निकलने वाला कचरा भी इस प्रदूषण की वजह है।किसान संगठनों के प्रतिनिधि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से मिलकर तुरंत कदम उठाने और दोनों राज्यों को शामिल करते हुए एक समन्वित कार्य योजना बनाने की मांग करेंगे। उन्होंने प्रदूषण के सही स्रोतों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और बिना ट्रीट किए गए कचरे को नदी में जाने से रोकने के उपाय लागू करने की मांग की है।जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदी के पानी की नियमित निगरानी हर महीने की जा रही है। शुरुआती नतीजों से सल्फेट और फॉस्फेट का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है, जो आमतौर पर केमिकल इंडस्ट्री के कचरे के बजाय सीवेज के प्रदूषण से जुड़े होते हैं। विभाग ने यह भी पाया है कि प्रभावित हिस्से में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे गिर गया है, जो पानी की बहुत खराब गुणवत्ता को दर्शाता है और इसमें मछली सहित जलीय जीवन का पनपना मुश्किल है।पानी के सैंपल लगातार लिए जा रहे हैं और क्वालिटी से जुड़े अलग-अलग पैमानों की बारीकी से जांच के लिए चेन्नई और पोलाची की लैब में भेजे जा रहे हैं। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी प्रदूषण के स्तर का पता लगाने के लिए स्वतंत्र रूप से सैंपल ले रहा है। किसानों ने अधिकारियों से जांच में तेजी लाने और प्रदूषण को रोकने के लिए लंबे समय तक चलने वाले उपाय लागू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण पेन्नई नदी की हालत लगातार बिगड़ती रही, तो इस इलाके में खेती, जैव-विविधता और लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को जनजातीय समाज के आत्मविश्वास, नेतृत्व और नीति निर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने वाला प्रमुख केंद्र बनना चाहिए तथा शिक्षा के माध्यम से जनजातीय समुदायों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर अनेक विशेष जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित ऐसे संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वनाधिकारों के क्षेत्र में भी जमीनी स्तर पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में जनजातीय युवाओं के सर्वांगीण विकास और क्षेत्र के समग्र उत्थान के लिए सार्थक प्रयास करेगा।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों में, ऐसी नवाचारी व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए, जिनसे वन उपज, हस्तशिल्प, मिलेट, औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिल सके। इससे जनजातीय समाज की आजीविका मजबूत होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जो उन्हें भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तेजी से बदलते दौर में स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नए कौशल विकसित करने पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ अपने परिवेश से सीखते हुए व्यावहारिक कौशल विकसित करने चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से अपने समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहते हुए समाज और देश के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित हो रहे भारत में सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान के लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय उत्तरी आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी हब’ का संचालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जनजातीय कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर अकादमिक और जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है, जो विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समावेशी, व्यावहारिक और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित शिक्षा के माध्यम से यह विश्वविद्यालय जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते हुए देश के समतापरक विकास में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अमित शाह ने कहा कि दोनों पहल नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ शासन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाएंगी।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार “Minimum Government, Maximum Governance” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जब नीयत साफ, नीति स्पष्ट और तकनीक को अपनाने की इच्छाशक्ति हो, तो शासन ईमानदार लोगों के लिए सरल और नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को मजबूत किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले एफसीआरए व्यवस्था फाइलों और जटिल प्रक्रियाओं में उलझी हुई थी तथा प्रभावी निगरानी का अभाव था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इस व्यवस्था को मजबूत किया और अब FCRA 2.0 पोर्टल के जरिए आवेदन, नवीनीकरण, वार्षिक विवरणी और अन्य सभी प्रमुख प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे कागजी कार्यवाही कम होगी, आवेदनों का तेजी से निस्तारण होगा और विदेशी अंशदान पर रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।अमित शाह ने कहा कि नई प्रणाली में भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। पोर्टल में ई-साइन आधारित प्रमाणीकरण, ओसीआर तकनीक, एनजीओ दर्पण, बैंकिंग प्रणाली और अन्य सरकारी डेटाबेस से एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि पूरा डेटा ‘मेघराज’ (गवर्नमेंट क्लाउड) पर सुरक्षित रहेगा, जिससे डेटा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि आने वाले महीनों में एफसीआरए मोबाइल ऐप, एआई आधारित चैटबॉट और बैंकों के लिए समर्पित ऑनलाइन डैशबोर्ड भी शुरू किया जाएगा।केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विदेशी अंशदान से जुड़े आवेदनों और दान के प्रवाह में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में कागजी प्रक्रिया कम करना और विदेशी अंशदान पर प्रभावी निगरानी राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एफसीआरए कानून के माध्यम से गलत उद्देश्यों से आने वाले विदेशी अंशदान पर और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।अमित शाह ने e-OCI कार्ड का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस नई व्यवस्था से 50 लाख से अधिक ओसीआई कार्डधारकों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि अब 20 वर्ष की आयु के बाद नया पासपोर्ट बनने पर ओसीआई बुकलेट दोबारा जारी कराने की आवश्यकता नहीं होगी। कार्डधारकों को केवल अपने नए पासपोर्ट का विवरण ऑनलाइन अपडेट करना होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल ओसीआई कार्ड से दस्तावेज खोने या क्षतिग्रस्त होने की समस्या भी समाप्त होगी और रियल टाइम सत्यापन की सुविधा उपलब्ध होगी।गृह मंत्रालय के अनुसार FCRA 2.0 पोर्टल लगभग 14,500 सक्रिय एफसीआरए संगठनों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाएगा। प्रतिवर्ष 15,000 से 20,000 आवेदन और करीब 17,000 वार्षिक विवरणियों के निस्तारण में यह पोर्टल अधिक प्रभावी साबित होगा। वहीं e-OCI कार्ड पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाकर वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराएगा। मंत्रालय के अनुसार दोनों पहल बेहतर सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और खादी एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने के उद्देश्य से खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) अधिनियम, 1956 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य अधिनियम को वर्तमान नीतिगत ढांचे के अनुरूप बनाना, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना तथा ग्रामीण उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।
सरकार के अनुसार संशोधन के जरिए केवीआईसी अधिनियम को समकालीन आर्थिक और ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य समावेशी और सतत ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, ग्रामीण उद्यमों को औपचारिक स्वरूप देना तथा घरेलू और वैश्विक बाजारों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना है।प्रस्तावित संशोधनों के तहत ‘ग्रामीण क्षेत्र’ की परिभाषा को विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित होगा और अधिक क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकेगा। सरकार ने प्रत्येक कारीगर या श्रमिक के लिए निर्धारित पूंजी निवेश की सीमा को भी बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम के तहत सूक्ष्म उद्यमों के लिए निर्धारित निवेश सीमा के अनुरूप किया जाएगा। इससे ग्राम उद्योगों को एमएसएमई क्षेत्र के विभिन्न लाभों तक पहुंच आसान होगी।संशोधनों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए ब्रांडिंग, निर्यात, नवाचार, मानकीकरण, डिजिटलीकरण और भौगोलिक संकेतक (जीआई) संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे देश और विदेश दोनों बाजारों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की पहचान और पहुंच मजबूत होगी। प्रस्ताव के तहत आयोग की संरचना को अधिक समावेशी बनाया जाएगा। इसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, केंद्र सरकार और महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान (एमजीआईआरआई) के प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार को नए ग्राम उद्योगों को अधिसूचित करने का अधिकार भी दिया जाएगा, ताकि उभरते आर्थिक अवसरों और नई तकनीकों को समय पर शामिल किया जा सके।सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय संशोधित प्रावधानों को केवीआईसी के क्षेत्रीय कार्यालयों, राज्य खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्डों (केवीआईबी), खादी संस्थानों, ग्राम उद्योग संस्थानों और उद्यमियों के मौजूदा नेटवर्क के माध्यम से लागू करेगा। अधिनियम लागू होने के बाद मंत्रालय कार्यशालाओं, सेमिनारों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए संशोधित प्रावधानों की जानकारी भी देगा।सरकार के अनुसार इन संशोधनों से खादी एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र को वित्त, प्रौद्योगिकी और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही नवाचार, मूल्यवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। इससे विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्रों में ग्राम उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी तथा समावेशी ग्रामीण आर्थिक विकास को गति मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधनों के क्रियान्वयन से जुड़ी जागरूकता और संचार गतिविधियां मंत्रालय के मौजूदा बजटीय प्रावधानों के भीतर ही संचालित की जाएंगी। इसके लिए कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रस्ताव किसी नई योजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि केवीआईसी अधिनियम, 1956 के वैधानिक ढांचे को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने का प्रयास है। -
नई दिल्ली। सहकारिता मंत्रालय ने अपनी स्थापना के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में सप्ताहभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की है। 29 जून से 6 जुलाई, 2026 तक आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मंत्रालय की उपलब्धियों, पहलों और भविष्य की कार्ययोजना को जन-जन तक पहुंचाना है। समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विजन के अनुरूप केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आयोजित किए जा रहे हैं। समारोहों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय महासंघों, राज्य सहकारिता विभागों, सहकारी बैंकों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी), प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) तथा स्थानीय सहकारी संस्थाओं की भागीदारी होगी। राष्ट्रीय, राज्य, जिला, शहरी और ग्राम स्तर पर विभिन्न थीम आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सप्ताहभर के कार्यक्रमों के लिए दिनवार विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें पैक्स का रूपांतरण, डिजिटल सहकारिता, वित्तीय साक्षरता, किसान कल्याण, डेयरी एवं मत्स्य सहकारिता, अन्न भंडारण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक आधारित सेवाएं, सहकार संवाद, जन-जागरूकता, हरित विकास, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी तथा सहकारी संस्थाओं की सफलता की कहानियों का प्रसार शामिल है।इन विषयों के तहत सहकारी शपथ समारोह, जागरूकता शिविर, सहकारी चौपाल, सामान्य निकाय बैठकें, पैक्स सदस्यता अभियान, सहकारी योजनाओं का प्रचार, ईआरपी और ई-पैक्स प्रदर्शन, डिजिटल भुगतान जागरूकता, केसीसी और डीबीटी शिविर, किसानों के लिए आउटरीच कार्यक्रम, सहकारी उत्पाद प्रदर्शनियां, युवा प्रतियोगिताएं, सेमिनार, पैनल चर्चा, स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण तथा उत्कृष्ट सहकारी संस्थाओं और सदस्यों का सम्मान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।समारोहों के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), फसल ऋण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद, बीज वितरण, अन्न भंडारण योजनाओं और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही डेयरी और मत्स्य सहकारिता को बढ़ावा देने के अलावा एआई टूल्स, ड्रोन, फिनटेक, माइक्रो-एटीएम, रुपे केसीसी कार्ड और अन्य डिजिटल सेवाओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार समारोहों के दौरान कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आउटरीच कार्यक्रम, युवा प्रतियोगिताएं, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के अभियान तथा लाभार्थियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। हरित सहकारिता के तहत वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और जलवायु अनुकूल कृषि को लेकर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।सप्ताहभर चलने वाले इन समारोहों का समापन 6 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के साथ होगा। इसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे। समापन समारोह में नीति संवाद, पोर्टल लॉन्च, सहकारी प्रदर्शनी, सहकारी उत्पादों का प्रदर्शन तथा पूरे सहकारी तंत्र की भागीदारी होगी। मंत्रालय के अनुसार इन समारोहों से सहकारी आंदोलन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी और इसे आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित तथा जन-केंद्रित विकास मॉडल के रूप में नई गति मिलेगी। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने मंगलवार को उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दे दी। अब वह 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर सीबीडीटी के चेयरमैन के रूप में कार्य करते रहेंगे।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, रवि अग्रवाल की पुनर्नियुक्ति केंद्र सरकार के पुनर्नियोजित अधिकारियों पर लागू सामान्य नियमों एवं शर्तों के तहत तथा भर्ती नियमों में आवश्यक छूट प्रदान करते हुए की गई है। इस फैसले से देश के सर्वोच्च प्रत्यक्ष कर प्रशासनिक निकाय सीबीडीटी के कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी।सरकारी आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने रवि अग्रवाल को छह महीने की अवधि के लिए पुनः सीबीडीटी का चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी प्रदान की है। यह नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी।भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 1988 बैच के अधिकारी रवि अग्रवाल को जून 2024 में नितिन गुप्ता के स्थान पर सीबीडीटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में प्रत्यक्ष कर प्रशासन में डिजिटलीकरण, कर अनुपालन को मजबूत करने और करदाताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत सीबीडीटी आयकर विभाग की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों के क्रियान्वयन, कर नीति निर्माण, कर संग्रह, कर अनुपालन को बढ़ावा देने तथा करदाता सेवाओं में सुधार के लिए जिम्मेदार है। बोर्ड में चेयरमैन के अलावा भारत सरकार के विशेष सचिव स्तर के अधिकतम छह सदस्य हो सकते हैं। रवि अग्रवाल की पुनर्नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब देश में प्रत्यक्ष कर संग्रह लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है। आयकर विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर सुधार और मजबूत कर अनुपालन का संकेत माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। 12 लाख सैनिकों वाली भारतीय थलसेना को नया सेना प्रमुख मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को सेना के प्रमुख (आर्मी चीफ) का पदभार संभाल लिया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक आधिकारिक समारोह में उन्होंने सेना की कमान जनरल धीरज सेठ को सौंपी। इससे पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद साउथ ब्लॉक के लॉन में उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर विदाई दी गई।
इस मौके पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “आज मैं भारतीय सेना की कमान जनरल धीरज सेठ को सौंप रहा हूं। वह एक सक्षम और अनुभवी सैन्य नेतृत्वकर्ता हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, उच्च पेशेवर मानकों और अटूट संकल्प के साथ नई ऊंचाइयों को छुएगी। मुझे भरोसा है कि भारतीय सेना अपनी परंपराओं से जुड़ी रहेगी, वर्तमान चुनौतियों के प्रति सतर्क रहेगी और भविष्य की हर परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहेगी।”जनरल धीरज सेठ इससे पहले वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का पदभार ग्रहण किया था। करीब 28 सालों के बाद भारतीय सेना को आर्मर्ड कोर से सेना प्रमुख मिला है। इससे पहले वर्ष 1997 में 20 लांसर्स के जनरल शंकर रॉय चौधरी सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे।जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (खड़कवासला) के पूर्व छात्र हैं। दिसंबर 1986 में उन्हें आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। लगभग 40 साल के अपने सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ नियुक्तियों पर कार्य किया है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट तथा जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स की कमान संभाली। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रमोट होने के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया।इसके बाद उन्होंने दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, जहां उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का सफल नेतृत्व किया। उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दी। पश्चिमी सीमा पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करना अपने आप में एक दुर्लभ उपलब्धि माना जाता है।ऑपरेशनल कमानों के अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर भी कार्य किया। इनमें जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र आर्मर्ड ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ ऑपरेशंस ऑफिसर, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण-पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) तथा डायरेक्टर जनरल, डिसिप्लिन, सेरेमोनियल एंड वेलफेयर जैसे महत्वपूर्ण दायित्व शामिल हैं।कैपेबिलिटी डेवलपमेंट और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। उन्होंने स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एंड कैपेबिलिटी डेवलपमेंट निदेशालय में कर्नल (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट–मैकेनाइज्ड फोर्सेज), ब्रिगेडियर (पर्सपेक्टिव प्लानिंग एंड एक्विजिशन) और अतिरिक्त महानिदेशक (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। भारतीय सेना की लांग टर्म इंटीग्रेटेड प्रस्पेक्टिव प्लान और आधुनिकीकरण रोडमैप तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर खास उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने सभी प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण कोर्स में बेहतरीन प्रदर्शन किया। जूनियर कमांड कोर्स में पहला स्थान प्राप्त किया और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में ‘बेस्ट ऑल-राउंड स्टूडेंट ऑफिसर’ का सम्मान हासिल किया। उन्होंने हायर कमांड कोर्स, नेशनल डिफेंस कॉलेज तथा पेरिस में कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है। भारतीय सेना में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (यूवाईएसएम) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से सम्मानित किया जा चुका है। - नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री एवं वितरण पर लगाए गए अस्थायी नियामक प्रतिबंध वापस लेने का निर्णय लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घोषणा की है कि 1 जुलाई, 2026 से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के खुदरा बिक्री केंद्रों पर मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) और हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) की बिक्री एवं वितरण पर लागू अस्थायी प्रतिबंध समाप्त कर दिए जाएंगे।मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। इससे खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया। इसके चलते कुछ औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं ने खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे जमाखोरी, कालाबाजारी और हेराफेरी की घटनाएं सामने आईं तथा ईंधन के समान वितरण पर असर पड़ा।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 12 जून, 2026 से अस्थायी नियामक उपाय लागू किए गए थे। इनके तहत खुदरा बिक्री केंद्रों पर प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर हाई स्पीड डीजल देने की सीमा तय की गई थी। साथ ही औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं को खुदरा पंपों के बजाय निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ईंधन खरीदने के निर्देश दिए गए थे। इन उपायों का उद्देश्य खुदरा उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी तथा जमाखोरी पर रोक लगाना था।सरकार ने देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के बाद पाया कि अब अस्थायी प्रतिबंधों की आवश्यकता नहीं है। इसलिए 12 जून, 2026 को जारी आदेश को 1 जुलाई, 2026 से वापस लेने का निर्णय लिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इन अस्थायी उपायों से पूरे देश में खुदरा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिली। अब प्रतिबंध हटाए जाने से यह संकेत मिलता है कि ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था सामान्य हो चुकी है और वितरण प्रणाली पूरी तरह बहाल हो गई है।
- नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ग्रीस के विकास मंत्री टाकिस थियोडोरिकाकोस के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें भारत और ग्रीस के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि बैठक में व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग, मजबूत सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ, ताकि दोनों देशों की साझा समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों देशों ने मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप्स और उभरती तकनीकों में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और ग्रीस के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए औद्योगिक सहयोग और सुदृढ़ सप्लाई चेन विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।केंद्रीय मंत्री इस समय एक उच्चस्तरीय भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ ग्रीस के दौरे पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ रणनीतिक आर्थिक सहयोग को नई गति देना है। दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल एथेंस स्टार्टअप बिजनेस इन्क्यूबेटर (टीएचईए) में आयोजित प्रेजेंटेशन और स्टार्टअप पिच कार्यक्रम में भी हिस्सा लेगा, जहां नवाचार आधारित साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। प्रतिनिधिमंडल एथेंस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसीसीआई) में भारतीय और ग्रीस के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विशेष गोलमेज बैठक करेगा। इन बैठकों में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटलीकरण, रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।ग्रीस दौरे से पहले पीयूष गोयल ने ब्रिटेन का तीन दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने लंदन में आयोजित ‘इंडिया-यूके: पार्टनर्स इन प्रोग्रेस बिजनेस प्लेनरी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) का समर्थन किया गया और इसे दोनों देशों के व्यापार एवं निवेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।आधिकारिक बयान के अनुसार, ब्रिटेन के बाद ग्रीस का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करना, नवाचार आधारित विकास को प्रोत्साहित करना और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की व्यापार एवं निवेश कूटनीति को नई मजबूती देना लक्ष्य है।



























