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- नयी दिल्ली। आईआईटी समेत देश के शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थानों का मानना है कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जल्द से जल्द कोविड-19 से बचाव के लिए टीका लगाने से परिसरों में उनकी सुरक्षित वापसी का रास्ता सुनिश्चित हो सकता है। अधिकतर उच्च शिक्षण संस्थान कोविड-19 महामारी के कारण मिले-जुले तरीके से शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, वहीं कुछ आईआईटी संस्थानों में इस समय परिसर में सीमित संख्या में छात्र रह रहे हैं। आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक टी जी सीताराम ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस की रोकथाम के लिहाज से सभी के लिए टीकाकरण अत्यधिक जरूरी और कारगर लगता है। आईआईटी गुवाहाटी में हम मानते हैं कि हमारे छात्रों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को टीका लगाया जाए ताकि मामले घटने के साथ परिसरों को सुगमता से पुन: खोला जाए और छात्र परिसर में सुरक्षित वापसी कर निर्बाध प्रशिक्षण प्राप्त करें।'' आईआईटी मद्रास के निदेशक भास्कर राममूर्ति ने भी इसी तरह की राय रखी और कहा, ‘‘अगर आवासीय परिसरों में रहने वाले छात्रों को टीका लगाया जाता है तो परिसर में छात्रावासों के फिर से खुलने और कक्षाओं के शुरू होने से संभावित जोखिम कम हो जाएगा।'' सूत्रों के अनुसार, कुछ आईआईटी के निदेशकों ने पिछले सप्ताह केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल के साथ बैठक में अनुरोध किया था कि छात्रों की परिसरों में सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए उनका तेजी से टीकाकरण किया जाए। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर), भोपाल के निदेशक शिव उमापति ने कहा, ‘‘आवासीय परिसर होने के नाते संस्थान उन छात्रों की वापसी का पक्षधर है जिन्होंने कम से कम टीके की पहली खुराक लगवा ली है। इस संबंध में संस्थान सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करेगा और टीकों की जरूरत के हिसाब से उपलब्धता के लिए सरकार के सहयोग की सराहना करेगा।'
- नयी दिल्ली । देश में अब तक कोविड-19 टीके की 20 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि देशभर में टीकाकरण अभियान का तीसरा चरण शुरू होने के बाद से अब तक 18-44 आयुवर्ग के कुल 1,28,74,546 लाभार्थियों को कोविड-19 टीका लगाया जा चुका है। इस आयुवर्ग के 9,42,796 लाभार्थियों को मंगलवार को कोविड-19 टीके की पहली खुराक दी गई। मंत्रालय ने कहा कि बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 18 से 44 आयु वर्ग के 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को टीके की पहली खुराक दी गई। मंत्रालय के अनुसार देश में अब तक टीके की कुल 20,04,94,991 खुराक दी जा चुकी हैं।मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 97,94,835 स्वास्थ्यकर्मी टीके की पहली खुराक जबकि 67,28,443 स्वास्थ्यकर्मी दूसरी खुराक भी ले चुके हैं। इसी तरह, अग्रिम मोर्चे पर तैनात 1,51,62,077 लाभार्थियों को पहली खुराक जबकि 83,77,270 दूसरी खुराक दी जा चुकी है। मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा 45 से 60 साल की आयु के 6,20,47,952 को पहली जबकि 1,00,24,157 लोगों को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। वहीं 60 साल से अधिक आयु के 5,71,19,900 लाभार्थी पहली जबकि 1,83,65,811 लाभार्थी दूसरी खुराक ले चुके हैं।-file photo
- नयी दिल्ली । केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि सरकार नौ देशों में स्थित अपने उच्चायोगों/दूतावासों में ‘वन स्टॉप सेंटर' खोलेगी। ‘वन स्टॉप सेंटर' का मकसद महिला विरोधी हिंसा से निपटना है। अधिकारी ने बताया, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और सिंगापुर में एक-एक ‘वन स्टॉप सेंटर' खेले जाएंगे। सऊदी अरब में ऐसे दो ‘वन स्टॉप सेंटर' खोले जाएंगे।'' इस अधिकारी के अनुसार, पूरे भारत में 300 ‘वन स्टॉप सेंटर' खोले जाएंगे।उन्होंने बताया कि विदेश में खोले जा रहे वन स्टॉप सेंटर को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की ओर से सहयोग दिया जाएगा।
- इंदौर (मध्यप्रदेश)। ब्लैक फंगस के मामलों में वृद्धि के बीच यहां हफ्ते भर में इस संक्रमण से पीडि़त चार मरीजों की जान बचाने के लिए सर्जनों को उनके ऊपरी जबड़े का आधा हिस्सा काट कर निकालना पड़ा है। शासकीय स्वशासी दंत चिकित्सा महाविद्यालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और मुख व चेहरे के सर्जन अमित रावत ने बताया, "हमारे महाविद्यालय के सर्जनों की टीम पिछले एक हफ्ते के दौरान ब्लैक फंगस के 50 मरीजों का ऑपरेशन कर चुकी है। संक्रमण की रोकथाम के लिए हमें इनमें से चार लोगों के ऊपरी जबड़े का आधा हिस्सा सर्जरी के जरिये काटकर निकालना पड़ा है।" रावत ने बताया, "अगर हम मरीज के मुख के भीतर ब्लैक फंगस के संक्रमण को उचित इलाज के जरिये समय रहते रोक देते हैं, तो यह उसकी आंख और मस्तिष्क तक नहीं पहुंच पाता जिससे उसकी आंख और जान, दोनों बच जाती है।" अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल स्थानीय अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 350 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं और इनमें इंदौर के अलावा राज्य के अन्य जिलों के मरीज भी शामिल हैं। ब्लैक फंगस का संक्रमण कोविड-19 से उबर रहे और स्वस्थ हो चुके लोगों में से कुछेक में मिल रहा है।-File photo
- शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शराब के नशे में धुत एक व्यक्ति ने 10 वर्षीय बेटे की मंगलवार को कथित रूप से पीट-पीट कर हत्या कर दी। यह घटना शिवपुरी शहर के देहात पुलिस थाना इलाके के महल सराय में हुई। देहात पुलिस थाना प्रभारी सुनील खेमरिया ने बताया कि महल सराय में निवास करने वाला आरोपी शौकीन आदिवासी शराब के नशे में धुत्त होकर आज सुबह करीब पांच बजे अपनी पत्नी से झगड़ रहा था। उन्होंने बताया कि झगड़े की आवाज सुनकर घर में सो रहे 10 वर्षीय बेटे राजीव की नींद खुल गई और उसने माता-पिता को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस बीच बचाव में आरोपी पिता शौकीन ने अपने बेटे राजीव को पीटा और जोर का धक्का मार दिया, जिससे उसका सिर दीवार में जा लगा और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। खेमरिया ने बताया कि पड़ोसियों ने इस मामले की सूचना देहात थाना पुलिस को दी। उन्होंने कहा कि घटना के बाद आरोपी शौकीन आदिवासी मौके से फरार हो गया। खेमरिया ने बताया कि पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरु कर दी है।
- नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने मंगलवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल अकादमी में निदेशक के एक पद के सृजन को मंजूरी दे दी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) में निदेशक पद के सृजन के गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बयान में कहा गया कि एनडीआरएफ अकादमी में निदेशक के पद के सृजन के साथ, संगठन की कमान और नियंत्रण एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को सौंपा जाएगा, जो तय उद्देश्यों के अनुसार संस्थान का संचालन कर सकता है। अकादमी एनडीआरएफ, राज्य आपदा मोचल बल (एसडीआरएफ) अन्य हितधारकों और दक्षेस व अन्य देशों की आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के 5000 से अधिक कर्मियों को वार्षिक कौशल आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। अकादमी हितधारकों की बदलती जरूरतों और आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विश्लेषण करते हुए उनमें सुधार भी करेगी। इससे विशेष रूप से एनडीआरएफ, एसडीआरएफ कर्मियों और अन्य हितधारकों को आपदा प्रतिक्रिया पर दिए जाने वाले प्रशिक्षण के स्तर में अत्यधिक सुधार किया जा सकेगा। एनडीआरएफ अकादमी की स्थापना वर्ष 2018 में नागपुर में राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा कॉलेज (एनसीडीसी) में विलय के साथ की गई थी। अकादमी का मुख्य परिसर निर्माणाधीन है, तब तक यह एनसीडीसी के मौजूदा परिसर से कार्य कर रहा है। अकादमी वर्तमान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान करती है और इसकी अवधारणा अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान के तौर पर विकसित होने के लिए की गई है यह दक्षेस और अन्य देशों के आपदा मोचन कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
- नोएडा। जिले के थाना सेक्टर 39 क्षेत्र के भट्ठा कॉलोनी में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने फांसी लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। वहीं खुर्जा के रहने वाले एक व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी। पुलिस प्रवक्ता अभिनेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि थाना सेक्टर 39 क्षेत्र के भट्ठा कॉलोनी में रहने वाले प्रदोष रंजन पांडव (39 वर्ष) ने बीती रात को अपने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रवक्ता के अनुसार, मृतक के पड़ोसियों ने पुलिस को बताया है कि वह एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर था। वह मूल रूप से उड़ीसा प्रांत का रहने वाला था। मौजूदा समय में वह अकेले रह रहा था। सिंह ने बताया कि खुर्जा के रहने वाले दिनेश शर्मा (पुत्र श्याम सुंदर शर्मा) ने सल्फास की गोली खा ली। गंभीर हालत में उनको ग्रेटर नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां पर उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि थाना नॉलेज पार्क पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
- मुंबई । जीएमआर समूह के परिचालन वाले दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पिछले एक माह के दौरान 100 कोविड-19 राहत उड़ानें उतरी हैं। इन उड़ानों के जरिये 36 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से 1,750 टन राहत सामग्री आई है। दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा लि. (डायल) ने मंगलवार को बयान में कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान हवाईअड्डे पर दुनियाभर से आने वाली चिकित्सा राहत का बेहतर तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। देश का सबसे व्यस्त हवाईअड्डा दक्षिण एशिया क्षेत्र का सबसे बड़ा कार्गो हब हवाईअड्डा है। इसके दो एकीकृत कार्गो टर्मिनल की सालाना क्षमता 18 लाख टन की है जिसे 23 लाख टन तक बढ़ाया जा सकता है। डायल ने कहा कि मंगलवार को हवाईअड्डे पर 100वीं राहत उड़ान उतरी। घरेलू हवाईअड्डों में यह संख्या सबसे अधिक है। बयान में कहा गया है कि 27 अप्रैल से 25 मई के दौरान दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर 100 कोविड-19 राहत उड़ानों के जरिये 1,750 टन राहत सामग्री आई। 100वीं उड़ान मंगलवार को रूस से आई। इसमें 10 टन चिकित्सा राहत सामग्री थी।
- नयी दिल्ली। सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फेसबुक ने कहा है कि वह परिचालनगत प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन के लिए काम कर रही है और उसका उद्देश्य आईटी नियमों के प्रावधानों का अनुपालन करना है। ये नियम 26 मई से प्रभाव में आएंगे। हालांकि, इसके साथ ही फेसबुक ने कहा कि वह सरकार के साथ उन मुद्दों पर विचार जारी रखेगी, जिनपर अधिक संपर्क रखने की जरूरत है। फेसबुक का मंगलवार को जारी यह बयान इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया कंपनियों को डिजिटल मंचों के लिए नए दिशानिर्देशों को पूरा करना है। इसकी समयसीमा 25 मई ही है। नए नियमों की घोषणा फरवरी में की गई थी। इनके तहत सोशल मीडिया मंचों मसलन ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हॉट्सएप को अतिरिक्त जांच-परख को पूरा करना होगा। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल संपर्क कर्मी तथा निवासी शिकायत निपटान अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि नियमों के अस्तित्व में आने के बाद पहले दिन से शिकायत के समाधान के लिए अधिकारी की नियुक्ति सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है। इन नियमों का अनुपालन नहीं करने पर सोशल मीडिया कंपनियां मध्यवर्ती का दर्जा गंवा देंगी। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को उनके द्वारा तीसरे पक्ष की सूचना और ब्योरे की ‘होस्टिंग' के लिए दायित्व से छूट मिलती है। फेसबुक के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को बयान में कहा, ‘‘हमारा मकसद आईटी नियमों के प्रावधानों का अनुपालन करना है। साथ ही हम उन मुद्दों पर सरकार से चर्चा जारी रखेंगे, जिनके लिए और बातचीत करने की जरूरत है। हम परिचालनगत प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन के लिए काम कर रहे हैं।'' प्रवक्ता ने कहा कि फेसबुक इस बात को लेकर प्रतिबद्ध है कि लोग हमारे मंच के जरिये मुक्त और सुरक्षित तरीके से अपने विचार व्यक्त कर सकें। हालांकि, कंपनी ने इस बारे में और ब्योरा नहीं दिया। सरकार ने 25 फरवरी को सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कड़े नियमनों की घोषणा की थी। इसके तहत कंपनियों को किसी भी सामग्री पर प्राधिकरण की ओर से चिंता जताए जाने पर उसे 36 घंटे में हटाना होगा। साथ ही एक मजबूत शिकायत निपटान प्रणाली स्थापित करनी होगी। शिकायत निपटान अधिकारी देश में ही बैठेगा।
- नयी दिल्ली। सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के कोविड-19 संबंधी कार्यसमूह के प्रमुख ने कहा है कि यह मानने के कोई कारण मौजूद नहीं हैं कि आने वाले हफ्तों, महीनों या कोविड-19 की अगली लहर में, बड़ी संख्या में बच्चे इससे प्रभावित होंगे। बहरहाल, उन्होंने बाल कोविड सेवाओं में सुधार के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पर जोर जरूर दिया। एनटीएजीआई के कोविड-19 संबंधी कार्यसमूह के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा ने कहा है कि मौजूदा आंकड़े भारत में वायरस के विभिन्न स्वरूपों द्वारा बच्चों या युवाओं को विशेषतौर पर प्रभावित करने संबंधी कोई पूर्वानुमान नहीं दर्शाते हैं। उन्होंने, ‘‘चूंकि संक्रमण के कुल मामले बढ़े हैं इसलिए दोनों आयुवर्ग के मरीज भी ज्यादा नजर आ रहे हैं।'' आईएनसीएलईएन न्यास के निदेशक अरोड़ा ने कहा कि इस वक्त तीसरी लहर के बारे में कुछ भी अनुमान लगाना संभव नहीं है। अरोड़ा ने कहा, ‘‘अपने देश में जो अनुभव मिला है और दुनिया के अन्य हिस्सों में जो देखने को मिला है उसके आधार पर यह मानने का कोई कारण नहीं है कि आगामी हफ्तों या महीनों में या कोरोना वायरस की अगली लहर में, बड़ी संख्या में बच्चे इससे प्रभावित होंगे।'' बहरहाल, उन्होंने बाल कोविड सेवाओं में सुधार की जरूरत पर और इन्हें शेष कोविड-19 प्रबंधन संरचना से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि नवजात, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष देखभाल संबंधी सुविधाओं की आवश्यकता है। दस वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल करने के लिए मां या फिर पिता की जरूरत होती है। इसी तरह संक्रमित गर्भवती महिलाओं का प्रसव समयपूर्व हो सकता है। जहां तक मैं जानता हूं... उपचार संबंधी प्रोटोकॉल तैयार हो चुके हैं और विभिन्न बाल चिकित्सा समूह एवं संगठन इनकी समीक्षा कर रहे हैं।'' अरोड़ा ने कहा कि इसी तरह से अस्पतालों में देखभाल से जुड़ी विशिष्ट जरूरतों पर भी काम किया जा रहा है। कोविड-19 कार्यसमूह के प्रमुख ने कहा, ‘‘देश में बच्चों का उपचार पहले से चल रहा है और ज्यादातर कोविड देखभाल केंद्रों में इससे संबंधित प्रावधान हैं लेकिन बाल कोविड सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है और इन्हें शेष कोविड-19 प्रबंधन संरचना से जोड़ा जाना चाहिए।'' गौरतलब है कि कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर में वयस्कों से ज्यादा बच्चे प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसके मद्देनजर तैयारी करने को कहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भी कहा है कि अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि कोविड-19 की संभावित आगामी लहर में बच्चों में ज्यादा संक्रमण फैलेगा या उनमें ज्यादा मामले आएंगे। उन्होंने संवाददाताओं से सोमवार को कहा, ‘‘अगर हम पहली एवं दूसरी लहर के आंकड़ों को देखते हैं तो यह काफी मिलता-जुलता है और यह दिखाता है कि बच्चे सामान्य तौर पर सुरक्षित हैं और अगर उनमें संक्रमण होता भी है तो उनमें मामूली संक्रमण आता है। और वायरस ज्यादा नहीं बदला है इसलिए इस तरह के संकेत नहीं हैं कि तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा प्रभावित होंगे।'' इस तरह की अवधारणा है कि वायरस शरीर में एसीई रिसेप्टर (एक तरह का एंजाइम जो आंत, गुर्दे, हृदय की कोशिकाओं से जुड़ा होता है) के माध्यम से प्रवेश करता है और वयस्कों की तुलना में बच्चों में यह रिसेप्टर कम होता है। उन्होंने कहा कि इसी अवधारणा के आधार पर बताया जा रहा है कि बच्चों में संक्रमण का स्तर कम क्यों है। गुलेरिया ने कहा, ‘‘जिन लोगों ने इस सिद्धांत को प्रचारित किया उनका कहना है कि अभी तक बच्चे प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए संभवत: तीसरी लहर में वे ज्यादा प्रभावित होंगे। लेकिन अभी तक साक्ष्य नहीं मिला है कि आगामी लहर में बच्चों में इसका गंभीर संक्रमण होगा या उनमें ज्यादा मामले आएंगे।'' इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने हाल में कहा था कि बच्चों में भी वयस्कों के जितना ही संक्रमण का खतरा प्रतीत होता है, लेकिन ‘‘तीसरी लहर में विशेष रूप से बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका नहीं है।'' देश के शीर्ष बाल अधिकार निकाय ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग' (एनसीपीसीआर) ने कहा है कि देश में कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर केंद्र और राज्य सरकारों को बच्चों एवं नवजातों को बचाने के लिए तैयारियां तेज करनी चाहिए।-file photo
- गोरखपुर । जिले के पीपीगंज थाना क्षेत्र के कौड़िया इलाके में रोहिन नदी से एक महिला और उसकी दो बेटियों के शव सोमवार को बरामद किए गए। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार रोहिन नदी से माया (40) और उसकी दो बेटियों शिवानी (13) और अर्पिता (9) के शव बरामद किये गये। शवों पर चोट के निशान नहीं है। पीपीगंज के थानाध्यक्ष एसपी सिंह ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट मिलने के बाद मौत की वजह पता चल सकेगी। file photo
- फतेहपुर (उप्र) ।उत्तर प्रदेश के फतेहपुर शहर कोतवाली क्षेत्र में आबू नगर पुलिस चौकी से चंद कदम की दूरी पर सोमवार देर रात एक युवक का शव मिला। युवक के परिजनों ने हत्या की आशंका जतायी है। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में बताया। शहर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) सत्येन्द्र सिंह ने बताया कि सोमवार रात करीब नौ बजे पनी मोहल्ला निवासी शाहिद उर्फ राजा (24) का शव आबू नगर पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर मिला। शव पर चोट के निशान पाये गये हैं। उन्होंने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसएचओ ने बताया कि युवक के परिजनों ने मामले में हत्या की आशंका जतायी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बिसंडा थाना क्षेत्र के ओरन कस्बे के नजदीक मंगलवार को दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आमने-सामने हुई भिड़ंत में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बबेरू क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) सियाराम ने बताया कि बिसंडा थाना क्षेत्र के ओरन कस्बे के नजदीक पेट्रोल पंप के पास मंगलवार दोपहर दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां आमने-सामने भिड़ गयीं। इस हादसे में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि सभी मृतक और घायल सहेवा गांव के रहने वाले हैं और एक कार्यक्रम से वापस अपने गांव लौट रहे थे। ट्रैक्टर-ट्रॉली में करीब 35 महिला-पुरुष सवार थे। सीओ ने बताया कि घायलों में पांच की हालत ज्यादा नाजुक है, सभी को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान करवाई जा रही है।
- विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश। सिलेरू नदी में दो नाव के पलटने से हुए हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। पुलिस ने बताया कि मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। ये ओडिशा के मालकानगिरि जिले के निवासी थे।दमकल एवं बचाव सेवा के कर्मियों ने पांच लापता लोगों की तलाश को लेकर अभियान शुरू किया है। ये लोग उन दोनों नौकाओं में सवार थे जो सुबह पलट गई। पीड़ित आदिवासी प्रवासी मजदूर हैं और हैदराबाद से ओडिशा के अपने गांव कोंदुगुदा लौट रहे थे। पांच नाव में सवार होकर करीब 35 लोगों ने एक साथ सिलेरू नदी में यात्रा शुरू की थी। इनमें से कुछ सुरक्षित अपने गंतव्य पहुंच गए। राज्य में कोविड-19 के मद्देनजर लगे कर्फ्यू के कारण वह लोग नदी के रास्ते जा रहे थे। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी है।
- भदोही। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में मंगलवार को सात माह की गर्भवती विवाहिता द्वारा फांसी लगाकर खुदकुशी करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी । पुलिस के अनुसार भदोही जिले के सुरियावां थाना इलाके में पति के साथ गोवा जाने की जिद पूरी न हो पाने से नाराज सात माह की गर्भवती नवविवाहिता ने कथित रूप से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।थाना प्रभारी प्रदीप कुमार ने बताया कि कनकपुर गांव निवासी राज कुमार बिंद की पत्नी शिवानी (20) ने सोमवार की आधी रात कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कुमार ने बताया कि राज कुमार बिन्द लखनऊ में काम करता था और वहां निशातगंज स्थित पुलिस लाइन में तैनात स्वीपर राजेश बाल्मीकि की लड़की शिवानी से दस महीने पहले दोनों ने यहां आकर शादी कर ली थी। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पहले राजकुमार को गोवा के रत्नागिरी में काम मिल जाने से वह अकेले जाने की बात पत्नी से बोला। थाना प्रभारी के मुताबिक सात माह की गर्भवती शिवानी साथ जाने की ज़िद कर रही थी। राजकुमार के जाने के बाद नाराज़ शिवानी ने बीती रात कमरे में फांसी लगा ली। राजकुमार के परिजनों की सूचना पर शिवानी के पिता राजेश वाल्मीकि ने यहाँ पहुंच कर पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी ने बताया शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
- नई दिल्ली। चक्रवाती तूफान यास के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ते हुए अगले कुछ घंटे में अति भीषण चक्रवाती तूफान बनने की आशंका है। तूफान कल सुबह तक ओडिसा और पश्चिम बंगाल के तटों के पास बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी भागों पर पहुंच जाएगा। तूफान के कल दोपहर अति भीषण चक्रवाती तूफान की क्षमता में ओडिसा और पश्चिम बंगाल के तटों पर पारादीप और सागर द्वीप के बीच से टकराने की संभावना है।तूफान से ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में राहत और बचाव टीमें तैनात। भारतीय मौसम विभाग ने आज कहा कि तूफान यास पिछले छह घंटे में बंगाल की खाड़ी के मध्य पूर्वी भागों से दस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ा है। यह पारादीप से 320 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, बालासोर से 430 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दिघा से 420 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और खेपूपाड़ा से 470 किलोमीटर दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
- नई दिल्ली। केन्द्र ने पिछले चार दिनों में राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के लिए फंगसरोधी औषधि एम्फोटेरिसिन बी की 43 हजार से अधिक शीशियां आबंटित की हैं। केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री सदानंद गौडा ने बताया है कि सरकार सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए फंगसरोधी औषधि के उत्पादन में तेजी ला रही है।उन्होंने बताया कि बढती मांग को देखते हुए राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों को एम्फोटेरिसिन बी की 19 हजार 420 शीशियों की आपूर्ति की गई है। इससे पहले केन्द्रीय रसायन मंत्री ने पिछले एक महीने में कोविड से निपटने के लिए रेमेडिसिवर की करीब एक करोड़ शीशियों का त्वरित और समय पर आबंटन सुनिश्चित किया था। देश में फंगस के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है और इसके कारण फंगसरोधी दवा की मांग बढ़ी है।
- नई दिल्ली। व्हाट्सऐप ने कहा है कि वह उसकी निजता नीति स्वीकार न करने वाले उपयोगकर्ताओं की सुविधाएं सीमित नहीं करेगी लेकिन उपयोगकर्ताओं को अपडेट के बारे में बार-बार ध्यान दिलाती रहेगी और नये डेटा सुरक्षा कानून के लागू होने तक "य़ह रुख बनाए रखेगी।"हाल ही में सरकार ने व्हाट्सऐप को उसकी नयी निजता नीति वापस लेने का निर्देश दिया था जिसके बाद अब कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि व्हाट्सऐप ने सरकार की चि_ी का जवाब दिया है और इस बात का "आश्वासन दिया है" कि उपयोगकर्ताओं की निजता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए दिए गए एक बयान में कहा कि कंपनी अपने मंच पर दी जाने वाली सुविधाओं को आने वाले हफ्तों में सीमित नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "इसके बजाए हम उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर अपडेट की याद दिलाते रहेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि उपयोगकर्ता किसी व्यापार (व्यापार खाते) से साथ बातचीत करना चाहें या न चाहें, यह सभी उपयोगकर्ताओं के पास उपलब्ध इस विकल्प को मजबूत करेगा। हम कम से कम आगामी निजी डेटा सुरक्षा कानून के प्रभाव में आने के साथ यह रुख बनाए रखेंगे।" प्रवक्ता ने एक बार फिर से दोहराया कि हाल के अपडेट से लोगों के व्यक्तिगत मैसेज की निजता नहीं बदलती। उन्होंने कहा, "इसका उद्देश्य इस बारे में अतिरिक्त सूचना उपलब्ध कराना है कि लोग अगर चाहें तो किस तरह से कारोबारी इकाइयों के साथ बातचीत कर सकते हैं।"
- मुंबई। नौसेना के जहाज आईएनएस मकर और आईएनएस तरासा ने नौका वरप्रदा पर सवार रहे लापता लोगों का पता लगाने के लिए सोमवार को मुंबई तट से 35 समुद्री मील की दूरी पर पानी के भीतर विशेष गोताखोरी अभियान चलाया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अरब सागर में चक्रवात ताउते के प्रभाव से यह नौका बह गयी थी।नौसेना के प्रवक्ता ने बताया, '' नौसेना की पश्चिमी कमान के गोतोखोरों के विशेष दल ने आज नौका वरप्रदा के मलबे के आसपास शवों की तलाश के लिए गोताखारी अभियान चलाया। यह अभियान आईएनएस मकर और आईएनएस तरासा के जरिए मुंबई हार्बर से 35 समुद्री मील की दूरी और 32 मीटर की गहराई में शून्य दृश्यता की परिस्थितियों में चलाया गया।'' उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान विशेष गोताखोरी उपकरणों और पानी के अंदर तलाशी के लिए भी खास तरह के उपकरणों की मदद ली गई। प्रवक्ता ने कहा, '' समुद्र की गहराई में कोई शव बरामद नहीं हुआ।''इससे पहले दिन में, नौसेना के एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र और गुजरात के तटों से 16 और शवों के मिलने के साथ ही समुद्र में हादसे के शिकार हुए बजरा पी305 और खींचने वाली एक नौका के सभी 274 कर्मियों का पता चल गया है। चक्रवात ताउते के प्रभाव से बजरा पी305 समुद्र में डूब गई थी और नौका वरप्रदा तट से दूर चली गयी थी।नौसेना के प्रवक्ता ने बताया, ''17 मई को कुल 274 (बजरा पी305 से 261 और नौका वरप्रदा से 13) कर्मियों के लापता होने की सूचना मिली थी। पी305 से 186 और वरप्रदा से दो लोगों को समुद्र से सुरक्षित निकाल लिया गया जबकि भारतीय नौसेना और तटरक्षक के जहाजों ने 70 शवों को समुद्र से बाहर निकाला।'' उन्होंने बताया, ''महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में तट से आठ शव मिले और अन्य आठ शव गुजरात में वलसाड के निकट तट पर मिले।'' प्रवक्ता ने बताया कि इस तरह से सभी 274 (बजरा पी305 से 261 कर्मी और नौका वरप्रदा से 13 कर्मी) लोगों का पता चल गया है। उन्होंने कहा कि शवों की पहचान होने के बाद अंतिम पुष्टि की जायेगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बचावकर्मियों ने रविवार तक जो 70 शव बरामद किये, समझा जाता है कि वे पी305 के कर्मियों के हैं। तटों पर बहकर आये 16 शवों के मिलने से हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 86 हो सकती है। लेकिन अब तक आधिकारिक मृतक संख्या 70 ही है। नौसेना के खोजी पोत आईएनएस मकर ने शनिवार को पी305 के मलबे का पता लगाया था। नौसेना ने खोज एवं बचाव अभियान में तेजी के लिए विशेष गोताखोरों का एक दल (एसएआर) भी नियुक्त किया था।एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पीडि़तों के रिश्तेदार शवों के साथ मिली चीजों या प्रतीकों जैसे कि कपड़े, पहचान पत्र, कोई चोट का निशान, जन्म का निशान और टैटू की मदद से उनकी शिनाख्त करने का प्रयास कर रहे हैं। अगर शवों की पहचान नहीं हो पाती तो उनकी डीएनए जांच की जायेगी। बजरा गेल कंस्ट्रक्टर और सपोर्ट स्टेशन 3 (एसएस-3) तथा ड्रिल शिप सागर भूषण पर मौजूद सभी 440 लोगों को हाल ही में सफलतापूर्वक सुरक्षित तट पर ले आया गया।
- नई दिल्ली। योग गुरु रामदेव ने एलोपैथिक दवाओं पर अपने हालिया बयान को वापस लेने के लिए मजबूर किए जाने के बाद सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से 25 सवाल पूछे। रामदेव ने आईएमए से जानना चाहा कि क्या एलोपैथी उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से स्थायी राहत देती है? अपने ट्विटर खाते पर खुला पत्र जारी करते हुए रामदेव ने आईएमए से उनके 25 सवालों का जवाब देने को कहा।आईएमए ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो पर आपत्ति जताई थी जिसमें रामदेव ने दावा किया है कि एलोपैथी 'बकवास विज्ञान' है और भारत के औषधि महानियंत्रक द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूर की गई रेमडेसिविर, फेवीफ्लू तथा ऐसी अन्य दवाएं कोविड-19 मरीजों का इलाज करने में असफल रही हैं। रामदेव ने यह भी पूछा कि क्या दवा उद्योग के पास थायराइड, गठिया, अस्थमा और कोलाइटिस जैसी बीमारियों का स्थायी उपचार उपलब्ध है? उन्होंने पूछा कि क्या एलोपैथी में फैटी लीवर (बढ़ा हुआ यकृत) और लीवर सिरोसिस की दवाएं हैं? उन्होंने सवाल किया, ''जिस प्रकार आपने टीबी और चेचक का इलाज ढूंढ लिया है, उसी तरह लीवर की बीमारियों का भी इलाज ढूंढें । आखिरकार , एलोपैथी अब 200 साल पुरानी है।''योग गुरु ने यह भी जानना चाहा कि क्या इस चिकित्सा पद्धति में दिल की रुकावट संबंधी परेशानियों का कोई गैर सर्जरी उपचार उपलब्ध है? उन्होंने पूछा, ''कोलेस्ट्रॉल का क्या इलाज है?'' उन्होंने सवाल किया, 'क्या फार्मा उद्योग के पास माइग्रेन का इलाज है?'' योग गुरु ने तमाम बीमारियों जैसे पार्किंसन का नाम गिनाया और जानना चाहा कि क्या एलोपैथी बांझपन का बिना किसी दर्द के दलाज कर सकती है, क्या उसके पास बढ़ती उम्र को रोकने और हेमोग्लोबिन को बढ़ाने का कोई उपाय है। उन्होंने टिप्पणी की, ''अगर एलोपैथी इतना ही अच्छा है और सर्वगुण संपन्न है तो डॉक्टरों को बीमार नहीं होना चाहिए।'' केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एलोपैथी के बारे में दिये गए योग गुरु रामदेव के बयान को रविवार को ''बेहद दुर्भाग्यपूर्ण'' करार देते हुए उन्हें इसे वापस लेने को कहा था, जिसके बाद रामदेव ने बयान वापस ले लिया था।
- नयी दिल्ली भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) के अनुसंधानकर्ताओं ने मिजोरम और पड़ोसी देश म्यांमा के कुछ क्षेत्रों में अफ्रीकन वायलेट परिवार से जुड़े पौधे की नयी प्रजाति की खोज की है। टीम के अनुसार, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैवविविधता का अभी तक पूरी तरह अध्ययन नहीं किया गया है और पौधों की ऐसी तमाम प्रजातियां हैं, जिनकी अभी तक खोज नहीं हुई है। इस नयी प्रजाति के पौधे की खोज के बारे में प्रतिष्ठित पत्रिका सिस्टमैटिक बॉटनी में जानकारी प्रकाशित हुई है। इस पत्रिका का प्रकाशन अमेरिकन सोसायटी ऑफ प्लांट टैक्सोनॉमिस्ट द्वारा किया जाता है। आईआईएसईआर भोपाल के बायोलॉजिकल साइंस विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर विनीता गौड़ा ने बताया, ‘‘जैवविविधता वाले दो हॉटस्पॉट भारत-बर्मा हॉटस्पॉट और पूर्वी हिमालय के कारण पूर्वोत्तर भारत में पौधों की प्रजातियों की विविधता बहुत ज्यादा और अनोखी है।'' यह नयी प्रजाति ‘डिडिमोकार्पस विकिफंकी' फिलहाल मिजोरम में सिर्फ तीन जगहों पर मिली है और इसे लुप्त प्राय प्रजाति माना जा रहा है। यह पेड़ों पर उगने वाले पौधों की प्रजाति है और मानसून में इसमें हल्के गुलाबी रंग के फूल आते हैं। प्रजाति का नाम अमेरिका के स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूट के प्रतिष्ठित वनस्पति विज्ञानी दिवंगत विकी एन फंक के नाम पर रखा गया है।
- इंदौर। कोविड-19 से उबरे लोगों में ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) और खून का थक्का जमने सरीखे रोगों की त्वरित पहचान कर इनकी रोकथाम के लिए यहां देखभाल केंद्र तैयार किया गया है। महामारी को लेकर राज्य सरकार की गठित सलाहकार समिति के एक सदस्य ने सोमवार को यह जानकारी दी। कोविड-19 सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. निशांत खरे ने यहां संवाददाताओं को बताया कि खंडवा रोड पर चलाए जा रहे रहे मां अहिल्या कोविड देखभाल केंद्र के साथ ही "पोस्ट कोविड केयर सेंटर" (कोविड-19 से उबरे लोगों की देखभाल की सुविधा वाला केंद्र) तैयार किया गया है। उन्होंने बताया, "इस केंद्र में शुरुआत में हर रोज ऐसे 100 लोगों के स्वास्थ्य की नि:शुल्क जांच की जाएगी जो महामारी से उबर चुके हैं। अगर जांच में उनमें ब्लैक फंगस, खून का थक्का जमने और मधुमेह जैसे रोगों के संकेत मिलते हैं, तो उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा।
- नयी दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नये निदेशक के चयन के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री के अलावा समिति के दो अन्य सदस्य लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और भारत के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमन्ना भी उपस्थित थे। यह बैठक प्रधानमंत्री आवास पर हुई। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवारत 1984, 1985, 1986, और 1987 बैच के वरिष्ठतम अधिकारी इस पद के लिए उम्मीदवार की दौड़ में हैं। वर्तमान में 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक प्रवीण सिन्हा सीबीआई निदेशक का प्रभार संभाल रहे हैं। सिन्हा को यह प्रभार ऋषि कुमार शुक्ला के सेवानिवृत्त होने के बाद सौंपा गया था। वह दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फरवरी में सेवानिवृत्त हुए थे।
- नयी दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि इस तरह के कोई संकेत नहीं हैं कि कोविड-19 की तीसरी लहर में बच्चे बुरी तरह या बहुत अधिक प्रभावित होंगे। बच्चों पर तीसरी लहर के संभावित प्रभाव पर एक सवाल के जवाब में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि कोविड-19 की आगामी लहर में बच्चों में काफी संक्रमण फैलेगा या उनमें ज्यादा मामले आएंगे। उन्होंने कहा, पहले एवं दूसरे चरण के आंकड़ों से पता चलता है कि बच्चे सामान्य तौर पर कोविड-19 से सुरक्षित हैं और अगर उनमें संक्रमण हो भी रहा है तो यह मामूली है।'' बहरहाल उन्होंने कहा कि शिक्षा, तनाव और मानसिक मुद्दों, स्मार्टफोन पर निर्भरता/लत और शिक्षा में बाधा के चलते महामारी के दौरान बच्चों पर असर पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है।उन्होंने कहा, अगर हम पहले एवं दूसरे चरण के आंकड़ों को देखते हैं तो यह काफी मिलता-जुलता है और यह दिखाता है कि बच्चे सामान्य तौर पर सुरक्षित हैं और अगर उनमें संक्रमण होता भी है तो उनमें मामूली संक्रमण आता है। और वायरस बदला नहीं है इसलिए इस तरह के संकेत नहीं हैं कि तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा प्रभावित होंगे।'' और इस तरह की संकल्पना है कि वायरस शरीर में एसीई रिसेप्टर (एक तरह का इंजाइम जो आंत, किडनी, हृदय की कोशिकाओं से जुड़ा होता है) के माध्यम से प्रवेश करता है और वयस्कों की तुलना में बच्चों में यह रिसेप्टर कम होता है। गुलेरिया ने कहा, ‘‘जिन लोगों ने इस सिद्धांत को प्रचारित किया उनका कहना है कि अभी तक बच्चे प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए संभवत: तीसरी लहर में वे ज्यादा प्रभावित होंगे। लेकिन अभी तक साक्ष्य नहीं मिला है कि आगामी लहर में बच्चों में इसका गंभीर संक्रमण होगा या उनमें ज्यादा मामले आएंगे।'' यह टिप्पणी उन विशेषज्ञों की राय के परिप्रेक्ष्य में आई है जिन्होंने चेतावनी दी है कि तीसरी लहर में वयस्कों की तुलना में बच्चे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं और इसकी तैयारियां करने की जरूरत है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने हाल में कहा था कि बच्चों में भी वयस्कों के जितना ही संक्रमण का खतरा प्रतीत होता है, लेकिन ‘‘तीसरी लहर में विशेष रूप से बच्चों के प्रभावित होने की संभावना नहीं है।'' देश के शीर्ष बाल अधिकार निकाय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कहा है कि देश में कोविड-19 की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर केंद्र और राज्य सरकारों को बच्चों एवं नवजातों को बचाने के लिए तैयारियां तेज करनी चाहिए।
- नयी दिल्ली । बुधवार को पूर्ण चंद्रग्रहण होगा लेकिन पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों और ओडिशा के तटीय इलाकों तथा अंडमान और निकोबार द्वीप से यह थोड़ी देर के लिये ही नजर आएगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक ग्रहण दक्षिण अमेरिका, उत्तर अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर तथा हिंद महासागर में नजर आएगा। आईएमडी ने कहा, “भारत में पूर्वोत्तर के हिस्सों (सिक्किम को छोड़कर), पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, ओडिशा के कुछ तटीय इलाकों और अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह में चंद्रोदय के ठीक बाद ग्रहण के आंशिक चरण का समापन कुछ देर के लिये नजर आएगा।” ग्रहण का आंशिक चरण अपराह्न सवा तीन बजे शुरू होगा और शाम छह बजकर 23 मिनट पर खत्म होगा जबकि पूर्ण चरण शाम चार बजकर 39 मिनट पर शुरू होकर शाम चार बजकर 58 मिनट पर खत्म होगा। विभाग के मुताबिक पोर्ट ब्लेयर से ग्रहण को शाम पांच बजकर 38 मिनट से 45 मिनट तक के लिये देखा जा सकता है जो भारत में ग्रहण का सर्वाधिक समय होगा। यह पुरी और मालदा से भी शाम 6 बजकर 21 मिनट से देखा जा सकता है, लेकिन यहां नजारा सिर्फ दो मिनट के लिये दिखेगा। भारत में अगला चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को दिखेगा। वो एक आंशिक चंद्रग्रहण होगा। चंद्रोदय के ठीक बाद अरुणाचल प्रदेश और असम के सुदूर पूर्वोत्तर हिस्सों में बेहद कम समय के लिये आंशिक चरण नजर आएगा। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है और जब तीनों एक सीध में होते हैं।-File photo












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