विदेशी कर्ज जून तिमाही में बढ़कर 778.2 अरब डॉलर पर: आरबीआई
मुंबई. भारत का बाह्य यानी विदेशी कर्ज मार्च तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में 15.4 अरब डॉलर बढ़कर 778.2 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बुधवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। हालांकि, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में बाह्य ऋण जून, 2026 के अंत में घटकर 20.8 प्रतिशत रहा, जो 31 मार्च, 2026 को 20.9 प्रतिशत था। आरबीआई ने कहा, ''येन और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से मूल्यांकन लाभ 90 करोड़ डॉलर रहा। मूल्यांकन प्रभाव को हटाने पर जून, 2026 के अंत में बाह्य ऋण में 15.4 अरब डॉलर के बजाय 16.4 अरब डॉलर की वृद्धि होती।'' जून तिमाही में एक साल से अधिक की मूल परिपक्वता अवधि वाला दीर्घकालिक ऋण 624.7 अरब डॉलर रहा। यह मार्च, 2026 के मुकाबले 11.2 अरब डॉलर अधिक है। वहीं, कुल बाह्य ऋण में एक साल तक की मूल परिपक्वता अवधि वाले अल्पकालिक ऋण की हिस्सेदारी जून, 2026 के अंत में बढ़कर 19.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही के अंत में 19.6 प्रतिशत थी। इसी तरह, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में अल्पकालिक ऋण का अनुपात जून, 2026 के अंत में बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया, जो मार्च, 2026 के अंत में 21.6 प्रतिशत था। आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में ऋण भारत के बाह्य ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा रहा। जून, 2026 के अंत में इसकी हिस्सेदारी 54.8 प्रतिशत थी। इसके बाद भारतीय रुपये में ऋण की हिस्सेदारी 29.8 प्रतिशत, येन 6.9 प्रतिशत, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.1 प्रतिशत और यूरो की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत रही। केंद्रीय बैंक ने कहा, ''जून, 2026 के अंत में सरकार और गैर-सरकारी, दोनों क्षेत्रों का बकाया ऋण मार्च, 2026 के मुकाबले बढ़ गया।'' विदेशी ऋण में कर्ज सबसे बड़ा घटक रहा, जिसकी हिस्सेदारी 34.3 प्रतिशत थी। इसके बाद मुद्रा एवं जमा (22.2 प्रतिशत), व्यापार ऋण एवं अग्रिम (19.1 प्रतिशत) और ऋण प्रतिभूतियों (16.5 प्रतिशत) का स्थान रहा। मूलधन और ब्याज भुगतान जून, 2026 के अंत में चालू प्राप्तियों का 5.6 प्रतिशत रहा। मार्च, 2026 में भी यह अनुपात इतना ही था।




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