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छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग द्वारा आयोजित महानाट्य ‘जाणता राजा’ के दूसरे दिन राष्ट्रभावना और सामाजिक एकता का संदेश

"स्वराज जय हो" के उद्घोष से गूंजा शहर
बिलासपुर
/हिंदवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, पराक्रम और सुशासन पर आधारित विश्व-प्रसिद्ध ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ के द्वितीय दिवस का आयोजन अत्यंत भावनात्मक, गरिमामय एवं ऐतिहासिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग की सहभागिता रही। कार्यक्रम की शुरुआत महागणपति जी की विधिवत आरती से हुई। इसके पश्चात पुलवामा में वीरगति को प्राप्त भारतीय सेना के अमर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा उपस्थित जनसमूह ने मौन धारण कर उन्हें नमन किया गया ।
छत्रपति शिवाजी महाराज के शासन-दर्शन, प्रजा-केंद्रित सोच, सामाजिक एकता, न्याय एवं राष्ट्रभावना को रेखांकित किया। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन यह सिखाता है कि एक राजा का कर्तव्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि प्रजा की सेवा करना होता है ।  महानाट्य ने अपने प्रभावशाली संवादों, भव्य मंच सज्जा, लोकगीतों, भजनों और जीवंत दृश्यों के माध्यम से पूरे तीन घंटे तक दर्शकों को बांधे रखा। मंचन के दौरान राष्ट्रवाद, रामराज्य की अवधारणा, स्वराज और न्याय का संदेश इतनी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत हुआ कि दर्शक-दीर्घा बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी।
सुशांत शुक्ला (विधायक - बेलतरा) ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज के पराक्रम और शौर्य को भारतीय शिक्षा के पाठ्यक्रम में वह स्थान मिलना चाहिए था, जिसके वे हकदार थे। दुर्भाग्यवश उनके शौर्य को लंबे समय तक कम करके दिखाया गया, लेकिन ‘जाणता राजा’ ने आज उनके पराक्रम को जीवित कर दिया है।”
नारायण चंदेल (पूर्व नेता प्रतिपक्ष छत्तीसगढ़ शासन) ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज ने यह स्पष्ट किया कि एक राजा का कर्तव्य क्या होता है और उसे किस प्रकार अपनी प्रजा के हित में कार्य करना चाहिए। ‘जाणता राजा’ महानाट्य उसी जनकल्याणकारी शासन और सामाजिक एकता की भावना को जीवंत करता है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।”
 विश्वविजय सिंह तोमर (अध्यक्ष - छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग) ने कहा कि “‘जाणता राजा’ केवल नाट्य मंचन नहीं, बल्कि समाज की चेतना को जागृत करने वाला एक सांस्कृतिक आंदोलन है। शिवाजी महाराज के स्वराज, न्याय और जनकल्याण के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। हमारा उद्देश्य है कि समाज का हर वर्ग इस विचारधारा से जुड़े।” यह महानाट्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी चेतना का अभियान है। जब समाज जागृत होगा, तभी सशक्त भारत का निर्माण होगा। युवा शक्ति को शिवाजी के विचारों से जोड़ना ही इस आयोजन का उद्देश्य है।”
पूजा विधानी (महापौर - बिलासपुर) ने कहा कि “बिलासपुर के लिए यह गर्व का विषय है कि ‘जाणता राजा’ जैसा विश्व-प्रसिद्ध महानाट्य यहाँ मंचित हो रहा है। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव को सशक्त करता है।”
हर्षिता पांडेय (पूर्व अध्यक्ष - राज्य महिला आयोग) ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन नारी सम्मान, न्याय और साहस का प्रतीक है। ‘जाणता राजा’ समाज को यह संदेश देता है कि सशक्त और न्यायपूर्ण समाज की नींव सम्मान और समरसता पर टिकी होती है।”
दीपक सिंह ने कहा कि “‘जाणता राजा’ ने यह सिद्ध किया है कि जब इतिहास को सही दृष्टि और भावना के साथ प्रस्तुत किया जाता है, तो वह समाज को दिशा देता है। मैं बिलासपुर की जनता से आग्रह करता हूँ कि वे सपरिवार इस ऐतिहासिक मंचन को देखें।”
   महानाट्य ने अपने प्रभावशाली संवादों, भव्य मंच-सज्जा, लोकगीतों और जीवंत दृश्यों से पूरे तीन घंटे तक दर्शकों को बांधे रखा। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने जानकारी दी कि इसका अंतिम मंचन 15 फरवरी को होगा तथा आम जनता से सपरिवार सहभागिता की अपील की गई।कार्यक्रम में राजकुमार सचदेव, गणेश साहू, दीपक सिंह, डॉ प्रमोद तिवारी, प्रफुल्ल शर्मा, हरवंश शुक्ला, महेंद्र जैन, सुनील चौहान, नकुल सिंह, विश्वास जलताड़े, सौरभ वर्तक, बबलू कश्यप भी उपस्थित हुए

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