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 सौर सुजला योजना से किसान हो रहे आर्थिक रूप से सशक्त

- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
- सौर सुजला योजना के तहत स्थापित सोलर पंपों में किया गया आवश्यक सुधार कार्य
राजनांदगांव  । सौर सुजला योजना अंतर्गत कृषकों के खेतों में कृषि सिंचाई हेतु सोलर पंप की स्थापना की जा रही है। इस योजना के तहत किसानों को विद्युत हेतु बिजली बिल का भुगतान नहीं करना पड़ता है। जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है और किसान आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहे हैं। सोलर पंप के उपयोग से राज्य में कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भू-जल के संरक्षण एवं संवर्धन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिल रही है। सौर सुजला योजना का मुख्य उद्देश्य कृषकों की सिंचाई आवश्यकता हेतु सोलर सिंचाई पंपों की स्थापना करना है।
सौर सुजला योजना के तहत विभिन्न कारणों से कृषकों के खेतों में स्थापित सोलर पंपों अकार्यशील है, ऐसे सोलर पंपों को संबंधित स्थापनाकर्ता इकाई द्वारा सुधार कार्य नहीं करने पर क्रेडा प्रधान कार्यालय रायपुर द्वारा इकाई की जमा सुरक्षानिधि राशि से पंप सुधार हेतु स्वीकृति प्रदान की गई थी। ऐसे अकार्यशील सोलर पंपों को आवश्यकता अनुरूप सुधार कार्य कर कार्यशील किया गया है। जिसके तहत छुरिया विकासखंड के ग्राम लाममेटा के कृषक श्री नंदूलाल साहू को नया कन्ट्रोलर एवं ग्राम कल्लूटोला के कृषक मंशाराम को नया पैनल तथा ग्राम आयाबांधा के कृषक श्री रामप्रसाद को नया पंप प्रदान किया गया है। डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम बिजेपार के कृषक श्री रोशन लाल को नया पंप, ग्राम पैरी के कृषक श्रीमती तेजस्वनी बाई को नया कन्ट्रोलर एवं पैनल स्थापित कर सोलर पंप स्थापित किया गया है। योजना अंतर्गत हितग्राही का चयन कृषि विभाग द्वारा किया जाता है। पंप की क्षमता तथा हितग्राहियों के संवर्ग के अनुसार हितग्राहियों द्वारा देय अंशदान की 3 एचपी क्षमता पंप हेतु प्रोसेसिंग शुल्क सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 10 हजार रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 15 हजार रूपए एवं सामान्य वर्ग के लिए 21 रूपए है। इसी प्रकार 5 एचपी पंप क्षमता हेतु प्रोसेसिंग शुल्क सहित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 14800, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 19800 रूपए एवं सामान्य वर्ग के लिए 24800 रूपए है।
सौर सुजला योजना उन सभी किसानों के लिए लाभकारी है, जिनके पास कृषि भूमि उपलब्ध उपलब्ध है, लेकिन कृषक के खेत तक विद्युत विस्तार लाईन का व्यय अत्यधिक होने के कारण वहन नहीं करने की स्थिति में केवल मानसून पर ही निर्भर रहते है। ऐसे कृषक अपने कृषि भूमि के निकट स्थित नदी, नाला अन्य जल स्रोत उपलब्ध होने पर डीजल व कैरोसीन पंप स्थापित कर सिंचाई हेतु जलापूर्ति करते हैं। जलस्त्रोत उपलब्ध नहीं होने पर वर्षा का इंतजार करते है। समय पर वर्षा नहीं होने के कारण कृषकों की फसल बर्बाद हो जाती है। जिससे कृषक आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते है। सौर सुजला योजना अंतर्गत ऐसे कृषकों के यहां खनित बोर, कुंआ, ऐसे जल स्त्रोतों जहां पर्याप्त मात्रा में सरफेस वाटर उपलब्ध है, वहां सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप की स्थापना कार्य किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए शासन की पहल एवं वित्तीय सहयोग से क्रेडा द्वारा कृषकों के यहां खनित बोर, कुंआ या ऐसे जल स्रोतों जहां पर्याप्त मात्रा में सरफेस वाटर उपलब्ध है, वहां सौर सुजला योजना के माध्यम से सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप का स्थापना कार्य किया जा रहा हैं।

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