एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के 5 वर्ष: शिवराज सिंह चौहान का हरित व्रत अब राष्ट्रीय जनआंदोलन की ओर
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के “एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर आज नई दिल्ली में पूसा स्थित ए.पी. शिंदे हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम ने उनके व्यक्तिगत व्रत को राष्ट्रीय हरित जनआंदोलन का स्वर देने की दिशा में ठोस कदमों को जन्म दिया। मंच से उन्होंने अपने विभागों के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत पौधारोपण से करने का निर्देश देने के साथ ही स्वागत में स्मृति चिन्ह के स्थान पर पेड़ लगाकर फोटो भेंट करने की अपील की, वहीं पेड़ बैंक और ‘अंकुर’ जैसे मंच की अवधारणा रखी। समारोह में साध्वी दीदी माँ ऋतंभरा, पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, श्रीमती साधना सिंह और वरिष्ठ पत्रकार श्री आशुतोष झा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस मौके पर प्रारंभ में पूसा परिसर में पौधारोपण किया।
श्री चौहान ने कार्यक्रम में बताया कि यह संकल्प किसी एक दिन की भावनात्मक प्रेरणा से नहीं, बल्कि वर्षों से विकसित पर्यावरणीय दृष्टि से उपजा है। 2017 में उनके नेतृत्व में निकली ऐतिहासिक नर्मदा सेवा यात्रा के समापन पर मध्य प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए, जिसने नदी, जंगल और जलवायु संरक्षण को जनआंदोलन में बदल दिया। इसी क्रम में “अंकुर अभियान” शुरू किया गया, जिसमें नागरिकों को पौधा लगाकर उसकी फोटो/सेल्फी पोर्टल पर अपलोड करने और उसकी रक्षा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया; इस अभियान के माध्यम से लगभग 1 करोड़ पौधे लगाए गए और समाज के विभिन्न वर्ग इस हरित यात्रा से जुड़े। समय के साथ यह पहल मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयाम ले चुकी है; जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, विशेष अवसरों पर लोगों ने पौधे लगाकर इस यात्रा को अपना व्यक्तिगत उत्सव बना लिया है।
श्री चौहान ने मंच से घोषणा की कि:
- कृषि मंत्रालय के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत अब पौधारोपण से करने की अपील।
- आईसीएआर के डीजी से उन्होंने कहा- आईसीएआर के अधीन हर कार्यक्रम, सेमिनार, सम्मेलन व समारोह पेड़ लगाकर ही शुरू करें।
- कृषि विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में पहले पेड़ लगाए जाएंगे और विद्यार्थियों से संकल्प दिलवाया जाएगा कि वे जीवनभर अपने जन्मदिन पर पौधा लगाएंगे।
- केवीके, एग्रीकल्चर कॉलेज और रिसर्च से जुड़े किसी भी आयोजन की शुरुआत पेड़ लगाकर करें ।
उन्होंने कहा कि जब कृषि विभाग अपने हर कार्यक्रम की शुरुआत पेड़ लगाकर करेगा तो सहज ही बड़ी संख्या में पौधे लगते चले जाएँगे और इससे बेहतर शुरुआत होगी।
श्री चौहान ने अपने लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत निर्णय साझा किया कि अब वे अपने स्वागत में फूल-मालाएँ, पटका या स्मृति चिन्ह स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अक्सर सम्मान व्यक्ति से अधिक पद का होता है और पद समाप्त होने पर वही भीड़ गायब हो जाती है; इसलिए इस भ्रम से बाहर निकलना आवश्यक है। किसी भी संस्था या व्यक्ति को यदि उनका स्वागत करना है, तो वह पाँच सौ रुपये के स्मृति चिन्ह की जगह पाँच पौधे लगाए और उसकी फोटो उन्हें भेंट करे – वही उनके लिए सच्चा अभिनंदन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कपड़े के पटके या माला का बाद में कोई उपयोग नहीं होता, जबकि उसी खर्च में लगाए गए पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनदायी धरोहर बन जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि उनके मंत्रालय और अन्य आयोजकों को स्मृति चिन्ह की जगह पेड़ लगाकर फोटो देने की परंपरा अपनानी चाहिए।
श्री चौहान ने पेड़ बैंक की अवधारणा रखी जिसके तहत दानदाता या संस्थाएं बड़ी संख्या में पौधे खरीदने के लिए धन दे सकें। समर्पित संस्था गड्ढा खोदने, पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले, ताकि जिनके पास समय नहीं है, वे भी दान के माध्यम से पौधारोपण में भागीदार बन सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि एक राष्ट्रीय मंच बनाया जाए, जिसका नाम “संभावना” या “अंकुर” हो सकता है, जहां नागरिक जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों की वर्षगांठ, किसी प्रियजन की जयंती या पुण्यतिथि पर पौधा लगाने या लगवाने के लिए पंजीकरण कर सकें। महानगरों में रहने वाले लोग तय राशि (जैसे ₹100–₹150) देकर अपने नाम से पेड़ लगवा सकें, और बदले में उन्हें उस पेड़ की फोटो और स्थान की जानकारी भेजी जाए। उन्होंने कहा कि देश में दानदाताओं की कोई कमी नहीं, कमी केवल काम करने वाले हाथों और व्यवस्थित मंच की है; यदि यह व्यवस्था खड़ी हो जाए तो “एक पौधा प्रति दिन” जैसे संकल्प एक महाअभियान में रूपांतरित हो सकते हैं।
श्री चौहान ने प्रस्ताव रखा कि अभियान में जुड़ने के इच्छुक नागरिकों के लिए एक मिस्ड कॉल नंबर तय किया जाए। जो भी नागरिक इस नंबर पर मिस्ड कॉल दें या संदेश भेजें, उनके लिए आगे चलकर विशेष कार्यक्रम, सामूहिक पौधारोपण और प्रशिक्षण जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जा सकती हैं, ताकि यह आंदोलन मजबूरी नहीं, स्वैच्छिक भावना और प्रेरणा से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों, बच्चों और अन्य वर्गों की सेवा की तरह पेड़ लगाना भी सेवा है, बल्कि संपूर्ण संसार की सेवा है, क्योंकि पेड़ का अर्थ है ऑक्सीजन, जीव-जंतुओं का आश्रय, बारिश व नदियां– संपूर्ण जीवन-श्रृंखला का संरक्षण।
अंत में श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की जनसंख्या 140–144 करोड़ होने के बावजूद वह कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है; यदि इनमें से केवल 2–5 करोड़ लोग भी पौधारोपण आंदोलन से जुड़ जाएँ, तो करोड़ों पेड़ लगाए जा सकते हैं और भारत दुनिया के लिए दिशा-दर्शक बन सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन कितने दिनों का है, यह किसी के हाथ में नहीं, लेकिन जितनी साँसें बची हैं, उन्हें बेहतर दुनिया, अपने देश और अपनी जनता के लिए समर्पित करना हमारे हाथ में है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे न्यूनतम कोई न कोई संकल्प लेकर जाएँ – प्रतिदिन, प्रति माह या विशेष अवसरों पर – और “एक पौधा प्रति दिन” जैसी भावना को अपने-अपने स्तर पर आत्मसात करके जीवन को अर्थपूर्ण बनाएँ। उपस्थितजनों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण का संकल्प लिया।
साध्वी दीदी माँ ऋतंभराजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में वृक्षों को सनातन संस्कृति की आत्मा से जोड़ते हुए भावपूर्ण अपील की कि दिखावटी खर्च, आतिशबाजी और क्षणिक उत्सवों की बजाय लोग अपने शुभ अवसरों पर पौधारोपण को “सच्चा यज्ञ” मानें और हर पौधे की रक्षा को वैसा ही धर्म समझें जैसा हम मंदिर में दिए व्रतों का पालन करते हैं।
डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि श्री शिवराज सिंह चौहान ने जो आंदोलन खड़े किए हैं, वे देश का दृश्य परिदृश्य बदलने, लोगों को सकारात्मकता के साथ जोड़ने और प्रकृति के लिए कार्य करने के लिए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक व चिंतक श्री आशुतोष झा ने इस अवसर पर श्री शिवराज सिंह के पौधारोपण के प्रण को सभी से जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आज की दौड़-भाग भरी जिंदगी में पेड़ हर किसी को सुकून देते हैं, पेड़ केवल वृक्ष नहीं होते, बल्कि वे तो पीढ़ियों को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना पुण्य का काम और सभी को पेड़ों से लगाव होना चाहिए, हमें प्रकृति की रक्षा करना चाहिए।
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