दुर्गा कालेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसरों ने सियान गुड़ी में दिनभर किया एंजाय
0- प्रो. शंभू दयाल ने जन्मदिन पर काटा केक, चर्चा सत्र के बाद कैरम का भी लिया मजा
0- गैस की किल्लत को देखकर पैनिक न हो, समस्या है... दूर हो ही जाएगी: कालेले
रायपुर। हरियाली के बीच सुकून के पल की तलाश किसे नहीं होती। समता कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल के सियान गुड़ी में आने वाले बुजुर्गों को यही कुछ हरियाली और सुकून के पल एक साथ मिलता है। वरिष्ठ जन का एकाकीपन से दूर करती सियान गुड़ी में सोमवार, 16 मार्च को दुर्गा कालेज के रिटायर प्रोफेसरों का ग्रुप पहुंचा। दुर्गा कालेज के प्रो. शंभू दयाल ने मित्रों के साथ केक काटकर अपना जन्मदिन मनाया। साथ ही पूरा दिन सियान गुड़ी में व्यतीत किया और केरम खेलकर, आपस में चटपटी बातें सुन- सुनाकर बिताया।
सियान गुड़ी के प्रभारी मंडल समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि सोमवार की शुरुआत दुर्गा कॉलेज के प्रोफेसर की सम सामयिक चर्चाओं के साथ हुई। वहीं प्रो. शंभूदयाल भारती का जन्मदिन केक काटकर मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य पंडित सीपी मिश्रा ने स्वस्तिवाचन का पाठ कर उनके जन्मदिन को और भी खास बना दिया। आगंतुकों ने वहां कैरम खेला और भोजन के बाद कुछ समय विश्राम भी किया।
सम-सामयिक चर्चाओं के बीच मंडल के वरिष्ठ रंगसाधक व सभासद प्रो. अनिल श्रीराम कालेले ने गैस सिलेंडर की मची मारामारी को लेकर सभी को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि मात्र अफवाह के कारण पैनिक उपभोक्ताओं ने इसकी डिमांड बढ़ा दी है। यही वजह है कि इन दिनों हमें कृत्रिम किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। समस्या आती है तो ही खत्म होने के लिए है। यह परेशानी भी कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी।
दुर्गा कालेज से रिटायर प्राचार्य प्रो. एसएस खनूजा ने कहा कि हमने महाराष्ट्र मंडल के सेवाभावी कार्यों के बीच सियान गुड़ी का संचालन प्रशंसनीय है। आज हम अखबारों में गैस की किल्लत की खबरें रोज पढ़ रहे है। गैस एजेंसी के सामने लंबी कतारें भी देखने को मिल रही है। समय पर गैस नहीं मिलने के डर से जिन्हें अभी आवश्यकता नहीं है, वह भी नंबर लगा रहे हैं, दो-चार दिनों में परेशानी खत्म हो जाएगी।
इस अवसर पर दुर्गा कालेज से रिटायर प्रो. विश्राम सिंह वर्मा, प्रो. सीपी मिश्रा, प्रो. सीएम मुखर्जी, प्रो. आशा राय, प्रो. मदन हाजरा, प्रो. बीएस चंदेल, प्रो. सीएम मुखर्जी, कृषि विवि से रिटायर वैज्ञानिक प्रो. जेएस उरकुरकर उपस्थित थे।











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