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 एकड़ पीछे रासायनिक खाद की मात्रा कटौती से किसानों में आक्रोश , आंदोलन की  तैयारी

-बैठक में ग्राम खौली , टेकारी , कठिया , सोनभट्ठा , फरफौद , भानसोज , लिंगाडीह , संडी , खम्हरिया , संकरी , डिघारी , करहीडीह , मालीडीह , जुगेसर , खमतराई , नरदहा , बरछा , नारा आदि के पंचायत प्रतिनिधि व ग्राम प्रमुख  मौजूद थे
]रायपुर । कृषि विश्वविद्यालय की सलाह पर एकड़ पीछे रासायनिक खाद की मात्रा में शासन द्वारा कटौती किये जाने से किसानों में आक्रोश व्याप्त हो रहा । इसका संकेत बीते बुधवार को ग्राम खौली में आहूत किसानों की बैठक में मिला । अल्प सूचना पर आहूत इस बैठक में मौजूद किसानों ने इसकी वजह से उत्पादन में गिरावट आने व खेती को घाटे की सौदा बन जाने की बात कह शासन - प्रशासन का इस ओर ध्यानाकृष्ट कराने का और अनदेखा करने पर आंदोलनात्मक रुख अपनाने का निर्णय लिया । ध्यानाकर्षण कराने हरेक सोसायटी स्तर पर सोसायटी मुख्यालयों के सामने एक दिनी धरना आयोजित कर ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया ।  
     ज्ञातव्य हो कि आसन्न कृषि वर्ष में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किये गये अनुशंसित उर्वरक मात्रा प्रति एकड़ किसानों को उसके द्वारा धारित कृषि भूमि के आधार पर देने का आदेश कृषि विभाग द्वारा दिया गया है । अनुशंसित मात्रा को कम ठहराते हुये किसान इससे पैदावार में गिरावट की आंशका से आशंकित हैं । इसी वजह से उनमें आक्रोश व्याप्त हो रहा है । बैठक ग्राम खौली के कृषक हिरेश चंद्राकर व कमल चंद्राकर की  पहल पर आयोजित की गयी थी । आमंत्रित किसान नेता पारसनाथ साहू ने  किसानों को आंदोलनात्मक रुख अपनाने का  आव्हान किया । आमंत्रित क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर ने भी इस निर्णय को किसान विरोधी ठहराते हुये निर्णय को निरस्त कराने आंदोलन को ही एकमात्र रास्ता बतलाया ।
आमंत्रित किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने कहा कि पूर्व में देशी खाद का उपयोग कर खेती करने वाले किसानों को अधिक अन्न उपजाओ का‌ नारा दे सत्ताधीशों ने अधिक से अधिक रासायनिक खाद के उपयोग के लिये प्रोत्साहित किया और अब अचानक रासायनिक खाद की मात्रा में कटौती से उत्पादन में गिरावट आएगी, जो कि किसानों के लिये घाटे का सौदा साबित होगा । वर्तमान में देशी / जैविक खाद की पर्याप्त उपलब्धता न होने और इसका प्रयोग करने पर भी कम से कम तीन साल तक उत्पादन पर असर पड़ने की बात कहते हुये शासन - प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराने प्रथम चरण में सोसायटी स्तर पर शांतिपूर्ण धरना कर ज्ञापन सौंपने का सुझाव दिया ।
किसान नेता श्रवण चंद्राकर ने शासन द्वारा जारी आदेश की जानकारी देते हुये इसे किसान हित में नहीं ठहराते हुये पूरे प्रदेश में एकसाथ आंदोलन की आवश्यकता प्रतिपादित की । किसान नेता गोविंद चंद्राकर ने आरंग क्षेत्र में पूर्व में हुये तीन सफल आंदोलनों का जिक्र करते हुये राजनीतिक भेदभाव से परे आंदोलन का आग्रह किया और सफलता  के लिये खौली से शुरू हुई इस मुहिम को पूरे प्रदेश में फैलाने  की बात रखी । दिनेश  ठाकुर ने आंदोलन की रुपरेखा तैयार कर आंदोलन की शुरुआत करने का आग्रह किया । बैठक में आरंग क्षेत्र के सोसायटियों से इस धरना की शुरुआत करने का निर्णय लेते हुये सोसायटियों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों के किसानों को स्वत: स्फूर्त धरना आयोजित करने का आग्रह किया गया । बैठक में ग्राम खौली , टेकारी , कठिया , सोनभट्ठा , फरफौद , भानसोज , लिंगाडीह , संडी , खम्हरिया , संकरी , डिघारी , करहीडीह , मालीडीह , जुगेसर , खमतराई , नरदहा , बरछा , नारा आदि के पंचायत प्रतिनिधि व ग्राम प्रमुख  मौजूद थे । इधर भानसोज के जागरूक युवा किसान द्रोण चंद्राकर ने कल शुक्रवार को भानसोज सोसायटी के सामने धरना आयोजित करने के लिये बैठक किये जाने की जानकारी दी है ।

 

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