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कृषि के लिए एक वरदान है हरी खाद

 कृषि विभाग द्वारा किसानों को दी जा रही है सामयिक सलाह

बालोद/मौजूदा खरीफ वर्ष के आगमन के मद्देनजर कृषि विभाग जिला बालोद द्वारा जिले के कृषकों को खाद, बीज की महत्ता एवं इसके समुचित उपयोग सुनिश्चित कराने हेतु निरंतर समसामयिक सलाह दी जा रही है। इसके अंतर्गत कृषि विभाग के उप संचालक श्री आशीष चन्द्राकर ने जिले के कृषकों को हरी खाद के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि आज के दौर में टिकाऊ खेती की ओर बढ़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि रसायनों के बोझ तले दबती मिट्टी को राहत देने के लिए हरी खाद एक बेहतरीन समाधान बनकर उभरी है। यह न केवल फसलों की पैदावार बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन की उर्वरता को भी सुरक्षित रखती है। मिट्टी बचेगी, तो किसान बचेगा और किसान बचेगा, तो आय में वृद्धि होगा। श्री चंद्राकर ने कहा कि हरी खाद वह सहायक फसल है जिसे मुख्य फसल बोने से पहले खेत में उगाया जाता है और फूल आने की अवस्था में ही उसे हल चलाकर मिट्टी में दवा दिया जाता है। ढैंचा, सनई, लोबिया, मूंग और उड़द जैसी फसलें हरी खाद के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। हरी खाद के तहत कई फसलों का उपयोग किया जाता है जिनमें दलहनी और बिना दलहनी फसलें शामिल होती हैं। हरी खाद के लिए झाड़ियों और पेड़ों की पत्तियों, टहनियों को भी उपयोग में ला सकते हैं, लेकिन इसके लिए विशेष रूप से ढैंचा फसलों का उपयोग किया जाता है। इन फसलों को खेतों में लगाकर भूमि में सुधार किया जाता है। हरी खाद का सबसे बड़ा प्रभाव मिट्टी की भौतिक और रासायनिक संरचना पर पड़ता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) की मात्रा को तेजी से बढ़ाती है। हरी खाद मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जिससे हवा का संचार बढ़ता है और पौधों की जड़े गहराई तक जा पाती हैं। इसके उपयोग से मिट्टी की पानी सोखने की शक्ति बढ़ जाती है, जो सूखे के समय फसलों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है। जब मिट्टी स्वस्थ होती है, तो उत्पादन का बढ़ना निश्चित है। हरी खाद के प्रयोग से पैदावार में 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। यूरिया और अन्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो जाती है, जिससे किसान की फसल की लागत घटती है। मित्र कीटों से फसल का संरक्षण करता है। यह जमीन के भीतर लाभकारी सूक्ष्मजीवों और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करती है।
वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, ऐसे में हरी खाद प्राकृतिक तरीके से मिट्टी को पुनर्जीवित करने का सबसे सुलभ विकल्प है। हरी खाद केवल एक उर्वरक नहीं है, बल्कि यह मिट्टी का उपचार है। यदि किसान हर दूसरे या तीसरे साल अपने खेत में हरी खाद का प्रयोग करें, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि हम समाज को रसायनों से मुक्त, शुद्ध और पौष्टिक अनाज भी उपलब्ध करा पाएंगे। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा खरीफ फसल से पूर्व छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से हरी खाद हेतु ढेंचा 116 क्विंटल एवं मूंग 58 क्विंटल कुल 174 क्विंटल बीज जिले के प्रत्येक विकासखण्डों के कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी में ढेंचा 23.20 व मूंग 11.60 क्विंटल बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर भण्डारण कराया गया है। इच्छुक किसान क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से या सीधे वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से सम्पर्क कर बीज प्राप्त कर सकते है।
 

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