पत्रकार एवं समाजसेवी स्व. कुलदीप निगम को श्रद्धांजलि
62वीं जयंती पर सेवा-संकल्प को किया नमन
रायपुर। पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले स्व. कुलदीप निगम की 62वीं जयंती शुक्रवार को मनाई गई, इस अवसर पर माना स्थित कुलदीप निगम वृद्धाश्रम एवं मानसिक दिव्यांग बालगृह में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। श्रद्धांजलि सभा में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी ने स्व. निगम की प्रतिमा एवं छायाचित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनके सेवा-संकल्प को नमन किया।
जयंती के अवसर पर वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों तथा मानसिक दिव्यांग बालक-बालिकाओं को फल एवं अन्य खाद्य सामग्री का वितरण भी किया गया।

अपने संबोधन में प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि स्व. कुलदीप निगम केवल एक वरिष्ठ पत्रकार ही नहीं, बल्कि समाज के कमजोर, निराश्रित और जरूरतमंद लोगों के सच्चे हितैषी थे। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ समाजसेवा को अपना जीवन-धर्म बनाया। माना कैंप में छत्तीसगढ़ के प्रथम वृद्धाश्रम की स्थापना कर उन्होंने बुजुर्गों की सेवा का जो अभियान शुरू किया, वह पिछले 37 वर्षों से निरंतर मानवता की मिसाल बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि स्व. कुलदीप निगम छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के संस्थापक सदस्य एवं प्रथम महासचिव रहे। उनके प्रयासों से मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की सेवा और संरक्षण का कार्य संगठित रूप से प्रारंभ हुआ। साथ ही उन्होंने ऐसे बहादुर बच्चों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों का जीवन बचाकर साहस का परिचय दिया। उनके प्रयासों से अनेक बच्चों को वीरता पुरस्कार प्राप्त हुए। मोहन तिवारी ने कहा कि स्व. निगम द्वारा बोया गया सेवा का बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है और उनकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
इस अवसर पर कुलदीप निगम वृद्धाश्रम के अध्यक्ष राजेन्द्र निगम, सचिव बिमल घोषाल, प्रीति निगम, पारूल चक्रवर्ती, लीला यादव, सत्यम निगम सहित वृद्धाश्रम एवं बालगृह के कर्मचारी उपस्थित रहे।
वही स्व. कुलदीप निगम के पैतृक गांव नर्रा स्थित शासकीय कुलदीप निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं समाजसेवा के कार्यों को स्मरण किया।












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