रूठी हमसे क्यों गौरैया...
-लेखिका- डॉ. दीक्षा चौबे
- दुर्ग ( वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद)
20 मार्च विश्व गौरैया दिवस पर एक बाल-सजल
रूठी हमसे क्यों गौरैया ।
निशदिन आती नहीं मड़ैया ।।
भूख-प्यास से व्याकुल हो क्या ।
कब से किया न ता ता थैया ।।
दाना लेकर आई हूँ मैं ।
पानी लेकर आते भैया ।।
मेरी छत पर नीड़ बनाना ।
वहाँ आम की शीतल छैया ।।
देखो पंखे से बच रहना ।
उड़ मत ,आना पैया-पैया ।।
मनभावन तुम खेल दिखाना ।
पानी में कर छप्पक-छैया ।।
बच्चों का मैं ध्यान रखूँगी ।
जैसे रखती मेरी मैया ।।



.jpg)






Leave A Comment