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कृषि अवशेष से बनेगी अमेज़न की नई पैकेजिंग, IIT रुड़की के साथ समझौता

   नई दिल्ली।   अमेज़न इंडिया ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की घोषणा की है। इस सहयोग के तहत कृषि अवशेषों से ऐसे नए पैकेजिंग मटीरियल विकसित किए जाएंगे, जो पारंपरिक लकड़ी आधारित कागज और प्लास्टिक पैकेजिंग का टिकाऊ विकल्प बन सकें। परियोजना का उद्देश्य गैर-लकड़ी आधारित कागज तकनीक विकसित करना है, ताकि कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय उपयोग में लाया जा सके और वर्जिन वुड पल्प पर निर्भरता घटाई जा सके। प्रस्तावित पैकेजिंग हल्की, मजबूत, पूरी तरह रीसाइकल योग्य और घरेलू स्तर पर कंपोस्ट की जा सकने वाली होगी।

 शोध के तहत गेहूं की पराली और बगास (गन्ने की खोई) जैसे फसल अवशेषों से उच्च गुणवत्ता वाला पल्प तैयार किया जाएगा। इससे ऐसे पेपर मेलर बनाए जाएंगे, जिनकी मजबूती और टिकाऊपन पारंपरिक पैकेजिंग के बराबर हो। यह पहल पराली जलाने की समस्या को कम करने के साथ-साथ आयातित वुड पल्प पर निर्भरता घटाने और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर सृजित करने में सहायक हो सकती है। IIT रुड़की के पेपर एंड पैकेजिंग टेक्नोलॉजी विभाग के साथ यह परियोजना शुरुआती तौर पर 15 महीनों तक लैब स्तर पर परीक्षण और विकास के चरण में रहेगी। परिणाम सफल रहने पर अमेज़न औद्योगिक परीक्षण, प्रक्रिया सत्यापन और व्यावसायिक उत्पादन को अगले वर्ष के मध्य या अंत तक आगे बढ़ाने में सहयोग करेगा।
 अमेज़न इंडिया में वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशंस) अभिनव सिंह ने कहा कि कंपनी भारत का सबसे तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद ऑपरेशंस नेटवर्क तैयार कर रही है और इसे अधिक टिकाऊ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल करीब 500 मिलियन टन कृषि कचरा उत्पन्न होता है। यदि इसे पैकेजिंग में बदला जाए, तो सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूती मिलेगी और पारंपरिक संसाधनों पर निर्भरता घटेगी।
 IIT रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है। यह सहयोग स्वच्छ भारत, स्टार्टअप इंडिया और राष्ट्रीय संसाधन दक्षता नीति जैसे अभियानों के अनुरूप है। कृषि अवशेषों को बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग में बदलकर पराली जलाने और वर्जिन मटीरियल पर निर्भरता जैसी दो बड़ी चुनौतियों से एक साथ निपटा जा सकता है। आईआईटी रुड़की, सहारनपुर कैंपस के पेपर और पैकेजिंग टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की INNOPAP लैब के प्रोफेसर विभोर कुमार रस्तोगी और डॉ. अनुराग कुलश्रेष्ठ इस रिसर्च प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे।
 पैकेजिंग कम करने के प्रयासों के तहत अमेज़न इंडिया देश में 50% से अधिक ऑर्डर या तो मूल पैकेजिंग में या कम पैकेजिंग के साथ भेजता है। कंपनी 300 से अधिक शहरों में प्रोडक्ट पैकेजिंग के माध्यम से डिलीवरी करती है। वर्ष 2019 से अमेज़न इंडिया ने अपने फुलफिलमेंट सेंटर्स में सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया है। ‘द क्लाइमेट प्लेज’ के तहत अमेज़न ने 2040 तक अपने वैश्विक संचालन में नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। कंपनी कार्बन-मुक्त ऊर्जा में निवेश, पैकेजिंग में नवाचार, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के इलेक्ट्रिफिकेशन, सर्कुलैरिटी में सुधार और AI के उपयोग पर तेजी से काम कर रही है। इसके अलावा, अमेज़न ने 2027 तक भारत में अपने प्रत्यक्ष संचालन में उपयोग होने वाले पानी से अधिक पानी समुदायों को लौटाने का भी संकल्प लिया है।

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