राज्यसभा में कांग्रेस सांसद ने पत्रकारों के लिए रेलयात्रा किराया रियायत बहाल करने की मांग की
नयी दिल्ली. राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस के एक सांसद ने रेल यात्रा किराये में पत्रकारों को दी जाने वाली रियायत को बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि पत्रकारों, विशेषकर दूरदराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकारों के सीमित संसाधनों को देखते हुए यह सुविधा दिया जाना लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस के नीरज डांगी ने कहा कि कोविड 19 महामारी से पहले पत्रकारों को दी जाने वाली यात्रा किराया रियायतें महामारी के दौरान स्थगित कर दी गयी थीं। उन्होंने कहा कि यह उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए एक अस्थायी एवं व्यावहारिक निर्णय था। उन्होंने कहा कि खेद का विषय है कि देश में सामान्य स्थिति बहाल होने तथा आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों के हर तरह से सुचारू रूप से संपन्न होने एवं अन्य श्रेणियों को दी जाने वाली रियायतें पुन: लागू होने के बावजूद पत्रकारों को दी जाने वाली यह महत्वपूर्ण सुविधा आज तक बहाल नहीं की गयी। डांगी ने कहा कि पत्रकारों का काम केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं है बल्कि वे देश के दूरदराज के इलाकों में जाकर समाज के लोगों की विभिन्न समस्याओं को समझते हैं और उन्हें देश एवं सरकार के समक्ष लाते हैं। कांग्रेस सदस्य ने कहा कि कई बार उन्हें सीमित संसाधनों, जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और समयबद्ध दबावों में काम करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में भारतीय रेलवे द्वारा दी जाने वाली रियायतें किसी प्रकार का विशेषाधिकार न होकर उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक सुविधा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित तभी सुनिश्चित हो सकते हैं जब पत्रकार निर्भय, स्वतंत्र और सुलभ साधनों के साथ काम कर सकें। कांग्रेस सदस्य ने कहा कि पत्रकारों को यात्रा सुविधा से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्य क्षमता को सीमित करता है और यह स्थिति लोकतंत्र की भावनाओं के अनुरूप नहीं कही जा सकती। उन्होंने कहा कि छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकार इस निर्णय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने पत्रकारों को दी जाने वाली यह सुविधा बहाल करने की मांग की।









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