सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना- “पीएम राहत” का शुभारंभ किया
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेवा तीर्थ शिफ्ट होने के तुरंत बाद लिए अपने प्रथम निर्णय में पीएम राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस उपचार) योजना के शुभारंभ को स्वीकृति प्रदान की। यह निर्णय—सेवा, करुणा और कमजोर नागरिकों की सुरक्षा पर आधारित शासन के दृष्टिकोण को प्रतिबिम्बित करता है। यह कदम सरकार की इस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है कि सड़क दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सीय सहायता के अभाव में किसी भी व्यक्ति को जान नहीं गंवानी पड़े।
भारत में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बहुत अधिक संख्या में मौते होती हैं, जिनमें से अनेक को समय पर चिकित्सीय सहायता प्रदान कर टाला जा सकता है। अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यदि दुर्घटना पीड़ितों को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए, तो लगभग 50% मौतों को टाला जा सकता है। सेवा तीर्थ से पीएम राहत को स्वीकृति देकर प्रधानमंत्री ने जीवनरक्षक हस्तक्षेप, अस्पतालों के लिए वित्तीय सुनिश्चितता और दुर्घटना पीड़ितों के लिए सुव्यवस्थित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने को प्राथमिकता दी है।
आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकरण सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुँचाया जाना सुनिश्चित करता है। सड़क दुर्घटना पीड़ित, राह-वीर या दुर्घटना स्थल पर उपस्थित कोई भी व्यक्ति 112 डायल करके निकटतम नामित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकता है और एम्बुलेंस सहायता का अनुरोध कर सकता है। इससे आपातकालीन सेवाओं, पुलिस प्राधिकरणों और अस्पतालों के बीच त्वरित तालमेल संभव हो सकेगा।
योजना के अंतर्गत, किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों की अवधि तक प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार प्रदान किया जाएगा। जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में अधिकतम 24 घंटे तक तथा जीवन के लिए घातक मामलों में अधिकतम 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन होगी।
पीएम राहत को एक सुदृढ़, प्रौद्योगिकी-आधारित ढाँचे के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ईडीएआर) प्लेटफ़ॉर्म को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (टीएमएस 2.0) के साथ एकीकृत किया गया है। यह एकीकरण दुर्घटना की जानकारी देने से अस्पताल में भर्ती, पुलिस प्रमाणीकरण, उपचार प्रदान करने, दावे की प्रक्रिया और अंतिम भुगतान तक निर्बाध डिजिटल संपर्क सुनिश्चित करता है। निर्धारित समय-सीमा के भीतर — जीवन को खतरे में नहीं डालने वाले मामलों में 24 घंटे के भीतर तथा जीवन के लिए घातक मामलों में 48 घंटे के भीतर — पुलिस की पुष्टि आवश्यक होगी, ताकि आपातकालीन उपचार निर्बाध रूप से जारी रहने के साथ ही जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना कोष (एमवीएएफ) के माध्यम से की जाएगी। जिन मामलों में दोषी वाहन बीमित होगा, उनमें भुगतान सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा किए गए अंशदान से किया जाएगा। जबकि बिना बीमा वाले तथा हिट एंड रन मामलों में भुगतान भारत सरकार द्वारा बजटीय आवंटन के माध्यम से किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा स्वीकृत दावों का भुगतान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा, जिससे अस्पतालों को वित्तीय सुनिश्चितता प्राप्त होगी और निर्बाध उपचार को प्रोत्साहन मिलेगा।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों की शिकायतों का निवारण जिला स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए, जिला कलेक्टर / जिला मजिस्ट्रेट / उपायुक्त की अध्यक्षता वाली जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित एक शिकायत निवारण अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा।
सेवा तीर्थ से पीएम राहत की स्वीकृति और शुभारंभ नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण का प्रतीक है — जहाँ सुशासन का अर्थ समयबद्ध कार्रवाई, करुणामय प्रतिक्रिया और जीवन की रक्षा से है। पीएम राहत किसी भी दुर्घटना पीड़ित का वित्तीय अड़चनों के कारण जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रहना सुनिश्चित करते हुए सड़क दुर्घटना पीड़ितों का जीवन बचाने तथा भारत की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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